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Monday, May 25, 2026
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यूपी बीजेपी में महाबदलाव की पटकथा तैयार, पंकज चौधरी की नई टीम में आधे चेहरे होंगे नए!

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यूथ इंडिया | शरद कटियार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाजपा में अब बड़ा संगठनात्मक विस्फोट होने जा रहा है। लंबे मंथन, जातीय गणित और चुनावी फीडबैक के बाद पार्टी ने प्रदेश संगठन की नई रूपरेखा लगभग तय कर ली है। अब सिर्फ नामों की औपचारिक घोषणा बाकी है। सत्ता और संगठन के गलियारों में चर्चा तेज है कि इस बार भाजपा पुराने ढांचे को तोड़कर पूरी तरह “2027 मिशन मोड” में उतरने जा रही है।

सूत्रों की मानें तो प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अगुवाई में बनने वाली नई टीम में करीब 50 प्रतिशत नए चेहरों को मौका मिलेगा। संगठन में उन नेताओं की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है जो लंबे समय से पदों पर बैठे हैं लेकिन जमीन पर प्रभाव कमजोर पड़ा है। पार्टी इस बार सिर्फ निष्ठा नहीं बल्कि “मैदान में सक्रियता” और सामाजिक पकड़ को भी पैमाना बना रही है।

भाजपा नेतृत्व समझ चुका है कि 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में जो राजनीतिक झटके लगे, उनका असर सीधे 2027 की तैयारी पर पड़ सकता है। यही वजह है कि लखनऊ से दिल्ली तक कई दौर की बैठकों में संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति बनाई गई है। पार्टी अब बूथ स्तर तक नए समीकरण साधने में जुटी है।

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को इस पूरे बदलाव का केंद्रीय चेहरा माना जा रहा है। कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को भाजपा ने सिर्फ संगठन प्रमुख नहीं बनाया, बल्कि उन्हें पिछड़े वर्ग की राजनीति का बड़ा चेहरा बनाकर आगे बढ़ाया है। पार्टी के अंदर यह संदेश साफ दिया गया है कि अब भाजपा गैर यादव OBC और गैर जाटव दलित वोट बैंक को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगी।

सूत्र बताते हैं कि पंकज चौधरी ने संगठन में नए चेहरों को लाने के लिए जिलों से रिपोर्ट मंगवाई है। कई क्षेत्रीय अध्यक्षों, मोर्चा पदाधिकारियों और जिला स्तर के नेताओं के कामकाज का मूल्यांकन कराया गया है। कमजोर प्रदर्शन वाले नेताओं पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

नई टीम में सबसे ज्यादा जोर सामाजिक संतुलन पर रहेगा। भाजपा का पूरा फोकस इस बार दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग पर है। पार्टी पीडीए की राजनीति का जवाब अपने संगठनात्मक ढांचे से देना चाहती है। संभावित संगठनात्मक फार्मूले के अनुसार लगभग आधे पद ओबीसी नेताओं को मिल सकते हैं। युवा नेताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय चेहरों को प्राथमिकता मिलेगी।

पूर्वांचल, पश्चिम, बुंदेलखंड और अवध के बीच क्षेत्रीय संतुलन साधा जाएगा।निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है भाजपा अब जातीय समीकरण के साथ-साथ “आक्रामक संगठन” मॉडल पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि सिर्फ सरकार की योजनाओं के भरोसे चुनाव नहीं जीते जा सकते, इसके लिए मजबूत बूथ नेटवर्क जरूरी है।

सूत्रों के मुताबिक प्रदेश संगठन की सूची को लेकर दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ कई दौर की चर्चा हो चुकी है। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि यूपी भाजपा की टीम ऐसी हो जो 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हर जिले में राजनीतिक ऊर्जा पैदा कर सके।

बताया जा रहा है कि संगठन में उन चेहरों को आगे बढ़ाया जाएगा जिनकी पकड़ कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत है। भाजपा अब “सिर्फ बड़े नाम” नहीं बल्कि “काम करने वाले नेताओं” को आगे लाने की तैयारी में है। प्रदेश भाजपा इस समय 1918 मंडलों और हजारों बूथों के फीडबैक पर काम कर रही है। पार्टी की कोशिश है कि हर सामाजिक वर्ग में अपनी पैठ मजबूत की जाए। यही वजह है कि नई टीम को सिर्फ पद बांटने की कवायद नहीं बल्कि 2027 की चुनावी रणनीति का ट्रेलर माना जा रहा है।

