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Wednesday, July 15, 2026
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विश्व कप 2027 का नया प्रारूप घोषित, तीन चरणों में होगा टूर्नामेंट, 14 टीमें लेंगी हिस्सा

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने एकदिवसीय विश्व कप 2027 के नए प्रारूप की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उन सभी अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें कहा जा रहा था कि इस बार विश्व कप में 14 के बजाय 12 टीमें खेलेंगी। आईसीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रतियोगिता में पहले की तरह 14 टीमें ही भाग लेंगी, लेकिन इस बार मुकाबलों का प्रारूप पूरी तरह बदला हुआ होगा। नए ढांचे का उद्देश्य प्रतियोगिता को अधिक रोमांचक, प्रतिस्पर्धी और संतुलित बनाना है।

आईसीसी की वार्षिक बैठक में लिए गए इस फैसले के अनुसार विश्व कप का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में 11वें, 12वें और 13वें स्थान पर रहने वाली टीमें आपस में मुकाबला करेंगी। इन तीनों टीमों में जो सबसे बेहतर प्रदर्शन करेगी, वही दूसरे चरण में जगह बनाएगी।

दूसरे चरण में कुल 12 टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा। दोनों समूहों की टीमें एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबले खेलेंगी। प्रत्येक समूह की शीर्ष तीन टीमें अगले चरण के लिए क्वालीफाई करेंगी। इसके बाद तीसरे चरण में सात सर्वश्रेष्ठ टीमें पहुंचेंगी, जहां सभी टीमें एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबले खेलेंगी। इस चरण के अंत में अंक तालिका में शीर्ष चार स्थान हासिल करने वाली टीमें सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगी और फिर विजेता टीमों के बीच फाइनल मुकाबला खेला जाएगा।

आईसीसी का कहना है कि नए प्रारूप से प्रत्येक मुकाबले का महत्व बढ़ेगा और किसी भी टीम के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं होगा। इससे छोटी और उभरती हुई क्रिकेट टीमों को भी अपनी क्षमता साबित करने का बेहतर अवसर मिलेगा, जबकि दर्शकों को पूरे टूर्नामेंट में अधिक रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।

विश्व कप 2027 की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे संयुक्त रूप से करेंगे। प्रतियोगिता का आयोजन अक्टूबर और नवंबर 2027 में होगा। तीन देशों की संयुक्त मेजबानी और नए प्रारूप के कारण यह विश्व कप क्रिकेट इतिहास के सबसे अलग और रोमांचक संस्करणों में से एक माना जा रहा है।

आईसीसी ने इसी बैठक में टी-20 विश्व कप 2028 के प्रारूप में भी बदलाव की घोषणा की है। यह प्रतियोगिता ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की संयुक्त मेजबानी में होगी। इसमें 20 टीमें हिस्सा लेंगी। पहले जहां दूसरे चरण में आठ टीमें खेलती थीं, वहीं अब 10 टीमों को मौका मिलेगा। इससे अधिक देशों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और प्रतियोगिता पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी होगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल के 7 बड़े फैसलों पर मुहर

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वाराणसी को एलिवेटेड कॉरिडोर, चिप निर्माण, मोबाइल उत्पादन और रेलवे परियोजनाओं को मिली मंजूरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में देश के बुनियादी ढांचे, उद्योग, रेलवे, उर्वरक और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े सात महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं पर करीब 2.19 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी और देश को प्रौद्योगिकी तथा उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।

बैठक में वाराणसी के लिए दो बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। पहली परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-19 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने वाले नए संपर्क मार्ग का निर्माण होगा। दूसरी परियोजना में वरुणा नदी के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने के लिए लगभग 43 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। करीब 10,998 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में फ्लाईओवर, रैंप, सेवा मार्ग और बहुलेन सड़कें शामिल होंगी। इससे शहर में यातायात का दबाव कम होगा और एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों, गंगा घाटों तथा आसपास के क्षेत्रों तक आवागमन पहले से अधिक आसान होगा।

मंत्रिमंडल ने देश में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सेमीकॉन 2.0 मिशन को भी मंजूरी दी है। इस योजना पर 1.27 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नई उत्पादन प्रोत्साहन योजना को भी स्वीकृति दी गई है, जिस पर 62,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है।

उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए नई राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देश में नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

रेलवे क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी दो अहम परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड के दोहरीकरण तथा डंगोआपोसी-राजखरसवां के बीच चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से माल और यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम होगा, यातायात क्षमता बढ़ेगी और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।

सरकार का मानना है कि इन सात बड़े फैसलों से देश में बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा, लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत की आर्थिक विकास गति को नई मजबूती मिलेगी।

सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील, शशि थरूर बोले- आपकी लड़ाई अब संसद में लड़ी जाएगी

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नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से जारी सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोनम वांगचुक और आंदोलन में शामिल युवाओं के नाम एक खुला पत्र लिखकर उनसे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की भावुक अपील की है। थरूर ने कहा कि इस आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान छात्रों और युवाओं के मुद्दों की ओर आकर्षित कर दिया है और अब इन सवालों को संसद के भीतर मजबूती से उठाया जाना चाहिए।

अपने पत्र में शशि थरूर ने कहा कि वह यह अपील किसी राजनीतिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे भारतीय के रूप में कर रहे हैं जो युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने लिखा कि एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण वह जानते हैं कि ईमानदार परीक्षा, योग्यता के आधार पर चयन और छात्रवृत्ति ही लाखों युवाओं के सपनों को पूरा करने का सबसे बड़ा माध्यम होती है। यदि परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा टूटता है तो इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को उठाना पड़ता है।

थरूर ने कहा कि पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और चयन प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों ने युवाओं का विश्वास कमजोर किया है। उन्होंने आंदोलन कर रहे युवाओं से कहा कि उनका गुस्सा व्यवस्था के खिलाफ एक लोकतांत्रिक आवाज है और पूरा देश उनकी बात सुन रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं के अधिकारों और निष्पक्ष व्यवस्था की लड़ाई संसद के भीतर भी पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।

सोनम वांगचुक से सीधे अपील करते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने अपने आंदोलन के माध्यम से देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और अब उनके स्वास्थ्य की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने आग्रह किया कि आमरण अनशन समाप्त कर लोकतांत्रिक संवाद का रास्ता अपनाया जाए, क्योंकि संसद का आगामी सत्र इन मुद्दों को उठाने का सबसे उपयुक्त मंच है।

थरूर ने केंद्र सरकार से भी बातचीत शुरू करने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही हर समस्या का सबसे प्रभावी समाधान होता है। उन्होंने सरकार से युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया।

उधर, लगातार 18 दिनों से जारी भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने भी उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों के बावजूद वांगचुक फिलहाल अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं।

पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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यौन अपराध मामलों में सभी अदालतों को संवेदनशीलता से सुनवाई के निर्देश

नई दिल्ली। यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पटना हाईकोर्ट की एक टिप्पणी पर गंभीर नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को कानून की भावना, पीड़िता के अधिकारों और पूर्व में दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों को ध्यान में रखकर फैसला देना चाहिए। साथ ही सभी उच्च न्यायालयों, अधीनस्थ अदालतों और पुलिस अधिकारियों को यौन अपराधों से संबंधित मामलों में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया कि पटना हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि किसी महिला की सलवार उतारना और उसकी छाती दबाना अपने आप में दुष्कर्म के प्रयास का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस टिप्पणी पर सर्वोच्च न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायाधीशों को ऐसे मामलों में पहले से जारी फैसलों और न्यायिक दिशानिर्देशों का अध्ययन करना चाहिए तथा पूरी संवेदनशीलता के साथ निर्णय देना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि यौन अपराधों में न्यायिक संवेदनशीलता पर राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी की तैयार रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट और सभी उच्च न्यायालयों की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया कि पुलिस थानों में प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपपत्र दाखिल करने के दौरान भी इस मार्गदर्शिका का पालन सुनिश्चित किया जाए।

दरअसल, यह मामला वर्ष 2008 की एक घटना से जुड़ा है। आरोप के अनुसार एक युवती अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने स्टूडियो गई थी। वहां स्टूडियो संचालक ने पिता को बाहर भेजकर दरवाजा बंद कर लिया और युवती के साथ जबरन अशोभनीय हरकत करने का प्रयास किया। युवती के शोर मचाने पर आरोपी मौके से भाग गया। निचली अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास सहित अन्य धाराओं में दोषी ठहराया था।

बाद में पटना हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए दुष्कर्म के प्रयास की सजा को निरस्त कर दिया और कहा कि उपलब्ध साक्ष्य इस आरोप को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि अदालत ने आरोपी को महिला की मर्यादा भंग करने का दोषी माना। इसी टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठे, जिस पर शीर्ष अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक अधिकारियों, पुलिस और अभियोजन एजेंसियों को संवेदनशीलता, कानूनी सिद्धांतों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करना होगा, ताकि पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बन सके।

ई-20 पेट्रोल विवाद पर गडकरी की सफाई, बोले- शुद्ध पेट्रोल चाहिए तो अधिक कीमत चुकानी होगी

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नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ई-20 पेट्रोल और इथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना देश की ऊर्जा सुरक्षा और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि यदि कोई उपभोक्ता इथेनॉल मिश्रित ईंधन नहीं लेना चाहता और पूरी तरह शुद्ध पेट्रोल चाहता है, तो उसे उसकी अधिक कीमत चुकानी होगी।

गडकरी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे निजी हितों के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का चीनी उद्योग से वर्षों पुराना संबंध है, लेकिन इथेनॉल नीति का संचालन पेट्रोलियम मंत्रालय करता है और इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बेटों के कारोबार में इथेनॉल से होने वाली आय का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत है, जबकि देश के कुल इथेनॉल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी आधा प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके उद्योग पर लगभग 1,600 करोड़ रुपये का ऋण है, इसलिए निजी लाभ के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह केवल इथेनॉल ही नहीं, बल्कि हरित हाइड्रोजन, विद्युत चालित वाहन, मेथनॉल, बायोगैस और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के भी समर्थक हैं। उनका कहना है कि भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी बोझ पड़ता है। यदि देश में वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ेगा तो आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।

उन्होंने बताया कि अब इथेनॉल केवल गन्ने से ही नहीं, बल्कि मक्का, धान, पराली, बांस और अन्य कृषि अवशेषों से भी तैयार किया जा रहा है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और फसल अवशेष जलाने जैसी समस्या में भी कमी आएगी। गडकरी ने उदाहरण देते हुए कहा कि ब्राजील सहित कई देशों में वर्षों से इथेनॉल आधारित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।

गडकरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी पर कोई ईंधन थोपना नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराना है। उन्होंने दोहराया कि यदि बाजार में पूरी तरह शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराया जाता है, तो उसकी लागत अधिक होगी और उसका सीधा असर कीमत पर पड़ेगा। ऐसे में उपभोक्ताओं को अधिक राशि का भुगतान करना होगा।

केंद्र सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से पेट्रोलियम आयात में कमी, प्रदूषण नियंत्रण, किसानों की आय में वृद्धि और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। इसी उद्देश्य से सरकार देश में जैव ईंधन के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है।

जंतर-मंतर पर 18वें दिन भी जारी सोनम वांगचुक का अनशन, बिगड़ती सेहत पर बढ़ी चिंता

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नई दिल्ली। शिक्षा सुधार और NEET-UG 2026 पेपर लीक समेत परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल बुधवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गई। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम तक कम हो चुका है और स्वास्थ्य पर चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।
वांगचुक 28 जून से आंदोलन पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करना तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और कई सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन भी मिल रहा है।
इस बीच वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने यह जानना चाहा है कि उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
उधर आंदोलन के समर्थन में कुछ संगठनों ने 16 जुलाई को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल का भी ऐलान किया है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग पर अड़े हुए हैं।