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Sunday, April 19, 2026
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सीतापुर में छत के पंखे से लटका मिला किशोरी का शव, चोरी के बाद हत्या की आशंका, 5 लाख रुपये गायब

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सीतापुर: यूपी के सीतापुर (Sitapur) के महमूदबाद कोतवाली क्षेत्र के बेहता छावनी वार्ड में एक घर के अंदर 14 वर्षीय लड़की मृत अवस्था में पाई गई, जिससे हत्या (murder) की आशंका बढ़ गई है। पीड़िता की पहचान वसीम बानो के रूप में हुई है, जो छत के पंखे से दुपट्टे से लटकी हुई मिली। पुलिस ने रविवार को बताया कि घर का मुख्य दरवाजा टूटा हुआ था और लगभग 5 लाख रुपये नकद गायब हैं।

कमलापुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के भामेरा गांव की निवासी वसीम बानो हाल ही में महमूदबाद में अपने चाचा के घर रहने आई थी। घटना के समय वह घर पर अकेली थी, क्योंकि परिवार के अन्य सदस्य एक रिश्तेदार से मिलने लखनऊ गए हुए थे। शनिवार रात लौटने पर परिवार ने दरवाजा टूटा हुआ और लड़की का शव कमरे में लटका हुआ पाया। दृश्य देखकर वे स्तब्ध रह गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी।

परिवार को संदेह है कि लूटपाट के बाद लड़की की हत्या की गई है। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से दो मोबाइल फोन बरामद किए, जिनमें से एक कथित तौर पर उस्मान का है, जो परिवार से जुड़े एक पोल्ट्री फार्म में काम करता है। फोन से मिले सुरागों के आधार पर एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामला संदिग्ध है और आत्महत्या और हत्या, दोनों पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण पता चलेगा। परिवार और हिरासत में लिए गए संदिग्ध के बयान अलग-अलग हैं और आगे की जांच जारी है। घटना के बाद स्थानीय विधायक आशा मौर्य ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की।

महिला आरक्षण, परिसीमन और भाजपा पर बरसे अखिलेश यादव

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– बोले “सरकार जनता की नब्ज समझने में नाकाम”

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी का पारा चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए संसद से लेकर सड़क तक के मुद्दों पर सवाल खड़े किए हैं। उनके बयानों ने न केवल महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे संवेदनशील विषयों को फिर चर्चा में ला दिया है, बल्कि सरकार की नीयत और नीतियों पर भी सीधा प्रहार किया है।

अखिलेश यादव ने कहा कि परिसीमन बिल का पास न होना इस बात का संकेत है कि सरकार जनता की वास्तविक इच्छा का प्रतिनिधित्व करने में विफल रही है। उनका साफ कहना है कि संसद में हार केवल राजनीतिक हार नहीं बल्कि जनभावनाओं की अनदेखी का प्रमाण है।

महिला आरक्षण को लेकर उन्होंने भाजपा की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस बिल के जरिए महिलाओं की एकता को तोड़कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस प्रक्रिया के खिलाफ है जिसमें पारदर्शिता और सामाजिक न्याय की कमी है। उन्होंने कहा कि बिना सही जनगणना के आरक्षण लागू करना खुद एक बड़ी विसंगति होगी—“जब गिनती ही गलत होगी तो आरक्षण कैसे सही होगा?”

युवा राजनीति और लोकतांत्रिक ढांचे पर भी उन्होंने चिंता जताई। छात्रसंघ चुनावों के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालयों में चुनाव नहीं होंगे तो राजनीति की नर्सरी ही खत्म हो जाएगी, जिससे भविष्य का नेतृत्व कमजोर होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं को राजनीति से दूर रखने के लिए लगातार षड्यंत्र किए जाते रहे हैं।

भाजपा की रणनीति पर हमला करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि “भय और अविश्वास फैलाने की राजनीति अब ज्यादा दिन नहीं चलेगी।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा समाज में विभाजन पैदा कर सत्ता बनाए रखना चाहती है।

लखनऊ के विकासनगर में लगी आग को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस घटना के पीछे भाजपा से जुड़े लोगों की भूमिका हो सकती है। साथ ही राजधानी में तालाबों और जमीनों पर कब्जे के आरोप लगाकर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतीकों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि लाल रंग भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ा हुआ है, जिसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।

अखिलेश यादव ने यह भी दोहराया कि महिला आरक्षण के खिलाफ विपक्ष कभी नहीं रहा, बल्कि पहले भी इस बिल का समर्थन किया गया था। उन्होंने सरकार से मांग की कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और स्पष्ट नीति सुनिश्चित की जाए, ताकि वास्तविक सामाजिक न्याय संभव हो सके।

फिलहाल इन बयानों के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

रिटायरमेंट के 9 माह बाद भी सरकारी आवास पर कब्जा आज हुआ खाली

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– डीएम की सख्त कार्रवाई—पूर्व अवर अभियंता से वसूले जाएंगे ₹1.32 लाख
– पेंशन पर चला शिकंजा

