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Sunday, July 5, 2026
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पंजाब 2027: सियासी ‘ऑपरेशन क्लीन’ आधे विधायकों का पत्ता कटेगा

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(सुभाष आनंद-विनायक फीचर्स)

पंजाब में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक पार्टियों ने योग्य उम्मीदवार तलाशने शुरू कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक पार्टी की यह कोशिश रहेगी कि जिन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाना है, उनमें से 50 फीसदी नए चेहरे और 50 फीसदी पुराने चेहरों पर हर पार्टी अपना विश्वास जताए। सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
आम आदमी पार्टी के एक बड़े नेता ने बताया कि पार्टी इस बार पुराने विधायकों पर कम ही भरोसा जताएगी। कई विधायकों की परफॉर्मेंस एवरेज से भी कम आंकी जा रही है। कई विधायकों के खिलाफ पंचायती चुनावों में पैसे लेने की शिकायतें मिल रही हैं। कई विधायकों की अपनी टर्म में बड़ी-बड़ी जायदादें बनाने की शिकायतें भी मिल रही हैं। ऐसे विधायक पार्टी की आंखों में खटक रहे हैं। जिन नेताओं ने अपने जीवन की अंतिम राजनीतिक पारी खेलनी है, वह भी टिकट की दौड़ में रहेंगे।
वहीं आम आदमी पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की लहर थी, जिसके कारण अकाली दल (बादल) और कांग्रेस के धाकड़ नेताओं को भी पराजय का सामना करना पड़ा। पता तो 2027 के चुनावों में लगेगा, आखिर हम कहां खड़े हैं। पार्टी के बड़े नेता उम्मीदवारों का चयन सही करेंगे तो पार्टी पुनः सत्ता में आ सकती है।
उधर, शिरोमणि अकाली दल का विभाजन होने के कारण कई वरिष्ठ अकाली नेता शिरोमणि अकाली दल का दामन छोड़ चुके हैं, इसलिए अकाली दल (बादल) को नए चेहरे तलाशने पड़ेंगे। पुराने अकाली नेता अकाली दल (पुनर्गठन) में चले गए हैं। अकाली दल (बादल) के वरिष्ठ अकाली नेता जनमेजा सिंह सेखों का कहना है कि अकाली दल को जो झटका लगा था, उससे वह उबरकर पुनः अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर रहा है।
सुखबीर सिंह बादल ने अपने पुराने साथियों के छोड़कर चले जाने के पश्चात नए चेहरों के साथ मैदान में उतरना शुरू किया था,वे अपने नये साथियों को स्थापित करने के लिए जोर भी लगा रहे हैं। उसकी उदाहरण फिरोजपुर शहर से सुखपाल सिंह नन्नू हैं, जिन्होंने भाजपा का दामन छोड़कर अकाली दल अपनाया था। परंतु अकाली दल की राह में सबसे बड़ा रोड़ा यह है कि यदि अकाली दल दोफाड़ होकर लड़ा तो वोट बंटने का खतरा है।
भारतीय जनता पार्टी की बात की जाए तो पंजाब में उसका इतना आधार नहीं है। भाजपा बाहरी पार्टियों से आए हुए लोगों के दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी। 117 सीटों पर उन्हें उम्मीदवार भी नहीं मिल पाएंगे। 2022 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी अपने बलबूते पर चुनाव लड़ी थी, वह 2 ही सीटें प्राप्त कर सकी थी। भारतीय जनता पार्टी उन जगहों पर भी चुनाव मैदान में उतरेगी, जहां कभी भी उन्होंने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा। कांग्रेस के ही नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी के भी कई नेता अब भाजपा में आ चुके है।
अब कांग्रेस की बात करें तो 2027 में कांग्रेस के लिए पंजाब का चुनाव ‘वाटरलू’ साबित होने जा रहा है। पिछले दिनों हरियाणा, दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल में हार के बाद पार्टी वर्कर हतोत्साहित हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग का हाल ही का बयान बड़ा महत्व रखता है कि पंजाब कांग्रेस विधानसभा चुनावों में 60 से 70 फीसदी नए चेहरे उतारने जा रही है। उनके बयान को लेकर पार्टी में असमंजस की स्थिति है, विशेष रूप से पुराने कांग्रेसी नेताओं में जो अपने जीवन की आखिरी राजनीतिक पारी खेल रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के नेता चाहते हैं कि यदि पार्टी उन्हें टिकट नहीं देती तो उनके बच्चों को पार्टी का टिकट दिया जाए, क्योंकि उनके परिवार ने लंबे समय से पार्टी की सेवा की है। कांग्रेस पार्टी चाहती है कि इस चुनाव में 33 फीसदी महिलाओं को टिकट दिए जाएं, ताकि महिला आरक्षण का मुद्दा कवर किया जा सके। पहले कांग्रेस पार्टी विधानसभा के सभी पुराने सदस्यों को टिकट दिए जाने पर राजी हो गई थी, लेकिन अब टिकट बांटने के लिए पूरा सर्वे कराया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार पार्टी दबाव में टिकटों का वितरण नहीं करेगी।
वहीं कांग्रेस के एक बड़े नेता ने बताया कि पंजाब कांग्रेस में आगामी चुनावों को लेकर बड़ा फेरबदल हो रहा है, यदि पंजाब कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव नहीं लड़ी तो उसे विपक्ष में बैठना होगा। यदि पंजाब कांग्रेस को सत्ता में आना है तो उसे एकजुट होना होगा। (विनायक फीचर्स)