32 साल से फरार चल रहा हत्या का आरोपी गिरफ्तार, घर के गुप्त कमरे में था छिपा

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जाजपुर: ओडिशा के जाजपुर (Jajpur) जिले में हत्या (Murder) के आरोपी एक व्यक्ति ने तीन दशकों से अधिक समय तक अपने ही घर के एक गुप्त कमरे में छिपकर गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया। पुलिस की तलाश आखिरकार पिछले सप्ताह देर रात की छापेमारी के बाद समाप्त हुई, जो किसी फिल्मी दृश्य जैसी लग रही थी।आरोपी की पहचान 58 वर्षीय रबिंद्र मल्लिक के रूप में हुई है, जिसे शुक्रवार को कुआखिया पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नुहाट गांव से छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि उसे अदालत में पेश किया गया और जेल भेज दिया गया।

कुआखिया पुलिस स्टेशन के अधिकारी सुशांत कुमार सेठी ने बताया कि रबिंद्र 21 अक्टूबर, 1994 से फरार था, जब उसने कथित तौर पर एक विवाद के दौरान परमानंद मल्लिक की हत्या कर दी थी। पुलिस के अनुसार, पेशे से राजमिस्त्री रबिंद्र फर्जी पहचान के तहत विभिन्न राज्यों में काम करता था, कभी-कभी चुपके से घर लौट आता था और गिरफ्तारी से बचने के लिए कथित तौर पर एक गुप्त सुरंग जैसे कमरे में छिप जाता था।

रबींद्र के हाल ही में पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए गांव लौटने की सूचना मिलने पर, जाजपुर एसपी ने कुआखिया पुलिस को निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया। तदनुसार, पुलिसकर्मियों ने शुक्रवार रात अचानक छापा मारने से पहले अलग-अलग वेश बदलकर घर के पास निगरानी रखी। तलाशी अभियान के दौरान, रबींद्र कथित तौर पर एक गुप्त कमरे में छिपा हुआ मिला।

मामले के बारे में बात करते हुए, सेठी ने कहा कि हत्या के बाद पुलिस ने रबींद्र की कई जगहों पर तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। बाद में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। सेठी ने आगे बताया, “रबींद्र आदमपुर गांव का निवासी बनकर आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र सहित फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल करता था। उसने कई वर्षों तक हैदराबाद, केरल और अन्य राज्यों में प्रवासी राजमिस्त्री के रूप में काम किया।”

पुलिस ने बताया कि ओडिशा से बाहर रहने के बावजूद, वह अपने परिवार के सदस्यों से गुप्त रूप से संपर्क बनाए रखता था और कभी-कभी घर लौट आता था। जब भी वह गांव लौटता, तो कथित तौर पर काम पर जाने से पहले कुछ दिनों तक गुप्त कमरे में छिपा रहता था।

पुलिस के अनुसार, यह हत्या 1994 में तत्कालीन धर्मशाला विधायक द्वारा रबींद्र के बड़े पिता को उपहार में दिए गए एक कृषि उपकरण को लेकर हुए विवाद के बाद हुई थी। बताया जाता है कि वह उपकरण रबींद्र के बड़े पिता के बेटे परमानंद मल्लिक के पास था।

पुलिस ने बताया कि बाद में रबींद्र ने परमानंद से उपकरण लौटाने को कहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया, जिससे दोनों के बीच झगड़ा हुआ। गुस्से में आकर रबींद्र ने कथित तौर पर परमानंद पर लाठी से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परमानंद के भाई जगबंधु मल्लिक ने धर्मशाला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।

 

गंगा दशहरा के अवसर पर हरिद्वार में लगभग 43 लाख श्रद्धालुओं ने किए पवित्र गंगा स्नान

