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Thursday, March 12, 2026
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ईरान में लड़कियों के स्कूल पर हमले को लेकर अमेरिका में उठे सवाल, 40 से अधिक सीनेटरों ने पेंटागन से मांगा जवाब

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वाशिंगटन: ईरान में लड़कियों के एक स्कूल पर हुए हमले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी संसद के 40 से अधिक सीनेटरों ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए पेंटागन से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। सांसदों का कहना है कि इस हमले में बड़ी संख्या में मासूम बच्चों की मौत हुई है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराना बेहद जरूरी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह घटना ईरान के मिनाब क्षेत्र में हुई, जहां लड़कियों के एक प्राथमिक विद्यालय पर एयरस्ट्राइक की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि इस हमले में 7 से 12 वर्ष की कई बच्चियों सहित बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।

अमेरिका के कई सांसदों ने इस हमले को लेकर रक्षा विभाग से जवाब तलब किया है। उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी मांगी है और यह स्पष्ट करने को कहा है कि आखिर यह हमला किन परिस्थितियों में हुआ।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख सांसदों में सीनेटर क्रिस वैन होलेन, टिम केन, एलिजाबेथ वॉरेन और ब्रायन शैट्ज शामिल हैं। इसके अलावा सीनेट डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर समेत 40 से अधिक सांसदों ने इस पत्र का समर्थन किया है।

सांसदों ने अपने पत्र में कहा है कि ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई को कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिली थी। ऐसे में इस तरह के हमलों को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध की स्थिति में भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवीय मूल्यों का पालन किया जाना चाहिए।

सीनेटरों ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि जिस हमले की खबर सामने आई है उसमें बड़ी संख्या में मासूम बच्चियां हताहत हुई हैं। उनका कहना है कि आम नागरिकों, खासकर बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

सांसदों ने पेंटागन से यह भी मांग की है कि इस घटना की स्वतंत्र जांच कराई जाए और जांच के नतीजों को सार्वजनिक किया जाए। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि यदि किसी प्रकार की गलती या लापरवाही सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

मिनाब में जिस स्कूल पर हमला होने की बात कही जा रही है, वह एक नौसैनिक ठिकाने के नजदीक स्थित बताया जा रहा है। इसी कारण सांसदों ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या हमले के दौरान लक्ष्य की पहचान ठीक से की गई थी और क्या आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सावधानी बरती गई थी।

सांसदों ने यह भी जानना चाहा है कि इस सैन्य कार्रवाई की योजना बनाते समय क्या किसी प्रकार की आधुनिक तकनीक या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग किया गया था। उन्होंने यह भी पूछा है कि यदि एआई आधारित लक्ष्य निर्धारण किया गया था तो उसकी पुष्टि के लिए क्या सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे।

इस बीच अमेरिकी मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सांसदों ने बताया कि 10 मार्च तक जारी संघर्ष में 1,245 से अधिक आम नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं।

सांसदों ने यह भी चिंता जताई कि युद्ध के दौरान अस्पतालों, सांस्कृतिक धरोहर स्थलों और अन्य जरूरी ढांचों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। उनका कहना है कि आबादी वाले क्षेत्रों में भारी हथियारों के इस्तेमाल से आम नागरिकों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।

वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हमले से जुड़ी सभी परिस्थितियों की जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

यूपी में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं: तेल कंपनियों का दावा, मुख्यमंत्री योगी की अफवाहों से बचने की अपील

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लखनऊ: प्रदेश में एलपीजी सिलिंडर की कथित किल्लत को लेकर मचे हंगामे के बीच तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। कंपनियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को घबराने या जरूरत से ज्यादा स्टॉक करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के समूह ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई नियमित रूप से जारी है और वितरण व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि अफवाहों के कारण अनावश्यक खरीदारी या अतिरिक्त बुकिंग करने से बचें।

स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर संजय भंडारी के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बावजूद प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ा है। सभी डिपो और एजेंसियों को नियमित रूप से आपूर्ति भेजी जा रही है।

आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 4.85 करोड़ घरेलू एलपीजी उपभोक्ता हैं। इनमें सबसे अधिक उपभोक्ता बड़े शहरों में हैं।

लखनऊ में करीब 15 लाख घरेलू एलपीजी उपभोक्ता हैं, जबकि प्रयागराज, आगरा, गोरखपुर और गाजियाबाद ऐसे प्रमुख जिले हैं जहां बड़ी संख्या में घरेलू गैस उपभोक्ता रहते हैं। इन पांच जिलों में मिलाकर लगभग 65 लाख उपभोक्ता हैं।

प्रदेश में घरेलू एलपीजी की औसत दैनिक मांग लगभग 10 हजार मीट्रिक टन बताई जा रही है। वहीं व्यावसायिक और औद्योगिक श्रेणी में प्रतिदिन करीब 0.5 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की मांग रहती है।

व्यावसायिक और औद्योगिक एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या घरेलू उपभोक्ताओं की तुलना में कम है, लेकिन मांग स्थिर बनी हुई है। बड़े शहरों में होटल, उद्योग और संस्थानों के कारण इसकी खपत अधिक रहती है।

प्रदेश में एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति के लिए करीब 4143 डिस्ट्रीब्यूटर काम कर रहे हैं। इनमें से 116 डिस्ट्रीब्यूटर अकेले लखनऊ में ही संचालित हो रहे हैं। कंपनियों का कहना है कि सभी एजेंसियों को पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जा रहा है।

कुछ उपभोक्ताओं ने आईवीआरएस फोन लाइन व्यस्त रहने की शिकायत की है। इस पर कंपनियों ने सलाह दी है कि उपभोक्ता एसएमएस, मिस्ड कॉल या मोबाइल ऐप जैसे डिजिटल माध्यमों से भी गैस सिलिंडर की बुकिंग कर सकते हैं।

इस बीच योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेशवासियों से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत को लेकर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ईंधन और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों की नियमित जांच कर आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाए।

राज्य सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से किल्लत की जो खबरें फैल रही हैं, उनमें कई भ्रामक हैं। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाहों से बचें।

शंकराचार्य से मिले अखिलेश यादव, भाजपा पर साधा निशाना; एलपीजी संकट और नकली संतों को लेकर दिया बयान

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को राजधानी में स्वामी अभियुक्तेश्वरानन्द से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आशीर्वाद लिया और प्रदेश की राजनीति तथा मौजूदा मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि असली संतों से मिलने का उद्देश्य आशीर्वाद लेना है और समय आने पर नकली संतों का अंत हो जाएगा।

अखिलेश यादव ने कहा कि संत समाज का हमेशा से समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि देश और समाज के लिए काम करने वाले सच्चे संतों से मिलकर सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और समाज में सही संदेश जाता है।

इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हर अच्छी योजना का विरोध करती है और पिछली सरकारों के जनहित के कामों को भी बंद करवा देती है।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि जब प्रदेश में उनकी सरकार थी तब डेयरी और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई थीं। इन योजनाओं का उद्देश्य गरीबों को रोजगार देना और पशुपालन को मजबूत करना था।

उन्होंने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान प्रदेश में पहला काऊ मिल्क प्लांट स्थापित किया गया था, जिससे किसानों और पशुपालकों को फायदा मिलना शुरू हुआ था। लेकिन वर्तमान सरकार ने उस योजना को बंद करवा दिया, जिससे कई लोगों की आजीविका प्रभावित हुई।

अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी पहले भी गायों के संरक्षण और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए काम करती रही है और भविष्य में भी इस दिशा में निर्णय लिए जाएंगे।

मीडिया के एक सवाल पर उन्होंने प्रदेश के उपमुख्यमंत्रियों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा की एक बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्रियों को डांटकर बाहर कर दिया गया था, क्योंकि वहां आगामी चुनावों को लेकर चर्चा होनी थी।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के कुछ नेता जहां से चुनाव लड़ते हैं वहां जीतना भी उनके लिए मुश्किल हो जाता है। इसलिए पार्टी के भीतर भी कई तरह की राजनीतिक खींचतान देखने को मिल रही है।

अखिलेश यादव ने देश में एलपीजी गैस को लेकर पैदा हुए संकट पर भी केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के गलत फैसलों के कारण लोगों को गैस की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर लोग गैस सिलिंडर के लिए लंबी लाइन में खड़े होने को मजबूर हैं और कुछ इलाकों में तो लोग मजबूरी में फिर से चूल्हा और भट्ठी जलाने लगे हैं।

सपा प्रमुख ने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद में भी एलपीजी को लेकर लोगों में मारामारी की स्थिति बन रही है। लोग गैस सिलिंडर पाने के लिए आपस में झगड़ रहे हैं।

उन्होंने अंत में कहा कि सरकार को इस समस्या का जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सामान्य तरीके से जारी रह सके।

काशी की आध्यात्मिकता में डूबीं अभिनेत्री निम्रत कौर

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– घाटों की सैर और गंगा आरती का लिया अद्भुत अनुभव

वाराणसी: निम्रत कौर इन दिनों आध्यात्मिक नगरी वाराणसी की यात्रा पर हैं। हिंदी फिल्मों और अंतरराष्ट्रीय टेलीविजन में अपनी खास पहचान बना चुकी अभिनेत्री ने इस दौरान काशी की संस्कृति, आध्यात्मिकता और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया।

वाराणसी पहुंचने के बाद निम्रत कौर ने सबसे पहले बनारस की प्रसिद्ध सर्दियों की मिठाई मलइयो का स्वाद लिया। यह मिठाई बनारस की खास पहचान मानी जाती है और सर्दियों के मौसम में ही बनती है। अभिनेत्री ने इस स्थानीय व्यंजन की खूब सराहना करते हुए इसे बेहद स्वादिष्ट बताया।

अपने प्रवास के दौरान उन्होंने पवित्र गंगा नदी में नाव की सवारी करते हुए शहर के ऐतिहासिक घाटों का दीदार किया। नाव यात्रा के दौरान उन्होंने काशी के कई प्रसिद्ध घाटों की भव्यता और वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को करीब से महसूस किया। गंगा के शांत जल और घाटों की अद्भुत छटा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।

अभिनेत्री ने काशी के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भी हिस्सा लिया। इस दौरान वह आम श्रद्धालुओं के बीच बैठकर आरती का दर्शन करती नजर आईं।

गंगा आरती के समय मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और दीपों की रोशनी से पूरा वातावरण आध्यात्मिकता से भर उठा। आरती का यह दिव्य दृश्य देखकर निम्रत कौर भावुक हो गईं और उन्होंने कहा कि काशी में गंगा आरती देखना उनके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।

उन्होंने बताया कि गंगा आरती के दौरान उन्हें गहरी शांति और सुकून का अनुभव हुआ। उनके अनुसार काशी की यह आध्यात्मिक अनुभूति इतनी अद्भुत है कि इसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना कठिन है।

निम्रत कौर की यह यात्रा एक बार फिर साबित करती है कि वाराणसी की आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत देश-विदेश के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती रहती है।

गैस सिलेंडर की आपूर्ति सामान्य, कालाबाजारी करने वालों पर होगा मुकदमा: डीएम

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प्रयागराज: घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कमी की अफवाहों के बीच प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिले में गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। जिला प्रशासन के अनुसार मांग के अनुरूप पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध हैं और वितरण व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है।

जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि जिले में तेल कंपनियों द्वारा 144 गैस एजेंसियों के माध्यम से नियमित रूप से घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सिलेंडर की मांग और आपूर्ति के बीच किसी प्रकार की समस्या नहीं है।

डीएम ने बताया कि उपभोक्ताओं को सिलेंडर की आपूर्ति 25 दिन बाद डीएसी ऑथेंटिकेशन कोड के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि वास्तविक उपभोक्ताओं को ही सिलेंडर मिले और किसी प्रकार का डायवर्जन या कालाबाजारी न हो सके।

प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें। इसके लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट, एसीपी, थाना प्रभारी, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी और पूर्ति निरीक्षकों के साथ संयुक्त रूप से निरीक्षण करने को कहा गया है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कहीं भी गैस सिलेंडर का अनाधिकृत भंडारण, डायवर्जन या कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। यदि किसी एजेंसी पर अनावश्यक भीड़ या अव्यवस्था की स्थिति बनती है तो अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान कराएं।

डीएम ने गैस एजेंसियों को भी चेतावनी दी है कि वे उपभोक्ताओं से निर्धारित मूल्य से अधिक धनराशि न लें। यदि किसी एजेंसी द्वारा अधिक पैसा लेने या अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कुछ जनसेवा केंद्रों के माध्यम से भी घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति की जा रही है। प्रशासन ने इन केंद्रों पर भी कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि वहां से किसी प्रकार की अनियमितता सामने न आए।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि गैस एजेंसियों के बाहर बैनर या सूचना पट्ट लगाकर यह जानकारी दी जाए कि सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर उपभोक्ताओं को नियमानुसार सिलेंडर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिले में गैस सिलेंडर की कमी को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से भ्रामक जानकारी फैलाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए इंटरनेट मीडिया पर भी प्रशासन की नजर रखी जा रही है।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति गैस सिलेंडर की कमी को लेकर झूठा प्रचार करता है या जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर मिले और किसी को भी अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। जरूरत पड़ने पर ही सिलेंडर बुक करें, ताकि आपूर्ति व्यवस्था सुचारु रूप से बनी रहे।

तेजी से बन रहे पुल और फ्लाईओवर, कई परियोजनाएं पूरी; कुछ का काम अंतिम चरण में

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लखनऊ यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सेतु निगम द्वारा कई पुल, फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इनमें से कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और कुछ अंतिम चरण में हैं, जिन पर जल्द ही वाहनों का संचालन शुरू होने की उम्मीद है।

सेतु निगम के अधिकारियों के अनुसार राजधानी में चल रही परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जा रही है। जिन पुलों और फ्लाईओवर का निर्माण पूरा हो चुका है, वहां यातायात भी शुरू कर दिया गया है, जिससे शहर में जाम की समस्या को कम करने में मदद मिल रही है।

हाल ही में सेतु निगम की टीम ने मरी माता मंदिर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। इसके अलावा मलिहाबाद क्षेत्र के रैथा गांव में बनने वाला पीएम टेक्सटाइल पार्क को जोड़ने वाला पुल भी बनकर तैयार हो गया है।

अधिकारियों का कहना है कि केसरी खेड़ा फ्लाईओवर का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है और इसे अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह फ्लाईओवर बनने के बाद आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था काफी सुगम हो जाएगी।

इसी तरह मोहनलालगंज क्षेत्र में साई नदी के ऊपर पुल का निर्माण भी लगभग पूरा हो चुका है। फिलहाल वहां अंतिम चरण का फिनिशिंग कार्य किया जा रहा है, जिसके बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

शहर के पारा, मेहंदी घाट और पक्का पुल जैसे क्षेत्रों में भी पुल और सड़क परियोजनाओं का निर्माण कार्य चल रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर के विभिन्न हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ना है।

इसके अलावा जल्द ही इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा पर भी फ्लाईओवर निर्माण की तैयारी शुरू होने जा रही है। इस परियोजना को लोक निर्माण विभाग की राष्ट्रीय राजमार्ग शाखा द्वारा शुरू किया जाएगा।

यह फ्लाईओवर बनने से सीतापुर रोड और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक जाम की समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।

उधर लखनऊ से आगरा जाने वाले मार्ग पर स्थित अवध चौराहे पर अंडरपास का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। यह परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर आवागमन और अधिक सुगम हो जाएगा।

सेतु निगम द्वारा तैयार किया गया पीएम टेक्सटाइल पार्क को जोड़ने वाला पुल विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पुल के बनने से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बताया गया कि दो लेन वाले इस पुल का निर्माण साई नदी पर किया गया है। मूल योजना के अनुसार इसका काम मार्च 2026 तक पूरा होना था, लेकिन सेतु निगम के अभियंताओं ने इसे समय से पहले ही जनवरी 2026 में पूरा कर लिया।

अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में चल रही सभी अवसंरचना परियोजनाओं का उद्देश्य यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और शहर के विकास को गति देना है। आने वाले महीनों में कई और परियोजनाएं पूरी होने की उम्मीद है।