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Sunday, April 26, 2026
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झारखंड में जॉइन्ट ऑपरेशन में पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी, US मेड पिस्टल के साथ 3 अपराधी गिरफ्तार

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देवघर: यूपी के देवघर जिले में एटीएस झारखंड (ATS Jharkhand) और देवघर पुलिस (Deoghar Police) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान US मेड पिस्टल समेत अवैध हथियार और अन्य सामान बरामद किए गए। झारखंड के देवघर जिले में बेहतर पुलिस रिसर्च का उदाहरण पेश करते हुए एटीएस झारखंड और देवघर पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी सफलता हासिल की है।

24 अप्रैल 2026 को देवघर नगर थाना कांड संख्या 170/26 के तहत की गई कार्रवाई में तीन कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। देवघर में (ATS) ने गुप्त सूचना पर कार्रवाई कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। तीनों के पास से दो पिस्तौल (एक अमेरिकी निर्मित) और सात कारतूस बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपी बिहार-झारखंड में सक्रिय थे और कई मामलों में वांछित थे।

एटीएस ने झारखंड के देवघर जिले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से दो पिस्तौल और सात जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं, जिनमें से एक पिस्तौल अमेरिका में निर्मित बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में अजीत कुमार पांडेय उर्फ अजीत कुमार मिश्रा, पंकज कुमार सिंह और सोनू कुमार सिंह शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई शुक्रवार को टाउन थाना क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध अवैध हथियारों के साथ इलाके में मौजूद हैं जिसके बाद एटीएस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर तीनों आरोपियों को दबोच लिया।

देवघर के पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों के पास से अवैध हथियारों का जखीरा बरामद हुआ है। उन्होंने कहा कि आरोपियों के पास से मिली पिस्तौलों में एक विदेशी निर्मित है, जो इस मामले को और गंभीर बनाता है।

एटीएस के एसपी राजकुमार मेहता के अनुसार गिरफ्तार आरोपी बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों में सक्रिय थे। उन्होंने बताया कि दो आरोपी देवघर के हैं, जबकि तीसरा आरोपी बिहार के मुंगेर जिले से जुड़ा हुआ है। इन सभी के खिलाफ मुंगेर, जमुई, देवघर और दुमका समेत कई स्थानों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि मुंगेर का रहने वाला परवेज नामक व्यक्ति इन आरोपियों को हथियार सप्लाई करता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि अवैध हथियारों की सप्लाई चेन का पता लगाया जा सके और इसमें शामिल अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जा सके। फिलहाल तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

छापेमारी के दौरान अजीत पांडेय के घर से एक देसी पिस्टल (मेड इन यूएसए 99 अंकित), 7.65 एमएम की तीन जिंदा गोलियां, दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। वहीं पंकज कुमार सिंह के पास से एक देशी कट्टा और कंपनी का कीपैड फोन और सोनू कुमार सिंह के पास से एक मोबाइल फोन जब्त किया गया।

 

अनाथ गोवंश की दुर्दशा पर डीएम का सर्जिकल स्ट्राइक

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मैडम लाठर ऑन ग्राउंड, लापरवाही पर सीधा वार, सिस्टम से खिलवाड़ बर्दाश्त नही

मुख्यमंत्री की व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की मुहिम में जुटीं डीएम

=सकबाई कान्हा गौशाला में छापा, रजिस्टर मिले गायव
=सीसीटीवी मिले बंद, ईओ नदारद
=खफा डीएम ने वेतन रोकने के दिए आदेश
=महीनों से कोई देखने ही नही गया था मुख्यमंत्री का गोवंश

यूथ इंडिया संवाददाता

फर्रुखाबाद/मोहम्मदाबाद। महीनों से उपेक्षा झेल रहे गोवंश की हालत ने आखिरकार प्रशासन को झकझोर दिया और नवागंतुक जिलाधिकारी डा० अंकुर लाठर ने रविवार घनघोर गर्मी और धूप की परवाह किये बगैर भरी दोपहर सकबाई स्थित कान्हा गोशाला पर अचानक धाबा बोलकर सिस्टम की परतें खोल दीं। निरीक्षण में रजिस्टर गायव मिले, सीसीटीवी कैमरें बंद मिले और जिम्मेदार मौके से फरार भी मिले।

