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Thursday, April 23, 2026
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“परिंदा भी पर न मार सके” मोड में प्रशासन: डीएम डॉ. अंकुर लाठर और एसपी आरती सिंह की ताबड़तोड़ रेड

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– 42,624 अभ्यर्थियों वाली भर्ती परीक्षा पर कड़ा पहरा

फर्रुखाबाद। होमगार्ड भर्ती परीक्षा को लेकर जनपद में सुरक्षा का ऐसा घेरा खड़ा किया गया है कि “परिंदा भी पर न मार सके”यह सिर्फ बयान नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बनती दिख रही है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने 25, 26 और 27 अप्रैल को होने वाली परीक्षा से पहले कई केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ाने वालों को सख्त चेतावनी दे दी है।

डीएम-एसपी की संयुक्त टीम ने आर.पी. इंटर कॉलेज कमालगंज, आर.पी. पी.जी. कॉलेज कमालगंज, फिरोज गांधी इंटर कॉलेज कमालगंज और जनता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज फतेहगढ़ का बारीकी से निरीक्षण किया। स्ट्रॉन्ग रूम से लेकर सीसीटीवी कंट्रोल रूम तक हर बिंदु पर खुद जाकर जांच की गई और मौके पर ही खामियों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने दो टूक कहा शौचालय साफ-सुथरे हों, पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली हर हाल में चालू रहे। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। वहीं एसपी आरती सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि अभ्यर्थियों की सघन चेकिंग और पहचान सत्यापन में जरा सी ढिलाई भी मिली तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय है।

जनपद में इस भर्ती परीक्षा के लिए कुल 19 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। हर केंद्र पर एक सेक्टर मजिस्ट्रेट और एक स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किया गया है, जबकि 2 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 4 स्टैटिक मजिस्ट्रेट रिजर्व में रखे गए हैं। परीक्षा दो पालियों में होगी, हर पाली में 7,104 अभ्यर्थी शामिल होंगे। यानी तीन दिनों में कुल 42,624 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे,इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं।

सख्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन, किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, पर्स, स्मार्टवॉच, स्मार्टबैंड, सनग्लासेस और हैंडबैग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। हर केंद्र पर क्लॉक रूम बनाए गए हैं, जहां अभ्यर्थियों को अपना सामान जमा करना होगा। प्रवेश सिर्फ पेन, प्रवेश पत्र और मूल पहचान पत्र के साथ ही मिलेगा।

निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अपर पुलिस अधीक्षक समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे डीएम नें साफ कहा कि इस परीक्षा में नकल या गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। जिले में इस बार प्रशासन का रुख साफ है भर्ती परीक्षा की साख पर आंच नहीं आने दी जाएगी, चाहे इसके लिए कितनी भी सख्ती क्यों न करनी पड़े। “यूथ इंडिया” की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि पिछले कुछ भर्ती परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के बाद इस बार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है।

रायबरेली में तेज रफ्तार बस ने बाइक को एक किलोमीटर तक घसीटा, दंपति की मौत, बेटा गंभीर रूप से घायल

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रायबरेली: यूपी के रायबरेली (Raebareli) में लखनऊ-प्रयागराज राजमार्ग पर उन्चाहार कोतवाली क्षेत्र में बुधवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे (road accidents) में पति-पत्नी की मौत हो गई, जबकि उनका छोटा बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि टक्कर के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस के अनुसार, सबिसपुर निवासी 36 वर्षीय दशरथ अपनी पत्नी माधुरी और 10 वर्षीय बेटे प्रिंस के साथ कल्याणी गांव से लौट रहे थे।

रात करीब 10:30 बजे, अरखा गांव के पास एक कोल्ड स्टोरेज सुविधा के नजदीक, एक तेज रफ्तार निजी बस ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक बस के आगे वाले हिस्से में फंस गई। चालक ने रुकने के बजाय कथित तौर पर रफ्तार बढ़ा दी और मोटरसाइकिल को मनौ का इंदरा तक करीब एक किलोमीटर तक घसीटा, जिससे इलाके के लोगों में दहशत फैल गई।

दशरथ और माधुरी की टक्कर के कारण मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका बेटा प्रिंस गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में गंभीर हालत के कारण जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसकी हालत नाजुक बताई है। पुलिस ने बस और उसके चालक की पहचान के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। जांच के तहत आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।

जातीय गणना मे टाइटल नहीं कुर्मी लिखो :अंशुल कटियार

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लखनऊ/फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर ) को लेकर एक नया सन्देश खड़ा हो गया है। सरदार पटेल युवा वाहिनी के अध्यक्ष अंशुल कटियार नें खास तौर पर कुर्मी समाज के लोगों से अपील है कि एनपीआर में जाति के कॉलम में केवल कुर्मी ही लिखवाएं , किसी भी प्रकार का सरनेम या उपनाम न जोड़ा जाए।उनका ये प्रयास समुदाय विशेष के भीतर जागरूकता फैलाने की कोशिश बताया जा रहा है, विशेषज्ञों का कहना है कि एनपीआर का उद्देश्य देश के निवासियों का डेटा तैयार करना है, लेकिन इसमें जाति के आंकड़ों को लेकर हमेशा से राजनीतिक खींचतान रही है। कई दल पहले से ही जातीय जनगणना की मांग कर रहे हैं, ऐसे में इस तरह के अभियान उस बहस को और तेज कर सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां जातीय समीकरण चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित करते हैं, वहां इस तरह के संदेश आने वाले चुनावों से पहले माहौल बनाने का संकेत भी हो सकते हैं। खासकर पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आंकड़ों को लेकर लंबे समय से राजनीतिक दलों के बीच टकराव बना हुआ है।

स्थानीय स्तर पर भी इस संदेश को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग इसे समाज की एकजुटता का प्रयास बता रहे हैं।आंकड़ों की बात करें तो देश में जातीय जनगणना को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। पिछली व्यापक जातीय गणना 1931 में हुई थी, जिसके बाद से यह मुद्दा लगातार राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बना हुआ है।

आर्मी पब्लिक स्कूल में अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक दिवस पर छात्रों ने जगाई पढ़ने की अलख

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फर्रुखाबाद। डिजिटल दौर में जहां मोबाइल और इंटरनेट ने बच्चों की दिनचर्या बदल दी है, वहीं आर्मी पब्लिक स्कूल फतेहगढ़ कैंट में अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक दिवस का आयोजन कर ज्ञान और पुस्तकों के महत्व को केंद्र में लाया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने न सिर्फ पुस्तकों के महत्व को समझा, बल्कि मंच के माध्यम से उसे जीवंत भी किया।

प्रार्थना सभा के दौरान विद्यार्थियों ने एक लघु नाटिका प्रस्तुत कर यह संदेश दिया कि पुस्तकें मानव जीवन का अभिन्न अंग हैं और सच्ची मित्र की तरह हर समय मार्गदर्शन करती हैं। नाटिका के जरिए यह भी दिखाया गया कि इंटरनेट के इस तेज दौर में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ, बल्कि वे आज भी ज्ञान का सबसे विश्वसनीय स्रोत हैं।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं आरजू और दीप्ति ने अपनी कविता से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में बताया कि पुस्तकें दीपक की तरह स्वयं जलकर हमारे जीवन में ज्ञान का उजाला भरती हैं और अंधकार को दूर कर नई दिशा दिखाती हैं। उनकी प्रस्तुति ने सभा में उपस्थित सभी छात्रों और शिक्षकों को गहराई से प्रभावित किया।

विद्यालय के कार्यवाहक प्रधानाचार्य नितिन चतुर्वेदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पुस्तकों से जुड़ाव ही वास्तविक ज्ञान की कुंजी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “पुस्तकें मां की ममता और गुरुजनों के आशीर्वाद का रूप होती हैं, जो जीवन के हर कठिन मोड़ पर सही दिशा दिखाती हैं।” उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया।

इस आयोजन को सफल बनाने में शिक्षिकाओं पूर्णिमा अग्निहोत्री और डॉ. शिवाली वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर छात्रों को प्रेरित किया।

फतेहगढ़ कैंट का यह आयोजन एक सकारात्मक संदेश देता है कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच भी पुस्तकों की प्रासंगिकता कायम है और यदि स्कूल स्तर पर ऐसे प्रयास जारी रहे, तो आने वाली पीढ़ी ज्ञान और संस्कार दोनों में मजबूत बन सकती है।

शिक्षा पर ‘निर्माण घोटाला’ का साया: 9.27 लाख का कक्ष अधूरा, 4 महीने की देरी

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नगर पंचायत की कार्यशैली कटघरे में

नवाबगंज (फर्रुखाबाद)। वार्ड नंबर 3, अब्दुल कलाम आजाद नगर स्थित नगला नया प्राथमिक विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कार्य अब प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार का प्रतीक बनता जा रहा है। 9.27 लाख रुपये के बजट से शुरू हुआ यह निर्माण कार्य तय समय सीमा पार करने के बाद भी अधूरा पड़ा है, जिससे सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

दस्तावेजों के अनुसार, यह निर्माण कार्य पिछले वर्ष नवंबर में शुरू किया गया था और 25 दिसंबर तक पूरा होना था। लेकिन हकीकत यह है कि चार महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ। मौके पर अधूरा ढांचा, बिखरी निर्माण सामग्री और ठप काम—नगर पंचायत की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहे हैं।