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हरिद्वार/उत्तरकाशी: गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के शुभ अवसर पर रविवार से हरिद्वार (Haridwar) में लगभग 43 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में स्नान किया। रविवार को लगभग 27 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया, जिसके बाद सोमवार सुबह गंगा आरती के बाद 16 लाख और श्रद्धालुओं ने स्नान किया। ऐसा माना जाता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान करने और दान-पुण्य करने से सभी पापों का निवारण होता है और मोक्ष प्राप्त होता है।

देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में श्रद्धालु हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर स्नान करने के लिए हरिद्वार पहुंचे। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जो मां गंगा से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हुए प्रार्थना कर रहे थे। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने गंगा दशहरा के अवसर पर पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया।

प्रशासन ने घाटों पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है और किसी भी संभावित अव्यवस्था या अराजकता को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं। सभी गंगा घाटों पर “हर हर गंगे” के गूंजते नारों से वातावरण आध्यात्मिक रूप से ऊर्जावान हो गया। हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को, राजा भगीरथ द्वारा की गई तपस्या से प्रसन्न होकर, माता गंगा भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित हुईं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और दान-पुण्य करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।

हरिद्वार की तरह ही, इस पवित्र अवसर पर उत्तरकाशी के विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम में भी आस्था, श्रद्धा और भक्ति का संगम देखने को मिला। सोमवार सुबह से ही गंगा दशहरा मनाने के लिए भक्तों की भारी भीड़ गंगोत्री धाम उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर, भागीरथी घाट और आसपास का पूरा इलाका “हर हर गंगे” और “जय मां गंगे” के नारों से गूंज उठा। देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए हजारों भक्त मां गंगा के पवित्र दर्शन और स्नान के लिए धाम पहुंचे।

धार्मिक अनुष्ठान सुबह तड़के मां गंगा को समर्पित विशेष प्रार्थनाओं और पूजा के साथ शुरू हुए। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रों के जाप, शंखों की ध्वनि और मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा। गंगोत्री मंदिर के द्वार खुलते ही भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने भागीरथी नदी के पवित्र और शीतल जल में स्नान किया, वहीं संतों, ऋषियों और तीर्थयात्रियों ने उन्हें गंगा दशहरा के गहन महत्व के बारे में ज्ञान प्रदान किया। भारी भीड़ को देखते हुए, सामान्य प्रशासन और पुलिस बल दोनों सतर्क रहे।

मंदिर परिसर, घाटों और तीर्थ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, नगर परिषद और अन्य संबंधित विभागों की टीमें भी मौके पर मौजूद थीं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा सहायता और यातायात प्रबंधन के विशेष प्रबंध किए गए हैं।

 

 

रेखा सरकार का यमुना सफाई पर बड़ा कदम, 1000 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं को दी मंजूरी

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नई दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के नेतृत्व में दिल्ली सरकार (Government of Delhi) ने राजधानी में जल संकट और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने यमुना नदी (Yamuna River) के पुनर्जीवन और नजफगढ़ ड्रेन की सफाई को मिशन मोड में आगे बढ़ाते हुए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य दिल्ली में जल प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना, सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाना और पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाना है। इसके तहत सीवर नेटवर्क के विस्तार, आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) विकसित करने और जलापूर्ति प्रणाली में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

दिल्ली सरकार की प्राथमिकता राजधानी के हर नागरिक को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और दिल्ली को एक स्वच्छ, हरित तथा जल-सुरक्षित राजधानी के रूप में विकसित करना है। उन्होंने बताया कि यमुना और नजफगढ़ ड्रेन में गिरने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए व्यापक स्तर पर सफाई और अपशिष्ट उपचार कार्य किए जाएंगे। इसके लिए सरकार मिशन मोड में काम कर रही है और जल प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राजधानी में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करना, सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता का विस्तार करना और जल संरक्षण से जुड़े ढांचे को आधुनिक बनाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके तहत नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सीवर नेटवर्क के विस्तार और वर्षा जल संचयन जैसी योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ-साथ नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो और भविष्य के जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी और लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं प्राप्त होंगी।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में 12 डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTP) लगाने की मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं पर लगभग 860 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इन्हें केंद्र सरकार की AMRUT योजना के तहत विकसित किया जाएगा। इन सभी प्लांटों की कुल क्षमता 46.5 MGD (Million Gallons Per Day) होगी। इनमें सबसे बड़ा प्लांट मित्राऊं क्षेत्र में 17 MGD क्षमता का होगा। इसके अलावा कैर, कांगनहेड़ी, ककरोला और दिचाऊं कलां में चार प्लांट, गालिबपुर, सारंगपुर और शिकारपुर में तीन प्लांट तथा हसनपुर, जाफरपुर, काजीपुर और खेड़ा डाबर में चार प्लांट स्थापित किए जाएंगे।

इन परियोजनाओं के पूरा होने से नजफगढ़ क्षेत्र की 121 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों और 35 गांवों को लाभ मिलेगा। अनुमान है कि करीब 7 लाख लोग इससे सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। सरकार का कहना है कि इन प्लांटों के शुरू होने के बाद अनुपचारित सीवेज को नजफगढ़ ड्रेन में जाने से रोका जा सकेगा, जिससे यमुना नदी के प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि केशोपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के पहले चरण का अपग्रेडेशन और क्षमता विस्तार किया जाएगा। इस परियोजना के तहत प्लांट की मौजूदा क्षमता 12 MGD से बढ़ाकर 18 एमजीडी की जाएगी। इसके लिए लगभग 122 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है। सरकारी जानकारी के अनुसार, इस अपग्रेडेशन का उद्देश्य उपचारित जल (ट्रीटेड वाटर) की गुणवत्ता को आधुनिक और नवीनतम मानकों के अनुरूप बनाना है, ताकि इसे अधिक प्रभावी तरीके से पुन: उपयोग किया जा सके। परियोजना में 11 वर्षों तक संचालन और रखरखाव (O&M) की व्यवस्था भी शामिल होगी। इससे प्लांट की दीर्घकालिक कार्यक्षमता सुनिश्चित होगी और सिस्टम का बेहतर संचालन हो सकेगा।

 

टेरर फंडिंग के खिलाफ NIA का बड़ा एक्शन, शोपियां-श्रीनगर में तीन ठिकानों पर छापेमारी

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जम्मू-कश्मीर: टेरर फंडिंग के मामले में NIA ने सोमवार (25 मई) को जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के शोपियां (Shopian) जिले के दो स्थानों और श्रीनगर (Srinagar) के एक स्थान पर की जा रही है, जिसमें दारुल उलूम सिराजुल उलूम भी शामिल है, जिसे पिछले महीने अवैध संस्था घोषित किया गया था। इसके साथ ही शोपियां में जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख के घर पर भी NIA ने तलाशी ली।

सूत्रों के मुताबिक, आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क, ओवरग्राउंड वर्करों (OGWs) और संदिग्ध आतंकवाद-फंडिंग गतिविधियों पर शिकंजा कसने श्रीनगर और घाटी के दक्षिणी हिस्सों समेत कई इलाकों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़े पूर्व प्रमुख शहज़ादा औरंगज़ेब के आवास की भी तलाशी ली गई।

यह छापेमारी टेरर फंडिंग और घाटी में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के संदिग्ध नेटवर्क को तोड़ने के लिए की जा रही। प्रशासन का आरोप है कि कुछ संस्थान और लोग युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और प्रतिबंधित संगठनों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जमीन तैयार कर रहे थे। बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान कुछ अहम दस्तावेज और सामग्री जब्त की गई है, जिसकी जांच की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि NIA की टीमों ने शोपियां के इमाम साहिब इलाके में स्थित इस शिक्षण संस्थान में तड़के तलाशी अभियान चलाया. यह संस्थान सैकड़ों छात्रों को धार्मिक और औपचारिक दोनों प्रकार की शिक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही श्रीनगर के अन्य ठिकानों पर भी NIA की कार्रवाई जारी है। साथ ही संदिग्ध व्यक्तियों से जुड़े रिहायशी परिसरों की भी तलाशी ली जा रही है। NIA की टीमों को जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों का पूरा सहयोग मिल रहा है।

फरवरी 2024 में, केंद्र सरकार ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमात-ए-इस्लामी जम्मू और कश्मीर पर लगे बैन को और पांच साल के लिए बढ़ा दिया, और इसे एक गैर-कानूनी संगठन घोषित कर दिया। जमात-ए-इस्लामी पर आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों, अलगाववाद और भारत-विरोधी प्रचार में शामिल होने का आरोप है।

इस संगठन को सबसे पहले 28 फरवरी, 2019 को ‘गैर-कानूनी संगठन’ घोषित किया गया था। HA के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी आतंकवादी संगठनों के साथ करीबी संपर्क में है और जम्मू और कश्मीर में लगातार उग्रवाद और आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। यह भारतीय क्षेत्र के एक हिस्से को संघ से अलग करने की मांगों का समर्थन कर रहा है और इस उद्देश्य के लिए लड़ने वाले आतंकवादी और अलगाववादी समूहों का साथ दे रहा है। ऐसा करके यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों और बयानों में शामिल हो रहा है।

अलीगढ़: महिलाओं को लूटने वाले दो अपराधी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

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अलीगढ़: उत्तर प्रदेश पुलिस ने अलीगढ़ (Aligarh) में रविवार रात यहां एक मुठभेड़ में महिलाओं को लूटने वाले दो अपराधियों (Two criminals) को ढेर कर दिया है। अपराधियों ने रविवार दोपहर एक महिला से झुमके चुरा लिए थे और पुलिस तब से उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही थी। पुलिस ने देर रात मधौली गांव के पास अपराधियों को घेर लिया। इसके बाद हुई मुठभेड़ में दोनों अपराधी, रजा मोहम्मद और मोमिन, मारे गए।

मारे गए अपराधी रजा मोहम्मद के खिलाफ 40 मामले दर्ज थे। वह सिंभाओली पुलिस थाना क्षेत्र (हापुड़) के राजपुर गांव का निवासी था, जबकि बुलंदशहर निवासी मोमिन के खिलाफ 27 मामले दर्ज थे। मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। 17 मई की दोपहर भाकरोला गांव की कई महिलाएं, जिनमें सीमा देवी, कुंती देवी, सुनीता, गुड़िया, प्रेमलता, कमलेश, रेखा, पूनम, ललितेश और कमलेश शामिल थीं, खेतों में गई थीं। दो युवक बाइक पर आए और पिस्तौल दिखाकर महिलाओं को धमकाया। इसके बाद बदमाशों ने महिलाओं के कान की बालियां और पायल समेत अन्य गहने जबरदस्ती उतार लिए। जब ​​महिलाओं ने विरोध किया, तो उन्होंने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। अपराध करने के बाद दोनों आरोपी मोटरसाइकिल पर सवार होकर फरार हो गए।

एसएसपी नीरज सिंह जादौन ने बताया, “कई दिनों से लगातार घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाकर दोनों अपराधियों की खोज की जा रही थी। सभी प्रमुख और छोटी सड़कों पर टीमें सक्रिय थीं। रविवार सुबह खैर थाना क्षेत्र में बाइक पर सवार दो अपराधियों ने पुलिस टीम पर गोलीबारी की और फरार हो गए। इसके बाद पूरे इलाके में गहन चेकिंग शुरू कर दी गई।”

उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने यूपी-112 का इस्तेमाल करते हुए इलाके की घेराबंदी कर दी। अपराधियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने पुलिस टीम पर गोलीबारी कर दी। एक गोली पुलिस वाहन को लगी। एसओ अतरौली और एसओ हरदुआगंज की बुलेटप्रूफ जैकेट भी क्षतिग्रस्त हो गईं। दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। जवाबी गोलीबारी में दोनों अपराधी मारे गए। उनकी पहचान रजा मोहम्मद और मोमिन के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, रजा मोहम्मद पर महिलाओं से लूटपाट की 27 घटनाओं का आरोप था। उसने अब तक 40-50 महिलाओं को निशाना बनाया था। डंकौर थाना में उसके खिलाफ एक महिला से बलात्कार का मामला भी दर्ज है। रजा मोहम्मद को अप्रैल के आखिरी सप्ताह में जेल से रिहा कर दिया गया। रिहा होते ही उसने फिर से एक गिरोह बना लिया और महिलाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया।