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Tuesday, June 9, 2026
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Re-NEET Exam से पहले दबाव में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अचानक पहुंचे NTA दफ्तर, तैयारियों का लिया जायजा 

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नई दिल्ली: नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक (NEET-UG exam paper leak) के एक महीने बाद भी देशभर में बवाल मचा हुआ है। परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए की कार्यशैली को लेकर छात्र और उनके पैरेंट्स गुस्स में है। वहीं नीट-एनटीए (NEET-NTA) और सीबीएसई को लेकर मचे हंगामे के बीच उनके इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है।

इससे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान काफी दबाव में है। इसी का नतीजा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। 21 जून को होने वाली री-नीट परीक्षा को लेकर धर्मेंद्र प्रधान खुद तैयारी में लगे हुए हैं।

21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 9 जून को एनटीए दफ्तर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि साइबर खतरे को लेकर एजेंसियां अलर्ट पर हैं। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और सभी व्यवस्थाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी कर ली जाएं। उन्होंने परीक्षा के निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए किए गए इंतजामों को लेकर भी जानकारी दी।

NEET UG पेपर लीक जांच पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इस मामले में जांच अभी चल रही है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट में जल्द सुनवाई सुनिश्चित करनी चाहिए और ऐसी सजा देनी चाहिए जो दूसरों के लिए मिसाल बने। हमने NTA को यह मामला सौंपा है ताकि वे कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर सकें और यह तय कर सकें कि क्या उनके खिलाफ नागरिक दायित्व के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों से परीक्षा से जुड़े सभी संवेदनशील पहलुओं पर विशेष निगरानी रखने को कहा। साथ ही उन्होंने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और किसी भी भ्रामक जानकारी या अफवाह पर ध्यान न दें।

इस दौरान शिक्षा मंत्री ने छात्रों को सलाह दी है कि वह अपनी पढ़ाई पर फोकस करें। परीक्षा हम करवा लेंगे। इसके लिए वह हमारा सहयोग करें। अधिकारियों ने शिक्षा मंत्री को तैयारियों की प्रगति से अवगत कराया उन्होंने भरोसा जताया कि संबंधित संस्थाएं और एजेंसियां मिलकर परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराएंगी।

इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अखिलेश यादव, विपक्षी एकजुटता की रणनीति पर मंथन

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नई दिल्ली। देश की राजनीति में विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने की कवायद के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में विभिन्न विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने आगामी राजनीतिक रणनीति, संसद के मुद्दों और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ साझा अभियान को लेकर चर्चा की।

बैठक में शामिल होने के लिए अखिलेश यादव दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने गठबंधन के अन्य प्रमुख नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया। सूत्रों के अनुसार बैठक में आगामी चुनावी चुनौतियों, राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों, सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना और केंद्र सरकार की नीतियों जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

समाजवादी पार्टी लगातार इंडिया गठबंधन का महत्वपूर्ण घटक बनी हुई है और उत्तर प्रदेश की राजनीति में उसकी भूमिका को देखते हुए अखिलेश यादव की मौजूदगी को अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को चुनौती देने की रणनीति में सपा की भूमिका निर्णायक रहेगी।

बैठक ऐसे समय आयोजित हुई है जब देश में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि संसद के आगामी सत्र और आने वाले चुनावी मुकाबलों को लेकर भी साझा रणनीति पर चर्चा हुई।

डिजिटल समृद्धि का नया आधार बनेगा प्रोजेक्ट गंगा : मुख्यमंत्री

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*गांव-गांव तक हाई स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने किया प्रोजेक्ट गंगा का शुभारंभ*

 

*20 लाख परिवारों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने की बड़ी पहल,एक लाख से अधिक रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम*

 

*यूपी का नया ‘डिजिटल एक्सप्रेसवे’ साबित होगा प्रोजेक्ट गंगा, डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन और स्मार्ट कृषि को मिलेगा नया आधार*

 

*हिंदुजा समूह की ब्रॉडबैंड इकाई वनओटीटी इंटरटेनमेंट लिमिटेड ‘नॉलेज पार्टनर’ एवं ‘इम्प्लीमेंटेशन एनैबलर’ के रूप में करेगी योगदान*

 

*57 हजार ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा प्रोजेक्ट गंगा का नेटवर्क : मुख्यमंत्री*

 

*लखनऊ, 09 जून :* उत्तर प्रदेश के गांवों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने, डिजिटल समावेशन को नई गति देने और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘प्रोजेक्ट गंगा’ का शुभारंभ किया। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में लास्ट माइल डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, कौशल विकास और तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसरों का विस्तार करेगी।

 

प्रोजेक्ट गंगा के तहत प्रदेश में डिजिटल सेवा प्रदाताओं (डीएसपी) का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से लगभग 20 लाख परिवारों तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाने, 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता तैयार करने तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के प्रथम चरण में 21 जनपदों में इसका संचालन प्रारंभ किया जा रहा है।

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज के दौर में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी एक बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। इंटरनेट की गति जितनी तेज होगी, विकास की रफ्तार भी उतनी ही तेज होगी। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार गंगोत्री से गंगासागर तक मां गंगा का प्रवाह अपने मार्ग में आने वाले क्षेत्रों के विकास, समृद्धि और जीवन का आधार रहा है, उसी प्रकार प्रोजेक्ट गंगा भी उत्तर प्रदेश की डिजिटल समृद्धि का एक मजबूत आधार बनेगा। यह पहल गांवों तक डिजिटल अवसर पहुंचाकर सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की नई संभावनाएं सृजित करेगी।

उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में ई-ऑफिस, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), बीसी सखी, ग्राम सचिवालय सहित अनेक तकनीक आधारित पहलों के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी कम हुई है। इन प्रयासों ने डिजिटल सशक्तिकरण को नई गति दी है और आम नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच को आसान बनाया है। प्रोजेक्ट गंगा इसी यात्रा का अगला महत्वपूर्ण चरण है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम चरण में 21 जनपदों में प्रारंभ हो रही इस परियोजना को आगे चलकर प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और लगभग 8 हजार न्याय पंचायतों तक पहुंचाना होगा। इससे लास्ट माइल डिजिटल कनेक्टिविटी की परिकल्पना साकार होगी और गांव स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 8 हजार डिजिटल उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। प्रोजेक्ट गंगा इस लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का प्रयास केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यह परियोजना युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान करेगी।

 

मुख्यमंत्री ने हिंदुजा समूह को इस पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ‘सीएम युवा’ योजना के माध्यम से युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध करा रही है। प्रोजेक्ट गंगा के अंतर्गत चयनित युवा भी इस सुविधा का लाभ उठाकर डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में अपना उद्यम स्थापित कर सकेंगे।

चयन और प्रशिक्षण के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना की सफलता प्रशिक्षित और सक्षम डिजिटल सेवा प्रदाताओं पर निर्भर करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि चयनित युवाओं को तकनीकी, प्रबंधकीय और व्यावसायिक दृष्टि से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपने क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का प्रभावी नेटवर्क विकसित कर सकें।

 

कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा उत्तर प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि तकनीक तक व्यापक पहुंच सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का आधार बनती है। मोबाइल फोन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक ने उन लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया है, जो कभी इससे दूर थे। आज सामान्य नागरिक डिजिटल माध्यमों से सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहा है और देश-दुनिया से सीधे जुड़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रोजेक्ट गंगा डिजिटल सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाकर इस परिवर्तन को और गति देगा।

 

सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के डिजिटल भविष्य की मजबूत नींव है। यह पहल प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी तथा आने वाले वर्षों में व्यापक बदलाव का माध्यम बनेगी।

 

हिंदुजा समूह की ओर से ग्रुप प्रेसिडेंट कॉरपोरेट अफेयर्स सुनील कुमार चड्ढा ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का अभिनव मॉडल अपनाने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। हिंदुजा समूह इस परियोजना में ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ के सिद्धांत के साथ सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप परियोजना में महिलाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और लाभार्थियों में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी।

 

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह ने प्रोजेक्ट गंगा की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी विस्तार की परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में डिजिटल उद्यमिता का एक नया मॉडल है। इसके अंतर्गत स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता (डीएसपी) के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अपने क्षेत्रों में फाइबर ब्रॉडबैंड नेटवर्क स्थापित कर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बताया कि परियोजना के माध्यम से लगभग 20 लाख परिवारों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने, 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता तैयार करने तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

 

उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण, ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, सार्वजनिक वाई-फाई, स्मार्ट कृषि और आईटी आधारित रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। परियोजना के तहत चयनित युवाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, नेटवर्क निर्माण और व्यवसाय संचालन में भी सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे वे अपने क्षेत्रों में टिकाऊ डिजिटल उद्यम स्थापित कर सकें।

नशामुक्त भारत अभियान को मिली नई गति, यूपी में योगी सरकार का व्यापक जनजागरण अभियान

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*24×7 हेल्पलाइन और परामर्श व्यवस्था से लोगों को मिल रही मदद*

 

*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में हेल्पलाइन नंबर के जरिए 37 हजार से ज्यादा लोगों तक पहुंचाई गई मदद*

 

*योगी सरकार में नशा मुक्ति केंद्रों और पुनर्वास सेवाओं का लगातार हो रहा विस्तार*

 

 

*लखनऊ, 09 जून।* उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में मद्यनिषेध विभाग के जरिए नशा मुक्त भारत अभियान को नई गति मिली है। योगी सरकार नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और युवाओं को नशे की गिरफ्त में आने से बचाने के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरण अभियान चला रही है। इसके तहत जागरूकता कार्यक्रमों के साथ-साथ हेल्पलाइन, परामर्श और पुनर्वास सेवाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है।

 

प्रदेश में नशे के खिलाफ सामाजिक चेतना विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के समन्वय से अभियान संचालित किया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों और ग्राम पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया जा रहा है। कई स्थानों पर लोगों को नशा न करने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई जा रही है।

 

*37 हजार से अधिक लोगों तक पहुंचाई गई सहायता*

 

केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे नशामुक्त भारत अभियान के तहत योगी सरकार लगातार प्रयासरत है। 24×7 हेल्पलाइन नंबर 14416 और अन्य परामर्श सेवाओं के माध्यम से नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों और उनके परिवारों को मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, हेल्पलाइन और परामर्श व्यवस्था के जरिए प्रदेश में अब तक 37 हजार से अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाई जा चुकी है। इससे जरूरतमंद लोगों को समय पर मार्गदर्शन और विशेषज्ञों की सलाह मिल रही है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025- 26 में 4 लाख से अधिक मोबाइल नंबरों पर एसएमएस तथा आकाशवाणी के एफएम रेनबो चैनल पर 232 स्पॉट्स प्रसारित किए गए हैं।

 

*सीएम योगी के निर्देश पर कराया गया वीडियो वैन का संचालन*

 

यूपी में वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सोनभद्र और प्रयागराज के माघ मेला-2026 में वीडियो वैन का संचालन, 829 सांस्कृतिक कार्यक्रम, 1800 वालपेंटिंग, 1767 गोष्ठियां और नशा छोड़ने/ उपचार के लिए 3026 प्रेरित किया है चूंकि नशे के खिलाफ जनभागीदारी आवश्यक है इसलिए राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नशा छोड़वाना नहीं, बल्कि युवाओं को सकारात्मक दिशा देकर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना है।

 

 

*नशामुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रयास*

 

उत्तर प्रदेश में नशामुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योगी सरकार की मंशा के अनुरूप नशा मुक्ति केंद्रों और पुनर्वास सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं, ताकि नशे की लत से बाहर आए लोग सम्मानपूर्वक समाज में पुनः स्थापित हो सकें। इन केंद्रों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद से मरीजों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

 

*आर.एल. राजवंशी, राज्य मद्यनिषेध अधिकारी*

बुलडोजर पर हाईकोर्ट का ब्रेक! जेएनवी रोड ध्वस्त कर दिया गया था राजकुमार भदौरिया का मकान

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– हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद डीएम नें बनाई पैमाइश कमेटी

– मुआवजे पर अगली सुनवाई में होगा बड़ा फैसला

– उच्च न्यायालय के वकील विनोद श्रीवास्तव नें दिलाया न्याय

फर्रुखाबाद। जेएनवी रोड पर राजकुमार भदौरिया के मकान पर चले बुलडोजर की गूंज अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है। बहुचर्चित राजकुमार भदौरिया प्रकरण में हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा है। अदालत के निर्देश पर अब प्रशासन जमीन की पैमाइश कराकर राजकुमार भदौरिया की पत्नी सरोज सिंह के हिस्से की भूमि का सीमांकन करेगा और कब्जा बहाली की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं मकान ध्वस्तीकरण से हुए नुकसान के मुआवजे का मुद्दा अभी जीवित है, जिस पर अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण निर्णय होने की संभावना है।

मामले के दस्तावेजों के अनुसार जय नारायण वर्मा रोड निवासी सरोज सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य शीर्षक से दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 25 मई 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने माना कि यह मामला लोक निर्माण विभाग की भूमि और याचिकाकर्ता की भूमि की सीमाओं के ओवरलैप का है, जिसे पैमाइश और सीमांकन के माध्यम से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

याचिका में सरोज सिंह ने कहा कि वर्ष 1983 में उन्होंने पंजीकृत बैनामे के आधार पर भूमि खरीदी थी और वर्ष 1984 में स्वीकृत नक्शे के आधार पर मकान का निर्माण कराया गया था। परिवार दशकों से उसी मकान में निवास कर रहा था। आरोप है कि वर्ष 2022 में प्रशासन ने बिना समुचित नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए मकान ध्वस्त कर दिया।

हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि प्लॉट संख्या 288 का अधिकांश हिस्सा लोक निर्माण विभाग का है, जबकि याचिकाकर्ता के पास केवल 0.01 एकड़ भूमि का स्वामित्व है। इसके बावजूद सरकार ने यह स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता के हिस्से की भूमि मौजूद है। यहीं से मामला सीमांकन और वास्तविक कब्जे के निर्धारण का बन गया।

अदालत ने निर्देश दिया कि राजस्व अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, नगर पालिका और संबंधित विभागों की टीम गठित कर भूमि की पैमाइश कराई जाए। सीमांकन के बाद स्थायी पिलर लगाकर सीमाएं तय की जाएं ताकि भविष्य में कोई विवाद न रहे।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि पैमाइश पूरी होने के बाद याचिकाकर्ता को उसकी वैध भूमि पर कानून के अनुसार निर्माण कराने का अधिकार होगा।

प्रशासन ने जारी किए आदेश

हाईकोर्ट के आदेश के बाद उप जिलाधिकारी सदर कार्यालय से 9 जून 2026 को आदेश जारी कर राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं, नगर पालिका अधिकारियों और पुलिस को 10 जून को मौके पर उपस्थित रहकर पैमाइश कराने के निर्देश दिए हैं।

सोनिया गांधी से मिलने पहुंचीं ममता, TMC के टूट के बीच आगे की रणनीति पर चर्चा की संभावना

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नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में एकजुटता और बेहतर समन्वय का संदेश देने के ठीक एक दिन बाद मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhiसे मुलाकात की। यह महत्वपूर्ण बैठक सोनिया गांधी के 10 जनपथ स्थित आवास पर आयोजित हुई।

राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच INDIA गठबंधन की भविष्य की दिशा, विपक्षी दलों के बीच तालमेल मजबूत करने और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा हो सकती है। इसके अलावा, हाल के चुनावी झटकों के बाद TMC में उभरे असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाओं पर भी बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब तृणमूल कांग्रेस संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक खींचतान का सामना कर रही है। पार्टी के कुछ सांसदों द्वारा अलग राह अपनाने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात को विपक्षी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सोमवार को INDIA गठबंधन की बैठक के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात चर्चा का विषय बनी थी। बैठक शुरू होने से पहले सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी का बेहद आत्मीय अंदाज में स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच हुई गर्मजोशी भरी बातचीत और सौहार्दपूर्ण मुलाकात ने विपक्षी खेमे में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया।

बंगाल चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने, पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और चुनाव बाद सामने आए विवादों के बीच ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की यह बंद कमरे में हुई मुलाकात कई मायनों में अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं, बल्कि विपक्ष की आगामी रणनीति और गठबंधन की मजबूती से जुड़े बड़े संदेश भी दे सकती है।