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Sunday, February 22, 2026
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फर्रुखाबाद में विकास की नई रफ्तार: गंगा एक्सप्रेसवे लिंक रोड के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू

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अपर जिला अधिकारी अरुण कुमार सिंह की मौजूदगी में हुए बैनामे, पांच किसानों ने किया स्वेच्छा से भूमि हस्तांतरण

अमृतपुर, फर्रुखाबाद: Farrukhabad जनपद में बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे लिंक रोड परियोजना (Ganga Expressway Link Road Project) को लेकर प्रशासन ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है। जिले को सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के उद्देश्य से प्रस्तावित लिंक रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया विधिवत आरंभ हो गई है। रविवार को अपर जिला अधिकारी अरुण कुमार सिंह की निगरानी में पांच किसानों ने अपनी भूमि का बैनामा कर विकास कार्य में सहभागिता निभाई।

यह महत्वपूर्ण लिंक मार्ग कंचनपुर सबलपुर से प्रारंभ होकर बिलालपुर तुर्कगाटा होते हुए रूपापुर के पास गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इस सड़क के निर्माण से न केवल फर्रुखाबाद की कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी, बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों को भी सीधा लाभ मिलेगा। किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए यह परियोजना नए अवसरों के द्वार खोलने वाली मानी जा रही है।अपर जिला अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचकर प्रस्तावित मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया और संबंधित राजस्व एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध ढंग से संपन्न कराई जाएगी।

किसानों से संवाद करते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि शासन की नीति के अनुरूप सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा तथा किसी भी किसान के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। प्रशासन सहमति के आधार पर भूमि अधिग्रहण को आगे बढ़ाने के पक्ष में है, ताकि परियोजना में किसी प्रकार का अवरोध न आए। रविवार को गाजीपुर के तीन तथा रामपुर जोगराजपुर के दो किसानों समेत कुल पांच किसानों ने बैनामा किया।

क्षेत्रीय लेखपाल रवींद्र वर्मा ने बताया कि अब तक 19 किसान अपनी भूमि का बैनामा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसानों में विकास को लेकर सकारात्मक रुख देखा जा रहा है।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कुल 12 गांवों के लगभग 3500 लोगों की भूमि इस लिंक एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जानी है। आने वाले दिनों में अन्य किसानों से संवाद कर सहमति के आधार पर बैनामे की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी।

इस लिंक रोड के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों से मुख्य एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान हो जाएगी। कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा, व्यापारिक गतिविधियों में तेजी और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना जताई जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क से निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

ग्रामीणों में परियोजना को लेकर उत्साह है। उनका मानना है कि यदि कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ तो क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।इस अवसर पर तहसीलदार शशांक सिंह, लेखपाल पवन यादव तथा क्षेत्रीय लेखपाल रवींद्र वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाली यह लिंक रोड फर्रुखाबाद को विकास की नई दिशा देने वाली परियोजना साबित हो सकती है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जा सके।

शिक्षक भवन के दुरुपयोग को लेकर शिक्षकों में रोष, निजी कार्यक्रमों से अवैध वसूली के आरोप

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फर्रुखाबाद| बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के निकट दशकों पूर्व शिक्षकों द्वारा चंदा एकत्र कर निर्मित शिक्षक भवन को लेकर इन दिनों जनपद में असंतोष का माहौल है। यह भवन मूल रूप से शिक्षकों की समस्याओं पर बैठक, शैक्षिक कार्यक्रमों के आयोजन तथा संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन के उद्देश्य से बनाया गया था, किंतु वर्तमान में इसके उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संगठन के नाम पर कुछ पदाधिकारियों द्वारा भवन पर कब्जा कर लिया गया है। आरोप है कि शिक्षक हितों के लिए निर्मित इस परिसर का उपयोग निजी कार्यक्रमों, बारात ठहराने और अन्य प्राइवेट आयोजनों के लिए किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इन कार्यक्रमों के लिए किराया वसूला जा रहा है, जिसे लेकर शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है।
नाम न छापने की शर्त पर कई शिक्षकों ने बताया कि भवन के उपयोग से संबंधित नियमों को दरकिनार कर अवैध वसूली की जा रही है और प्राप्त धनराशि का कोई पारदर्शी लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया जाता। उनका कहना है कि यह भवन शिक्षकों की सामूहिक संपत्ति है, जिसका निजी लाभ के लिए इस्तेमाल संगठन की मूल भावना के विपरीत है।
बताया गया कि बीते दिन परिसर में एक तिलक समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बाहरी लोगों की भारी भीड़ रही। इस आयोजन के बाद शिक्षकों के बीच चर्चा और तेज हो गई है। कई शिक्षकों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर भवन के उपयोग की स्पष्ट नीति निर्धारित करने की मांग की है।
इस संबंध में सह संयोजक राज किशोर शुक्ला से संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु उनका फोन रिसीव नहीं हो सका। मामले को लेकर संगठन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आठ मोहल्लों में आज बंद रहेगी पानी की सप्लाई, मेंटेनेंस कार्य के चलते 7 हजार कनेक्शन प्रभावित