गोशाला में कागजों पर ४६१ गोवंश दर्ज हैं लेकिन व्यवस्था विखरी मिली। स्टाक, टैगिंग, मेडिकल, वैक्सीनेशन एक भी जरूरी रजिस्टर मौके पर उपलब्ध नही मिले। रिकॉर्ड की परदर्शिता पर सीधा सवाल दागते हुए डीएम ने जमकर लताड़ लगाई। उनका गुस्सा और तब सातवें आसमान पर पहुंच गया जब यहां लगे सीसीटीवी कैमरे भी बंद मिले और मॉनीटरिंग पूरी तरह शून्य दिखी।

यह सब उस समय जब गोवंश संरक्षण सरकार और खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में है, जहां पूर्व के जिम्मेदारों के द्वारा आंखे बंद कर लीं गई थी। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी निरीक्षण के दौरान गायव मिले। डीएम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल कारण बताओ नोटिस और वेतन रोकने के निर्देश दिये।

मौके पर मौजूद सहायक अभियंता भी ठोस जानकारी देने में फेल रहे, उनके खिलाफ भी प्रतिकूल प्रविष्टि और वेतन रोकने की कार्यवाही तय हुई। जमीनी में हालात में भी कई खामियां उजागर हुईं, १५ केयर टेकर में सिर्फ पानी व्यवस्था अधूरी, दो टंकियां निर्माणाधीन। हांलाकि कर्मचारियों ने वेशर्मी दिखाते हुए दावा किया कि दो समय भूसा और करीब ४० कुन्तल हरा चारा दिया जा रहा है। लेकिन व्यवस्थाओं के हालात ने पोल खोलते देर नही लगाई।

डीएम के कडे तेवर देख अन्य गौशालाओं में भी अलर्ट

मैडम लाठर ऑन ग्राउंड और निरीक्षण में दिखी सख्ती को देख अफसरों में रविवार को हडक़ंप मच गया। जिसके चलते जिले की अन्य बदहाल गौशालाओं में भी नोडल अफसरों की सक्रियता बढऩे की चर्चाएं आम होने लगीं। डीएम ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री के फरमान से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहींं।

डीएम ने मौके पर ही जारी किया सख्त फरमान

फर्रुखाबाद। मैडम लाठर यानि जिलाधिकारी डा० अंकुर लाठर ने मौके पर ही मौजूद रहते ड्यूटी सिस्टम दुरूस्त करने रजिस्टर अपडेट रखने, सीसीटीवी कैमरे तत्काल चालू करने, चारा और पानी की व्यवस्था को पुख्ता करने, गोवंश आश्रय परिसर में वृक्षा रोपण कर छाया सुनिश्चित करने का सख्त फरमान जारी किया। साथ ही साथ चेतावनी दी कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नही होगी। अगली बार जिम्मेदारों पर सीधी कार्यवाही होगी।

जिलाधिकारी का यह औचक निरीक्षण सिर्फ एक कार्यवाही नहीं बल्कि जिले की गौशालाओं में जमी लापरवाही के खिलाफ सीधा और सख्त संदेश है। लंबे समय से अनदेखी झेल रहे गोवंश की हालत पर प्रशासन का कड़ा रूख यह संकेत देता है कि अब पूर्व की तरह कागजी खानापूर्ति नही होगी। जमीन पर सुधार दिखाना होगा। डीएम ने साफ कहा गौशाला नही संभली तो कुर्सी नही बचेगी।

देश में लू का रेड अलर्ट: एल नीनो के असर से 45°C पार तापमान, मई में खतरा और बढ़ेगा

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– आंकड़े दे रहे बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली। देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और हालात अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हैं। कई राज्यों में तापमान 44°C से 47°C के बीच दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मई-जून में यह और बढ़ सकता है, क्योंकि इस बार ‘एल नीनो’ प्रभाव सक्रिय है।

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सामान्य से 1.5°C से 2°C अधिक तापमान रिकॉर्ड किया जा रहा है। बुंदेलखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार 5–10 दिन तक हीटवेव की स्थिति बनी हुई है। कुछ इलाकों में रात का तापमान भी 30°C से ऊपर रह रहा है, जिससे राहत नहीं मिल रही।

विशेषज्ञों के अनुसार ‘एल नीनो’ के कारण इस साल मानसून प्रभावित हो सकता है। सामान्य स्थिति में जून से सितंबर के बीच भारत में करीब 87% वार्षिक वर्षा होती है, लेकिन एल नीनो वर्षों में यह 10–20% तक कम हो जाती है। इसका मतलब है कि जहां बारिश से राहत मिलनी चाहिए, वहां भी गर्मी का असर बना रहेगा।

स्वास्थ्य विभाग के अनुमान बताते हैं कि हीटवेव के दौरान डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामलों में 25–30% तक बढ़ोतरी होती है। पिछले वर्षों में हीटवेव के कारण देशभर में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को होता है।

सबसे खतरनाक समय सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक माना जा रहा है, जब सूरज की किरणें सीधे शरीर पर असर डालती हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस समय घर से बाहर निकलने से बचें और हर घंटे पानी पीते रहें।
हीट स्ट्रोक के लक्षणों में तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, बेहोशी और पसीना बंद होना शामिल है। ऐसे मामलों में तुरंत ठंडक देकर अस्पताल ले जाना जरूरी है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति केवल मौसम की नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का संकेत है। लगातार बढ़ती गर्मी, घटती बारिश और बदलते मौसम पैटर्न आने वाले वर्षों में और बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

सीतापुर में सड़क हादसा, ट्रक-बाइक की टक्कर में तीन लोगों की मौत, ट्रक चालक गाड़ी छोड़कर फरार

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सीतापुर: यूपी के सीतापुर (Sitapur) में रविवार सुबह एक शादी समारोह से घर लौटते समय एक भीषण सड़क हादसे (road accident) में एक मां और उसके बेटे समेत तीन लोगों की जान चली गई। यह घटना कोटवाली देहात पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत सीतापुर-गोला सड़क पर अंगरासी मोड़ के पास हुई। इस हादसे की खबर पुलिस को दी गई। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, ट्रक को जब्त किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, रामकोट के अर्थाना निवासी हिमांशु पांडे (30) अपनी मां रेखा (50) और सुनीता (45) के साथ एक शादी में शामिल होने के बाद मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। जैसे ही वे अंगरासी मोड़ पर पहुंचे, पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि तीनों सवार सड़क पर गिर पड़े। हिमांशु और उनकी मां रेखा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सुनीता गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस दुर्घटना से इलाके में दहशत फैल गई और जब आसपास के लोग इकट्ठा होने लगे, तो ट्रक चालक गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, ट्रक को जब्त किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाने के अधिकारी ने बताया कि वाहन के पंजीकरण विवरण का उपयोग करके फरार चालक का पता लगाने के प्रयास जारी हैं। औपचारिक शिकायत प्राप्त होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एक्शन में AAP! बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए सभापति को भेजी एप्लीकेशन

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नई दिल्ली: राजनीति में कब पासा पलट जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे घमासान ने देश की सियासत को गरमा दिया है। आम आदमी पार्टी में Raghav Chaddha की अगुवाई में हुई बगावत ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। 7 राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद केजरीवाल ने इसे गंभीर चुनौती के रूप में लिया है। पार्टी अब राज्यसभा चेयरमैन और देश के उपराष्ट्रपति से शिकायत कर बागियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है।

पार्टी ने सभापति से मांग की है कि जल्द से जल्द कार्यवाही करके न्यायपूर्ण फैसला दें। AAP के ये सातों सांसद हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा के सभापति से 7 सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग की है। इसे लेकर AAP ने सभापति और देश के उपराष्ट्रपति से शिकायत की है।

दरअसल, 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी से बगावत कर बीजेपी में शामिल हुए 7 सांसदों के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आम आदमी पार्टी ने सातों बागी सांसदों के खिलाफ सदस्यता रद्द करने की शिकायत राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को भेज दी है।

AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह ली है। इनमें वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये सांसद कानून के तहत अयोग्य ठहराए जा सकते हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से 7 सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग की है। AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति को एक शिकायत भेजी है जिसमें संविधान की 10 वी अनुसूची के मुताबिक सातों सदस्यों की सदस्यता खत्म करने के लिए अनुरोध किया है।

संजय सिंह ने कहा कि दसवीं अनुसूची (एंटी-डिफेक्शन कानून) के तहत ऐसे दलबदल मान्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि लीडरशिप को दलबदल की आशंका थी और आखिरी वक्त में कुछ सांसदों को रोकने की कोशिश भी की गई थी लेकिन पार्टी नेताओं की काफी कोशिशों के बाद भी सातों राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए।

