29 C
Lucknow
Monday, March 30, 2026
Home Blog Page 3195

पुलिस महानिदेशक ने प्रदान किए सैलरी पैकेज अंतर्गत चेक

0
DGP
DGP

बरेली, जौनपुर, फतेहपुर व सिद्धार्थनगर के शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को कुल 7.10 करोड़ की आर्थिक सहायता

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण द्वारा आज एक भावुक अवसर पर चार दिवंगत पुलिसकर्मियों के शोक संतप्त आश्रितों को बैंक ऑफ बड़ौदा के पुलिस सैलरी पैकेज (PSP) के अंतर्गत आर्थिक सहायता के रूप में चेक (cheques) प्रदान किए गए। कार्यक्रम में शहीद मुख्य आरक्षी दुर्गेश कुमार सिंह, आरक्षी जितेन्द्र पाल, आरक्षी वीरेन्द्र कुमार सरोज और फालवर बृजेश कुमार के परिजनों को सम्मानपूर्वक चेक सौंपे गए।

प्राप्त सहायता राशि निम्नवत रही:

आरक्षी जितेन्द्र पाल (बरेली) के परिजनों को ₹1.95 करोड़ मुख्य आरक्षी दुर्गेश कुमार सिंह (जौनपुर), आरक्षी वीरेन्द्र कुमार सरोज (फतेहपुर), और फालवर बृजेश कुमार (सिद्धार्थनगर) — प्रत्येक को ₹1.70 करोड़ की सहायता राशि प्रदान की गई।

जितेन्द्र पाल की मौत 12 दिसंबर 2024 को ट्रैक्टर-ट्रॉली द्वारा मोटरसाइकिल को टक्कर मारे जाने से हुई। दुर्गेश कुमार सिंह को 18 मई 2025 को गो-तस्करों ने ड्यूटी के दौरान वाहन से कुचल दिया था। वीरेन्द्र कुमार सरोज की मृत्यु 5 मार्च 2025 को महाकुंभ मेला ड्यूटी समाप्त कर लौटते समय डंपर की टक्कर से हुई।

बृजेश कुमार 10 नवंबर 2024 को पिकअप वाहन की टक्कर से शहीद हुए। इस अवसर पर ADG पीएचक्यू श्री आनन्द स्वरूप, ADG/डीजी के जीएसओ श्री एन. रविन्दर, आईजी भवन कल्याण आर.के. भारद्वाज, बैंक ऑफ बड़ौदा के GM प्रतीक अग्निहोत्री समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा, “पुलिसकर्मी समाज की सेवा के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर देते हैं। यह आर्थिक सहायता उनके परिवारों को संबल प्रदान करने का एक प्रयास है, ताकि वे अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकें।” इस पहल से पुलिस बल में सेवा कर रहे कर्मियों में भी यह विश्वास जगा कि राज्य सरकार व विभाग हर परिस्थिति में उनके और उनके परिवार के साथ खड़ा है।

अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन की नवाबगंज इकाई की जिला कार्यकारिणी का गठन

0
Nawabganj
Nawabganj

– धर्मेंद्र यादव फिर बने जिलाध्यक्ष, जीतू बाबू को मिली महासचिव की जिम्मेदारी

नवाबगंज: अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन (All India Pharmacist Association) की नवाबगंज (Nawabganj) इकाई की जिला कार्यकारिणी (district executive) का गठन संगठन के जिला कार्यालय पर किया गया। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार, शिवम राजपूत, विवेक यादव एवं सुनील कुमार की उपस्थिति में चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई। कार्यकारिणी में धर्मेंद्र यादव को एक बार फिर जिलाध्यक्ष चुना गया, जबकि जीतू बाबू को जिला महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार ने कार्यकर्ताओं से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और 2027 में संभावित संघ चुनावों के लिए अभी से तैयारी शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट समाज को एकजुट होकर अपनी भूमिका को और प्रभावशाली बनाना होगा।

कार्यक्रम में विवेक यादव, शिवम राजपूत, सुनील कुमार, विवेक गंगवार, जितेंद्र कुशवाहा, अर्पित कुमार यादव, सुनील कुमार शाक्य, राजेश कुशवाहा, शशि प्रभा, संजना, अनूप पांडेय, सतेंद्र वर्मा सहित अनेक सदस्य मौजूद रहे। संगठन की ओर से नई कार्यकारिणी को बधाई दी गई और उनके सफल कार्यकाल की कामना की गई।

