37 C
Lucknow
Monday, March 30, 2026
Home Blog Page 3192

जाली नोट तस्करी का पर्दाफाश: हापुड़ से तस्कर गिरफ्तार, ₹3.90 लाख के नकली नोट बरामद

0

– अलीबाबा से मंगवाते थे खास पेपर, एटीएस ने गिरोह के तीन सदस्यों को दबोचा

हापुड़। उत्तर प्रदेश में नकली करेंसी के बढ़ते खतरे के बीच यूपी एटीएस ने जाली नोटों के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए अहम सफलता हासिल की है। फरीदनगर (जनपद हापुड़) से जाली नोटों के कुख्यात तस्कर गजेन्द्र यादव को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से ₹3.90 लाख के जाली नोट बरामद किए गए हैं।

एटीएस टीम को मौके से नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला विशेष प्रकार का कागज और अन्य उपकरण भी मिले हैं। प्रारंभिक पूछताछ में गजेन्द्र ने खुलासा किया कि जाली नोट छापने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पेपर बुलंदशहर निवासी मुनेश कुमार और वीर चौधरी की मदद से मंगवाया जाता था।

गिरफ्तार आरोपी ने यह भी बताया कि यह पेपर चीन की वेबसाइट Alibaba.com से ऑर्डर किया जाता था, जिससे नोट हूबहू असली जैसे प्रतीत होते थे।

अब तक एटीएस की कार्रवाई में इस नेटवर्क से जुड़े तीन लोगों — गजेन्द्र यादव, सिद्धार्थ झा और विजय वीर चौधरी — को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह लंबे समय से नकली नोटों का कारोबार कर रहा था और इनका नेटवर्क अन्य राज्यों तक फैला हो सकता है। फिलहाल, पुलिस अन्य सहयोगियों और कनेक्शनों की तलाश में जुट गई है।

साइबर ठगी पर करारा प्रहार: CBI का ऑपरेशन चक्र-V, पांच राज्यों में छापेमारी, 9 गिरफ्तार

0

– फर्जी डिजिटल गिरफ्तारी से लेकर निवेश धोखाधड़ी तक का भंडाफोड़, 8.5 लाख म्यूल खातों की जांच

नई दिल्ली। भारत में बढ़ते साइबर अपराधों पर शिकंजा कसते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ऑपरेशन चक्र-V के तहत देशव्यापी कार्रवाई की। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में फैले 42 ठिकानों पर छापेमारी कर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। ये कार्रवाई डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों, नकली विज्ञापन, निवेश से जुड़े फ्रॉड और यूपीआई आधारित साइबर ठगी मामलों में की गई।

सीबीआई की जांच में सामने आया कि देशभर के विभिन्न बैंकों की 700 से अधिक शाखाओं में करीब 8.5 लाख म्यूल बैंक खाते खोले गए हैं। ये खाते धोखाधड़ी की रकम को इधर-उधर करने और निकालने के लिए उपयोग किए जा रहे थे। हैरानी की बात यह है कि कई खातों को बिना KYC प्रक्रिया, ग्राहक पहचान या जोखिम मूल्यांकन के खोला गया था।

CBI के अनुसार इस संगठित ठगी रैकेट में बैंक कर्मचारी, एजेंट, एग्रीगेटर, बैंक से जुड़े संपर्क व्यक्ति और ‘ई-मित्र’ शामिल हैं। ये लोग या तो कमीशन के लालच में या लापरवाही के कारण म्यूल खातों को खुलवाने में मदद कर रहे थे। कई मामलों में बैंक प्रबंधकों ने संदिग्ध लेनदेन के स्पष्ट संकेतों को भी नजरअंदाज किया।

छापेमारी के दौरान सीबीआई टीमों ने मोबाइल फोन, संदिग्ध दस्तावेज, लेन-देन विवरण, KYC फॉर्म और डिजिटल डिवाइसेज़ जब्त किए हैं। साथ ही, म्यूल खातों से जुड़े एजेंटों और खाताधारकों की पहचान भी कर ली गई है।

