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Saturday, February 28, 2026
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बाईपास पर चालान चक्रव्यूह जनता पिसी, सिस्टम बेफिक्र

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गड्ढे जस के तस, ओवरलोडिंग बेखौफ निशाने पर सिर्फ आम आदमी क्यों?

शाहजहाँपुर: हरदोई बाईपास (Hardoi Bypass) पर लागू रूट डायवर्सन अब यातायात (transportation) सुधार से अधिक राजस्व संग्रह अभियान बनता नजर आ रहा है। चौराहे पर तैनात ट्रैफिक कर्मियों की सक्रियता व्यवस्था संभालने से ज्यादा चालान काटने में दिखाई दे रही है। हरदोई बाईपास से रिलायंस गेट तक का इलाका इन दिनों दोपहिया चालकों और ई-रिक्शा संचालकों के लिए किसी चालान चक्रव्यूह से कम नहीं। ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने वाले मेहनतकश लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

आरोप है कि हेलमेट पहनने के बावजूद छोटी-छोटी तकनीकी खामियों के नाम पर चालान थमा दिए जा रहे हैं। महंगाई की मार से जूझते परिवारों के लिए यह आर्थिक आघात किसी सजा से कम नहीं। त्योहारों की दस्तक के बीच रोजी-रोटी की चिंता अलग, ऊपर से चालान की मार आम आदमी की जेब और मन दोनों पर बोझ बढ़ रहा है। विडंबना यह है कि जिन सड़कों पर नियमों का डंडा चल रहा है, वही सड़कें खुद बदहाली की गवाही दे रही हैं।

हरदोई बाईपास से रिलायंस गेट तक जगह-जगह गड्ढे मुंह बाए खड़े हैं। वाहन चालक बचते-बचाते निकलते हैं, पर गड्ढों की मरम्मत पर कोई तत्परता नहीं दिखती। सवाल उठता है क्या व्यवस्था सुधार केवल चालान से ही संभव है?शहर की सड़कों पर ओवरलोडिंग वाहन खुलेआम फर्राटा भर रहे हैं। नो-एंट्री में घुसकर जाम लगाने वालों पर कार्रवाई कम नजर आती है। नियमों का शिकंजा यदि है तो वह केवल बाइक और रिक्शा चालकों पर ही क्यों? क्या कानून का तराजू अलग-अलग वजन से तौला जा रहा है? इतना ही नहीं, कई सरकारी और प्रभावशाली वाहनों पर प्रदूषण प्रमाणपत्र, बीमा या हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का अभाव भी चर्चा में रहता है, पर उन पर कार्रवाई विरले ही दिखती है।

नियमों की विश्वसनीयता तभी कायम रहती है जब उनका पालन बिना भेदभाव के हो। यातायात अनुशासन आवश्यक है, परंतु अनुशासन का अर्थ केवल दंड नहीं, सुधार भी है। यदि सड़कें दुरुस्त हों, संकेतक स्पष्ट हों और नियमों का पालन सब पर समान रूप से लागू हो, तभी व्यवस्था पर विश्वास कायम होगा। अन्यथा जनता के मन में यह धारणा गहराती जाएगी कि बाईपास पर रूट डायवर्सन नहीं, राजस्व डायवर्सन चल रहा है।

चार बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज, पिता की अर्थी को दिया कंधा, किया अंतिम संस्कार

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कुशीनगर: एक श्मशान घाट, जहाँ आमतौर पर माहौल गमगीन भरा और चिताओं से धुएँ से भरा रहता है, वहाँ एक पारंपरिक रूढ़ि को तोड़ते हुए चार बहनों (Four daughters) ने अपने दिवंगत पिता की बाँस की अर्थी (bier) को अपने कंधों पर उठाया और उनका अंतिम संस्कार किया। पुरुष प्रधान समाज में, उनके पास अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए कोई भाई नहीं था। लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि उनके पास किसी चीज की कमी नहीं है। वे केवल एक शरीर नहीं उठा रही थीं; वे एक ऐसे पिता की विरासत को आगे बढ़ा रही थीं, जिन्होंने उन्हें न केवल अपनी बेटियाँ बल्कि अपनी ताकत बनने के लिए पाला-पोसा था।

इन बहनों ने अपने पिता की अंतिम यात्रा का भार उठाया, और सदियों से चली आ रही एक पुरानी रूढ़ि को तोड़ दिया। प्रथा के अनुसार, आत्मा के पारगमन को सुनिश्चित करने के लिए केवल एक पुरुष उत्तराधिकारी ही अंतिम संस्कार कर सकता है। हालाँकि, इन चार बहनों ने फैसला किया कि उनके पिता की विरासत को उनकी कमी – एक पुत्र – से नहीं, बल्कि उनके द्वारा सृजित प्रेम से परिभाषित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पदराउना में, बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जिला सचिव और विधानसभा सचिव रहे दिवंगत शंभू रावत की चार बेटियों ने गुरुवार को अपने पिता के शव को कंधा दिया और चिता को अग्नि दी। दिवंगत शंभू रावत के करीबी सहयोगी राममिलन निगम ने बताया कि रावत के कोई पुत्र नहीं थे। हालांकि, उनकी चारों पुत्रियों ने पुत्र के कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए चिता को अग्नि दी और अंतिम संस्कार की सभी जिम्मेदारियां निभाईं।

शंभू रावत की पत्नी, प्रोफेसर गीता देवी ने साहसपूर्वक परिवार का साथ दिया। उनकी सबसे बड़ी पुत्री पूजा पीएचडी की तैयारी कर रही हैं। उनकी दूसरी पुत्री सोनाली उच्च न्यायालय में वकालत कर रही हैं। अन्य दो पुत्रियां भी पढ़ाई कर रही हैं। जैसे ही पुत्रियां श्मशान घाट पहुंचीं, वातावरण में केवल लकड़ी के धुएं की ही गंध नहीं थी, बल्कि वहां मौजूद लोगों की सन्नाटे भरी खामोशी भी छा गई थी। बहनों ने जरा भी विचलित हुए नहीं। उन्होंने एक साथ चिता की परिक्रमा की और एक साथ मशाल को लकड़ी तक पहुंचाया। जैसे-जैसे लपटें उठीं, उन्होंने न केवल पिता के पार्थिव शरीर को भस्म किया, बल्कि एक कठोर सामाजिक वर्जना को भी जला दिया।

यह क्रोधपूर्ण विद्रोह का कार्य नहीं था, बल्कि कर्तव्य की एक शांत, गहन पुनर्स्थापना थी। उन्होंने सिद्ध किया कि पुत्र का कर्तव्य, अपने शुद्धतम रूप में, केवल एक बच्चे का प्रेम है। चिता की चमक में, भीड़ को अब चार महिलाएं किसी अनुष्ठान का उल्लंघन करती हुई नहीं दिख रही थीं—बल्कि चार बच्चे अपने माता-पिता का सम्मान करते हुए दिख रहे थे। वे उन्हें अंतिम विश्राम स्थल तक ले गए, और ऐसा करके, उन्होंने अपने समाज को अधिक करुणामय, समतापूर्ण भविष्य की ओर एक कदम और आगे बढ़ाया।

शहादत दिवस पर याद किए गए अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद

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फर्रुखाबाद: कायमगंज की प्रमुख सामाजिक संस्था राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम के तत्वावधान में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद (Amar Shaheed Chandrashekhar Azad) के बलिदान दिवस (Martyrdom Day) पर कृष्णा प्रेस परिसर सदवाड़ा में गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि न फांसी न जेल। आजाद हैं आजाद ही रहेंगे की पैज करके चंद्रशेखर आजाद अभिमन्यु की तरह अकेले आखिरी दम तक शत्रुओं से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। बलिदानी क्रांतिकारी किताबों में नहीं बल्कि राष्ट्र प्रेमियों के दिल में रहते हैं वे सत्य ही अमृत पुत्र होते हैं।

गीतकार पवन बाथम ने कहा कि देश को आजादी अहिंसा और प्रदर्शन से नहीं बल्कि युवकों के खून से नहा कर देश आजाद हुआ। क्रांतिकारियों के स्मरण मात्र से आज भी युवकों में बिजली सी दौड़ जाती है। प्रोफेसर कुलदीप आर्य ने कहा कि सनातन वैदिक दर्शन महान उद्देश्य के लिए प्राण उत्सर्ग करने की प्रेरणा देता है। पूर्व प्रधानाचार्य अहिबरन सिंह गौर ने कहा कि इतिहासकारों ने भारतीय क्रांति के इतिहास पर पर्दा डालने का अपराध किया। वर्तमान सरकार ने इस गलती को सुधार करने के प्रयास किए हैं।

आचार्य शिवकांत शुक्ला ने अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किए कि महाराणा प्रताप गुरु गोविंद सिंह शिवाजी बिरसा मुंडा रानी लक्ष्मीबाई चंद्रशेखर आजाद सरदार भगत सिंह जैसे महावीरों के आदर्श चरित्र पाठ्य क्रर्मों में शामिल करने से राष्ट्रीय चेतना जगेगी। भारत अजय होगा। डॉ सुनीत सिद्धार्थ ने कहा कि शीश रख कर के हथेली पर दीवाने चल दिए। नीव के पत्थर हुए आजाद भारत के लिए।। वीएस तिवारी एवं जे पी दुबे ने आजाद के बलिदान की रोमांचक घटना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण विश्व इतिहास में कहीं भी नहीं मिलेंगे।

अनुपम मिश्रा ने कहा… ये

तुमको शिक्षा से मिला आलस और प्रमाद। तुम क्या जानो किस तरह देश हुआ आजाद।।छात्र यशवर्धन ने भी काव्यपाठ किया । संयोजक वरिष्ठ कवि पवन बाथम ने शाहिद को काव्यांजलि अर्पित की।

बहराइच: दुष्कर्म के आरोपी की पुलिस स्टेशन में मौत, परिजनों ने किया विरोध प्रदर्शन

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बहराइच: बलात्कार के एक मामले में आरोपी एक व्यक्ति की गुरुवार रात बहराइच (Bahraich) जिले के रामगांव पुलिस स्टेशन (police station) में मौत हो गई, जिसके बाद उसके परिवार वालों और स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि रामगोपाल उर्फ ​​राकेश कुमार श्रीवास्तव, जो रामगांव का निवासी था, 22 फरवरी को उसके घर आया और कथित तौर पर उसकी 10 वर्षीय बेटी के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार किया।

गुरुवार रात स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) ने रामगोपाल को कुडवा चौराहा स्थित एक मेडिकल स्टोर से गिरफ्तार किया और पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन ले आए। हिरासत के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पहले दावा किया कि उसकी तबीयत बिगड़ गई थी और उसे उसके घर के पास छोड़ दिया गया था।

हालांकि, परिवार वालों ने आरोप लगाया कि पुलिस स्टेशन के अंदर उसे जहर दिया गया और पीट-पीटकर मार डाला गया। शुक्रवार तड़के करीब 2:00 बजे परिवार वाले उसे मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। क्रोधित परिजनों ने शव को पुलिस स्टेशन ले जाकर विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस पर हिरासत में हत्या का आरोप लगाया। तनाव बढ़ने और भारी भीड़ जमा होने पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चार पुलिस स्टेशनों से पुलिस बल तैनात किए गए।

सर्किल अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिलने के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। मृतक के पुत्र अनिकेत श्रीवास्तव द्वारा शुक्रवार को दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर एसएचओ गुरुसेन सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। निष्पक्ष जांच के लिए जांच को रामगांव पुलिस स्टेशन से बहराइच के कोतवाली देहात पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रामगोपाल, जो एक मेडिकल स्टोर चलाते थे, को कथित तौर पर पुलिस ने देर रात उनकी दुकान से उठाया था।

भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदा हुई रमजान के दूसरे जुमे की नमाज

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फर्रुखाबाद: मुकद्दस रमजान के के दूसरे जुमे (Friday) की नमाज (prayer of Ramadan) नगर की प्रमुख मस्जिदों में हकीकत के साथ तथा सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदा की गई। दोपहर बाद मस्जिदों में जुम्मे की नमाज पढ़ाई गई और किसी भी प्रकार की कोई भी अशांति नहीं पैदा हुई इस तरीके से सौहार्द की एक और मिसाल काम हो गई।रोजेदारों में विशेष श्रद्धा का माहौल देखा जा रहा है जुम्मे की नमाज की को लेकर से पुलिस प्रशासन सक्रिय बना रहा।मस्जिदों की सुरक्षा और जुमे की नमाज की व्यवस्था के लिए खासतौर से शहर कोतवाल के निर्देशन में सुरक्षा कर्मी तैनात रहे।

शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने नमाज व होली को लेकर पुलिस प्रशासन को अलर्ट जारी किया था कि मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गयी कोई भी अप्रिय घटना न हो। जिसका पालन किया गया।खास तौर से घुमना स्थित जामा मस्जिद को लेकर प्रशासन अधिक चिंता में रहा क्योंकि यहां पर नमाजियों की भारी भीड़ एकत्र होती है। इसके अलावा दरगाह हुसैनियां मुजीबिया, रानी साहब की मस्जिद ,आम वाली मस्जिद सुनहरी मस्जिद , जान अली काजी साहब की मस्जिद , फतेहगढ़ चौराहा मस्जिद समेत आने छोटी वाली मस्जिदों में नमाज अदा कराई गई है।

जिसमें बड़ी तादाद में रोजेदारों ने भागीदारी की ।शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने इन सभी स्थानों पर नमाज की व्यवस्था के लिए पुलिस बल की तैनाती की। इसके अलावा सादा वर्दी में भी पुलिस तैनात रही, साथ ही लोकल इंटेलीजेंस यूनिट के जवान भी पल-पल की जानकारी रखे रहे । मस्जिदों के प्रबंधक और इमाम नमाज की तैयारी के लिए पूरे दिन जुटे रहे। नमाज के समय सीसीटीवी कैमरे भी निगरानी रखी।इसके अलावा मोबाइल कैमरा की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई । डी एम व एसपी नमाज के दौरान पल-पल की जानकारी लेते रहे।

नवीन मंडी समिति कायमगंज में व्यापारियों के लिए नए भवन का हुआ शुभारंभ

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फर्रुखाबाद: नवीन मंडी समिति कायमगंज (Naveen Mandi Samiti Kaimganjमें नया ऑफिस खोला गया जिसमें आधुनिकता देखने को मिली। मंडी सचिव शैलेंद्र कुमार वर्मा ने उपस्थित रहकर सभु का स्वागत किया।

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय मंत्री,जिला अध्यक्ष आदेश अग्निहोत्री ने इस अवसर पर कहा कि नवीन भवन में

व्यापारियों के बैठने की समुचित व्यवस्था बहुत ही अच्छी है कोई भी बड़ा अधिकारी यदि मंडी समिति के कार्यालय में उपस्थित होता है और वह मीटिंग टाइप भी करता है अधिकांश व्यापारी वहां पर उपस्थित होकर बैठने की सारी व्यवस्थाएं बहुत ही अच्छी है।

जिला अध्यक्ष ने मंडी से संबंधित कुछ विषयों पर विस्तृत चर्चा की और कहां किसी भी व्यापारी को यदि कोई समस्या आती है तो मंडी सचिव के पास जाकर अपनी समस्या का निदान कर सकता है गर्मियां भी आ गई हैं पेयजल व्यवस्था भी ठीक है फ्रीजर भी लगे हुए हैं कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने सचिवसे अपील की कि सफाई व्यवस्था अच्छी करवा दें।

उद्योग व्यापार प्रतिदिन मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने भी आपस में विचार विमर्श किया मंडी की प्रमुख समस्याओं का भी उल्लेख किया नवीन कार्यालय को देखकर मंडी सचिव शैलेंद्र कुमार वर्मा को बधाई भी दी।

नवीन कार्यालय में उपस्थित निम्न प्रकार रही जिसमें प्रमुख रूप से मंडी सचिव शैलेंद्र कुमार वर्मा, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष आदेश अग्निहोत्री, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता, मंडी सहायक श्याम सिंह शाक्य, मंडी निरीक्षक अंकित बिसारिया जी, कंप्यूटर ऑपरेटर पुष्पेंद्र कुमार, रविंद्र कुमार, चौकीदार योगेश कुमार, ज्ञानेंद्र सिंह ,सचिन वर्मा, अमित सक्सेना लिपिक, प्रबंजन सिंह,आसिफ,राहुल कुमार,अनुज राठौर आज लोग उपस्थित रहे।