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Saturday, May 23, 2026
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रायबरेली आबकारी विभाग में बड़ा खेल उजागर, रेलवे स्टेशन की मॉडल शॉप गायब, बेलीगंज की बिक्री बढ़ाने का आरोप

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रायबरेली: रायबरेली (Rae Bareli) जिले  में आबकारी विभाग (Excise Department) में ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। वर्षों से रेलवे स्टेशन पर चल रही मॉडल शॉप को साठगांठ करके गायब कर दिया गया, जिसका सीधा आरोप बेलीगंज कंपोजिट शराब की दुकान की बिक्री बढ़ाने के लिए किया गया है।

इस मामले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, रेलवे स्टेशन पर दुकान न मिलने का हवाला देकर मॉडल शॉप को सुभाष नगर स्थानांतरित करा दिया गया। इस पूरे खेल में आबकारी इंस्पेक्टर अखिलेश के छुट्टी पर होने का फायदा उठाया गया और चार्ज पर आए इंस्पेक्टर पर मिलीभगत का आरोप लगा है।

मिलीभगत की पोल खुलने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिला आबकारी अधिकारी ने अनुज्ञापी (लाइसेंस धारक) पर गुमराह करने का आरोप लगाया है और सुभाष नगर स्थानांतरित की गई मॉडल शॉप को वापस रेलवे स्टेशन पर खोलने का आदेश दिया है। आदेश का पालन न करने पर लाइसेंस धारक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।

देश में गरीबी नहीं, गरीबों को ही हटाने की मुहिम?

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शरद कटियार

सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जी बेचने वाला वह आदमी शायद देश की अर्थव्यवस्था के आंकड़ों में कभी दिखाई नहीं देता। उसके पास कोई बड़ा शोरूम नहीं, कोई राजनीतिक पहुंच नहीं, कोई आलीशान दफ्तर नहीं। उसके पास सिर्फ एक ठेला होता है, कुछ किलो सब्जियां होती हैं और पेट पालने की जिद होती है। लेकिन आज सबसे आसान निशाना वही बन गया है।

सुबह चार बजे मंडी से सब्जी खरीदकर लाने वाला गरीब जब दिनभर धूप में खड़ा होकर दो वक्त की रोटी कमाने की कोशिश करता है, तभी प्रशासन का बुलडोजर “अतिक्रमण हटाओ अभियान” के नाम पर उसकी पूरी दुनिया कुचल देता है। उसकी टोकरी बिखर जाती है, ठेला टूट जाता है, सब्जियां सड़क पर फैल जाती हैं और उसके बच्चों की भूख भी उसी सड़क पर तड़पती रह जाती है।

सवाल यह नहीं कि अतिक्रमण हटना चाहिए या नहीं। सवाल यह है कि क्या कानून केवल गरीबों के लिए ही बचा है? बड़े-बड़े अवैध निर्माण, रसूखदारों के कब्जे, नेताओं के संरक्षण में चल रहे कारोबार क्या प्रशासन को दिखाई नहीं देते? क्या बुलडोजर केवल उस गरीब की रोजी पर ही चल सकता है जिसके पास न वकील है, न पहुंच और न सत्ता?
विडंबना देखिए, जो आदमी टैक्स नहीं चुरा रहा, जो अपराध नहीं कर रहा, जो सिर्फ मेहनत कर रहा है, वही सबसे ज्यादा अपमानित किया जा रहा है। उसकी गरीबी अब अपराध जैसी मानी जाने लगी है। उसे सड़क से हटाया जा रहा है, लेकिन उसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई जाती। कोई यह नहीं पूछता कि उसका परिवार अब खाएगा क्या?

देश में गरीबी खत्म करने की बातें दशकों से होती रही हैं, लेकिन कई बार ऐसा लगता है कि गरीबी नहीं, गरीबों को ही हटाने की कोशिश चल रही है। शहरों को चमकाने की होड़ में उन हाथों को मिटाया जा रहा है जो ईमानदारी से जीवन चला रहे हैं। विकास अगर किसी गरीब की थाली छीनकर आता है तो वह विकास नहीं, संवेदनहीनता है।
एक ठेला सिर्फ लोहे का ढांचा नहीं होता, वह किसी पिता की उम्मीद, किसी मां की दवा, किसी बच्चे की फीस और पूरे परिवार की सांस होता है। बुलडोजर जब उस ठेले पर चलता है तो सिर्फ सामान नहीं टूटता, इंसान अंदर से टूट जाता है।

जरूरत इस बात की है कि व्यवस्था गरीबों को दुश्मन नहीं, नागरिक समझे। अतिक्रमण हटाना है तो पहले वैकल्पिक बाजार और व्यवस्थित स्थान दिए जाएं। कानून सबके लिए बराबर हो। गरीब की मजबूरी पर शक्ति प्रदर्शन बंद हो। क्योंकि जिस समाज में सबसे कमजोर आदमी लगातार कुचला जाता है, वहां इंसानियत धीरे-धीरे मरने लगती है।

संघ अगर ज्यादा मजबूत होता तो नहीं होता भारत का बँटवारा: RSS के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर

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नई दिल्ली: भारत के बंटवारे का दर्द राष्ट्रवादियों को हमेशा सा चुभता रहा है, जो गाहे-बगाहे किसी न किसी रूप से उभर कर सामने आ जाता है। अबकी बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर (Sunil Ambekar) ने कहा कि बँटवारे के समय संघ उतना मजबूत नहीं था, नहीं तो देश का बँटवारा नहीं होता।

आंबेकर ने ये बातें दिल्ली में इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा पेश की गई डॉक्यूमेंट्री “दिल्ली में संघ यात्रा” की स्क्रीनिंग के दौरान कहीं। 1942 से 1947 के बीच के समय का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि RSS का दिल्ली और अविभाजित पंजाब में तेज़ी से विस्तार हुआ था, और बड़ी संख्या में लोग संगठन से जुड़ रहे थे, लेकिन उस समय इसकी ताक़त अभी भी सीमित थी।

उन्होंने कहा कि बँटवारे के दौरान, संघ के स्वयंसेवकों ने उन इलाकों में हिंदुओं की रक्षा के लिए काम किया जो पाकिस्तान का हिस्सा बन गए थे, और वे तब तक वहीं रहे जब तक “आखिरी व्यक्ति सुरक्षित जगह पर नहीं पहुँच गया”।

आंबेकर ने कहा कि हिंसा और पुनर्वास के प्रयासों के दौरान अनगिनत स्वयंसेवकों ने बलिदान दिया, जबकि विस्थापित लोगों के लिए कई शिविर लगाए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगस्त 1947 के पहले पखवाड़े में संघ प्रमुख एम.एस. गोलवलकर “श्री गुरुजी” कराची में थे, और उथल-पुथल के बीच राहत और सुरक्षा कार्यों पर स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन कर रहे थे।

आंबेकर ने कहा कि संघ के संस्थापक के.बी. हेडगेवार ने संगठन की स्थापना राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि “सांस्कृतिक जागरण” पैदा करने और समाज को मज़बूत बनाने के लिए की थी। उन्होंने कहा, “अगर डॉक्टर हेडगेवार राजनीति करना चाहते, तो वे एक राजनीतिक पार्टी बना सकते थे। उनका लक्ष्य समाज को संगठित करना और राष्ट्रीय आत्मविश्वास जगाना था।”

उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में संघ की गतिविधियाँ हेडगेवार के जीवनकाल में ही शुरू हो गई थीं और संगठन के 100 साल के इतिहास से गहराई से जुड़ी रही हैं। संघ के दिल्ली प्रांत प्रचारक रितेश अग्रवाल ने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री ऐतिहासिक रिकॉर्ड, यादों, साक्षात्कारों और बँटवारे तथा आज़ादी के बाद के घटनाक्रमों से जुड़े पुरालेखीय सामग्री के ज़रिए, दिल्ली में संगठन की शुरुआती दौर से लेकर उसके विस्तार तक की यात्रा को दिखाती है।

