हर जिले में होंगे कैंप, गंभीर बीमारियों की पहचान कर मिलेगा इलाज
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लखनऊ। प्रदेश में श्रमिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए Yogi Adityanath सरकार 28 अप्रैल से प्रदेश के सभी जिलों में सात दिवसीय ‘श्रमिक स्वास्थ्य मेला’ आयोजित करने जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य श्रमिक वर्ग के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की जांच करना, गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान करना और जरूरतमंदों को बेहतर उपचार के लिए संबंधित अस्पतालों में रेफर करना है।
इस संबंध में अपर मुख्य सचिव Amit Kumar Ghosh ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, प्रमुख चिकित्साधीक्षकों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश जारी कर मेले की व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार का मानना है कि श्रमिक वर्ग की सेहत बेहतर हुए बिना ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है, इसलिए इस वर्ग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन मेलों में श्रमिकों की सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ टीबी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, त्वचा रोग, आंखों की बीमारी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की भी स्क्रीनिंग की जाएगी। खासतौर पर टीबी जैसी गंभीर बीमारी के मरीजों की पहचान पर जोर रहेगा, ताकि उन्हें समय रहते इलाज मिल सके और संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।
मेले में डॉक्टरों की टीम द्वारा परामर्श, जरूरी दवाइयों का वितरण और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जिन मरीजों में गंभीर बीमारी के लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाएगा। साथ ही, श्रमिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और कार्यस्थल पर सुरक्षा के उपायों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
सरकार की इस पहल को श्रमिकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अक्सर आर्थिक तंगी और जागरूकता की कमी के कारण वे समय पर इलाज नहीं करा पाते हैं। यह स्वास्थ्य मेला न केवल बीमारियों की पहचान करेगा, बल्कि उन्हें समय पर उपचार दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, प्रदेशव्यापी यह अभियान श्रमिकों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे लाखों मजदूरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है और राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और मजबूत बनाया जा सकेगा।







