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Monday, March 30, 2026
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अवैध वसूली बनाम अतिक्रमण मुहिम: पुलिस पर मनमानी का आरोप, ठेली चालकों का मुख्यालय पर प्रदर्शन

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Police
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– नगर विधायक के इंतजार में बैठी रही भीड़, समाधान न मिलने पर डीएम कार्यालय पहुंचे ठेली चालक

फर्रुखाबाद: रोडवेज बस अड्डे (Roadways Bus Stand) के आसपास अतिक्रमण हटाने (removal of encroachment) के नाम पर चल रही कार्यवाही को लेकर शुक्रवार को शहर में जमकर बवाल हुआ। दर्जनों ठेली चालकों (cart drivers) ने पुलिस पर मनमानी और भेदभाव के आरोप लगाए। उनका कहना था कि कुछ ठेली चालकों से नजराना लेकर उन्हें दुकान लगाने दी जाती है, जबकि बाकी गरीबों की ठेलियां जबरन हटवा दी जाती हैं।

सुबह से ही ठेली चालक नगर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी के इंतजार में रोडवेज बस स्टैंड के बाहर जमा रहे। जब विधायक मौके पर नहीं पहुंचे तो सभी ठेली चालक एकजुट होकर जिला मुख्यालय फतेहगढ़ पहुंच गए, जहां उन्होंने अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखी। ठेली चालकों का आरोप है कि पुलिस अतिक्रमण के नाम पर सिर्फ गरीब और कमजोर ठेली वालों को निशाना बना रही है। जिनसे नजराना वसूला जाता है, उन्हें दुकान लगाने दी जाती है।

पुलिस की कार्रवाई में पारदर्शिता और समानता नहीं है। प्रदर्शन कर रहे एक ठेली चालक ने कहा, “हम रोज कमाकर अपने बच्चों का पेट पालते हैं। अगर प्रशासन हमें दुकान नहीं लगाने देगा तो हम खाएंगे क्या? पुलिस वाले नजराना लेने वालों को छोड़ देते हैं और बाकी को डरा-धमका कर भगा देते हैं। यह सरासर अन्याय है।”

बताया जा रहा है कि पिछले हफ्ते भी अतिक्रमण के नाम पर ठेलियां हटाई गई थीं। ठेली चालकों ने तब भी अधिकारियों से मिलकर समाधान की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद ठेली चालकों ने नगर विधायक से मदद की गुहार लगाई थी। विधायक ने आश्वासन तो दिया था, लेकिन शुक्रवार को वह शहर में मौजूद नहीं थे।

मुख्यालय पहुंचे ठेली चालकों ने डीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपा और मांग की कि— अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो। सभी ठेली चालकों के लिए तय स्थान निर्धारित किए जाएं। पुलिस द्वारा की जा रही मनमानी और कथित वसूली की जांच हो। इस पूरे घटनाक्रम से स्थानीय पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अधिकारी फिलहाल जांच की बात कर रहे हैं, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं होता, तब तक ऐसे प्रदर्शन और टकराव होते रहेंगे।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार अब देखना यह है कि नगर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी इस पूरे मामले में कब और कैसे हस्तक्षेप करते हैं और क्या प्रशासन पुलिस की कार्यशैली की जांच करवाता है या नहीं।

नशे में धुत चालक ने ट्रैफिक पुलिस सिपाहियों को कुचलने की कोशिश, तीन पर मुकदमा दर्ज

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– आईटीआई चौराहे पर हुई सनसनीखेज घटना, आरोपी पकड़े गए

फर्रुखाबाद: शहर में आईटीआई चौराहे (ITI Crossroads) पर उस वक्त अफरातफरी मच गई जब एक तेज रफ्तार कार चालक ने झगड़ा करके भागते समय ट्रैफिक पुलिस (traffic police) के सिपाहियों को कुचलने का प्रयास किया। इस गंभीर घटना में तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज (case filed) कर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

