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Tuesday, April 28, 2026
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प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ तीन गिरफ्तार

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शाहजहांपुर। थाना पुवायां पुलिस ने धर्मांतरण कराने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी गरीब, अनुसूचित जाति के लोगों और नाबालिग बच्चों को निशाना बनाकर प्रलोभन और भय दिखाकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस को 19 अप्रैल को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। सूचना में बताया गया था कि पुवायां क्षेत्र में कुछ लोग भोले-भाले ग्रामीणों को आर्थिक मदद और बेहतर इलाज का झांसा देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनके फोटो और वीडियो बना लेते थे। बाद में इन्हीं के जरिए उन पर दबाव बनाया जाता था और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता था। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों नमद्वीप, रचिन उर्फ गुड्डू और बटेश्वर ने बताया कि वे करीब एक वर्ष से इस गतिविधि में शामिल थे और इसके बदले उन्हें बाहरी स्रोतों से प्रलोभन मिलता था। इस मामले में वादी सौरभ वर्मा की तहरीर पर थाना पुवायां में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ मु0अ0सं0 234/2026 के तहत धारा 3/5(1) उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 में कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार आरोपियों में नमद्वीप (30) निवासी पिपरिया कप्तान, जनपद खीरी, रचिन उर्फ गुड्डू (24) और बटेश्वर (55) निवासी पकड़िया हकीम, शाहजहांपुर शामिल हैं। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।

खरगे के विवादित बयान से सियासत गरम: पीएम मोदी पर टिप्पणी को लेकर चुनाव आयोग तक पहुंचा मामला

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नई दिल्ली

 

देश में चुनावी माहौल के बीच मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ा दिया है। तमिलनाडु में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘आतंकवादी’ से कर दी, जिसके बाद भाजपा ने इसे गंभीर मुद्दा बनाते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। इस बयान को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और दोनों दल आमने-सामने आ गए हैं।

भाजपा ने इस टिप्पणी को प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी की ओर से भारतीय जनता पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग को औपचारिक शिकायत भेजते हुए कहा है कि यह बयान आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है। भाजपा ने आयोग से मांग की है कि खरगे को न केवल सार्वजनिक माफी मांगने के निर्देश दिए जाएं, बल्कि उनके चुनावी प्रचार पर भी प्रतिबंध लगाने जैसे सख्त कदम उठाए जाएं।

मामले को और गंभीर बनाते हुए भाजपा ने कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। पार्टी ने अपने पत्र में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए कहा है कि इस प्रकार के बयान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं और मतदाताओं को भ्रमित कर सकते हैं। भाजपा चाहती है कि जांच कर उचित धाराओं में कार्रवाई की जाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ ही भाजपा ने चुनाव आयोग से यह भी आग्रह किया है कि इस विवादित बयान के प्रचार-प्रसार पर तुरंत रोक लगाई जाए। पार्टी का कहना है कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर इस बयान का प्रसार चुनावी माहौल को दूषित कर सकता है, इसलिए इसे हटाना जरूरी है।

विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से ‘आतंकवादी’ कहना नहीं था, बल्कि उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों जैसे ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है। खरगे के अनुसार, उनकी टिप्पणी का मकसद देश में बने ‘डर के माहौल’ को उजागर करना था, न कि व्यक्तिगत हमला करना।

फिलहाल यह मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है और अब सबकी निगाहें भारत निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि इस बयान पर क्या कार्रवाई की जाती है।

प्रचार के बीच शरद पवार ने मतदान न करने का किया ऐलान, फडणवीस ने उठाई विमान हादसे की जांच की मांग

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महाराष्ट्र

बारामती विधानसभा उपचुनाव में प्रचार अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसी बीच शरद पवार ने एक पत्र जारी कर खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस बार मतदान न कर पाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सलाह के कारण वे वोट नहीं डाल सकेंगे।

 

उधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बारामती में जनसभा के दौरान अजीत पवार से जुड़े कथित विमान हादसे का मुद्दा उठाते हुए इसकी गहन जांच की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि इस घटना की सच्चाई सामने आना जरूरी है।

 

इस बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और जांच को लेकर केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं।

सम्राट चौधरी के बयान पर सियासी संग्राम तेज:अखिलेश यादव का तीखा पलटवार

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लखनऊ

 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में सम्राट चौधरी के एक विवादित बयान ने नया राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि “लालू प्रसाद यादव की बेटी, राहुल गांधी की बहन और अखिलेश यादव की पत्नी ही सदन क्यों जाएं?” उनके इस बयान को लेकर विपक्षी खेमे में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

सम्राट चौधरी के इस बयान के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जोरदार पलटवार किया। अपने ट्वीट में उन्होंने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि “जघन्य अपराध करने वाले, अपराध से बचने के लिए उम्र बदलने वाले, विचारहीन-सिद्धांतहीन होकर दल बदलने वाले, छल से सत्ता हासिल करने वाले और भ्रष्टाचार के शिरोमणि कहलाने वाले लोग बिहार के मुख्यमंत्री क्यों बनें?” इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक तल्ख हो गया है।

इस पूरे विवाद में लालू प्रसाद यादव और राहुल गांधी का नाम आने से मामला और भी संवेदनशील बन गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्ताधारी पक्ष महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे को भी राजनीतिक हमले का माध्यम बना रहा है, जबकि सरकार इस विषय पर ठोस पहल करने में विफल रही है।

वहीं, सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि विपक्ष परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा देता है और महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर केवल अपने परिवार की महिलाओं को आगे बढ़ाता है। इसी तर्क के आधार पर सम्राट चौधरी ने यह बयान दिया था, जिसे लेकर अब व्यापक राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बिहार में कैबिनेट विस्तार के संकेत तेज, विकास एजेंडे पर हुई अहम चर्चा

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नई दिल्ली

 

देश की राजनीति में बिहार को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसके बाद राज्य में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं। इस मुलाकात को बिहार की नई सरकार के गठन के बाद सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकों में से एक माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, दोनों शीर्ष नेताओं के बीच हुई इस बैठक में बिहार के विकास के रोडमैप, आगामी राजनीतिक रणनीति और सरकार के विस्तार जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि बैठक का आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सहमति बन गई है और पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद कभी भी इसका ऐलान किया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपनी सरकार को और मजबूत बनाने के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। संभावित विस्तार में नए चेहरों को मौका देने के साथ-साथ सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है, जिससे सरकार को राजनीतिक स्थिरता और मजबूती मिल सके।

इस मुलाकात को आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के साथ-साथ विकास परियोजनाओं को गति देने पर भी जोर दिया गया है। बिहार में बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार को प्राथमिकता देने पर सहमति बनने की बात कही जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक के बाद बिहार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि कैबिनेट विस्तार न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आने वाले चुनावों की रणनीति को भी प्रभावित करेगा।

64 आईएएस के बाद 30 सचिवालय अफसरों का बड़ा फेरबदल, कई विभागों में बदलाव

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लखनऊ

प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों का दौर लगातार जारी है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए सचिवालय सेवा के 30 अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इसमें 17 विशेष सचिव और 13 संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं, जिनके विभागों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब इससे पहले महज दो दिनों के भीतर 64 आईएएस अधिकारियों का भी बड़े पैमाने पर तबादला किया गया था। लगातार हो रहे इन तबादलों को सरकार की प्रशासनिक कसावट और कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

जारी सूची के अनुसार, कई अहम अधिकारियों को नए विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विनोद कुमार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से हटाकर सचिवालय प्रशासन में भेजा गया है, जबकि प्रभात कुमार को चिकित्सा शिक्षा से ऊर्जा विभाग में तैनाती दी गई है। आनंद प्रकाश सिंह को ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में भेजा गया है। इसके अलावा लाल बहादुर यादव को कृषि विभाग से उपभोक्ता मामले विभाग और विनय कुमार सिंह को पर्यावरण एवं वन विभाग से धर्मार्थ कार्य विभाग में स्थानांतरित किया गया है।

सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और विभागों में बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी योजनाओं और विकास कार्यों को गति देने के लिए अधिकारियों की नई तैनाती की गई है, ताकि विभिन्न विभागों में कार्यों का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर तबादले सरकार के कामकाज में तेजी लाने और जवाबदेही तय करने की मंशा को दर्शाते हैं। आने वाले समय में इन बदलावों का असर सरकारी योजनाओं के धरातल पर दिखने की उम्मीद जताई जा रही है।