फर्रुखाबाद। गंगा तट स्थित पांचाल घाट पर इन दिनों खुलेआम मछली पकड़ने का सिलसिला जारी है, जिससे स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। प्रतिबंधित क्षेत्र होने के बावजूद यहां दिनदहाड़े जाल डालकर मछलियों का शिकार किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पांचाल घाट धार्मिक और आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद कुछ लोग नियमों की अनदेखी कर खुलेआम मछलियां पकड़ रहे हैं, जिससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं बल्कि गंगा की स्वच्छता और जैव विविधता पर भी खतरा मंडरा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह से लेकर शाम तक कई जगहों पर जाल बिछाकर मछलियों का शिकार किया जा रहा है। कई बार इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि गंगा तट के कई हिस्सों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है, खासकर धार्मिक स्थलों के आसपास, लेकिन नियमों का पालन कराने में प्रशासन पूरी तरह विफल नजर आ रहा है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की जाए और घाट पर निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि इस तरह की गतिविधियों पर रोक लग सके और धार्मिक स्थल की गरिमा बनी रहे।
पांचाल घाट पर खुलेआम मछली पकड़ने का खेल, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल?
संविलियन विद्यालय में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच तेज
– बीएसए के निर्देश पर टीम ने खंगाले अभिलेख
अमृतपुर/फर्रुखाबाद।ग्राम पंचायत कुम्हरौर स्थित संविलियन विद्यालय में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले को संज्ञान में लेते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने तत्काल प्रभाव से जांच टीम गठित कर मौके पर भेज दी, ताकि आरोपों की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित की जा सके।
गठित टीम में खंड शिक्षा अधिकारी नवाबगंज अमर सिंह राणा एवं खंड शिक्षा अधिकारी शमशाबाद वीरेंद्र सिंह पटेल शामिल रहे। टीम ने विद्यालय पहुंचकर व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया और विभिन्न महत्वपूर्ण अभिलेखों की जांच की। इस दौरान उपस्थिति रजिस्टर, मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) से संबंधित अभिलेख, तथा कोरोना काल में खर्च की गई धनराशि के रजिस्टर को विशेष रूप से खंगाला गया।
जांच के दौरान टीम ने विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति भी देखी और शिक्षण कार्य की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने विद्यालय स्टाफ से पूछताछ कर कई बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की। साथ ही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और धनराशि के उपयोग को लेकर भी गहन पड़ताल की गई।
सूत्रों के अनुसार, शिकायत में वित्तीय अनियमितताओं और अभिलेखों में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे, जिनकी पुष्टि के लिए टीम ने सभी संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया। हालांकि जांच के दौरान किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले टीम ने सभी पहलुओं को विस्तार से परखा।
खंड शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि मौके पर की गई जांच के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे शीघ्र ही बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपा जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में कड़ी निगरानी जारी रहेगी।
‘माफिया-शिक्षक’ डब्बन : फरार, इनामी और जेल यात्रा के बीच भी निकलता रहा वेतन
– कौन कर रहा था हाजिरी फाइनल?
– आखिर किसका वरदहस्त?
फर्रुखाबाद। शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि ‘जीरो टोलरेंस’ की नीति को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि माफिया अनुपम दुबे का गैंगस्टर भाई अनुराग दुबे उर्फ डब्बन, जो मोहम्मदाबाद क्षेत्र के श्याम जनता जूनियर हाई स्कूल ईश्वरी सिंनौडा मोहम्मदाबाद में सरकारी शिक्षक के पद पर तैनात है, वर्षों तक स्कूल नहीं गया—इसके बावजूद उसका वेतन लगातार निकलता रहा।
सूत्रों के मुताबिक, माफिया अनुपम दुबे का भाई अनुराग दुबे डब्बन लंबे समय तक फरार रहा और उस पर ₹50,000 का इनाम भी घोषित किया गया था। बाद में गिरफ्तारी हुई, जेल गया और फिर जमानत पर रिहा हुआ, लेकिन इन तमाम परिस्थितियों के बावजूद वह कभी विद्यालय में पढ़ाने नहीं पहुंचा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वह फरार था या जेल में था, तब उसकी उपस्थिति कैसे दर्ज होती रही? किसके आदेश पर हर महीने वेतन पास होता रहा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय में बच्चों को शिक्षक की कमी झेलनी पड़ रही है, जबकि कागजों में सब कुछ सामान्य दिखाया जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं विभागीय स्तर पर मिलीभगत से पूरा खेल चल रहा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बनता जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि इससे पहले भी माफिया से जुड़े शिक्षकों की नियुक्ति और शैक्षिक अभिलेखों की जांच की बातें सामने आई थीं, लेकिन कार्रवाई आज तक ठंडे बस्ते में पड़ी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा तंत्र चल रहा है? क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं या फिर कहीं ऊपर तक ‘सेटिंग’ का खेल जारी है?
इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग की पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर एक इनामी और फरार आरोपी भी सरकारी वेतन ले सकता है, तो फिर व्यवस्था की साख पर सवाल उठना लाजिमी है।
अब क्षेत्रीय लोगों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और अब तक निकले वेतन की रिकवरी की जाए। यदि इस मामले में सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह सिर्फ एक स्कूल या एक शिक्षक का मामला नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का प्रतीक बन जाएगा।
जन मानस के स्वास्थ्य लिए खतरा बनता जा रहा बदला हुआ मौसम
फर्रुखाबाद। जनपद में बीते कई दिनों से मौसम का मिजाज लगातार बदलता नजर आ रहा है। लगभग प्रतिदिन शाम होते-होते तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है और लोगों को अप्रैल माह में भी सर्दी का अहसास हो रहा है। आमतौर पर इस समय गर्मी बढ़ने लगती है, लेकिन इस बार मौसम का यह बदला हुआ स्वरूप लोगों के लिए हैरानी का विषय बना हुआ है।
शाम के समय चलने वाली ठंडी हवाएं और अचानक होने वाली बारिश से जहां जनजीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ने लगा है। चिकित्सकों का कहना है कि इस प्रकार का असामान्य मौसम संक्रमण फैलने का कारण बन सकता है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव से सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
जनपद में कई घरों में मौसमी बीमारियों के मरीज देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतें, ठंडी हवाओं से बचें और खानपान में सतर्कता रखें।
मौसम के इस अजीब बदलाव ने ऐसा माहौल बना दिया है कि कभी अप्रैल में बारिश का अनुभव हो रहा है तो कभी फरवरी जैसी ठंड महसूस हो रही है, जो आम जनजीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।
व्यापार फेडरेशन नें यातायात प्रभारी व चौकी इंचार्ज किये सम्मानित
– व्यापारियों को अनुशासन और एकजुटता का संदेश
फर्रुखाबाद। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल की सेंट्रल जेल इकाई की मासिक बैठक में व्यापारियों की एकजुटता, अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया। बैठक संगठन के महामंत्री देवेंद्र सक्सेना के प्रतिष्ठान पर आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे।
जिलाध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि संगठन हर परिस्थिति में व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी व्यापारी को समस्या होने पर संगठन पूरी मजबूती से उसके साथ खड़ा रहेगा। वहीं जिला महामंत्री विमलेश मिश्रा ने सभी व्यापारियों से संगठन के निर्देशों का पालन करने की अपील करते हुए सड़क पर ठेली और वाहन खड़े न करने की हिदायत दी, ताकि जाम की समस्या उत्पन्न न हो। उन्होंने मीट कारोबारियों से भी अपना कार्य पर्दे में करने का अनुरोध किया।
बैठक में सेंट्रल जेल इकाई के अध्यक्ष योगेश गुप्ता, महामंत्री डॉ. संजीव त्रिपाठी और देवेंद्र सक्सेना ने चौराहे पर व्यापारियों के लिए सार्वजनिक शौचालय निर्माण की मांग उठाई। इस दौरान यातायात प्रभारी सतेन्द्र कुमार और सेंट्रल जेल चौकी प्रभारी शिव कुमार को सम्मानित किया गया। चौकी प्रभारी शिव कुमार ने व्यापारियों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया, जबकि यातायात प्रभारी सतेन्द्र कुमार ने स्पष्ट कहा कि सड़क पर अतिक्रमण और ठेली लगाने से जाम की समस्या बढ़ती है, इसलिए सभी व्यापारी इस पर विशेष ध्यान दें।
बैठक में संगठनात्मक विस्तार भी किया गया, जिसमें याकूतगंज व्यापार मंडल अध्यक्ष अनूप दुबे को सेंट्रल जेल व्यापार मंडल की ओर से मनोनीत किया गया। इसके साथ ही पाल सेना के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आशाराम पाल को जिला मंत्री बनाया गया। अवधेश सक्सेना, राहुल यादव और राजीव सक्सेना को उपाध्यक्ष, शैलेश राजपूत को मीडिया प्रभारी तथा अवनीश कुमार को मंत्री नियुक्त किया गया। अधिवक्ता प्रवेन्द्र उपाध्याय को विधिक सलाहकार की जिम्मेदारी सौंपी गई।
कार्यक्रम में आचार्य सर्वेश कुमार शुक्ल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित मिश्रा, उपाध्यक्ष अर्पित अग्निहोत्री, डॉ. रवि राजपूत सहित कई प्रमुख व्यापारी मौजूद रहे। बैठक का संचालन शिवम दुबे ने किया।
आंगनबाड़ी केंद्रों की लापरवाही पर ग्रामीणों का आक्रोश
– नेकपुर खुर्द में केंद्र बंद रहने से बच्चों का भविष्य संकट में
फर्रुखाबाद। सरकार द्वारा बच्चों और महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के लिए संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विकासखंड बढ़पुर के नेकपुर खुर्द में आंगनबाड़ी केंद्र की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों में आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा और कई बार दिन भर या लगातार कई दिनों तक बंद रहता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, आंगनबाड़ी केंद्र अक्सर दोपहर बाद तक नहीं खुलता, जिससे वहां पंजीकृत बच्चों को समय पर पोषाहार नहीं मिल पाता। साथ ही, उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है। इससे न केवल बच्चों के शारीरिक विकास पर असर पड़ रहा है, बल्कि उनके भविष्य पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते केंद्र की स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित होती नजर आ रही हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आंगनबाड़ी केंद्र को नियमित रूप से संचालित कराया जाए, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों और महिलाओं तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचे।






