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Friday, February 13, 2026
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एयर इंडिया की फ्लाइट की तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग, बम की धमकी के बाद उतारा गया

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Air India
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तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (Thiruvananthapuram International Airport) पर आज सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एयर इंडिया (Air India) की फ्लाइट के पायलट (Pilot) ने बम की धमकी के बारे में बताया। आनन-फानन में एयरपोर्ट पर फुल इमरजेंसी (Full Emergency) घोषित कर दी गई। यात्रियों को सुरक्षित फ्लाइट से निकाला गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज मुंबई से तिरुवनंतपुरम जा रही Air India फ्लाइट को ये धमकी मिलने के बाद तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (Thiruvananthapuram International Airport) पर फुल इमरजेंसी (Full Emergency) घोषित कर दी गई। फ्लाइट सुबह करीब 8 बजे तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर उतरी और उसे आइसोलेशन बे (Isolation Bay) में ले जाया गया। यात्रियों को फ्लाइट से निकाला गया है।

Air India फ्लाइट के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट के पास पहुंचने पर पायलट (Pilot) ने बम की धमकी मिलने की जानकारी सुबह साढ़े सात बजे दी। इसके बाद सुबह 7 बजकर 36 मिनट पर हवाई अड्डे पर फुल इमरजेंसी (Full Emergency) घोषित की गई। अधिकारी ने बताया कि फ्लाइट में 135 यात्री सवार थे। उन्होंने बताया कि धमकी की उत्पत्ति और अन्य जानकारी का इंतजार है।

अनुपम दुबे के गुर्गों का आतंक: भोले-भाले किसानों की जमीन हड़पने का बड़ा खेल

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद, 22 अगस्त। कुख्यात माफिया अनुपम दुबे के गुर्गे विमलेश दुबे और रच्छू ठाकुर ने अपनी दबंगई का सहारा लेकर दर्जन भर किसानों की जमीनों को हड़प लिया और नेकपूर खुर्द का सरकारी तालाब भी कब्जे में कर लिया। ये गुर्गे, जो जमीनों पर अवैध कब्जा और धोखाधड़ी के मामलों में लिप्त हैं, ने शहर के कई संभ्रांत व्यक्तियों से लाखों रुपये की ठगी की है।
विमलेश दुबे और रच्छू ठाकुर ऊर्फ अनूप राठौर ने अपने गैंग के बाल व्यूट फर्रुखाबाद के कई भोले-भाले किसानों को धोखे में रखकर उनकी जमीनें बेच दीं। इनकी धोखाधड़ी केवल यहीं नहीं रुकी; इन्होंने नेकपूर खुर्द गांव में स्थित सरकारी तालाब को भी कब्जा कर लिया, जो कि कानूनी तौर पर सरकारी संपत्ति है।
इन अपराधियों ने फर्रुखाबाद के कई सम्मानित और संभ्रांत लोगों से भी ठगी की। लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर ये लोग अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस ने इन गुर्गों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, लेकिन इन अपराधियों में कानून का कोई डर नहीं है। इसके उलट, ये लोग अब भाजपा नेताओं के पास जाकर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वे किसी भी कानूनी कार्रवाई से बच सकें।
इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता ने जनता में गुस्सा भर दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि कब इन माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि इलाके में शांति और सुरक्षा बहाल हो सके।
यह पूरी स्थिति फर्रुखाबाद में प्रशासन की विफलता और माफियाओं की बढ़ती ताकत का स्पष्ट उदाहरण है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन इन अपराधियों पर लगाम कसने में सक्षम होंगे या नहीं।
पूर्व बसपा नेता करते रहे पंचायतें
अनुपम दुबे के इन शातिर गुर्गों की नगर के एक पूर्व बसपा नेता (अब भाजपा में) अब तक पैरवी और पंचायतें करते रहे,उनका इस गैंग से पुराना नाता है, लेडी डॉन से लेकर कई बड़े मामलों में वो और रच्छू ठाकुर एक मंच पर रहे,नेकपुर में की गई अवैध प्लाटिंग और कब्जों में भी उनका आंतरिक हिस्सा रहा। पुलिस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है, जोन के आलाधिकारी पूरे मामले पर नजर गड़ाए हैं।
स्थानीय राजस्व कर्मी भी इनके इशारे पर काम कर मोटी रकम डकार सरकारी तालाब को पटवा दिए,इनके खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने और स्थानीय लोगों की दी गई शिकायतों को भी दबा दिया गया। इन माफिया के गुर्गों के कारनामों और इनके गैंग की गहन जांच के लिए शासन स्तर से विशेष टीम का गठन किए जाने की तैयारी है,जो विमलेश दुबे और उसके साथियों की संपत्तियों की जांच भी करेगी।