सवाल पूछने वाले पत्रकार साथियों पर मुकदमा होना निंदनीय है: अजय राय

0
journalists
journalists

लखनऊ: वाराणसी (Varanasi) में भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर चढ़े युवक की वीडियो वायरल होने पर सवाल पूछने वाले छह पत्रकारों (journalists) पर लंका थाने में मुकदमा लिखा गया। जिनमें अरशद, अभिषेक झा, अभिषेक त्रिपाठी, सोनू सिंह, शैलेश, नितिन कुमार राय के नाम हैं। इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी प्रतिमा पर चढ़े युवक की वीडियो वायरल होने पर सवाल पूछने वाले पत्रकार साथियों पर मुकदमा होना निंदनीय है।

भाजपा सरकार का नियम देखिए की दोषी पर कार्यवाही नहीं होगी पर सवाल पूछने वाला पहले दोषी होगा। पत्रकारों की कलम, समाज की आवाज और शक्ति का प्रतीक है। यह कलम, सच्चाई और न्याय के लिए एक हथियार है, जो जनता को जागरूक करने और सामाजिक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिनका काम है आईना दिखाना पर इस सरकार में आईना दिखाना गुनाह है । क्योंकि इस सरकार के चेहरे पर इतने कालिख है की आईना इस सरकार को नहीं पसंद है।

राय ने कहा कि बड़े से लेकर छोटे पत्रकार तक हर कलम का सिपाही जो निष्पक्ष पत्रकारिता का पक्ष रखता है उसे यह सरकार अपना दुश्मन मानती है आखिर काशी के इन छह पत्रकारों की क्या गलती है वीडियो वायरल में मालवीय जी के मूर्ति कर युवक चढ़ा है जिस पर सवाल पत्रकारों ने किया परंतु सरकार अपने नियमावली के अनुसार इस बार भी दोषियों को छोड़ सवाल पूछने वाले पर मुकदमा कर दिया।हम पत्रकार साथियों संग खड़े है।

आपने सवाल पूछा है और आपका अधिकार है सवाल करने का इसे कोई नहीं छीन सकता है। और इस सरकार की तानाशाही का अंत होगा निश्चित होगा कलमकारों का अपमान उनके ऊपर मुकदमा कांग्रेस पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी। जब भी देश संघर्ष के दौर से गुजरा, उस समय पत्रकारों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। इससे तय है कि आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी पत्रकारों की महती भूमिका रही है और है ऐसे में पत्रकारों के सवाल पर मुकदमा करना इस सरकार के कायरता का परिचय है।

खाने की थाली में सिर्फ़ स्वाद नहीं, बल्कि छुपी है तेल-आधारित व्यवस्था

0
food plate
food plate

– जब रोटी तेल से बनती है, मिट्टी से नहीं
– सीज़नल और अनपैकेज्ड खाना चुनें

लखनऊ: हमारे खाने की थाली (food plate) में सिर्फ़ स्वाद ही नहीं, बल्कि एक पूरी तेल-आधारित व्यवस्था छुपी हुई है। IPES-Food की ‘Fuel to Fork’ रिपोर्ट से पता चलता है कि खेती, ट्रांसपोर्ट, पैकिंग, यहाँ तक कि खाद्य प्रसंस्करण में भी पेट्रोल, डीज़ल और पेट्रोकेमिकल्स की निर्भरता खतरनाक हद तक बढ़ चुकी है। जब तेल महँगा होता है, तो सब्ज़ी- दाल भी हमारी पहुँच से बाहर हो जाती है। और जब युद्ध या भू-राजनीतिक संकट आते हैं, जैसे इज़राइल-ईरान या रूस-यूक्रेन तो उनकी भी मार हमारे खाने पर पड़ती है।

सवाल अब ये नहीं है कि खाना मिलेगा या नहीं ? सवाल ये है कि हम क्या खा रहे हैं? मिट्टी या तेल? मूल समस्या कहाँ है?

1. उद्योग आधारित खेती – यूरिया, DAP, ट्रैक्टर, कोल्ड स्टोरेज—सब कुछ तेल से चलता है।
2. पेट्रो-पैक्ड पैकेट्स – खाने की प्लास्टिक पैकिंग, ट्रांसपोर्ट, प्रोसेसिंग भी फॉसिल फ्यूल से जुड़ी है।
3. नकली समाधान – स्मार्ट फार्मिंग, डिजिटल खेती जैसे समाधान असल में एक और कार्पोरेट जाल हैं।

वास्तविक समाधान कहां हैं?

