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Sunday, May 3, 2026
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मुजफ्फरनगर: ट्रैक्टर-ट्रॉली ने पीछे से बाइक को मारी ठोकर, मां-बाप और बेटे की मौत

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मुजफ्फरनगर: यूपी के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) में एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हो गई है, जहां तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली (Tractor-trolley) ने पीछे से बाइक को ठोकर मारी। इस हादसे में मां-बाप और बेटा की सांसें थम गई। घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों की लाश का पंचनामा कर पीएम के लिए भेजा। पुलिस घटना की जांच कर रही है।

घटना खतौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत केलावड़ा गांव के पास खतौली-फलावदा मार्ग पर उस वक्त घटी, जब मां-बाप और बेटा बाइक पर सवार होकर किसी काम से कही जा रहे थे तभी पीछे से तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने ठोकर मार दी। घटना में बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा होता देख आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी पुलिस को दी।

जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लेकिन तब तक तीनों की मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान राजकुमार (55), उनकी पत्नी महेंद्री (53) और उनके बेटे सोनू सैनी (28) के रूप में हुई है। पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर लिया है। फरार चालक की तलाश की जा रही है। शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही जा रही है।

 

 

दिल्ली: विवेक विहार में चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग, 9 लोगों की मौत, कई घायल

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नई दिल्ली: दिल्ली (Delhi) के शाहदरा जिले के विवेक विहार इलाके में रविवार तड़के एक चार मंजिला इमारत (four-storey buildingमें भीषण आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, सात लोगों का फिलहाल पास के अस्पताल में इलाज चल रहा है। इमारत की दूसरी मंजिल पर तड़के करीब 4 बजे आग लगी, जिसके बाद 14 दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं।

अधिकारियों ने बताया कि बचाव और राहत कार्यों के दौरान 10 से अधिक लोगों को बचाया गया। सुबह 6:30 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया और घायलों को पास के अस्पताल में ले जाया गया। सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी विवेक विहार एसएचओ और एसीपी के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग और क्राइम टीम भी विवेक विहार फेज I स्थित परिसर बी-13 पर पहुंची।

मीडिया से बात करते हुए डीसीपी (शाहदरा) राजेंद्र प्रसाद मीना ने बताया, “सुबह करीब 4 बजे आग लगने की सूचना मिली। दमकल गाड़ियां और स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर भेजी गईं। आग पर काबू पाने में करीब दो घंटे लगे, जिसके बाद तलाशी अभियान चलाया गया… छह से सात घायल लोगों को आपातकालीन उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “तलाशी और बचाव अभियान अभी भी जारी है।” बचाव और आग बुझाने के अभियान के दौरान इमारत से 10-15 लोगों को बचाया गया, जिनमें से दो को मामूली चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नौ लोगों की मौत हो गई है। मौके पर आगे की जांच और कार्यवाही जारी है। अधिकारियों ने बताया कि आग लगने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।

जागा हुआ बंगाल तय करेगा टीएमसी की वापसी या बीजेपी की एंट्री?

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(पूरन चंद्र शर्मा-विनायक फीचर्स)

पश्चिम बंगाल की राजनीति आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं, और पूरे राज्य की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं। 2021 के चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटी तृणमूल कांग्रेस के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती है अपनी सत्ता बचाने की। वहीं भारतीय जनता पार्टी अपने 2021 के आंकड़े को बढ़ाकर सरकार बनाने का दावा ठोक रही है। राजनीतिक पंडितों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि बंगाल में बीजेपी के आंकड़े बढ़ना तय है। अगर इस बार बीजेपी बहुमत का जादुई आंकड़ा छू ले तो यह किसी राजनीतिक भूकंप से कम नहीं होगा, पर आश्चर्य भी नहीं होगा।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कुछ समय पहले कहा था कि ममता बनर्जी और टीएमसी के नेताओं ने बंगाल में बीजेपी के लिए ‘उर्वरक भूमि’ तैयार की है। यह बयान अतिश्योक्ति लग सकता है, पर जमीनी हकीकत से बहुत दूर नहीं है। पिछले पंद्रह वर्षों के टीएमसी शासनकाल में शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन घोटाला, कोयला घोटाला, मवेशी तस्करी और नगरपालिका नियुक्ति घोटाले जैसे मामलों ने आम बंगाली के मन में गहरी निराशा भरी। घोटालों की इस श्रृंखला ने सुशासन के दावे को खोखला किया और जनता के एक बड़े वर्ग को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया। बीजेपी ने इसी ‘एंटी-इनकंबेंसी’ को हवा दी।