CBI ने इस घोटाले में भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS), जालसाजी, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इसके साथ ही RBI के मास्टर सर्कुलर और बैंकिंग नियमों के उल्लंघन की भी पुष्टि हुई है।

यह कार्रवाई केंद्र सरकार की उस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाती है, जिसके अंतर्गत साइबर अपराधों की जड़ों तक पहुंचकर उसे उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया गया है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की जांच तेज कर दी गई है।

विशेषज्ञों की राय में, यह कार्रवाई सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर बैंकिंग प्रणाली में मौजूद खामियों की व्यापक समीक्षा और सुधार की मांग भी उठाती है। साथ ही यह चेतावनी भी है कि साइबर ठगी में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्थान को अब बख्शा नहीं जाएगा।

किसानों को राहत: जिलाधिकारी के निर्देश पर उर्वरक विक्रेताओं को ओवर रेटिंग व ट्रेनिंग रोकने का आदेश

0

– कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, जांच में दोषी पाए गए विक्रेताओं पर होगी सख्त कार्रवाई

फर्रुखाबाद। किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित जनपद स्तरीय उर्वरक समिति की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जनपद में कोई भी उर्वरक कम्पनी या ठोक विक्रेता किसी भी दशा में उर्वरकों की ओवर रेटिंग या ट्रेनिंग नहीं करेगा।

जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में उर्वरकों की समस्या एवं ओवर रेटिंग की लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। दुकानों पर स्टॉक, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर में अनियमितता के साथ किसानों को एमआरपी से अधिक मूल्य पर उर्वरक बेचे जाने की बातें सामने आई थीं। कई विक्रेताओं ने आज तक अपना रजिस्ट्रेशन भी प्रमाणित नहीं कराया है। जिन विक्रेताओं द्वारा सत्यापन नहीं कराया गया है, उन्हें किसी भी दशा में उर्वरक क्रय-विक्रय की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि कोई भी उर्वरक कम्पनी जनपद में किसी भी नए डीलर/विक्रेता को ट्रेनिंग न दे और न ही उर्वरक की आपूर्ति करे, जब तक संबंधित विक्रेता का सत्यापन, रजिस्ट्रेशन एवं अधिकृत विक्रेता प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया जाए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि उर्वरक नियंत्रण आदेश 1955 के अंतर्गत यदि कोई कम्पनी या विक्रेता निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस बाबत कृषि विभाग की ओर से गठित दलों को आकस्मिक निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों को मिलेगी राहत

बैठक में कृषि विभाग के अधिकारीगणों को भी सख्त निर्देश दिए गए कि वे समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी विक्रेता ओवर रेटिंग या काला बाजारी में संलिप्त न हो।
यह आदेश उप कृषि निदेशक, क्षेत्रीय अधिकारी, सहायक निदेशक, जिला सूचना अधिकारी, संयुक्त कृषि निदेशक सहित समस्त सम्बन्धित अधिकारियों को प्रेषित किया गया है ताकि जनपद में उर्वरकों की सुचारु व्यवस्था बनी रहे।

श्री जगन्नाथ महोत्सव यात्रा: नगर की गलियां बनीं वृंदावन, भक्ति में डूबे श्रद्धालु

0

फर्रुखाबाद। श्री जगन्नाथ महोत्सव के पावन अवसर पर सोमवार को नगर की गलियां श्रद्धा और भक्ति से सराबोर हो गईं। जैसे ही रथ यात्रा निकली, पूरा शहर वृंदावन सा प्रतीत हुआ। जगह-जगह पुष्पवर्षा, गुलाबजल की बौछार और आरती-प्रसाद वितरण के साथ भगवान जगन्नाथ के जयकारों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।

वैष्णव आचार्य चिन्मय गोस्वामी, आचार्य किशोरी दास, श्याम सुंदर शुक्ला, मनीष पांडेय और कु. बजरतन शुक्ला के सान्निध्य में यह यात्रा घमंडी पूजा मंदिर से प्रारंभ होकर दवाई रोड स्थित राधा श्याम शक्ति मंदिर पहुंची। वहां भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना के साथ नृत्य नाटिका का आयोजन हुआ।

इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ, उनके भ्राता बलराम और बहन सुभद्रा के विग्रहों को भव्य रथ पर स्थापित किया गया और नगर दर्शन यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा जैसे-जैसे नगर की गलियों से गुजरी, वैसे-वैसे श्रद्धालु नंगे पांव चलकर रथ के मार्ग को साफ करते नजर आए।

शंख, घंटियों और संकीर्तन की गूंज से शहर भक्तिरस में डूब गया। मार्ग में श्रद्धालुओं ने भगवान को आम, जामुन, करौंदा जैसे मिष्ठानों का भोग अर्पित किया। प्रमुख मार्गों जैसे लोहे का पुल, चौक, गुमटी, नेहरू रोड, स्टेट बैंक मार्ग होते हुए यात्रा पुनः घमंडी पूजा मंदिर पर समाप्त हुई, जहाँ विग्रहों की पुनः स्थापना के साथ आरती और भंडारे का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर शहर के प्रमुख कृष्ण भक्त, वैष्णव संतों के साथ-साथ अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख नाम —
अशोक वर्मा, सुनील वर्मा, श्यामजी टंडन, अभिषेक रस्तोगी, गौरव मित्तल, अशोक मिश्रा, सचिन, हिमांशु वर्मा, प्रशांत रस्तोगी, नीरज रस्तोगी, श्याम रस्तोगी, व्यापारी नेता संजय गर्ग, विनोद वर्मा व अंजुम दुबे शामिल रहे।

नगर के विभिन्न हिस्सों से अलग-अलग यात्राएं भी निकाली गईं। डॉ. मनमोहन गोस्वामी (घमंडी पूजा), सुरेंद्र सफ्फड़ (राधा माधव मंदिर), शुभम तिवारी (पक्का पुल), सुरेश गोयल व रोहित गोयल (गांधी कूंचा) आदि की अगुवाई में निकली कीर्तन यात्राओं ने पूरे नगर को कृष्ण भक्ति में सराबोर कर दिया।

यात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन ने चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। पुलिस कर्मी यात्रा के आगे-पीछे चलते हुए सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करते नजर आए।

शहरवासियों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचना सौभाग्य की बात मानी जाती है, जिसे अनुभव करने हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़ा।

विडंबना: कूड़े के ढेर में अपना भविष्य तलाशता बचपन

0

फर्रुखाबाद। एक ओर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, वहीं दूसरी ओर समाज का एक भयावह सच आज भी आंखों में चुभता है—बाल श्रम। तमाम सरकारी योजनाओं, जागरूकता अभियानों और कानूनों के बावजूद नगर के कोनों, सड़कों, स्टेशन और चौराहों पर कंधे पर पॉलिथीन लटकाए कूड़ा बीनते नन्हें हाथ अब भी देखे जा सकते हैं। यह दृश्य देश की तरक्की की असली तस्वीर बयां करता है।

सरकारें बच्चों को स्कूल तक पहुँचाने के लिए तमाम प्रयास कर रही हैं—मिड-डे मील योजना से लेकर मुफ्त यूनिफॉर्म और किताबों तक—but जमीनी हकीकत अभी भी कटु है। समस्या केवल सरकारी प्रयासों की विफलता नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता की भी है। जब तक आम नागरिक अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति खत्म नहीं की जा सकती।

नगर में आए दिन छोटे-छोटे बच्चे कूड़ा बीनते हुए दिख जाते हैं। कुछ तो अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि हालात से मजबूर होकर यह काम कर रहे हैं। लोअर क्लास और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों में अक्सर यह देखा जाता है कि अभिभावक या तो नशे, जुए या अन्य सामाजिक बुराइयों में लिप्त रहते हैं और बच्चों को कमाने के लिए सड़क पर धकेल देते हैं। वहीं कई मामलों में यह मजबूरी बन जाती है क्योंकि घर की आमदनी इतनी कम होती है कि बच्चे भी परिवार के भरण-पोषण में हाथ बंटाते हैं।

ऐसे बच्चे पढ़ाई की जगह अपने बचपन को प्लास्टिक की बोरी में समेटते हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान की जगह थकान और लाचारी का साया होता है। रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, मुख्य चौराहे या नगर के कूड़ा घरों में ये मासूम सुबह से शाम तक भटकते रहते हैं, मानो उनके जीवन की दिशा ही कूड़े के ढेर से तय हो रही हो।

प्रश्न यह है कि आखिर यह विडंबना कब खत्म होगी? कब ये बच्चे स्कूल की बेंच पर बैठकर किताबों में अपने सपने तलाशेंगे? सिर्फ प्रशासन नहीं, बल्कि पूरे समाज को मिलकर यह संकल्प लेना होगा कि कोई भी बच्चा मजदूर नहीं बनेगा। शिक्षा का अधिकार केवल कानून की किताबों में नहीं, ज़मीनी हकीकत में भी उतरना चाहिए।

आज आवश्यकता है कि समाज के हर वर्ग को जागरूक किया जाए, माता-पिता को समझाया जाए कि बाल श्रम बच्चों का नहीं, समाज का भविष्य नष्ट करता है। समाजसेवी संगठनों और स्थानीय प्रशासन को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर ऐसे बच्चों को स्कूल भेजने का प्रयास करना चाहिए।

भारत तब ही सशक्त बनेगा जब उसका बचपन शिक्षित और सुरक्षित होगा, वरना कूड़े के ढेर से निकली यह करुण पुकार हमें बार-बार हमारी असलियत का आईना दिखाती रहेगी।

फिर से संचालित होगी अंग्रेजी जमाने की अमृतपुर पुलिस चौकी, लोकार्पण के इंतजार में खड़ा नया भवन

0

– ग्रामीणों की मांग पर हुआ जीर्णोद्धार, 1942 की विरासत को मिलेगा नया जीवन

फर्रुखाबाद, अमृतपुर। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान स्थापित हुई अमृतपुर की ऐतिहासिक पुलिस चौकी एक बार फिर से अपनी पुरानी गरिमा में लौटने को तैयार है। पुलिस विभाग द्वारा चौकी भवन का जीर्णोद्धार कर नव निर्माण पूर्ण कर लिया गया है, लेकिन यह भवन अभी भी लोकार्पण के इंतजार में बंद पड़ा है। करीब 80 वर्षों पुरानी इस पुलिस चौकी की वापसी को लेकर स्थानीय जनता में उम्मीद और उत्साह का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, सन् 1942 में स्थापित हुई यह पुलिस चौकी अमृतपुर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ रही थी। सन् 1990 में जब अमृतपुर में थाना स्थापित हुआ, तब यह चौकी बंद कर दी गई और भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो गया। लेकिन ग्रामीणों की लगातार मांग और पहल के बाद पुलिस विभाग ने चौकी की जमीन की पैमाइश कराकर, बाउंड्री वॉल और नया भवन तैयार करवाया।

फिलहाल अमृतपुर पुलिस चौकी अस्थाई रूप से तहसील परिसर में बने आवासों से संचालित हो रही है। नव निर्मित भवन तैयार हो चुका है, परंतु अब तक उसका औपचारिक उद्घाटन नहीं हो पाया। उल्लेखनीय है कि पूर्व में उद्घाटन की तिथि तय होने के बावजूद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी की अनुपस्थिति के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था।

स्थानीय लोगों की मांग है कि अब जबकि भवन पूरी तरह तैयार है, तो इसका शीघ्र लोकार्पण कराकर पुलिस चौकी को अपने स्थायी भवन में स्थानांतरित कर दिया जाए। ग्रामीणों का मानना है कि इससे न सिर्फ पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि न्याय की पहुंच भी आमजन तक और बेहतर होगी।

इस संबंध में क्षेत्र के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. पी.डी. शुक्ला ने कहा, “चौकी का नए भवन में संचालन न केवल सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी है, बल्कि यह हमारी ऐतिहासिक विरासत को जीवंत रखने की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम है। प्रशासन और पुलिस विभाग का यह प्रयास सराहनीय है।”

पुलिस विभाग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि नव निर्मित भवन का शीघ्र उद्घाटन कर अमृतपुर पुलिस चौकी को वहां स्थानांतरित किया जाएगा।