हरदोई में सड़क हादसा, एक्सप्रेस-वे की रेलिंग तोड़ते हुए 20 फीट नीचे गिरी स्लीपर बस, 50 यात्री घायल

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हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई (Hardoi) जिले के पचदेवरा थाना क्षेत्र में शनिवार और रविवार की मध्य रात्रि गंगा एक्सप्रेस-वे पर एक भीषण सड़क हादसा (Road accident) हुआ है। सिद्धार्थनगर के बांसी से दिल्ली जा रही स्लीपर बस अनियंत्रित होकर एक्सप्रेस-वे की रेलिंग तोड़ते हुए करीब 20 फीट नीचे जा गिरी। इस सड़क हादसे में यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

जानकारी के मुताबिक, पचदेवरा थाना क्षेत्र में शनिवार और रविवार की मध्य रात्रि भाहपुर सपहा गांव के पास एक्सप्रेस-वे पर यह सड़क हादसा हुआ। बस में सवार अधिवक्ता विनय कुमार यादव ने बताया कि बस में बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे। चालक सफर के दौरान मोबाइल फोन पर बात कर रहा था, जिससे बस का संतुलन बिगड़ गया और यह हादसा हो गया। हालांकि पुलिस दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर रही है।

घटना की सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाकर घायलों को बस से बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया।

हादसे में छह बच्चों समेत करीब 50 यात्री घायल हुए हैं। इनमें 12 यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनका उपचार जारी है। घायलों में सुनील कुमार, अमित कुमार, कृष्ण मोहन, गीता यादव, विनय कुमार यादव, विशाल, अनिल, सचिन, कृष्णा पांडेय, बनवारीलाल, राहुल यादव, राहुल पाठक, शहजाद, अजय, तबस्सुम, राजेश, अंशिका, आंचल, मोहन कुमार, अकबर अली, मुन्ना, हैदर अली, साजिद, अफजल, मनोज पाठक सहित कई अन्य यात्री शामिल हैं।

अधिकांश यात्री सिद्धार्थनगर और बस्ती जनपद के निवासी बताए गए हैं। हादसे के बाद बस चालक और परिचालक मौके से फरार हो गए। प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव ने बताया कि दुर्घटना रात करीब दो बजे हुई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। बस में सवार यात्रियों की वास्तविक संख्या और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

लखनऊ: ‘बृज की रसोई’ ने 2000 जरूरतमंदों तक पहुंचाया सम्मानपूर्वक भोजन, सेवा अभियान बना मानवता की मिसाल

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लखनऊ के आशियाना क्षेत्र में इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी (रजि.) द्वारा संचालित ‘बृज की रसोई’ के अंतर्गत रविवार को आयोजित निःशुल्क भोजन वितरण अभियान मानवता, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया। बाबा नीम करौली जी की प्रेरणा से संचालित इस साप्ताहिक सेवा अभियान के तहत लगभग 2000 जरूरतमंदों को सम्मानपूर्वक पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया।

संस्था के संस्थापक विपिन शर्मा ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के गरीब, असहाय और वंचित वर्ग तक केवल भोजन पहुंचाना ही नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान और आत्मीयता का अनुभव कराना भी है। उन्होंने कहा कि सेवा की यह भावना समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम बन रही है।