घटना गुरुबार शाम करीब 7 बजे की है। देवरामपुर क्रॉसिंग पर यातायात ड्यूटी में तैनात हेड कांस्टेबल नेक पाल, कांस्टेबल रोहित और होमगार्ड भूपेंद्र सिंह ने बताया कि HC इन्द्रपाल सिंह को सूचना मिली थी कि गाड़ी संख्या DL 7CP 7550 (Xcent CRDI Met-Hyundai) किसी विवाद में शामिल रही है और तेज गति से इलाके में आ रही है। जैसे ही पुलिस ने गाड़ी को रोकने की कोशिश की, चालक ने गाड़ी सिपाहियों पर चढ़ाने का प्रयास किया।

शराब के नशे में धुत चालक और उसके साथियों ने सिपाहियों से अभद्रता की। जब रोककर पूछताछ की गई तो चालक ने अपना नाम व्योम ही चन्द्रा पुत्र दिनेश चन्द्रा बताया, जबकि साथ मौजूद अन्य दो लोगों ने अपने नाम देवानंद व रामानंद वर्मा उर्फ राजा पुत्र परमानंद, निवासी आवास विकास, बताए। आरोपियों ने गाली-गलौज के साथ सरकारी कार्य में बाधा डाली।

इसी दौरान गश्त पर निकले कादरी गेट थानाध्यक्ष अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आरोपियों को काबू में लेकर थाने ले गए। पीड़ित पुलिसकर्मियों की तहरीर पर तीनों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

वाराणसी जा रही नाव गंगा नदी में डूबी, 5 को बचाया और एक डूब गया

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Varanasi
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मिर्जापुर: यूपी के मिर्जापुर (Mirzapur) में एक बड़ा हादसा हो गया। चुनार थाना क्षेत्र के गांगपुर गांव के पास रात में नाव में बैठकर छात्र वाराणसी (Varanasi) जा रहे थे तभी अचानक से नाव गंगा नदी (Gange river) में डूब गई। उसमे सवार पांच छात्र तो बच गए किसी तरह लेकिन उनमे से एक युवक डूब गया। इस घटना की खबर लगते ही मौके पर पुलिस पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया गया।

जानकारी के अनुसार, जिले के चुनार थाना क्षेत्र के गांगपुर गांव के पास बीती रात 7:00 बजे एक छोटी सी नाव में सवार होकर छात्र वाराणसी जा रहे थे, इस दौरान नाव में अचानक से छेद हो गया और उसमें पानी भर गया, जिसके बाद नाव गंगा नदी में डूबने लगी ये देखते ही आनन-फानन में सभी ने कूदकर अपनी जान बचाने का प्रयास किया। जिसमे से पांच को स्थानीय लोगों की मदद से बचा लिया गया है लेकिन एक छात्र अजय डूब गया है। जिसकी तलाश की जा रही है।

स्थानीय लोगो ने बताया कि सभी छात्र वहां पढ़ाई करते हैं। नाव में छेद होने के चलते नाव डूबने लगा तो सभी ने कूदकर जान बचाने का प्रयास किया। जिसमें 5 तो बच गए, एक डूब गया है। पुलिस ने बताया कि, इस घटना की खबर लगते ही मौके पर पुलिस पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया गया। वहीं सीओ मंजरी राव ने बताया कि नाव डूब गई थी, जिसमें बच्चे सवार थे 5 बच गए हैं, 1 डूब गया, जिसकी तलाश की जा रही है।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ब्लॉक मिशन मैनेजर्स को प्रशिक्षण के माध्यम से किया जा रहा दक्ष

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– तीन विषयों पर आयोजित हुआ विशेष आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, आर्थिक सशक्तिकरण व उद्यमिता विकास पर दिया गया जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत कार्यरत ब्लॉक मिशन मैनेजर्स को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया जा रहा है। यह प्रशिक्षण दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ में 23 से 27 जून 2025 के मध्य आयोजित हुआ।

महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू के संरक्षण, प्रधान अपर निदेशक श्री सुबोध दीक्षित व उप निदेशक डॉ. नीरजा गुप्ता के प्रशासनिक मार्गदर्शन में तीन प्रमुख आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनका उद्देश्य मैनेजर्स को योजना निर्माण, डाटा प्रबंधन व उद्यमिता विकास के प्रति अधिक सजग और सक्षम बनाना था।

23 से 26 जून तक आयोजित इस चार दिवसीय प्रशिक्षण में 71 ब्लॉक मिशन मैनेजर्स ने भाग लिया। इसमें परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया, उसका वित्तीय पहलू तथा व्यावहारिक कार्यान्वयन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
इसी अवधि में 25 प्रतिभागियों को एमआईएस आधारित प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें आंकड़ों के संग्रह, विश्लेषण और रिपोर्टिंग पर फोकस किया गया।

25 से 27 जून तक चले इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में 48 प्रतिभागियों को जैविक आजीविका के नए विकल्प – मधुमक्खी पालन – के व्यावसायिक पहलुओं से परिचित कराया गया। इसमें शहद उत्पादन, बाजार से जुड़ाव और पर्यावरणीय लाभों पर भी प्रकाश डाला गया।

25 जून को बुद्धा सभागार में उद्घाटन सत्र का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता संस्थान के महानिदेशक वेंकटेश्वर लू ने की। विशिष्ट अतिथियों में इस्कॉन के दिव्य मिताई दास, डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य (पूर्व सदस्य, लोक सेवा आयोग), के. लक्ष्मी राव (नेशनल रिसोर्स पर्सन, हैदराबाद), डॉ. जय प्रकाश और डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह (इग्नू, लखनऊ) उपस्थित रहे।
इस्कॉन के वक्ता ने मधुमक्खी और मक्खी के व्यवहारों की रोचक तुलना करते हुए सहयोग और उत्पादनशीलता के महत्व को उजागर किया। वहीं, श्री लू ने श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों को उद्धृत करते हुए प्रतिभागियों को अपने कार्य में निष्ठा और ईमानदारी बनाए रखने का संदेश दिया।

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सफलता में डॉ. नीरजा गुप्ता के नेतृत्व में आरती गुप्ता, विकास श्रीवास्तव, उपेंद्र दुबे और मोहम्मदर शहंशाह की विशेष भूमिका रही। उन्होंने न केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम की योजना और क्रियान्वयन में योगदान दिया, बल्कि प्रतिभागियों की आवश्यकताओं का समुचित ध्यान भी रखा।

साइबर अपराधों के विरुद्ध निर्णायक युद्ध की शुरुआत – CBI की कार्रवाई एक चेतावनी और अवसर दोनों

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शरद कटियार

भारत जैसे विशाल और डिजिटल रूप से तेजी से उभरते राष्ट्र के लिए साइबर अपराध एक अत्यंत गंभीर और जटिल चुनौती बन चुका है। ऐसे में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा हाल ही में चलाया गया ‘ऑपरेशन चक्र-V’ एक न केवल बड़ी कार्रवाई है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब सरकार और जांच एजेंसियां इस खतरे को हल्के में नहीं लेने वालीं। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के 42 ठिकानों पर छापेमारी कर 9 आरोपियों की गिरफ्तारी और 8.5 लाख म्यूल खातों की जांच इस ऑपरेशन की गहराई और गंभीरता को दर्शाता है।

बीते दशक में भारत ने डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। यूपीआई, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-वॉलेट्स और मोबाइल एप्लिकेशन ने आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ ही एक खतरनाक साइड इफेक्ट भी देखने को मिला है — साइबर फ्रॉड का विस्फोटक विस्तार। यह विडंबना ही है कि जिस डिजिटल इकोसिस्टम ने आम आदमी को सशक्त बनाया, वही अब एक संगठित ठगी नेटवर्क का शिकार बन चुका है।