 

भाजपा की वरिष्ठ नेता डॉ. रजनी सरीन अस्वस्थ, समर्थकों में चिंता

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फर्रुखाबाद। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य डॉ. रजनी सरीन के अस्वस्थ होने की खबर से उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में चिंता का माहौल है। करीब 74 वर्ष की उम्र में भी सामाजिक, साहित्यिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाली डॉ. सरीन पिछले लगभग दो माह से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दे रही थीं।

 

जानकारी के अनुसार वह अपने बच्चों के पास अमेरिका गई हुई थीं, जहां उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने की चर्चा सामने आई है। हालांकि परिवार या उनके करीबी सहयोगियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। उनके कर्मचारी और परिजन भी स्वास्थ्य संबंधी सवालों पर कुछ बोलने से बच रहे हैं।

 

फर्रुखाबाद की राजनीति और सामाजिक जीवन में डॉ. रजनी सरीन का विशेष स्थान रहा है। भाजपा संगठन में मजबूत पकड़ रखने के साथ-साथ उन्होंने साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई। जिले में उनके हजारों समर्थक हैं, जो उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. सरीन ने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के मुद्दों पर लगातार काम किया और अपनी अलग पहचान बनाई। उनके अस्वस्थ होने की खबर के बाद जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नहाने गए युवक की घाघरा नदी में डूबकर मौत, शव मिलने से मचा हड़कंप

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बाराबंकी। रामनगर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़नपुर डीपो में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब शिमली चौका नदी में एक युवक का शव तैरता मिला। सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाकर जांच शुरू कर दी।

मृतक की पहचान बड़नपुर निवासी प्रवेश कुमार (53) पुत्र केशव राम के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक प्रवेश कुमार शुक्रवार शाम घाघरा नदी में नहाने गए थे। वह अपने कपड़े और मोबाइल नदी किनारे रखकर पानी में उतरे थे, लेकिन देर रात तक घर वापस नहीं लौटे।

काफी खोजबीन के बाद भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला तो परिजनों ने ग्राम प्रधान को सूचना दी। शनिवार सुबह करीब 11 बजे ग्रामीणों ने शिमली चौका नदी में शव तैरता देखा। पास जाकर पहचान करने पर शव प्रवेश कुमार का निकला, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।

सूचना पर थाना प्रभारी अरुण प्रताप सिंह और चौकी इंचार्ज रजनीश कुमार पांडे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को नदी से बाहर निकलवाकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

मृतक के पुत्र शिवम वर्मा ने बताया कि उनके पिता मेहनत-मजदूरी और ठेलिया चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। थाना प्रभारी अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यूटा ने गर्मी के चलते जनगणना कार्य आगे बढ़ाने की उठाई मांग

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फर्रुखाबाद। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ने ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में जिला कार्यक्रम अधिकारी को सौप जिसमें भारी गर्मी के कारण जनगणना कार्य को जुलाई तक के लिए आगे बढ़ा दिए जाने की मांग की गई।
सौंपे गए मांग पत्र में कहा गया कि मांग पत्र में कहा गया कि हीट वेव के चलते पूरे प्रदेश भर में रेड लाइट घोषित किया गया है और गर्मी से बचने तथा घर से न निकलने की हिदायत दी जा रही है ऐसे में अध्यापकों द्वारा जनगणना कार्य कराया जा रहा है जो कि शिक्षकों के लिए तो खतरनाक साबित हो ही सकता है और जनगणना करने की जानकारी देने वालों के लिए भी हानिकारक हो सकता है इसलिए गर्मी के मध्य नजर फिलहाल जनगणना कार्य को ग्राम देकर जुलाई में जब कुछ मौसम ठंडा हो या पानी बरसे तब जनगणना कराई जाए।
सौंपे गए मांग पत्र पर जिला अध्यक्ष पीयूष कटियार, जिला महामंत्री ,पंकज यादव, कोषाध्यक्ष सोमेश यादव, समेत अन्य पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए ।