41.2 C
Lucknow
Sunday, July 5, 2026
Home Blog

शौर्य और बलिदान की मिसाल बना मौधा, शहीद स्मारक की वर्षगांठ पर 44 अमर वीरों को दी श्रद्धांजलि

0

 

फर्रुखाबाद। जिले का मौधा गांव एक बार फिर देशभक्ति, शौर्य और बलिदान की भावना का साक्षी बना। शहीद स्मारक की स्थापना दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में भारतीय सेना के अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 44 अमर वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी एवं जनसेवक अभय सिंह ने की। मौधा उनका पैतृक गांव है और वे प्रत्येक वर्ष शहीदों की स्मृति में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कराते हैं।

समारोह में राजपूताना राइफल्स के कर्नल ए.पी. चौहान मुख्य रूप से मौजूद रहे। उन्होंने शहीदों के परिजनों और पूर्व सैनिकों को सम्मानित करते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सैनिकों का त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, शहीद परिवार, युवा और ग्रामीण शामिल हुए।

मौधा गांव को पूरे प्रदेश में ‘फौजी गांव’ के नाम से भी जाना जाता है। यहां की मिट्टी में देशभक्ति की ऐसी परंपरा है कि बेटे के शहीद होने पर परिवार मातम नहीं, बल्कि देश के लिए बलिदान पर गर्व करता है। यही कारण है कि यह गांव लंबे समय से सेना को वीर सपूत देता आ रहा है।

गांव का शहीद स्मारक देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले 44 वीर जवानों की स्मृति में बनाया गया है। इन वीरों ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) के अभियान तक विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों में सर्वोच्च बलिदान दिया। इस स्मारक का लोकार्पण 5 जुलाई 2015 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री Rajnath Singh ने किया था।

मौधा की पहचान केवल शहीदों के गांव के रूप में ही नहीं, बल्कि सेना को निरंतर जवान देने वाले गांव के रूप में भी है। वर्तमान में गांव के 350 से अधिक युवा भारतीय सेना की विभिन्न रेजिमेंटों में सेवा दे रहे हैं, जबकि 200 से अधिक पूर्व सैनिक गांव में निवास कर रहे हैं। सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना यहां के युवाओं के लिए परंपरा और गौरव का विषय माना जाता है।

समाजसेवी अभय सिंह ने कहा कि शहीदों का सम्मान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की स्थायी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि शहीद स्मारक के निर्माण और उसके संरक्षण के लिए वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शहीदों के सम्मान में आयोजित इस अभियान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ही उन्होंने वर्ष 2015 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह को मौधा बुलाकर शहीद स्मारक का लोकार्पण कराया था।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और शहीदों के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया तथा अमर वीरों को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

26 ग्राम पंचायतों में करोड़ों की गड़बड़ी पर डीएम का बड़ा एक्शन

0

दो माह में हिसाब दो, नहीं तो होगी रिकवरी और कार्रवाई

फर्रुखाबाद। जनपद की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 2024-25 की लेखा परीक्षा (ऑडिट) में 26 ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। ऑडिट के दौरान करीब पांच करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि से संबंधित पत्रावलियां और अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे पूरे मामले को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सख्त रुख अपना लिया है।

डीएम के निर्देश पर संबंधित प्रधानों, प्रशासकों एवं तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सभी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि दो माह के भीतर जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के समक्ष सभी मूल अभिलेख, भुगतान विवरण, कार्यों का रिकॉर्ड एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए अथवा स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ अधिभार (रिकवरी), विभागीय कार्रवाई और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ी वित्तीय अनियमितता कमालगंज ब्लॉक की गदनपुर तुर्रा ग्राम पंचायत में सामने आई है, जहां ₹93,05,909 का अधिभार आरोपित किया गया है। इसके अलावा गंगाइच में ₹68,65,000, नसरतपुर नौगांव में ₹61,50,000, अहिमलापुर में ₹61,18,000, सियापुर में ₹48,69,000, अजीजलपुर में ₹45,11,000, भोजपुर में ₹41,98,729, नहरैया में ₹36,56,000, उस्मानगंज में ₹32,33,000, शमसाबाद के लोहापानी में ₹26,02,353, करीमगंज में ₹24,61,000, श्रृंगीरामपुर में ₹22,73,000, नैगवां में ₹18,43,141, नगला सेठ में ₹17,73,339, भिड़ौर में ₹14,03,578, लौआ नगला मानपट्टी में ₹12,02,000 तथा फतेहउल्लापुर में ₹11,66,000 का अधिभार लगाया गया है। अन्य ग्राम पंचायतों की भी जांच जारी है।

जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च की गई धनराशि के वाउचर, बिल, माप पुस्तिका, भुगतान अभिलेख और अन्य वित्तीय दस्तावेज ऑडिट टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए। कई मामलों में भुगतान का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी भुगतान और गबन की आशंका और अधिक गहरा गई है। प्रशासन अब प्रत्येक आपत्ति की बिंदुवार जांच कराएगा और दोष तय होने पर संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले भी जनपद की 16 ग्राम पंचायतों में गेटवे पोर्टल का उपयोग किए बिना लगभग ₹29.82 लाख का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया था, जिस पर शासन ने संज्ञान लिया था। इसके बावजूद कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई न होने के कारण अब प्रशासन ने इस बार सख्त रुख अपनाया है।

जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी धन में किसी भी प्रकार की हेराफेरी, वित्तीय अनियमितता या अभिलेख छिपाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई भी प्रधान, सचिव या संबंधित अधिकारी जवाब देने में विफल रहता है या अभिलेख प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डीएम के इस सख्त रवैये के बाद संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधानों और सचिवों में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि प्रशासन पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।

विकसित भारत-जी राम जी की केंद्र ने पहली किस्त की जारी

0

 

बोले शिवराज मजदूरों को समय पर काम देने के लिए राज्य अपना हिस्सा दें, दिए ₹25,863 करोड़

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए मनरेगा की जगह लागू की गई नई ‘विकसित भारत-जी राम जी (VB G RAM G)’ योजना के तहत राज्यों के लिए ₹25,863 करोड़ की पहली मदर सेंक्शन किस्त जारी कर दी है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को योजना की औपचारिक शुरुआत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने अपने हिस्से का बजट जारी कर दिया है। अब राज्य सरकारें भी समय पर अपना अंशदान जारी करें, ताकि ग्रामीण मजदूरों को बिना किसी देरी के काम और मजदूरी मिल सके।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 30 जून को मनरेगा योजना समाप्त हो गई और 1 जुलाई से विकसित भारत-जी राम जी योजना पूरे देश में बिना किसी व्यवधान के लागू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि मनरेगा को पूरे देश में लागू होने में तीन वर्ष लगे थे, जबकि नई योजना पहले ही दिन से देशभर में प्रभावी हो गई। सरकार का उद्देश्य है कि काम मांगने वाले किसी भी मजदूर को एक घंटे भी बिना रोजगार के इंतजार न करना पड़े।

नई योजना के तहत ग्रामीण मजदूरों को अब 100 दिन के बजाय 125 दिन का रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही मजदूरी में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है और देश के किसी भी राज्य में ₹300 प्रतिदिन से कम मजदूरी नहीं दी जाएगी। सरकार ने अगले पांच वर्षों में 2.86 लाख ग्राम पंचायतों में ₹7 लाख करोड़ से अधिक का निवेश कर गांवों में आधारभूत ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा है।

योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन, डिजिटल उपस्थिति (डिजिटल हाजिरी) और जियो-टैगिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अनिवार्य किया गया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और भुगतान में अनियमितताओं पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। राज्यों की निगरानी और तकनीकी सहयोग के लिए ‘एरिया ऑफिसर्स’ की भी नियुक्ति की गई है।

ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि योजना के तहत रोजगार मांगने के 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित अवधि में काम नहीं दिया जाता है तो पात्र मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। वहीं मजदूरी का भुगतान भी 15 दिनों के भीतर सीधे बैंक खाते में किया जाएगा।

उन्होंने समीक्षा के दौरान आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और केरल की सराहना करते हुए कहा कि इन राज्यों ने पहले ही सप्ताह में बड़ी संख्या में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया है। साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी पंचायत स्तर पर अधिक से अधिक कार्य शुरू कर ग्रामीणों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराने की अपील की। सरकार का कहना है कि यह नई योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

विहिप के पत्र का स्वागत, संजय सिंह बोले- हमारी नहीं तो कम से कम परिषद की बात पर हो कार्रवाई

0

 

नई दिल्ली

अयोध्या राम मंदिर निर्माण से जुड़ी भूमि खरीद के कथित घोटाले का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार द्वारा जांच अधिकारी को लिखे गए पत्र का स्वागत करते हुए कहा कि यदि विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है तो कम से कम वीएचपी की ओर से उठाए गए सवालों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर भूमि खरीद प्रकरण को लेकर वे लंबे समय से जांच की मांग करते रहे हैं। अब जब विश्व हिंदू परिषद की ओर से भी पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की बात कही गई है तो सरकार और संबंधित एजेंसियों को बिना किसी पक्षपात के पूरे मामले की जांच करानी चाहिए।

हालांकि उन्होंने वीएचपी की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पत्र में केवल चुनिंदा लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे विनय कटियार समेत कई अन्य नामों का उल्लेख नहीं किया गया। उनके अनुसार नामों का यह चयन निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है और पूरे मामले की व्यापक जांच होनी चाहिए।

आप सांसद ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारियों पर भूमि खरीद में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं के अपने पुराने आरोप दोहराए। उन्होंने दावा किया कि कम कीमत वाली जमीनों को दस्तावेजों में अधिक मूल्य दिखाकर खरीदा गया और इस संबंध में वह पहले ही केंद्रीय जांच एजेंसियों को विस्तृत शिकायत सौंप चुके हैं।