टीएमसी की पकड़ ढीली होने की दूसरी बड़ी वजह बनी पहचान की राजनीति। पिछले दो वर्षों में टीएमसी के कई नेताओं के बयान हिंदू समाज के एक हिस्से को चुभे। रामनवमी, हनुमान जयंती के जुलूसों पर हुई हिंसा, संदेशखाली की घटनाएं और ‘अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’ का आरोप,इन सबने उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी, कूचबिहार से लेकर दक्षिण बंगाल के हावड़ा, हुगली तक हिंदू बंगाली मतदाता को असुरक्षित महसूस कराया। सुरक्षा का यह भाव जब राजनीतिक नारा बनता है तो सत्ता का समीकरण बदल जाता है। बीजेपी ने ‘हिंसा मुक्त बंगाल’ और ‘तुष्टिकरण से परे शासन’ को अपना मुख्य मुद्दा बनाया। नतीजा यह हुआ कि बीजेपी विधानसभा में सरकार की दावेदार बनकर खड़ी है।

इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता है बंगाल के मतदाता का बदला हुआ मिजाज। अब ‘बंगवासी’ को नारों से नहीं, गारंटी से मतलब है। वह भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन चाहता है जहां शिक्षक की नौकरी कटमनी देकर न मिले। वह हिंसा मुक्त समाज चाहता है जहां राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का जवाब बम से न दिया जाए। वह भू-माफिया मुक्त व्यवस्था चाहता है जहां गरीब की जमीन जबरन न हड़पी जाए। वह ‘तोला बाज’, ‘सिंडिकेट राज’ और ‘कटमनी कल्चर’ से मुक्ति चाहता है। संक्षेप में, बंगाल अब ‘अनुग्रह की राजनीति’ से ‘अधिकार की राजनीति’ की ओर बढ़ चला है।

आब जब ईवीएम खुलेंगी तो केवल हार-जीत का फैसला नहीं होगा। यह तय होगा कि टीएमसी ने पिछले पांच साल में जनता का भरोसा कितना खोया और बीजेपी ने कितना कमाया। यह तय होगा कि बंगाल की राजनीति में ‘ममता बनर्जी बनाम नरेंद्र मोदी’ की लड़ाई का अगला अध्याय क्या होगा।

यदि टीएमसी फिर सत्ता में लौटती है तो उसे यह नहीं समझना चाहिए कि जनता ने उसके पिछले कामकाज पर मुहर लगा दी है। यह जीत उसे ‘नया जीवन’ देगी, पर साथ ही ‘नई शर्तें’ भी लागू होंगी। ममता बनर्जी की नई सरकार को पहले 100 दिन में यह गारंटी देनी होगी कि वह कटमनी, सिंडिकेट और राजनीतिक हिंसा की संस्कृति को खत्म करेगी। उसे पुलिस-प्रशासन को पार्टी कार्यकर्ता के दबाव से मुक्त करना होगा। उसे यह साबित करना होगा कि ‘दुआरे सरकार’ सिर्फ कैंप नहीं, पारदर्शी शासन का मॉडल है। यदि सरकार पुराने ढर्रे पर चली तो जागा हुआ बंगाल उसे कार्यकाल पूरा नहीं करने देगा। पंचायत से लेकर लोकसभा तक, बंगाल का मतदाता अब ‘सबक सिखाने’ के मूड में है।

दूसरी ओर, यदि बीजेपी सरकार बनाने में सफल रहती है तो उसके सामने चुनौती और भी बड़ी होगी। बंगाल की मिट्टी, भाषा और संस्कृति को समझे बिना दिल्ली का फॉर्मूला यहां काम नहीं करेगा। बीजेपी को पहले दिन से यह गारंटी देनी होगी कि वह ‘बाहरी बनाम भीतरी’ की बहस से ऊपर उठकर बंगाल के हर नागरिक को सुरक्षित महसूस कराएगी। उसे ‘सोनार बांग्ला’ के वादे को उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था की कसौटी पर साबित करना होगा। बंगाल का मतदाता प्रतिशोध की राजनीति नहीं, सुशासन चाहता है। यदि बीजेपी भी सत्ता को ‘बदला लेने का औजार’ बनाती है तो टीएमसी के खिलाफ बना जनादेश उसके खिलाफ बनते देर नहीं लगेगी।

बंगाल के इस चुनाव ने एक बात साफ कर दी है। अब तक राजनेता लोकतंत्र की हत्या करते आए थे। बूथ कैप्चरिंग, चुनावी हिंसा, पोस्ट-पोल हिंसा,बंगाल का लोकतंत्र इन सबका गवाह रहा है। लेकिन 2026 का चुनाव बताता है कि बंगाल का लोकतंत्र अब जिंदा है, जाग गया है। वह अब भ्रष्ट नेताओं से बदला लेने के लिए तैयार बैठा है। यह बदला हिंसा से नहीं, वोट से लिया जाएगा। यह लोकतंत्र का सबसे खूबसूरत प्रतिशोध है।

चुनाव परिणाम चाहे जो हो, बंगाल की राजनीति के लिए यह एक सबक रहेगा। टीएमसी के लिए सबक यह कि सत्ता का अहंकार और तुष्टिकरण की राजनीति अब नहीं चलेगी। बीजेपी के लिए सबक यह कि केवल ‘विपक्षी स्पेस’ भरने से सरकार नहीं चलती, डिलीवरी देनी पड़ती है और बाकी दलों के लिए सबक यह कि बंगाल में अब ‘तीसरा विकल्प’ बनने के लिए सिर्फ सेकुलरिज्म का नारा काफी नहीं, जमीन पर काम दिखाना होगा।

बंगाल हमेशा से राजनीतिक चेतना की प्रयोगशाला रहा है। वंदे मातरम यहीं गूंजा, जन-गण-मन यहीं लिखा गया, नक्सल आंदोलन यहीं पनपा और ममता बनर्जी की ‘मां-माटी-मानुष’ की राजनीति ने 34 साल का वाम शासन यहीं उखाड़ा। अब 2026 में बंगाल फिर एक नया प्रयोग करने जा रहा है, जागे हुए लोकतंत्र का प्रयोग।

जब नतीजे आएंगे तो किसी पार्टी की जीत होगी, किसी की हार। पर असली जीत बंगाल के उस मतदाता की होगी जिसने डर को हराकर, प्रलोभन को नकारकर, हिंसा को धता बताकर वोट दिया। लोकतंत्र के इस उत्सव में वही असली ‘बंगवासी’ है। सरकारें आएंगी-जाएंगी, पर अब ‘कटमनी मुक्त, हिंसा मुक्त, भू-माफिया मुक्त, तोला बाज मुक्त, तुष्टिकरण से परे, सिंडिकेट राज मुक्त और अपराध मुक्त बंगाल’ की मांग स्थायी हो चुकी है। जो इसे देगा, वही बंगाल पर राज करेगा। जो नहीं देगा, उसे बंगाल का जागा हुआ लोकतंत्र सत्ता से उखाड़ फेंकेगा। यही नए बंगाल की इबारत है। *(विनायक फीचर्स)*

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

यूपी ने बनाया 9 साल में 9 लाख से अधिक पारदर्शी भर्तियों का रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री

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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के नवचयनित 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नवचयनित 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम योगी आदित्यनाथ

चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) में संपन्न होगी डेढ़ लाख से अधिक सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया: सीएम योगी

मुख्यमंत्री ने कहा, वर्ष 2017 से पहले चयन प्रक्रियाओं में भेदभाव, बेईमानी और भ्रष्टाचार ने बनाया राज्य को बीमारू

भर्ती प्रक्रिया में सेंधमारी रोकने के लिए लागू किया गया सख्त कानून

लखनऊ, 3 मई। “उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में 9 लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरी दी गई है। यह किसी भी राज्य में सर्वाधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को सकुशल एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न करने का रिकॉर्ड है। सिर्फ अधीनस्थ चयन आयोग इस वर्ष 32 हजार से अधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया संपन्न करेगा। शिक्षा चयन आयोग हजारों शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करेगा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को लगभग 15 हजार भर्तियां करनी है। इस प्रकार चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) में डेढ़ लाख से अधिक सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया संपन्न होनी है। प्रक्रिया में किसी प्रकार की सेंध न लगे, इसके लिए सख्त कानून भी बनाया है, जिसके तहत सेंधमारी करने वालों को आजीवन कारावास की सजा और उसकी पूरी संपत्ति को जब्त किया जाता है।”

ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोक भवन में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के लिए नवचयनित 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नवचयनित 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कहीं। अपने संबोधन के पहले मुख्यमंत्री ने नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्त पत्र वितरित किए।

युवाओं के सपने का टूटना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ धोखा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त कर एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़े। इसके लिए वे हरसंभव प्रयास करते हैं, लेकिन जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तो न केवल उस युवा के सपने टूटते हैं, बल्कि उसके माता-पिता और परिवार से जुड़े अन्य लोगों की उम्मीदें भी चकनाचूर हो जाती हैं। किसी युवा के सपनों का टूटना केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ धोखा है। उत्तर प्रदेश की ‘बीमारू राज्य’ के रूप में पहचान बनाने में चयन प्रक्रियाओं में भेदभाव, बेईमानी और भ्रष्टाचार की भूमिका थी। भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं इतनी अधिक थीं कि न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता था।

फर्जी डिग्री वाले लोग करते थे चयन प्रक्रिया का नेतृत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले लगभग हर नियुक्ति प्रक्रिया पर कहीं न कहीं कोर्ट स्टे लगते थे, न्यायालय से कड़ी टिप्पणियां मिलती थीं। स्थिति यह थी कि जो व्यक्ति पात्र नहीं था, वह भी आयोग का चेयरमैन बन जाता था। यहां तक कि फर्जी डिग्री वाले लोग चयन प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे थे। पैसे के लेनदेन के कारण भर्तियां प्रभावित होती थीं और योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाता था। वर्तमान समय में कई युवा उस दौर से अनभिज्ञ हैं, क्योंकि वे तब नाबालिग थे। वर्ष 2017 के बाद भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया गया है। इसका परिणाम यह है कि अब तक पुलिस विभाग में 2,20,000 से अधिक भर्तियां सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। गत 9 वर्षों में हम लोगों ने निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड 9 लाख से अधिक युवाओं की भर्तियां कीं।

आज औषधि विभाग के पास जांच के लिए मंडल स्तर पर ए ग्रेड की लैब मौजूद
सीएम ने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 4 और 6 मई को नियुक्त पत्र वितरिण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ये लगातार चलेगा। सरकार बिना भेदभाव पिछले नौ वर्षों में कोरोना महामारी के बावजूद प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय तीन गुना करने में सफल रही है। प्रदेश में आज देश का सबसे अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, हाइवे आदि मौजूद हैं। आज वे विभाग अच्छा काम कर रहे हैं, जिन्हें पहले लोग जानते तक नहीं थे। लगभग हर जनपद में मेडिकल कॉलेज हैं, दो एम्स कार्यरत हैं। 2017 से पहले सब भगवान भरोसे था, परिणाम भी उसी प्रकार से आते थे। उस दौरान पूरा सिस्टम ही बीमारू था। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के पास दवा की क्वालिटी एवं खाद्य पदार्थों में मिलावट जांचने के उपकरण व लैब्स नहीं थीं। अब विभाग के पास जांच के लिए मंडल स्तर पर ए-ग्रेड की लैब हैं। प्रशिक्षित मैनपॉवर है, जो समय-सीमा में जांच के नतीजे बता देंगे। वर्ष 2017 से पहले पांच प्रयोगशालाएं थीं, आज आधुनिक उपकरणों के साथ 18 प्रयोगशालाएं हैं।

कनिष्ठ विश्लेषकों (खाद्य) की भर्ती भी जल्द
सीएम ने कहा कि पहले 5 प्रयोगशालाओं में 12,000 नमूने प्रतिवर्ष लिए जाते थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 55,000 हो गयी है। आज 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) की भर्ती प्रक्रिया संपन्न हुई है, जिसके साथ ही इनकी संख्या 44 से बढ़कर 401 हो गयी है। वर्तमान में कनिष्ठ विश्लेषकों (खाद्य) की संख्या अभी केवल 58 है। हमने 417 पदों के लिए अधियाचन भेजा है, जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में विचाराधीन है। जल्द ही भर्ती प्रक्रिया संपन्न होगी। वर्तमान में 36 हजार खाद्य नमूने प्रतिवर्ष लिये जाते हैं। भर्ती प्रक्रिया संपन्न होने से इनकी संख्या बढ़कर प्रतिवर्ष 1,08,000 से अधिक हो जाएगी। आज 252 डेंटल हाइजीनिस्ट को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं।

बेईमान राजनीतिज्ञों और भ्रष्ट नौकरशाहों को रोकना है, तो इसकी शुरुआत अपने आप से करनी होगी
सीएम ने कहा कि आज प्रदेश में सुरक्षा का बेहतर वातावरण बना, दंगामुक्त और गुंडामुक्त प्रदेश हुआ, जिससे अच्छे निवेश आए। पिछले दिनों फार्मा सेक्टर में 17 निवेशकों को पत्र जारी किए हैं, जो राज्य के अंदर ही प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग करेंगे। वर्ष 2017 से पहले भर्ती बोर्ड के चेयरमैन एक ओर बैठते थे और चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली के लिए निकल पड़ती थी। बेईमान राजनीतिज्ञों और भ्रष्ट नौकरशाहों को रोकना है, तो इसकी शुरुआत अपने आप से करनी होगी।

इस अवसर पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक, आयुष मंत्री एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के राज्य मंत्री दया शंकर मिश्रा दयालु, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य अमित घोष, प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग एम देवराज, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सचिव एवं आयुक्त रोशन जैकब आदि उपस्थित थे।

घायल हिरन की समय रहते बची जान: वन विभाग की तत्परता बनी मिसाल

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अमृतपुर फर्रुखाबाद

 

जनपद में वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता और प्रशासनिक सक्रियता का सराहनीय उदाहरण शुक्रवार देर रात देखने को मिला, जब एक गंभीर रूप से घायल हिरन को समय रहते उपचार दिलाकर उसकी जान बचा ली गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीथनापुर निवासी अमन ठाकुर ने देर रात करीब 1 बजे सूचना दी कि कुठला झील के पास एक हिरन को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी है। हादसे में हिरन गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसके मुंह से खून बह रहा था।
सूचना देने वाले व्यक्ति के स्वयं घायल होने के कारण मौके पर पहुंच पाना संभव नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने तत्परता दिखाते हुए तत्काल वन विभाग के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) अनूप कुमार को घटना से अवगत कराया।
सूचना मिलते ही आरएफओ अनूप कुमार ने बिना देर किए कार्रवाई करते हुए महज 30 मिनट के भीतर वन विभाग की टीम को मौके पर भेज दिया। टीम ने पहुंचकर घायल हिरन का प्राथमिक उपचार किया और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर आगे की चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी।
वन विभाग के अनुसार, इस प्रकार के अब तक 11 मामलों में त्वरित कार्रवाई की जा चुकी है, जो विभाग की सक्रियता और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति उसकी गंभीरता को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग की इस तत्पर कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता का संदेश भी देते हैं।
यह घटना एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि समय पर सूचना और प्रशासन की सक्रियता से बेजुबान जीवों की भी जान बचाई जा सकती है।

अमृतपुर में भव्य कलश यात्रा: श्रद्धा, उत्साह और भक्ति का अद्भुत संगम

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अमृतपुर, फर्रुखाबाद |

कस्बा अमृतपुर में रविवार को धार्मिक आस्था और उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब भव्य कलश यात्रा पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ निकाली गई। यात्रा का शुभारंभ प्राचीन भारत दास बाबा स्थल से हुआ, जहां शिव शक्ति अखाड़ा प्रमुख मधुराम शरण शिव द्वारा पूजा-अर्चना कर यात्रा को रवाना किया गया।
यह कलश यात्रा कस्बे की प्रमुख गलियों और बाजारों से होते हुए निकली, जहां जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। ग्राम प्रधान सचिन देव तिवारी एवं देवेंद्र देव तिवारी ने भी श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित कर यात्रा की शोभा बढ़ाई।
यात्रा के दौरान डीजे की धुन पर युवा वर्ग झूमता नजर आया, वहीं महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ शामिल हुए। पूरे कस्बे में भक्तिमय माहौल देखने को मिला और वातावरण जयकारों से गूंज उठा।
यात्रा का समापन थानेश्वर नाथ मंदिर पर हुआ, जहां आगामी धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, 3 मई से 9 मई तक बाल विकास देवानंद आचार्य जी महाराज के मुखारविंद से भव्य कथा का आयोजन किया जाएगा।
इस धार्मिक आयोजन का संचालन अमृतपुर निवासी रोहित अवस्थी द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में परशुरामपुरी जलालाबाद से आए सत्यदेव महंत जी की विशेष उपस्थिति रही। इसके अलावा मोहित अवस्थी, मोहन मिश्रा, नीरज अवस्थी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस अवसर पर निकली कलश यात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रेरणादायक संदेश दिया।