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फर्रुखाबाद| शहर के फतेहगढ़ क्षेत्र में रविवार को पानी की आपूर्ति बाधित रहेगी। नगर पालिका परिषद द्वारा कंपनी बाग स्थित ओवरफ्लो पाइप को मुख्य सप्लाई लाइन से जोड़ने के लिए आवश्यक मेंटेनेंस कार्य किया जा रहा है। इस कारण पानी की टंकी से होने वाली नियमित जलापूर्ति अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद के अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि फतेहगढ़ जोन में जल व्यवस्था को सुचारु और व्यवस्थित बनाने के लिए यह तकनीकी कार्य कराया जा रहा है। कार्य के दौरान पानी की टंकी से सप्लाई रोकनी पड़ेगी, जिससे आठ मोहल्लों में जलापूर्ति प्रभावित रहेगी।
जिन मोहल्लों में पानी की आपूर्ति बंद रहेगी, उनमें वालटोली, नवदिया, भूसा मंडी, हाथीखाना, बरगदिया घाट, रंगसजान, लमंडी बजाजा और संगत दालमंडी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लगभग 7 हजार घरेलू जल कनेक्शन हैं, जो इस अस्थायी बंदी से प्रभावित होंगे।
अधिशासी अधिकारी ने कहा कि जिन इलाकों में पानी की अधिक समस्या उत्पन्न होगी, वहां नगर पालिका की ओर से टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे आवश्यकतानुसार पानी का संग्रह पहले से कर लें और सहयोग बनाए रखें।
इधर शहर में जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर अन्य स्थानों पर भी समस्याएं बनी हुई हैं। फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ मार्ग पर लेखपुर के पास पाइपलाइन टूटने से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पानी सड़क पर बह रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि काफी समय से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है, लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। इसके अलावा शिव नगर कॉलोनी और कादरी गेट क्षेत्र में भी पाइपलाइन टूटने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
शहरवासियों का कहना है कि एक ओर जहां मेंटेनेंस के नाम पर सप्लाई बंद की जा रही है, वहीं दूसरी ओर टूटी पाइपलाइनों से पानी की बर्बादी रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लोगों ने नगर पालिका से मांग की है कि मेंटेनेंस कार्य के साथ-साथ लीकेज और टूटी पाइपलाइनों की भी तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि जल संकट की समस्या से राहत मिल सके।

ऑफिसर्स क्लब में ‘मेगा विधिक सहायता एवं सेवा शिविर’ का भव्य आयोजन, आमजन को एक ही छत के नीचे मिली विभिन्न योजनाओं की जानकारी और लाभ

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फर्रुखाबाद। रविवार को फतेहगढ़ स्थित ऑफिसर्स क्लब परिसर में जनपद न्यायाधीश, जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी एवं पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की गरिमामय उपस्थिति में ‘मेगा विधिक सहायता एवं सेवा शिविर’ का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर का आयोजन सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समन्वय से किया गया, जिसका उद्देश्य आमजन को न्याय और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश ने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय और अधिकारों की जानकारी पहुंचाना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता, परामर्श एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें।
जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि शासन की मंशा है कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से मिले। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे शिविर में आए लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य जनसेवा है और ऐसे शिविर आमजन और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने कहा कि पुलिस विभाग केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर वर्गों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। साथ ही साइबर अपराध, घरेलू हिंसा और महिला सुरक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी भी दी गई।
शिविर में राजस्व, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, बैंकिंग संस्थान तथा अन्य संबंधित विभागों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए। इन स्टॉलों पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों के आवेदन भी स्वीकार किए गए। कई लोगों को मौके पर ही प्रमाण पत्र, पेंशन स्वीकृति पत्र एवं अन्य दस्तावेज प्रदान किए गए।
इसके अतिरिक्त निःशुल्क विधिक परामर्श, लोक अदालत की जानकारी, विवादों के आपसी सुलह-समझौते के विकल्प, घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद एवं भूमि संबंधी मामलों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के लोगों ने भाग लिया और विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाया।
कार्यक्रम के अंत में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के शिविर आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक न्याय और शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके।

तेज रफ्तार बाइक से गिरी युवती

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सिर में गंभीर चोट लोहिया अस्पताल में भर्ती

फर्रुखाबाद| तेज रफ्तार बाइक से गिरने के कारण 26 वर्षीय युवती गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे तत्काल एंबुलेंस की सहायता से डॉ. राम मनोहर लोहिया जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। घटना के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई और गांव में चिंता का माहौल है।
घायल युवती पूनम, थाना शमशाबाद क्षेत्र के गांव फरीदपुर मंगली की निवासी बताई जा रही है। रविवार को वह अपने चाचा सच्छू के साथ बाइक पर सवार होकर गांव जूना में एक रिश्तेदारी में आयोजित दावत में शामिल होने जा रही थी। परिजनों के अनुसार रास्ते में बाइक की रफ्तार काफी तेज थी। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से पूनम चलती बाइक से नीचे गिर गई।
बताया गया कि गिरने के बाद उसके चाचा को तुरंत इसका अहसास नहीं हुआ और वह लगभग एक किलोमीटर आगे तक निकल गए। जब पीछे मुड़कर देखा और पूनम बाइक पर नजर नहीं आई, तब उन्हें घटना का अंदेशा हुआ। वे तुरंत वापस लौटे तो पूनम को सड़क किनारे घायल अवस्था में पड़ा पाया। उसके सिर से खून बह रहा था और वह अचेत जैसी स्थिति में थी।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए। स्थानीय लोगों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। एंबुलेंस के माध्यम से पूनम को डॉ. राम मनोहर लोहिया जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया।
अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि पूनम के सिर में गंभीर चोट आई है। उसे भर्ती कर निगरानी में रखा गया है और आवश्यक जांचें कराई जा रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार अगले 24 घंटे उसके लिए महत्वपूर्ण हैं।
घटना ने एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों को उजागर कर दिया है। परिजन पूनम के शीघ्र स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं, वहीं पुलिस को भी घटना की सूचना दे दी गई है।