कजरी तीज 22 अगस्त को, जानें शुभ मुहूर्त

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Kajari Teej
Kajari Teej

इस साल 22 अगस्त, गुरुवार के दिन कजरी तीज (Kajari Teej) का व्रत सुहागिनें रखेंगी। पति की लंबी आयु की कामना कर शिव जी और मां पार्वती की आराधना की जाएगी। कजरी तीज को बड़ी तीज, कजली तीज और सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। ये तीज हर साल सावन खत्म होने के पश्चात भाद्रपद कृष्ण तृतीया तिथि पर पड़ती है। 22 अगस्त के दिन उत्तर भाद्रपद नक्षत्र और धृति योग का संयोग रहेगा, जो शुभ माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण रात 10 बजे के करीब होगा। ऐसे में कजरी का निर्जल व्रत रखने से महिलाओं को पुण्य फल की प्राप्ति होगी। आइए जानते हैं कजरी तीज की पूजा की विधि, मुहूर्त, उपाय, पारण समय, पूजा-सामग्री व सबकुछ-

कजरी तीज (Kajari Teej) की पूजा कैसे करें?

प्रात:काल उठकर स्नान कर लें और साफ वस्त्र धारण करें। पूजा घर, मंदिर या पूजा स्थल पंडाल को गंगाजल से शुद्ध करें। लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। अब शिव परिवार की तस्वीर, पार्थिव शिवलिंग, या मिट्टी से शिव परिवार बनाकर स्थापित करें। गणेश जी का ध्यान करें। व्रत रखना ह तो संकल्प लें। शिव जी का पंचामृत से अभिषेक करें। सभी देवी-देवताओं का जलाभिषेक करें।

चंदन का तिलक लगाकर केसर, वस्त्र, अक्षत, फल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, और फूल अर्पित करें। मां पार्वती को चुनरी, सिंदूर समेत शृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं और उनका शृंगार करें। धूप-दीप जलाएं। शिव-पार्वती की कथा का पाठ करें। खीर, दही, पंचमेवे या हलवा का भोग लगाएं। श्रद्धा के साथ आरती करें। पुष्प हाथ में लेकर अपने पति व सन्तान की रक्षा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, जिससे पूरे साल भर घर में सुख शान्ति बनी रहती है। पूजा समाप्त करने के बाद क्षमा प्रार्थना करें।

पूजा-सामग्री

गाय का दूध, दही, गंगाजल, पीला वस्त्र, कच्चा सूत, केले के पत्ते, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद मदार का पुष्प, जनेऊ, नारियल, सुपारी, अक्षत या चावल, दूर्वा, रोली, अबीर-गुलाल, चन्दन, भस्म, सफेद चन्दन, चौकी, शृंगार का समान, मिठाई, दीपक इत्यादि।

कजरी तीज (Kajari Teej) का खास महत्व

कजरी तीज (Kajari Teej) को कजली तीज और बड़ी तीज भी कहते हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के कई इलाकों में कजरी तीज को बूढ़ी तीज व सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। कजरी तीज महिलाओं का पर्व है। कजरी तीज कृष्ण जन्माष्टमी के पांच दिन पहले मनाई जाती है। कजरी तीज पर महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।

कजरी तीज (Kajari Teej) पूजा-मुहूर्त

तृतीया तिथि प्रारम्भ – अगस्त 21, 2024 को 05:06 पी एम बजे

तृतीया तिथि समाप्त – अगस्त 22, 2024 को 01:46 पी एम बजे

बिना इस 1 काम से नहीं होगा व्रत पूरा

कजरी तीज (Kajari Teej) का व्रत बिना चंद्रमा को अर्घ्य दिए अधूरा माना जाता है। इसलिए पूजा समाप्त करने के बाद शुद्ध जल में कच्चा दूध मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें और नमन करें।

हेमंत से बगावत के बाद चंपाई सोरेन ने किया नई पार्टी बनाने का ऐलान

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Champai Soren
Champai Soren

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता चंपाई सोरेन (Champai Soren) के सुर बागी हो गए हैं। उनके हाल के एक ट्वीट ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी थी। हर कोई ये सोच रहा था कि चंपाई का अगला कदम क्या होगा? अब पूर्व सीएम चंपाई सोरेन (Champai Soren)  ने नई घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि वह राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे और नई पार्टी बनाएंगे। उन्होंने गठबंधन के लिए भी दरवाजे खुले रखे हैं। चंपाई ने कहा कि मैंने तीन विकल्प बताए थे, रिटायरमेंट, संगठन या दोस्त। मैं रिटायर नहीं होऊंगा। मैं पार्टी को मजबूत करूंगा, नई पार्टी बनाऊंगा।

पूर्व सीएम चंपाई सोरेन (Champai Soren)  ने कहा कि मैं राजनीति से संन्यास नहीं लूंगा। मैंने तीन विकल्प बताए थे, रिटायरमेंट, संगठन या दोस्त। मैं रिटायर नहीं होऊंगा, मैं पार्टी को मजबूत करूंगा, नई पार्टी बनाऊंगा और अगर रास्ते में कोई अच्छा दोस्त मिलता है, तो उसके साथ आगे बढ़ूंगा।

आसान नहीं कल्याण सिंह होना, चुनना पड़ता है संघर्ष, चुनौती, त्याग और बलिदान का मार्गः सीएम योगी

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CM Yogi paid tribute to Kalyan Singh
CM Yogi paid tribute to Kalyan Singh

लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) बुधवार को स्व. कल्याण सिंह (Kalyan Singh) की तृतीय पुण्यतिथि पर आयोजित ‘हिंदू गौरव दिवस’ के दूसरे संस्करण के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता की ओर से बाबूजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में सीएम योगी ने कल्याण सिंह के संघर्षों और चुनौतियों की यात्रा को शिखर से शून्य की यात्रा करार दिया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति कल्याण सिंह अचानक नहीं बन जाता। कल्याण सिंह बनने के लिए संघर्ष, चुनौती, त्याग और बलिदान का मार्ग चुनना पड़ता है।

चुनौती और संघर्ष जब सामने होता है तो त्याग और बलिदान का जज्बा पैदा होता है, तब कोई भी ताकत आपको झुका नहीं सकती, आपका बाल भी बांका नहीं कर सकती है। एक अपार जनआस्था और विश्वास आपके साथ खड़ा होता है। इस अपार जनविश्वास के प्रतीक श्रद्धेय कल्याण सिंह जी बने। उन्होंने उस समय की ताकतों का मुकाबला किया, विपरीत परिस्थितियों में काम किया, लेकिन श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के मार्ग से कतई नहीं हटे। अंततः परिणाम आज हमारे सामने है। आज उसकी सुखद अनुभूति पूरी दुनिया में रहने वाले सनातन धर्मावलंबी कर रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में समाजवादी पार्टी और इसके मुखिया पर भी हमला किया और पीडीए पर गंभीर सवाल उठाए।

जन्म से ही संघर्ष और चुनौतियों से मुकाबला करना सीख लिया

सीएम योगी (CM Yogi) ने बाबू जी (कल्याण सिंह) को उनकी तीसरी पुण्ण तिथि पर कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि अलीगढ़ के एक सामान्य परिवार में जन्म लेने वाले ‘बाबूजी’ ने शुरुआत से ही संघर्ष और चुनौतियों का मुकाबला करना सीख लिया था। पहले किसान और फिर शिक्षक, आरएसएस के स्वयंसेवी, भाजपा कार्यकर्ता के रूप में अपनी यात्रा प्रारंभ करने वाले बाबू जी की यात्रा शून्य से शिखर तक की यात्रा है। वे विधायक भी थे, सांसद भी थे। वह प्रदेश सरकार में कांग्रेस की दमनकारी नीतियों के खिलाफ और आपातकाल के खिलाफ आंदोलन के दौरान जेल में भी बंद हुए थे। आपातकाल के बाद बनी सरकार में वह स्वास्थ्य मंत्री भी थे। राम जन्मभूमि आंदोलन के बाद उमड़ी हुई आस्था में पहली बार भारतीय जनता पार्टी जब प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाती है तो वह मुख्यमंत्री भी बने।

1997 में वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने और फिर हिमांचल और राजस्थान के राज्यपाल के रूप में संवैधानिक पद के दायित्व का कुशलतापूर्वक निर्वहन करते हुए उन्होंने अपनी अंतिम यात्रा पूरी की।रामजन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका का ही परिणाम आज हम सबके सामने है। दुनिया में कौन सी श्रमिक और वंचित जातियां होंगी, जिन्होंने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अपनी आंखों से नहीं देखा। मानवता का जहां दमन हुआ है, श्रीरामजन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण उनके लिए आशा की एक किरण है। इस आशा की किरण की शुरुआत तब हुई थी जब ‘बाबूजी’ ने कहा था कि सरकार जाए तो जाने दिया जाए, लेकिन रामभक्तों पर गोली नहीं चलाएंगे।

बाबू जी ने नहीं किया मूल्यों और आदर्शों के साथ कोई समझौता

सीएम योगी (CM Yogi)  ने कहा कि उनका जीवन भारत की राष्ट्रीयता के प्रति समर्पित था। उन्होंने जातिवाद को प्रश्रय नहीं दिया। समाज का विभाजन करने वाली ताकतों से उन्होंने दूरी बनाए रखी। उन्होंने मूल्यों पर जीवन जिया, राजनीति को आदर्शों को माध्यम बनाया। राजनीति उनके लिए सत्ता और भोग का माध्यम नहीं बनी, राजनीति उनके लिए सौदेबाजी का जरिया नहीं बना, राजनीति उनके लिए अपने स्वार्थों की पूर्ति का माध्यम कभी नहीं बन पाई। वो मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, सांसद, राज्यपाल किसी भी रूप में रहे हों, लेकिन मूल्यों और आदर्शों के साथ कोई समझौता नहीं किया। आरएसएस की पाठशाला में जो दीक्षा उन्होंने सीखी थी, उसका आजीवन पालन करते रहे। इसलिए वो कल्याण सिंह बन पाए।इसलिए कोटि कोटि कार्यकर्ताओं के विश्वास के प्रतीक बन पाए।

हिंदू समाज को बंटने नहीं देना है

श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में कल्याण सिंह के योगदान को याद करते हुए सीएम योगी ने कहा कि याद करिए 30 अक्तूबर 1990 और 2 नवंबर 1990 में अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं और उस समय की सरकार एक तरफ हिंदू समाज को आपस में बांटने का कार्य कर रही थी तो दूसरी तरफ रामभक्तों पर गोलियां बरसा रही थी। तब अडिग चट्टान बनकर उनके सामने टकराने वाला व्यक्तित्व श्रद्धेय ‘बाबूजी’ कल्याण सिंह थे। तब उन्होंने कहा था कि हम हिंदू समाज को बंटने नहीं देंगे। ये जातीयता का जहर घोलने वाले भारत को तोड़ने का काम कर रहे हैं। 30 अक्तूबर और 2 नवंबर 1990 की तिथियां भारत के इतिहास में काले अध्याय के रूप में लिखी जाएंगी, जब अयोध्या में निर्ममतापूर्वक रामभक्तों का लहू बहाया गया था। तब भी श्रद्धेय बाबू जी ने ही आवाज मुखर की थी। 6 दिसंबर 1992 को जब केंद्र सरकार का दबाव था कि अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाई जाए तब बाबू जी ने कहा था कि केंद्र चाहे तो हमारी सरकार बर्खास्त कर दे, नहीं तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं, लेकिन रामभक्तों पर हरगिज गोलियां नहीं चलाई जाएंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री पद ठुकरा कर संघर्ष का रास्ता चुना।

हिंदू भारत की सुरक्षा की गारंटी है

सीएम योगी (CM Yogi)  ने कहा कि आज जब हम लोग बाबू जी की तीसरी पुण्यतिथि को ‘हिंदू गौरव दिवस’ के रूप में मना रहे हैं तो हमें हिंदू एकता के महत्व को समझना पड़ेगा। हिंदू कोई जाति, मत और मजहब नहीं है। यह किसी संकीर्ण दायरे का माध्यम नहीं है। यह भारत की सुरक्षा की गारंटी है, ये भारत की एकता और एकाग्रता की गारंटी है। याद रखना जब तक भारत का मूल सनातन हिंदू समाज मजबूत है भारत की एकता और अखंडता को दुनिया की कोई ताकत चुनौती नहीं दे सकती। लेकिन जिस दिन यह एकता खंडित होगी उस दिन भारत को फिरके-फिरके में बांटने की विदेशी साजिशें सफल होती दिखाई देंगी। हमें इन साजिशों को सफल नहीं होने देना है। जो लोग आपको बांटने का काम कर रहे हैं, इनके चेहरे, चाल और चरित्र अलग है। ये बोलेंगे कुछ,दिखाएंगे कुछ और करेंगे कुछ। जब भी इन्हें अवसर मिला, उत्तर प्रदेश को इन्होंने दंगे की आग में झोंका है। जब भी इन्हें अवसर मिला है, इन्होंने हिंदुओं के नायकों को अपमानित किया है।

माफिया की मौत पर सपा के मुखिया मनाते हैं मातम

सीएम योगी (CM Yogi) ने विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया पर हमला करते हुए कहा कि कौन नहीं जानता है कि श्रद्धेय बाबू जी के दिवंगत होने पर श्रद्धांजलि देने जाने की बात तो दूर समाजवादी पार्टी के मुखिया के मुंह से संवेदना का एक भी शब्द नहीं निकला। वहीं प्रदेश का एक दुर्दांत माफिया मरा था तो फातिया पढ़ने वो उसके गांव तक चले गए थे। क्या यही पीडीए है? सैकड़ों हिंदुओं के खून से जिनके हाथ रंगे हुए थे, ऐसे माफिया के मरने पर ऐसे मातम मना रहे थे, जैसे इनका कोई सगा चला गया हो। यही पीडीए का वास्तविक चरित्र है।

अयोध्या में एक निषाद बालिका के साथ, कन्नौज में और लखनऊ में जो घटनाएं घटित हुईं, यही इनका चेहरा हैं। जब तक इनका एकजुट होकर मुकाबला नहीं करेंगे, ये लोग प्रदेश की जनता को ऐसे ही बेवकूफ बनाते रहेंगे। छलते रहेंगे। आज ये परेशान हैं, क्योंकि उनकी गुंडागर्दी, अराजकता की दुकानें डबल इंजन की सरकार ने बंद कर दी हैं। उनके एक-एक षड़यंत्र को हर एक पग पर रोक दिया गया है। प्रदेश की जनता को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि प्रदेश में जीरो टॉलरेंस की जिस नीति को 1991 में श्रद्धेय बाबू जी ने लागू किया था, वो आज भी लागू है। डबल इंजन की ये सरकार प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में अपराध और अपराधियों, भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ काम करेगी, चाहे इसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े।

प्रदेश की जनता जनार्दन का बाल भी बांका नहीं होने दिया जाएगा। हमें श्रद्धेय बाबू जी की इस तीसरी पुण्य तिथि पर यह संकल्प लेना ही होगा कि आजीवन जिन मूल्यों और आदर्शों के लिए श्रद्धेय बाबू जी का जीवन समर्पित था, उसके लिए हम कार्य करें। जो सपना बाबू जी का था उसे भाजपा और उनकी विरासत मजबूती से आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। उनके मूल्यों और आदर्शों से विचलित हुए बगैर निरंतर आगे बढ़ने की तैयारी करनी चाहिए।

इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडे, पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्य सभा सांसद डॉ दिनेश शर्मा, उन्नाव के सांसद स्वामी साक्षी महाराज, प्रदेश सरकार के मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, कार्यक्रम के आयोजक पूर्व सांसद राजवीर सिंह (राजू भइया), प्रदेश सरकार में मंत्री संदीप सिंह एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

राशन कार्ड धारकों से जबरदस्ती सामान बेचना अब पड़ेगा महंगा, कोटेदारों पर होगी कड़ी कार्रवाई

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद, 21 अगस्त। सरकारी राशन वितरण के दौरान कोटेदारों द्वारा राशन कार्ड धारकों को जबरन चाय पत्ती, साबुन, तेल, और अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर करने की बढ़ती शिकायतों पर शासन ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस मामले में शीर्ष अधिकारियों तक लगातार शिकायतें पहुंचने के बाद, प्रमुख सचिव ने कड़ी नाराजगी जताते हुए ऐसे कोटेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कई लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की थी कि सरकारी राशन कोटा की दुकानों पर कुछ कोटेदार आईएसआई मार्का के बिना ही चाय पत्ती, सर्फ, साबुन, तेल, मच्छर अगरबत्ती, और हींग की डिब्बी जबरन दे रहे हैं। इन शिकायतों के मद्देनजर, शासन ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और कोटेदारों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
शासन के प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे कोटेदारों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए, जो उपभोक्ताओं को जबरदस्ती सामान खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं।