31 C
Lucknow
Tuesday, May 26, 2026
Home Blog

ओवर लोडेड ट्रांसफार्मर पर लगेंगे साइन बोर्ड, उपभोक्ताओं से विद्युत चोरी रोकने हेतु मांगा जायेगा सहयोग

0

लखनऊ: पड़ रही भीषड़ गर्मी में विद्युत आपूर्ति (power supply) में सबसे बड़ी समस्या ओवर लोडिंग है। जहॉ पर बार-बार ट्रांसफार्मर (transformers) क्षतिग्रस्त होने या विद्युत बाधित होने की समस्या हैं वहॉ कनेक्टेड लोड और सही लोड में बहुत अन्तर रहता है। जिसके कारण विद्युत उपकरण क्षतिग्रस्त होते हैं और आपूर्ति बाधित होती है। उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत मिले इसके लिये पावर कारपोरेशन ने ओवर लोडेड ट्रांसफार्मर पर साइन बोर्ड लगाकर उपभोक्ताओं को ओवर लोडिंग से अवगत कराने का निर्णय लिया है।

साइन बोर्ड में लिखा जायेगा कि इस ट्रांसफार्मर का कनेक्टेड लोड कितना है और सही में कितना बढ़ा लोड है। ऐसी स्थिति में चोरी की ज्यादा संभावना है। इससे स्थानीय उपभोक्ता से चोरी रोकने हेतु सहयोग मांगा जायेगा और उस क्षेत्र में चोरी रोकने हेतु जॉच करके लोड कम कराने का भी प्रयास किया जाएगा. अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं उ0प्र0 पावर कारपोरेशन अध्यक्ष डॉ0 आशीष गोयल ने इस व्यवस्था को तत्काल कर्यान्वित करने के निर्देश दिये हैं।

आज प्रदेश की विद्युत व्यवस्था की समीक्षा करते हुये अध्यक्ष ने आंधी एवं तूफान के कारण प्रदेश में अनेक स्थानों पर आये विद्युत व्यवधानों को ठीककर आपूर्ति बहाल करने के लिये युद्धस्तर पर प्रयास के निर्देश दिये। उन्होंने कहा जहॉ भी आपूर्ति आंधी-तूफान के कारण प्रभावित है उसकी सूचना मीडिया एवं उपभोक्ताओं को भी तुरन्त दी जानी चाहिए।

अध्यक्ष डॉ0 आशीष गोयल ने कहाकि इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। प्रदेश में विद्युत मांग अत्यधिक बढ़ गयी है। विगत 24 मई को प्रदेश में 31824 मेगावाट की रिकार्ड मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की गयी। इसमें अभी आगे और बढ़ने की संभावना है। लोग गर्मी से बेहाल हैं। ऐसे मौसम में सुचारू विद्युत आपूर्ति का अत्यधिक महत्व है। इसलिये सभी क्षेत्रों को निर्धारित शिड्यूल के अनुरूप विद्युत आपूर्ति प्राप्त हो इसलिये सभी अधिकारी एवं कार्मिक अपनेे-अपने क्षेत्रों में विशेष रूप से सजगता बरतें। उपकेन्द्रों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पेट्रोलिंग की जाये। जिन क्षेत्रों में रात्रि में अचानक लोड में अत्यधिक बढ़ोत्तरी होने के कारण ट्रांसफार्मर या लाइनों पर लोड बढ़ता है। ऐसे स्थानों को चिन्हित कर जॉच अभियान चलाने के निर्देश दिये।

अध्यक्ष ने कहाकि लाइनों सब स्टेशनों एवं ट्रांसफार्मर की रेग्यूलर जॉच होती रहे। 1912 पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो। नये कनेक्शन के लिये झटपट पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें। अध्यक्ष ने कहाकि गर्मी और लू के मौसम में सामान्य शटडाउन न लिये जाये। कहीं भी ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने, तार गिरने तथा ट्रिपिंग जैसी समस्याओं का बिना विलम्ब निस्तारण सुनिश्चित किया जाये।

उन्होंने कहाकि कि अधिकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में मौजूद रहें। अपना जनसम्पर्क अच्छा रखें। जन प्रतिनिधियों, मीडिया कर्मियों, उपभोक्ताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का वाट्सएप ग्रुप बनाइये जिसमें बिजली आपूर्ति सम्बन्धी आवश्यक सूचनायें सबको मिलती रहें। अधिक विद्युत व्यवधान वाले क्षेत्रों में विशेष सजगता बरती जाये। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर वरिष्ठ अधिकारी स्वंय जाकर समस्याओं को समझें और उनका निराकरण करायें साथ ही संचार माध्यमों से उपभोक्ता को बतायें।

अध्यक्ष ने कहाकि विद्युत वितरण कार्यों से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपभोक्ताओं को विद्युत व्यवधान और आपूर्ति के बारे में सही जानकारी दें। उन्नाव में बदले गए ट्रांसफार्मर मैं तेल न होने के संदर्भ में सही तथ्य से अवगत न करने के आरोप में उन्नाव के अधीक्षण अभियंता को एडवर्टाइज एंट्री देने के निर्देश दिए गए

आज पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार की अध्यक्षता में बिलिंग एजेंसियों की समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के समस्त विद्युत उपभोक्ताओं को शासन की मंशा के अनुरूप 100 प्रतिशत शुद्ध मीटर रीडिंग आधारित बिल उपलब्ध कराए जाने पर विशेष बल दिया । निर्देशित किया गया कि उपभोक्ताओं को सही एवं पारदर्शी बिलिंग सुनिश्चित करना सभी संबंधित एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है तथा किसी भी प्रकार की त्रुटिपूर्ण बिलिंग स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि सभी बिलिंग एजेंसियां अपने अनुबंध की शर्तों के अनुरूप संबंधित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में मानव संसाधन की तैनाती सुनिश्चित करें। जिन एजेंसियों द्वारा आवश्यक मानवबल उपलब्ध नहीं कराया गया है, उन्हें नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। साथ ही बिलिंग कार्यों में लापरवाही एवं खराब प्रदर्शन के कारण मैर्सस टेरा सॉफ्ट को उनके संबंधित क्लस्टरों में खराब कार्य निष्पादन हेतु नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में सभी मुख्य अभियंताओं (जोन) को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बिलिंग एजेंसियों के कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा नियमित रूप से करें तथा गुणवत्ता आधारित बिलिंग सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी निगरानी रखें। इसके अतिरिक्त, जिन क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण बिलिंग एवं बेहतर कार्य निष्पादन हो रहा है, उन “सक्सेस स्टोरी” क्षेत्रों के अनुभवों एवं कार्यप्रणाली को अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि प्रदेशभर में उपभोक्ताओं को बेहतर एवं विश्वसनीय बिलिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

घर के अंदर बने तहखाने में चल रही थी अवैध गन फैक्ट्री, संचालक गिरफ्तार, हथियार बरामद

0

भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज पुलिस (Sultanganj Police) ने अपराध की दुनिया पर बड़ा प्रहार करते हुए एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री (illegal mini gun factory) का खुलासा किया है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान न केवल भारी मात्रा में हथियार बनाने के उपकरण और अर्ध-निर्मित हथियार बरामद किए हैं बल्कि मौके से एक आरोपी को भी रंगे हाथों दबोचा है।

​सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के स्तनडीह गांव में अवैध हथियार बनाने की गुप्त सूचना पुलिस को मिली थी। इस सूचना के आधार पर प्रशिक्षु एएसपी सह सुल्तानगंज थानाध्यक्ष सायम रजा के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने स्तनडीह निवासी मुकेश कुमार मंडल (पिता: फेकन मंडल, वार्ड-12) के घर को चारों तरफ से घेरकर छापेमारी की।

​पुलिस जब घर के अंदर पहुंची तो दंग रह गई। आरोपी ने घर के भीतर एक गुप्त तहखाना बना रखा था जहां बैठकर वह हथियारों का निर्माण कर रहा था। पुलिस की दबिश के समय आरोपी वहीं हथियार बनाने में जुटा था, जिसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। ​छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से हथियारों का जखीरा बरामद किया है जो इस बात का संकेत है कि यहां बड़े पैमाने पर हथियारों की तस्करी की योजना थी। बरामद सामानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

​इस बड़ी कामयाबी के बाद पुलिस अब आरोपी से सख्ती से पूछताछ कर रही है। सायम रजा ने बताया कि आरोपी द्वारा पूर्व में किन-किन लोगों को हथियार बेचे गए हैं और इस धंधे में और कौन-कौन से अपराधी जुड़े हैं इसका पता लगाया जा रहा है। पुलिस इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में काम कर रही है। इस गिरफ्तारी से क्षेत्र में अवैध हथियारों की सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ेगा।

 

 

34 साल पुराने DTC केस में बस कंडक्टर को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने बहाली के दिए आदेश

0

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 34 साल पुराने एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के एक बर्खास्त बस कंडक्टर को राहत दी है। यह मामला महज 20 रुपये की कथित गड़बड़ी से जुड़ा था, जिसमें आरोप था कि कंडक्टर ने यात्रियों से पैसे लेने के बावजूद उन्हें टिकट नहीं दिया। इस घटना के बाद उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। मामला वर्षों तक विभिन्न अदालतों में चलता रहा और कंडक्टर को करीब 34 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। अब हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उसकी सेवा बहाली का आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने डीटीसी को निर्देश दिया है कि बस कंडक्टर को नौकरी पर बहाल किया जाए। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंडक्टर की गलती को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी कारण कोर्ट ने आदेश दिया कि उसे बैक वेजेस (पिछला वेतन) का भुगतान नहीं किया जाएगा।

अदालत की पीठ ने माना कि बस कंडक्टर की पुनः बहाली का आदेश जांच प्रक्रिया में कुछ खामियों के कारण दिया जा रहा है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि 20 रुपये की गड़बड़ी हुई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी बस कंडक्टर की बनती है। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे नौकरी पर बहाल करने का आदेश तो दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसे इसकी “कीमत” चुकानी होगी। इसी कारण उसे बैक वेजेस (पिछले वेतन) का लाभ नहीं दिया जाएगा।

मामले में अदालत ने पाया कि जांच टीम ने कई अहम प्रक्रियात्मक कमियां की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, उन यात्रियों को गवाह नहीं बनाया गया जिन्होंने कथित रूप से कंडक्टर को पैसे दिए थे। इसके अलावा, विवादित 20 रुपये की राशि भी कंडक्टर से बरामद नहीं की गई। इन्हीं कमियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि आरोप पूरी तरह संदेह से परे साबित नहीं हो पाए। इसी आधार पर कंडक्टर को संदेह का लाभ (benefit of doubt) दिया गया और उसे सेवा में बहाल करने का आदेश पारित किया गया।

मामले में कड़कड़डूमा स्थित श्रम न्यायालय और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट दोनों ने यह माना था कि बस कंडक्टर की ओर से कुछ अनियमितताएं हुई थीं। इसी आधार पर अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया कि कंडक्टर बैक वेजेस (बकाया वेतन) और वरिष्ठता जैसे लाभों का हकदार नहीं है। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया में खामियों और सीमित राहत को ध्यान में रखते हुए बहाली का आदेश दिया, लेकिन आर्थिक लाभ देने से इनकार किया गया।

जानकारी के अनुसार, आरोपी बस कंडक्टर 24 अप्रैल 1992 को बादशाहपुर रूट पर ड्यूटी पर था। उसी दौरान दिल्ली परिवहन निगम की निरीक्षण टीम ने बस को रोककर यात्रियों की टिकट जांच की। जांच में पाया गया कि बस में सवार 5 यात्रियों से कंडक्टर ने 2-2 रुपये लिए थे, लेकिन उन्हें टिकट जारी नहीं किया गया था। इसी तरह भोंडसी में हुए दूसरे निरीक्षण के दौरान भी 5 यात्रियों से 2-2 रुपये लेने के बावजूद टिकट नहीं दिए जाने की बात सामने आई। निरीक्षण टीम ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट विभाग को सौंपी, जिसके बाद दिल्ली परिवहन निगम ने कंडक्टर को सेवा से बर्खास्त कर दिया।

 

“कॉकरोच जनता पार्टी” : राजनीतिक व्यंग्य या लोकतांत्रिक विमर्श का पतन?

0

विशेष टिप्पणी

शरद कटियार

भारतीय राजनीति में व्यंग्य, कटाक्ष और प्रतीकों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। कभी “पप्पू”, कभी “फेंकू”, कभी “टुकड़े-टुकड़े गैंग” और अब “कॉकरोच जनता पार्टी” जैसे शब्द राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाए जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र में विरोध का स्तर अब विचारों से हटकर केवल अपमानजनक ब्रांडिंग तक सीमित होता जा रहा है? और क्या इस तरह की राजनीतिक शब्दावली वास्तव में लोकतंत्र को मजबूत करती है या फिर उसे भीतर से कमजोर करती है?

हाल के समय में “कॉकरोच” शब्द को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जो विवाद उठा, उसने राजनीतिक संवाद की गिरती भाषा पर नई बहस छेड़ दी है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ राजनीतिक और वैचारिक समूह विरोधियों को अमानवीय और हास्यास्पद दिखाने के लिए ऐसे प्रतीकों का सुनियोजित इस्तेमाल कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि लोकतंत्र में वैचारिक विरोध को “घृणा आधारित पहचान” में बदलने की खतरनाक शुरुआत है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी की राजनीति ने भारतीय चुनावी विमर्श में आक्रामक मीडिया प्रबंधन, प्रतीकात्मक राजनीति और सोशल मीडिया नैरेटिव को नए स्तर पर पहुंचाया। आंदोलन से निकली पार्टी होने के कारण उसने शुरू में व्यवस्था विरोधी राजनीति का लाभ उठाया, लेकिन समय के साथ उसके विरोधियों का आरोप रहा कि पार्टी ने “नैतिक राजनीति” के बजाय “नैरेटिव राजनीति” को अधिक प्राथमिकता दी। इसी संदर्भ में “कॉकरोच जनता पार्टी” जैसे शब्दों को भी देखा जा रहा है।

लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल की आलोचना होना स्वाभाविक है। सत्ता और विपक्ष दोनों को जनता के सवालों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जब आलोचना तथ्यों, नीतियों और जनहित से हटकर केवल उपहास और मनोवैज्ञानिक हमले का रूप लेने लगे, तब लोकतांत्रिक संस्कृति कमजोर होने लगती है। क्योंकि लोकतंत्र विरोधी विचार को समाप्त करने की नहीं, बल्कि उससे बहस करने की व्यवस्था है।

सबसे बड़ा खतरा यह है कि ऐसी भाषा समाज को वैचारिक रूप से विभाजित कर देती है। समर्थक और विरोधी दो ऐसे शिविरों में बंट जाते हैं जहां संवाद की जगह नफरत ले लेती है। सोशल मीडिया पर ट्रेंड और ट्रोल संस्कृति इसी मानसिकता को और तेज करती है। राजनीतिक दलों के आईटी सेल और समर्थक समूह विरोधियों को इंसान नहीं, “मीम” और “टारगेट” की तरह पेश करने लगते हैं। इससे लोकतांत्रिक असहमति का स्तर लगातार गिरता जाता है।

यह भी सच है कि आज की राजनीति में ध्यान खींचने के लिए विवाद पैदा करना एक रणनीति बन चुका है। गंभीर आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा कम होती जा रही है, जबकि वायरल शब्द और आक्रामक बयानबाजी ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है। बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान और कानून व्यवस्था जैसे विषय कई बार पीछे छूट जाते हैं और राजनीति “कौन किसे क्या कह गया” तक सीमित हो जाती है।

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता और बहस की संस्कृति रही है। यहां विचारधाराएं टकराती रही हैं, लेकिन संविधान ने हर पक्ष को बोलने का अधिकार दिया। यदि राजनीतिक संवाद का स्तर लगातार गिरता गया, तो भविष्य में लोकतंत्र विचारों का मंच नहीं, बल्कि अपमान और प्रचार का अखाड़ा बन जाएगा।

इसलिए “कॉकरोच जनता पार्टी” जैसे शब्दों पर बहस केवल किसी एक दल या बयान तक सीमित नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति का आईना है जिसमें मुद्दों की जगह प्रतीक, तर्क की जगह ट्रोलिंग और संवाद की जगह मनोवैज्ञानिक युद्ध लेता जा रहा है। लोकतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन विरोध का स्तर यदि मानवीय गरिमा और संवैधानिक मर्यादा से नीचे चला जाए, तो अंततः नुकसान पूरे लोकतांत्रिक ढांचे का होता है।

दहेज प्रताड़ना से तंग आकर नवविवाहिता ने चौथी मंजिल से लगाईं छलांग, चली गई जान, ससुराल पक्ष पर लगे गंभीर आरोप

0

नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके मुस्तफाबाद (Mustafabad) से बेहद दर्दनाक खबर सामने आ रही है। जहां एक 25 साल की नवविवाहिता ने दहेज़ प्रताड़ना (dowry harassment) से तंग आकर चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। घटना के बाद मृतिका के परिवार ने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि विवाह के कुछ समय बाद ही महिला को दहेज के प्रताड़ित किया जाने लगा था जिसकी उसने कई बार शिकायत की थी।

पुलिस के मुताबिक यह घटना सोमवार की है। महिला को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में पता चला कि महिला ने करीब तीन महीने पहले अपनी पसंद से विवाह किया था। परिवार का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ समय बाद हालात बदलने लगे।

मृतका के परिजनों का आरोप है कि शादी के लगभग एक महीने बाद पति और उसके परिवार की ओर से सोने के गहनों और नकदी की मांग की जाने लगी। जब इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो महिला पर मानसिक दबाव बढ़ने लगा। परिवार का दावा है कि पिछले कुछ सप्ताह से वह काफी तनाव में थी और लगातार परेशान रह रही थी।

परिजनों का यह भी कहना है कि महिला ने कई बार अपनी परेशानी का जिक्र किया था। उनका आरोप है कि मानसिक प्रताड़ना का असर उसकी स्थिति पर साफ दिखाई देने लगा था। घटना के बाद परिवार ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फिलहाल जांच एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर पड़ताल कर रही हैं। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ-साथ अन्य साक्ष्य भी जुटा रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े तथ्यों को एकत्र किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घटना ने इलाके के लोगों को झकझोर दिया है और कई सवाल पीछे छोड़ दिए हैं।

 

कंपिल में भक्ति और आस्था का उमड़ा सैलाब, दो दिवसीय धार्मिक परिक्रमा श्रद्धा के साथ शुरू

0

 

कंपिल (फर्रुखाबाद)।
पौराणिक तीर्थ नगरी कंपिल में मंगलवार को दो दिवसीय धार्मिक परिक्रमा का शुभारंभ भक्ति, श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। परिक्रमा में सैकड़ों साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूरे नगर में ‘हर-हर महादेव’ और ‘राधे-राधे’ के जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
परिक्रमा का नेतृत्व कालेश्वर नाथ मंदिर के महंत सत्यगिरि महाराज ने किया। यह परिक्रमा कालेश्वर नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर फुलू नगला, भोगपुर, अकराबाद, हमीरपुर, काजी रुदायन और मानिकपुर होते हुए वेदू अड्डा पहुंचेगी, जहां संतजन रात्रि विश्राम करेंगे। दूसरे दिन परिक्रमा बेदू बाबा आश्रम और शेखपुर से गुजरते हुए कालेश्वर नाथ विसर्जन स्थल पर संपन्न होगी।
महंत सत्यगिरि महाराज ने बताया कि पौराणिक नगरी कंपिल में इस परिक्रमा का आयोजन वर्ष 2014 से निरंतर किया जा रहा है। हर वर्ष बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु इसमें शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित करते हैं और क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं को सशक्त बनाते हैं।
परिक्रमा के दौरान आसपास के जनपदों से आए साधु-संतों ने भजन-कीर्तन करते हुए पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया। जगह-जगह नगरवासियों और ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर संतों का भव्य स्वागत किया और जलपान की व्यवस्था कर सेवा भाव का परिचय दिया।
इस धार्मिक आयोजन में महानंद, सतीश दास, रामपाल गिरी, भगवान दास, सत्यपाल गिरि, प्रेम गिरि सहित सैकड़ों संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। परिक्रमा को लेकर क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है, जिससे कंपिल की धार्मिक गरिमा और भी प्रखर हो उठी है।