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Sunday, June 14, 2026
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एटा की राजनीति में यादव परिवार आज भी प्रभावी !

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– अखिलेश यादव के करीबी दायरे में जोगेंद्र सिंह यादव, बदल सकते हैं सियासी समीकरण

एटा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के राजनीतिक फैसलों पर पूरे प्रदेश की नजर रहती है, लेकिन इन दिनों एटा की राजनीति में जिस परिवार की सक्रियता सबसे अधिक चर्चा में है, वह पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव का परिवार है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता जोगेंद्र सिंह यादव समेत पूरा यादव परिवार समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीब माना जा रहा है और पार्टी के महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी बात को गंभीरता से सुना जा रहा है।

एटा, कासगंज और आसपास के क्षेत्रों में यादव परिवार लंबे समय से प्रभावशाली राजनीतिक ताकत रहा है। बदलते राजनीतिक दौर में भी परिवार की संगठनात्मक पकड़ और जनाधार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के अंदर होने वाली रणनीतिक बैठकों और क्षेत्रीय समीकरणों में इस परिवार की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी पश्चिम और मध्य उत्तर प्रदेश में अपने मजबूत सामाजिक आधार को और धार देने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में एटा का यादव परिवार पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित हो सकता है। सूत्रों की मानें तो क्षेत्रीय संगठन, चुनावी प्रबंधन और उम्मीदवार चयन जैसे मुद्दों पर भी परिवार के सुझावों को महत्व दिया जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि एटा की राजनीति में जब भी समाजवादी पार्टी को मजबूती मिली है, उसमें यादव परिवार की सक्रिय भूमिका रही है। स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने से लेकर चुनावी संघर्ष तक, परिवार का प्रभाव लगातार बना रहा है। यही कारण है कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी यह संदेश जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व का भरोसा आज भी इस परिवार पर कायम है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में सत्ता वापसी की लड़ाई को और आक्रामक बनाती है, तो एटा जनपद में यादव परिवार की भूमिका और बढ़ सकती है। संगठन के भीतर उनकी बढ़ती स्वीकार्यता विपक्षी दलों के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि एटा की राजनीति में पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव का परिवार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां आने वाले दिनों में जिले के राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकती हैं।

पुरानी रंजिश को लेकर युवक ने मांगी पुलिस सुरक्षा

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– फेसबुक वीडियो के बाद फिर जताई अनहोनी की आशंका

नवाबगंज (फर्रुखाबाद)। थाना क्षेत्र के मोहल्ला पुराना गनीपुर निवासी एक युवक ने पुराने विवाद को लेकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है। युवक का कहना है कि करीब एक वर्ष पूर्व हुए विवाद की रंजिश अभी भी खत्म नहीं हुई है और विपक्षी पक्ष दोबारा विवाद खड़ा कर सकता है, जिससे उसकी सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है।

मोहल्ला पुराना गनीपुर निवासी सनी पुत्र रघुबीर सिंह ने थाना नवाबगंज पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि लगभग एक वर्ष पहले गांव के कुछ लोगों के साथ पेड़ लगाने को लेकर उसका विवाद हुआ था। युवक का आरोप है कि उसी पुराने विवाद को लेकर विरोधी पक्ष अब भी रंजिश रखे हुए है और भविष्य में किसी भी समय उसके साथ झगड़ा या अप्रिय घटना कर सकता है।

सनी ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक एहतियाती कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी भी संभावित घटना को समय रहते रोका जा सके।

बताया गया है कि युवक ने इससे पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो जारी कर भी अपनी आपबीती सार्वजनिक की थी और सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की थी। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

मामले में थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि युवक का प्रार्थना पत्र प्राप्त हो गया है। पुलिस द्वारा मामले की जानकारी जुटाई जा रही है तथा आवश्यक जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व विधायक अजीत कठेरिया के बड़े भाई हाकिम सिंह का निधन

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फर्रुखाबाद/कायमगंज। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं कायमगंज विधानसभा के पूर्व विधायक अजीत कठेरिया के बड़े भाई हाकिम सिंह कठेरिया के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है। उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में समर्थकों, शुभचिंतकों और क्षेत्रीय लोगों ने गहरा दुःख व्यक्त किया है।

हाकिम सिंह कठेरिया अपने सरल स्वभाव, सामाजिक सरोकारों और क्षेत्र में सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। उनके निधन को परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के लिए भी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। शोक संदेशों का सिलसिला लगातार जारी है और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं तथा सामाजिक संगठनों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि हाकिम सिंह कठेरिया का परिवार क्षेत्र की राजनीति और समाज सेवा से लंबे समय से जुड़ा रहा है। उनके निधन से पार्टी कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों में भी गहरा दुःख है।

दिवंगत हाकिम सिंह कठेरिया के निधन पर अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए पूर्व विधायक अजीत कठेरिया एवं शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

यूपी में समय से पहले विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट!

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– नवंबर-दिसंबर 2026 में चुनाव कराने की रणनीति ,
– जनगणना और मतदाता सूची बना बड़ा फैक्टर
शरद कटियार
नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव निर्धारित समय से पहले कराए जाने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केंद्र सरकार और प्रमुख राजनीतिक दल फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित चुनावों को नवंबर-दिसंबर 2026 में कराने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगले कुछ महीनों के भीतर चुनावी सरगर्मी चरम पर पहुंच सकती है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल वर्ष 2027 में समाप्त होना है। राज्य में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और लगभग 15 करोड़ से अधिक मतदाता चुनावी प्रक्रिया में भाग लेते हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 273 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि समाजवादी पार्टी गठबंधन ने 125 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

चुनाव समय से पहले कराने की चर्चाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा चरण माना जा रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार फरवरी 2027 के आसपास जनगणना का दूसरा चरण शुरू हो सकता है। चुनाव आयोग और सरकार दोनों ही नहीं चाहते कि जनगणना और विधानसभा चुनाव जैसी विशाल प्रक्रियाएं एक साथ चलें, जिससे प्रशासनिक और सुरक्षा संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़े।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में चुनाव कराने के लिए लाखों कर्मचारियों और सुरक्षा बलों की आवश्यकता पड़ती है। अनुमान है कि चुनावी ड्यूटी के लिए 5 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी, हजारों प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ती है। ऐसे में जनगणना और चुनाव का एक साथ होना प्रशासनिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

उधर भाजपा ने अपने संगठन को पहले से ही चुनावी मोड में लाने के संकेत दिए हैं। पार्टी नेतृत्व द्वारा विभिन्न राज्यों की इकाइयों को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने, मतदाता संपर्क अभियान तेज करने और चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।

विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के बीच संभावित तालमेल, जातीय जनगणना, बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि चुनाव समय से पहले होते हैं तो विपक्ष को अपनी रणनीति और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करनी होगी।

चुनाव आयोग की दृष्टि से भी नवंबर-दिसंबर 2026 का समय अपेक्षाकृत सुविधाजनक माना जा रहा है। मतदाता सूची पुनरीक्षण, बूथ सत्यापन और अन्य चुनावी तैयारियों को समय रहते पूरा किया जा सकता है। हालांकि अभी तक चुनाव आयोग या केंद्र सरकार की ओर से विधानसभा चुनावों की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि समय से पहले चुनाव कराने का फैसला पूरी तरह राजनीतिक परिस्थितियों, प्रशासनिक तैयारियों और जनगणना कार्यक्रम पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल अपेक्षा से पहले दिखाई देने लगी है और सभी दल अपने-अपने स्तर पर तैयारियों में जुट गए हैं।

एक्शन में सीएम योगी : बिजली व्यवस्था पर होगी हाई लेवल समीक्षा

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– गोरखपुर में जनता दरबार लगाकर सुनीं लोगों की समस्याएं
– गोवंश को दुलारा

लखनऊ/गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में ध्वस्त बिजली आपूर्ति, जनसमस्याओं के निस्तारण और सुशासन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री 15 जून को ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करने जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गोरखपुर प्रवास के दौरान उन्होंने जनता दरबार लगाकर आम लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 15 जून को बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगे। प्रदेश में बढ़ती गर्मी और बिजली की बढ़ी मांग के बीच यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। बैठक में बिजली आपूर्ति, ट्रांसफार्मरों की स्थिति, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विद्युत कटौती, शिकायतों के निस्तारण और आगामी दिनों की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। मुख्यमंत्री पहले भी ऊर्जा विभाग को स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराई जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उधर, गोरखपुर दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी दिनचर्या के अनुसार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर का भ्रमण किया। इसके बाद उन्होंने मंदिर की गौशाला पहुंचकर गौ सेवा की और गायों को गुड़ खिलाया। मुख्यमंत्री की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और प्रत्येक गोरखपुर प्रवास के दौरान वह गौशाला जाकर गौवंश की देखभाल का जायजा लेते हैं।

मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दूर-दराज से आए लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने एक-एक फरियादी से प्रार्थना पत्र लेकर उनकी शिकायतों का संज्ञान लिया। जनता दरबार में भूमि विवाद, राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, पेंशन और विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतें सामने आईं।

मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों को न्याय और राहत दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी पीड़ित को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

लखनऊ से बहराइच तक ओवैसी का शक्ति प्रदर्शन, 2027 की सियासी जमीन टटोलने निकले ओवैसी

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लखनऊ। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी रविवार को लखनऊ पहुंचे, जहां से वह सीधे बहराइच के लिए रवाना हो गए। उनके दौरे को उत्तर प्रदेश की आगामी 2027 विधानसभा चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया।

ओवैसी बहराइच में आयोजित जनसभा को संबोधित करेंगे और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं में चुनावी उत्साह भरने का प्रयास करेंगे। सूत्रों के अनुसार जनसभा के दौरान वह प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों, अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व और स्थानीय मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सक्रिय दिखाई दे रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में संगठन का विस्तार कर उसे मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

बहराइच दौरे के दौरान ओवैसी पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ अलग से बैठक भी करेंगे। इस बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, नए सदस्यों को जोड़ने और चुनावी रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह दौरा केवल एक जनसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 2027 के चुनावी रण से पहले पूर्वांचल और तराई क्षेत्र में पार्टी की ताकत का आकलन करने और नए समीकरण बनाने की कवायद का हिस्सा भी है। ऐसे में बहराइच की यह रैली प्रदेश की बदलती राजनीतिक तस्वीर में अहम संकेत देने वाली मानी जा रही है।