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Monday, March 23, 2026
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दर्दनाक सड़क हादसा: ट्रैक्टर की टक्कर से युवक की मौत, दो घायल

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– रुदायन मार्ग पर हुआ हादसा, मृतक के घर में बारात की तैयारी थी, मातम में बदली खुशियां

कंपिल (फर्रुखाबाद): क्षेत्र के रुदायन मार्ग (Rudayan Marg) पर बुधवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे (accident) में बाइक सवार तीन युवकों को सामने से आ रहे ट्रैक्टर ने टक्कर मार दी। हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। ढड़ियापुर गांव निवासी उमेश शाक्य का 19 वर्षीय पुत्र विकास, अपने साथी ओमवीर और बड़े भाई जितेंद्र के साले रजनेश के साथ बाइक से रुदायन जा रहा था। जैसे ही वे जिजौटा खुर्द गांव के पास पहुंचे, तभी सामने से आ रहे एक ट्रैक्टर ने तेज रफ्तार में बाइक को टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीनों युवक उछलकर सड़क पर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। राहगीरों ने तत्काल पुलिस और घायलों के परिजनों को सूचना दी। थाना कंपिल की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सभी घायलों को सीएचसी कायमगंज पहुंचाया, जहां डॉ. विपिन कुमार ने विकास को मृत घोषित कर दिया। दूसरे दो घायलों, ओमवीर और रजनेश का इलाज सीएचसी में चल रहा है।

घटना के बाद मौके से ट्रैक्टर चालक फरार हो गया, लेकिन ग्रामीणों ने ट्रैक्टर को कब्जे में लेकर पुलिस को सौंप दिया। मृतक विकास की मौत से उसके घर में कोहराम मच गया है। मां रीना शाक्य का रो-रोकर बुरा हाल है। विकास तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। सबसे दुखद पहलू यह है कि विकास के ताऊ महावीर के पुत्र हिमांशु की बारात गुरुवार को जानी थी, जिससे घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। लेकिन इस घटना ने खुशी को मातम में बदल दिया।
थाना प्रभारी विश्वनाथ आर्या ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। तहरीर मिलने पर विधिक कार्यवाही की जाएगी।

फर्रुखाबाद नगर पालिका में हाउस टैक्स और जलकर सुधार हेतु विशेष पटल गठित, नई दरों की हुई घोषणा

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– पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल और अध्यक्ष वत्सला अग्रवाल ने दरें बताईं, नागरिकों से सहयोग की अपील

फर्रुखाबाद: नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद (Farrukhabad Nagar Palika) अब नई संशोधित दरों के अनुसार हाउस टैक्स (house tax) और वॉटर टैक्स (water tax) की वसूली करेगी। गुरुवार को नगर पालिका अध्यक्ष वत्सला अग्रवाल ने टाउन हॉल स्थित नगर पालिका कार्यालय के सभागार में टैक्स दरों की घोषणा की।

उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से चल रहे सर्वे कार्य के पूर्ण होने के बाद यह कर निर्धारण किया गया है, जो कि आसपास की अन्य नगर पालिकाओं से कम दरों पर आधारित है।

उन्होंने नगरवासियों से अपील की कि वे निर्धारित करों का भुगतान करके नगर की व्यवस्था को सुचारू रखने में सहयोग करें। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल ने कर निर्धारण की विस्तृत जानकारी दी:

40 फीट से अधिक चौड़ी सड़क पर स्थित पक्

के भवन पर टैक्स: ₹0.25 प्रति वर्ग फुट!

20 से 40 फीट चौड़ी सड़क पर स्थित भवन पर टैक्स: ₹0.20 प्रति वर्ग फुट!

20 फीट तक की सड़क पर स्थित भवन पर टैक्स: ₹0.15 प्रति वर्ग फुट!

खाली भूमि पर टैक्स: ₹0.05 प्रति वर्ग फुट!

कच्चे भवनों (कच्ची दीवार और फर्श वाले) को कर मुक्त रखा गया है। 30 वर्ग मीटर तक के आवासीय भवन भी करमुक्त होंगे।

पक्के भवनों में वे भवन शामिल होंगे जिनकी दीवारें

प्लास्टरयुक्त हों, फर्श सामान्य हो तथा छत टिनशेड या खपरैल की हो। हाउस टैक्स और जलकर दोनों को एक ही बिल में सम्मिलित किया जाएगा। नगर पालिका द्वारा नागरिकों की सुविधा हेतु एक विशेष पटल (डेस्क) स्थापित किया गया है, जहाँ बिल में त्रुटियों या गड़बड़ियों को सुधारा जाएगा।

नगर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि बिल सुधार के नाम पर कोई भी व्यक्ति यदि पैसे की मांग करता है तो उसकी शिकायत सीधे अध्यक्ष से की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रांति फैलाने वालों के बहकावे में न आएं।

पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल ने कहा कि पैतृक संपत्ति पर मालिक की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों के नाम स्वतः दाखिल-खारिज हो जाती है। इसके लिए नगर पालिका किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लेती है।

नागरिक किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए सीधे नगर पालिका कार्यालय से संपर्क करें। इस अवसर पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) सहित सभी संबंधित अधिकारी एवं सभासदगण मौजूद रहे। पूर्व एमएलसी एवं बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने नगर की अन्य समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की और उन्हें शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।

 

घर में साड़ी–ब्लाउज पहने हुए घूंघट में बैठा हिस्ट्रीशीटर, पुलिस ने दबोचा

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history-sheeter
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जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर (jodhpur) में हिस्ट्रीशीटर (history-sheeter) बदमाश दयाशंकर चांवरिया पुलिस की पकड़ से बचने के लिए महिला के वेश में साड़ी–ब्लाउज पहने हुए घर में बैठा था, लेकिन पुलिस (police) ने उसकी चालाकी समझते हुए गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को गुमराह करने की कोशिश आरोपी महिला की वेशभूषा में कर रहा था, इस गिरफ्तारी का वीडियो वायरल हो रहा है। यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई।

जानकारी के मुताबिक, यह मामला जोधपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र का है। यहां रहने वाला दयाशंकर उर्फ बिट्टू पुत्र रविंद्र चांवरिया शहर के अंदरूनी इलाके का कुख्यात बदमाश है, पिछले चार महीनों से वह पुलिस की गिरफ्त से दूर चल रहा था। उस पर मारपीट, लूट और धमकी देने जैसे करीब 13 मामले दर्ज है। पुलिस जब उसके घर गए तब साड़ी-ब्लाउज पहनकर घूंघट ओढ़े बैठा दयाशंकर चांवरिया ने पुलिस को इशारे में बताया की वो घर पर नहीं है लेकिन पुलिस उसकी चलाकी भांप गई और उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने बताया कि आरोपी बेहद चालाकी से महिला बनकर पुलिस को चकमा देता रहा, आज गुरुवार को जब टीम को मुखबिर से सूचना मिली तो पता करने पर सामने आया कि महिला के कपड़ों में जो छोटे-छोटे बालों में है, वो हिस्ट्रीशीटर दयाशंकर ही है। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके साथियों की तलाश भी जारी है। दयाशंकर की गिरफ्तारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

दरअसल, दयाशंकर 15 फरवरी 2025 को दर्ज एक हमले और धमकी के मामले में फरार चल रहा था। पीड़ित 23 वर्षीय प्रिंस चावला ने शिकायत में बताया था कि एक पुरानी रंजिश के चलते दयाशंकर और उसके साथियों ने रात करीब 11:30 बजे कांच की बोतल, डंडों और घूंसे-थप्पड़ों से बेरहमी से पिटाई की थी और केस दर्ज न करवाने की धमकी दी थी। इन मामलो में भी दयाशंकर फरार चल रहा था, जिसे पुलिस ने बड़े चालाकी से गिरफ्तार किया है।

 

अमित शाह की अध्यक्षता में 25वीं बैठक 24 जून को कशी में होगी, सीएम धामी ने लिया जायजा

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CM Dhami
CM Dhami

वाराणसी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (central Home Minister Amit Shah) की अध्यक्षता में होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक आगामी 24 जून को वाराणसी के काशी (Kashi) में होने वाली है। इसी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने तैयारियों के संबंध में गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में उच्चस्तरीय बैठक की। इस बार इस बैठक की मेजबानी के लिए यूपी को चुना गया और इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे और इसमें उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री आवास में उच्चस्तरीय बैठक में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने तैयारियों का जायजा लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि “इकोलॉजी और इकोनॉमी के समन्वय” की भावना के अनुरूप ऐसे ठोस और नवाचारपरक प्रस्ताव तैयार किए जाएं जो प्रदेश के समग्र, सतत और संतुलित विकास को नई गति प्रदान कर सकें। सीएम धामी ने महिला एवं बाल विकास विभाग को नियमित रूप से कुपोषण और एनीमिया के मामलों की समीक्षा करने और बच्चों की स्थिति में सुधार के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए. उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि जिलास्तर पर ऐसे प्रयासों की निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था सशक्त की जाए.

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान, सचिव विनोद कुमार सुमन और महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने आपातकालीन स्थितियों में त्वरित सहायता के लिए 112 हेल्पलाइन नंबर का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए, ताकि आम जनता आवश्यक समय पर इस सुविधा का लाभ ले सके।

 

 

 

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का सपना साकार, अब किसानों को मिला योगी सरकार से करोड़ो का मुआवजा

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Gorakhpur
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सरकार की गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे (Gorakhpur Link Expressway) की परिकल्पना को साकार वाले किसानो को योगी सरकार (Yogi government) अब खुशहाल बना रही है। राज्य सरकार की रोड कनेक्टिविटी (road connectivity) की शानदार परियोजना में किसान ने मदद की तो अब सरकार उन्हें इनाम दे रही है। इस परियोजना के लिए योगी सरकार ने 22,029 किसानों को 2030.29 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया है। लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए सरकार ने 172 गांवों के किसानों के भूमि का अधिग्रहण किया था। जिसके तहत करीब 1148.77 हेक्टेयर भूमि का पूरी तरह पारदर्शी तरीके से अधिग्रहण की प्रक्रिया की गई।

इसके आलावा जमीन देने वाले किसानों को सीएम योगी गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में खुद सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना कर चुके हैं। अब आने वाला कल शुक्रवार (20 जून) को जब गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का लोकार्पण होगा तो एक बार फिर किसानों के योगदान की बरबस चर्चा होगी। यह परियोजना प्रदेश के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ ही उत्तर प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन जाएगा जहां 8 चालू एक्सप्रेसवे होंगे, जो कि भारत में सर्वाधिक हैं।

इसके निर्माण से गोरखपुर से लखनऊ की यात्रा अब महज 3 से 3.5 घंटे में पूरी की जा सकेगी, जिससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पूर्वांचल के समग्र विकास और क्षेत्रीय संपर्क को भी नई गति मिलेगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों और आधुनिक, समावेशी विकास के संकल्प का सशक्त प्रतीक है-एक ऐसा कदम जो ‘नए उत्तर प्रदेश’ की ओर मजबूती से बढ़ते राज्य की तस्वीर पेश करता है। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में एक समारोह आयोजित कराकर जमीन देने वाले 500 किसानों को सम्मानित कराया था, जिसमे से सीएम योगी ने खुद अपने हाथों से 40 किसानों को सम्मानित किया था।

 