स्थानीय लोगों में इसको लेकर भारी आक्रोश है। रजनेश शाक्य, अश्वनी शाक्य, दीपक शाक्य, विक्रांत शाक्य, राम सिंह और पवन कुमार ने खुलकर सवाल उठाए हैं कि आखिर एक छोटे से कक्ष के निर्माण में आधा साल क्यों लग रहा है? उनका आरोप है कि या तो जिम्मेदार अधिकारी समय-सीमा को लेकर गंभीर नहीं हैं या फिर ठेकेदार को किसी प्रभावशाली संरक्षण का लाभ मिल रहा है।

जमीनी हकीकत यह भी है कि अतिरिक्त कक्ष न बनने के कारण बच्चों को या तो एक ही कमरे में ठूंसकर पढ़ाया जा रहा है या फिर खुले में बैठने की मजबूरी है। इससे न सिर्फ पढ़ाई का स्तर गिर रहा है, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के दावों की भी हवा निकल रही है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद अब तक न तो ठेकेदार पर कोई जुर्माना लगाया गया और न ही विभागीय स्तर पर कोई सख्त कार्रवाई हुई। यह स्थिति सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और निगरानी तंत्र की विफलता की ओर इशारा करती है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्राथमिक शिक्षा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाहियां पूरे सिस्टम की साख पर बट्टा लगा रही हैं।

एक्शन मे मैडम लाठर :स्कूल वाहनों पर एआरटीओ की बड़ी कार्रवाई, 35 पर शिकंजा, कई मे हड़कंप 

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– डीएम के टेढ़े रुख के बाद हरकत मे आया एआरटीओ कार्यालय

– लेकिन नवाबगंज के दो स्कूलों पर ढिलाई

– पुराने हमले की याद ने बढ़ाई सियासी गर्मी

फर्रुखाबाद। जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर लाठर ही ताबड़तोड़ एक्शन के बीच जनपद में स्कूल वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों को लेकर अब तक लापरवाह एआरटीओ विभाग ने अचानक सख्ती दिखाते हुए बीते बुधवार 35 वाहनों पर कार्रवाई कर दी। बिना परमिट, फिटनेस और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले वाहनों के खिलाफ चालान और सीज की कार्रवाई से हड़कंप मचा दिया । लेकिन इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है क्या कानून सबके लिए बराबर है?

स्थानीय सूत्रों और लोगों का आरोप है कि क़स्बा नवाबगंज-चांदपुर स्थित एसकेएम इंटर कॉलेज और कृष्णा पब्लिक स्कूल के वाहनों पर कोई अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। जबकि इन संस्थानों के वाहनों में भी खामियां लंबे समय से सामने आती रही हैं। यही वजह है कि अब एआरटीओ की कार्रवाई पर चयनात्मकता के आरोप लगने लगे हैं।

मामले को और गंभीर बनाता है वह पुराना घटनाक्रम, जब पूर्व एआरटीओ सुधेश तिवारी ने इसी तरह स्कूल वाहनों पर शिकंजा कसा था। उस दौरान एसकेएम इंटर कॉलेज और कृष्णा पब्लिक स्कूल प्रबंधक और खुद को वकील बताने वाले माफिया अनुपम दुबे के बेहद करीबी शातिर अपराधी अवधेश मिश्रा ने अपने माफिया साथी डॉ अनुपम दुबे व संजीव परिया (अब दिवंगत ) के संरक्षण मे अपने साथियों के साथ कचहरी परिसर में अधिकारी पर जानलेवा हमला करवा दिया था। यहाँ तक कि जिला यात्री कर अधिकारी को खुलेआम उनके कार्यालय में पीटा गया जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया था।और एआरटीओ तिवारी नौकरी से ही इस्तीफा देकर चले गए थे।

अब मौजूदा कार्रवाई के बीच वही पुरानी घटना फिर चर्चा में है। सवाल यह है कि क्या उसी दबाव और भय का असर आज भी विभागीय कार्रवाई पर दिखाई दे रहा है? या फिर यह महज संयोग है कि कुछ संस्थान जांच के दायरे से बाहर रह गए?

परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में हर साल स्कूल वाहनों से जुड़े हादसों में दर्जनों बच्चों की जान जोखिम में पड़ती है। सुप्रीम कोर्ट और परिवहन विभाग की गाइडलाइन के अनुसार, हर स्कूल वाहन में फिटनेस, फायर सेफ्टी, जीपीएस, ड्राइवर वेरिफिकेशन और स्पीड गवर्नर अनिवार्य है लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर इन नियमों से कोसों दूर नजर आती है।

अभिभावकों का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन स्कूलों में खामियां हैं, वहां बिना दबाव के सख्त कदम उठाए जाएं।