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Sunday, June 7, 2026
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भाजपा सरकार में महंगाई चरम पर, किसान-नौजवान परेशान : श्याम लाल पाल

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इटावा। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश और देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे किसान, नौजवान और आम जनता सबसे अधिक प्रभावित हो रही है।
इटावा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान श्याम लाल पाल ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में महंगाई चरम पर पहुंच गई है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
सपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसान अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं पा रहा है, जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर नौजवान रोजगार के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को नौकरी देना ही नहीं चाहती और भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार देरी की जा रही है।
श्याम लाल पाल ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई आज प्रदेश की सबसे बड़ी समस्याएं बन चुकी हैं। सरकार को जनता के बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन वह वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का काम कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता भाजपा सरकार को उसके कामकाज के आधार पर जवाब देगी और समाजवादी पार्टी जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी।

हाईकोर्ट का यूपी पुलिस और गृह विभाग पर सख्त प्रहार, मुख्य सचिव से जवाब तलब

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर गंभीर नाराजगी जताते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है, वहीं अपर मुख्य सचिव (गृह) को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट उस समय और अधिक सख्त हो गया जब बिना किसी निर्देश के डीसीपी साउथ न्यायालय में उपस्थित हो गए। कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जनसुनवाई और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी छोड़कर अधिकारियों का इस प्रकार न्यायालय पहुंचना जनहित के खिलाफ है। न्यायालय ने इसे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में गंभीर खामी और लापरवाही का उदाहरण बताया।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारी विभाग न्यायालय के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि न्यायालय की निगरानी वाले मामलों में यह स्थिति है तो सामान्य मामलों में आम जनता को किस प्रकार की प्रशासनिक व्यवस्था मिल रही होगी।

न्यायालय की तल्ख टिप्पणियों से साफ संकेत मिले हैं कि पुलिस और गृह विभाग की जवाबदेही को लेकर अदालत अब और सख्त रुख अपनाने के मूड में है। मामले की अगली सुनवाई में मुख्य सचिव और गृह विभाग की ओर से दाखिल जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट की यह सख्त टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विभिन्न मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब निगाहें 15 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जब सरकार को अपने पक्ष और कार्यप्रणाली पर अदालत के समक्ष जवाब देना होगा।

व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग ए मेमोइर’ आत्म कथा मे बोली पूर्व प्रथम महिला डॉ. जिल बाइडन

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20 हजार डॉलर की कीमत बनी वजह :मोदी का दिया हीरा अमेरिकी सरकार को लौटाना पड़ा

पीएम मोदी के उपहार में मिले 7.5 कैरेट हीरे को अपने पास रखना चाहती थीं जिल बाइडन

 

वॉशिंगटन। अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला जिल बाइडन ने खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उपहार में दिया गया 7.5 कैरेट का लैब-ग्रोन हीरा उन्हें बेहद पसंद था और वह उसे अपने पास रखना चाहती थीं, लेकिन अमेरिकी नैतिक नियमों के चलते ऐसा नहीं कर सकीं। अपनी नई आत्मकथा ‘व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग: ए मेमोइर’ में उन्होंने इस घटना का विस्तार से उल्लेख किया है।

जिल बाइडन ने बताया कि जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान उन्हें यह विशेष हीरा भेंट किया गया था। शुरुआत में उन्होंने इसे खरीदकर अपने पास रखने का विचार बनाया था, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी कीमत करीब 2,500 डॉलर बताई थी। हालांकि बाद में अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी आधिकारिक कीमत 20,000 डॉलर आंकी, जिसके बाद उन्होंने इसे खरीदने का विचार छोड़ दिया।

उन्होंने लिखा कि अमेरिकी नियमों के अनुसार किसी विदेशी नेता द्वारा दिया गया महंगा उपहार व्यक्तिगत संपत्ति नहीं माना जाता, बल्कि वह संघीय सरकार की संपत्ति बन जाता है। यही कारण रहा कि वह इस हीरे को स्थायी रूप से अपने पास नहीं रख सकीं।

जिल बाइडन ने बताया कि कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस हीरे को अंगूठी में जड़वाकर कई आधिकारिक कार्यक्रमों में पहना, लेकिन व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद उसे सरकार को वापस करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए सबसे यादगार उपहारों में से एक था।

प्रधानमंत्री मोदी की 2023 की अमेरिका यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती मिली थी।

महंगाई की आग में झुलसती रसोई, घरेलू गैस सिलेंडर ₹29 महंगा

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नई दिल्ली। देश की आम जनता पर महंगाई का एक और करारा प्रहार हुआ है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों से पहले ही परेशान लोगों की रसोई अब और महंगी हो गई है। घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में ₹29 की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई कीमतें लागू होते ही करोड़ों परिवारों का मासिक बजट बिगड़ गया है।

नई दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू गैस सिलेंडर अब ₹942 में मिलेगा। मुंबई में इसकी कीमत ₹941.50, कोलकाता में ₹968 और चेन्नई में ₹957.50 पहुंच गई है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच यह बढ़ोतरी आम परिवारों के लिए किसी झटके से कम नहीं है।
गौरतलब है कि बीते कुछ महीनों में खाद्य पदार्थों, बिजली, परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़े हैं। अब रसोई गैस महंगी होने से गृहणियों की चिंता और बढ़ गई है। मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए हर महीने सिलेंडर भरवाना पहले से ही मुश्किल हो रहा था, ऐसे में नई वृद्धि ने उनकी परेशानियों में इजाफा कर दिया है।
उज्ज्वला योजना के लाखों लाभार्थी भी इस बढ़ोतरी से प्रभावित होंगे। कई ग्रामीण परिवार पहले ही गैस रिफिल कराने में आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और वैश्विक परिस्थितियों का असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है।
महंगाई को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, जबकि सरकार का दावा है कि वैश्विक दबावों के बावजूद देश में ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास किया जा रहा है।
देशभर में अब एक ही चर्चा है कि आखिर महंगाई की इस मार से आम आदमी को राहत कब मिलेगी। रसोई से लेकर सड़क तक बढ़ती कीमतों ने जनता की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है और घरेलू गैस की नई कीमतों ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है।

दिखावे की बैठकों से नहीं बचेगी विरासत, धूल फांक रही हैं फर्रुखाबाद की धरोहरें

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फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के नाम पर एक बार फिर बैठक हुई, प्रस्ताव पारित हुए, समितियां बनाने की घोषणा हुई और दो महीने में रिपोर्ट तैयार करने का दावा भी कर दिया गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल बैठकों और प्रस्तावों से इतिहास बच जाएगा? पिछले कई वर्षों का अनुभव तो यही बताता है कि जिले की अधिकांश ऐतिहासिक धरोहरें आज भी उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता की शिकार हैं।

पांचाल क्षेत्र महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। श्रृंगीरामपुर, कंपिल, पांडेश्वरनाथ, गंगा तट के अनेक प्राचीन स्थल और सैकड़ों वर्ष पुराने मंदिर आज भी जिले की पहचान हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश स्थलों पर न तो समुचित संरक्षण है और न ही पर्यटन की मूलभूत सुविधाएं। कई स्थानों पर जाने के लिए सड़कें तक बदहाल हैं। पुरातात्विक महत्व के अनेक स्थल झाड़ियों और अव्यवस्था में दबे पड़े हैं।

विडंबना यह है कि हर कुछ वर्षों में इतिहास बचाने, पर्यटन बढ़ाने और धरोहरों के संरक्षण के नाम पर बैठकें होती हैं, लेकिन धरातल पर परिणाम दिखाई नहीं देते। यदि वास्तव में धरोहरों को बचाने की गंभीर इच्छा होती तो अब तक जिले के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण हो चुका होता, उनकी डिजिटल मैपिंग हो चुकी होती और उनके संरक्षण के लिए स्थायी बजट भी तय किया जा चुका होता।

गंगा तट पर थीम पार्क, पुस्तकालय और पर्यटन विकास की बातें सुनने में अच्छी लगती हैं, लेकिन पहले उन धरोहरों को बचाना आवश्यक है जो आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। जिन स्थलों पर सूचना पट्ट तक नहीं हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था नहीं है और जहां अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है, वहां नई योजनाओं की घोषणाएं कहीं न कहीं दिखावटी प्रतीत होती हैं।

सवाल यह भी है कि पिछले दस वर्षों में शोध सहयोग देने वाली संस्थाओं की रिपोर्टों और सुझावों पर कितना अमल हुआ? यदि इतने वर्षों से शोध कार्य हो रहे हैं तो उनकी उपलब्धियां आम जनता के सामने क्यों नहीं हैं? कितने स्थलों का संरक्षण हुआ, कितने स्थानों का विकास हुआ और कितने नए तथ्य सामने आए, इसका सार्वजनिक लेखा-जोखा भी होना चाहिए।

फर्रुखाबाद की धरोहरें केवल ईंट-पत्थरों की संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि यह जिले की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक स्मृति हैं। यदि इन्हें बचाने के लिए वास्तविक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई तो आने वाली पीढ़ियां केवल बैठकों की कार्यवाही पढ़ेंगी और धरोहरें इतिहास के पन्नों में सिमट जाएंगी।

संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूर्ण करें: डीएम

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फर्रुखाबाद। आगामी मानसून और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई, लोक निर्माण, विद्युत, पंचायती राज एवं आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया और बाढ़ से निपटने की तैयारियों की जानकारी दी।

जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि संभावित बाढ़ को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी कर ली जाएं तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने राहत सामग्री, खाद्य पैकेट, लाइफ जैकेट, नाव, सर्च लाइट, तटबंध सुरक्षा सामग्री एवं अन्य उपकरणों की उपलब्धता और रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

डीएम ने जनपद स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने, संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां स्थापित करने तथा जरूरत पड़ने पर अस्थायी बाढ़ शरणालयों को तत्काल संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शरणालयों में भोजन, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए।

स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दवाओं, एम्बुलेंस और चिकित्सकीय टीमों की उपलब्धता बनाए रखने तथा जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। वहीं लोक निर्माण विभाग को संभावित रूप से प्रभावित मार्गों की पहचान कर वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत चौपालों के आयोजन, जन-जागरूकता कार्यक्रमों के संचालन और नियमित मॉक ड्रिल कराने के निर्देश देते हुए कहा कि नागरिकों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में अपर जिलाधिकारी, सभी उप जिलाधिकारी, जिला स्तरीय अधिकारी तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे।