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Monday, May 11, 2026
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मातृ दिवस विशेष: नृत्य, संगीत और काव्य के संगम से लखनऊ मेट्रो ने किया माताओं को नमन

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कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से मना मातृ दिवस

लखनऊ: मातृ दिवस के अवसर पर रविवार को उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) की ‘शो योर टैलेंट’ पहल के अंतर्गत हजरतगंज मेट्रो स्टेशन पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘डांसस्पोर्ट एसोसिएशन ऑफ लखनऊ’ के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य कला के माध्यम से समाज में माताओं के निस्वार्थ प्रेम और उनके योगदान का सम्मान करना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात एथलीट और अर्जुन पुरस्कार विजेता सुश्री रचना गोविल उपस्थित रहीं। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए अपने जीवन के प्रेरक संस्मरण साझा किए। सुश्री गोविल ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी खेल यात्रा और जीवन की हर सफलता के पीछे उनकी मां का अटूट विश्वास और अथक योगदान रहा है।

हजरतगंज मेट्रो स्टेशन पर आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों ने मातृत्व की भावनाओं को समर्पित विभिन्न प्रस्तुतियां दीं:

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: प्रतिभाशाली कलाकारों द्वारा ‘माई तेरी चुनर’, ‘ओरी चिरैया’ और ‘लुका छुपी’ जैसे मार्मिक गीतों पर आधारित भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किए गए।

विविध कला संगम: कार्यक्रम में शास्त्रीय और आधुनिक नृत्य शैलियों के साथ-साथ संगीत और काव्य पाठ का अनूठा संगम देखने को मिला।

भावनात्मक अभिव्यक्ति: कलाकारों के साथ-साथ संस्था के पदाधिकारियों और अभिभावकों ने भी कविताओं, गीतों और गजलों के माध्यम से अपनी भावनाओं को साझा किया, जिससे पूरा माहौल भावनात्मक और गरिमामय हो गया।

कार्यक्रम में शहर की कई गणमान्य हस्तियों, जिनमें डॉ. नीरज जैन, डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह और श्री सदन यादव शामिल थे। इन्होंने उपस्थित रहकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर माताओं के सम्मान में इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का एक बेहतरीन प्रयास हैं।

होर्मुज तनाव के बीच ईरान की मुश्किलें बढ़ीं, ऑयल स्टोरेज की जगह हुई ख़त्म ; 3000 बैरल तेल समुद्र में बहाया

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होर्मुज: अमेरिका-ईरान (America-Iran) में फिर बातचीत की तैयारी चल रही है। अगले हफ्ते इस्लामाबाद (islamabad) में दोनों देशों के बीच नई वार्ता हो सकती है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने 14 पॉइंट वाला ड्राफ्ट दिया है। लेकिन बातचीत से पहले ईरान ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने फिर दखल दिया तो जंग दोबारा शुरू हो सकती है। वहीं अमेरिका ने दावा किया कि उसने 70 से ज्यादा जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने से रोका। इस बीच फारस की खाड़ी में ईरान के खार्ग आईलैंड के पास बड़ा तेल रिसाव देखा गया है। सैटेलाइट तस्वीरों में समुद्र में फैला तेल साफ नजर आया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रिसाव अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज में बढ़े तनाव के कारण हो सकता है। ऑर्बिटल EOS नाम की संस्था के अनुसार, समुद्र में तेल करीब 51 वर्ग मील से ज्यादा इलाके में फैल चुका है। अनुमान है कि 3,000 बैरल से ज्यादा तेल पानी में बह गया है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और नौसैनिक दबाव की वजह से ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ा है। कई तेल टैंकर फंसे हुए हैं और देश के पास तेल स्टोर करने की जगह कम पड़ रही है। इसी कारण यह आशंका जताई जा रही है कि एक्स्ट्रा ऑयल समुद्र में छोड़ा जा रहा है।

हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर नीमा शोकरी ने कहा कि तेल के कुओं को अचानक बंद करना आसान नहीं होता, क्योंकि इससे पाइपलाइन जाम हो सकती हैं या तेल भंडार को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा, ‘तेल के कुएं ऐसी मशीनें नहीं हैं जिन्हें जब चाहें बंद और चालू किया जा सके।’ कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि खार्ग आइलैंड के पास पुरानी पाइपलाइन में लीकेज भी इसकी वजह हो सकती है। यह तेल धीरे-धीरे सऊदी अरब के समुद्री क्षेत्र की तरफ बढ़ रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं ईरान ने तेल रिसाव की खबरों को खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान ऑयल टर्मिनल्स कंपनी ने कहा कि जांच में कहीं भी तेल लीकेज के सबूत नहीं मिले हैं।

 

राम भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं ! एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से मरीज की तड़प-तड़पकर मौत

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पाली: राजस्थान में पाली (Pali) जिले के सबसे बड़े बांगड़ अस्पताल (Bangar Hospital) से एक बड़ी खबर आई है। सिस्टम की लापरवाही ने एक युवा की जिंदगी छिन ली। पाली से जोधपुर रेफर किए गए 20 साल के सावन कुमार (patient) की एंबुलेंस में तड़प-तड़पकर मौत हो गई। वजह सिर्फ इतनी थी कि एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर बीच रास्ते में जवाब दे गया। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया और एम्बुलेंस चालक व प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।

नया गांव सांसी बस्ती के रहने वाले सावन को किडनी की बीमारी थी। रविवार को हालत बिगड़ने पर उसे जोधपुर के एमडीएम (MDM) अस्पताल रेफर किया गया। सावन को 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट पर लिटाया गया। अभी एंबुलेंस पाली से महज 20 किलोमीटर दूर रोहट के पास ओम बन्ना मंदिर तक ही पहुंची थी कि ऑक्सीजन सप्लाई अचानक बंद हो गई। सावन का दम फूलने लगा। और उसने भाई की गोद में ही दम तोड़ दिया।

मृतक के भाई देवाराम का रो-रोकर बुरा हाल है। उसने बताया, जैसे ही ऑक्सीजन बंद हुई, मैंने ड्राइवर से मिन्नतें कीं। उसने कहा कि दूसरा सिलेंडर मंगवा लिया है। लेकिन जब तक सिलेंडर आता, मेरा भाई चला गया। गुस्साए परिजनों ने सावन की बॉडी को वापस बांगड़ अस्पताल लाकर मॉर्च्युरी के बाहर धरना दे दिया।

इस पूरे मामले में 108 एंबुलेंस के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर मंथन शर्मा ने अजीब सफाई दी है। उनका कहना है कि सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म नहीं हुई थी, बल्कि उसकी चूड़ी में खराबी आ गई थी जिससे सप्लाई रुक गई। दूसरी तरफ, सीएमएचओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्राइवर के खिलाफ जांच और कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।

ऋषिकेश-बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर यात्रियों से भरी बस पलटी, यूपी की एक महिला समेत 7 घायल

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टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में शिवपुरी के पास ऋषिकेश-बद्रीनाथ नेशनल हाईवे (Rishikesh-Badrinath National Highway) पर यात्रियों से भरी एक बस अनियंत्रित होकर सड़क पर ही पलट गई। गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इस हादसे में 7 लोग घायल (Injured) हुए हैं। जिसमें यूपी की एक महिला भी गंभीर रूप से घायल हो गई है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी के मुताबिक बस में ड्राइवर और कंडक्टर सहित कुल 25 यात्री सवार थे। ये सभी यात्री बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर हरिद्वार लौट रहे थे। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बस की एक खिड़की अचानक खुल गई थी, जिसे बंद करने की कोशिश में ड्राइवर का ध्यान भटक गया और उसने वाहन पर से अपना नियंत्रण खो दिया। इस वजह से बस बीच सड़क पर ही पलट गई।

मुनि की रेती थाना पुलिस और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। हादसे में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर की रहने वाली तनु गुप्ता घायल हुई हैं। उन्हें तत्काल 108 एम्बुलेंस सेवा की मदद से ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, तनु गुप्ता की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है और अन्य सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

 

युवा शक्ति को मिलेगा हुनर का साथ, उत्तर प्रदेश बनेगा देश का सबसे बड़ा ‘स्किल हब’

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योगी सरकार की नई पहल से 13 विभागों के युवाओं को मिलेगा उद्योग आधारित कौशल प्रशिक्षण

प्रदेश भर में मिशन मोड पर शुरू हुई रोजगारपरक प्रशिक्षण योजना

युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमशीलता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है लक्ष्य

लखनऊ, 10 मई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगार सक्षम बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने राज्य को देश का अग्रणी “स्किल हब” बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। प्रदेश के 13 प्रमुख विभागों को कौशल विकास प्रशिक्षण का प्रस्ताव भेजते हुए आगामी तीन महीनों में बड़े स्तर पर युवाओं को रोजगारपरक और उद्योग आधारित प्रशिक्षण से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमशीलता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

हर वर्ग तक पहुंचेगा कौशल विकास अभियान
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शहरी गरीब परिवारों, ग्रामीण युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों, अल्पसंख्यक समुदाय, निर्माण श्रमिक परिवारों, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तथा कारागारों से जुड़े युवाओं को उनकी रुचि और उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल सामाजिक समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण के मॉडल के रूप में देखी जा रही है। विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्गों के युवाओं को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए मिशन मोड में कार्य किया जा रहा है।

