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Monday, May 11, 2026
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रात के अंधेरे में बिक रही नाले की मिट्टी, विवाद के बाद रुका निर्माण कार्य

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नवाबगंज

नवाबगंज नगर के मुख्य बाज़ार मार्ग पर नगर पंचायत द्वारा नाले का निर्माण कार्य चल रहा है। इस परियोजना के तहत नाले की खुदाई से निकली मिट्टी को अवैध रूप से बेचा जा रहा है। रविवार रात को मिट्टी की बिक्री को लेकर हुए विवाद के बाद जेसीबी मशीन को काम रोकना पड़ा। प्रत्येक ट्रॉली मिट्टी की कीमत ₹400 से लेकर ₹800 तक वसूली जा रही है। यह बिक्री दूरी के हिसाब से तय की जाती है और मुख्य रूप से रात के अंधेरे में की जा रही है। इस अवैध बिक्री में कई लोगों के शामिल होने की चर्चा है। रविवार रात को नाले की खुदाई कुछ मकानों की नींव के पास की जा रही थी। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और नाले को थोड़ी दूरी से खोदने का आग्रह किया। इसी दौरान मिट्टी की अवैध बिक्री को लेकर दो-तीन पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ गया कि हाथापाई की स्थिति बन गई। इस घटना के कारण जेसीबी मशीन को बिना खुदाई किए ही बंद करना पड़ा और नाले का निर्माण कार्य रोकना पड़ा। इस पूरे मामले ने नगर पंचायत के ठेकेदार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (EO) प्रमोद कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

घरेलू सिलेंडरों से चल रहा था कारोबार, दो प्रतिष्ठानों पर छापा, मुकदमा दर्ज

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फर्रुखाबाद
घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला पूर्ति अधिकारी की मौजूदगी में पूर्ति निरीक्षक और नगर पालिका परिषद की टीम ने शहर क्षेत्र में छापेमारी कर दो प्रतिष्ठानों पर अनियमितताएं पकड़ीं। जांच के दौरान घरेलू सिलेंडरों का अवैध रूप से व्यावसायिक कार्य में इस्तेमाल पाया गया, जिसके बाद संबंधित दुकानदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
पहली कार्रवाई शहर के गोलाई स्ट्रीट के निकट स्थित समोसा दुकान पर की गई। निरीक्षण के दौरान दुकान के अंदर दो घरेलू सिलेंडरों को पाइप से जोड़कर समोसा बनाए जाते मिले। दुकान के बाहर कमरे में तीन घरेलू और दो व्यावसायिक सिलेंडर भी पाए गए, जिनमें दो व्यावसायिक सिलेंडर भरे हुए थे। जांच में सामने आया कि घरेलू गैस कनेक्शन की पासबुक के जरिए बुकिंग कर सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। इस मामले में दुकान संचालक कृष्ण मुरारी गुप्ता के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत कोतवाली फर्रुखाबाद में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
दूसरी कार्रवाई लाल मिठाई भंडार पर की गई, जहां निरीक्षण के दौरान पांच घरेलू सिलेंडर मिले। मौके पर घरेलू सिलेंडरों से मिठाई बनाने का कार्य चलता मिला। जांच टीम ने सभी सिलेंडर जब्त कर जितेंद्र गैस सर्विस की सुपुर्दगी में दे दिए। अधिकारियों के अनुसार घरेलू गैस का इस तरह व्यावसायिक उपयोग पेट्रोलियम गैस विनियमन एवं वितरण आदेश-2000 का उल्लंघन है। मामले में दुकान संचालक के खिलाफ भी आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत थाना कादरीगेट में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जिला पूर्ति अधिकारी सुरेंद्र यादव ने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह अवैध है और ऐसे मामलों में आगे भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

रोडवेज बसों में लगे पैनिक बटन बन रहे “खिलौना”, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

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करोड़ों खर्च के बाद भी यात्रियों को नहीं मिल रही त्वरित मदद, कई बसों में सिस्टम बंद या निष्क्रिय

