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Sunday, April 19, 2026
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गोंडा में ED ने 21.47 करोड़ रुपये के कोऑपरेटिव बैंक घोटाले की जांच शुरू

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गोंडा: उत्तर प्रदेश राज्य कोऑपरेटिव बैंक (State Cooperative Bank) की बरगांव शाखा में कथित तौर पर हुए 21.47 करोड़ रुपये के घोटाले ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) का ध्यान आकर्षित किया है, जिससे मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। अधिकारियों ने आज बताया कि ईडी ने बैंक प्रबंधन से महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे हैं और वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध खातों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

ED की जांच की पुष्टि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में सुनवाई के दौरान हुई। अदालत सोमवार को आरोपी दुष्यंत प्रताप सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करेगी, जिस पर सबकी नजर है। ईडी के शामिल होने से मामला स्थानीय स्तर से आगे बढ़ गया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित आरोपों की संभावना बढ़ गई है।

यह घोटाला सबसे पहले 2 जनवरी, 2026 को एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रस्तुत ऑडिट रिपोर्ट के माध्यम से सामने आया। रिपोर्ट में ऋण वितरण में व्यापक अनियमितताओं का खुलासा हुआ, जिसमें ऋण स्वीकृत करने से पहले अनिवार्य दस्तावेजों का सत्यापन न करना भी शामिल था। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने रिश्तेदारों और सहयोगियों के साथ मिलकर एक नेटवर्क बनाया, जिसके माध्यम से वे विभिन्न खातों में धनराशि स्थानांतरित करते थे और धोखाधड़ी से उसे निकालते थे।

जांचकर्ताओं ने पाया कि पांच आंतरिक बैंक खातों से 46.13 लाख रुपये अवैध रूप से हस्तांतरित किए गए थे। इसके अतिरिक्त, 205 खाताधारकों के ऋण और बचत खातों से 21.47 करोड़ रुपये निकाले गए। खाताधारकों के खिलाफ धोखाधड़ी के कई मामले भी सामने आए हैं। एक मामले में, एक ग्राहक ने 9 लाख रुपये का ऋण लिया था और नियमित रूप से उसका भुगतान कर रहा था, लेकिन बाद में उसे पता चला कि बैंक रिकॉर्ड में ऋण राशि को बढ़ाकर 31 लाख रुपये कर दिया गया था। अधिकारियों का मानना ​​है कि इस तरह की गतिविधियां लगभग चार वर्षों तक बेरोकटोक चलती रहीं।

12 जनवरी को कोटवाली नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज की गई और मामला फिलहाल पुलिस जांच के अधीन है। अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य को पकड़ने के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने आरोपियों से जुड़ी चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। लगभग 4.11 करोड़ रुपये की संपत्तियों का विवरण संकलित किया गया है, जिसका कुल अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ रुपये है। इनमें गोंडा, अयोध्या और लखनऊ में स्थित आलीशान वाहन, फ्लैट और जमीन शामिल हैं।

आरोपियों में तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल, अजय कुमार, सुशील कुमार गौतम, सहायक कैशियर पवन कुमार, सुमित्रा पाल और खाताधारकों तथा कथित सहयोगियों सहित कई अन्य लोग शामिल हैं। अधिकारियों का मानना ​​है कि कई जांच एजेंसियों द्वारा समन्वित कार्रवाई से इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

महिला आरक्षण बिल पर सियासी संग्राम: अखिलेश का बीजेपी पर हमला, योगी बोले—विपक्ष ने किया नारी का अपमान

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लखनऊ: राजधानी में रविवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया, जहां अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला, वहीं योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विपक्ष पर पलटवार किया। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा ‘नारी’ को ‘नारा’ बनाने की कोशिश कर रही थी और महिला आरक्षण बिल के जरिए समाज को बांटने की साजिश रच रही थी। उन्होंने कहा कि जब सरकार जनगणना ही नहीं करा पा रही है, तो महिलाओं को आरक्षण देने का दावा भी खोखला है। अखिलेश ने जातीय जनगणना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा जानबूझकर आधी आबादी के हक से बच रही है और डर की राजनीति कर समाज को विभाजित कर रही है।

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेसवार्ता में विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में महिला आरक्षण बिल का विरोध ‘द्रौपदी के चीरहरण’ जैसा था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों के हित में काम कर रही है, लेकिन विपक्ष लगातार प्रगतिशील कदमों में बाधा डालता रहा है। योगी ने कांग्रेस, सपा सहित अन्य दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दल पहले भी ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों पर महिलाओं के हितों के खिलाफ खड़े रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी विपक्ष को घेरते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध कर विपक्ष ने महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंचाई है और देश की आधी आबादी इसका जवाब आने वाले चुनावों में देगी। उन्होंने सपा पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग संविधान के खिलाफ है।
महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश और देश की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है।

चारधाम यात्रा का असर: दिल्ली-दून हाईवे जाम, सिवाया टोल पर घंटों फंसे हजारों वाहन, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

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मेरठ: चारधाम यात्रा शुरू होते ही वीकेंड पर यातायात का दबाव अचानक बढ़ गया, जिसका सबसे ज्यादा असर मेरठ के सिवाया टोल प्लाजा पर देखने को मिला। यहां दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लोग घंटों जाम में फंसे रहे। दिल्ली-दून हाईवे पर गाड़ियां रेंग-रेंग कर आगे बढ़ती रहीं, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

टोल प्रशासन के अनुसार, शनिवार और रविवार के दौरान 24 घंटों में 50 हजार से अधिक वाहन इस टोल प्लाजा से गुजरे, जो सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक है। अचानक बढ़े दबाव के चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। हालात संभालने के लिए टोल कर्मियों को अतिरिक्त लेन खोलनी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद दौराला की ओर करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा।

जाम की समस्या को और गंभीर बनाने में फास्टैग से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों ने भी बड़ी भूमिका निभाई। कई वाहनों के फास्टैग स्कैन नहीं हो पाए, जबकि कुछ ब्लैकलिस्टेड पाए गए, जिससे उन्हें कैश लेन में भेजा गया और टोल पार करने में अधिक समय लगने लगा। इस वजह से वाहनों की कतार और लंबी होती चली गई।

यात्रियों ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल चारधाम यात्रा के दौरान यातायात बढ़ता है, इसके बावजूद पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही को देखते हुए पहले से बेहतर प्लानिंग की जानी चाहिए थी।

प्रबंधन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपने फास्टैग का बैलेंस और वैधता अवश्य जांच लें, ताकि टोल प्लाजा पर अनावश्यक देरी से बचा जा सके। हालांकि, लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए आने वाले दिनों में यातायात और अधिक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

सदियों तक आक्रमण झेल कर भी दृढ़ता से खड़ी है सनातन आस्था : सीएम योगी

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लखनऊ: राजधानी में रविवार को आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत, सनातन आस्था और आधुनिक विकास के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक नए युग की ओर अग्रसर है, जहां परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल रही हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सदियों तक विदेशी आक्रांताओं ने भारत की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया, लेकिन सनातन आस्था कभी कमजोर नहीं पड़ी। उन्होंने “यतो धर्मस्ततो जयः” का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत अपनी उसी आस्था और स्वाभिमान के बल पर पुनः वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने सोमनाथ टेम्पल के ऐतिहासिक पुनरुत्थान का जिक्र करते हुए भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद केवल राजनीतिक आजादी ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्वाधीनता के लिए भी संघर्ष किया गया और सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण उसी संकल्प का प्रतीक है।

सीएम योगी ने अपने संबोधन में अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक शक्ति और आध्यात्मिक विरासत से भी बन रही है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब इन कार्यों की कल्पना करना भी कठिन था, लेकिन आज यह सब साकार हो चुका है।

उन्होंने यह भी कहा कि सनातन संस्कृति पर हुए हमलों के बावजूद भारत की आस्था कभी पराजित नहीं हुई। आज वही आस्था “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के रूप में जन-जन तक पहुंच रही है, जो देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, महापौर सुषमा खर्कवाल सहित कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक भी शामिल हुए, जिन्होंने यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

पंचायत चुनाव : हर मतदाता को मिलेगा यूनिक एसवीएन नंबर, फर्जी मतदान पर लगेगी रोक

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लखनऊ प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब हर मतदाता को एक विशिष्ट स्टेट वोटर नंबर (SVN) प्रदान किया जाएगा, जिससे फर्जी मतदान और मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। यह व्यवस्था चुनाव प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव मानी जा रही है।

जिलों में इस नई प्रणाली के तहत मतदाताओं की मैपिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सभी मतदाताओं को यूनिक एसवीएन नंबर आवंटित करने की प्रक्रिया 21 अप्रैल तक पूरी कर ली जाएगी, ताकि समय पर अंतिम मतदाता सूची जारी की जा सके।

निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि एसवीएन नंबर लागू होने से एक ही व्यक्ति द्वारा कई स्थानों पर मतदान करने या फर्जी पहचान के आधार पर वोट डालने की संभावना समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही मतदाता सूची में होने वाली त्रुटियों को भी आसानी से सुधारा जा सकेगा। डिजिटल तकनीक के इस उपयोग से चुनाव प्रणाली अधिक पारदर्शी, सटीक और भरोसेमंद बनेगी।

इस नई व्यवस्था के लागू होने से प्रशासन को भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी करने में सुविधा मिलेगी। प्रत्येक मतदाता की पहचान स्पष्ट रूप से सुनिश्चित होने के कारण मतदान केंद्रों पर विवाद और अनियमितताओं में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, चुनाव आयोग को आंकड़ों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

स्थानीय स्तर पर इस पहल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में इसे प्रदेश के अन्य चुनावों में भी लागू किया जा सकता है। कुल मिलाकर, एसवीएन नंबर की शुरुआत पंचायत चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

ईरान पर ट्रंप का कड़ा रुख, समझौता नहीं तो ‘सैन्य तबाही’ की चेतावनी

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वॉशिंगटन

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने प्रस्तावित समझौते की शर्तों को स्वीकार नहीं किया, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ढांचे, पावर प्लांट और प्रमुख पुलों को पूरी तरह नष्ट कर देगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और अस्थिरता का माहौल और गहरा गया है।
ट्रंप ने ईरान पर मौजूदा संघर्ष विराम (सीजफायर) का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान ने गोलीबारी की, जिसमें फ्रांस और ब्रिटेन के जहाजों को निशाना बनाया गया। ट्रंप के अनुसार यह कदम ईरान की “हताशा” को दर्शाता है और क्षेत्र में शांति के प्रयासों को कमजोर करता है।
हालांकि कड़े तेवर के बीच ट्रंप ने कूटनीति का विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधियों का एक दल इस्लामाबाद में ईरान के साथ निर्णायक वार्ता के लिए पहुंचने वाला है। ट्रंप ने इसे ईरान के लिए “आखिरी मौका” बताया है, जहां उसे या तो समझौता करना होगा या गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका उनकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तब तक किसी भी बातचीत का कोई मतलब नहीं है। इससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।
ट्रंप ने ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी पर भी तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी पहले ही ईरान को भारी नुकसान पहुंचा रही है। उनके मुताबिक, इस प्रतिबंध के चलते ईरान को प्रतिदिन करीब 50 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है, जबकि वैश्विक जहाज अब अमेरिका के बंदरगाहों का रुख कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका की संयुक्त एयर स्ट्राइक के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया। 8 अप्रैल को अस्थायी संघर्ष विराम लागू किया गया था, लेकिन उसके बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके। अब ट्रंप की सख्त चेतावनी और ईरान के कड़े रुख के चलते पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा विस्फोटक होते नजर आ रहे हैं।