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Thursday, March 26, 2026
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सवाल पूछने वाले पत्रकार साथियों पर मुकदमा होना निंदनीय है: अजय राय

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journalists
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लखनऊ: वाराणसी (Varanasi) में भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर चढ़े युवक की वीडियो वायरल होने पर सवाल पूछने वाले छह पत्रकारों (journalists) पर लंका थाने में मुकदमा लिखा गया। जिनमें अरशद, अभिषेक झा, अभिषेक त्रिपाठी, सोनू सिंह, शैलेश, नितिन कुमार राय के नाम हैं। इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी प्रतिमा पर चढ़े युवक की वीडियो वायरल होने पर सवाल पूछने वाले पत्रकार साथियों पर मुकदमा होना निंदनीय है।

भाजपा सरकार का नियम देखिए की दोषी पर कार्यवाही नहीं होगी पर सवाल पूछने वाला पहले दोषी होगा। पत्रकारों की कलम, समाज की आवाज और शक्ति का प्रतीक है। यह कलम, सच्चाई और न्याय के लिए एक हथियार है, जो जनता को जागरूक करने और सामाजिक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिनका काम है आईना दिखाना पर इस सरकार में आईना दिखाना गुनाह है । क्योंकि इस सरकार के चेहरे पर इतने कालिख है की आईना इस सरकार को नहीं पसंद है।

राय ने कहा कि बड़े से लेकर छोटे पत्रकार तक हर कलम का सिपाही जो निष्पक्ष पत्रकारिता का पक्ष रखता है उसे यह सरकार अपना दुश्मन मानती है आखिर काशी के इन छह पत्रकारों की क्या गलती है वीडियो वायरल में मालवीय जी के मूर्ति कर युवक चढ़ा है जिस पर सवाल पत्रकारों ने किया परंतु सरकार अपने नियमावली के अनुसार इस बार भी दोषियों को छोड़ सवाल पूछने वाले पर मुकदमा कर दिया।हम पत्रकार साथियों संग खड़े है।

आपने सवाल पूछा है और आपका अधिकार है सवाल करने का इसे कोई नहीं छीन सकता है। और इस सरकार की तानाशाही का अंत होगा निश्चित होगा कलमकारों का अपमान उनके ऊपर मुकदमा कांग्रेस पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी। जब भी देश संघर्ष के दौर से गुजरा, उस समय पत्रकारों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। इससे तय है कि आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी पत्रकारों की महती भूमिका रही है और है ऐसे में पत्रकारों के सवाल पर मुकदमा करना इस सरकार के कायरता का परिचय है।

खाने की थाली में सिर्फ़ स्वाद नहीं, बल्कि छुपी है तेल-आधारित व्यवस्था

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food plate
food plate

– जब रोटी तेल से बनती है, मिट्टी से नहीं
– सीज़नल और अनपैकेज्ड खाना चुनें

लखनऊ: हमारे खाने की थाली (food plate) में सिर्फ़ स्वाद ही नहीं, बल्कि एक पूरी तेल-आधारित व्यवस्था छुपी हुई है। IPES-Food की ‘Fuel to Fork’ रिपोर्ट से पता चलता है कि खेती, ट्रांसपोर्ट, पैकिंग, यहाँ तक कि खाद्य प्रसंस्करण में भी पेट्रोल, डीज़ल और पेट्रोकेमिकल्स की निर्भरता खतरनाक हद तक बढ़ चुकी है। जब तेल महँगा होता है, तो सब्ज़ी- दाल भी हमारी पहुँच से बाहर हो जाती है। और जब युद्ध या भू-राजनीतिक संकट आते हैं, जैसे इज़राइल-ईरान या रूस-यूक्रेन तो उनकी भी मार हमारे खाने पर पड़ती है।

सवाल अब ये नहीं है कि खाना मिलेगा या नहीं ? सवाल ये है कि हम क्या खा रहे हैं? मिट्टी या तेल? मूल समस्या कहाँ है?

1. उद्योग आधारित खेती – यूरिया, DAP, ट्रैक्टर, कोल्ड स्टोरेज—सब कुछ तेल से चलता है।
2. पेट्रो-पैक्ड पैकेट्स – खाने की प्लास्टिक पैकिंग, ट्रांसपोर्ट, प्रोसेसिंग भी फॉसिल फ्यूल से जुड़ी है।
3. नकली समाधान – स्मार्ट फार्मिंग, डिजिटल खेती जैसे समाधान असल में एक और कार्पोरेट जाल हैं।

वास्तविक समाधान कहां हैं?

1. लोकलाइजेशन – गाँवों की मंडियाँ, देसी बीज, स्थानीय फसलें।
2. एग्रोइकोलॉजी – जैविक और पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ।
3. कम ऊर्जा पर आधारित सप्लाई चेन – ट्रैक्टर नहीं, बैलगाड़ी हो तो बेहतर नहीं तो E-ट्रांसपोर्ट।
4. नीति में बदलाव – COP30 जैसे मंचों पर खाद्य प्रणाली को केंद्र में लाना ज़रूरी है।
5. खाद्य-स्वराज्य की दिशा – जैसे ‘जल-स्वराज्य’ या ‘स्वराज्य’ की अवधारणा है, वैसे ही ‘खाद्य- स्वराज्य’।

सवाल यह है कि क्या हम खाना देख कर उसकी कहानी सोचते हैं? यही कि दाल कहाँ से आई? कौन बोया? किस ट्रक से आई? किस प्लास्टिक में पैक हुई? क्या हम सिर्फ़ ‘टेस्ट’ के भरोसे खा रहे हैं, या ‘ट्रेस’ कर पा रहे हैं? अब इन हालात में हम क्या कर सकते हैं जैसे कि हो सके तो हम अपने भोजन का कच्चा सामान देसी मंडी से खरीदें, लोकल किसानों से जुड़ें, सीज़नल और अनपैकेज्ड खाना चुनें। खेत से थाली तक की कहानी को दूसरों तक पहुँचाएं। COP30 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खाद्य प्रणाली की बात उठाने वाले अभियानों का हिस्सा बनें।

देखा जाए तो हम जो खाते हैं, वही हम बनते हैं। और अगर हम तेल खा रहे हैं, तो शायद हम धीरे-धीरे इंसान से उपभोक्ता बनते जा रहे हैं।” खाने को तेल से आज़ाद करना कोई सपना नहीं यह हमारे गाँवों, मंडियों, बीजों और हमारी स्मृतियों में आज भी जिंदा है।

360 अध्यापकों का हुआ ऑनलाइन स्थानांतरण: माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी किया परिणाम

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transferred
transferred

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों के लिए बहुप्रतीक्षित ऑनलाइन स्थानांतरण (transferred online) प्रक्रिया का परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग (Secondary Education Department) के अपर निदेशक सुरेंद्र कुमार तिवारी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था प्रधान, प्रवक्ता, सहायक अध्यापक (teachers) एवं सम्बद्ध प्राइमरी प्रभाग के कुल 360 शिक्षकों का स्थानांतरण सफलतापूर्वक किया गया है। यह प्रक्रिया शिक्षा निदेशालय एवं एनआईसी के सहयोग से पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुई।

स्थानांतरण आदेश विभागीय पोर्टल http://secaidedtransfer.upsdc.gov.in पर अपलोड कर दिए गए हैं। संबंधित शिक्षक मानव संपदा आईडी और पंजीकृत मोबाइल नंबर की सहायता से पोर्टल पर लॉगिन कर अपने स्थानांतरण आदेश देख सकते हैं। तिवारी ने बताया कि स्थानांतरित शिक्षकों को नियमानुसार कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराने हेतु सभी मण्डलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

यह पूरा कार्य शैक्षिक सत्र 2025-26 के अंतर्गत तय समयसीमा में पूर्ण किया जाएगा। इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं सुगमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे राज्य के हजारों शिक्षकों को स्थानांतरण प्रक्रिया में निष्पक्षता का भरोसा मिला है।

जिला जेल फतेहगढ़ में अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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International Drug Prohibition
International Drug Prohibition

– नशा नाश की जड़, इससे बचें और दूसरों को भी बचाएं: अपर जिला जज संजय कुमार

फतेहगढ़ (फर्रुखाबाद): जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फतेहगढ़ के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध (International Drug Prohibition Day) एवं तस्करी रोकथाम दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता सेमिनार (Special Awareness Seminar) का आयोजन जिला कारागार फतेहगढ़ (District Jail Fatehgarh) में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर जनपद न्यायाधीश एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संजय कुमार ने की।

इस मौके पर जिला कारागार अधीक्षक अमन कुमार सिंह, डिप्टी जेलर वैभव कुशवाहा, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नीरज कुमार, बार एसोसिएशन फतेहगढ़ के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष व डिप्टी चीफ सुरेन्द्र कुमार राणा ने बंदियों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूक किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर जिला जज श्री संजय कुमार ने कहा कि “नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य और धन का नुकसान करता है, बल्कि समाज में उसकी प्रतिष्ठा को भी गिराता है। ऐसे लोगों को समाज हीन दृष्टि से देखने लगता है। इसलिए जरूरी है कि हम नशे से खुद को और अपने आसपास के लोगों को दूर रखें। नशा सिर्फ विनाश की ओर ले जाता है, इससे बचना ही सबसे बड़ी सावधानी है।”

जागरूकता कार्यक्रम में जेलर कस्तूरी लाल गुप्ता, चीफ शिवनरेश सिंह सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सेमिनार का सफल संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार राणा ने किया, जिन्होंने बंदियों को सरल भाषा में नशा विरोधी कानूनी प्रावधानों और उनके सामाजिक प्रभावों से अवगत कराया।

सरकारी अस्पताल के बाहर छात्रा की चाकू मारकर हत्या, आरोपी फरार

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hospital
hospital

नरसिंहपुर: मध्यप्रदेश के जिला नरसिंहपुर (Narsinghpur) के सरकारी अस्पताल (government hospital) से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है कि, इमरजेंसी वार्ड के बाहर खड़ी 12वीं की छात्रा (Student) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। शुक्रवार को वह किसी काम से जिला अस्पताल पहुंची थी। बताया जा रहा है कि, इमरजेंसी वार्ड के बाहर एक खड़े एक शख्स ने उसे पहले पीटा, फिर चाकू मारा। घायल लड़की को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हत्यारोपी मौके से फरार है और उसकी तलाश जारी है।

पुलिस ने बताया कि, घटना की खबर लगते ही मौके पर पहुंच कर जांच शुरू कर दी गई है। छात्रा की पहचान संध्या चौधरी के रूप में हुई है, जो सांकल रोड, पटेल वार्ड गली नंबर 3 की रहने वाली थी और एमएलबी स्कूल में कक्षा 12वीं की छात्रा थी। जिला अस्पताल में संध्या शुक्रवार को किसी काम से आई थी। लोगो ने बताया कि, छात्रा जैसे ही इमरजेंसी वार्ड के रूम नंबर 22 के बाहर पहुंची, वहां पहले से मौजूद एक युवक ने अचानक से उसपर हमला बोल दिया और चाकू से हमला कर के मौके से फरार हो गया।

नर्सिंग ऑफिसर नलिन के मुताबिक, आरोपी ने काली शर्ट पहन रखी थी। वह लड़की को पकड़कर मारने लगा। नर्सिंग स्टाफ ने जब बीच-बचाव की कोशिश की तो आरोपी ने उन्हें भी धमकाया “हट जाओ, वरना तुम्हें भी मार दूंगा। पुलिस ने बताया इलाज के दौरान लड़की की मौत हो गई है। पुलिस ने मौके पर मिले CCTV फुटेज और चश्मदीदों के बयान के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। हमला किस वजह से किया गया अभी स्पष्ट नहीं है।

पुरी में भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू

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Jagannath
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पुरी: ओडिशा के पुरी (Puri) में आज शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का उत्सव मनाया जा रहा है। पुरी में भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा (Rath Yatra) शुरू हो गई है, जिसे ‘पहांडी’ अनुष्ठान कहा जाता है। यह भव्य यात्रा पुरी के जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर गुंडिचा मंदिर तक जाती है। जगन्नाथ रथ यात्रा में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। श्री गुंडिचा मंदिर से पुरी जगन्नाथ मंदिर लगभग 2.6 किलोमीटर दूर है। गुंडिचा मंदिर महाप्रभु जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के मौसी का घर माना जाता है। इस रथ यात्रा में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच चुके है।

भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की मंगल आरती और विधि विधान से पूजा-पाठ करने के बाद 12वीं शताब्दी के मंदिर से निकालकर सिंह द्वार पर खड़े उनके रथों नंदी घोष, दर्पदलन और तालध्वज पर विराजमान किया गया। भोई राजवंश के मुखिया ने आज की रथ यात्रा से पहले उन्होंने सोने की झाड़ू बहारा है। इस यात्रा में शामिल हुए सभी भक्तो ने अपनी-अपनी बारी से सबसे पहले भगवान बलभद्र का रथ खींचना शुरू किया। कुछ देर ले जाकर उनके रथ को रोक दिया इसके बाद देवी सुभद्रा के रथ को खिंचा। फिर सबसे आखिरी में महाप्रभु जगन्नाथ के रथ को खींचा जाएगा।

डीजीपी वाईबी खुरानिया ने बताया कि पुरी में लगभग 10,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती है, जिनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की आठ कंपनियां भी शामिल हैं। भक्तो की आज भारी संख्या में भीड़ उमड़ी है जिसके लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा, हमने रथ यात्रा के सुचारू संचालन के लिए हर संभव व्यवस्था की है। 275 से अधिक एआई-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरों के जरिए रथ यात्रा की निगरानी की जा रही है।