लखनऊ। उत्तर प्रदेश के रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर में इन दिनों कर्मचारियों और प्रशासन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों की फरवरी माह की सैलरी लंबित होने और कार्य व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, होली से पहले वेतन भुगतान के दावे किए गए थे, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि अब तक उन्हें वेतन नहीं मिला है। इससे आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो पूरी तरह इस आय पर निर्भर हैं।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब रामनवमी की छुट्टी के दिन भी कार्यालय खोलने का आदेश जारी किया गया। इसके साथ ही 26 से 31 मार्च तक सभी कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह आदेश 5-दिवसीय कार्य प्रणाली के विपरीत है और वीकेंड में भी काम करने का दबाव बनाया जा रहा है।
इस पूरे मामले में केंद्र के निदेशक रमेश चंद्र की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि वेतन भुगतान और कार्य आवंटन में असमानता बरती जा रही है, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार अपनी समस्याएं उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसके चलते अब उन्होंने जांच और उचित कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
मामले ने तूल पकड़ लिया है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो विरोध प्रदर्शन की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर में विवाद गहराया
मेडिकल कॉलेज में ब्लड सेपरेटर यूनिट शुरू, स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बड़ा बल
कन्नौज। जनपद के मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ब्लड सेपरेटर यूनिट का शुभारंभ किया गया। इस यूनिट का उद्घाटन प्रदेश सरकार में मंत्री असी अरुण द्वारा किया गया।
इस अवसर पर तिर्वा विधायक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने इस पहल को क्षेत्र के लिए बेहद लाभकारी बताया। अधिकारियों और चिकित्सकों की उपस्थिति में यूनिट का विधिवत शुभारंभ किया गया।
ब्लड सेपरेटर यूनिट के शुरू होने से अब मरीजों को एक ही रक्त से विभिन्न घटक—जैसे प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और रेड ब्लड सेल्स—अलग-अलग उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इससे गंभीर मरीजों, विशेषकर डेंगू, थैलेसीमिया और अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को समय पर उपचार मिल सकेगा।
पहले इस तरह की सुविधा के लिए मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही यह सुविधा मिलने से समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी।
मंत्री असी अरुण ने कहा कि सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को गांव और कस्बों तक सुलभ बनाना है, और इस यूनिट की स्थापना उसी दिशा में एक अहम कदम है।
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और इसे जनपद के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।
ट्रक से टकराई रोडवेज की अनुबंधित बस, 10 यात्री घायल
सीतापुर। जनपद के कमलापुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार को एक रोडवेज की अनुबंधित बस ट्रक से टकरा गई, जिससे बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में करीब 10 यात्रियों को हल्की चोटें आई हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस अपने निर्धारित मार्ग पर जा रही थी तभी अचानक सामने चल रहे ट्रक से उसकी टक्कर हो गई। टक्कर के बाद बस में बैठे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। चिकित्सकों के अनुसार सभी की स्थिति सामान्य है और किसी को गंभीर चोट नहीं आई है।
पुलिस ने दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर हादसे की वजह लापरवाही या तेज रफ्तार मानी जा रही है, हालांकि वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
हादसे के चलते कुछ समय के लिए मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में पुलिस ने सुचारू रूप से चालू कराया।
विधानसभा उपसमिति की जांच में नक्शों में बड़ा खेल उजागर, 17 में 16 मामलों में गड़बड़ी
फर्रुखाबाद। शहर क्षेत्र में जमीन के नक्शों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। विधानसभा उपसमिति की जांच में सामने आया है कि 17 मामलों में से 16 में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं, जिससे नगर नियोजन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
उपसमिति द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया गया, जिसमें जमीन के नक्शों और वास्तविक स्थिति के बीच भारी अंतर देखने को मिला। कई मामलों में नक्शों में बदलाव, गलत अनुमोदन और नियमों की अनदेखी के संकेत मिले हैं।
जांच में सामने आया कि कई स्थानों पर स्वीकृत नक्शों के विपरीत निर्माण कार्य किया गया है, जबकि कुछ मामलों में बिना उचित अनुमति के ही नक्शों को परिवर्तित कर दिया गया। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि पूरे मामले में मिलीभगत से इन अनियमितताओं को अंजाम दिया गया है।
नगर नियोजन विभाग सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपसमिति ने संकेत दिए हैं कि मामले की गहराई से जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से शहर में इस तरह की गड़बड़ियां हो रही थीं, लेकिन अब पहली बार किसी उच्चस्तरीय जांच में यह खुलकर सामने आई हैं।
फिलहाल उपसमिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसे विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अवैध खनन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, जेसीबी और 4 डंपर जब्त
संभल। जनपद के हयातनगर थाना क्षेत्र के जंगलों में चल रहे अवैध खनन पर प्रशासन ने बड़ी छापेमार कार्रवाई की। सूचना के आधार पर पहुंची टीम को देखते ही खनन माफिया मौके से फरार हो गए, लेकिन प्रशासन ने मौके से एक जेसीबी मशीन और चार डंपर बरामद कर लिए।
अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से हयातनगर क्षेत्र के जंगलों में अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थीं। इसी के चलते खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान खनन कार्य में प्रयुक्त भारी मशीनरी और वाहन मौके पर मिले, जिन्हें तत्काल कब्जे में ले लिया गया।
छापेमारी की भनक लगते ही खनन माफिया मौके से भागने में सफल रहे, हालांकि प्रशासन अब उनकी पहचान कर गिरफ्तारी की तैयारी में जुटा है।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में खनन माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है। प्रशासन का कहना है कि अवैध खनन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस तरह की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
अधिकारियों ने साफ किया है कि जब्त किए गए वाहनों के मालिकों और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही क्षेत्र में निगरानी और बढ़ा दी गई है, ताकि दोबारा इस तरह की गतिविधियां न हो सकें।
जेवर एयरपोर्ट बनेगा यूपी की अर्थव्यवस्था का गेमचेंजर, 1 ट्रिलियन लक्ष्य को मिलेगा रफ्तार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट एक निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है। इसे प्रदेश के 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य का “गेमचेंजर” माना जा रहा है, जो कृषि, उद्योग और व्यापार—तीनों क्षेत्रों में व्यापक बदलाव लाएगा।
जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से प्रदेश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। यह न केवल यात्री परिवहन बल्कि कार्गो और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। अनुमान है कि इसकी वार्षिक यात्री क्षमता करीब 7 करोड़ होगी, जबकि लगभग 10 लाख टन कार्गो हैंडलिंग की सुविधा विकसित की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट के चलते प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा मिलेगी। छोटे और मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे निर्यात में वृद्धि होगी। इसके साथ ही कृषि उत्पादों को भी तेजी से देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि संभव है।
जेवर एयरपोर्ट का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह रोजगार सृजन का भी बड़ा केंद्र बनेगा। निर्माण से लेकर संचालन तक लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, एयरपोर्ट के पूर्ण संचालन के बाद प्रदेश की जीडीपी में 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है, जो इसे देश के अग्रणी आर्थिक राज्यों में और मजबूत स्थिति दिलाएगा।
सरकार का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हब के रूप में स्थापित करेगा, जहां से वैश्विक कनेक्टिविटी के जरिए निवेश, व्यापार और पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।
कुल मिलाकर, जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक भविष्य को बदलने वाला एक बड़ा इंजन साबित होने जा रहा है।