लखनऊ।उत्तर प्रदेश स्टेट रोडवेज ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन की बसों में यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए लगाए गए पैनिक बटन अब केवल “दिखावटी व्यवस्था” बनकर रह गए हैं। सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अधिकांश यात्रियों को यह तक जानकारी नहीं कि बसों में लगे पैनिक बटन काम भी करते हैं या नहीं। कई मामलों में शिकायतें सामने आई हैं कि बटन दबाने के बाद न तो कोई अलर्ट पहुंचता है और न ही तत्काल सहायता मिलती है।
उत्तर प्रदेश में रोडवेज की लगभग 12 हजार से अधिक बसें विभिन्न रूटों पर संचालित हो रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए चरणबद्ध तरीके से हजारों बसों में पैनिक बटन और जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लगाए गए थे। दावा किया गया था कि बटन दबाते ही कंट्रोल रूम, पुलिस और परिवहन विभाग को अलर्ट पहुंच जाएगा, जिससे तत्काल मदद मिल सकेगी।
लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यात्रियों और परिवहन कर्मचारियों के अनुसार बड़ी संख्या में बसों में पैनिक बटन या तो तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़े हैं या केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। कई बस चालकों और परिचालकों को भी सिस्टम के संचालन की पूरी जानकारी नहीं है।
परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रदेशभर में हजारों बसों में लगाए गए सुरक्षा उपकरणों के रखरखाव और मॉनिटरिंग की व्यवस्था बेहद कमजोर है। कई डिपो में महीनों से खराब सिस्टम की मरम्मत तक नहीं हुई। कुछ बसों में जीपीएस काम नहीं कर रहा, तो कहीं पैनिक बटन कंट्रोल रूम से लिंक ही नहीं हैं।
महिला सुरक्षा को लेकर सरकार ने निर्भया फंड और अन्य योजनाओं के तहत बड़े स्तर पर बजट जारी किया था। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में हजारों बसों में सुरक्षा उपकरण लगाने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब जरूरत पड़ने पर सिस्टम काम ही नहीं करेगा तो यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि पैनिक बटन केवल लगाने से सुरक्षा नहीं मिलती, बल्कि उसका लाइव मॉनिटरिंग नेटवर्क, त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम और नियमित तकनीकी जांच जरूरी होती है। यदि कंट्रोल रूम में 24 घंटे निगरानी न हो तो पूरा सिस्टम केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह जाता है।
रोडवेज कर्मचारियों के मुताबिक कई बार यात्रियों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद तकनीकी कंपनियों और विभागीय स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई जाती। कुछ बसों में तो बटन केवल शोपीस की तरह लगे हुए हैं, जिनका किसी नेटवर्क से कोई सक्रिय संपर्क नहीं है।
यात्रियों का कहना है कि रात के सफर और सुनसान रूटों पर महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को सबसे अधिक सुरक्षा की जरूरत होती है। लेकिन यदि आपात स्थिति में पैनिक बटन दबाने के बाद भी मदद न मिले तो यह व्यवस्था यात्रियों के साथ मजाक से कम नहीं।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोडवेज बसों में लगे सुरक्षा सिस्टम का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। क्योंकि सुरक्षा के नाम पर भारी बजट खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर व्यवस्था बेहद कमजोर दिखाई दे रही है।

कालिंद्री के रूट डायवर्जन को लेकर भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने सांसद को सौंपा ज्ञापन

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क्रासर
दिल्ली के लिए एक और गाड़ी की मांग
फर्रुखाबाद।भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष आदेश अग्निहोत्री और युवा जिलाध्यक्ष संदेश अग्रवाल के नेत्रत्व में एक प्रतिनिधिमंडल सांसद श मुकेश राजपूत से मिला और उनसे कालिंदी एक्सप्रेस के रूट डायवर्सन के संबंध में वार्तालाप कर के और ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कालिंदी एक्सप्रेस को फर्रुखाबाद व कन्नौज तक चलाने की मांग की गई।इसके साथ ही एक नई ट्रेन फर्रुखाबाद से दिल्ली चलाने की मांग भी की गई ।
सांसद ने कालिंदी एक्सप्रेस को फर्रुखाबाद से ही चलाए जाने का आश्वासन व्यापारियों को दिया और साथ ही अपने लेटर पैड पर व्यापार मंडल द्वारा की गई मांग को लिखवाकर रेल मंत्री को भेजा जिसके लिए सभी पदाधिकारियों द्वारा सांसद को आभार व्यक्त किया गया। प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष आदेश अग्निहोत्री,युवा जिलाध्यक्ष सन्देश अग्रवाल,युवा जिला महामंत्री प्रबल माहेश्वरी,युवा जिला चेयरमैन ऋषि बंसल,युवा जिला उपाध्यक्ष डॉ कुलदीप सिंह, जिला मंत्री अर्पण अग्रवाल,मंत्री नितिन गुप्ता, फतेहगढ़ मंत्री रिंकू गुप्ता,मंत्री सागर कश्यप, यक़ूतगंज अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता, सेंट्रल जेल अध्यक्ष राजकुमार सिंह,मंत्री अमित वर्मा , विधानसभा अध्यक्ष मोहित बागड़ी मौजूद रहे।

लोहिया अस्पताल में प्रशिक्षुओं के भरोसे इलाज! मरीजों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़

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नियम विरुद्ध तरीके से हो रहा इलाज, अधिकारी मौन
फर्रुखाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में चिकित्सकों की कथित मनमानी और लापरवाही के चलते मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में इलाज व्यवस्था पूरी तरह चरमराई नजर आ रही है। आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों की जगह उनके पास बैठने वाले प्रशिक्षु मरीजों का उपचार कर रहे हैं और सरकारी पर्चों पर दवाइयां भी स्वयं लिख रहे हैं, जो कि नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।
अस्पताल आने वाले मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि चिकित्सक मरीजों को ठीक से देखे बिना ही प्रशिक्षुओं के भरोसे छोड़ देते हैं। प्रशिक्षु ही मरीजों की जांच कर दवाइयां लिख देते हैं। इतना ही नहीं कई बार मरीजों को लिखी गई दवा की अलग पर्ची तक नहीं दी जाती। सीधे सरकारी पर्चे पर दवाओं के नाम लिखकर मरीजों को दवा वितरण कक्ष भेज दिया जाता है।
मरीजों ने बताया कि दवा लेने के लिए उन्हें लंबी-लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करना पड़ता है। जब उनका नंबर आता है तो दवा वितरण कक्ष पर मौजूद कर्मचारी या प्रशिक्षु उनसे दवा लिखी हुई परची मांगते हैं। कई बार वह पर्ची पहले ही जमा करा ली जाती है या मरीज के पास रहती ही नहीं, जिसके चलते उन्हें दवा देने से मना कर दिया जाता है। इससे मरीजों को दोबारा डॉक्टर कक्ष के चक्कर लगाने पड़ते हैं और उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीज सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। मरीजों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन शिकायतों के बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। प्रशिक्षुओं द्वारा इलाज किए जाने से मरीजों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों और मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में यदि इसी प्रकार प्रशिक्षुओं के भरोसे इलाज होता रहा तो मरीजों का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से उठ जाएगा। वहीं अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

इलाज के दौरान युवक की मौत, परिजन गायब, तलाश में जुटी पुलिस

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फर्रुखाबाद। थाना शमशाबाद क्षेत्र के अंतर्गत ढाई घाट निवासी एक युवक की इलाज के दौरान लोहिया अस्पताल में मौत हो गई। युवक के साथ अस्पताल पहुंचे लोग सोमवार को अचानक गायब हो गए, जिसके बाद पुलिस युवक के परिजनों की तलाश में जुट गई है। शव को अस्पताल की मर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया है।
जानकारी के अनुसार ढाई घाट निवासी मनवीर सिंह पुत्र गुलफाम को रविवार दोपहर करीब एक बजे गंभीर हालत में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा उसका उपचार किया जा रहा था। बताया गया है कि युवक के साथ कुछ लोग भी अस्पताल आए थे और भर्ती कराने के बाद वहीं मौजूद रहे।
सोमवार को उपचार के दौरान मनवीर सिंह की हालत बिगड़ गई और चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की सूचना मिलने पर अस्पताल प्रशासन ने उसके साथ आए लोगों को तलाशना चाहा, लेकिन तब तक सभी लोग वहां से गायब हो चुके थे। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की सूचना पुलिस को दी।
पुलिस ने युवक के पास मिले आधार कार्ड के आधार पर उसकी पहचान मनवीर सिंह पुत्र गुलफाम निवासी ढाई घाट थाना शमशाबाद के रूप में की। इसके बाद पुलिस परिजनों का पता लगाने और उनसे संपर्क करने का प्रयास कर रही है।
अस्पताल प्रशासन ने शव को मर्चरी में रखवा दिया है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं युवक की मौत को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं भी बनी हुई हैं।