1. लोकलाइजेशन – गाँवों की मंडियाँ, देसी बीज, स्थानीय फसलें।
2. एग्रोइकोलॉजी – जैविक और पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ।
3. कम ऊर्जा पर आधारित सप्लाई चेन – ट्रैक्टर नहीं, बैलगाड़ी हो तो बेहतर नहीं तो E-ट्रांसपोर्ट।
4. नीति में बदलाव – COP30 जैसे मंचों पर खाद्य प्रणाली को केंद्र में लाना ज़रूरी है।
5. खाद्य-स्वराज्य की दिशा – जैसे ‘जल-स्वराज्य’ या ‘स्वराज्य’ की अवधारणा है, वैसे ही ‘खाद्य- स्वराज्य’।

सवाल यह है कि क्या हम खाना देख कर उसकी कहानी सोचते हैं? यही कि दाल कहाँ से आई? कौन बोया? किस ट्रक से आई? किस प्लास्टिक में पैक हुई? क्या हम सिर्फ़ ‘टेस्ट’ के भरोसे खा रहे हैं, या ‘ट्रेस’ कर पा रहे हैं? अब इन हालात में हम क्या कर सकते हैं जैसे कि हो सके तो हम अपने भोजन का कच्चा सामान देसी मंडी से खरीदें, लोकल किसानों से जुड़ें, सीज़नल और अनपैकेज्ड खाना चुनें। खेत से थाली तक की कहानी को दूसरों तक पहुँचाएं। COP30 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खाद्य प्रणाली की बात उठाने वाले अभियानों का हिस्सा बनें।

देखा जाए तो हम जो खाते हैं, वही हम बनते हैं। और अगर हम तेल खा रहे हैं, तो शायद हम धीरे-धीरे इंसान से उपभोक्ता बनते जा रहे हैं।” खाने को तेल से आज़ाद करना कोई सपना नहीं यह हमारे गाँवों, मंडियों, बीजों और हमारी स्मृतियों में आज भी जिंदा है।

360 अध्यापकों का हुआ ऑनलाइन स्थानांतरण: माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी किया परिणाम

0
transferred
transferred

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों के लिए बहुप्रतीक्षित ऑनलाइन स्थानांतरण (transferred online) प्रक्रिया का परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग (Secondary Education Department) के अपर निदेशक सुरेंद्र कुमार तिवारी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था प्रधान, प्रवक्ता, सहायक अध्यापक (teachers) एवं सम्बद्ध प्राइमरी प्रभाग के कुल 360 शिक्षकों का स्थानांतरण सफलतापूर्वक किया गया है। यह प्रक्रिया शिक्षा निदेशालय एवं एनआईसी के सहयोग से पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुई।

स्थानांतरण आदेश विभागीय पोर्टल http://secaidedtransfer.upsdc.gov.in पर अपलोड कर दिए गए हैं। संबंधित शिक्षक मानव संपदा आईडी और पंजीकृत मोबाइल नंबर की सहायता से पोर्टल पर लॉगिन कर अपने स्थानांतरण आदेश देख सकते हैं। तिवारी ने बताया कि स्थानांतरित शिक्षकों को नियमानुसार कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराने हेतु सभी मण्डलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

यह पूरा कार्य शैक्षिक सत्र 2025-26 के अंतर्गत तय समयसीमा में पूर्ण किया जाएगा। इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं सुगमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे राज्य के हजारों शिक्षकों को स्थानांतरण प्रक्रिया में निष्पक्षता का भरोसा मिला है।

जिला जेल फतेहगढ़ में अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

0
International Drug Prohibition
International Drug Prohibition

– नशा नाश की जड़, इससे बचें और दूसरों को भी बचाएं: अपर जिला जज संजय कुमार

फतेहगढ़ (फर्रुखाबाद): जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फतेहगढ़ के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध (International Drug Prohibition Day) एवं तस्करी रोकथाम दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता सेमिनार (Special Awareness Seminar) का आयोजन जिला कारागार फतेहगढ़ (District Jail Fatehgarh) में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर जनपद न्यायाधीश एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संजय कुमार ने की।

इस मौके पर जिला कारागार अधीक्षक अमन कुमार सिंह, डिप्टी जेलर वैभव कुशवाहा, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नीरज कुमार, बार एसोसिएशन फतेहगढ़ के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष व डिप्टी चीफ सुरेन्द्र कुमार राणा ने बंदियों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूक किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर जिला जज श्री संजय कुमार ने कहा कि “नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य और धन का नुकसान करता है, बल्कि समाज में उसकी प्रतिष्ठा को भी गिराता है। ऐसे लोगों को समाज हीन दृष्टि से देखने लगता है। इसलिए जरूरी है कि हम नशे से खुद को और अपने आसपास के लोगों को दूर रखें। नशा सिर्फ विनाश की ओर ले जाता है, इससे बचना ही सबसे बड़ी सावधानी है।”

जागरूकता कार्यक्रम में जेलर कस्तूरी लाल गुप्ता, चीफ शिवनरेश सिंह सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सेमिनार का सफल संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार राणा ने किया, जिन्होंने बंदियों को सरल भाषा में नशा विरोधी कानूनी प्रावधानों और उनके सामाजिक प्रभावों से अवगत कराया।