CBI की ताजा जांच ने इस डर को और भी ठोस रूप दिया है कि कैसे देश की बैंकिंग प्रणाली और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को म्यूल खातों के ज़रिए कमजोर किया जा रहा है। ये म्यूल खाते वे बैंक अकाउंट होते हैं जिनका प्रयोग धोखाधड़ी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है। CBI की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे खातों को खोलने में बैंक कर्मचारी, एजेंट, बिचौलिये, ‘ई-मित्र’ और बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े लोग शामिल रहे हैं। कई जगह बिना KYC, बिना पहचान पत्र और बिना किसी जोखिम मूल्यांकन के खाते खोल दिए गए, जो एक गंभीर लापरवाही है।

इस ऑपरेशन के तहत CBI ने न केवल मनी लॉन्ड्रिंग को उजागर किया, बल्कि उन नई तकनीकों को भी सामने लाया जिनका प्रयोग साइबर ठग कर रहे हैं। इनमें फर्जी डिजिटल गिरफ्तारी, नकली विज्ञापन के माध्यम से निवेश घोटाले, यूपीआई आधारित फ्रॉड और SMS/WhatsApp के ज़रिए फर्जी लिंक भेजने जैसे तरीकों का इस्तेमाल शामिल है। इस तरह की घटनाओं से न केवल लोगों की मेहनत की कमाई लुटती है, बल्कि यह साइबर सुरक्षा के पूरे ढांचे पर सवाल खड़ा करती है।

सबसे गंभीर बात यह है कि ऐसे फ्रॉड सिर्फ छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि संगठित तरीके से पूरे देश में फैले हुए हैं। CBI की जांच में यह सामने आया कि हजारों की संख्या में ऐसे बैंक खातों का संचालन हो रहा है जो किसी न किसी रूप में साइबर ठगी का हिस्सा हैं। इस पूरे नेटवर्क को तोड़ना, उसके हर कड़ी तक पहुंचना और उसे खत्म करना एक लंबी प्रक्रिया होगी, लेकिन ऑपरेशन चक्र-V इसकी एक सशक्त शुरुआत है।

CBI की इस कार्रवाई ने देश की बैंकिंग प्रणाली की एक कड़वी सच्चाई भी उजागर की है — अनियमितताएं, लापरवाही और भ्रष्टाचार। जब KYC जैसी अनिवार्य प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए लाखों खाते खोले जाएं, तो यह एक संकेत है कि बैंकिंग व्यवस्था में गहरे सुधार की आवश्यकता है।

जिन बैंक अधिकारियों और प्रबंधकों ने संदिग्ध लेन-देन की अनदेखी की, वे सिर्फ ‘लापरवाह’ नहीं बल्कि संभवतः ‘साजिशकर्ता’ भी हो सकते हैं। यही वजह है कि इस ऑपरेशन में सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और BNS की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं।

सिर्फ एजेंटों या फ्रॉड करने वालों को पकड़ना पर्याप्त नहीं होगा, जब तक उस पूरे नेटवर्क को नहीं तोड़ा जाता जिसमें बैंकिंग अधिकारी, फाइनेंशियल एग्रीगेटर, KYC प्रोसेस करने वाले एजेंसियां और तकनीकी प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
अब यह समय आ गया है कि देश साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक व्यापक और बहुस्तरीय रणनीति अपनाए, जो केवल कार्रवाई या गिरफ्तारी पर आधारित न हो।

सरकार को चाहिए कि RBI और अन्य नियामक संस्थानों के सहयोग से बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए साइबर फ्रॉड प्रबंधन और KYC नियमों की अनिवार्य ट्रेनिंग शुरू करे। साथ ही, हर बैंक में एक स्वतंत्र साइबर धोखाधड़ी ऑडिटिंग टीम की स्थापना की जानी चाहिए जो समय-समय पर खातों की समीक्षा करे।

