34.4 C
Lucknow
Friday, June 19, 2026
Home Blog

तेज आंधी-तूफान से फैक्ट्री की बाउंड्रीवॉल अचानक से गिरी, मलबे में दबकर महिला की मौत, दो मजदूर घायल

0

रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ (Raigarh) जिले में गुरुवार को तेज आंधी, तूफान और बारिश के दौरान बड़ा हादसा हो गया। पूंजीपथरा थाना क्षेत्र के चिराईपानी में दो उद्योगों के बीच बनी बाउंड्रीवॉल (boundary wall) अचानक भरभराकर गिर गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया। हादसे में महिला मजदूर को गंभीर हालत में मलबे से निकाला गया, लेकिन अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई। वहीं दो अन्य घायल मजदूर घायल हुए है जिन्हे इलाज के लिए रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Raigarh Medical College Hospital) भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है।

जानकारी के अनुसार, ओम रूपेश उद्योग और महालक्ष्मी उद्योग के बीच बनी बाउंड्रीवॉल के पास कुछ मजदूर झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। गुरुवार शाम करीब 6 बजे मौसम अचानक बदला और तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई। इसी दौरान बाउंड्रीवॉल गिरकर मजदूरों की झोपड़ी पर जा गिरी।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया। हादसे में रंभा यादव नामक महिला मजदूर को गंभीर हालत में मलबे से निकाला गया, लेकिन अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई। वहीं दो अन्य घायल मजदूरों को उपचार के लिए रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार मृतक महिला के गर्भवती होने की भी चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पूंजीपथरा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस हादसे के कारणों और बाउंड्रीवॉल गिरने की परिस्थितियों की जांच कर रही है। मौसम में आए अचानक बदलाव के चलते हुए इस हादसे ने औद्योगिक क्षेत्र में रह रहे मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

रोते हुए मासूम को योगी की गोद में मिला सुकून, सीएम बोले बच्चे जानते हैं, उनका भविष्य सुरक्षित

0

उन्नाव। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उन्नाव दौरे के दौरान आयोजित कार्यक्रम में एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 570 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 101 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह के बीच अन्नप्राशन संस्कार कार्यक्रम में शामिल एक मासूम बच्ची और अन्य छोटे बच्चे मुख्यमंत्री की गोद में पहुंचते ही शांत हो गए।

 

कार्यक्रम के दौरान अन्नप्राशन संस्कार के लिए लाए गए बच्चे लगातार रो रहे थे। परिजन उन्हें चुप कराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वे शांत नहीं हो रहे थे। इसी बीच जब बच्चों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास ले जाया गया और उन्होंने उन्हें अपनी गोद में लिया, तो रोते हुए बच्चे अचानक शांत हो गए। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से बच्चों को अन्न ग्रहण कराया और उन्हें आशीर्वाद दिया।

 

इस दौरान मौजूद लोगों ने इस दृश्य को भावुकता और आत्मीयता से भरा क्षण बताया। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बच्चों के परिजनों ने मुख्यमंत्री के इस व्यवहार की सराहना की।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ देर पहले तक बच्चे लगातार रो रहे थे, लेकिन उनके पास आते ही वे शांत हो गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि बच्चे ईश्वर का स्वरूप होते हैं और उनकी निश्छलता सबसे बड़ी शक्ति है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों का उज्ज्वल भविष्य और उनका बेहतर पालन-पोषण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

महापापियों के लिए कुरुक्षेत्र साबित होगी अयोध्या : अखिलेश यादव

0

लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने अब उत्तर प्रदेश की सियासत को और गरमा दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि अयोध्या ही भाजपा की राजनीति का ‘कुरुक्षेत्र’ साबित होगी। उन्होंने कहा कि जिस अयोध्या से भाजपा की राजनीतिक यात्रा को नई ताकत मिली थी, वहीं से उसके पतन की पटकथा भी लिखी जा सकती है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा, चंदा और दान के कथित विवादों को गंभीर बताते हुए कहा कि इन घटनाओं का सीधा असर श्रद्धालुओं की आस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के सामने आने के बाद दर्शनार्थियों की संख्या प्रभावित हुई है और लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर जवाब मांग रहे हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि जांच की प्रगति को लेकर प्रतिदिन सार्वजनिक जानकारी दी जानी चाहिए, क्योंकि जनता के मन में कई सवाल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर और धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान हालात ने लोगों के बीच अविश्वास पैदा किया है। अखिलेश ने यह भी कहा कि मथुरा से सामने आई कथित अनियमितताओं की खबरों की भी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

सपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के छुट्टा पशुओं को लेकर दिए गए बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्षों से छुट्टा पशुओं की समस्या से जूझ रहे किसानों को केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस समाधान की जरूरत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता अब वादों और जमीनी हकीकत का फर्क समझ चुकी है।

इसी दौरान मेरठ के चर्चित अनुष्का पाल हत्याकांड का मुद्दा भी उठाते हुए अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग दोहराई।

एक ही मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की दोहरी धाराएं नहीं चलेंगी : हाईकोर्ट

0

 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों की सुनवाई से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी एक ही घटना या मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि दोनों धाराओं की प्रकृति और कानूनी आधार अलग-अलग हैं, इसलिए एक ही तथ्य और परिस्थितियों पर आधारित मामले में दोनों अपराधों को साथ जोड़ना कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता।