संजय सिंह ने ट्रस्ट पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश-विदेश से आने वाले कई श्रद्धालुओं से दान लिया गया, लेकिन उन्हें आधिकारिक रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच शुरू होती है तो कई लोग स्वयं आगे आकर बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने को तैयार हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। वहीं, इस पूरे प्रकरण में ट्रस्ट की ओर से पहले भी आरोपों को निराधार बताया जाता रहा है। फिलहाल वीएचपी के पत्र के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।

2027 मिशन में जुटी भाजपा,

0

 

NDA सहयोगियों संग नितिन नवीन की मैराथन बैठक

लखनऊ।प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को लखनऊ में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों के नेताओं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग दौर की महत्वपूर्ण बैठकें कीं। बैठकों में आगामी चुनाव की रणनीति, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और गठबंधन को और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, अपना दल (एस) की नेता अनुप्रिया पटेल के पति एवं कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल तथा राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के महासचिव त्रिलोक त्यागी से करीब 10-10 मिनट तक अलग-अलग मुलाकात की। बैठक के बाद संजय निषाद, ओम प्रकाश राजभर और आशीष पटेल ने स्पष्ट किया कि बातचीत के दौरान सीटों के बंटवारे पर कोई चर्चा नहीं हुई। उनका कहना था कि बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार करना और गठबंधन को और मजबूत बनाना था।

बैठकों के दौरान संगठन विस्तार, सामाजिक समीकरण, विभिन्न वर्गों तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया। भाजपा नेतृत्व ने सहयोगी दलों से समन्वय बढ़ाने और संयुक्त रूप से चुनावी तैयारी में जुटने का आह्वान किया।

इसी क्रम में भाजपा नेता अपर्णा यादव ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। नितिन नवीन ने उनके पति प्रतीक यादव के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई।

इससे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ भी अहम बैठक की। सूत्रों के अनुसार बैठक में प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, बदलते जातीय समीकरणों, संगठन की मजबूती और आगामी चुनावी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं के अनुभवों और सुझावों को भी गंभीरता से सुना।

हालांकि इस बैठक में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विनय कटियार की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।

भाजपा नेतृत्व की इन लगातार बैठकों को उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की औपचारिक चुनावी तैयारी की शुरुआत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी अभी से संगठन और सहयोगी दलों के साथ तालमेल मजबूत कर चुनावी बढ़त बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

क्रिकेटर बनने का जुनून: तीन स्कूली छात्र घर से निकले, मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम तक पहुँचे, सुरक्षित लौटने पर परिजनों ने ली राहत की सांस

0

फर्रुखाबाद। सपनों को हकीकत में बदलने की चाह कई बार लोगों से ऐसे फैसले करा देती है, जिनके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। ऐसा ही एक मामला जनपद के नवाबगंज कस्बे से सामने आया, जहां हाईस्कूल के तीन छात्र क्रिकेटर बनने का सपना लेकर बिना किसी को बताए घर से निकल पड़े। अचानक उनके लापता होने से परिजनों में हड़कंप मच गया और पुलिस भी उनकी तलाश में जुट गई। हालांकि कई दिनों की चिंता के बाद तीनों छात्र सकुशल घर लौट आए, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार वीआरएम इंटर कॉलेज में अध्ययनरत तीन मित्र—सत्यम शाक्य, अहम और आयुष—कोचिंग जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। काफी तलाश के बाद भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला तो परिजनों ने नवाबगंज थाने पहुंचकर गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई। सूचना मिलते ही पुलिस ने छात्रों की तलाश शुरू कर दी और उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई।
जांच के दौरान सामने आया कि तीनों छात्रों का सपना एक सफल क्रिकेटर बनने का था। इसी जुनून में उन्होंने शमसाबाद रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ी और पहले मथुरा, फिर दिल्ली होते हुए मुंबई पहुंच गए। बताया जा रहा है कि तीनों अपने साथ लगभग आठ-आठ हजार रुपये लेकर निकले थे, जिनसे उन्होंने जनरल श्रेणी का टिकट लेकर यात्रा पूरी की।
मुंबई पहुंचने के बाद तीनों सीधे देश के प्रसिद्ध वानखेड़े स्टेडियम पहुंचे, जहां वे क्रिकेट ट्रायल में शामिल होना चाहते थे। लेकिन स्टेडियम में प्रवेश के दौरान पहचान पत्र और आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। आधार कार्ड उपलब्ध न होने के कारण उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं मिल सकी। सपना अधूरा रह जाने पर तीनों छात्रों ने वापस लौटने का फैसला किया और दिल्ली के रास्ते शनिवार सुबह नवाबगंज पहुंच गए।
घर लौटने की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तीनों छात्रों से पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने पूरी घटना बताई, जिसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर पुलिस ने उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।