पढ़ने का परिवेश : ज्ञान, चिंतन और व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला

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डॉ विजय गर्ग
मनुष्य के बौद्धिक विकास में पढ़ने की आदत अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन केवल पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है; पढ़ने का परिवेश भी उतना ही आवश्यक है। शांत, प्रेरणादायक और संसाधनों से समृद्ध वातावरण व्यक्ति में जिज्ञासा, एकाग्रता और गहन चिंतन की क्षमता विकसित करता है।

पढ़ने का परिवेश क्या है?

पढ़ने का परिवेश उस वातावरण को कहा जाता है जहाँ व्यक्ति सहजता से पढ़ सके, समझ सके और सीखी हुई बातों पर विचार कर सके। इसमें भौतिक वातावरण, मानसिक स्थिति और सामाजिक सहयोग — तीनों का योगदान होता है।

अच्छा पढ़ने का परिवेश क्यों जरूरी है?

1. एकाग्रता बढ़ाता है – शांत वातावरण ध्यान भटकने से रोकता है।

2. समझने की क्षमता विकसित करता है – व्यवस्थित स्थान और पर्याप्त प्रकाश पढ़ने को आसान बनाते हैं।

3. जिज्ञासा को प्रोत्साहित करता है – पुस्तकों से घिरा वातावरण सीखने की इच्छा जगाता है।

4. आत्म-अनुशासन विकसित करता है – नियमित अध्ययन की आदत बनती है।

 

आदर्श पढ़ने के परिवेश की विशेषताएँ

1. शांत और स्वच्छ स्थान

शोर-शराबे से दूर, साफ और व्यवस्थित जगह पढ़ने के लिए उपयुक्त होती है। स्वच्छता मन को स्थिरता प्रदान करती है।

2. पर्याप्त प्रकाश और हवा

प्राकृतिक प्रकाश सबसे उत्तम होता है। अच्छी रोशनी आँखों पर तनाव कम करती है और ताजी हवा मस्तिष्क को सक्रिय रखती है।

3. उचित बैठने की व्यवस्था

आरामदायक कुर्सी और सही ऊँचाई की मेज शरीर को थकान से बचाती है, जिससे लंबे समय तक पढ़ना संभव होता है।

4. पुस्तकों की उपलब्धता

घर, विद्यालय और पुस्तकालयों में विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध होने से बच्चों और युवाओं की रुचि बढ़ती है।

5. डिजिटल विकर्षणों से दूरी

मोबाइल फोन और अनावश्यक स्क्रीन समय पढ़ाई में बाधा डालते हैं। पढ़ते समय इनसे दूरी बनाए रखना आवश्यक है।

परिवार और विद्यालय की भूमिका

माता-पिता बच्चों को कहानी पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करें।

घर में “पढ़ने का समय” निर्धारित किया जा सकता है।

विद्यालयों में पुस्तकालय संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।

शिक्षक विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के अतिरिक्त पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पढ़ने का वातावरण

ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी हो सकती है, परंतु सामुदायिक पुस्तकालय, विद्यालय पुस्तकालय और मोबाइल पुस्तकालय इस कमी को दूर कर सकते हैं। शहरी क्षेत्रों में संसाधन अधिक होते हैं, लेकिन डिजिटल व्याकुलता एक बड़ी चुनौती बन जाती है।

डिजिटल युग में पढ़ने का परिवेश

ई-पुस्तकें और ऑनलाइन संसाधन ज्ञान का विस्तार कर रहे हैं, परंतु संतुलन आवश्यक है। स्क्रीन और मुद्रित पुस्तकों दोनों का संतुलित उपयोग सर्वोत्तम परिणाम देता है।

निष्कर्ष

पढ़ने का अनुकूल परिवेश व्यक्ति के बौद्धिक और नैतिक विकास की नींव रखता है। यह केवल परीक्षा में सफलता का साधन नहीं, बल्कि जीवन भर सीखते रहने की आदत विकसित करने का माध्यम है। यदि परिवार, विद्यालय और समाज मिलकर पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा दें, तो एक जागरूक, संवेदनशील और ज्ञानसम्पन्न समाज का निर्माण संभव है।

पढ़ने का सही वातावरण केवल किताबों से नहीं बनता — यह सोच, अनुशासन और प्रेरणा से निर्मित होता है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब