साहित्य और कला क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला प्रतिष्ठित सम्मान
लुधियाना। साहित्यिक और कलात्मक क्षेत्र में अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले उत्कृष्ट लेखक डॉ. विजय गर्ग को लुधियाना में आयोजित एक प्रभावशाली समारोह में प्रतिष्ठित ‘सुरजीत पातर पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह इडियट क्लब पंजाब (जसपाल भट्टी अवार्ड) द्वारा आयोजित किया गया था।
लेखनी के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बना चुके रचनाकारों को यह साहित्यिक पुरस्कार प्रदान किया जाता है। डॉ. विजय गर्ग को यह सम्मान उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों और समाजोन्मुख लेखन के लिए दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कलाओं से जुड़े 10 प्रमुख कलाकारों को भी उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत किया गया। आयोजन में साहित्यकारों, कलाकारों और कला प्रेमियों की बड़ी उपस्थिति रही।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. विजय गर्ग ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गर्व का क्षण है कि उन्हें प्रसिद्ध शायर सुरजीत पातर के नाम से दिया जाने वाला पुरस्कार प्राप्त हुआ।
स्वर्गीय व्यंग्यकार जसपाल भट्टी की स्मृति में सक्रिय ‘इडियट क्लब पंजाब’ हर वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में समाज को मार्गदर्शन देने वाले कलाकारों और लेखकों को प्रोत्साहित करने हेतु इस कार्यक्रम का आयोजन करता है।
इस वर्ष भी यह समारोह कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा और साहित्य-जगत में नई ऊर्जा का संचार करता नजर आया।
डॉ. विजय गर्ग को ‘सुरजीत पातर पुरस्कार’ से सम्मान
तेज रफ्तार ट्रक का कहर, 25 वर्षीय महिला की दर्दनाक मौत
फर्रुखाबाद। जनपद के कायमगंज कस्बे में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। कायमगंज रेलवे स्टेशन के निकट तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से बाइक सवार 25 वर्षीय महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके पिता घायल हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और काफी देर तक सड़क पर जाम जैसे हालात बने रहे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कासगंज जनपद के सुन्नगढ़ी थाना क्षेत्र निवासी 25 वर्षीय रुही पत्नी साहिल अपने पिता बबलू कुरैशी के साथ दवा लेने कायमगंज आ रही थीं। बताया जा रहा है कि जैसे ही उनकी बाइक रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने ओवरटेक करने के प्रयास में बाइक में जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर लगते ही बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। पीछे बैठी रुही सड़क पर जा गिरीं और दुर्भाग्यवश ट्रक के पिछले पहिये के नीचे आ गईं। हादसा इतना भयावह था कि उनका सिर बुरी तरह कुचल गया और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं बाइक चला रहे पिता बबलू कुरैशी भी सड़क पर गिरकर घायल हो गए।
घटना के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, ट्रक को कब्जे में लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घायल पिता को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा।
इस हृदयविदारक घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। रुही अपने पीछे दो मासूम बेटियां—माहेनूर और अनाविया—छोड़ गई हैं, जिनके सिर से मां का साया उठ गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई है।
पुलिस ने बताया कि मामले में तहरीर मिलने के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी और फरार ट्रक चालक की तलाश की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।
फतेहगढ़ में प्लास्टिक प्रतिबंध की उड़ रहीं धज्जियां
होली पर ‘प्लास्टिक मुक्त अभियान’ के बीच खुलेआम जल रहा कूड़ा, सीएमओ कार्यालय के बाहर उठ रहा जहरीला धुआं
फतेहगढ़। होली को प्लास्टिक मुक्त बनाने के सरकारी निर्देशों के बीच शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक का खुलेआम इस्तेमाल जारी है। गर्मी की शुरुआत के साथ गन्ने के जूस और शीतल पेय पदार्थों की ठेलियां सज गई हैं, लेकिन प्रतिबंधित प्लास्टिक गिलासों का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है।