संस्था के पदाधिकारी जालिम सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने पूरी स्वच्छता, अनुशासन और समर्पण के साथ भोजन तैयार किया तथा निर्धारित स्थानों पर पहुंचकर करीब दो हजार लोगों को भोजन वितरित किया। भोजन वितरण के दौरान प्रत्येक जरूरतमंद की गरिमा और आत्मसम्मान का विशेष ध्यान रखा गया।

सी.एच. तिवारी ने कहा कि बृज की रसोई का उद्देश्य केवल अन्नदान नहीं, बल्कि समाज में सम्मानजनक सेवा की संस्कृति को विकसित करना है। वहीं विकास पाण्डेय ने कहा कि यह अभियान लोगों के भीतर करुणा, सहयोग और सामाजिक संवेदनशीलता को मजबूत करने का सतत प्रयास है।

आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि संस्था का संकल्प है कि समाज के सक्षम नागरिकों के सहयोग से यह सेवा लगातार विस्तार पाए और अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे। अनुराग दुबे ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों, सहयोगकर्ताओं और दानदाताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने समाज के जागरूक नागरिकों से इस जनसेवा अभियान से जुड़कर सेवा के इस पावन कार्य में सहभागी बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के सफल संचालन में सी.एच. तिवारी, जालिम सिंह, संजय श्रीवास्तव, अनुराग दुबे, दीपक भुटियानी, आशीष श्रीवास्तव, नवलेश सिंह, विकास पाण्डेय, बलवंत सिंह, मुकेश कनौजिया, अखिलेश सिंह, गोविन्द सिंह, उमाशंकर यादव एवं गीता प्रजापति सहित अनेक स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। संस्था ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस सेवा अभियान को और व्यापक स्तर पर संचालित करने का संकल्प दोहराया।

तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार युवकों को रौंदा, 2 की मौके पर मौत, एक गंभीर

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रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ (Raigarh) जिले में दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है। चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के बंगुरसिया के पास तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे (Accidents) में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है। जानकारी के अनुसार, चक्रधर नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बंगुरसिया के पास रविवार सुबह करीब 10:45 बजे ओडिशा नंबर (OD 16 C 7859) के एक भारी वाहन के चालक ने तेज और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए बाइक सवार तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया।

हादसे में बाइक सवार 20 वर्षीय प्रकाश राठिया की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर दोनों घायलों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक जांच के दौरान दूसरे युवक ने भी दम तोड़ दिया। उसकी पहचान 21 वर्षीय युवक के रूप में हुई है। वहीं तीसरा युवक, 21 वर्षीय ज्ञानचंद मिर्धा, गंभीर रूप से घायल है। उसे बेहतर उपचार के लिए रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।

बताया जा रहा है कि तीनों युवक तमनार क्षेत्र के ग्राम महलोई के निवासी हैं। वे रविवार सुबह किसी काम से रायगढ़ आ रहे थे। इसी दौरान बंगुरसिया के पास यह भीषण सड़क हादसा हो गया। घटना की सूचना मिलते ही चक्रधर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।

 

गुढ़ियारी के तंबू से फ्रांस के मंच तक पंडवानी के लिए आजीवन समर्पित रहीं तीजन बाई

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(डॉ. सुधीर सक्सेना- विभूति फीचर्स)

सांझ ढल चुकी थी और आहिस्ता-आहिस्ता स्याही बस्ती पर पसर रही थी। रोशनी के नाम पर लैंपपोस्टों और घरों में रोशन बल्बों का ही सहारा था, अन्यथा बस्ती इतनी लकदक न थी कि आंखें चुंधिया जाएं। वो साल 1978 का सर्द दिसंबर महीना था। संभवत: दिसंबर का आखिरी हफ्ता था। सर्दी नामालूम सी थी और फकत स्वेटर से उससे मोर्चा लिया जा सकता था। हम गुढ़ियारी में थे। यह रायपुर में रेलवे स्टेशन के आगे शहर के उलटी ओर बसी बस्ती थी। रिहायश जहां खत्म होती है, वहीं तालाब था। तालाब के किनारे एक तिकोना तंबू गड़ा था। तंबू जिस बांस की बल्ली पर गड़ा था, वहां एक लालटेन टंगी थी। तंबू में जरूरत का घरेलू सामान बिखरा हुआ था जैसे चोट खाया टिन का बक्सा, कुछेक बर्तन, मिट्टी का अस्थायी चूल्हा,थोड़ा-बहुत मेकअप का सामान, जैसे लिपिस्टिक, काजल, पावडर, बिंदी, तेल-कंघी। झींगुरों और मेंढकों की आवाज बेरोक आ रही थी। जब तब रेलपांत से रेल गुजर जाती थी। और हां, एक तंबूरा भी वहां चारपाई के सहारे टिका हुआ था।
हम एक श्यामल बरन अच्छे सौष्ठव की, पांच फीट से कुछ इंच ऊपर कद की खुशमिजाज महिला के अस्थायी डेरे पर थे। महिला की आंखों में बला की चमक थी और बात करते हुए वे जब-तब और तीक्ष्ण हो जाती थीं। उसके होंठ पान की पीक से लाल थे और दांतों के किनारों पर लाल लकीरें थीं। जाहिर था कि वे पान की शौकीन थीं। जिस चीज ने सबसे पहले आकर्षित किया, वो था उनका गजब का आत्मविश्वास। झिझक से उनका वास्ता न था। याद पड़ता है कि वो चटख लाल रंग की साड़ी पहने थी, बेमेल ब्लाउज के साथ। चटख बिंदी, चांदी के थोड़े से आभूषण,करीने से काढ़े हुए केश,हंसती तो दांत चमकते थे और साथ ही चमकता था उनका बिंदासपन। कोई बात काबिले-दाद होती तो वे बखुद अपनी जांघ पर थाप देकर आनंदित हो लेती थी।
तंबू में खटिया पर सामने बैठी इस साधारण छत्तीसगढ़िया औरत का कांफिडेंस-लेवल औसत से काफी ऊंचा था और वो बातचीत में बरबस छलकता था। वही हुआ। देखते ही देखते वो लोककला के परिदृश्य में छा गयी। उन्होंने सरहदें लांघी और उनकी ख्याति ने दिशायें। एक दशक के भीतर वे सेलिब्रिटी थीं। साल 1988 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। फिर तो पदकों की झड़ी लग गयी। यह वही स्त्री थी, जिसने आकाशवाणी से बतौर पारिश्रमिक पहला चेक लिया तो पावती में हस्ताक्षर न कर अंगूठा लगाया था। उस रात गुढ़ियारी में पहला दफा रूबरू हुई यह स्री थी तीजनबाई। इस साल की 24 अप्रैल को वह सत्तर साल की हुई थीं। अब वे दादी मां भी बन गई थीं। उनकी ख्याति भी लंबा सफर तय कर चुकी थी। सन् 2003 में पद्मभूषण और सन् 2019 में भारत के राष्ट्रपति के हाथों पद्मविभूषण मिलना ,उनके यश को बढ़ाने के पड़ाव रहे। पद्म पुरस्कारों से उनका सम्मान उस लोक कला का भी सम्मान था, जिसे तीजन बाई ने तमाम तकलीफें उठाकर निबाहा। रायपुर में गुढ़ियारी में सर्द दिसंबर में लालटेन की धुंधली रोशनी में लिया गया वो इंटरव्यू उनकी जिंदगी का विशेष साक्षात्कार था। इस इंटरव्यू के निमित्त बने थे लोककला मर्मज्ञ निरंजन महावर। जस की तस तो नहीं, मगर उसकी कही कुछ बातें स्मृति में हैं।
तीजन बाई का जन्मगांव इस्पात नगरी भिलाई से 14 किमी दूर गनियारी था जिसे अब भिलाई में ही मानिये। पिता चुनुक लाल। मां सुखमती। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी। जाति की पारधी। उस अंत्यज समाज की जो मूलत: राजपूत समाज से संबद्ध होने के बावजूद जनजातियों में परिगणित है और आखेट तथा पक्षियों को पकड़ने के लिए जानी जाती है। पारधी परिन्दों को पकड़ने के लिए भांति-भांति के जाल या फंदे बुनने में निपुण होते हैं। बहरहाल महाराष्ट्र-गुजरात की अपेक्षा छत्तीसगढ़ में इनकी आबादी कम है। पारधी घुमंतू जनजाति है। वे झाड़ू-चटाई, टोकरी आदि अच्छी बना लेते हैं। विडंबना देखिये कि जब जात-बाहर विवाह के कारण तीजन पारधी-समाज से निष्कासित हुईं तो यही पेशा गांव के बाहर झोपड़ी बनाकर जीवनयापन में काम आया, मगर यह स्थिति ज्यादा दिन तक नहीं रही। कला ने उन्हें दो जून की रोटी दी, नौकरी दी, सम्मान और प्रतिष्ठा दी और उस पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया, जहां तक पहुंचना विपन्न पारधियों के लिए ख्वाब में भी दूभर था।
