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Monday, June 22, 2026
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पश्चिमी यूपी में बीजेपी का एम -वाई समीकरण साधने की तैयारी

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अलीगढ़/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिमी यूपी पर अपना फोकस तेज कर दिया है। इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अलीगढ़ पहुंचेंगे, जहां वह करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देने के साथ एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह कार्यक्रम केवल अलीगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पूरे ब्रज क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को साधने की कोशिश की जा रही है। भाजपा विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखकर चुनावी माहौल तैयार करने में जुटी हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा को विकास और सुशासन के संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित कार्यक्रमों और सक्रियता के जरिए पार्टी चुनावी अभियान को और धार देने की तैयारी में है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचा है, जिसका राजनीतिक फायदा आगामी चुनावों में मिल सकता है।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में भाजपा विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी संगठन का फोकस बूथ स्तर तक पहुंच बनाकर विकास और कल्याणकारी योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाने पर है।
अलीगढ़ की जनसभा को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। भाजपा नेताओं का दावा है कि यह कार्यक्रम आगामी चुनावी रणनीति की दिशा तय करने वाला साबित होगा। वहीं विपक्ष भी भाजपा की इस सक्रियता पर नजर बनाए हुए है।

जिले मे अनुभवी इंस्पेक्टर किनारे, नए दरोगाओं के हाथों में थानों की कमान, प्रभारी मंत्री नें लिया संज्ञान

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फर्रुखाबाद। धारदार पुलिसिंग के लिए पुलिस विभाग मे नई कार्यप्रणाली की चर्चाएं शासन तक सुनी जा रहीं । पुलिस महकमे के भीतर तैनातियों और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर कई तरह के नये प्रयोग हुए हैं। वहीं अनुभव और वरिष्ठता को दरकिनार कर कुछ नए दरोगाओं को थानों की कमान सौंप दी गई है, जबकि वर्षों तक थाना और कोतवाली चला चुके वरिष्ठ इंस्पेक्टर उनके अधीन कार्य करने को मजबूर हैं।
जानकारों के अनुसार मोहम्मदाबाद कोतवाली में एक साथ पांच इंस्पेक्टर तैनात हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि इनमें से एक इंस्पेक्टर को ताजपुर चौकी का कार्य देख रहे है, जबकि दूसरी ओर ऐसे नए दरोगाओं को थानेदार बना दिया गया है जिन्होंने अपने सेवा काल में कभी किसी चौकी की स्वतंत्र कमान तक नहीं संभाली। इस व्यवस्था को लेकर पुलिस विभाग के भीतर ही असंतोष की चर्चा है। जनपद में एक वर्ग का प्रभाव लगातार बढ़ा है। इसी वर्ग के कई पुलिस कर्मियों को महत्वपूर्ण थानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है और उसी वर्ग के पुलिसकर्मियों की भी अच्छी और प्रभावशाली थानों में तैनाती कराई गई है। पुलिस महकमे में इसे लेकर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं।सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि जनपद के कुछ पूर्व थाना अध्यक्ष, जो वरिष्ठता और अनुभव में काफी आगे हैं, आज उन नए थानेदारों के अधीन कार्य कर रहे हैं जो हाल ही में थानेदार की नई जिम्मेदारी पाकर थानों की कमान संभाल रहे हैं। इससे वरिष्ठ अधिकारियों की भावनाएं आहत होने की बात भी सामने आ रही है।
पुलिस विभाग में सामान्यतः अनुभव को सबसे बड़ी पूंजी माना जाता है। कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, विवेचना और संवेदनशील मामलों के निस्तारण में अनुभवी अधिकारियों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में वर्षों से इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के रहते हुए नए और अपेक्षाकृत कम अनुभवी दरोगाओं को महत्वपूर्ण थानों की कमान सौंपे जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।
जनपद में यह भी चर्चा है कि जिन थानों और कोतवाली में लंबे समय से परंपरागत रूप से इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तैनाती होती रही है, वहां भी अब नए दरोगाओं को प्रभारी बनाया जा रहा है। इससे पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और तैनाती नीति को लेकर बहस छिड़ गई है।

विश्व रिकॉर्ड अभियान में सहभागिता कर जिला फर्रुखाबाद का नाम किया गौरवान्वित

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फर्रुखाबाद । जनपद के कस्बा कमलागंज , शेखपुर रुस्तमपुर के निवासी युवा साहित्यकार एवं कवि जगमोहन गौतम “मुसाफ़िर” ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ऑनलाइन योग अभियान में सक्रिय सहभागिता कर जनपद का गौरव बढ़ाया है। 14 से 21 जून तक आयोजित इस विशेष अभियान में देश-विदेश के 1.36 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया।
इस अभियान का आयोजन का उद्देश्य योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ना था। अभियान में उल्लेखनीय सहभागिता के लिए कवि जगमोहन गौतम “मुसाफ़िर” को 21 जून 2026 को आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक सोच का भी आधार है। उन्होंने सभी लोगों से नियमित योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। जनपद के कस्बा कमलागंज, शेखपुर रुस्तमपुर के निवासी कवि जगमोहन गौतम “मुसाफ़िर” साहित्य, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी निरंतर सक्रिय रहते हैं।

अलम के जुलूस में गूंजीं या हुसैन कुछ सदायें, हुआ मातम

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फर्रुखाबाद। शहर के मुहल्ला बहादुरगंज अस्तबल तराई स्थित इमामबाबाड़े से दिलदार दिलदार हुसैन की सरपरस्ती से सोमवार को सुबह अलम का जुलूस निकाला गया ।
मातमी धुनों के साथ व बैंड बाजों की धुनो के साथ जो वापसी में बहादुरगंजअस्तवल तराई स्थित इमामबाड़े पर जाकर संपन्न हुआ। हजरत इमाम हुसैन की नियाज दिलाई गई ।छोटे-छोटे बच्चों से लेकर नौजवान युवक हाथों में अलम लेकर नारे लगाते लगाते रहे।
जुलूस नग्गर के मोहल्ला दीवान मुबारिक हाता दाऊद खां गढ़ी मुकीम खां हाता मझले खां , शमशेर खानी कटरा बक्शी , रकाबगंज खुर्द तलैया साहबजादगान , सखावत हुसैन ,हाता रोशन खां चिलपुरा शेख इनायत अली , मौलवी बदन खां ,बजरिया चौकी → तकिया नसरत शाह भाऊटोला रेलवे रोड सिल्वर साइन टॉकीज के सामने गढ़ी कोहना ,सुनहरी मस्जिद ,घेर शामू खां, जिला स्कूल , इस्माइलगंज सानी ,मदारवाड़ी → तलैया फजल इमाम , बूरावाली गली, घुमना , लाल दरवाजा , मन्नीगंज, खटकपुरा, जर्दा घेर, लिंजीगंज अस्पताल, छावनी अंगूरी बाग ,फूल बाग, साहबगंज चौराहा, नाला मछरट्टा, मनिहारी, बंगशपुरा, छोटा बंगशपुरा ,घोड़ा नखास,नखास चौकी गढ़ी अब्दुल मजीद खां दरगाह बाबा साहब खरंजरा , बीबी साहब ,खैराती खा, चीनाग्रान, पक्का पुल चौराहा तिकोना, चौक, मोहल्ला सूफी खां,दरगाह बड़े पीर साहब झंडा तल्ला में घूमा। बड़ी तादाद में अकीदत मंदों ने जुलूस में भागीदारी की।

संपादकीय: पश्चिमी यूपी में नई राजनीतिक बिसात, क्या विकास और सामाजिक संतुलन से बनेगा भाजपा का विजय मार्ग?

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शरद कटियार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमेशा से सत्ता की दिशा तय करने वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। यहां की सामाजिक संरचना, जातीय समीकरण, किसान राजनीति, धार्मिक ध्रुवीकरण और शहरीकरण का प्रभाव प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में अलग और अधिक व्यापक दिखाई देता है। यही कारण है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते हैं, राजनीतिक दलों की गतिविधियां इस क्षेत्र में बढ़ने लगती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अलीगढ़ दौरा और विकास परियोजनाओं की सौगात को भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी अच्छी तरह जानती है कि 2027 के विधानसभा चुनाव का रास्ता पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। वर्ष 2014, 2017, 2019 और 2022 के चुनावों में भाजपा ने जिस सामाजिक और राजनीतिक समीकरण के आधार पर सफलता प्राप्त की, उसे बनाए रखना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए अब पार्टी केवल पारंपरिक समर्थक वर्गों पर निर्भर रहने के बजाय नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रही है।

अलीगढ़ में मुख्यमंत्री की जनसभा को केवल एक सरकारी कार्यक्रम मानना राजनीतिक दृष्टि से अधूरा विश्लेषण होगा। विकास परियोजनाओं की घोषणा निश्चित रूप से जनता को संदेश देने का माध्यम है, लेकिन इसके पीछे राजनीतिक गणित भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि प्रदेश में विकास की गति जारी है और सरकार केवल घोषणाएं नहीं बल्कि धरातल पर परिणाम देने का प्रयास कर रही है।

पश्चिमी यूपी में सामाजिक समीकरणों का महत्व किसी से छिपा नहीं है। यहां हर चुनाव में जातीय और सामुदायिक संतुलन निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में भाजपा की रणनीति केवल विकास तक सीमित नहीं दिखाई देती, बल्कि विभिन्न सामाजिक वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश भी साफ नजर आती है। पार्टी संगठन लगातार बूथ स्तर तक अपनी पहुंच मजबूत करने और लाभार्थी वर्गों को राजनीतिक समर्थन में बदलने की दिशा में काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जोड़ी भाजपा की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत मानी जाती है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, कानून-व्यवस्था के मुद्दे और बुनियादी ढांचे में हुए निवेश को भाजपा चुनावी विमर्श का केंद्र बनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है कि सड़क, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, निवेश और रोजगार जैसे मुद्दे मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि भाजपा के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। विपक्ष सामाजिक न्याय, बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय असंतोष जैसे मुद्दों को उभारने का प्रयास करेगा। पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन की स्मृतियां अभी पूरी तरह धुंधली नहीं हुई हैं और कई क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर नाराजगी भी मौजूद है। ऐसे में भाजपा को केवल विकास के दावे ही नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं पर भी खरा उतरना होगा।

अलीगढ़ की जनसभा और उसके बाद होने वाले राजनीतिक कार्यक्रम इस बात का संकेत हैं कि भाजपा ने चुनावी तैयारियों का पहला चरण शुरू कर दिया है। आने वाले महीनों में विकास योजनाओं, सामाजिक समीकरणों और संगठनात्मक मजबूती के जरिए पार्टी अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास करेगी।

अब देखने वाली बात यह होगी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता विकास, सुशासन और राजनीतिक संदेशों के इस मिश्रण को किस रूप में स्वीकार करती है। क्योंकि इतिहास गवाह है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता अक्सर पश्चिमी यूपी की जनता ही तय करती है।

अमित शाह का महा-मंथन, यूपी चुनाव के बाद बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा

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भाजपा चुनावी नहीं अगले राजनैतिक नये युग की तैयारी मे
– थकी भाजपा से नई भाजपा की ओर पार्टी
– अमित शाह का महा-मंथन, यूपी चुनाव के बाद बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा
– विधानसभा चुनाव 2027 मे 300 का टारगेट तय!
– कटेंगी कई हवाई नेताओं की टिकट मिलेगा युवा शक्ति और बेदाग चेहरों को मौका

शरद कटियार

नई दिल्ली/लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के भीतर इन दिनों जो सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया चल रही है, वह केवल चुनाव जीतने की तैयारी नहीं, बल्कि अगले एक दशक की राजनीतिक संरचना को गढ़ने की कवायद मानी जा रही है। इस पूरी रणनीति के केंद्र में केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के सबसे प्रभावशाली चुनावी रणनीतिकार अमित शाह हैं। पार्टी सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा है कि भाजपा अब “थकी हुई भाजपा” से “कड़ी और अनुशासित भाजपा” नई भाजपा की ओर बढ़ रही है, जहां संगठन, नेतृत्व और चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

पिछले दो वर्षों में भाजपा ने कई राज्यों में टिकट वितरण की अपनी परंपरागत शैली बदली है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल में पार्टी ने अनेक वरिष्ठ नेताओं के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया। कई सांसदों और विधायकों को चुनाव मैदान से हटाकर संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गईं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह केवल चुनावी प्रयोग नहीं, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन की लंबी रणनीति का हिस्सा है।

उत्तर प्रदेश इस रणनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जा रहा है। देश की 403 विधानसभा सीटों वाले सबसे बड़े राज्य में भाजपा ने 2027 के लिए 300 सीटों से अधिक का आंतरिक लक्ष्य तय किया है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि यदि उत्तर प्रदेश में मजबूत जनादेश मिलता है तो उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर बड़े राजनीतिक और संवैधानिक सुधारों का रास्ता और आसान हो सकता है। और अगले चरण वन नेशन वन इलेक्शन जैसे बड़े फैसलों पर काम होगा।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी जनगणना के बाद फरवरी 2027 तक परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया तेज होगी । यदि ऐसा होता है तो लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में व्यापक बदलाव भी तय है । उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना लंबे समय से व्यक्त की जाती रही है। इसके साथ ही महिला आरक्षण कानून के पूर्ण क्रियान्वयन की दिशा में भी तेजी से फैसला हो जायेगा । ऐसे में वर्तमान विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक संरचना और चुनावी समीकरण दोनों बदलेंगे ।

भाजपा के भीतर यह भी तय माना जा रहा है कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” का विचार अभी समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि पार्टी इस विषय पर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती, यें उत्तर प्रदेश मे विधानसभा चुनाव पूरा होने के तुरंत बाद शुरू ही नहीं अपने अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का आकलन है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद यदि राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस दिशा में निर्णायक पहल देखने को मिल सकती है।

अमित शाह की कार्यशैली को समझने वाले बताते हैं कि उनकी राजनीति केवल चुनाव तक सीमित नहीं होती। 2014 के बाद भाजपा ने जिस प्रकार बूथ प्रबंधन, सामाजिक विस्तार और संगठनात्मक अनुशासन पर काम किया, उसमें शाह की रणनीति निर्णायक रही। आज भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती है और उसके पास करोड़ों सदस्य तथा लाखों सक्रिय कार्यकर्ता हैं। यह संरचना अचानक नहीं बनी, बल्कि वर्षों की संगठनात्मक योजना का परिणाम है।

पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम, महाराष्ट्र में संगठनात्मक पुनर्गठन, गुजरात मॉडल का विस्तार और उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ती चुनावी सक्रियता इस बात के संकेत माने जा रहे हैं कि भाजपा केवल अगले चुनाव की नहीं, बल्कि अगले राजनीतिक युग की तैयारी कर रही है।

हालांकि विपक्ष इस रणनीति को सत्ता के केंद्रीकरण के रूप में देखता है, लेकिन भाजपा समर्थक इसे प्रशासनिक स्थिरता और दीर्घकालिक राजनीतिक दृष्टि का हिस्सा बताते हैं। फिलहाल इतना तय है कि अमित शाह के नेतृत्व में चल रहा यह राजनीतिक मंथन केवल उम्मीदवारों के चयन तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में संगठन, सामाजिक समीकरण, संवैधानिक सुधार और चुनावी संरचना तक के सवाल शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश का चुनाव इस पूरी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। यदि भाजपा यहां अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य के करीब पहुंचती है तो देश की राजनीति में बड़े बदलावों की चर्चा और तेज हो सकती है। आने वाले महीनों में अमित शाह की रणनीति केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय राजनीतिक परिदृश्य की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।