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Saturday, June 20, 2026
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रिटायर्ड फौजी के घर लाखों की चोरी, शादी में गए परिवार की गैरमौजूदगी में वारदात

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फर्रुखाबाद। थाना जहानगंज क्षेत्र के गांव सिरौंज में चोरों ने एक रिटायर्ड फौजी के घर को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये के जेवरात पार कर दिए। घटना उस समय हुई जब परिवार गंगा पार एक शादी समारोह में शामिल होने गया हुआ था और घर खाली पड़ा था।

जानकारी के अनुसार गांव निवासी पिंटू दीक्षित अपने परिवार के साथ शादी समारोह में गए थे। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे जब परिवार वापस लौटा तो घर का सामान बिखरा पड़ा मिला और कई तालों के टूटे होने की जानकारी हुई। परिजनों ने आशंका जताई कि चोर मकान के जीने की ओर से कुंडा उठाकर घर के अंदर घुसे और वारदात को अंजाम दिया।

घटना की सूचना तत्काल डायल 112 पर दी गई। सूचना मिलने पर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पीड़ित के पिता एवं रिटायर्ड फौजी शिवगोपाल ने बताया कि चोर घर से एक सोने का हार, एक सोने की चेन, दो मंगलसूत्र, एक जेंट्स अंगूठी तथा पायल सहित अन्य कीमती सामान चोरी कर ले गए हैं।

मौके पर पहुंचे वरिष्ठ उपनिरीक्षक राकेश कुमार ने घटना की जांच पड़ताल की और आसपास के लोगों से पूछताछ की। पुलिस चोरी की घटना के संबंध में जानकारी जुटाने में लगी है।

गौरतलब है कि सिरौंज गांव थाना जहानगंज से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। घटना के संबंध में थाना प्रभारी पूनम अवस्थी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बीएसए पर घूसखोरी का आरोप, दो लाख रुपये लेने के मामले में केस दर्ज

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हरदोई। बेसिक शिक्षा विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अजित सिंह के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी के आरोप में मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। मामला ईसीसीई एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के लिए नामित संस्था के अध्यक्ष ने बीएसए डॉ. अजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसमें से दो लाख रुपये रिश्वत के रूप में लेने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि मांग पूरी न होने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी गई। आरोपों के आधार पर संबंधित मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय जांच पूरी होने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगा।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है।

दवा रिकॉर्ड में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, फार्मासिस्ट निलंबित, प्रभारी हटाए गए

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शाहजहांपुर/जलालाबाद। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जलालाबाद में दवाओं के स्टॉक एवं वितरण रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर फार्मासिस्ट मोहम्मद इलियास अख्तर के निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सोमेश अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से पद से हटाते हुए अगले एक वर्ष तक किसी भी स्वास्थ्य केंद्र का प्रभार न देने के आदेश जारी किए गए हैं।

मामला उस समय उजागर हुआ जब जिलाधिकारी ने 16 जून को सीएचसी जलालाबाद का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल का मुख्य द्वार बंद मिला और कई मरीज बाहर इंतजार करते दिखाई दिए। सीमित स्टाफ की मौजूदगी तथा व्यवस्थाओं में खामियां मिलने पर जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए।

डीएम के आदेश पर एसडीएम प्रभात राय ने दवाओं के स्टॉक एवं वितरण रजिस्टर की गहन जांच की। जांच में रिकॉर्ड में दर्ज दवाओं और वास्तविक उपलब्ध स्टॉक के बीच भारी अंतर पाया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही एवं विभागीय अनियमितता मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक मिश्रा ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की है। जिलाधिकारी ने एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर भी अभिलेखों और दवा स्टॉक को दुरुस्त करने की कवायद तेज हो गई है।

तहसील परिसर में अधिवक्ता पर हमला, दबंगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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मिर्जापुर। तहसील परिषद मिर्जापुर परिसर में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब कुछ लोगों ने एक अधिवक्ता पर कथित रूप से हमला कर दिया। घटना में अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा घायल हो गए। मौके पर मौजूद अन्य अधिवक्ताओं ने बीच-बचाव कर उन्हें बचाया, जिसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा रोज की तरह सुबह करीब 11 बजे तहसील मुख्यालय स्थित अपनी सीट पर मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान कृष्णेन्द्र वाजपेई उर्फ छोटू अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचे और किसी बात को लेकर विवाद के बाद अधिवक्ता के साथ मारपीट शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आरोपियों ने लाठी-डंडों तथा लात-घूंसों से हमला किया, जिससे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