फर्रुखाबाद: जिले में प्रशासनिक ढिलाई और भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका सनसनीखेज खुलासा उस समय हुआ जब सेवानिवृत्ति के 9 महीने बाद भी एक पूर्व अवर अभियंता सरकारी आवास पर अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठा मिला। मामला नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय के विनियमित क्षेत्र से जुड़े पूर्व अवर अभियंता दीपेंद्र सिंह पाल उर्फ डी.के. सिंह का है, जिस पर न सिर्फ सरकारी संपत्ति पर कब्जा बनाए रखने बल्कि पद के प्रभाव का दुरुपयोग कर आम लोगों से ठगी करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

रविवार को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उक्त सरकारी आवास को खाली करा लिया। इस दौरान मौके पर प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में कब्जा हटवाया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर विभाग को ₹1,32,000 की वसूली नोटिस जारी की गई है, जिसे अब दीपेन्द्र सिंह पाल डी. के.की पेंशन से बसूला जायेगा।

चौंकाने वाली बात यह है कि 30 जून 2025 को सेवा से निवृत्त होने के बावजूद आरोपी पूर्व अवर अभियंता लगातार सरकारी आवास में रह रहा था और विभागीय कार्यों में हस्तक्षेप भी कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक, उसने अपने पुराने रसूख का इस्तेमाल करते हुए नगर के व्यापारियों और आम नागरिकों को नोटिस के नाम पर डराया-धमकाया और अवैध वसूली की। कई व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि उनसे लाखों रुपये की ठगी की गई, लेकिन डर और दबाव के चलते वे खुलकर सामने नहीं आ सके।

प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आरोपी के हौसले बुलंद होते गए। यही वजह रही कि रिटायरमेंट के बाद भी वह सरकारी सिस्टम में सक्रिय बना रहा और अपने प्रभाव का दुरुपयोग करता रहा।

जिलाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा और पद का दुरुपयोग किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए हैं, जिसमें यह भी देखा जाएगा कि आखिर इतने लंबे समय तक प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और किन अधिकारियों की लापरवाही इसमें शामिल रही।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल आवास खाली कराना और वसूली नोटिस देना ही पर्याप्त कार्रवाई है, या फिर इस पूरे प्रकरण में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई भी होगी? क्योंकि जिस तरह से आम जनता को निशाना बनाकर ठगी की गई है, वह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

जिले में यह मामला अब चर्चा का केंद्र बन गया है। लोग खुले तौर पर कह रहे हैं कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो न तो सरकारी आवास पर कब्जा इतना लंबा चलता और न ही आम जनता को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले को आखिर कितनी दूर तक ले जाता है और दोषियों पर क्या ठोस कार्रवाई होती है।

बांकुरा में बोले PM मोदी– TMC के गुंडों को 4 मई से पहले आत्मसमर्पण करने का आखिरी मौका

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बांकुरा: पश्चिम बंगाल के बांकुरा (Bankura) में 19 अप्रैल 2026 को एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने TMC सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने TMC को “भय-काल” और “भ्रष्टाचार की जननी” कहा, साथ ही महिला आरक्षण, घुसपैठ और 4 मई (चुनाव परिणाम) से पहले टीएमसी के गुंडों को आत्मसमर्पण की चेतावनी दी। उन्होंने कहा टीएमसी की ‘निर्मम सरकार’ के खिलाफ लोगों के गुस्से में जोश झलक रहा है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि देश के विकास को सुनिश्चित करने के लिए हम चाहते हैं कि अधिक से अधिक महिलाएं राजनीति में शामिल हों।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि 2029 में महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक पारित होने से रोकने के लिए टीएमसी ने कांग्रेस के साथ साजिश रची, उन्हें कांग्रेस द्वारा दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीएमसी और कांग्रेस दोनों आदिवासी विरोधी हैं, और राष्ट्रपति चुनाव के दौरान द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए थे।

टीएमसी, घुसपैठियों को फायदा पहुंचाने के लिए हर कानून तोड़ती है और धर्म के आधार पर आरक्षण देती है, महिला सशक्तिकरण का विरोध करती है। टीएमसी कुर्मी समुदाय की शिकायतों को नहीं सुनती, बल्कि अपने वोट बैंक को आरक्षण देना चाहती है।

अपनी जनसभा में पीएम मोदी ने कहा कि मैं टीएमसी के गुंडों को चुनाव से पहले पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आखिरी मौका देता हूं, क्योंकि 4 मई को चुनावी परिणाम आने के बाद किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि बंगाल चुनाव के नतीजे ऐतिहासिक होंगे क्योंकि जनता टीएमसी के ‘भय’ को खत्म करेगी और भाजपा के ‘भरोसे’ को जनादेश देगी। बांकुरा में चुनावी रैली में मोदी ने कहा कि अगर बंगाल में भाजपा सत्ता में आती है, तो वह पीएमएवाई के तहत महिलाओं को घर बनाने के लिए 1.5 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तो महिलाओं को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। अगर किसी महिला के परिवार में किसी को गुर्दे की बीमारी है, तो उन्हें सरकारी अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। इसका एक भी रुपया खर्च नहीं होगा। बंगाल की बहनों को हर साल 36,000 रुपये मिलेंगे। गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये दिए जाएंगे।

केंद्र सरकार भी बहनों को संतान प्राप्ति के बाद उनकी बेटियों की शिक्षा के लिए 5,000 रुपये देगी। कुल मिलाकर 50,000 रुपये दिए जाएंगे… मुद्रा योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 20 लाख रुपये मिलेंगे। कृषि से जुड़ी महिलाओं को सालाना 9,000 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे… भाजपा की दो इंजन वाली सरकार बंगाल की बहनों को दोहरा जनादेश देने जा रही है।’

बिरला मंदिर के साये में शराब का धंधा! शिकायत के बाद जागा आबकारी विभाग- स्थानांतरण के आदेश जारी

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मथुरा/ब्रज क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आस्था और प्रशासन आमने-सामने खड़े दिखाई दिए। शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बिरला मंदिर के ठीक समीप शराब की दुकान संचालित होने का मामला तूल पकड़ गया है। यह दुकान न सिर्फ मंदिर के पास बल्कि पुलिस चौकी से सटकर चल रही थी, जिससे कानून व्यवस्था और धार्मिक मर्यादा दोनों पर सवाल खड़े हो गए।

पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब सनातन धर्म रक्षापीठ वृंदावन के पीठाधीश्वर और कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर औपचारिक शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि धार्मिक स्थल के इतने करीब शराब की बिक्री श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है।

जांच में आबकारी विभाग ने जो रिपोर्ट दी, उसने और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। विभाग ने अपने मानकों का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्थल से 50 मीटर की दूरी पर शराब की दुकान खोली जा सकती है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। बिरला मंदिर के आसपास प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक मौजूद रहते हैं, जिनकी आवाजाही 100 मीटर से कहीं अधिक क्षेत्र में फैली रहती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर के बाहर जहां छात्राएं कराटे प्रशिक्षण लेने आती हैं, वहीं पास में शराब की दुकान का संचालन सामाजिक वातावरण को दूषित कर रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दुकान पुलिस चौकी के ठीक बगल में चल रही थी, जिससे प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में आ गई।

विरोध केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा। कई सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने इस मुद्दे को उठाया, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह सवाल और गहराया कि आखिर किसके संरक्षण में यह दुकान संचालित हो रही थी?

हालांकि लगातार दबाव और शिकायत के बाद आखिरकार आबकारी विभाग को झुकना पड़ा। विभाग ने संबंधित लाइसेंसी को दुकान स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। लेकिन इस पूरे प्रकरण ने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है—क्या केवल 50 मीटर का नियम धार्मिक आस्थाओं की रक्षा के लिए पर्याप्त है? और क्या प्रशासनिक मानक जमीनी संवेदनशीलता से पूरी तरह कट चुके हैं?

ब्रज जैसे संवेदनशील धार्मिक क्षेत्र में इस तरह के मामलों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि यह स्थानांतरण आदेश कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू होता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

अक्षय तृतीया पर चारधाम यात्रा का शुभारंभ

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गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले, गूंजे ‘जय मां गंगा-यमुना’ के जयकारे

उत्तरकाशी। पवित्र अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया। आज सुबह वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और भक्ति भाव के साथ गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इसके साथ ही चारधाम यात्रा 2026 की औपचारिक शुरुआत हो गई है।
कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। “हर-हर गंगे” और “जय मां यमुना” के जयकारों से पूरा धाम भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया। निर्धारित मुहूर्त पर दोपहर 12:15 बजे गंगोत्री मंदिर के कपाट खोले गए, जबकि यमुनोत्री धाम में भी विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद दर्शन प्रारंभ हुए। इस दौरान श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गई, जिससे पूरा वातावरण और अधिक दिव्य हो उठा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने और उन्होंने प्रदेशवासियों व देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
चारधाम यात्रा की शुरुआत से पहले मां गंगा की उत्सव डोली भैरव घाटी से विशेष पूजा-अर्चना के बाद गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई। मंदिर समिति के अनुसार, गंगा पूजन, सहस्रनाम पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात कपाट खोले गए। पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं ने गंगोत्री पहुंचकर मां गंगा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
प्रशासन की ओर से यात्रा मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस, एसडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। साथ ही, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के लिए भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जल्द ही वहां भी कपाट खोल दिए जाएंगे।
चारधाम यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और परिवहन क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलता है।
इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे पंजीकरण कराकर ही यात्रा करें और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।