– बढ़ीं प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा की चिंताएं
नई दिल्ली। इंस्टाग्राम (मेटा) के नए एआई फीचर को लेकर दुनियाभर में गोपनीयता पर बहस तेज हो गई है। कंपनी के नए “Muse Image” एआई टूल के तहत सार्वजनिक इंस्टाग्राम प्रोफाइल की तस्वीरों का उपयोग AI आधारित इमेज बनाने के लिए किया जा सकता है। इस फीचर के डिफॉल्ट रूप से सक्रिय होने पर प्राइवेसी विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा संस्थाओं ने गंभीर चिंताएं जताई हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का इंस्टाग्राम अकाउंट पब्लिक है और वह 18 वर्ष से अधिक आयु का है, तो अन्य लोग एआई प्रॉम्प्ट में उसका सार्वजनिक प्रोफाइल टैग कर एआई जनरेटेड तस्वीरें तैयार कर सकते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित यूजर को अलग से कोई नोटिफिकेशन भी नहीं मिलेगा। हालांकि, प्राइवेट अकाउंट और 18 वर्ष से कम आयु के यूजर्स इस फीचर से स्वतः बाहर रखे गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की एआई तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी तस्वीरें, पहचान की चोरी,सोशल इंजीनियरिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराध बढ़ सकते हैं। साइबर अपराधी किसी व्यक्ति की एआई से तैयार तस्वीरों का इस्तेमाल फर्जी प्रोफाइल बनाने, ब्लैकमेल करने या लोगों को धोखा देने के लिए कर सकते हैं।
इस बीच भारत सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव ने कहा है कि सरकार यह जांच करेगी कि मेटा का नया AI फीचर भारतीय कानूनों और डेटा सुरक्षा नियमों के अनुरूप है या नहीं।
साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि आप अपनी तस्वीरों का एआई उपयोग नहीं चाहते हैं, तो,
अपना इंस्टाग्राम अकाउंट प्राइवेट करें।
सेटिंग्स में जाकर एआई /कंटेंट शेयरिंग से जुड़े विकल्पों की समीक्षा करें और आवश्यकता अनुसार Opt-out करें।
अनजान लोगों की फॉलो रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें।
संदिग्ध लिंक और फर्जी प्रोफाइल से सावधान रहें।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में इंस्टाग्राम की प्राइवेसी नीतियों को लेकर पहले भी बहस हुई थी। कंपनी ने 2026 में इंस्टाग्राम डायरेक्ट मैसेज के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सपोर्ट को भी समाप्त कर दिया था, जिसके बाद यूजर्स की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर सवाल उठे थे।