न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने मेरठ के सिविल लाइंस थाने में दर्ज राज्य बनाम अभिषेक गौतम मामले की सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने मामले में संज्ञान लेने की कार्रवाई और आरोपी के खिलाफ जारी समन को भी निरस्त कर दिया। फैसले में कहा गया कि यदि किसी व्यक्ति पर शुरू से ही धोखा देकर संपत्ति या लाभ प्राप्त करने का आरोप है तो मामला धोखाधड़ी का हो सकता है, जबकि किसी को भरोसे के आधार पर सौंपी गई संपत्ति का बाद में दुरुपयोग करना आपराधिक विश्वासघात की श्रेणी में आता है।

अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित दिल्ली रेस क्लब मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें शीर्ष अदालत ने धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के बीच स्पष्ट अंतर रेखांकित किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी के अपराध में शुरुआत से ही आपराधिक मंशा का होना आवश्यक है, जबकि आपराधिक विश्वासघात में संपत्ति का वैध रूप से सौंपा जाना और बाद में उसका बेईमानी से उपयोग किया जाना मुख्य तत्व होता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम और अधिवक्ता अतिप्रिया गौतम ने अदालत में दलील दी कि एफआईआर में लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत और मनगढ़ंत हैं तथा उनका वास्तविक घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं है। अदालत ने इन तर्कों पर विचार करने के बाद माना कि मामले में लगाए गए आरोपों और धाराओं के बीच कानूनी सामंजस्य नहीं है।

यूक्रेन का रूस पर सबसे बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को तक मची दहशत; तेल डिपो और रिफाइनरी बने निशाना

0

 

मॉस्को/कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच गुरुवार को यूक्रेन ने रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार रातभर में करीब 1,000 ड्रोन और चार क्रूज मिसाइलों को मार गिराया गया। इनमें लगभग 200 ड्रोन राजधानी मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे। हमले के बाद रूस के कई रणनीतिक ठिकानों पर विस्फोट हुए, आग लग गई और कई इलाकों में दहशत का माहौल बन गया।

रूस के दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र में स्थित एक बड़े ऑयल डिपो पर हमले के बाद भीषण विस्फोट हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं मॉस्को की कपोतन्या ऑयल रिफाइनरी भी ड्रोन हमले की चपेट में आ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि तेल टैंक का भारी ढक्कन कई मीटर ऊपर हवा में उछल गया और पूरे इलाके में काले धुएं का गुबार फैल गया। रिफाइनरी परिसर में लगी आग कई घंटों तक धधकती रही।

हमले के दौरान ड्रोन का मलबा कई रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में भी गिरा, जिससे कुछ इमारतों को नुकसान पहुंचा। एक शॉपिंग सेंटर में आग लगने की भी सूचना मिली है। सुरक्षा कारणों से कई ऊंची इमारतों को खाली कराया गया, जबकि मॉस्को के प्रमुख हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानों का संचालन रोक दिया गया।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह रूस द्वारा पिछले सप्ताह कीव और अन्य यूक्रेनी शहरों पर किए गए हमलों का जवाब है। उन्होंने कहा, “हम यह युद्ध नहीं चाहते थे, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा।” जेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेनी सेना ने उन सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है जो रूस के युद्ध अभियान को समर्थन दे रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार हमले के समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन कजान में एक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में मौजूद थे। उन्होंने इस घटना पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि रूसी अधिकारियों ने यूक्रेन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला रूस-यूक्रेन युद्ध की बदलती रणनीति का संकेत है। वर्ष 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन के हमले सीमित दायरे में थे, लेकिन अब वह रूस के भीतर सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित महत्वपूर्ण ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम हो गया है। दूसरी ओर रूस ने भी राजधानी और अन्य प्रमुख शहरों के आसपास मजबूत वायु रक्षा तंत्र स्थापित कर रखा है।

इस बीच जी-7 देशों ने यूक्रेन को अतिरिक्त सैन्य सहायता देने की घोषणा की है। समूह ने कहा है कि यूक्रेन को अधिक एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर मिसाइलें और लंबी दूरी के हथियार उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही रूस के तेल और गैस कारोबार पर प्रतिबंधों को और कड़ा करने की तैयारी की जा रही है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर की मांग, लखनऊ में बोले संजय सिंह- ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की हो निष्पक्ष जांच

0

 

लखनऊ। आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में बरामदगी और प्रारंभिक साक्ष्य सामने आने के बावजूद अब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और वहां आने वाले दान एवं चढ़ावे का प्रत्येक पैसा भगवान राम के भक्तों की श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यदि चढ़ावे की चोरी या अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उनकी पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में श्रीराम जन्मभूमि थाना अयोध्या में तहरीर भेजी गई है, जिसमें मामले की एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। उनका कहना था कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए, चाहे वे किसी भी पद या प्रभाव वाले व्यक्ति हों।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मामले में अब तक जिस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी आम व्यक्ति पर इतने गंभीर आरोप होते तो तत्काल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाती, लेकिन इस मामले में जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की व्यवस्था किस प्रकार संचालित की जा रही है।

आप सांसद ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और श्रद्धालुओं का विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि वहां जनता की आस्था और धन दोनों जुड़े होते हैं।

संजय सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उचित कानूनी कार्रवाई की जाए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा विषय है।

इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्ष जहां मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं अब इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल और राम मंदिर ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।