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Saturday, May 30, 2026
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बरझाला गेट के पास दर्दनाक सड़क हादसा, अपाचे बाइक सवार युवक की मौके पर मौत

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कायमगंज/फर्रुखाबाद। कायमगंज-फर्रुखाबाद मार्ग पर शनिवार को हुए एक भीषण सड़क हादसे में अपाचे बाइक सवार युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। दुर्घटना के बाद कुछ देर के लिए मार्ग पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं दुर्घटना में शामिल वाहन और उसके चालक को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शमसाबाद थाना क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर निवासी 30 वर्षीय सौरभ शर्मा पुत्र स्वर्गीय राजेश शर्मा शनिवार को कंपिल क्षेत्र में लकवा की दवा लेने के लिए बाइक से गए थे। दवा लेकर वापस अपने गांव लौटते समय कायमगंज-फर्रुखाबाद मार्ग पर बरझाला गेट के निकट सामने से आ रहे एक छोटा हाथी वाहन से उनकी बाइक की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि सौरभ शर्मा बाइक समेत करीब 25 फीट दूर जा गिरे। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। दुर्घटना के बाद उनकी अपाचे बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे का दृश्य इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद लोगों की रूह कांप उठी।
बताया जा रहा है कि दुर्घटना में शामिल छोटा हाथी वाहन में शराब की पेटियां लदी हुई थीं। वाहन फर्रुखाबाद की ओर से कायमगंज जा रहा था, जबकि मृतक युवक बाइक से कायमगंज से अपने गांव की ओर लौट रहा था। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसका पीछा किया और वाहन सहित चालक को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए। युवक का शव देखकर परिवार में कोहराम मच गया। मां स्नेहलता अपने बेटे के शव से लिपटकर बिलखती रहीं। परिवार के अन्य सदस्यों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक सौरभ शर्मा चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी बहन रागिनी का विवाह हो चुका है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच में जुटी है।
क्राइम इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने बताया कि हादसे में शामिल वाहन और चालक को हिरासत में ले लिया गया है। मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है तथा जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

रामलीला मैदान की भूमि पर अतिक्रमण का आरोप, समिति ने पुलिस को दी तहरीर

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शमसाबाद/फर्रुखाबाद। नगर के अलेपुर मार्ग स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान के निकट निर्माणाधीन दुकानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रामलीला महोत्सव समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने दुकानों के निर्माण की आड़ में अतिरिक्त भूमि पर कब्जा किए जाने का आरोप लगाते हुए थाना पुलिस को तहरीर सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
समिति के अध्यक्ष अवधेश पांडे के नेतृत्व में पहुंचे दर्जनभर सदस्यों ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि नगर के रामलीला मैदान में पिछले कई दशकों से धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते आ रहे हैं। हर वर्ष यहां भव्य रामलीला मंचन के साथ विभिन्न धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जाता है, जिसमें नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु और दर्शक शामिल होते हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रामनरेश बहादुर सक्सेना पुत्र स्वर्गीय नरसिंह बहादुर सक्सेना द्वारा मैदान के समीप दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान रामलीला स्थल की ओर जाने वाले मार्ग के पास लगभग चार फीट अतिरिक्त भूमि पर कब्जा करने की नीयत से निर्माण कराया जा रहा है, जिससे भविष्य में आवागमन प्रभावित हो सकता है।
समिति के सदस्यों का कहना है कि रामलीला मैदान केवल सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र ही नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ स्थान है। विभिन्न पर्वों और धार्मिक आयोजनों के दौरान निकलने वाली शोभायात्राओं का समापन भी इसी मैदान में होता है, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसे में यदि मैदान अथवा उससे जुड़े मार्ग की भूमि पर अतिक्रमण होता है तो इससे हजारों लोगों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित होंगी।
तहरीर देने वालों में अध्यक्ष अवधेश पांडे के अलावा अनुपम शर्मा, दीपक कुमार, एस.के. सिंह, कृष्ण भारद्वाज, संतोष कुमार, नरेश चंद्र, सुदेश कुमार, देवेंद्र कुमार समेत अन्य सदस्य शामिल रहे। सभी ने प्रशासन से मौके की पैमाइश कराकर कथित अतिक्रमण हटाने तथा दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
थाना पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मामले को लेकर नगर में चर्चा का माहौल बना हुआ है।

व्हाट्सएप पर हथियारों की तस्वीरें भेजकर दहशत फैलाने का आरोप, पीड़ित ने पुलिस से लगाई गुहार

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शमसाबाद/फर्रुखाबाद। व्हाट्सएप के माध्यम से कथित रूप से हथियारों की तस्वीरें और आपत्तिजनक संदेश भेजकर भय का माहौल बनाने का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक ने आरोपी के खिलाफ थाना शमसाबाद में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
थाना क्षेत्र के ग्राम रसीदपुर तराई निवासी शिवम कुमार पुत्र प्रभुदयाल ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 27 मई को उनके मोबाइल नंबर पर संचालित व्हाट्सएप अकाउंट पर एक व्यक्ति द्वारा लगातार संदिग्ध और डराने वाले संदेश भेजे गए। इन संदेशों में चाकू, तलवार, कुल्हाड़ी और तमंचे जैसे हथियारों की तस्वीरें भी शामिल थीं, जिससे वह और उनका परिवार भयभीत हो गया।
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने मैसेज भेजने वाले नंबर की जानकारी जुटाई तो वह मनोज कुमार पुत्र रामसेवक निवासी रसीदपुर तराई के नाम से जुड़ा मिला। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति की छवि क्षेत्र में आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति के रूप में है और उसके खिलाफ पूर्व में भी विभिन्न मामले दर्ज बताए जाते हैं।
शिवम कुमार का कहना है कि लगातार इस प्रकार के संदेश भेजे जाने से उन्हें अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी है। उन्होंने पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने तथा सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
घटना के बाद गांव में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी को डराने या धमकाने के लिए किया जाना गंभीर मामला है, जिस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उधर, थाना शमसाबाद पुलिस का कहना है कि मामले में तहरीर प्राप्त हुई है। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

चीन की बढ़ती पकड़ से घिरा जिम्बाब्वे, 90% लिथियम भंडार पर नियंत्रण से बढ़ीं वैश्विक चिंताएं

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नई दिल्ली/हरारे। इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण खनिज लिथियम को लेकर जिम्बाब्वे में चीन का बढ़ता प्रभाव अब अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिम्बाब्वे के लगभग 90 प्रतिशत लिथियम भंडार पर चीनी कंपनियों का नियंत्रण है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान, स्थानीय समुदायों के शोषण और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की चीन संबंधी चयन समिति की रिपोर्ट के अनुसार, जिम्बाब्वे में सक्रिय कई चीनी खनन कंपनियां खनिज संसाधनों पर व्यापक नियंत्रण स्थापित कर चुकी हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कमजोर प्रशासनिक निगरानी और भ्रष्टाचार के कारण कुछ कंपनियां बिना पर्याप्त जवाबदेही के काम कर रही हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय आबादी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

खनन गतिविधियों के कारण जल स्रोतों के प्रदूषित होने, भूजल के अत्यधिक दोहन, धूल प्रदूषण और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। खनन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी खतरों और मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतें भी दर्ज कराई हैं। स्थानीय समुदायों का आरोप है कि कुछ कंपनियां विषैले रसायनों और भारी धातुओं का उपयोग कर रही हैं, जिससे नदियां और प्राकृतिक संसाधन प्रभावित हो रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि श्रमिकों को कई स्थानों पर असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। वहीं कुछ कंपनियों पर अधिकारियों को रिश्वत देकर नियमों से बचने और खनिज निर्यात जारी रखने के आरोप भी लगाए गए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र का अभाव है, जिससे उनकी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

इस बीच जिम्बाब्वे सरकार ने लिथियम कंसंट्रेट के निर्यात पर प्रतिबंध की समयसीमा को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार अब देश के भीतर ही लिथियम की रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि खनिज संपदा का अधिक आर्थिक लाभ देश को मिल सके और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। इस कदम का सबसे बड़ा असर चीन पर पड़ सकता है, क्योंकि जिम्बाब्वे के लिथियम निर्यात में उसकी हिस्सेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

यूपी के परिषदीय स्कूलों में बड़ा बदलाव, अब कक्षा 5 से 8 तक भी लागू होगा एनसीईआरटी पाठ्यक्रम

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किए जाने के बाद अब बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कक्षा 5 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए भी एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 4 तक एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। अब राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने कक्षा 5 से 8 तक के लिए भी नई पाठ्यपुस्तकों की तैयारी के निर्देश दिए हैं। इन पुस्तकों को उत्तर प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के साथ स्थानीय संदर्भों की भी जानकारी मिल सके।

शिक्षा विभाग के अनुसार, एनसीईआरटी की उपलब्ध पुस्तकों का अध्ययन किया जा रहा है और यह तय किया जा रहा है कि प्रदेश के संदर्भ में किन विषयों और अध्यायों को जोड़ा या संशोधित किया जाए। अंग्रेजी विषय की पुस्तकों के निर्माण की जिम्मेदारी प्रयागराज स्थित आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान (ईएलटीआई) को सौंपी गई है, जबकि अन्य विषयों की पुस्तकें राज्य शिक्षा संस्थान तैयार करेगा।

दोनों संस्थानों ने अपनी कार्ययोजना तैयार कर एससीईआरटी को भेज दी है। अनुमति मिलने के बाद विषय विशेषज्ञों की कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें पाठ्यक्रम और पुस्तकों के अंतिम स्वरूप पर चर्चा होगी। इसके बाद तैयार पुस्तकें स्वीकृति के लिए एससीईआरटी को भेजी जाएंगी।

शिक्षा विभाग का लक्ष्य अगले शैक्षिक सत्र से नई व्यवस्था लागू करना है। अधिकारियों का मानना है कि एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू होने से परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए बेहतर आधार मिलेगा। साथ ही प्रदेश भर में शिक्षा की गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

अभिषेक बनर्जी पर जनता का फूटा गुस्सा: ‘चोर-चोर’ के नारों के बीच चले जूते-चप्पल; हेलमेट पहनकर बचानी पड़ी जान

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कोलकाता

पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में भारी जनविरोध का सामना करना पड़ा। चुनाव बाद हिंसा में मारे गए पार्टी कार्यकर्ताओं के परिजनों से मिलने पहुंचे अभिषेक बनर्जी के काफिले को स्थानीय लोगों ने घेर लिया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने ‘चोर-चोर’ और ‘गो बैक’ के नारे लगाते हुए अभिषेक के काफिले पर अंडे, जूते और चप्पल फेंके। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि धक्का-मुक्की के दौरान उनकी शर्ट फट गई और सुरक्षा कारणों से उन्हें हेलमेट पहनना पड़ा। कई स्थानों पर महिलाओं ने काले झंडे दिखाकर भी विरोध दर्ज कराया।

विरोध के बावजूद अभिषेक बनर्जी चुनाव बाद हिंसा में मारे गए तृणमूल कार्यकर्ता संजू कर्मकार के परिवार तक पहुंचे और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान उन्होंने भाजपा और नई सरकार पर विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

घटना के बाद मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि पूरी घटना कैमरों में रिकॉर्ड हुई है और इस मामले को लेकर वे उच्च न्यायालय तथा राज्यपाल से शिकायत करेंगे। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को भी निशाने पर लिया है।

इस घटना ने बंगाल की बदली राजनीतिक परिस्थितियों में बढ़ते टकराव और जनता के गुस्से को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। चुनावी हार के 26 दिन बाद पहली बार मैदान में उतरे अभिषेक बनर्जी के सामने जिस तरह का विरोध देखने को मिला, उसने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।