प्रदेश के हर जिले में तैयार होगी हुनरमंद युवा शक्ति
राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कौशल विकास को युवाओं की आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक वर्ग तक कौशल प्रशिक्षण की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विभागीय समन्वय के साथ तेज गति से कार्य किया जा रहा है। मिशन निदेशक पुलकित खरे द्वारा संबंधित विभागों को पत्र जारी कर प्रशिक्षण लक्ष्य एवं कार्ययोजना साझा करने का अनुरोध किया गया है। जून माह के प्रथम सप्ताह में प्रशिक्षण लक्ष्यों का आवंटन किए जाने की संभावना है। साथ ही सभी विभागों से नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया है, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन तेजी से किया जा सके।

जेलों में भी शुरू होगा कौशल प्रशिक्षण अभियान
योजना के अंतर्गत कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग के माध्यम से जेलों में निरुद्ध युवाओं को भी कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। सरकार का उद्देश्य उन्हें प्रशिक्षण देकर पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। इसके अलावा राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा), उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला कल्याण विभाग, समाज कल्याण विभाग और ग्राम्य विकास विभाग से जुड़े युवाओं को आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा प्रशिक्षण
पुलकित खरे ने बताया कि यूपीएसडीएम को राष्ट्रीय स्तर पर एनसीवीईटी द्वारा ‘अवार्डिंग बॉडी’ की मान्यता प्राप्त है, जिससे प्रशिक्षण और प्रमाणन की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। वर्तमान में मिशन से राजकीय संस्थानों के साथ प्रतिष्ठित निजी और औद्योगिक इकाइयां भी प्रशिक्षण पार्टनर के रूप में जुड़ी हुई हैं। सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार के ‘कॉस्ट कॉमन नॉर्म्स’ (सीसीएन) के अनुरूप संचालित किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित होंगी।

आठ लाख से अधिक युवाओं को मिला प्रशिक्षण
मिशन निदेशक ने बताया कि यूपीएसडीएम का उद्देश्य 14 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को अल्पकालीन, रोजगारपरक एवं उद्योग आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। पिछले 9 वर्षों में मिशन द्वारा 8,09,494 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें से 3,04,810 युवाओं को रोजगार एवं सेवायोजन के अवसरों से जोड़ा गया है। यह उपलब्धि योगी सरकार की उस सोच को दर्शाती है जिसमें युवा शक्ति को प्रदेश की आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा आधार माना गया है। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि प्रशिक्षित मानव संसाधन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी देश का अग्रणी राज्य बनाना है।

13 विभागों के साथ मिलकर चलेगा अभियान
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा माध्यमिक शिक्षा विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा), संयुक्त आयुक्त उद्योग कार्यालय, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग, महिला कल्याण विभाग, समाज कल्याण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, पर्यटन विभाग तथा हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग निदेशालय को प्रशिक्षण प्रस्ताव भेजा गया है। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि विभागीय समन्वय से संचालित यह अभियान लाखों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों के द्वार खोलेगा।

15 साल बाद जनगणना: आँकड़ों से तय होगी अर्थव्यवस्था, राजनीति और समाज की नई दिशा

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(सुभाष आनंद-विभूति फीचर्स)

आजादी के बाद हर 10 साल में होने वाली जनगणना इस बार 15 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। नियमों के मुताबिक अगली जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते तब इसे टाल दिया गया। 2025 में अधिसूचना जारी होने के बाद अब 2026 में जनगणना की प्रक्रिया शुरू हुई है। अब सारे देश में जोर शोर से जनगणना की प्रक्रिया चल रही है।
एक मोटे अनुमान के अनुसार भारत की जनसंख्या अब 1.60 अरब के करीब पहुँच चुकी है। हम आबादी के मामले में चीन को पछाड़कर दुनिया में पहले स्थान पर आ गए हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि जिस रफ्तार से जनसंख्या बढ़ी है, उस अनुपात में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और आधारभूत ढाँचे की योजनाएँ नहीं बनीं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि माँग और आपूर्ति का चक्र बिगड़ चुका है। बेरोजगारी 2011 के मुकाबले दोगुनी हो गई है। अगर समय रहते जनसंख्या वृद्धि रोकने के लिए ठोस राष्ट्रीय नीति नहीं बनी तो संसाधनों पर दबाव और बढ़ेगा और आम नागरिक का जीवन मुश्किल हो जाएगा।
जनगणना का सबसे बड़ा राजनीतिक असर परिसीमन पर पड़ेगा। 2011 के आँकड़ों के आधार पर लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल लाया गया था, जिसका विपक्ष ने विरोध किया। विपक्ष की माँग थी कि 2026 की जनगणना को आधार बनाया जाए। अब 15 साल बाद हो रही गणना से संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होगा। जिन राज्यों में आबादी तेजी से बढ़ी है, वहाँ लोकसभा और विधानसभा सीटें बढ़ेंगी। दक्षिण के राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण का खामियाजा उन्हें सीटें गंवाकर भुगतना पड़ेगा इसीलिए परिसीमन 2026 के बाद कराने पर सहमति बनी थी।
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी खासियत जातियों की गिनती है। 1931 के बाद पहली बार देश में जातिगत आँकड़े जुटाए जा रहे हैं। सरकार का तर्क है कि इससे ओबीसी, एससी, एसटी और अन्य वर्गों के लिए बेहतर योजनाएँ बनेंगी। सामाजिक न्याय मजबूत होगा।
वहीं आलोचकों का कहना है कि इससे समाज जातियों में और बँट सकता है। आरक्षण की नई माँगें उठेंगी। कई प्रदेशों में पहले से चल रही जातिगत राजनीति को और हवा मिलेगी फिर भी बड़े दल मानते हैं कि नीति-निर्माण के लिए सही डेटा जरूरी है।
2011 की जनगणना में प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 907 से बढ़कर 921 हुई थी। इस बार के आँकड़े बताएँगे कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों का जमीन पर कितना असर हुआ। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान जैसे राज्यों में लिंगानुपात अभी भी चिंता का विषय है।
साक्षरता दर के भी नए आँकड़े भी आएँगे। 2011 में केरल 94% के साथ शीर्ष पर था और बिहार 61.8% के साथ सबसे नीचे। अब देखना होगा कि बिहार, यूपी, एमपी, राजस्थान में कितना सुधार हुआ। डिजिटल इंडिया और नई शिक्षा नीति का असर कितना पड़ा, यह भी साफ होगा।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वालों की सही संख्या भी सामने आएगी। केंद्र की उज्ज्वला योजना, फ्री राशन, महिलाओं को मासिक सहायता जैसी योजनाओं ने गरीबी कितनी घटाई, इसका आकलन होगा। आर्थिक विशेषज्ञों का आरोप है कि सरकारें आँकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हैं। जनगणना से असली तस्वीर सामने आएगी।
भारत में जनगणना की जड़ें ब्रिटिश शासन से जुड़ी हैं। पहला प्रयास 1865 से 1872 के बीच हुआ। 1881 में पहली बार पूरे अविभाजित भारत में एक साथ जनगणना कराई गई। आजादी के बाद 1951 में पहली जनगणना हुई और फिर हर 10 साल का क्रम चला। 1872 की जनगणना में सिर्फ 17 सवाल थे। 1901 में पूछा गया कि कौन अंग्रेजी जानता है। 2011 में प्रजनन, कामकाज, पलायन, दिव्यांगता जैसे मुद्दे जुड़े। जनगणना हमेशा समाज का आईना रही है। वह बताती है कि देश किन समस्याओं से जूझ रहा है।
1997 में आई.के. गुजराल की सरकार के समय लोकसभा में जनसंख्या पर दो दिन लगातार बहस हुई थी। तब सभी दलों ने माना था कि यह राष्ट्रीय समस्या है और इस पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचना होगा। आज फिर वैसी ही बहस की जरूरत है।
अच्छी बात यह है कि जनसंख्या नियंत्रण पर सभी दलों में मोटे तौर पर सहमति है। अगर केंद्र और राज्य मिलकर गंभीरता से काम करें तो अगले 10-15 साल में जनसंख्या स्थिरता का लक्ष्य पाया जा सकता है।
जनसंख्या नियंत्रण से शिक्षा, स्वास्थ्य और लिंग असमानता जैसी सामाजिक समस्याओं का समाधान भी आसान होगा। एक मजबूत और सभ्य समाज के लिए जनसंख्या का संतुलन में होना जरूरी है।
2026 की जनगणना सिर्फ लोगों की गिनती नहीं है। यह भारत का एक्स-रे है। यह बताएगा कि हम विकसित भारत के लक्ष्य से कितनी दूर हैं और हमें कहाँ मेहनत करनी है। यह डेटा अगले 10 साल की नीतियों की बुनियाद बनेगा। इसलिए इसका निष्पक्ष और समयबद्ध होना बेहद जरूरी है। (विभूति फीचर्स)