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Monday, May 25, 2026
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आज का राशिफल

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मेष राशि

आज का दिन ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा। लंबे समय से रुके कार्यों में गति आएगी। नौकरीपेशा लोगों को अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। व्यापार में नई योजनाएं लाभ देंगी। पारिवारिक मामलों में धैर्य बनाए रखें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन खानपान में लापरवाही न करें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9

वृषभ राशि

आर्थिक मामलों में आज राहत मिलने के संकेत हैं। पुराने निवेश से लाभ हो सकता है। परिवार में किसी शुभ समाचार से खुशी का माहौल रहेगा। कार्यस्थल पर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, इसलिए सतर्क रहें। मित्रों से सहयोग मिलेगा।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6

मिथुन राशि

आज का दिन मिलाजुला परिणाम देने वाला रहेगा। किसी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। छात्रों के लिए समय अनुकूल है। सामाजिक कार्यों में सम्मान मिलेगा। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5

कर्क राशि

परिवार और करियर दोनों में संतुलन बनाकर चलना होगा। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यात्रा के योग बन रहे हैं।
शुभ रंग: सिल्वर
शुभ अंक: 2

सिंह राशि

आज आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा। राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। व्यापार में बड़ा निर्णय सोच-समझकर लें। परिवार में बुजुर्गों का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1

कन्या राशि

आज मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है। दांपत्य जीवन में सामंजस्य बना रहेगा। खर्चों पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 7

तुला राशि

आज सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नए लोगों से संपर्क भविष्य में लाभदायक साबित हो सकते हैं। व्यापार में साझेदारी से फायदा मिलेगा। परिवार में धार्मिक कार्यक्रम की संभावना है।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 3

वृश्चिक राशि

आज का दिन चुनौतियों से भरा रह सकता है। विरोधियों से सतर्क रहें। किसी भी विवाद में पड़ने से बचें। नौकरी में तनाव बढ़ सकता है, लेकिन धैर्य से काम लें। शाम तक परिस्थितियां बेहतर होंगी।
शुभ रंग: मैरून
शुभ अंक: 8

धनु राशि

भाग्य आज आपका साथ देगा। नए कार्यों की शुरुआत के लिए समय अनुकूल है। नौकरी और व्यापार दोनों में लाभ के योग हैं। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। धार्मिक यात्रा संभव है।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 4

मकर राशि

आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है। अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। कार्यस्थल पर मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है। परिवार में किसी सदस्य की सलाह लाभदायक सिद्ध होगी।
शुभ रंग: ग्रे
शुभ अंक: 10

कुंभ राशि

आज का दिन नई संभावनाओं से भरा रहेगा। व्यवसाय में विस्तार के योग हैं। नौकरी में प्रमोशन या प्रशंसा मिल सकती है। मित्रों और रिश्तेदारों का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 11

मीन राशि

भावनात्मक मामलों में संतुलन बनाए रखें। किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। व्यापार में लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 12

यूथ इंडिया – आपके दिन की सटीक शुरुआत।

बहु-चरणीय नीट-यूजी से छात्रों को मिलेगा बड़ा लाभ

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डॉ विजय गर्ग
देश में मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए नीट-यूजी सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा बन चुकी है। हर वर्ष करोड़ों छात्र-छात्राएं डॉक्टर बनने की उम्मीद के साथ इस परीक्षा में भाग लेते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रबंधन, पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और अत्यधिक मानसिक दबाव जैसी समस्याओं ने इस परीक्षा प्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। इसी कारण अब यह विचार तेजी से चर्चा में है कि नीट-यूजी को कई सत्रों और चरणों में आयोजित किया जाए।

वर्तमान में नीट-यूजी एक ही दिन और एक ही सत्र में आयोजित की जाती है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित करना प्रशासन के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। यदि किसी परीक्षा केंद्र पर कोई तकनीकी समस्या, सुरक्षा चूक या अव्यवस्था हो जाए तो हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। हाल के वर्षों में पेपर लीक और पुनः परीक्षा जैसी घटनाओं ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।

