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Saturday, April 18, 2026
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‘मैं जिंदा हूं…’, कफन ओढ़ कर DM ऑफिस पहुंचा रिटायर्ड कर्मचारी, कहा- सरकारी रिकॉर्ड में मुझे मृत घोषित कर दिया

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बस्ती: यूपी के बस्ती (Basti) में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां इशहाक अली नाम का शख्स कफ़न ओढ़कर DM ऑफिस पहुंचा और खुद को जिंदा साबित करने की गुहार लगाई। इशहाक अली सरकारी अस्पताल में कर्मचारी रहे हैं और 31 दिसंबर 2019 को रिटायर हुए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें करीब 7 साल पहले ही मृत घोषित कर दिया गया।

आरोप है कि लेखपाल ने राजस्व अभिलेखों में इशहाक अली को मृत दिखाकर उनकी पैतृक जमीन एक महिला के नाम दर्ज कर दी। तब से लेकर अब तक इशहाक अली दफ्तर-दफ्तर भटक रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। अपनी बेबसी और सिस्टम की लापरवाही को दिखाने के लिए आखिरकार इशहाक अली कफ़न ओढ़कर DM ऑफिस पहुंचे, ताकि अफसरों की नींद टूटे और उन्हें इंसाफ मिल सके।

तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ललित कुमार मिश्र पर यह आरोप है कि उन्होंने 2 दिसंबर 2012 को इशहाक अली को सरकारी अभिलेख में मृत घोषित कर दिया। यही नहीं उनकी पुस्तैनी भूमि गाटा संख्या 8 सौ 92 को गांव के ही एक महिला शाहिउद्दीन निशा के नाम पर सरकारी अभिलेख में दर्ज भी कर दिया गया। अब देखना होगा कि प्रशासन इस ‘जिंदा इंसान को कागजों में मरा’ दिखाने वाली गलती को कब तक सुधारता है।

 

पीएम मोदी की बार-बार अपील के बाद भी गिरा महिला आरक्षण बिल, बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े

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नई दिल्ली: लोकसभा में नरेंद्र मोदी (PM Modi) के नेतृत्व वाली NDA सरकार महिला आरक्षण संशोधन विधेयक (Women’s Reservation Amendment Bill) को पास नहीं करा पाई। इस बिल को पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी, लेकिन बिल के पक्ष में महज 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े। अमित शाह और प्रधानमंत्री के बार-बार अपील के बावजूद यह बिल गिर गया। 12 साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकार संसद में किसी बिल को पारित नहीं करा पाई है। वहीं इस बिल के लोकसभा में गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

इस बीच, इस बिल के गिरने पर विपक्ष में एक नया जोश भर गया है। विपक्षी दलों के सांसद खुलकर सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं और उनकी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रहीं हैं। विपक्ष का साफ़ कहना है कि महिला आरक्षण बिल नहीं गिरा है। सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन कराना चाहती थी और उस साजिश की हार हुई है।

संविधान संशोधन(131वां संशोधन) बिल के लोकसभा में पारित न होने पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि महिला आरक्षण की बात नहीं थी ये लोकतंत्र की बात थी, देश की अखंडता की बात थी। हम कभी इससे सहमत नहीं हो सकते कि आप महिला आरक्षण को इस तरह परिसीमन से जोड़ें कि वो पुरानी जनगणना पर चले जिसमें ओबीसी शामिल भी नहीं है। ये मुमकिन नहीं था कि ये बिल पारित हो। देश के लोकतंत्र के लिए, देश की अखंडता के लिए ये बड़ी जीत है।

समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, ये बिल जिस तरह से सरकार ने पेश किया, उस तरह से उसका पारित होना नामुमकिन था। उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा और पुरानी जनगणना से जोड़ा, जिस कारण से इसे पारित नहीं किया गया। इस कड़ी में, तिरुवनंतपुरम सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारा वोट महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि परिसीमन के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “हमने कहा था कि हम महिला आरक्षण के समर्थक हैं। लेकिन इसका परिसीमन से कोई लेना देना नहीं है। इन्हें अलग-अलग करें। ये वोट महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। ये वोट परिसीमन के खिलाफ है।”

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं था, बल्कि परिसीमन विधेयक था। उन्होंने कहा, “यह महिला आरक्षण विधेयक था ही नहीं, यह परिसीमन विधेयक था। हम लगातार सरकार से कहते रहे हैं कि आप 543 सीटों पर 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दें… लेकिन सरकार की मंशा साफ नहीं थी… यह मूल रूप से परिसीमन का विधेयक था।”

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि फिर गाड़ी थमी रह गई, लगता है कोशिश में कमी रह गई। उन्होंने कहा, “हमने अपना पक्ष साफ रखा है… हम महिला आरक्षण के पक्ष में है, महिलाओं को आरक्षण मिले, उन्हें सुरक्षा मिले, उनका सम्मान बढ़े, लोकतंत्र में जो उनको स्थान मिलना चाहिए, हम उसके पक्ष में हैं। समाजवादी पार्टी या विपक्ष ने महिला आरक्षण को लेकर विरोध नहीं किया, लेकिन उसके साथ ये जो महिलाओं के अधिकारों का हरण करना चाहते थे, विपक्ष ने ऐसी लक्ष्मण रेखा खींची कि वे उस लक्ष्मण रेखा के पार नहीं आ पाए।”

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि हमने महिला आरक्षण बिल का पूरी तरह समर्थन दिया था, जो 2023 में पारित हुआ था, जो बिल हारा है वह परिसीमन बिल है। महिला आरक्षण के लिए हमारा समर्थन आज भी है।

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी केंद्र सरकार पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल नहीं गिरा है, परिसीमन बिल गिरा है। इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, “महिला आरक्षण की आड़ लेकर सरकार जो परिसीमन करना चाहती थी, यह उस साजिश की हार हुई है… महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो चुका था। महिलाओं के पीछे छुपना भाजपा बंद करे। आपकी मंशा महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं है, वर्ना आप वर्तमान समय में आप महिला आरक्षण लागू करें लेकिन उन्हें यह नहीं करना और महिलाओं को धोखे में रखना है।”

कांग्रेस सांसद प्रणिती शिंदे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने देश की महिलाओं के साथ जो अन्याय किया है, उसे भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ”इन्होंने (केंद्र सरकार) बहुत बड़ा पाप किया है। 2023 में महिला आरक्षण बिल पारित हुआ था इन्हें 2024 में उसे लागू करना चाहिए था। इन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन को जोड़कर पाप किया है। देश की महिलाओं पर अन्याय किया है। ये भाजपा के अंत की शुरुआत है।”

 

 

 

BJP नेता योगेश हत्याकांड में बड़ा फैसला, कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 16 लोगों को उम्रकैद की सजा

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बेंगलुरु: बेंगलुरु स्थित जन प्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने भाजपा नेता योगेश गौड़ा (Yogesh Gowda) की 2016 में हुई हत्या (murder) के मामले में कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 15 अन्य लोगों को दोषी ठहराया है। सभी 16 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला लंबे समय से चल रहे इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है और राजनीतिक हिंसा के लिए जवाबदेही को रेखांकित करता है।विशेष अदालत के न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने सजा सुनाई है।

न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने आरोपियों को योगेश गौड़ा की हत्या की आपराधिक साजिश रचने में दोषी पाया। अदालत ने उन्हें संबंधित धाराओं के तहत दोषी करार दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को गैरकानूनी रूप से एकत्र होने, दंगा करने और हत्या से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत भी दोषी करार दिया गया है। इसके अलावा कई आरोपियों को साक्ष्य (सबूत) मिटाने को लेकर भी दोषी करार दिया गया। अदालत ने वासुदेव राम नीलेकणी और सोमशेखर बसप्पा न्यामगौड़ा के खिलाफ पुख्ता सबूत न होने के कारण उन्हें बरी कर दिया।

अदालत ने पुलिस अधिकारियों सहित कई स्वतंत्र गवाहों के खिलाफ, झूठी गवाही देने को लेकर कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया। साथ ही, अदालत ने अभियोजन पक्ष को सरकारी गवाह बने उस व्यक्ति के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति दे दी, जो बाद में अपने बयान से मुकर गया था। यह मामला भाजपा नेता और धारवाड़ जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या से संबंधित है, जिनकी जून 2016 में धारवाड़ के एक जिम में कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दी गई थी।

मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, जिसे बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था। जांच के दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। घटना के समय मंत्री रहे कुलकर्णी को 2020 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। अदालत गुरुवार को सजा सुनाएगी। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह दोषियों को अपनी हिरासत में ले।

धारवाड़ जिला पंचायत के पूर्व सदस्य गौड़ा की 15 जून, 2016 को उनके जिम में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद धारवाड़ उपनगरीय पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया। CBI ने मामले की जांच कर आपराधिक साजिश, हत्या, किसी आरोपी को बचाने के लिए लोक सेवक द्वारा कानून का उल्लंघन, सबूतों को नष्ट करना समेत अन्य आरोपों में आरोपपत्र दायर किया था।

 

स्मार्ट मीटर बना ‘संकट’, उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा — SDO को सौंपा शिकायत पत्र

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शाहजहांपुर। जिले में बिजली विभाग की ‘स्मार्ट मीटर’ योजना अब आम उपभोक्ताओं के लिए भारी पड़ती नजर आ रही है। लगातार आ रही तकनीकी दिक्कतों और अनियमित बिजली आपूर्ति से परेशान लोगों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। आक्रोशित उपभोक्ताओं ने युवा समाजवादी नेता अतुल मौर्या के नेतृत्व में SDO विद्युत को शिकायती पत्र सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा लगाए गए स्मार्ट मीटर शुरू से ही खामियों से घिरे हुए हैं। मीटर लगने के बाद से बिजली सप्लाई बार-बार बाधित हो रही है, जिससे दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कई बार रिचार्ज कराने के बावजूद अचानक लाइट कट जाना आम बात बन चुकी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इस समस्या की शिकायत कई बार की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाल पाए हैं।लोगों ने यह भी बताया कि स्मार्ट मीटर के चलते बिलिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। सही खपत की जानकारी नहीं मिल रही, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। तकनीकी जानकारी के अभाव में ग्रामीण और गरीब वर्ग के लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं।शिकायती पत्र में उपभोक्ताओं ने मांग की है कि स्मार्ट मीटर की निष्पक्ष जांच कराई जाए, खराब मीटरों को तत्काल बदला जाए और बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उपभोक्ता सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब सवाल यह है कि ‘स्मार्ट’ कहे जाने वाले ये मीटर कब तक उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बने रहेंगे और बिजली विभाग इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालेगा।

मुठभेड़ में तीन बदमाश गिरफ्तार, दो के पैर में लगी गोली

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शाहजहांपुर। कोतवाली तिलहर पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ के दौरान दो बदमाशों के पैर में गोली लगी, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान पीलीभीत निवासी वाहिद खां और खुदागंज क्षेत्र के फत्ते के पैर में गोली लगी। वहीं चौक कोतवाली क्षेत्र के ककरा खुर्द निवासी मुन्ना को भी मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। घटना के बाद पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है और इनके खिलाफ विभिन्न थानों में कई मामले दर्ज हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आरोपियों से पूछताछ कर अन्य आपराधिक घटनाओं के खुलासे की भी संभावना जताई जा रही है।

अतिक्रमण पर भाजपा नेता सुबोध मिश्रा बोले रेलिंग पर खर्च बेकार, सड़क पर सजा बाजार

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शाहजहाँपुर। महानगर में लगातार बढ़ती अतिक्रमण की समस्या को लेकर भाजपा नेता सुबोध मिश्रा ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर कहा कि शहर में करोड़ों रुपये खर्च कर लगाई गई रेलिंग का कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापारी खुलेआम सड़कों पर बाजार सजा रहे हैं, जिससे आम लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि यदि किसी राहगीर या वाहन से सामान छू भी जाए तो विवाद की स्थिति बन जाती है और लोग झगड़े पर आमादा हो जाते हैं। सुबोध मिश्रा ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निगम के पास अपनी प्रवर्तन टीम (फोर्स) होने के बावजूद अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने पूछा कि जब व्यवस्था मौजूद है तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए अतिक्रमण के खिलाफ निरंतर और सख्त अभियान चलाया जाए, ताकि शहरवासियों को इस समस्या से राहत मिल सके।