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Wednesday, July 15, 2026
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दिल्ली में जर्जर भवनों पर सरकार सख्त, 108 सरकारी स्कूल और 7 भवन जल्द होंगे जमींदोज

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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार (Delhi government) ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुराने और जर्जर स्कूल भवनों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के नेतृत्व में सरकार ने 108 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल भवनों को असुरक्षित घोषित किया है। सरकार का कहना है कि इन इमारतों की स्थिति चिंताजनक थी और कई भवन इतने पुराने हो चुके थे कि किसी भी समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ था।

बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए इन स्कूल भवनों की जांच कर यह निर्णय लिया गया है। दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। असुरक्षित घोषित किए गए स्कूल भवनों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा, वैकल्पिक व्यवस्था और भवनों के सुधार को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली सरकार की ओर से कराए गए प्रारंभिक आकलन में 108 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल भवनों को असुरक्षित और खतरनाक श्रेणी में चिन्हित किया गया है। जांच में सामने आया कि इनमें से 54 इमारतें बेहद जर्जर स्थिति में हैं, जिनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। सरकार ने इनमें से 7 स्कूल भवनों को प्राथमिकता के आधार पर गिराने की मंजूरी दे दी है। इन इमारतों को अगले कुछ महीनों में ध्वस्त कर उनकी जगह आधुनिक, भूकंपरोधी और सुरक्षा मानकों के अनुरूप नए स्कूल भवन बनाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को सभी मौजूदा स्कूल भवनों की सुरक्षा जांच कराने और उनके पुनर्निर्माण या मरम्मत की लागत का विस्तृत आकलन करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा 14 अन्य स्कूल भवनों के लिए भी विस्तृत स्ट्रक्चरल ऑडिट के प्रस्ताव भेजे गए हैं। इनकी तकनीकी जांच पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि संबंधित भवनों की मरम्मत की जाएगी या उन्हें ध्वस्त कर नए भवन बनाए जाएंगे।

दिल्ली सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से बेहद जर्जर पाए गए 7 स्कूल भवनों को तत्काल गिराने की मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार, इन भवनों को अगले कुछ महीनों में चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त किया जाएगा। इन पुरानी इमारतों की जगह भूकंपरोधी आधुनिक तकनीक से G+4 (ग्राउंड प्लस चार मंजिला) स्कूल भवन बनाए जाएंगे। नए भवनों का निर्माण सभी मौजूदा सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जाएगा, ताकि छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए संबंधित स्कूलों में वैकल्पिक कक्षाओं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की पहले से योजना बनाई जाएगी, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के जारी रह सकें। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी असुरक्षित भवन में छात्रों को पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।

 

छेड़छाड़ का विरोध करने पर दबंगई, युवकों ने मामा-भांजी को लाठी-डंडों से पीटा

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आगरा: आगरा (Agra) जिले के कमला नगर थाना क्षेत्र स्थित राजवाड़ा, बल्केश्वर इलाके में मामा-भांजी (uncle and niece) पर कथित हमले का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ लोगों ने छेड़छाड़ का विरोध करने पर घर के बाहर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और दोनों पक्षों से जानकारी जुटाई जा रही है।

पीड़िता का आरोप है कि इलाके के कुछ लोगों ने उसके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की, जब उसने इसका विरोध किया तो विवाद बढ़ गया। इसके बाद आरोपी घर के बाहर पहुंचे और मामा-भांजी के साथ मारपीट की। पीड़िता का कहना है कि बीच-बचाव करने पहुंची युवती के साथ भी अभद्रता की गई।

शिकायतकर्ता का दावा है कि यह पहली घटना नहीं है, उसके मुताबिक, कुछ दिन पहले भी उन्हीं लोगों ने हमला किया था। आरोप है कि लगातार मिल रही धमकियों और हमलों के कारण परिवार दहशत में है। पीड़ित पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले में फिलहाल लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से हैं। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। घटनास्थल और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही हैय जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

बुलंदशहर में दोहरा हत्याकांड, दो पक्षों में ताबड़तोड़ फायरिंग, 2 की मौत और अन्य घायल

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बुलंदशहर: बुलंदशहर (Bulandshahr) जिले में पैसों के लेन-देन का विवाद मंगलवार रात खूनी संघर्ष में बदल गया। सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र के निजामपुर गांव (Nizampur Village) के पास दो पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले कहासुनी हुई, फिर देखते ही देखते दोनों ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। करीब 15 मिनट तक चली गोलियों की गूंज के बाद दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव फैल गया और इलाके में भारी पुलिस बल व पीएसी तैनात कर दी गई।

जानकारी के मुताबिक, सोनू (42) और अजब सिंह (48) के बीच लंबे समय से पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। मंगलवार रात दोनों अपने-अपने साथियों के साथ अलग-अलग गाड़ियों से लौट रहे थे। गांव से करीब दो किलोमीटर पहले दोनों का आमना-सामना हो गया. पहले बहस हुई, लेकिन कुछ ही देर में मामला हिंसक हो गया और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।

फायरिंग में सोनू और अजब सिंह के सीने में गोली लगी, जबकि उनके दो साथी भी घायल हो गए। आरोप है कि संघर्ष के दौरान सड़क पर घायल पड़े सोनू के ऊपर कार चढ़ा दी गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल अजब सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया।

दोहरी हत्या की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। देर रात एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर और डीआईजी कलानिधि नैथानी भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। गांव में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात कर दी गई। बुधवार को सोनू का अंतिम संस्कार भी पुलिस सुरक्षा के बीच कराया गया।

एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में विवाद की वजह पैसों का लेन-देन सामने आया है। घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। कुछ आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। घायलों से भी पूछताछ की जा रही है और मामले की निष्पक्ष जांच जारी है।

 

किसान दिवस में गूंजीं किसानों की समस्याएं, सीडीओ ने दिए त्वरित समाधान के निर्देश

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– 16 जुलाई से कृषि यंत्रों की बुकिंग, 22 जुलाई से पशुओं का टीकाकरण अभियान

फर्रुखाबाद। विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित किसान दिवस में जिले भर से आए किसानों ने कृषि, मंडी व्यवस्था, पशुपालन और सरकारी योजनाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को उनका समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कृषि अधिकारी ने किसानों एवं विभागीय अधिकारियों का स्वागत कर किया। उन्होंने बताया कि जनपद के सभी राजकीय कृषि बीज भंडारों पर विभिन्न फसलों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। किसान ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए 16 जुलाई 2026 से ऑनलाइन बुकिंग प्रारंभ होगी, जिसका लाभ पात्र किसान उठा सकेंगे।
उप कृषि निदेशक ने किसानों से फार्मर रजिस्ट्री कराने, खरीफ फसलों का समय से फसल बीमा कराने तथा मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि फसल बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित है। साथ ही हरित खाद, वर्मी कम्पोस्ट एवं सड़ी हुई गोबर की खाद के उपयोग पर बल देते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य सुधार का संदेश दिया।
किसान दिवस में प्रगतिशील किसानों ने भी अपने सुझाव रखे। किसानों ने सरकारी मंडियों में तौल व्यवस्था को पारदर्शी बनाने तथा अनाज की तौल में होने वाली अनियमितताओं की जांच कर कार्रवाई की मांग की। पशुपालकों ने बरसात के मौसम में पशुओं में फैलने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए समयबद्ध टीकाकरण अभियान चलाने की आवश्यकता जताई।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि 22 जुलाई 2026 से जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में पशुओं के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा, जिससे उन्हें संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।
बैठक के समापन पर मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों से फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से कराने तथा आधार, बैंक खाते और मोबाइल नंबर को आपस में लिंक कराने का आह्वान किया, ताकि उन्हें शासन की सभी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के समय पर मिल सके। उन्होंने मृदा परीक्षण संबंधी कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए और किसान दिवस में प्राप्त सभी शिकायतों के शीघ्र एवं प्रभावी निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

2017 से पहले की सरकार सबसे बड़ा अपशगुन थी, अब 9 लाख युवाओं को मिली पारदर्शी सरकारी नौकरी: सीएम योगी

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लखनऊ। विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “2017 से पहले उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार ही सबसे बड़ा अपशगुन थी।” उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश में न युवाओं के लिए रोजगार था और न ही पारदर्शी भर्ती व्यवस्था। सरकारी नौकरियों पर एक परिवार का अधिकार था और भर्ती निकलते ही “चाचा-भतीजे की जोड़ी” वसूली में लग जाती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में पारदर्शी व्यवस्था स्थापित की गई और पिछले नौ वर्षों में 9 लाख से अधिक युवाओं को निष्पक्ष तरीके से सरकारी नौकरियां दी गईं। वहीं सवा तीन करोड़ से अधिक युवाओं और कारीगरों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की युवा शक्ति ही प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सबसे बड़ा आधार बनेगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन एवं आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को सम्मानित किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, प्रशिक्षित युवाओं से संवाद किया और उनके नवाचारों एवं उत्पादों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश के युवाओं को अपनी पहचान छिपानी पड़ती थी और बाहर के लोग उत्तर प्रदेश के नाम से दूरी बनाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के कारण प्रतिभाशाली युवाओं के साथ अन्याय होता था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार देश में कौशल विकास मंत्रालय का गठन हुआ, जिससे युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण की नई दिशा मिली। आज उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, 3-डी प्रिंटिंग और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि युवा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 96 लाख एमएसएमई उद्यम उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, फिरोजाबाद का ग्लास उद्योग, मेरठ का खेल उद्योग, भदोही का कालीन, लखनऊ की चिकनकारी, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और बनारसी साड़ी जैसे उत्पाद आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में लखनऊ में स्थापित ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। कोरोना काल के दौरान भी इस परियोजना का कार्य जारी रखा गया और आईटीआई, पॉलिटेक्निक तथा इंजीनियरिंग संस्थानों से निकले सैकड़ों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना चाहती है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक जिले में सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन विकसित किए जा रहे हैं। विदेशों में रोजगार के इच्छुक युवाओं को संबंधित देशों की भाषाओं का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने एक प्रशिक्षित युवती का उल्लेख करते हुए कहा कि वह 27 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर अपनी मां का इलाज करा रही है। उन्होंने कहा कि यह आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण है और “यह 27 हजार रुपये कई लाख रुपये पर भारी हैं।” मुख्यमंत्री ने युवती की मां के उपचार में हरसंभव सरकारी सहायता देने का भी आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल, विधायक डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान एवं मुकेश शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: एसआईटी रिपोर्ट में प्रबंधन पर गंभीर सवाल

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क्या बड़े चेहरों पर कार्रवाई से बच रही जांच

अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले में एसआईटी (विशेष जांच दल) की रिपोर्ट लगभग तैयार हो गई है। रिपोर्ट जल्द ही शासन को सौंपी जाएगी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जांच में मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय के खिलाफ आपराधिक साजिश का स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया है और न ही उन्हें औपचारिक रूप से क्लीन चिट दिए जाने की पुष्टि हुई है। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जांच बड़े जिम्मेदार लोगों तक पहुंचेगी या केवल प्रशासनिक कमियों तक सीमित रह जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में चढ़ावे की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर खामियों का उल्लेख किया है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि टिन्नू यादव नामक व्यक्ति, जो ट्रस्ट के अधिकृत रिकॉर्ड में शामिल नहीं था, उसे मंदिर की संवेदनशील व्यवस्थाओं और चढ़ावे की हुंडियों की चाबियों तक पहुंच प्राप्त थी। रिपोर्ट में इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना गया है और निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि बैंकिंग प्रक्रिया, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन और नियुक्तियों में कथित लापरवाही के लिए तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई है। कुछ प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि आपराधिक साजिश के पहलू की जांच पुलिस विवेचना के स्तर पर जारी बताई गई है।

एसआईटी ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें भी की हैं। इनमें ट्रस्ट का नियमित और थर्ड-पार्टी ऑडिट, चढ़ावे की गिनती और जमा करने की पारदर्शी व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी को मजबूत करना, कंट्रोल रूम की 24 घंटे सक्रिय मॉनिटरिंग और नियुक्तियों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना शामिल है।

राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों ने मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें शासन और जांच एजेंसियों पर हैं कि एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर जवाबदेही तय होगी या मामला केवल प्रशासनिक सुधारों तक सीमित रह जाएगा। यदि जांच में किसी भी स्तर पर आपराधिक जिम्मेदारी सामने आती है, तो उसके अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जाएगी।