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Monday, May 18, 2026
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ED ने बैंक धोखाधड़ी और हवाला मामले में AAP नेता दीपक सिंगला को किया गिरफ्तार

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नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को दिल्ली और गोवा स्थित अपने परिसरों पर छापेमारी के बाद आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक उम्मीदवार दीपक सिंगला (Deepak Singla) को बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया। ईडी ने बताया कि दिल्ली और गोवा स्थित उनके परिसरों में आम आदमी पार्टी के सदस्य और पूर्व विधायक उम्मीदवार दीपक सिंगला के साथ-साथ अन्य कथित हवाला संचालकों के कार्यालयों की तलाशी ली गई।

एजेंसी के अनुसार, उसे जानकारी मिली है कि दीपक सिंगला कथित तौर पर दिल्ली और गोवा के बीच आम आदमी पार्टी के लिए धन के हस्तांतरण हेतु हवाला संचालन का काम संभाल रहे थे। ईडी ने आगे आरोप लगाया कि दीपक सिंगला ने अपने चाचा अशोक कुमार मित्तल, भाई रमन सिंगला और हरीश सिंगला के साथ मिलकर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से 150 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की। यह धनराशि कथित तौर पर सिंगापुर स्थित नियंत्रित फर्मों को भेजी गई थी।

एजेंसी को यह भी संदेह है कि अपराध से प्राप्त धन हवाला चैनलों के माध्यम से भारत लाया गया और कथित तौर पर दीपक सिंगला की अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। एक अधिकारी ने बताया, पीएमएलए धोखाधड़ी मामले के संबंध में, दीपक सिंगला को आज ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है।

अवैध शराब पर शिकंजा कसने का दावा, आबकारी विभाग ने कई दुकानों पर मारा छापा

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– भोलेपुर, नेकपुर चौरासी समेत कई दुकानों का औचक निरीक्षण, स्टॉक से लेकर सीसीटीवी तक की हुई जांच

फर्रुखाबाद। जनपद में अवैध मदिरा के निर्माण, बिक्री और परिवहन पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग ने प्रवर्तन अभियान तेज कर दिया है। आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश के आदेश एवं जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देश पर रविवार को जिला आबकारी अधिकारी जी.पी. गुप्ता के नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया।

अभियान के तहत आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-1 कुमार गौरव सिंह ने टीम के साथ भोलेपुर देशी शराब दुकान, नेकपुर चौरासी देशी शराब दुकान, भोलेपुर कम्पोजिट शॉप तथा आवास विकास स्थित मॉडल शॉप का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दुकानों पर उपलब्ध शराब स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया और उसका मिलान स्टॉक रजिस्टर व अन्य अभिलेखों से कराया गया।

टीम ने ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था, पीओएस मशीनों से हो रही बिक्री और दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता की भी जांच की। निरीक्षण के दौरान सभी अनुज्ञापियों को शासन की गाइडलाइन के अनुरूप कार्य करने तथा अभिलेखों को अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए।

आबकारी विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी दुकान पर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और अवैध शराब से जुड़ी सूचनाएं तत्काल विभाग को देने के निर्देश भी जारी किए गए।

जिला आबकारी अधिकारी जी.पी. गुप्ता ने कहा कि जनपद में अवैध मदिरा के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बिहार के खगड़िया में भीषण सड़क हादसा, तीन वाहनों की टक्कर में 7 लोगों की मौत, कई घायल

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खगड़िया: बिहार के खगड़िया (Khagaria) में भीषण सड़क हादसा (road accident) हुआ है, जिसमें 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, कई लोगों के घायल होने की खबर है। तीन वाहनों (स्कॉर्पियो, ट्रक और ऑटो) की आपस में टक्कर होने से यह भीषण सड़क हादसा हुआ है। घटना मानसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत NH-31 पर हुआ। इस भीषण सड़क हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। वहीं, मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया है।

हादसा इतना भयानक था की ऑटो के परखच्चे उड़ गए। वहीं, स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद ऑटो में सवार लोग हवा में उछलते हुए सड़क पर जा गिरे। कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, कई लोग बीच सड़क पर ही घायल अवस्था में कराहने लगे। टक्कर की आवाज सुनने के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय व राहगीर राहत और बचाव कार्य में जुट गए।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची मानसी थाना पुलिस ने हालात को नियंत्रित किया। पुलिस ने सभी घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा। वहीं, शवों को अपने कब्जे में लेते हुए उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस का कहना है कि किस वजह से यह हादसा हुआ इसकी जांच की जा रही है। पुलिस ने ट्रक और क्षतिग्रस्त वाहनों को जप्त कर लिया है। वहीं, ट्रक चालक की पहचान करने की कोशिश में जुटी हुई है।

उधर हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों का घटना के बाद से रो-रोकर बुरा हाल है। जैसे-जैसे लोगों को सूचना मिल रही है, सभी घायलों और मृतकों के परिजन सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं।

 

जल निगम परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर डीएम सख्त, जीवीपीआर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति

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फर्रुखाबाद: जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की अध्यक्षता में रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार फतेहगढ़ में जल निगम शहरी एवं जल निगम ग्रामीण द्वारा संचालित विभिन्न पेयजल और सीवर परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली गई।

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जल निगम शहरी के अंतर्गत आवास विकास में संचालित 24×7 वाटर सप्लाई पायलट प्रोजेक्ट, कैंट एरिया वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट, शमसाबाद वाटर सप्लाई स्कीम तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्माणाधीन सीवर और एसटीपी प्रोजेक्ट की प्रगति पर चर्चा की।

डीएम ने अधिशासी अभियंता जल निगम शहरी को स्पष्ट निर्देश दिए कि जो कार्यदायी संस्थाएं निर्धारित समय सीमा में परियोजनाओं को पूरा नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार पेनाल्टी की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पाइपलाइन डालने के लिए खोदे गए गड्ढों को कार्य पूर्ण होते ही तत्काल भरवाया जाए, ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े।

इसके बाद “हर घर जल” योजना के तहत जल निगम ग्रामीण द्वारा कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि वीटीएल गजा कंपनी ने 154 ओवरहेड टैंकों में से 151 टैंकों का निर्माण पूरा कर लिया है, जबकि जीवीपीआर कंपनी 227 टैंकों के सापेक्ष केवल 69 टैंक ही बना सकी है।

इस बेहद धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और जीवीपीआर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने हेतु शासन को संस्तुति पत्र भेजने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, उनमें नियमित पेयजल आपूर्ति तत्काल शुरू कराई जाए।

बैठक में आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की भी समीक्षा की गई। जल निगम ग्रामीण से संबंधित शिकायतों पर 23 प्रतिशत असंतुष्ट फीडबैक मिलने पर डीएम ने अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

उत्तराखंड में पेट्रोल, डीजल और LPG की आपूर्ति सामान्य, प्रशासन ने आम जनता से की अपील, कहा- चिंता की कोई बात नहीं

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देहरादून: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने आश्वस्त किया है कि प्रदेश में पेट्रोल (MS), डीजल (HSD) एवं रसोई गैस (LPG) सहित सभी आवश्यक पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सामान्य एवं निर्बाध बनी हुई है। कंपनियों के अनुसार, उत्तराखण्ड (Uttarakhand) में समग्र आपूर्ति स्थिति पूरी तरह स्थिर एवं पर्याप्त है। टर्मिनलों एवं डिपो से लेकर रिटेल आउटलेट्स तक संपूर्ण ईंधन आपूर्ति श्रृंखला सुचारु एवं प्रभावी रूप से संचालित हो रही है तथा कहीं भी किसी प्रकार का व्यवधान नहीं है।

राज्य के सभी स्थानों पर ईंधन स्टॉक की निरंतर निगरानी की जा रही है तथा आवश्यकतानुसार पूर्ति का कार्य सुचारु रूप से जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य में इसकी उपलब्धता सामान्य बनी हुई है। सभी उपभोक्ताओं तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।

आईओसीएल उत्तराखण्ड के राज्य स्तरीय समन्वयक कृष्ण कुमार गुप्ता ने उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे अथवा संग्रहण (पैनिक बाइंग) से बचें। साथ ही ईंधन उपलब्धता संबंधी सही एवं प्रमाणित जानकारी के लिए केवल तेल विपणन कंपनियों के आधिकारिक संचार माध्यमों पर ही विश्वास करें।

 

 

न्यायिक अधिकारियों पर कार्रवाई पर सीजेआई की मंजूरी अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अधिकारों की सीमा स्पष्ट कर दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी भी ज्यूडिशियल ऑफिसर के खिलाफ स्वतंत्र रूप से जांच शुरू करने या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार रजिस्ट्रार जनरल को नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ करने से पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश अथवा संबंधित उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस या जजों की समिति की अनुमति आवश्यक होगी। बिना सक्षम अनुमति के कोई भी डिसिप्लिनरी प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।
अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय नियमों और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप ही की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को न्यायपालिका के प्रशासनिक अधिकारों और अनुशासनात्मक प्रक्रिया की सीमा तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से न्यायिक अधिकारियों के मामलों में प्रक्रिया संबंधी स्पष्टता आएगी और मनमानी कार्रवाई पर रोक लगेगी।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि न्यायिक संस्थानों के भीतर अनुशासनात्मक अधिकारों का प्रयोग अत्यंत संतुलित और संवैधानिक मर्यादा के तहत होना चाहिए। फैसले के बाद न्यायिक और कानूनी हलकों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।