घटना के दौरान आसपास मौजूद अधिवक्ताओं ने हस्तक्षेप कर किसी तरह पीड़ित को आरोपियों से बचाया। बताया जाता है कि हमले के बाद अधिवक्ता ने अपनी जान बचाने के लिए वहां से हटकर शरण ली। घटना की सूचना मिलते ही थाना मिर्जापुर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।

पुलिस ने पीड़ित की तहरीर के आधार पर कृष्णेन्द्र वाजपेई उर्फ छोटू एवं अन्य नामजद/अज्ञात आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है तथा साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। तहसील परिसर में हुई इस घटना को लेकर अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त है और उन्होंने दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

जनपद के जलालाबाद स्थित कृषि उत्पादन मंडी गेट के पास प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण हटा

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उपजिलाधिकारी जलालाबाद के निर्देश पर कर्मचारियों ने झोपड़ी, पिलर और गोबर-कूड़े से किए गए कब्जे को ध्वस्त किया।

शाहजहांपुर| मंडी गेट की पश्चिमी दीवार से सटी सरकारी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से झोपड़ियां बना ली थीं। इसके अतिरिक्त, पिलर गाड़कर और गोबर-कूड़ा डालकर जगह घेर ली गई थी। इस अतिक्रमण के कारण मंडी में आने-जाने वाले किसानों और व्यापारियों को आवागमन में परेशानी हो रही थी, जिससे यातायात भी बाधित होता था।

मंडी मंडी सचिव ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी जलालाबाद को शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया था कि मंडी की भूमि पर जबरन कब्जा कर निर्माण सामग्री डालकर रास्ता संकरा कर दिया गया है। उपजिलाधिकारी प्रभात राय ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए एक टीम गठित की।

गुरुवार को एसडीएम के निर्देश पर राजस्व और पुलिस की टीम मंडी गेट पर पहुंची। अधिकारियों की मौजूदगी अवैध झोपड़ी को गिराया गया, पिलर उखाड़े गए और गोबर-कूड़े के ढेर को हटवाकर सफाई कराई गई। इस कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों ने कोई विरोध नहीं किया।

एसडीएम प्रभात राय ने स्पष्ट किया कि सरकारी और मंडी की जमीन पर किसी भी कीमत पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंडी सभापति ने प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए किसानों की सुविधा के लिए आभार जताया।

अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम प्रभात कुमार राय, क्षेत्राधिकारी ज्योति यादव, नायब तहसीलदार अमरावती, थाना प्रभारी अरविंद सिंह चौहान और मंडी सचिव विक्रम बाजपेई सहित कई अन्य कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे।

70 वर्ष पुरानी बताई जा रही अवैध मस्जिद पर चला बुलडोजर

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– शिकायतकर्ता निकला मुस्लिम युवक

बागपत। खामपुर गांव में प्रशासन ने कथित रूप से अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 100 वर्ग गज क्षेत्र में बनी एक मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। बताया जा रहा है कि यह निर्माण करीब 70 वर्ष पुराना था और राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि पर नियमों के विपरीत निर्मित पाया गया।

सबसे खास बात यह रही कि इस मामले की शिकायत गांव के ही एक मुस्लिम युवक दिलशान द्वारा की गई थी। शिकायत के बाद राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच की, जिसमें भूमि संबंधी दस्तावेजों और निर्माण की वैधता की पड़ताल की गई।

प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारी पुलिस बल और अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि अथवा अवैध कब्जों के विरुद्ध कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के की जा रही है और कानून के अनुसार सभी मामलों में समान प्रक्रिया अपनाई जाएगी। वहीं इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है।
हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित प्रशासनिक आदेशों, राजस्व अभिलेखों और आधिकारिक जांच रिपोर्टों के आधार पर ही माना जाएगा। यदि इस प्रकरण से जुड़े विस्तृत प्रशासनिक आदेश या आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उनसे स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।