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य ने कहा कि ऐसे सांसद अयोग्य ठहराए जा सकते हैं। सिब्बल के मुताबिक, संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत सांसदों का अलग होना और किसी दूसरी पार्टी में मिलना सिर्फ संख्या के खेल पर निर्भर नहीं है। इसके लिए पहले मूल राजनीतिक दल के स्तर पर विलय का औपचारिक प्रस्ताव होना अनिवार्य है। यही कानूनी पेच अब AAP के लिए उम्मीद का रास्ता बन सकता है।

परवरिश की जंग में हार मानती जिंदगी

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(मनोज कुमार अग्रवाल-विनायक फीचर्स)

आजकल अधिकांश एकल परिवार हैं उनमे भी न्यूक्लियर यानि एक या दो बच्चे इस स्थिति में कुछ पिता अपने बच्चों से अधिक अपेक्षा बना लेते हैं और उन का कैरियर संवारने के लिए बचपन से ही इस तरह की सख्ती करते हैं जो बच्चों को भीतर तक मर्माहत कर देती है उनका बचपन छीन लेती है नतीजा यह निकलता है कि कई बार बच्चे अभिभावकों के दबाव के चलते मानसिक बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं उनका स्वाभाविक विकास रुक जाता है और कई बार वह बागी होकर एंग्री यंगमेन बन जाते हैं और कुछ अधिक संवेदनशील बच्चे इस कदर टूट जाते हैं कि वह आत्मघाती कदम उठा कर अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर देते हैं जैसे कि कानपुर के एक युवा वकील ने किया जब पिता के कर्कश अपमान जनक व्यवहार के साथ जद्दोजहद में युवा वकील इतना अधिक टूट गया कि उसने भरी कचहरी में पांचवी मंजिल से छलांग लगा कर जीवन को अलविदा कह दिया।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में कानपुर कचहरी में अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। प्रियांशु ने यह आत्मघाती कदम अपने पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव की कथित सख्ती और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर उठाया। मृतक ने आत्महत्या से ठीक पहले व्हाट्सएप पर दो पन्नों का स्टेटस नोट साझा किया था। इस नोट में उन्होंने बचपन की कड़वी यादों और वर्तमान की बंदिशों का विस्तार से जिक्र किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और व्हाट्सएप स्टेटस को जांच का मुख्य आधार बनाया है।
युवा वकील प्रियांशु श्रीवास्तव के आत्महत्या मामले ने देश भर में सनसनी मचा दी है। कानपुर कोर्ट की पांचवी मंजिल से छलांग लगाने वाले युवा वकील का सुसाइड नोट इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, गुरुवार को दोपहर बाद युवा वकील ने कोर्ट भवन की पांचवी मंदिर से छलांग लगा दी थी। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इससे पहले उसने सोशल मीडिया एकाउंट पर स्टेटस पर दो पेज का सुसाइड नोट अपलोड किया। इसमें उसने अपने पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के जुल्म की इंतेहा को दर्ज किया।
प्रियांशु श्रीवास्तव कानपुर के बर्रा आठ वरुण विहार का रहने वाला था। उसके पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी कानपुर कोर्ट में वकील थे। 23 वर्षीय प्रियांशु ने वर्ष 2025 में डीसी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह अपने पिता के साथ ही कानपुर कोर्ट में वकालत करने लगा। गुरुवार दोपहर 12:05 बजे उसने सुसाइड नोट लिखा। इसके तीन घंटे बाद कोर्ट भवन की पांचवी मंजिल से छलांग लगा दी। जिस कानपुर कोर्ट भवन में यह घटना घटी,वहां कोर्ट भवन के पीछे की ओर खिड़कियां बनी हुई हैं। उनके चारों तरफ जाली लगाई है। यहां एक सिरे पर जाली नहीं है। प्रियांशु वहीं जाकर ऊपर बैठ गया था। करीब 10 मिनट तक वहीं बैठा रहा। इसके बाद वह पीछे की तरफ कूद गया। उसके नीचे गिरते ही तेज आवाज ने हर किसी को चौंका दिया। पांचवी मंजिल पर मौजूद वकील और अन्य लोग हैरान रह गए। कोर्ट भवन में तेज धमाके के साथ आवाज हुई तो वकील नीचे की