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Sunday, April 12, 2026
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पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ ने कोतवाली कायमगंज का किया औचक निरीक्षण

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साफ-सफाई, अभिलेख व्यवस्था, हवालात और अपराध नियंत्रण पर दिए सख्त दिशा-निर्देश

फर्रुखाबाद: पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ (SP Fatehgarh) द्वारा कोतवाली कायमगंज (Kaimganj police station) का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने थाने की साफ-सफाई, अभिलेखों के रख-रखाव, CCTNS कार्यालय, हवालात, मैस, बैरकों सहित अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एसपी ने थाना क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों की जानकारी लेते हुए एचएस (हिस्ट्रीशीटर), टॉप-10 अपराधियों और सक्रिय अपराधियों की सूची की समीक्षा की और उनके विरुद्ध निरंतर निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए।

दिशा-निर्देश:

बीट प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश

शस्त्रों का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करने की आवश्यकता

यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के आदेश

अपराध नियंत्रण के लिए अभियानात्मक कार्रवाई में तेजी लाने की बात कही

पुलिस अधीक्षक ने कोतवाली में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को कर्तव्य के प्रति सजग रहते हुए आम जनता के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार बनाए रखने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि थाने की छवि आम जनता की नजर में कानून व्यवस्था की असली तस्वीर होती है, इसलिए थानों को आदर्श और पारदर्शी बनाया जाए। निरीक्षण के अंत में उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और प्रत्येक कार्य में प्रोफेशनल अप्रोच व जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

गौमाता को राजमाता घोषित करने पर एकनाथ शिंदे का नाम लिखा जाएगा स्वर्णाक्षरों में

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Eknath Shinde
Eknath Shinde

– शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती करेंगे सम्मान,
– चांदी के पन्नों पर दर्ज होगी गौरवगाथा

मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) को गौमाता (mother cow) को “राजमाता” (Rajmata) का दर्जा देने के ऐतिहासिक निर्णय के लिए विशेष सम्मान दिया जाएगा। यह सम्मान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा प्रदान किया जाएगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि “गौमाता को राजमाता घोषित करना केवल एक राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से भी ऐतिहासिक कदम है।

यह काम भारत सरकार को करना चाहिए था, जिसे एकनाथ शिंदे ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में पूरा किया।” भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की 101वीं जयंती के अवसर पर एकनाथ शिंदे का नाम स्वर्णाक्षरों में चांदी के पन्नों पर लिखा जाएगा। यह सम्मान मुंबई में एक विशेष कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा।

बताते चलें कि शंकराचार्य वर्तमान में गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चला रहे हैं। इसके तहत 33 करोड़ गौ-प्रतिष्ठा महायज्ञ भी जारी है। उन्होंने बताया कि भारत के राष्ट्रीय चिन्ह में वृषभ की आकृति है और नए संसद भवन में सबसे पहले गौमाता की प्रतीकात्मक मूर्ति ने ही प्रवेश किया था। स्वामीजी ने कहा कि “गौहत्या की अनुमति और गोमांस की बिक्री संसद भवन जैसे पवित्र स्थान के मूल विचार के विपरीत है। जब तक पूरे देश में गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा नहीं दिया जाएगा, अभियान जारी रहेगा।”

उन्होंने बताया कि उन्होंने चांदी के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों से एक विशेष पुस्तक बनवाई है, जिसमें सबसे पहले अपने गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का नाम लिखा। अब उसी पुस्तक में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का नाम जोड़ा जाएगा। शंकराचार्य ने धर्म की रक्षा का आह्वान करते हुए कहा कि “गाय बचेगी तो सनातन धर्म बचेगा। विधर्म और पाखंड से धर्म को अलग करना जरूरी है। धर्म केवल दिखावे से नहीं, सच्चे आचरण से जीवित रहेगा।” कार्यक्रम का आयोजन बोरीवली स्थित कोरा केंद्र पर चल रहे चातुर्मास्य महा-महोत्सव के अंतर्गत किया गया।

“गौमाता से राजमाता तक: एक सांस्कृतिक क्रांति की ओर”

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Sharad Katiyar
Sharad Katiyar

शरद कटियार

भारतीय समाज में गाय को केवल एक पशु नहीं, अपितु मातृरूपा के रूप में देखा गया है। “गावो विश्वस्य मातरः” जैसी वैदिक उद्घोषणाएं हमारी सांस्कृतिक चेतना में गहराई तक समाई हैं। इसी भावभूमि पर खड़े होकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा गौमाता (Gaumata) को ‘राजमाता’ (Rajmata) का दर्जा देना एक ऐतिहासिक निर्णय बन जाता है — न केवल राजनीतिक रूप से, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय अस्मिता के परिप्रेक्ष्य में भी।