कई सत्रों में परीक्षा आयोजित करने का सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों के मानसिक दबाव में कमी के रूप में देखा जा रहा है। अभी छात्रों के पास केवल एक अवसर होता है, जिसमें उनकी वर्षों की मेहनत का फैसला हो जाता है। यदि किसी कारणवश परीक्षा के दिन छात्र अस्वस्थ हो जाए, तनाव में रहे या यात्रा संबंधी कठिनाई का सामना करे, तो उसका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। लेकिन यदि परीक्षा दो या अधिक चरणों में आयोजित हो और विद्यार्थियों को बेहतर स्कोर चुनने का अवसर मिले, तो वे अधिक आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकेंगे।

इस व्यवस्था से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा। कई छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। भीड़, परिवहन की समस्या और मौसम जैसी कठिनाइयां उनकी परेशानी बढ़ा देती हैं। कई चरणों में परीक्षा होने से परीक्षा केंद्रों का बेहतर वितरण संभव होगा और छात्रों को अपने नजदीकी शहरों में केंद्र मिल सकेंगे।

सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी भी परीक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती हैं। परीक्षा को चरणों में बांटने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और निगरानी आसान हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली भविष्य में अधिक सुरक्षित और पारदर्शी साबित हो सकती है। इसी दिशा में सुधारों की चर्चा भी तेज हो रही है।

हालांकि, कई सत्रों में नीट-यूजी आयोजित करना आसान नहीं होगा। सबसे बड़ी चुनौती सभी सत्रों के प्रश्नपत्रों के स्तर को समान बनाए रखना है। यदि किसी सत्र का प्रश्नपत्र आसान और दूसरे का कठिन हुआ तो विद्यार्थियों के बीच असमानता पैदा हो सकती है। इसलिए सामान्यीकरण की वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रक्रिया आवश्यक होगी। इसके अतिरिक्त डिजिटल ढांचे को मजबूत बनाना भी जरूरी होगा, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय के साथ परीक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक है। परीक्षा का उद्देश्य केवल छात्रों का चयन करना नहीं, बल्कि उन्हें निष्पक्ष और समान अवसर प्रदान करना भी होना चाहिए। कई सत्रों वाली नीट-यूजी प्रणाली विद्यार्थियों को तनाव से राहत देने के साथ-साथ परीक्षा प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बना सकती है।

अंततः, यदि नीट-यूजी को कई सत्रों और चरणों में सावधानीपूर्वक लागू किया जाता है, तो यह भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार साबित हो सकता है। इससे परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि विद्यार्थियों का भविष्य केवल एक दिन की परीक्षा पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि उनकी वास्तविक योग्यता और निरंतर तैयारी को उचित महत्व मिलेगा।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

परिणाम अंक का सूचक है, क्षमता और कौशल का नहीं

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डॉ विजय गर्ग
आज के समय में परीक्षा परिणाम को ही विद्यार्थियों की योग्यता का सबसे बड़ा मापदंड मान लिया गया है। जिस छात्र के अधिक अंक आते हैं, उसे होनहार और सफल माना जाता है, जबकि कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अक्सर कमजोर समझ लिया जाता है। लेकिन वास्तव में परीक्षा परिणाम केवल अंकों का सूचक होता है, किसी व्यक्ति की वास्तविक क्षमता, प्रतिभा और कौशल का नहीं।

हर विद्यार्थी की सोच, रुचि और योग्यता अलग-अलग होती है। कोई गणित में अच्छा होता है, कोई विज्ञान में, तो कोई खेल, संगीत, चित्रकला, लेखन या तकनीकी कार्यों में अपनी विशेष प्रतिभा रखता है। परीक्षा प्रणाली मुख्य रूप से याददाश्त और कुछ घंटों के प्रदर्शन को मापती है। यह किसी छात्र की रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता, व्यवहारिक ज्ञान, आत्मविश्वास, समस्या समाधान की योग्यता और जीवन कौशल को पूरी तरह नहीं आंक सकती।

इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं जहाँ सामान्य अंक प्राप्त करने वाले लोगों ने जीवन में असाधारण सफलता हासिल की। कई महान वैज्ञानिक, उद्योगपति, खिलाड़ी और कलाकार विद्यालयी परीक्षाओं में टॉपर नहीं थे, फिर भी उन्होंने अपने कौशल, मेहनत और लगन के बल पर दुनिया में पहचान बनाई। इससे स्पष्ट होता है कि सफलता केवल अंकों पर निर्भर नहीं करती।

दुर्भाग्य की बात यह है कि आज विद्यार्थियों पर अच्छे अंक लाने का अत्यधिक दबाव बनाया जाता है। माता-पिता, रिश्तेदार और समाज कई बार बच्चों की तुलना दूसरों से करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि अनेक विद्यार्थी तनाव, चिंता और हीन भावना का शिकार हो जाते हैं। कुछ बच्चे तो अपनी वास्तविक प्रतिभा को पहचान ही नहीं पाते क्योंकि वे केवल अंकों की दौड़ में उलझे रहते हैं।

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। विद्यालयों को चाहिए कि वे बच्चों के कौशल और रुचियों को पहचानें तथा उन्हें आगे बढ़ने के अवसर दें। खेल, कला, तकनीकी शिक्षा, संचार कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को भी उतना ही महत्व मिलना चाहिए जितना अकादमिक विषयों को दिया जाता है।

आज का युग कौशल आधारित युग है। डिजिटल दुनिया में वही व्यक्ति आगे बढ़ता है जिसके पास नई सोच, रचनात्मकता, सीखने की इच्छा और व्यावहारिक क्षमता होती है। कंपनियाँ और संस्थाएँ भी अब केवल डिग्री या अंकों को नहीं, बल्कि व्यक्ति के कौशल और कार्य क्षमता को अधिक महत्व देने लगी हैं।

इसलिए विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि परीक्षा परिणाम जीवन का अंतिम सत्य नहीं है। अधिक अंक सफलता की गारंटी नहीं होते और कम अंक असफलता का प्रमाण नहीं होते। जीवन में निरंतर सीखना, मेहनत करना, अनुशासन बनाए रखना और अपने कौशल को विकसित करना ही वास्तविक सफलता का मार्ग है।

अंततः यह कहना उचित होगा कि अंक केवल कागज पर लिखे हुए नंबर हैं, जबकि वास्तविक क्षमता और कौशल व्यक्ति के व्यवहार, सोच, मेहनत और प्रतिभा में छिपे होते हैं। समाज को चाहिए कि वह बच्चों का मूल्यांकन केवल अंकों से नहीं, बल्कि उनकी संपूर्ण योग्यता और संभावनाओं के आधार पर करे।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

खेल पत्रकारिता: हर खेल के पीछे की आवाज

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डॉ विजय गर्ग
खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे जुनून, अनुशासन, संघर्ष और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी हैं। क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, टेनिस या ओलंपिक—हर खेल लोगों को जोड़ता है और उनके भीतर उत्साह भर देता है। लेकिन हर रोमांचक मुकाबले, हर जीत और हर खिलाड़ी की कहानी को जनता तक पहुँचाने वाला एक महत्वपूर्ण माध्यम होता है—खेल पत्रकारिता।

खेल पत्रकारिता केवल स्कोर बताने तक सीमित नहीं है। यह खिलाड़ियों की मेहनत, संघर्ष, जीत, हार और भावनाओं को शब्दों में ढालने की कला है। खेल पत्रकार समाज और खिलाड़ियों के बीच एक मजबूत पुल का काम करते हैं। वे समाचार पत्रों, टेलीविजन, रेडियो, वेबसाइटों और सोशल मीडिया के माध्यम से करोड़ों लोगों तक खेलों की दुनिया पहुँचाते हैं।

खेल पत्रकारिता का अर्थ

खेल पत्रकारिता पत्रकारिता की वह शाखा है जो खेलों से जुड़ी खबरों, टूर्नामेंटों, खिलाड़ियों, विश्लेषण और घटनाओं की रिपोर्टिंग करती है। इसमें मैच रिपोर्टिंग, खिलाड़ियों के इंटरव्यू, लाइव कमेंट्री, खेल विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट शामिल होती हैं।

खेल पत्रकार का कार्य केवल घटनाओं का वर्णन करना नहीं होता, बल्कि खेल के पीछे छिपी कहानी को सामने लाना भी होता है।

खेल पत्रकारिता का महत्व

1. दर्शकों को खेलों से जोड़ना

हर व्यक्ति स्टेडियम में जाकर मैच नहीं देख सकता। खेल पत्रकार टीवी, अखबार और डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों तक हर महत्वपूर्ण जानकारी पहुँचाते हैं।

