लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में सक्रिय व्यापारिक संगठनों (trade union) के भीतर बढ़ती गुटबाजी खुलकर सामने आई है। भारतीय जन उद्योग व्यापार मंडल में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच बीते रविवार को प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र प्रताप सिंह सहित कई पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से अपने पदों और सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम ने संगठन की कार्यप्रणाली और नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेश महामंत्री सुशील कुमार सिंह, प्रदेश मंत्री विनोद सिंह, प्रदेश उपमंत्री आरके सिंह, प्रदेश मीडिया प्रभारी किशन सिंह, विधि सलाहकार दीपक सिंह, जिला महामंत्री पवन सिंह तोमर, जिला संगठन मंत्री सुमित महाराज, जिला विधि सलाहकार अनिल सिंह चौहान, जिला उपाध्यक्ष दिलीप मौर्या तथा अजहर इकाई के मंत्री बबलू मौर्या ने अपने पद से इस्तीफा दिया है।

पदाधिकारियों ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसडी सिंह वैश्वारा को भेजे अपने त्यागपत्र में स्पष्ट लिखा है कि वे लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े रहे हैं और उसके विकास के लिए निरंतर कार्य करते आए हैं, लेकिन हाल के समय में कुछ लोगों द्वारा अपनाई जा रही तानाशाही और एकतरफा कार्यशैली संगठन के लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कार्य करना उनके लिए असहज हो गया है और आत्मसम्मान से समझौता करना संभव नहीं है। हालांकि यह पत्र एसडी सिंह वैश्वारा को उनके पूर्व पद प्रदेश संरक्षक/ संयोजक के नाम से संबोधित किया गया है।
गौरतलब है कि संगठन में असंतोष की स्थिति नई नहीं है। इससे पहले 16 फरवरी को प्रदेश संरक्षक एसडी सिंह वैश्वारा ने भी उपेक्षा और गुटबाजी का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद संगठन में इस्तीफों की श्रृंखला शुरू हो गई थी। हालांकि, 26 फरवरी को आयोजित आम बैठक में संगठन ने असंतोष दूर करने का दावा करते हुए नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया था।
इस बैठक में एसडी सिंह वैश्वारा को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया, जबकि सौरभ तिवारी को राष्ट्रीय संरक्षक, हनुमंत सिंह को राष्ट्रीय प्रभारी और विवेक शुक्ला को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया था। साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर नई टीम का गठन करते हुए देवेंद्र प्रताप सिंह को पुनः प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
हालांकि, नई कार्यकारिणी में कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को स्थान न मिलने से असंतोष और गहरा गया था। संगठन की नींव रखने वाले नेताओं में शामिल सुशील सिंह और विनोद सिंह ने बैठक को नियम विरुद्ध बताते हुए संगठन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि कार्यकारिणी गठन के नाम पर संगठन को कमजोर करने की साजिश की जा रही है।
व्यापारिक संगठनों में बढ़ती इस तरह की गुटबाजी को लेकर व्यापारी वर्ग में चिंता बढ़ रही है। व्यापारियों का मानना है कि आपसी टकराव और नेतृत्व की खींचतान के कारण उनकी मूल समस्याएं पीछे छूटती जा रही हैं। विशेषज्ञों का भी कहना है कि यदि संगठन अपने मूल उद्देश्यों से भटकते रहे, तो व्यापारी हितों की सामूहिक आवाज कमजोर पड़ जाएगी, जिसका सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम व्यापारियों पर पड़ेगा।