ओर भागे। प्रियांशु जहां गिरा वहां कोई आता-जाता नहीं है। उधर जाने का रास्ता भी बंद रहता है। बार एंड लॉयर्स के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। चैनल को खुलवाया गया। इसके बाद सभी मौके पर पहुंचे। कुछ देर बाद वहां जिला जज अनमोल पाल भी न्यायिक अधिकारियों के साथ पहुंच गए। पुलिस और फोरेंसिक टीम भी घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची। घटनास्थल से सबूत जुटाए गए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट में युवा वकील ने पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
युवा वकील ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसके ऊपर 5-6 साल की उम्र से ही जुल्म किया जा रहा है। मैंगो जूस वाली कहानी भी साझा की। वकील ने लिखा कि बात-बात पर पिता मेरी पिटाई करते थे। हमेशा मेरी बुराई ही होती थी। हमेशा नीचा दिखाया जाता है। इसलिए अब इस जिंदगी को खत्म कर रहा हूं। पिता के खिलाफ आक्रोश जताने वाले युवा वकील ने लिखा, ‘लव यू मम्मी…’।
युवा वकील प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में 6 साल की उम्र में हुए अत्याचार की कहानी भी साझा की है। इसमें उसने लिखा कि मुझे यह बताने में काफी शर्म महसूस हो रही है। उसने लिखा कि 6 साल के उम्र में फ्रिज में रखे आम के जूस को पीने के चलते मेरे पिता ने मुझे निर्वस्त्र कर घर के बाहर भगा दिया था। हमारे प्रति उनका ऐसा रवैया हमेशा बना रहा। वह हमेशा मुझे बेइज्जत करते रहते थे। वकील ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं मानता हूं कि हर माता-पिता को शुरू से ही सख्त रवैया अपनाया जाना चाहिए। इससे बच्चों का भविष्य संवर सकता है लेकिन अगर आप अपने बच्चों पर इतनी ज्यादा सख्ती करेंगे तो बच्चों को हर पल घुटन महसूस होने लगेगी। परीक्षा के एक दिन पहले अगर सिलेबस पूरा तैयार नहीं है तो पीटने लगते थे। हर समय, हर मिनट नजर रखते थे। एक-एक मिनट का हिसाब लेते थे। यह मानसिक प्रताड़ना ही है। इस प्रकार के टॉर्चर से मैं अब अधिक समय तक नहीं जी सकता हूं। इसलिए, मैंने यह कदम उठाने का निर्णय लिया।
प्रियांशु ने सुसाइड नोट में दावा किया कि बचपन में मारपीट और घर से भगाए जाने की घटना के बाद भी पिता नहीं थमे। बड़ा होने पर भी पिता उसके साथ अलग व्यवहार करते रहे। लगातार उसे मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पिता बार-बार उसे बेइज्जत करते थे। पीटने लगते थे। इसने प्रियांशु को अंदर तक तोड़ दिया। वह मानसिक तौर पर टूट गया था। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा भी कि मेरा यह निवेदन है कि मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं। भगवान करे ऐसा पिता किसी को भी न मिले। इससे पिता के प्रति उसके मन की भावनाओं को समझा जा सकता है।
यह दुखद घटना उन अभिभावकों की आंखे खोलने के लिए सबक है जो अपने सपनों को जबरन अपने बच्चों पर थोपते है और जरा जरा सी बात पर दूसरे लोगों के सामने उन्हें अपमानित लहजे से प्रताड़ित करते हैं। आज इक्कीसवीं सदी का दौर है इसमे उन्नीसवीं बीसवीं सदी का अशिक्षित मानसिक शारीरिक प्रताड़ना देने वाला दौर नही चल सकता। आज के किशोर युवा बहुत संवेदनशील है वह थोड़े से दुर्व्यवहार पर ही बिखर सकते हैं,टूट सकते हैं। इस लिए बालकों,किशोरों और नवयुवाओं के साथ सभ्यता से मित्रवत मार्गदर्शन करना चाहिए न कि यातना भरा दुर्व्यवहार। आज प्रियांशु का पिता वह अभागा पिता है जिसने खुद अपने गलत व्यवहार के चलते अपने भविष्य को मौत के मुंह में जाने के लिए मजबूर कर दिया। बेशक उनकी सोच बेटे को बेहतर कैरियर देने और समाज में सफल इंसान बनाने की रही होगी लेकिन यकीनन उनका तरीका अक्षम्य और अमानवीयता भरा बर्बर रहा जिसका दर्द लेकर एक होनहार युवा ने मौत को गले लगा लिया और पिता की बुढ़ापे की लाठी खत्म हो गई। (विनायक फीचर्स)