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Thursday, May 7, 2026
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जेल में खुनी खेल, सुरक्षा व्यवस्था फेल! अवैध उगाही की मांग, रकम नहीं दी तो कैदी पर हुआ चाकू से हमला

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नई दिल्ली: दिल्ली की मंडोली जेल (Mandoli Jail) एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। हर्ष विहार थाना क्षेत्र स्थित जेल परिसर में 40 वर्षीय विचाराधीन कैदी जावेद उर्फ टोनी पर चाकू से जानलेवा हमला (Deadly attack) किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जेल के अंदर ही धारदार हथियार से उसकी कमर पर कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद जेल प्रशासन ने घायल कैदी को तुरंत गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है।

पुलिस के अनुसार यह घटना बुधवार देर रात की है। घायल कैदी की पत्नी अफरोजा ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने पति से मिलने मंडोली जेल गई थीं और उस समय जावेद पूरी तरह स्वस्थ था। लेकिन देर रात जेल प्रशासन की ओर से फोन कर उन्हें हमले की जानकारी दी गई। अस्पताल पहुंचने पर उन्होंने अपने पति को गंभीर हालत में पाया।

घायल जावेद ने आरोप लगाया है कि जेल के भीतर उससे 10 से 15 हजार रुपये की अवैध उगाही की मांग की जा रही थी। रकम नहीं देने पर उसे लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। जावेद का दावा है कि इससे पहले भी उस पर कई बार धारदार हथियार से हमला करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह हर बार बच निकला।

जावेद के भाई गुलशन ने बताया कि जावेद पिछले करीब सात महीनों से नशीले पदार्थ बेचने के आरोप में मंडोली जेल में बंद है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके बहनोई अमजद उर्फ राकल की एक मार्च को नुकीले हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया है कि जेल में बंद जाकिर नामक कैदी ने जावेद पर हमला कराया है। साथ ही उन्होंने जेल प्रशासन के कुछ कर्मचारियों पर भी उगाही में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

घटना के बाद पुलिस और जेल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जेल के अंदर सुरक्षा व्यवस्था, कैदियों के बीच बढ़ती हिंसा और अवैध उगाही के आरोपों ने एक बार फिर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

यमुना में नाव पलटने से 6 की मौत, 22 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

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हमीरपुर

जिले के कुरारा थाना क्षेत्र के भौली गांव मजरा कोतूपुर पटिया में मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गम में डुबो दिया। बेटी की शादी के बाद घर में खुशियों का माहौल था, लेकिन कुछ ही घंटों में वही घर चीख-पुकार से भर गया। यमुना नदी में नाव पलटने से छह लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन लोगों को ग्रामीणों ने सुरक्षित बचा लिया।
जानकारी के अनुसार, गयाप्रसाद उर्फ राजू की बेटी अंजली की शादी सोमवार को संपन्न हुई थी। मंगलवार को विदाई के बाद रिश्तेदारों को यमुना पार स्थित खेतों में तरबूज, खरबूजा और ककड़ी खिलाने ले जाया गया था। शाम को लौटते समय बीच धारा में नाव का संतुलन बिगड़ गया और नाव पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नाव चला रहा युवक मोबाइल देखने लगा था, इसी दौरान हादसा हो गया।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी। मौके पर पहुंची NDRF, SDRF और फ्लड पीएसी की टीमों ने करीब 22 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया। गुरुवार सुबह तक सभी छह शव बरामद कर लिए गए।
मृतकों में बृजरानी (35), अर्चना (14), रानी (9), आकांक्षा (9), लव्यांश उर्फ दिव्यांश (5) और आदित्य (11) शामिल हैं। वहीं नाविक विष्णु, रिंकू और पारुल को सुरक्षित बचा लिया गया।
जिस घर से मंगलवार को बेटी की डोली उठी थी, उसी घर में गुरुवार को मातम पसरा रहा। गांव में दो दिनों तक किसी के घर चूल्हा नहीं जला। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है।

9 मई को यूपी के सभी 75 जिलों में लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत

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मुख्य सचिव ने अफसरों को दिए विशेष निर्देश

लखनऊ

प्रदेश में 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। गुरुवार को लखनऊ में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि लोक अदालत के आयोजन को प्रभावी और जनहितकारी बनाने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ काम करें और अधिक से अधिक मामलों का मौके पर निस्तारण कराया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि लोक अदालत में विशेष रूप से प्री-लिटिगेशन मामलों, बैंक रिकवरी केस और मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े लंबित चालानों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इसके लिए प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं और बैंक संस्थानों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को राहत मिल सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तहसील प्रशासन की मदद से गांव-गांव और कस्बों में जागरूकता अभियान चलाया जाए। आम जनता को लोक अदालत के लाभों की जानकारी देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, आशा बहुओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भी मदद ली जाए। साथ ही पक्षकारों को समय पर नोटिस और समन की तामील सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैंक वसूली मामलों में चौकीदारों की सहायता लेने को भी कहा गया।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि 21 दिसंबर 2021 से पहले के सभी लंबित मोटर वाहन चालानों को जिला न्यायालयों में प्रस्तुत कर उनका निस्तारण कराया जाए। आयोजन से पहले बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए लोगों को त्वरित और सस्ता न्याय उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इससे वर्षों से लंबित मामलों का समाधान तेजी से होगा और न्यायालयों पर भी बोझ कम पड़ेगा। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

यूपी में जल्द होगा मंत्रिमंडल विस्तार, भाजपा ने सामाजिक समीकरण साधने को फाइनल किए 6 नाम

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लखनऊ

प्रदेश में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बड़ी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भाजपा अब प्रदेश में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए जल्द मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने कैबिनेट विस्तार के लिए छह नए चेहरों के नाम लगभग फाइनल कर लिए हैं, जिनमें दो पिछड़ा वर्ग, दो ब्राह्मण, एक दलित और एक महिला नेता को शामिल किए जाने की चर्चा तेज है।
लखनऊ में 11 और 12 मई को भाजपा संगठन की अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्ष शामिल होंगे। बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति, बूथ प्रबंधन और संगठन को और मजबूत करने पर विशेष फोकस रहेगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनावी जीत का सबसे बड़ा आधार मजबूत बूथ संरचना होती है, इसलिए बूथ अध्यक्षों, शक्ति केंद्रों और प्रभारियों के सत्यापन का अभियान तेज किया जाएगा।
भाजपा बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में मिली सफलता के बाद अब उत्तर प्रदेश और पंजाब पर पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी का लक्ष्य है कि किसी भी स्तर पर संगठन कमजोर न पड़े और जातीय समीकरणों को साधते हुए हर वर्ग तक पहुंच बनाई जाए। इसी रणनीति के तहत प्रदेश में पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को बोर्ड, निगम और आयोगों में भी समायोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लखनऊ पहुंचने के बाद संगठनात्मक बैठकों का दौर और तेज होगा। पार्टी ने पहले नारी शक्ति वंदन अभियान के जरिए महिला वोट बैंक को साधने का प्रयास किया था, वहीं अब पीडीए राजनीति की काट के लिए जातीय और सामाजिक समीकरणों पर विशेष होमवर्क किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए भाजपा आगामी चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहती है। पार्टी नेतृत्व सामाजिक संतुलन के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रख रहा है, ताकि प्रदेश के हर वर्ग और क्षेत्र में भाजपा की पकड़ और मजबूत हो सके।

बिहार में विभागों का बंटवारा, निशांत को स्वास्थ्य, विजय सिन्हा को कृषि और मिथिलेश तिवारी को शिक्षा की जिम्मेदारी

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पटना

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार में कई बड़े और अहम मंत्रालयों का आवंटन होने के बाद नई कैबिनेट की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा निशांत कुमार को स्वास्थ्य विभाग मिलने और विजय कुमार सिन्हा को कृषि मंत्रालय सौंपे जाने को लेकर हो रही है। वहीं मिथिलेश तिवारी को शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी देकर सरकार ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश देने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन और सिविल विमानन जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं। इसके अलावा जिन विभागों का अभी आवंटन नहीं हुआ है, उनकी जिम्मेदारी भी फिलहाल मुख्यमंत्री के पास ही रहेगी। सरकार में यह साफ संकेत देने का प्रयास किया गया है कि प्रशासनिक नियंत्रण और फैसलों की कमान सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के हाथ में रहेगी।
नई कैबिनेट में निशांत कुमार को स्वास्थ्य विभाग दिए जाने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्वास्थ्य विभाग राज्य के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में माना जाता है और आने वाले समय में अस्पतालों, चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर उनकी कार्यशैली पर सबकी नजर रहेगी। वहीं विजय कुमार सिन्हा को कृषि विभाग की जिम्मेदारी देकर किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया गया है।
मिथिलेश तिवारी को शिक्षा विभाग सौंपा गया है। अब नई शिक्षा नीति, शिक्षक भर्ती, विद्यालयों की व्यवस्था और शिक्षा सुधार जैसे बड़े मुद्दों पर उनकी भूमिका अहम रहने वाली है। वहीं संजय सिंह टाइगर को उच्च शिक्षा और विधि विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार ने स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां बांटकर व्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।
महिला मंत्रियों को भी सरकार में अहम स्थान दिया गया है। रेणु देवी को आपदा प्रबंधन, श्वेता गुप्ता को समाज कल्याण और सुशी श्रीणी सिंह को खेल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा रमा निवास को पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है। सरकार ने सामाजिक और जनकल्याण से जुड़े विभाग महिला नेताओं को देकर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
नई कैबिनेट में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण ढांचे पर विशेष फोकस दिखाई दे रहा है। विभागों के बंटवारे के बाद अब जनता और विपक्ष दोनों की नजर नई सरकार के कामकाज और फैसलों पर टिक गई है।

तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए विजय जुटा रहे समर्थन, रिजॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू

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चेन्नई

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) बहुमत जुटाने के लिए लगातार अन्य दलों और विधायकों से संपर्क साध रही है। इसी बीच राज्य की राजनीति में एक बार फिर ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ की एंट्री हो गई है, जहां विभिन्न दल अपने विधायकों को टूट-फूट से बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक टीवीके ने अब टीटीवी दिनाकरन की पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) के विधायक कमराज एस से भी समर्थन मांगा है। पार्टी को सरकार बनाने के लिए अभी भी कुछ विधायकों की जरूरत है। 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं, जबकि बहुमत के लिए 118 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। कांग्रेस पहले ही विजय की पार्टी को समर्थन देने का एलान कर चुकी है, जिससे पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है।
वहीं दूसरी ओर एआईएडीएमके ने अपने विधायकों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी पुडुचेरी के एक निजी रिजॉर्ट पहुंचे, जहां मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 विधायकों को ठहराया गया है। माना जा रहा है कि पार्टी अपने विधायकों को राजनीतिक दबाव और संभावित टूट से बचाने के लिए यह कदम उठा रही है।
सरकार गठन को लेकर राज्यपाल आरवी अर्लेकर और टीवीके के बीच गतिरोध भी बना हुआ है। विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया, लेकिन राज्यपाल ने स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा न होने पर स्थिति साफ करने को कहा है। सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने विजय से पूछा कि बिना पर्याप्त समर्थन के स्थिर सरकार कैसे चलाई जाएगी। हालांकि विजय ने फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार रहने की बात कही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डीएमके और उसके सहयोगी दल भी सक्रिय हो गए हैं। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने अपने सहयोगी दलों को राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से फैसला लेने की छूट दी है। वहीं वामपंथी दल और वीसीके भी समर्थन को लेकर बैठकें कर रहे हैं। तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने में विजय सफल हो पाते हैं या नहीं।