2. युवाओं को प्रेरित करना

जब खिलाड़ी अपनी मेहनत और संघर्ष से सफलता प्राप्त करते हैं, तो उनकी कहानियाँ युवाओं को प्रेरित करती हैं। खेल पत्रकार इन प्रेरणादायक कहानियों को समाज तक पहुँचाते हैं।

3. खेल संस्कृति को बढ़ावा देना

खेल पत्रकारिता लोगों में खेलों के प्रति रुचि पैदा करती है। यह फिटनेस, अनुशासन और टीम भावना के महत्व को भी उजागर करती है।

4. भ्रष्टाचार और गलतियों को उजागर करना

जिम्मेदार खेल पत्रकार डोपिंग, भ्रष्टाचार, गलत चयन प्रक्रिया और खेल प्रबंधन की कमियों को भी सामने लाते हैं। इससे खेलों में पारदर्शिता बनी रहती है।

एक अच्छे खेल पत्रकार की विशेषताएँ

खेलों का ज्ञान

एक खेल पत्रकार को विभिन्न खेलों के नियमों, इतिहास और तकनीकी पहलुओं की अच्छी समझ होनी चाहिए।

प्रभावशाली संचार कौशल

स्पष्ट और रोचक लेखन तथा बोलने की क्षमता खेल पत्रकार के लिए अत्यंत आवश्यक है।

विश्लेषण करने की क्षमता

खेल पत्रकार को केवल मैच का वर्णन नहीं करना चाहिए, बल्कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन और रणनीति का विश्लेषण भी करना चाहिए।

तेज़ी और सटीकता

डिजिटल युग में खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं। इसलिए खेल पत्रकार को तेज़ी से लेकिन सही जानकारी देनी होती है।

खेल पत्रकारिता का विकास

पहले खेल समाचार केवल अखबारों तक सीमित थे। बाद में रेडियो और टेलीविजन ने खेल पत्रकारिता को नया आयाम दिया। आज इंटरनेट और सोशल मीडिया ने इसे और अधिक तेज़, आधुनिक और प्रभावशाली बना दिया है।

अब दर्शकों को मिलते हैं:

लाइव स्कोर

तुरंत अपडेट

मैच हाइलाइट्स

खिलाड़ियों के आँकड़े

विशेषज्ञों की राय

डिजिटल मीडिया ने खेल पत्रकारिता को अधिक इंटरैक्टिव और व्यापक बना दिया है।

खेल पत्रकारिता की चुनौतियाँ

हालाँकि खेल पत्रकारिता रोमांचक क्षेत्र है, लेकिन इसमें कई चुनौतियाँ भी हैं।

तेज़ी से खबर देने का दबाव

सोशल मीडिया पर आलोचना

अफवाहों और फेक न्यूज़ का खतरा

व्यावसायिक दबाव और पक्षपात

इन परिस्थितियों में निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।

खेल पत्रकारिता में करियर

आज खेल पत्रकारिता में रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध हैं:

खेल रिपोर्टर

टीवी एंकर

कमेंटेटर

खेल विश्लेषक

डिजिटल कंटेंट क्रिएटर

फोटो पत्रकार

सोशल मीडिया मैनेजर

खेल उद्योग के बढ़ने के साथ-साथ इस क्षेत्र में करियर की संभावनाएँ भी लगातार बढ़ रही हैं।

तकनीक की भूमिका

तकनीक ने खेल पत्रकारिता को पूरी तरह बदल दिया है। आधुनिक कैमरे, लाइव स्ट्रीमिंग, डेटा विश्लेषण और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने रिपोर्टिंग को अधिक प्रभावशाली बनाया है।

अब पत्रकार:

लाइव कवरेज कर सकते हैं

खिलाड़ियों के आँकड़ों का विश्लेषण कर सकते हैं

दर्शकों से तुरंत जुड़ सकते हैं

वीडियो और पॉडकास्ट के माध्यम से सामग्री प्रस्तुत कर सकते हैं

निष्कर्ष

खेल पत्रकारिता हर खेल की आत्मा और आवाज़ है। यह केवल मैचों की जानकारी नहीं देती, बल्कि खिलाड़ियों के संघर्ष, समर्पण और सफलता की कहानी को समाज तक पहुँचाती है।