इस ऐतिहासिक कदम के लिए उन्हें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा विशेष सम्मान से नवाजा जाएगा। यह सम्मान भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की 101वीं जयंती के अवसर पर मुंबई में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा।शंकराचार्य द्वारा चांदी के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों से तैयार विशेष ग्रंथ में मुख्यमंत्री शिंदे का नाम अंकित किया जाना, इस निर्णय की ऐतिहासिकता को और अधिक उज्ज्वल बना देता है।

यह सम्मान केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उस चेतना को समर्पित है जो गौमाता को भारतीय जीवन की धुरी मानती है। जब राष्ट्र की राजधानी में बने नए संसद भवन में प्रवेश का प्रथमाधिकार गौमाता की प्रतीकात्मक मूर्ति को मिलता है, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि गौसंरक्षण केवल परंपरा नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है।

शंकराचार्य द्वारा चलाया जा रहा राष्ट्रव्यापी अभियान — जिसमें 33 करोड़ गौ-प्रतिष्ठा महायज्ञ शामिल है — इस चेतना को पुनः जाग्रत करने का प्रयास है। यह पहल केवल गाय को सम्मान देने तक सीमित नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और सनातन जीवन मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का आह्वान भी है। स्वामीजी की यह बात ध्यान देने योग्य है कि “गाय बचेगी तो धर्म बचेगा”, क्योंकि गाय न केवल कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि यह धार्मिक आस्था और आत्मिक संतुलन की प्रतीक भी है।

आज जब समाज पाखंड, दिखावे और उपभोक्तावाद की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में यह निर्णय एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर संकेत करता है। यह सिर्फ महाराष्ट्र के लिए नहीं, पूरे भारत के लिए एक प्रेरणास्पद दृष्टांत है।

हमें यह समझना होगा कि धर्म की रक्षा केवल अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि आचरण से होती है। गाय का सम्मान, संरक्षण और संवर्धन — यह हमारी संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का आधार है। एकनाथ शिंदे ने यह निर्णय लेकर न केवल परंपरा का सम्मान किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी एक सशक्त सांस्कृतिक संदेश दिया है।

यह कदम किसी एक राज्य की नहीं, पूरे राष्ट्र की आत्मा को स्पर्श करता है। यदि भारत को सांस्कृतिक महाशक्ति बनाना है, तो ऐसे निर्णयों को केवल सम्मान नहीं, समर्थन और अनुकरण भी मिलना चाहिए।

शरद कटियार
ग्रुप एडिटर
यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप

बिजली संकट को लेकर भाकियू (स्वराज) ने सौंपा ज्ञापन, फसल सूखने की चेतावनी

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Swaraj
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– समाधान न होने पर तहसील पर अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा

फर्रुखाबाद, कायमगंज: बिजली संकट, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भारतीय किसान यूनियन (Bhakiyu) (Swaraj) के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को कायमगंज तहसील में उपजिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।

ज्ञापन में कहा गया कि गिलोंदा कुरार, गनेशपुर पिपराभोज, मगार नगला, महमूदपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कोई निश्चित व्यवस्था नहीं है। किसानों की फसलें सूखने की कगार पर हैं। आरोप लगाया गया कि इन गांवों को बिजली साहबगंज फीडर से मिलती है, लेकिन वहां का लाइनमैन शराब के नशे में रहता है और जब तक उसे बोतल नहीं दी जाती, फीडर चालू नहीं करते।

कस्बे में हर 10 मिनट में बिजली कट जाती है। जेई जावेद और लाइनमैन नावेद पर बिजली आपूर्ति में मनमानी करने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यूनियन ने इन अधिकारियों को हटाने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन (स्वराज) ने चेताया कि यदि समस्याएं जल्द नहीं सुलझाई गईं, तो संगठन तहसील परिसर में धरने पर बैठेगा और इसमें महिलाएं-बच्चे तक शामिल होंगे।

ज्ञापन सौंपने वालों मे मुन्नालाल सक्सेना – प्रदेश सचिव, मंजेश यादव – जिला महामंत्री, विनीत कुमार सक्सेना – जिला मीडिया प्रभारी, अजीत सिंह – ब्लॉक अध्यक्ष संजू – ब्लॉक महामंत्री, अनुज सक्सेना – मीडिया प्रभारी, विकास, अरिजीत सिंह, रामप्रकाश, विमल, संजीव, रामनरेश सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यूनियन की मांग है कि दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और बिजली आपूर्ति को नियमित किया जाए ताकि किसानों और आम जनता को राहत मिल सके।

ई एंड एच फाउंडेशन ने शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने वाले 250 स्वयंसेवकों को किया सम्मानित

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गांव-गांव जाकर बच्चों को पढ़ाने वाले युवा बने प्रेरणा, प्रमाणपत्र व ट्रॉफी देकर हुआ सम्मान

फर्रुखाबाद, शमसाबाद: समाजसेवी संस्था ई एंड एच फाउंडेशन (Social service organization E & H Foundation) द्वारा शिक्षा (education) व स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की कड़ी में शनिवार को शमसाबाद नगर के मोहल्ला गोदाम स्थित हेल्थ सेंटर में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्था से जुड़े 250 स्वयंसेवकों को प्रमाणपत्र और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन विशेष रूप से उन स्वयंसेवकों के लिए किया गया, जिन्होंने कोरोना काल के बाद बच्चों की शिक्षा में हुई क्षति की भरपाई के उद्देश्य से गांव-गांव जाकर बच्चों को प्राइमरी स्तर की पढ़ाई में मदद की। संस्था की इस अभिनव पहल ने न केवल बच्चों की पढ़ाई को फिर से पटरी पर लाने में सहायता की, बल्कि ग्रामीण शिक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ाई।

कार्यक्रम में मौजूद विशिष्टजन:

आलोकानंदा चटर्जी – सीईओ, ई एंड एच फाउंडेशन

अमिता पांडे – सीनियर मैनेजर

अनुराग मिश्रा – प्रोजेक्ट मैनेजर

सैयद आजम अली – टीम लीडर

शैलेन्द्र, विजय, सरताज मोहम्मद, प्रवीण, महेश, इकरा, सनव्वर, निहाल, रेहान, नगीना समेत अन्य टीम सदस्य भी मौजूद रहे।

सीईओ आलोकानंदा चटर्जी ने स्वयंसेवकों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि,

 

“आज का यह सम्मान समारोह सिर्फ एक धन्यवाद नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के प्रति सम्मान है जिन्होंने शिक्षा को घर-घर तक पहुँचाने का काम किया। आने वाले समय में भी फाउंडेशन समुदायों के हित में इसी प्रकार सक्रिय रहेगा।”

भविष्य की योजना:

ई एंड एच फाउंडेशन ने ऐलान किया कि भविष्य में भी स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए ऐसे कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर स्थायी विकास सुनिश्चित हो सके। सम्मान समारोह के अंत में सभी स्वयंसेवकों को समाजहित में कार्य करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

फर्रुखाबाद-एटा मार्ग पर अनुबंधित रोडवेज बस में उठा धुएं का गुबार, यात्रियों में मचा हड़कंप

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roadways bus
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खिड़की से कूदकर यात्रियों ने बचाई जान, सेंसर खराबी बनी वजह

फर्रुखाबाद: शहर से एटा जा रही एक अनुबंधित परिवहन निगम की बस (roadways bus) में शुक्रवार शाम उस समय अफरातफरी मच गई जब चलते-चलते बस के अंदर अचानक धुआं भर गया। धुएं के गुबार से घबराए यात्री खांसते हुए खिड़कियों से कूदने लगे और देखते ही देखते बस पूरी तरह खाली हो गई। यह घटना शाम करीब 5 बजे कायमगंज-फर्रुखाबाद मार्ग (Kaimganj-Farrukhabad Road) पर फैजबाग स्थित पशु बाजार के पास हुई।

यात्रियों की घबराहट और बस में मचा हड़कंप

बस जैसे ही पशु बाजार इलाके से गुजरी, अचानक उसके अंदर तेज़ धुआं भरने लगा। धुएं से दम घुटने की स्थिति बन गई और यात्री चीखने-चिल्लाने लगे। कई यात्रियों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई। बस चालक ने शोर सुनकर तुरंत बस को रोका, जिसके बाद सभी यात्री किसी तरह बाहर निकल सके।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई यात्री धुएं की वजह से खांसते और आंखें मलते दिखाई दिए। कुछ को तत्काल पानी पीने की जरूरत पड़ी। गनीमत रही कि कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई।

तकनीकी खराबी बनी वजह

बस चालक के अनुसार, सेंसर में तकनीकी खराबी के कारण बस के अंदर धुआं भर गया। हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना था कि गर्मी के चलते बस की वायरिंग जल गई, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई। घटना के बाद चालक ने मौके पर एक मैकेनिक को बुलाया, जिसने तकरीबन आधे घंटे की मेहनत के बाद खराबी को ठीक किया।

आधे घंटे के बाद बस दोबारा रवाना

मरम्मत के बाद बस को पुनः एटा के लिए रवाना किया गया। लेकिन इस दौरान अधिकांश यात्री दूसरी सवारी का इंतज़ाम करके रवाना हो गए।

स्थानीय लोगों में चर्चा

घटना के बाद स्थानीय लोगों में काफी चर्चा रही। कई लोगों ने अनुबंधित बसों की नियमित जाँच पर सवाल उठाए। लोगों ने कहा कि यदि धुएं की मात्रा थोड़ी और अधिक होती तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था।

यात्री बोले – जान पर बन आई थी

कुछ यात्रियों ने बताया कि अचानक जब बस के अंदर धुआं फैला, तो एक क्षण को लगा कि आग लग गई है। कुछ बुजुर्ग यात्रियों को उतारने में अन्य यात्रियों ने मदद की।