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Friday, May 15, 2026
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“बेटिंग ऐप बंद या सिर्फ दिखावा? इंस्टाग्राम की हर तीसरी रील बना रही नए सटोरिए!”

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– “जब हीरो-क्रिकेटर खुद बेच रहे ‘जल्दी अमीर बनने’ का सपना, तो युवाओं को सट्टेबाज़ी से दूर रखने के दावे कितने सच?”

सूर्या अग्निहोत्री
डिप्टी एडिटर यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप
देश में बेटिंग ऐप्स पर कार्रवाई और प्रतिबंध की बातें बड़े जोर-शोर से की गईं। कहा गया कि युवाओं को ऑनलाइन सट्टेबाज़ी के जाल से बचाया जाएगा, मोबाइल स्क्रीन पर फैल रहे इस डिजिटल नशे पर लगाम लगेगी। लेकिन सवाल यह है कि अगर सच में सट्टेबाज़ी रोकनी थी, तो आज भी इंस्टाग्राम खोलते ही हर दूसरी-तीसरी रील में “प्रिडिक्शन लगाओ”, “टीम बनाओ”, “पैसे जीतो” जैसे लालच क्यों परोसे जा रहे हैं?

आज हालात यह हैं कि बच्चा-बच्चा मोबाइल चला रहा है। हर युवा इंस्टाग्राम, रील्स और सोशल मीडिया की दुनिया में घंटों डूबा रहता है। ऐसे में जब उसका पसंदीदा क्रिकेटर, फिल्म स्टार, कॉमेडियन या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर खुलेआम किसी “फैंटेसी”, “प्रिडिक्शन” या “कमाओ लाखों” वाले प्लेटफॉर्म का प्रचार करता दिखाई देता है, तो युवा के मन में लालच पैदा होना स्वाभाविक है। सरकार भले कहे कि बेटिंग ऐप्स बंद हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इनका प्रचार पहले से ज्यादा तेज नजर आता है।

इतना ही नहीं, अब कई ऐसे प्लेटफॉर्म सामने आ गए हैं जो मोबाइल में इंस्टॉल भी नहीं होते। लोग सीधे Chrome या दूसरे ब्राउज़र पर वेबसाइट खोलकर अपनी आईडी बनाते हैं और वहीं पर रुपए लगाकर सट्टेबाज़ी करते हैं। यानी ऐप बंद होने के बावजूद खेल पूरी तरह जारी है, बस तरीका बदल गया है। यही वजह है कि कार्रवाई के दावों के बीच भी ऑनलाइन बेटिंग का जाल लगातार फैलता जा रहा है।

कुछ वेबसाइट्स और प्लेटफॉर्म आज भी “प्रिडिक्शन” के नाम पर रुपए लगवाकर लोगों को जीत का सपना दिखा रहे हैं। हारने वालों की कहानी कोई नहीं दिखाता, लेकिन जीत का झूठा सपना चमकदार विज्ञापनों और सेलिब्रिटीज के चेहरे से बेच दिया जाता है। यही वजह है कि हजारों युवा मेहनत के बजाय आसान पैसे की उम्मीद में इस दलदल की तरफ खिंचते चले जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सट्टेबाज़ी जैसी चीज़ों को रोकना था, तो फिर सोशल मीडिया पर इनके प्रचार पर सख्ती क्यों नहीं? सिर्फ ऐप बंद कर देना और दूसरी तरफ इंस्टाग्राम पर उसी लालच को खुली छूट देना आखिर किस नीति का हिस्सा है? अगर हर दिन नए “सटोरिए” तैयार हो रहे हैं, तो फिर यह प्रतिबंध सिर्फ दिखावा नहीं तो और क्या है?

जब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटीज और ऐसे डिजिटल जाल पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक “बेटिंग ऐप बंद” का दावा सिर्फ कागज़ों और भाषणों तक सीमित नजर आएगा।

मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह संपन्न, प्रतिभाओं को मिला मंच

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लखनऊ: एकेडमिक पब्लिक इंटर कॉलेज, गाजीपुर बलराम फैजुल्लागंज लखनऊ की ओर से आयोजित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट 2026 के मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह का आयोजन विद्यालय परिसर में भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

समारोह के मुख्य अतिथि माननीय विधान परिषद सदस्य डॉ. मुकेश शर्मा रहे, जिन्होंने मेधावी छात्र-छात्राओं को साइकिल, प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की शानदार उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज के छात्र ही देश का उज्ज्वल भविष्य हैं और शिक्षा ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

विद्यालय की छात्रा तस्मिया बानो ने हाईस्कूल परीक्षा में 93.5 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया। उनकी इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार एवं अभिभावकों में खुशी का माहौल देखने को मिला।

कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के प्रबंधक, शिक्षक एवं अभिभावक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। विद्यालय प्रबंधक सी. विनोद पाण्डेय ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।

सम्मान समारोह के अंत में छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कार्यक्रम का सफल समापन किया गया।

फर्रुखाबाद में फर्जी गैंगरेप सिंडिकेट का भंडाफोड, गैंगलीडर शातिर अवधेश मिश्रा की वैपन गिरफ्तार, कई पर पुलिस की रड़ार

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=सरकार और तेजतर्रार आईपीएस एसपी आरती सिंह को बदनाम करने की साजिश का भी पर्दाफाश
=मास्टर माइंड शातिर अवधेश मिश्रा के गैंग का पहला पर्दाफाश
=माफिया अनुपम दुबे के गैंग का कर रहा संचालन
= सात महीने बाद पुलिस का बड़ा प्रहार
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। जनपद में कथित फर्जी गैंगरेप मुकदमों के जरिए ब्लैकमेलिंग, धन उगाही और प्रतिष्ठित लोगों को फंसाने वाले संगठित गिरोह पर आखिरकार पुलिस का शिकंजा कस गया। गुरुवार को थाना जहानगंज पुलिस ने माफिया अनुपम दुबे के बेहद करीबी अवधेश मिश्रा के गैंग की बहुचर्चित विषकन्या मीनू शर्मा को गिरफ्तार कर उस नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दीं, जिसने पिछले कई वर्षों से गैंगरेप जैसे संवेदनशील मामलों को कथित तौर पर उगाही का हथियार बना रखा था।
इस पूरे ऑपरेशन को जिले की पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की अब तक की सबसे बड़ी और संवेदनशील कार्रवाई माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक यह वही मामला है जिसमें पुलिस और शासन को बदनाम करने के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद तक कथित रूप से भ्रामक तथ्य पेश किए गए थे।
पुलिस रिकॉर्ड और शिकायतों के अनुसार गिरफ्तार मीनू शर्मा कथित तौर पर ऐसे गिरोह का चेहरा बन चुकी थी, जो अलग-अलग मामलों में बयान बदलकर प्रतिष्ठित लोगों पर गैंगरेप जैसे गंभीर आरोप लगाता था। बाद में समझौते और दबाव के जरिए कथित उगाही का खेल शुरू होता था। इस पूरे नेटवर्क में कथित तौर पर स्वयंभू कानूनी सलाहकार अवधेश मिश्रा का नाम सामने आया है, जिसे पुलिस जांच में गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। और पत्रकार अजय चौहान की ओर से दर्ज मुकदमे में अवधेश मुख्य आरोपी भी है।
जांच में सामने आया कि कई सम्मानित लोगों को इस नेटवर्क ने निशाना बनाया। इनमें प्रधानाचार्य प्रभात यादव, पत्रकार अजय चौहान, इलाहबाद हाईकोर्ट अधिवक्ता सुमित सक्सेना, जितेंद्र सक्सेना, रामानंद बालिका इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य अमित कठेरिया, सेंट्रल स्कूल के शिक्षक योगेश सहित कई अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन लोगों के खिलाफ बार-बार बयान बदलकर गंभीर मुकदमे दर्ज कराने और फिर समझौते के नाम पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जाती थी।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पत्रकार अजय चौहान ने पुलिस अधीक्षक और शासन को विस्तृत प्रार्थना पत्र देकर पूरे रैकेट की शिकायत की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसपी आरती सिंह ने मामले में एसआईटी गठित कराई गईं थी,जांच के बाद मुकदमा 11 अक्टूबर 2025 को कोतवाली फतेहगढ़ में मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रभारी निरीक्षक रणविजय सिंह ने कार्रवाई करते हुए भोलेपुर-बेवर रोड स्थित अवधेश मिश्रा के ठिकाने पर छापेमारी भी की थी।
सूत्र बताते हैं कि कार्रवाई तेज होते ही गिरोह ने नया खेल शुरू किया। कथित तौर पर हाईकोर्ट में गलत तथ्य पेश कर पुलिस अधीक्षक आरती सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार और जीरो टॉलरेंस नीति को बदनाम करने की कोशिश की गई थी।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि माफिया अनुपम दुबे और उसके गैंग से जुड़े लोगों के इशारे पर यह पूरा सिस्टम सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ तैयार किया गया, ताकि प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, उच्च न्यायालय में प्रस्तुत कुछ तथ्यों और याचिकाओं को लेकर भी जांच एजेंसियां अब गंभीरता से दस्तावेज खंगाल रही हैं। माना जा रहा है कि यह सिर्फ फर्जी मुकदमों का मामला नहीं, बल्कि कानून और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का बड़ा संगठित नेटवर्क है।
सात माह और तीन दिन तक चली विवेचना के बाद थाना जहानगंज प्रभारी निरीक्षक पूनम अवस्थी ने पहली बड़ी गिरफ्तारी कर पूरे जिले में सनसनी फैला दी। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य चेहरों की तलाश में दबिश दे रही है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम जांच के घेरे में आ सकते हैं।

फर्जी मुकदमों के जाल में अभी कई चेहरे बाकी!
सूत्रों के मुताबिक फतेहगढ़ पुलिस और एसआईटी की जांच अब सिर्फ मीनू शर्मा तक सीमित नहीं है। पूरे गिरोह से जुड़ी अन्य कथित “विषकन्याएं”, फर्जी मुकदमों के पैरोकार और पर्दे के पीछे से खेल संचालित करने वाले चेहरों पर भी शासन-प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क के तार केवल फर्रुखाबाद तक सीमित नहीं बल्कि कन्नौज समेत आसपास के जिलों तक फैले हो सकते हैं। कई पुराने मुकदमों, बयान बदलने के पैटर्न, संदिग्ध समझौतों और कथित उगाही से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। पुलिस रडार पर ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने कथित तौर पर महिलाओं का इस्तेमाल कर प्रतिष्ठित लोगों को फंसाने, दबाव बनाने और मोटी रकम वसूलने का संगठित खेल खड़ा किया।

गलियों में बाइक दौड़ाकर पूनम अवस्थी ने बिछाया जाल, आखिर दबोच ली ‘विषकन्या’!
बहुचर्चित फर्जी गैंगरेप सिंडिकेट मामले में थाना जहानगंज प्रभारी निरीक्षक पूनम अवस्थी ने अपनी सक्रियता और जुझारू पुलिसिंग का बड़ा उदाहरण पेश किया। सूत्रों के मुताबिक मीनू शर्मा की गिरफ्तारी कोई सामान्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसके लिए कई दिनों तक लगातार खुफिया निगरानी और दबिश अभियान चलाया गया। बताया जा रहा है कि प्रभारी निरीक्षक पूनम अवस्थी खुद बाइक से टीम के साथ गलियों, मोहल्लों और संभावित ठिकानों पर लगातार नजर बनाए हुए थीं। कई बार सूचना मिलने के बावजूद शातिर मीनू शर्मा पुलिस को चकमा देकर निकल जाती थी, लेकिन आखिरकार पुलिस ने उसे धर दबोचा। पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के सीधे निर्देशन में हुई।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर प्रदेश में तूफान से हुई मौतों पर शोक व्यक्त किया

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नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने गुरुवार को भारत के उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आए तूफान से हुई भारी जानमाल की हानि पर शोक व्यक्त किया। बुधवार को आए भीषण तूफान और भारी बारिश ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तबाही मचाई, जिससे पेड़ उखड़ गए और घर क्षतिग्रस्त हो गए। इस तूफान में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

क्रेमलिन ने एक बयान में कहा कि पुतिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे संदेश में प्राकृतिक आपदा में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों और प्रभावित लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश में चक्रवात से हुई भारी जानमाल की हानि और व्यापक तबाही पर मेरी गहरी संवेदनाएं स्वीकार करें। पुतिन ने आगे कहा पीड़ितों के परिवारों और मित्रों के प्रति मेरी सहानुभूति और समर्थन व्यक्त करें, साथ ही इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करें।

“बेटिंग ऐप बंद या सिर्फ दिखावा? इंस्टाग्राम की हर तीसरी रील बना रही नए सटोरिए!”

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– “जब हीरो-क्रिकेटर खुद बेच रहे ‘जल्दी अमीर बनने’ का सपना, तो युवाओं को सट्टेबाज़ी से दूर रखने के दावे कितने सच?”
सूर्या अग्निहोत्री
डिप्टी एडिटर यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप
देश में बेटिंग ऐप्स पर कार्रवाई और प्रतिबंध की बातें बड़े जोर-शोर से की गईं। कहा गया कि युवाओं को ऑनलाइन सट्टेबाज़ी के जाल से बचाया जाएगा, मोबाइल स्क्रीन पर फैल रहे इस डिजिटल नशे पर लगाम लगेगी। लेकिन सवाल यह है कि अगर सच में सट्टेबाज़ी रोकनी थी, तो आज भी इंस्टाग्राम खोलते ही हर दूसरी-तीसरी रील में “प्रिडिक्शन लगाओ”, “टीम बनाओ”, “पैसे जीतो” जैसे लालच क्यों परोसे जा रहे हैं?

आज हालात यह हैं कि बच्चा-बच्चा मोबाइल चला रहा है। हर युवा इंस्टाग्राम, रील्स और सोशल मीडिया की दुनिया में घंटों डूबा रहता है। ऐसे में जब उसका पसंदीदा क्रिकेटर, फिल्म स्टार, कॉमेडियन या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर खुलेआम किसी “फैंटेसी”, “प्रिडिक्शन” या “कमाओ लाखों” वाले प्लेटफॉर्म का प्रचार करता दिखाई देता है, तो युवा के मन में लालच पैदा होना स्वाभाविक है। सरकार भले कहे कि बेटिंग ऐप्स बंद हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इनका प्रचार पहले से ज्यादा तेज नजर आता है।

इतना ही नहीं, अब कई ऐसे प्लेटफॉर्म सामने आ गए हैं जो मोबाइल में इंस्टॉल भी नहीं होते। लोग सीधे Chrome या दूसरे ब्राउज़र पर वेबसाइट खोलकर अपनी आईडी बनाते हैं और वहीं पर रुपए लगाकर सट्टेबाज़ी करते हैं। यानी ऐप बंद होने के बावजूद खेल पूरी तरह जारी है, बस तरीका बदल गया है। यही वजह है कि कार्रवाई के दावों के बीच भी ऑनलाइन बेटिंग का जाल लगातार फैलता जा रहा है।

कुछ वेबसाइट्स और प्लेटफॉर्म आज भी “प्रिडिक्शन” के नाम पर रुपए लगवाकर लोगों को जीत का सपना दिखा रहे हैं। हारने वालों की कहानी कोई नहीं दिखाता, लेकिन जीत का झूठा सपना चमकदार विज्ञापनों और सेलिब्रिटीज के चेहरे से बेच दिया जाता है। यही वजह है कि हजारों युवा मेहनत के बजाय आसान पैसे की उम्मीद में इस दलदल की तरफ खिंचते चले जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सट्टेबाज़ी जैसी चीज़ों को रोकना था, तो फिर सोशल मीडिया पर इनके प्रचार पर सख्ती क्यों नहीं? सिर्फ ऐप बंद कर देना और दूसरी तरफ इंस्टाग्राम पर उसी लालच को खुली छूट देना आखिर किस नीति का हिस्सा है? अगर हर दिन नए “सटोरिए” तैयार हो रहे हैं, तो फिर यह प्रतिबंध सिर्फ दिखावा नहीं तो और क्या है?

जब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटीज और ऐसे डिजिटल जाल पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक “बेटिंग ऐप बंद” का दावा सिर्फ कागज़ों और भाषणों तक सीमित नजर आएगा।

ब्रिक्स के मंच से दुनिया को भारत का संदेश: “ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा नया भारत”

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नई दिल्ली

राजधानी आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को भारत की नई वैश्विक नीति का स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स संगठन समावेशी और संतुलित विश्व व्यवस्था बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है जब विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर बराबरी का अधिकार मिले और ग्लोबल साउथ को नई ताकत के साथ आगे बढ़ाया जाए।

राजधानी दिल्ली में शुरू हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री और कई साझेदार देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अब केवल आर्थिक संगठन नहीं, बल्कि दुनिया की बदलती ताकत का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने साफ कहा कि भारत बहुपक्षवाद को मजबूत करने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए पूरी मजबूती से काम करेगा।

बैठक के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत हर विवाद का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए चाहता है। वहीं भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी।

ब्रिक्स बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जय शंकर कर रहे हैं। बैठक में व्यापार, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा और विकासशील देशों के आर्थिक हितों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा जारी है। भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।