नई दिल्ली: दिल्ली सरकार (Delhi government) ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुराने और जर्जर स्कूल भवनों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के नेतृत्व में सरकार ने 108 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल भवनों को असुरक्षित घोषित किया है। सरकार का कहना है कि इन इमारतों की स्थिति चिंताजनक थी और कई भवन इतने पुराने हो चुके थे कि किसी भी समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ था।
बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए इन स्कूल भवनों की जांच कर यह निर्णय लिया गया है। दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। असुरक्षित घोषित किए गए स्कूल भवनों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा, वैकल्पिक व्यवस्था और भवनों के सुधार को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली सरकार की ओर से कराए गए प्रारंभिक आकलन में 108 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल भवनों को असुरक्षित और खतरनाक श्रेणी में चिन्हित किया गया है। जांच में सामने आया कि इनमें से 54 इमारतें बेहद जर्जर स्थिति में हैं, जिनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। सरकार ने इनमें से 7 स्कूल भवनों को प्राथमिकता के आधार पर गिराने की मंजूरी दे दी है। इन इमारतों को अगले कुछ महीनों में ध्वस्त कर उनकी जगह आधुनिक, भूकंपरोधी और सुरक्षा मानकों के अनुरूप नए स्कूल भवन बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को सभी मौजूदा स्कूल भवनों की सुरक्षा जांच कराने और उनके पुनर्निर्माण या मरम्मत की लागत का विस्तृत आकलन करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा 14 अन्य स्कूल भवनों के लिए भी विस्तृत स्ट्रक्चरल ऑडिट के प्रस्ताव भेजे गए हैं। इनकी तकनीकी जांच पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि संबंधित भवनों की मरम्मत की जाएगी या उन्हें ध्वस्त कर नए भवन बनाए जाएंगे।
दिल्ली सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से बेहद जर्जर पाए गए 7 स्कूल भवनों को तत्काल गिराने की मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार, इन भवनों को अगले कुछ महीनों में चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त किया जाएगा। इन पुरानी इमारतों की जगह भूकंपरोधी आधुनिक तकनीक से G+4 (ग्राउंड प्लस चार मंजिला) स्कूल भवन बनाए जाएंगे। नए भवनों का निर्माण सभी मौजूदा सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जाएगा, ताकि छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए संबंधित स्कूलों में वैकल्पिक कक्षाओं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की पहले से योजना बनाई जाएगी, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के जारी रह सकें। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी असुरक्षित भवन में छात्रों को पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।