यह बात भी समझनी होगी कि जितनी जिम्मेदारी सरकार और एजेंसियों की है, उतनी ही आम नागरिकों की भी है। जब तक लोग स्वयं सतर्क नहीं होंगे, तब तक साइबर ठग अपनी चालों में सफल होते रहेंगे। फर्जी कॉल, संदिग्ध SMS या WhatsApp लिंक, नकली वेबसाइट और लोभ देने वाले निवेश प्रस्तावों को पहचानना और उसकी सूचना देना हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है।

सरकार को चाहिए कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और शिक्षा संस्थानों के माध्यम से एक राष्ट्रीय स्तर की ‘साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान’ चलाए, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को प्रशिक्षित किया जाए।

CBI का यह ऑपरेशन एक ‘ट्रेलर’ है — असली लड़ाई अब शुरू हुई है। इस तरह की कार्रवाई यह संदेश देती है कि अब अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कितनी भी ऊंची पहुंच रखते हों या कितनी भी चतुराई से सिस्टम का फायदा उठा रहे हों।

लेकिन साथ ही, यह एक अवसर भी है — बैंकिंग, प्रशासनिक और तकनीकी तंत्र को दुरुस्त करने का, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस दिशा में यदि केंद्र सरकार इच्छाशक्ति दिखाती है, तो भारत एक सशक्त और सुरक्षित डिजिटल राष्ट्र बन सकता है।

ऑपरेशन चक्र-V न केवल एक साइबर ठगी गिरोह की कमर तोड़ने की कार्रवाई है, बल्कि यह भारतीय शासन व्यवस्था के सामने एक दर्पण भी है। इसमें हमें अपनी कमियों को पहचानने, उन्हें सुधारने और एक अधिक जिम्मेदार साइबर इकोसिस्टम तैयार करने का अवसर मिला है।

यह एक निर्णायक क्षण है — हमें तय करना होगा कि हम इस चेतावनी को केवल ‘एक खबर’ मानकर आगे बढ़ जाएंगे या इसे एक संकेतक के रूप में लेंगे कि समय आ गया है, जब हमें साइबर अपराधों के खिलाफ युद्ध स्तर पर कदम उठाने होंगे।

यदि इस चेतावनी को गंभीरता से लिया गया, तो न केवल अपराधियों को सजा मिलेगी, बल्कि भारत दुनिया के सबसे सुरक्षित डिजिटल लोकतंत्रों में भी शामिल हो सकेगा।

जाली नोट तस्करी का पर्दाफाश: हापुड़ से तस्कर गिरफ्तार, ₹3.90 लाख के नकली नोट बरामद

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– अलीबाबा से मंगवाते थे खास पेपर, एटीएस ने गिरोह के तीन सदस्यों को दबोचा

हापुड़। उत्तर प्रदेश में नकली करेंसी के बढ़ते खतरे के बीच यूपी एटीएस ने जाली नोटों के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए अहम सफलता हासिल की है। फरीदनगर (जनपद हापुड़) से जाली नोटों के कुख्यात तस्कर गजेन्द्र यादव को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से ₹3.90 लाख के जाली नोट बरामद किए गए हैं।

एटीएस टीम को मौके से नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला विशेष प्रकार का कागज और अन्य उपकरण भी मिले हैं। प्रारंभिक पूछताछ में गजेन्द्र ने खुलासा किया कि जाली नोट छापने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पेपर बुलंदशहर निवासी मुनेश कुमार और वीर चौधरी की मदद से मंगवाया जाता था।

गिरफ्तार आरोपी ने यह भी बताया कि यह पेपर चीन की वेबसाइट Alibaba.com से ऑर्डर किया जाता था, जिससे नोट हूबहू असली जैसे प्रतीत होते थे।

अब तक एटीएस की कार्रवाई में इस नेटवर्क से जुड़े तीन लोगों — गजेन्द्र यादव, सिद्धार्थ झा और विजय वीर चौधरी — को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह लंबे समय से नकली नोटों का कारोबार कर रहा था और इनका नेटवर्क अन्य राज्यों तक फैला हो सकता है। फिलहाल, पुलिस अन्य सहयोगियों और कनेक्शनों की तलाश में जुट गई है।