चिंताजनक: गाँव के स्कूल का बंद होना, सिर्फ़ एक इमारत नहीं, एक सपना टूटना है

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प्रशांत कटियार

हाल ही में आए एक सरकारी आदेश के तहत छोटे सरकारी विद्यालयों (government school) को पास के बड़े विद्यालयों में मर्ज करने की योजना बनाई जा रही है। आदेश की भाषा में शैक्षिक गुणवत्ता (educational quality),संसाधनों का समुचित उपयोग जैसे शब्द सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई उन काग़ज़ों से कहीं ज़्यादा जटिल और मानवीय है। सरकारी आंकड़े कह सकते हैं कि कुछ स्कूलों में बच्चों की संख्या कम है, लेकिन क्या किसी ने उन बच्चों के हालात समझने की कोशिश की है? क्या यह सवाल पूछा गया कि कम नामांकन की वजहें क्या हैं? क्या कभी किसी अधिकारी ने उन गाँवों के रास्तों पर चलकर देखा है, जो बरसात में कीचड़ और गर्मी में अंगारे बन जाते हैं? क्या यह सोचा गया है कि छह साल के बच्चे की नन्हीं टाँगें रोज़ दो किलोमीटर की दूरी कैसे तय करेंगी?

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 स्पष्ट रूप से कहता है कि 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को स्थानीय स्तर पर मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना सरकार की ज़िम्मेदारी है। ऐसे में यह मर्ज किस अधार पर किया जा रहा है? क्या अब नीतियाँ केवल रिपोर्टों और आकड़ों की कसौटी पर तय होंगी, बिना सामाजिक और भौगोलिक यथार्थ को समझे?जो लोग यह तर्क देते हैं कि सरकारी स्कूलों में नामांकन घटा है, उन्हें यह भी स्वीकारना होगा कि इसमें कहीं न कहीं व्यवस्था की भूमिका भी रही है। सरकार ने जिस तरह से प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा दिया है, वह एक बड़ी वजह है।

कई बार देखा गया है कि निजी विद्यालयों को उसी क्षेत्र में मान्यता दे दी जाती है जहाँ पहले से सरकारी विद्यालय मौजूद हैं। यह अपने आप में नीति विरोधाभास है।दूसरी ओर, जब सरकारी अधिकारियों और शिक्षकों के अपने बच्चे भी सरकारी स्कूलों में न पढ़कर निजी विद्यालयों में पढ़ते हैं, तो आम ग्रामीण परिवार में यह संदेश जाता है कि सरकारी स्कूल शायद कमतर हैं। यही मानसिकता धीरे-धीरे नामांकन को प्रभावित करती है।सरकार यदि वाकई में शैक्षिक गुणवत्ता सुधारना चाहती है, तो उसे दोतरफ़ा नीति अपनानी होगी।

प्राथमिक विद्यालयों का बुनियादी ढाँचा मज़बूत किया जाए, न कि उन्हें समेटा जाए।प्राइवेट विद्यालयों की अंधाधुंध मान्यता पर रोक लगे, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ पहले से सरकारी स्कूल हैं।एक स्पष्ट आदेश के तहत सभी सरकारी अफसरों और शिक्षकों को अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने को बाध्य किया जाए। इससे स्कूलों में भरोसा बढ़ेगा और सामाजिक संदेश भी जाएगा कि सरकारी स्कूल गुणवत्तापूर्ण हैं।स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि स्कूल केवल सरकारी नहीं, सामुदायिक ज़िम्मेदारी भी बनें।

विद्यालयों का मर्ज, केवल काग़ज़ पर किया गया एक प्रशासनिक निर्णय नहीं होना चाहिए। यह बच्चों के भविष्य, उनके सपनों, और एक पूरे गाँव की शिक्षा के अधिकार से जुड़ा प्रश्न है। अगर नीतियाँ जमीन की हकीकत से नहीं जुड़ेंगी, तो वे केवल काग़ज़ी दस्तावेज़ बनकर रह जाएँगी।आज ज़रूरत है संवेदनशील निर्णयों की, न कि सुविधाजनक आदेशों की। हर गाँव का स्कूल, उस गाँव की शान है इसे बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की ज़िम्मेदारी है।

                                     लेखक, दैनिक यूथ इंडिया के वरिष्ठ उप संपादक हैँ।