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Saturday, May 2, 2026
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वृंदावन: देश का सबसे भव्य और ऊंचा चंद्रोदय मंदिर बनकर तैयार, कुतुब मीनार से 3 गुना ऊंचा

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मथुरा: देश का सबसे भव्य और ऊंचा चंद्रोदय मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा के वृंदावन (Vrindavan) में बनकर तैयार हो गया है। चंद्रोदय मंदिर (Chandrodaya Temple) करीब 210 मीटर ऊंचाई के साथ दिल्ली के कुतुब मीनार से 3 गुना ऊंचा है। करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से इस्कॉन द्वारा 12 वर्षों में निर्माण पूरा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई महीने के अंत में मंदिर का लोकार्पण कर सकते हैं।

आठ मार्च 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वृंदावन-छटीकरा मार्ग स्थित अक्षय पात्र मंदिर परिसर में शिलान्यास किया था। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 16 नवंबर 2014 को आधारशिला रखी थी। चंद्रोदय मंदिर का निर्माण इस्कॉन बेंगलुरु द्वारा कराया जा रहा है, जिसकी लागत करीब 700 करोड़ रुपये है। यह 12 साल में 70 मंजिल बनकर तैयार हो गया है।

चंद्रोदय मंदिर काफी ज्यादा ऊंचा है। इसकी ऊंचाई 210 मीटर है, जिसके चलते इसकी नींव पर विशेष ध्यान दिया गया है। नींव लगभग 55 मीटर गहरी रखी गई है। आधार को 12 मीटर ऊंचा रखा गया है। वहीं, दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग बुर्ज खलीफा की नींव 50 मीटर गहरी है। मंदिर परिसर में एक मंच भी सजाया जा रहा है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री को आमंत्रण भेज दिया गया है। हालांकि, अभी पीएमओ की ओर से स्वीकृति नहीं मिली है। उम्मीद जताई जा रही है कि मोदी 25 मई से 30 मई के बीच कभी भी मथुरा आ सकते हैं।

चंद्रोदय मंदिर की ऊंचाई इतनी है कि मंदिर के टॉप पर टेलीस्कोप से आगरा स्थित ताजमहल देख सकते हैं। मंदिर के तीन मंजिलों पर चैतन्य महाप्रभु और राधा-कृष्ण, बलराम के मंदिर हैं। द्रविड़, नागर और आधुनिक शैली में बने चंद्रोदय मंदिर में 4डी तकनीक द्वारा देवलोक और देवलीलाओं के दर्शन भी किए जा सकेंगे। इसके अलावा मंदिर के चारों ओर वन विकसित किए जाएंगे।

इनमें बृज के 12 वन क्षेत्र (द्वादश कानन) होंगे, जिसमें वनस्पति की किस्में, चारागाह, सुंदर पेड़, तरह-तरह की लताएं होंगे। सुंदर तालाब, जिसमें कमल और कुमुद के फूल होंगे। आसपास मानव द्वारा बनाई गई पहड़ियां होंगे, जिसमें झरने गिरते रहेंगे।

झारखंड में बैंक डकैती करने वाले तीन आरोपी वाराणसी से गिरफ्तार, सोना और कैश बरामद

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वाराणसी: झारखंड (Jharkhand) के हजारीबाग स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) की बरही शाखा में हुई करोड़ों रुपये के सोना व कैश लूट का खुलासा यूपी एसटीएफ ने किया है। टीम ने तीन आरोपियों को वाराणसी से गिरफ्तार किया है, इनके पास से लगभग एक किलो सोना, 20 लाख रुपये, कार एवं मोबाइल बरामद हुआ है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी सफलता हासिल की है।

यूपी एसटीएफ की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, टीम ने अंतरराज्यीय बैंक लुटेरा गिरोह के सरगना सहित तीन आरोपियों मो. अफजल, पंकज सिंह उर्फ रौनक सिंह, सौरभ यादव उर्फ सोनू को गिरफ्तार किया है. जिनके पास से सोना व नकदी बरामद हुई है। 24 अप्रैल को दोपहर करीब 3 बजे बदमाशों ने हथियार के बल पर बैंककर्मियों को बंधक बनाकर लगभग 4 किलो सोना और ₹4,22,492 नकद लूट लिया था।

घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया था, जिनकी गिरफ्तारी के लिए झारखंड पुलिस द्वारा टीम गठित कर देश के विभिन्न हिस्सों पर छापेमारी की कार्रवाई की जा रही थी। घटना के खुलासे के लिए STF वाराणसी यूनिट और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र के सिंहपुर से तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसटीएफ का दावा है कि गिरोह पहले कम भीड़ और कमजोर सुरक्षा वाले बैंक या गोल्ड लोन कंपनियों की रेकी करता था, फिर हथियार के बल पर कर्मचारियों को बंधक बनाकर लॉकर से सोना और कैश लूटकर फरार हो जाता था। आरोपी वारदात के बाद अलग-अलग राज्यों में छिप जाते थे। गिरफ्तार आरोपी देश के कई राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तराखंड और झारखंड में कई बड़ी लूट की घटनाओं में शामिल रहे हैं। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कई वारदातों को कबूल किया है।

मुख्य सरगना मो. अफजल वर्ष 2008 में हत्या के मामले में जेल गया था, जहां उसकी मुलाकात अन्य अपराधियों से हुई। जेल से छूटने के बाद उसने संगठित गिरोह बनाकर लूट की वारदातों को अंजाम देना शुरू किया, सभी आरोपियों को वाराणसी में न्यायालय में पेश किया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई झारखंड पुलिस द्वारा की जा रही है।

बंगाल चुनाव में बड़ा फैसला: फाल्टा विधानसभा के सभी 285 बूथों पर दोबारा मतदान, 21 मई को होगी वोटिंग

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कोलकाता। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान को रद्द करते हुए बड़ा और सख्त निर्णय लिया है। आयोग ने 29 अप्रैल 2026 को हुए मतदान के दौरान सामने आई गंभीर अनियमितताओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कथित बाधाओं को देखते हुए पूरे निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान कराने के आदेश जारी किए हैं।
आयोग के निर्देशानुसार फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों, जिनमें सहायक (ऑक्सिलियरी) बूथ भी शामिल हैं, पर दोबारा मतदान कराया जाएगा। यह पुनर्मतदान 21 मई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक संपन्न होगा। इसके बाद सभी मतों की गिनती 24 मई 2026 को की जाएगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।
बताया जा रहा है कि मतदान के दिन कई बूथों पर गड़बड़ी, मतदाताओं को प्रभावित करने और निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया है, ताकि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बनाए रखा जा सके।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर हलचल तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने आयोग के निर्णय पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। जहां कुछ दलों ने इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम बताया है, वहीं अन्य ने इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे और केंद्रीय बलों की तैनाती भी बढ़ाई जाएगी, ताकि मतदाता निर्भीक होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। आयोग का यह कदम देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जनगणना 2027 का आगाज: घर-घर पहुंचेंगे गणनाकर्मी, पहली बार डिजिटल स्वगणना का विकल्प, 33 सवालों से जुटेगा डाटा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में करीब 15 साल बाद जनगणना-2027 की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिसे इस बार तकनीकी रूप से अधिक आधुनिक और व्यापक बनाया गया है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होगी, क्योंकि पहली बार नागरिकों को डिजिटल माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प दिया गया है। यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने और डाटा संग्रह को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
जनगणना निदेशालय के अनुसार, पहले चरण में 7 मई से 21 मई 2026 तक लोगों को स्वगणना के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। इस दौरान नागरिक अपने मोबाइल या लैपटॉप के माध्यम से आधिकारिक पोर्टल पर जाकर परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 22 मई से गणनाकर्मी घर-घर पहुंचकर इन जानकारियों का सत्यापन और मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) का कार्य करेंगे।
इस प्रक्रिया में लगभग 5.25 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिनमें बड़ी संख्या में शिक्षक भी शामिल हैं। प्रत्येक गणनाकर्मी को करीब 800 लोगों या 180–200 मकानों का डाटा जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए मोबाइल एप का उपयोग किया जाएगा, जिससे डाटा सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगा।
पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो मुख्य रूप से मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, उपलब्ध सुविधाएं (जैसे पानी, बिजली, शौचालय, रसोई), परिवार के सदस्यों की संख्या, सामाजिक वर्ग और घरेलू संसाधनों से संबंधित होंगे। हालांकि, इस चरण में व्यक्तिगत और जातिगत गणना नहीं की जाएगी। यह कार्य दूसरे चरण में फरवरी 2027 के दौरान किया जाएगा।
नियमों के अनुसार, जिस व्यक्ति ने किसी स्थान पर कम से कम 180 दिन निवास किया है, उसकी गणना उसी स्थान पर की जाएगी। वहीं, एक ही रसोई से भोजन करने वाले लोगों को एक परिवार माना जाएगा। यदि एक ही घर में अलग-अलग रसोई हैं, तो उन्हें अलग-अलग परिवार के रूप में गिना जाएगा।
जनगणना निदेशालय की निदेशक ने नागरिकों से अपील की है कि वे सही और सटीक जानकारी दें, क्योंकि यह डाटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है और किसी भी परिस्थिति में साझा नहीं किया जाता। गलत जानकारी देने पर दंड का भी प्रावधान है।
गौरतलब है कि देश में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। वर्ष 2027 की जनगणना देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनगणना न केवल जनसंख्या के आंकड़े प्रदान करेगी, बल्कि विकास योजनाओं, संसाधन वितरण और नीतिगत निर्णयों के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

