कानपुर| जिले के सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र अंतर्गत तुलसियापुर गांव में सोमवार सुबह एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। 55 वर्षीय सेवानिवृत्त फौजी ने घर के भीतर अपनी 40 वर्षीय पत्नी सुनीता और 16 वर्षीय बेटे दीप को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद उसने घर के मुख्य गेट पर बाहर से ताला लगाया और लगभग तीन किलोमीटर दूर जाकर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली।
घटना की जानकारी उस समय हुई जब कठोंगर गांव के पास भाऊ रेलवे ट्रैक पर एक व्यक्ति के ट्रेन से कटने की सूचना पुलिस को मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की शिनाख्त के प्रयास शुरू किए। पहचान के आधार पर जब पुलिस मृतक के घर तुलसियापुर गांव पहुंची तो मुख्य दरवाजा बाहर से बंद मिला। अंदर प्रवेश करने पर पत्नी और बेटे के शव पड़े मिले। दोनों को नजदीक से गोली मारी गई थी। इस प्रकार दोहरे हत्याकांड के बाद आत्महत्या की घटना का खुलासा हुआ।
घटना से क्षेत्र में दहशत और शोक का माहौल है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, फॉरेंसिक टीम और उच्चाधिकारी मौके पर पहुंचे और साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू की। तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में घरेलू विवाद की आशंका जताई जा रही है, हालांकि हत्या के स्पष्ट कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है।
सेन पश्चिम पारा थाना प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। परिवार के अन्य सदस्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं, विशेषकर पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव और अन्य कारणों को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।
इस हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है और लोग अब भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर ऐसा कदम क्यों उठाया गया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक वजह स्पष्ट हो
रिटायर्ड फौजी ने पत्नी-बेटे की हत्या कर ट्रेन से कूदकर दी जान
निजी अस्पतालों और आशा बहुओं के मुद्दे पर सदन में तीखी बहस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के सत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में न तो पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं और न ही जरूरी जांच की समुचित व्यवस्था है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर गर्भवती महिलाएं अस्पतालों की फर्श पर प्रसव करने को मजबूर होती हैं, जिसके चलते मरीज मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करते हैं।
विधायक ने पूछा कि निजी अस्पतालों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों पर क्या कभी ठोस कार्रवाई हुई है? साथ ही क्या सरकार निजी अस्पतालों में ली जाने वाली फीस और जांच शुल्क को नियंत्रित करने पर कोई विचार कर रही है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सदन को बताया कि निजी अस्पतालों के संबंध में लगभग 500 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जांच के बाद 178 अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं, जबकि 280 अस्पतालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जो निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित हो रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग निजी अस्पतालों को निशाना बनाकर अवैध वसूली करते हैं, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बहस की अगली कड़ी में सपा विधायक राकेश वर्मा ने आशा बहुओं के मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ताओं से टीबी, कुष्ठ निवारण और कुपोषण जैसे महत्वपूर्ण सरकारी अभियान चलवाए जाते हैं, लेकिन उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। उनका मानदेय भी नहीं बढ़ाया गया, जो “समान काम समान वेतन” के सिद्धांत का उल्लंघन है।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार सपा शासनकाल की तुलना में दोगुना मानदेय दे रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व में जहां एक हजार रुपये दिए जाते थे, वहीं अब दो हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है। साथ ही आशा बहुओं को मातृत्व अवकाश की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। मंत्री ने कहा कि गर्भवती महिला को अस्पताल लाने पर आशा बहुओं के ठहरने की व्यवस्था सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में की गई है और भविष्य में उनकी सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर सरकार ध्यान देगी।
सदन में हुई इस बहस के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, निजी अस्पतालों की निगरानी और आशा कार्यकर्ताओं की स्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
पर्यटन विकास को लेकर सदन में उठे सवाल, सरकार ने 12 सर्किट योजना का दिया ब्यौरा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान राज्य में पर्यटन विकास, बजट आवंटन और सुविधाओं के विस्तार को लेकर चर्चा हुई। समाजवादी पार्टी के एक विधायक ने सरकार से प्रश्न किया कि क्या प्रदेश में सभी धर्मों से जुड़े पर्यटन स्थलों के विकास के लिए समान रूप से धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं का व्यापक स्तर पर विकास किया जाता है तो इससे न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
विधायक ने यह भी जानना चाहा कि अब तक सरकार ने किन-किन स्थलों को विकसित किया है, जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो और प्रदेश राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बन सके। उनका कहना था कि पर्यटन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों का भी समान रूप से संवर्धन आवश्यक है।
इस प्रश्न के उत्तर में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने सदन को बताया कि प्रदेश सरकार बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के पर्यटन विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को 12 पर्यटन सर्किट में विभाजित कर योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन सर्किटों के माध्यम से धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों को जोड़कर समग्र पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि सभी परियोजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जा रहा है, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ने से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
सदन में हुई इस चर्चा के बाद पर्यटन विकास की दिशा में सरकार की रणनीति और उसके क्रियान्वयन पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह क्षेत्र प्रदेश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
आंगनबाड़ी पुष्टाहार की गुणवत्ता पर सदन में गरमाई बहस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के चालू सत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को वितरित किए जा रहे पुष्टाहार की गुणवत्ता और लागत को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। सदन में समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा कि वर्तमान महंगाई दर को देखते हुए 66 रुपये की लागत में 600 कैलोरी का संतुलित और गुणवत्तापूर्ण पुष्टाहार उपलब्ध कराना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि यदि इतनी कम राशि में पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है तो उसकी गुणवत्ता और पौष्टिकता की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर बच्चों को दिए जा रहे खाद्यान्न की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है, जिससे कुपोषण की समस्या दूर करने के उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि पुष्टाहार की आपूर्ति किन मानकों के तहत हो रही है और उसकी नियमित मॉनिटरिंग कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
इस पर महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री बेबी रानी मौर्य ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, उन्होंने विधायक द्वारा उठाए गए प्रश्न का विस्तृत और तथ्यों सहित लिखित उत्तर देने का आश्वासन दिया।
मंत्री ने कहा कि यदि कहीं भी गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सदन में उठे इस मुद्दे के बाद अब सभी की निगाहें सरकार के लिखित जवाब और संभावित सुधारात्मक कदमों पर टिकी हैं, क्योंकि यह विषय सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 : भारत के सामने पाकिस्तान ढेर
मुकाबले से पहले बायकॉट का ऐलान, आईसीसी की फटकार के बाद खेला मैच; हार के बीच स्टेडियम छोड़कर निकले पीसीबी चीफ
कोलंबो। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला 15 फरवरी को कोलंबो के ऐतिहासिक R. Premadasa Stadium में खेला गया। इस हाई-वोल्टेज मैच का इंतजार दोनों देशों के क्रिकेट प्रेमी लंबे समय से कर रहे थे।
मैच से पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की ओर से इस मुकाबले के बहिष्कार (बायकॉट) का ऐलान किए जाने से क्रिकेट जगत में हलचल मच गई थी। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद इंटरनेशनल क्रिकेट कौंसिल की सख्ती और फटकार के बाद पाकिस्तान टीम मैच खेलने के लिए तैयार हो गई।
मैदान पर जब मुकाबला शुरू हुआ तो भारतीय टीम ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। पाकिस्तान की बल्लेबाजी क्रम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सका और टीम लगातार विकेट गंवाती चली गई। रन गति पर अंकुश और नियमित अंतराल पर गिरते विकेटों ने पाकिस्तान को बैकफुट पर धकेल दिया।
मुकाबले को देखने के लिए पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नक़वी भी कोलंबो पहुंचे थे। लेकिन जैसे-जैसे मैच भारत के पक्ष में झुकता गया और पाकिस्तान की टीम दबाव में नजर आने लगी, स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के बीच चर्चा रही कि नकवी चुपचाप मैदान से बाहर निकल गए।
गेंदबाजी ने मैच का रुख पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया। जीत के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने जहां प्रशंसकों का दिल जीत लिया, वहीं पाकिस्तान खेमे में मायूसी छा गई।
भारत-पाकिस्तान मुकाबले हमेशा से भावनाओं और रोमांच से भरे रहे हैं, लेकिन इस बार मैच से पहले के विवाद और मैदान पर एकतरफा प्रदर्शन ने इसे और भी चर्चा का विषय बना दिया।
देहरादून : एक बार फिर बदलेगा मौसम का मिजाज
कई जिलों में बारिश-बर्फबारी के आसार, मौसम विज्ञान केंद्र ने जारी किया पूर्वानुमान
देहरादून।
उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के कई पर्वतीय जिलों में आगामी दिनों में बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तरकाशी और चमोली जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बर्फबारी हो सकती है। वहीं रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में भी मौसम बदलने के संकेत हैं।
इसके अलावा पिथौरागढ़ जिले में भी हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पर्वतीय क्षेत्रों में बादल छाने और तापमान में गिरावट के आसार हैं।
देहरादून समेत मैदानी क्षेत्रों में फिलहाल मौसम सामान्य बना रह सकता है, लेकिन बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। पर्वतीय जिलों में ठंड एक बार फिर बढ़ सकती है।
प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने की अपील की है।