फतेहगढ़ बाजार, आवास विकास स्थित मिशन अस्पताल के पास, मिनी चौपाटी क्षेत्र और कोऑपरेटिव बैंक के सामने लगने वाली जूस की ठेलियों पर सिंगल यूज प्लास्टिक गिलासों का प्रयोग आम है। शासन के प्रतिबंध के बावजूद न तो विक्रेता सतर्क हैं और न ही संबंधित विभाग कार्रवाई करता नजर आ रहा है।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक गिलासों और गन्ने की खोई को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के बाहर ही आग के हवाले कर दिया जाता है। प्लास्टिक जलने से निकलने वाला जहरीला धुआं आसपास के मरीजों, दुकानदारों, राहगीरों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय का कूड़ा नगर पालिका की गाड़ी में डालने के बजाय बाहर गड्ढे में फेंका जाता है और बाद में जला दिया जाता है। इससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।
प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
विडंबना यह है कि एक ओर ‘प्लास्टिक मुक्त होली’ का अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार विभागों के आसपास ही नियमों की अनदेखी हो रही है। यदि सरकारी कार्यालयों के सामने ही प्लास्टिक जलाया जाएगा तो आम जनता से नियमों के पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
शहरवासियों ने नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद और जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग पर तत्काल रोक लगाई जाए, खुले में कूड़ा और प्लास्टिक जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो तथा नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन अपने आदेशों को धरातल पर लागू करता है या फिर प्लास्टिक मुक्त अभियान कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
खामनेई की मौत के बाद श्रीनगर में प्रदर्शन, कई इलाकों में तनाव; सुरक्षा बलों ने किया बल प्रयोग
श्रीनगरl सैयद अयातुल्ला अली खामनेई की मौत की खबर के बाद शुक्रवार को कई इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। शहर के डाउनटाउन, नवहट्टा, रैनावारी और सौरा समेत कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और नारेबाजी की, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुमे की नमाज के बाद कुछ स्थानों पर भीड़ अचानक बढ़ गई और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने हल्का बल प्रयोग किया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए चुनिंदा स्थानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए। अधिकारियों का कहना है कि बल प्रयोग न्यूनतम रखा गया और किसी गंभीर चोट की सूचना नहीं है, हालांकि कुछ प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिया गया है।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी बढ़ा दी गई है, जबकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अफवाहों और भड़काऊ सामग्री पर नजर रखने के लिए साइबर सेल को सक्रिय किया गया है। कुछ क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं की गति अस्थायी रूप से कम किए जाने की भी सूचना है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हालात नियंत्रण में हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने, अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून-व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देश के अन्य हिस्सों में भी एहतियातन सतर्कता बरती जा रही है। केंद्र सरकार पहले ही राज्यों को कानून-व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दे चुकी है। फिलहाल श्रीनगर में बाजार आंशिक रूप से खुले हैं और जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।
बकरी चोरी कर भाग रहे बदमाशों की क्रेटा खाई में गिरी
ग्रामीणों ने एक आरोपी दबोचा
रामपुर| थाना केमरी क्षेत्र के स्वार खुर्द गांव में सोमवार को बकरी चोरी की घटना ने उस समय नाटकीय मोड़ ले लिया, जब भाग रहे बदमाशों की कार खाई में जा गिरी। ग्रामीणों ने पीछा कर एक आरोपी को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी, जबकि उसके दो साथी मौके से फरार होने में सफल रहे। पुलिस ने पकड़े गए आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
ग्रामीणों के अनुसार, दोपहर के समय एक सफेद क्रेटा कार में सवार होकर तीन युवक गांव में पहुंचे। उन्होंने गांव निवासी जागन लाल के घर के बाहर बंधी बकरी की रस्सी चाकू से काटी और उसे जबरन कार में डाल लिया। उसी दौरान पास में खेल रहे बच्चों ने घटना देख ली और शोर मचा दिया। बच्चों की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और कार का पीछा शुरू कर दिया।
बताया जा रहा है कि घबराहट में तेज रफ्तार से भाग रहे आरोपियों की कार गांव से बाहर कच्चे रास्ते पर असंतुलित होकर खाई में गिर गई। हादसे के बाद तीनों युवक कार से निकलकर भागने लगे, लेकिन ग्रामीणों ने दौड़ाकर एक आरोपी को पकड़ लिया। गुस्साए लोगों ने उसकी जमकर धुनाई कर दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को भीड़ से छुड़ाकर अपने साथ थाने ले गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कार खाई में गिरी दिखाई दे रही है और ग्रामीण आरोपी को पकड़ते नजर आ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि अभी तक इस मामले में कोई लिखित तहरीर नहीं मिली है, लेकिन वायरल वीडियो और मौके की स्थिति के आधार पर जांच की जा रही है। फरार दो आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से कानून हाथ में न लेने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है, लेकिन एहतियातन पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।
परंपरा और पर्यावरण का संगम, पर्यावरण विशेषज्ञ गुंजा जैन ने दिया ‘हरित होली’ का मंत्र
यूथ इंडिया न्यूज़: होली, जो कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध त्योहारों में से एक है और पश्चिम में इसे ‘रंगों का त्योहार’ कहा जाता है, भारत और दुनिया भर के समुदायों में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार कई चीजों का प्रतीक है: प्रेम, नई शुरुआत, वसंत ऋतु का आगमन और हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, बुराई पर अच्छाई की विजय।
स्थानीय लोग नकारात्मकता को दूर करने, पिछले पापों को धोने और पौराणिक राक्षसी होलिका को जलाने के लिए ‘होलिका दहन’ करते हैं। यह प्रेम, नई शुरुआत, वसंत ऋतु के आगमन और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। ज़ेन-ज़ी यानी युवाओं की बदौलत, यह पर्यावरण के प्रति जागरूक उत्सवों की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का भी प्रतीक बन रहा है।
तो आइए, क्यों न इस बार हम सभी मिलकर ‘हरित होली’ खेलें और सभी को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें। हम सभी आधुनिकता की दौड़ में परंपरागत होली के त्योहार को (सही ढंग से) न मनाकर, इसके होने वाले दुष्परिणामों को बढ़ाने में लगे हुए हैं। पहले के समय में होली फूलों से बने प्राकृतिक रंगों से मनाई जाती थी। भारत में आज भी कई जगहों पर फूलों से होली खेली जाती है, लेकिन इस त्योहार के आधुनिकीकरण और व्यवसायीकरण के कारण कई कंपनियों ने रासायनिक रूप से तैयार किए हुए रंग (डाई) बनाना शुरू कर दिया है, जो बेहद विषैले होते हैं।
ये हमारे स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं, जैसे: अस्थमा, त्वचा संबंधी रोग, जलन, सूजन, एलर्जी और आंखों में संक्रमण आदि। साथ ही, ये हमारे वातावरण को भी प्रभावित करते हैं। ये आसानी से विघटित न होकर प्राकृतिक स्रोतों—वायु, जल और मृदा—को प्रदूषित करते हैं।
इस त्योहार की परंपरागत खूबसूरती को हम अनावश्यक रूप से पानी बहाकर, पानी और रंग से भरे गुब्बारे और प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग कर नष्ट कर रहे हैं। यह प्लास्टिक जल निकासी की व्यवस्था को अवरुद्ध करके जल प्रदूषण को बढ़ा देता है। हम प्लास्टिक की बनी पिचकारी का इस्तेमाल कर अगले दिन उसे फेंक देते हैं, जो प्लास्टिक प्रदूषण का कारण बनता है।
होलिका दहन में हम अग्नि प्रज्वलन के लिए पेड़ों को अनावश्यक रूप से काट देते हैं, जिससे वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर का स्तर बढ़ जाता है। इससे न केवल वायु प्रदूषण होता है, बल्कि पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ता है, जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हम पर ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अतः आइए हम सभी मिलकर इस बार प्रदूषण मुक्त होली, यानी पर्यावरण मित्र ‘हरित होली’ मनाने का प्रण लें तथा युवाओं को भी यही संदेश दें। यदि हम अभी भी इन त्योहारों के महत्व को नहीं समझे और अनावश्यक रूप से अपने पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते रहे, तो भविष्य में इसके बहुत घातक परिणाम होंगे।
इको-फ्रेंडली त्योहार के लिए हम ये कदम उठा सकते हैं:
• प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें (जैसे: फूलों से बने रंग, हर्बल सूखे गुलाल, मुल्तानी मिट्टी, हल्दी आदि)।
• पानी को कम से कम बर्बाद करें।
• होलिका दहन में पेड़ों की लकड़ी के बजाय गोबर से बने उपलों का उपयोग करें।
• नए कपड़ों की जगह पुराने कपड़ों का ही इस्तेमाल करें।
• प्लास्टिक की थैली और गुब्बारों का प्रयोग न करें और दूसरों को भी मना करें।
• होली पर जब अपने परिवार के लोगों से मिलने जाएं, तो साथ में एक पेड़ जरूर लगाएं और अपनी हरित होली को यादगार बनाएं।
ये छोटे-छोटे संकल्प लेकर ही हम अपने त्योहारों की गरिमा बनाए रख सकते हैं और अपनी आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे सकते हैं।