जज की संदिग्ध मौत: बाथरूम में फांसी पर लटके मिले- 30 वर्षीय अमन कुमार शर्मा

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नई दिल्ली। राजधानी की कड़कड़डूमा कोर्ट में तैनात 30 वर्षीय जज अमन कुमार शर्मा ने ग्रीन पार्क स्थित अपने आवास पर कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना उस वक्त सामने आई जब वह अपने ही घर के बाथरूम में लटके हुए पाए गए।

सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे मौत के कारणों को लेकर रहस्य और गहरा गया है। पुलिस फिलहाल हर एंगल मानसिक दबाव, निजी कारण और पेशेगत तनाव की जांच में जुटी है।

सूत्रों के मुताबिक, मृतक जज हाल ही में न्यायिक सेवा में आए थे और कड़कड़डूमा कोर्ट में उनकी तैनाती थी। बेहद कम उम्र में जिम्मेदारी का बड़ा दायरा संभाल रहे इस अधिकारी की अचानक मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या न्यायिक सेवा के भीतर बढ़ता दबाव कहीं न कहीं ऐसी घटनाओं को जन्म दे रहा है?

आंकड़ों की बात करें तो देशभर में बीते कुछ वर्षों में न्यायिक अधिकारियों और उच्च दबाव वाले पदों पर कार्यरत लोगों में मानसिक तनाव के मामले तेजी से बढ़े हैं। हालांकि आधिकारिक स्तर पर ऐसे मामलों के विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं होते, लेकिन बार काउंसिल और मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट्स में “वर्क प्रेशर और इमोशनल स्ट्रेस” को बड़ा कारण माना गया है।

दिल्ली पुलिस ने परिजनों और करीबी सहयोगियों से पूछताछ शुरू कर दी है। मोबाइल कॉल डिटेल, डिजिटल डाटा और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े पहलुओं को खंगाला जा रहा है, ताकि यह साफ हो सके कि यह आत्महत्या किन परिस्थितियों में हुई।

मतगणना कर्मियों पर टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चुनाव आयोग के सर्कुलर को बताया वैध

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना प्रक्रिया को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) के कर्मचारियों की तैनाती से संबंधित चुनाव आयोग का सर्कुलर नियमों के विपरीत नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने टीएमसी की याचिका पर कहा कि चुनाव आयोग को मतगणना कर्मियों के चयन का अधिकार प्राप्त है और वह अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर रहते हुए निर्णय ले सकता है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आयोग केवल एक ही पूल, यानी केंद्र सरकार के कर्मचारियों से भी मतगणना स्टाफ चुन सकता है और इसे गलत नहीं कहा जा सकता।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी थी, जिसमें पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए मतगणना ड्यूटी में केंद्रीय सरकारी और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट के तौर पर नियुक्त करने का प्रावधान किया गया था। पार्टी का तर्क था कि इससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है, इसलिए इस सर्कुलर को निरस्त किया जाए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में आगे कोई आदेश देने की आवश्यकता नहीं है और वह केवल चुनाव आयोग के पक्ष को ही रिकॉर्ड में लेगा। हालांकि, अदालत ने टीएमसी को यह भरोसा भी दिलाया कि मतगणना के दौरान पार्टी के एजेंट पूरी प्रक्रिया में मौजूद रहेंगे और पारदर्शिता बनी रहेगी।
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट भी टीएमसी की याचिका को खारिज कर चुका है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मतगणना कर्मियों की नियुक्ति करना चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है और इसमें केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती में कोई अवैधता नहीं है।
गौरतलब है कि टीएमसी ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद अब चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार ही मतगणना प्रक्रिया संपन्न होगी। इस फैसले को पश्चिम बंगाल चुनावी परिदृश्य में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां मतगणना की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सियासी बहस तेज रही है।