आज के डिजिटल युग में खेल पत्रकारिता का महत्व और भी बढ़ गया है। यह युवाओं को प्रेरित करती है, खेल संस्कृति को मजबूत बनाती है और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है।

एक सच्चा खेल पत्रकार केवल खबरें नहीं लिखता, बल्कि खेलों के इतिहास, भावनाओं और जज़्बे को भी जीवित रखता है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात के राजनीतिक मायने: क्या फिर भाजपा के साथ खड़े होंगे मुन्नू बाबू?

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– 1998 से योगी आदित्यनाथ और चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू के रहे करीबी संबंध, मुलाकात के बाद फर्रुखाबाद की राजनीति में तेज हुई चर्चाएं

यूथ इंडिया | लखनऊ/फर्रुखाबाद

राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व सांसद चन्द्रभूषण सिंह की हालिया मुलाकात ने फर्रुखाबाद की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक भूमिका के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू वर्ष 1996 में भारतीय जनता पार्टी से कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद बने थे। वहीं 1998 में मात्र 26 वर्ष की उम्र में योगी आदित्यनाथ देश के सबसे युवा सांसद बनकर संसद पहुंचे थे। उस दौर में दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंध बेहद घनिष्ठ बताए जाते हैं। दिल्ली स्थित नॉर्थ एवेन्यू आवास परिसर में योगी आदित्यनाथ नीचे के फ्लैट में रहते थे, जबकि मुन्नू बाबू ऊपर के फ्लैट में। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार उस समय संसदीय और संगठनात्मक मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच अक्सर लंबी चर्चा हुआ करती थी।

बाद के वर्षों में प्रदेश की राजनीति बदली और वर्ष 2004 में मुन्नू बाबू समाजवादी पार्टी से सांसद बने। हालांकि 2009 में परिसीमन के बाद भोगांव विधानसभा हटने और अलीगंज क्षेत्र जुड़ने से राजनीतिक समीकरण बदल गए। अंदरूनी विरोध और कथित भीतरघात के चलते उन्हें चुनावी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2012 में उन्होंने अपने पुत्र सौरभ सिंह को भोजपुर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया, लेकिन जीत नहीं मिल सकी। इसके बावजूद 2012 से 2017 तक उनका भाजपा से राजनीतिक जुड़ाव बना रहा।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के एक प्रभावशाली वर्ग की इच्छा थी कि फर्रुखाबाद सीट से मुन्नू बाबू को उम्मीदवार बनाया जाए। लेकिन परिस्थितियां अलग रहीं और समाजवादी पार्टी से रमेश्वर यादव मैदान में उतरे। इसके बाद धीरे-धीरे मुन्नू बाबू का समाजवादी पार्टी से मोहभंग बढ़ता गया।
सूत्रों का दावा है कि समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे पीडीए फार्मूले और कथित सवर्ण विरोधी मानसिकता से भी वे असहज रहे। पार्टी की एक बैठक में बसपा से आए नेता सर्वेश अंबेडकर द्वारा कथित तौर पर उनकी राजनीतिक “वोटिंग” किए जाने की घटना ने भी उन्हें गहरा आहत किया। उनके करीबी मानते हैं कि यह घटनाक्रम उनके राजनीतिक रुख में बदलाव का बड़ा कारण बना।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाने वाले मुन्नू बाबू की मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान विशेष आत्मीयता दिखाई दी। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री मुलाकात के दौरान बेहद सहज और प्रसन्न नजर आए, जबकि हाल के समय में फर्रुखाबाद के कई अन्य नेताओं से मुलाकातों में ऐसा उत्साह नहीं दिखा था।
अब इस मुलाकात के बाद यह कयास और तेज हो गए हैं कि चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू एक बार फिर खुलकर भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक अभियान को मजबूती देते दिखाई पड़ सकते हैं। वहीं दूसरी ओर इस घटनाक्रम को समाजवादी पार्टी के लिए भी झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिले में सपा के पुराने वरिष्ठ नेताओं का प्रभाव लगातार कम हुआ है और अब पार्टी काफी हद तक डॉ. नवल किशोर शाक्य जैसे नेताओं के भरोसे दिखाई दे रही है।
फिलहाल मुन्नू बाबू की यह मुलाकात फर्रुखाबाद की राजनीति में आने वाले दिनों के बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात के राजनीतिक मायने: क्या फिर भाजपा के साथ खड़े होंगे मुन्नू बाबू?

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– 1998 से योगी आदित्यनाथ और चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू के रहे करीबी संबंध, मुलाकात के बाद फर्रुखाबाद की राजनीति में तेज हुई चर्चाएं

यूथ इंडिया | लखनऊ/फर्रुखाबाद

राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व सांसद चन्द्रभूषण सिंह की हालिया मुलाकात ने फर्रुखाबाद की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक भूमिका के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

 

चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू वर्ष 1996 में भारतीय जनता पार्टी से कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद बने थे। वहीं 1998 में मात्र 26 वर्ष की उम्र में योगी आदित्यनाथ देश के सबसे युवा सांसद बनकर संसद पहुंचे थे। उस दौर में दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंध बेहद घनिष्ठ बताए जाते हैं। दिल्ली स्थित नॉर्थ एवेन्यू आवास परिसर में योगी आदित्यनाथ नीचे के फ्लैट में रहते थे, जबकि मुन्नू बाबू ऊपर के फ्लैट में। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार उस समय संसदीय और संगठनात्मक मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच अक्सर लंबी चर्चा हुआ करती थी।

 

बाद के वर्षों में प्रदेश की राजनीति बदली और वर्ष 2004 में मुन्नू बाबू समाजवादी पार्टी से सांसद बने। हालांकि 2009 में परिसीमन के बाद भोगांव विधानसभा हटने और अलीगंज क्षेत्र जुड़ने से राजनीतिक समीकरण बदल गए। अंदरूनी विरोध और कथित भीतरघात के चलते उन्हें चुनावी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2012 में उन्होंने अपने पुत्र सौरभ सिंह को भोजपुर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया, लेकिन जीत नहीं मिल सकी। इसके बावजूद 2012 से 2017 तक उनका भाजपा से राजनीतिक जुड़ाव बना रहा।

 

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के एक प्रभावशाली वर्ग की इच्छा थी कि फर्रुखाबाद सीट से मुन्नू बाबू को उम्मीदवार बनाया जाए। लेकिन परिस्थितियां अलग रहीं और समाजवादी पार्टी से रमेश्वर यादव मैदान में उतरे। इसके बाद धीरे-धीरे मुन्नू बाबू का समाजवादी पार्टी से मोहभंग बढ़ता गया।

सूत्रों का दावा है कि समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे पीडीए फार्मूले और कथित सवर्ण विरोधी मानसिकता से भी वे असहज रहे। पार्टी की एक बैठक में बसपा से आए नेता सर्वेश अंबेडकर द्वारा कथित तौर पर उनकी राजनीतिक “वोटिंग” किए जाने की घटना ने भी उन्हें गहरा आहत किया। उनके करीबी मानते हैं कि यह घटनाक्रम उनके राजनीतिक रुख में बदलाव का बड़ा कारण बना।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाने वाले मुन्नू बाबू की मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान विशेष आत्मीयता दिखाई दी। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री मुलाकात के दौरान बेहद सहज और प्रसन्न नजर आए, जबकि हाल के समय में फर्रुखाबाद के कई अन्य नेताओं से मुलाकातों में ऐसा उत्साह नहीं दिखा था।

अब इस मुलाकात के बाद यह कयास और तेज हो गए हैं कि चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू एक बार फिर खुलकर भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक अभियान को मजबूती देते दिखाई पड़ सकते हैं। वहीं दूसरी ओर इस घटनाक्रम को समाजवादी पार्टी के लिए भी झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिले में सपा के पुराने वरिष्ठ नेताओं का प्रभाव लगातार कम हुआ है और अब पार्टी काफी हद तक डॉ. नवल किशोर शाक्य जैसे नेताओं के भरोसे दिखाई दे रही है।

फिलहाल मुन्नू बाबू की यह मुलाकात फर्रुखाबाद की राजनीति में आने वाले दिनों के बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।