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Wednesday, May 27, 2026
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लखनऊ: जानकीपुरम में बिजली चोरी पकड़ने गई टीम पर हमला, जेई को कुत्ते से कटवाया

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लखनऊ: लखनऊ (Lucknow) के जानकीपुरम (Jankipuram) थाना क्षेत्र में बुधवार शाम करीब 6 बजे बिजली चोरी पकड़ने गई बिजली विभाग की टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उपभोक्ता और उसके सहयोगियों ने जूनियर इंजीनियर अशोक कुमार पर जानलेवा हमला कर दिया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने जेई पर कुत्ता भी छोड़ दिया, जिससे वह घायल हो गए।

बताया जा रहा है कि बिजली विभाग की टीम क्षेत्र में बिजली चोरी की शिकायत पर जांच करने पहुंची थी। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और उपभोक्ता पक्ष ने टीम के साथ अभद्रता करते हुए हमला कर दिया। हमले में जूनियर इंजीनियर अशोक कुमार को चोटें आई हैं।

घटना के बाद विभागीय कर्मचारियों में आक्रोश है। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और कर्मचारी पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।

बिजली विभाग को कई दिनों से जानकीपुरम में कुछ उपभोक्ताओं द्वारा बिजली चोरी की खबर मिल रही थी, तभी आज बुधवार शाम करीब 6 बजे जेई अशोक कुमार अपनी टीम के सदस्य राधे श्याम यादव, आयुष गौड़, शिवम यादव, मनीष कुमार के साथ बिजली चोरी की जांच करने जानकीपुरम के नहर रोड पर उपभोक्ता अजय दीक्षित पुत्र महेंद्र दीक्षित के घर जांच के लिए पहुंचे। जेई ने मीटर दिखाने के लिए अजय से कहा तो उसने मना कर दिया। कुछ देर बाद वो मीटर दिखाने के लिए घर के अंदर जेई व उनके साथियों को लेकर गया, जहां आरोपी के परिवार के अन्य सदस्य पहले से मौजूद थे।

जांच के दौरान बिजली विभाग की टीम से व परिवार से कहासुनी हो गई और कुछ ही देर में मारपीट करने लगे। घर के अंदर परिवार के दो लोग सहित आरोपी अजय ने जेई व उनकी टीम पर हमला कर दिया। आरोपियों ने टीम के पर बेलचा लेकर वार किया, जिसमें लाइनमैन व जेई अजय कुमार को गंभीर चोट लगी। उसके बाद आरोपियों ने जमकर जेई व उनके साथियों को लात-घूसों से पीटा।

आरोपी अजय ने घर में पाले पालतु कुत्ते से जेई अजय कुमार को कटवा दिया। हमले के दौरान आरोपियों ने जेई का मोबाइल भी छीन लिया। मारपीट में घायल बिजली विभाग की टीम वहां से भागकर बाहर निकलकर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल में इलाज के लिए भेजा। हमले में जेई अशोक कुमार व उनके अन्य साथियों को गंभीर चोटें आईं है।

पुलिस ने बिजली विभाग की शिकायत का तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। घटना के बाद पुलिस को सूचना दी गई। जानकीपुरम थाना प्रभारी विनोद तिवारी ने बताया पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और कर्मचारी पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सार्थक-पीडीएस’ योजना को मिली कैबिनेट की मंजूरी

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*₹25,530 करोड़ की सार्थक-पीडीएस योजना को मंजूरी।
*राज्यों को खाद्यान्न परिवहन में मिलेगी आर्थिक सहायता।
*पीडीएस का आधुनिकीकरण, कालाबाजारी रोकने पर जोर।

 

नई दिल्ली
देश के 81 करोड़ से अधिक गरीबों तक राशन व्यवस्था को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने बुधवार को नई ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को मंजूरी दे दी। इस महत्वाकांक्षी योजना पर अगले पांच वर्षों में 25,530 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी राशन कार्ड, कालाबाजारी और अनाज चोरी पर बड़ी रोक लगेगी, जबकि लाभार्थियों को समय पर पूरा राशन मिल सकेगा।

नई योजना के तहत अब राशन वितरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और एकीकृत बनाया जाएगा। भारतीय खाद्य निगम के गोदाम से लेकर अंतिम राशन दुकान तक हर गतिविधि की रियल टाइम निगरानी होगी। सरकार पहली बार पीडीएस व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने जा रही है। इससे सिस्टम खुद यह पहचान सकेगा कि कहां वितरण में गड़बड़ी हो रही है, कहां अनाज की चोरी हो रही है या कहां फर्जीवाड़े की आशंका है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अभी राशन व्यवस्था दो अलग-अलग योजनाओं के जरिए संचालित हो रही थी, जिससे राज्यों के बीच समन्वय और निगरानी में दिक्कत आती थी। अब दोनों व्यवस्थाओं को मिलाकर ‘सार्थक-पीडीएस’ नाम से एक नई एकीकृत प्रणाली तैयार की गई है, जो 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी।

सरकार राज्यों में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी स्थापित करेगी, जहां पूरे राशन नेटवर्क की निगरानी होगी। शिकायत निवारण के लिए एआई आधारित सिस्टम विकसित किया जाएगा। साथ ही राशन दुकानदारों को राहत देते हुए उनका कमीशन बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है। कई राज्यों को एफसीआई गोदामों से राशन दुकानों तक अनाज पहुंचाने में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार अब अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी देगी।

सरकार का मानना है कि नई तकनीक आधारित व्यवस्था से गरीबों को उनका पूरा अधिकार मिलेगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पहले से अधिक भरोसेमंद बनेगी। वहीं विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों की नजर अब इस बात पर है कि राज्यों में इस योजना को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

यूपी में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल पर छह माह की रोक

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लखनऊ

प्रदेश सरकार ने रोडवेज सेवाओं को बाधित होने से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सड़क परिवहन निगम की सभी सेवाओं में अगले छह महीने तक हड़ताल पर रोक लगा दी है। सरकार ने यह फैसला जनहित और आवश्यक सेवाओं को लगातार सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से लिया है। परिवहन विभाग की अपर मुख्य सचिव अर्चना अग्रवाल की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि रोडवेज की वे सभी सेवाएं, जिन्हें पहले से अत्यावश्यक सेवा घोषित किया गया है, उनमें किसी भी प्रकार की हड़ताल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। आदेश जारी होने की तारीख से अगले छह महीने तक कर्मचारी संगठन हड़ताल नहीं कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि प्रदेश में करोड़ों लोग रोजाना रोडवेज बसों पर निर्भर रहते हैं, ऐसे में हड़ताल होने पर आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सूत्रों के मुताबिक बीते कुछ समय से रोडवेज कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन और हड़ताल की आशंकाएं बनी हुई थीं। इसी को देखते हुए सरकार ने समय रहते सख्त निर्णय लिया है। परिवहन विभाग का कहना है कि आवश्यक सेवाओं को बाधित होने से रोकना सरकार की प्राथमिकता है और यात्रियों की सुविधा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

सरकार के इस फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया पर भी नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि यूनियनें वेतन, भत्तों और सेवा संबंधी अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना सकती हैं। हालांकि फिलहाल प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि जनसेवा से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यूपी में ISI का स्लीपर नेटवर्क बेनकाब: पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के चार गुर्गे दबोचे,

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लखनऊ

प्रदेश में आतंकी साजिश और पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क पर एटीएस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहारनपुर से चार संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक ये सभी पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आईएसआई हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे तथा पश्चिमी यूपी में स्लीपर सेल तैयार कर देशविरोधी गतिविधियों की साजिश रच रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सहारनपुर निवासी महकाब और शाहरुख, मुजफ्फरनगर निवासी गगनदीप उर्फ गुरी सिंह तथा हरिद्वार निवासी मुशर्रफ के रूप में हुई है।

एटीएस और एसटीएफ की संयुक्त जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी सोशल मीडिया और वीडियो कॉलिंग एप के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स से लगातार संपर्क में थे। एजेंसियों के अनुसार चारों को संवेदनशील स्थानों की रेकी, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर भड़काने और आतंकी गतिविधियों के लिए नेटवर्क तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था। एडीजी कानून-व्यवस्था एवं एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी सबूत मिले हैं, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क सिर्फ रेकी तक सीमित नहीं था, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी आतंकी साजिश की जमीन तैयार की जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक आईएसआई के इशारे पर शहजाद भट्टी लंबे समय से युवाओं को पैसे, हथियार और विदेश भेजने का लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल कर रहा था। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

एटीएस सूत्रों का कहना है कि इससे पहले भी शहजाद भट्टी से जुड़े कई संदिग्ध पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड से गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इन मॉड्यूल्स को सामरिक महत्व के ठिकानों, सरकारी प्रतिष्ठानों और हिंदूवादी नेताओं को निशाना बनाने का टास्क दिया जाता था। एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अब सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बरगलाकर भारत में नए स्लीपर सेल खड़े करने की रणनीति पर काम कर रही है।

चारों आरोपियों को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां अब उनके मोबाइल, बैंक खातों, चैट रिकॉर्ड और विदेशी संपर्कों की पड़ताल में जुट गई हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियों ने पश्चिमी यूपी में निगरानी और सतर्कता और बढ़ा दी है।

झूठे वादे पर आधारित शारीरिक संबंधों को हमेशा दुष्कर्म नहीं मान सकते : इलाहाबाद हाईकोर्ट

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प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर बनाए गए शारीरिक संबंधों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि हर टूटे रिश्ते या शादी से इन्कार को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संबंध आपसी सहमति से बने हों, तो केवल बाद में रिश्ता टूट जाने या विवाह न होने के आधार पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टांत माना जा रहा है।

न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ मुरादाबाद के एक मामले की सुनवाई कर रही थी। पीड़िता ने कपिल सोम और एक अन्य व्यक्ति पर शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने, शोषण करने और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देते हुए आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को तभी दोषी ठहराया जा सकता है, जब यह साबित हो कि शुरुआत से ही उसकी शादी करने की कोई मंशा नहीं थी और उसने केवल धोखाधड़ी कर शारीरिक संबंध बनाने के उद्देश्य से झूठा वादा किया था। अदालत ने माना कि लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंधों को हर हाल में दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही और समन आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में तथ्यों और परिस्थितियों की गंभीरता से जांच जरूरी है। अदालत की टिप्पणी के बाद कानूनी विशेषज्ञों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह निर्णय भविष्य में प्रेम संबंधों और सहमति आधारित मामलों से जुड़े मुकदमों में अहम भूमिका निभा सकता है।

आपदा कोष से पैसे दिलाने के लिए विधवा से रिश्वत मांग रहा लेखपाल, मुख्यमंत्री से गुहार

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फर्रुखाबाद। भैंस को बचाने के लिए गंगा में उतरे किसान की डूब जाने से मौत के बाद उसकी पत्नी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपदा सहायता की गुहार लगाई है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में सुशीला पत्नी मुलायम निवासी अचानक पुर ब्लाक शमशाबाद ने कहा कि उसके पति मुलायम गंगा किनारे भैस चलाने गए थे। भैंस भागकर गंगा में घुस गई उसे बचाने के लिये मुलायम गंगा श में घुसे तभी एकदम तेज आंधी आ गयी जिसकी वजह से मुलायम पुत्र रामविलास डूब गये और मृत्यु हो गयी उनका शव निकाला गया और पंचनामा व पोस्टमार्टम हुआ। प्रार्थिनी ने परिवार के मुखिया की अचानक आपदा आने के कारण हुई मृत्यु पर सरकारी की योजना के अन्तर्गत प्रदान की जाने वाली राहत के लिये आवेदन किया था किंतु रूपया अभी तक नही दिया गया। पीड़िता ने लेखपाल रोहित अवस्थी बात की तो उन्होंने बताया कि उसका अकाउंट निष्क्री हो गया है उसे सही करना पड़ेगा इसके लिए ₹2000 देने पड़ेंगे। इसके बाद पीड़िता ने किसी तरीके से ₹2000 रोहित अवस्थी को पेटीएम के माध्यम से ट्रांसफर करवाए लेकिन फिर भी पैसे नहीं आए जब उनसे बात की तो उन्होंने कहा कि चार लाख रुपए के लिए ₹2000 में काम नहीं चल पाएगा। रुपए का परसेंटेज पहले देना होगा तब रुपए आएंगे पीड़िता गरीब व महिला है । उसे इस प्रकार की बातें की जा रही हैं पैसे पहले देने होंगे उन्होंने उसने मुख्यमंत्री से मांग की है कि आपदा राहत कोष से पैसे दिलवाए जाएं और रिश्वतखोरों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।