तीजन बाई को पंडवानी विरासत में मिली। मातृकुल से। नाना बृजलाल पारधी पंडवानी गाते थे। बालपन में तीजन ने नाना से पंडवानी सुनी और जो उन्हें कंठस्थ हो गयी। तेरह की आयु में समीपवर्ती गांव चंदखुरी में उन्हें पहली बार पंडवानी गायन का मौका मिला। दक्षिणा या चढ़ावे में मिले दस रुपये उनकी पहली कमाई थी। अनेक लोग रुष्ट हुए कि एक तो स्त्री और फिर पारधी होकर पवित्र कथा का वाचन। विरोध, लांछन, वर्जना का दौर चला। तीजन में हठ भी था और भगवान कृष्ण में अटूट भक्ति भी। वे उसके स्वप्न में आते थे। जीवन कष्टों से बिंधा था। तीजन ने वैवाहिक जिंदगी में पीड़ा-प्रताड़ना सही लेकिन पंडवानी नहीं छोड़ी। पंडवानी में ही उनकी मुक्ति थी, पीड़ा से भी, दैन्य से भी, वर्जनाओं से भी। पंडवानी कला ही उन्हें स्याह बोगदे के बाहर उस ठौर ले गयी, जहां खुली हवा थी, रोशनी थी और उसे सराहती एक बड़ी दुनिया थी।
कला कोई भी हो, वो तैयारी या रियाज मांगती है। तीजन ने अपने को तैयार किया, परिष्कृत किया और सबसे बढ़कर उसे नवाचारित भी किया। सबलसिंह चौहान की छत्तीसगढ़ी महाभारत कंठस्थ करने के बाद उसने उमेद सिंह देशमुख से विधिवत प्रशिक्षण लिया। पंडवानी पुरूषों के वर्चस्व का क्षेत्र था। बैठकर वाचन की वेदमती शैली उनके लिए उपयुक्त थी, लेकिन तीजन बाई ने इसकी विलोम कापालिक शैली चुनी। लगता है तीजन बाई का चयन सही था। कापालिक शैली में खड़े-खड़े ‘महाभारत’ गायी जाती थी। तबला, खड़ताल, ढोलक, मंजीरा, हार्मोनियम जैसे इने-गिने वाद्य। साथ में तंबूरा। तंबूरे से वो कईं प्रयोजन साधती थीं। वह अर्जुन का बान है और भीम की गदा भी। तीजन वाचिक को आंगिक अभिनय से निखार देती थीं। माहौल के मुताबिक शब्द चयन में थोड़ा हेरफेर। वो गायन, नृत्य, प्रलाप, वादन, संवाद और अभिनय से अपना डोमेन खुद रचती थीं और दर्शकों को बांध लेती थीं। चीरहरण और दु:शासन वध उनके प्रिय प्रसंग थे। बुलंद आवाज और मंच पर तीव्र पदाघात अलग रस की वृष्टि करते थे। वो खूब जानती थीं कि मंच पर नाटकीयता का निर्वाह कैसे किया जाता है।
तीजन ताउम्र निरक्षर रहीं जिसका उन्हें मलाल नहीं था। उसके तईं सब प्रभु की माया है। मोरपंख जड़ा तंबूरा वाद्ययंत्र रहा, आयुध भी और साथी भी। तंबूरा हाथ में आते ही ओज आ जाता । अस्सी के दशक में उन पर रंगकर्मी हबीब तनवीर की निगाह पड़ी। कला-गुरू को कलासाधिका की प्रतिभा चीन्हते देर न लगी। वो भारत महोत्सव में पहुंचीं। दिल्ली में श्रीमती इंदिरा गांधी के सम्मुख पंडवानी प्रस्तुत की। उन्हें जगह-जगह से न्यौता मिला। दिशायें गौण हो गयीं। वो फ्रांस, जर्मनी, मॉरीशस, तुर्की, रोमानिया, बांग्लादेश और स्विट्जरलैंड गयी ही, माल्टा, ट्यूनीशिया और साइप्रस भी हो आई। फ्रांस सर्वप्रिय था। वहां वह कई बार हो आई । पहली फ्रांस यात्रा के बाद उन्होंने ‘आई-ब्रो’ बनाना सीख लिया । आधुनिक सौन्दर्य प्रसाधन भी उनके जीवन में आ गये। तुलसीराम देशमुख में उसे पति मिला और साथी भी। पेटी (हार्मोनियम) वादक देशमुख उसके कामों में हाथ भी बंटाते थे और उसे साइकिल से भिलाई इस्पात संयंत्र के उनके दफ्तर भी छोड़ आते थे।
‘‘हमारे यहां पढ़ाई का कोई रिवाज न था’’- तीजन बाई ने कहा था-‘‘मैं पढ़ी होती तो शायद पंडवानी गायिका नहीं बनती। बहुत दु:ख झेले, लेकिन सरस्वती मैया की कृपा कि पंडवानी मेरी जिंदगी हो गयी। सब उसी का दिया है।’’
तीजन अपने पति को ‘मिस्टर’ कहती थीं। गोदरेज का ‘डाई’ (खिजाब) उनको भाता था। पान के बिना वे रह नहीं सकती थीं। बंगला पान उन्हें पसंद रहा , अलबत्ता लवंग-इलायची युक्त सादा पत्ता भी चाव से चबाती थीं। अचार की भी वे शौकीन रहीं। खासकर आम का अचार। वह ठेठ छत्तीसगढ़िया है। एक जून बोरे बासी और चटनी उनकी आहारचर्या रही है।
तीजन के जीवन-वृत्त में पदकों की लंबी तालिका है। उन्हें देवी अहिल्या सम्मान भी मिला और संगीत नाटक अकादमी का पुरस्कार भी। सन् 2016 में उन्हें एस. सुब्बलक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार मिला और 2018 में फुकुओका पुरस्कार। उन्हें ईसुरी पुरस्कार से भी नवाजा गया। एक चरण के बाद पुरस्कार और सम्मान गौण हो जाते हैं। याद आता है श्याम बेनेगल का धारावाहिक ‘भारत : एक खोज’। नेहरू जी की कृति ‘डिस्कवरी आफ इंडिया’ पर आधारित इस सीरियल में बेनेगल ने महाभारत को साकार करने के लिये तीजनबाई को चुना था। यह तीजन की उपलब्धि थी और पुरस्कार भी।
तीजन निरक्षर रहीं, लेकिन वे जीवन और जगत के आखरों को बखूबी चीन्हती और सस्वर बांचती थीं। उसने लोककला को क्लासिकी ऊंचाइयां दी हैं। चीरहरण के प्रसंग से वे दर्शाती थीं कि नारी के अपमान में गौरवशाली वंशों का भी पतन या विनाश निहित है। मिथकों की शैली में बात करें तो तीजनबाई को विधि ने पंडवानी के लिये ही रचा था। (विभूति फीचर्स)

यूपी आम महोत्सव-2026 का भव्य समापन, 30 से अधिक देशों में पहुंची यूपी के आम की मिठास

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राजधानी लखनऊ में आयोजित यूपी आम महोत्सव-2026 का रविवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में प्रदेश के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं और उत्कृष्ट प्रदर्शकों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आम उत्पादकों की आय बढ़ाने, आधुनिक बागवानी को बढ़ावा देने और उत्तर प्रदेश के आम को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का आम आज 30 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के किसानों और बागवानों को बेहतर बाजार और अधिक मूल्य मिल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पूरी तरह संचालित होने के बाद आम सहित अन्य बागवानी उत्पादों के निर्यात की लागत में कमी आएगी और विदेशी बाजारों तक उत्पादों की तेज़ और आसान पहुंच सुनिश्चित होगी।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार हॉर्टिकल्चर एक्सपोर्ट प्रमोशन बोर्ड के माध्यम से बागवानी उत्पादों के निर्यात को नई गति देने की दिशा में कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ना, निर्यात सुविधाओं का विस्तार करना और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को अधिक सशक्त बनाना है।

महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बागवानों और उत्पादकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस वर्ष 1501 प्रतिभागियों ने 3032 आम के नमूनों का प्रदर्शन किया, जिनमें विभिन्न प्रजातियों के स्वाद, गुणवत्ता और विशेषताओं ने दर्शकों और विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया।

प्रतियोगिता में मलिहाबाद के मोहम्मद इकबाल अहमद को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक का सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले आमों के प्रदर्शन, नवाचार और उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया गया।

मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आम उत्पादक राज्य है और सरकार की प्राथमिकता है कि यहां के किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन व्यवस्था और निर्यात के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि प्रदेश का आम दुनिया के हर प्रमुख बाजार तक अपनी मिठास पहुंचा सके।