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Monday, May 18, 2026
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एमआईटी-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटीके छात्रों का वैश्विक मंच पर परचम

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ॲपल ‘स्वीफ्ट स्टूडेंट चैलेंज 2026’ में पाई बड़ी सफलता

•एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के दो छात्रों ने वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित ‘स्वीफ्ट स्टूडेंट चैलेंज 2026’ में शीर्ष 50 ‘डिस्टिंग्विश्ड विनर्स’ में अपनी जगह बनाई।

नई दिल्ली: एक अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि के अंतर्गत, ‘एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी’ के दो छात्रों ने प्रतिष्ठित ‘स्विफ्ट स्टूडेंट चैलेंज 2026’ में विश्व भर के शीर्ष 50 ‘डिस्टिंग्विश्ड विनर्स’ (प्रतिष्ठित विजेताओं) में अपनी जगह बनाई है । इस अद्वितीय सफलता के फलस्वरूप उन्हें कैलिफ़ोर्निया के क्यूपर्टिनो स्थित ‘ एप्पल पार्क’ में आयोजित होने वाले एप्पल के ‘वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस’ 2026 में सम्मिलित होने का विशेष अवसर प्राप्त हुआ है । इन दो उत्कृष्ट विजेताओं के अतिरिक्त, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के 10 अन्य छात्रों ने भी वैश्विक स्तर पर शीर्ष 350 में स्थान प्राप्त किया है । विश्वविद्यालय के ‘आईओएस डेवलपमेंट सेंटर’ के लिए यह सफलता एक ऐतिहासिक उपलब्धि सिद्ध हुई है।

एप्पल का ‘स्विफ्ट स्टूडेंट चैलेंज’ कार्यक्रम भावी पीढ़ी के डेवलपर्स, क्रिएटर्स और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का कार्य करता है । इस वैश्विक प्रतियोगिता में दुनिया भर से हजारों छात्र डेवलपर्स भाग लेते हैं, जिन्हें अपनी रचनात्मकता और तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से वास्तविक जीवन की चुनौतियों का समाधान करने वाले अभिनव एप्लीकेशन विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाता है ।
विजेता और उनके नवाचार

• स्टेडी हैंड्स – गायत्री गौंडदकर द्वारा निर्मित इस उत्कृष्ट प्रोजेक्ट का उद्देश्य उन व्यक्तियों की सहायता करना है जो हाथों के कंपन की समस्या से ग्रसित हैं । यह एप्लीकेशन ‘रीयल-टाइम मोशन स्टेबिलाइजेशन’ और निर्देशित अभ्यासों के माध्यम से उपयोगकर्ताओं के मोटर कंट्रोल में सुधार करता है, जिससे वे सहजता से चित्रकारी कर सकें ।

• एअरोलैब : श्लोका शेट्टी द्वारा विकसित ‘एअरोलैब’ एक संवादात्मक शैक्षणिक मंच प्रदान करता है । यह मुख्य रूप से फॉर्मूला 1 कारों जैसी उच्च-प्रदर्शन प्रणालियों में प्रयुक्त होने वाली जटिल ‘एअरोडायनामिक’ संकल्पनाओं को सरल बनाता है, जिससे यह छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए अधिक सुगम हो जाता है ।

चैलेंज के सभी विजेताओं को एप्पल की ओर से आधिकारिक मान्यता पत्र, व्यक्तिगत ‘एप्पल डेवलपर प्रोग्राम’ की सदस्यता और ‘एअर पॉड्स मॅक्स’ प्रदान कर पुरस्कृत किया जाएगा । एप्पल और इंफोसिस के सहयोग से संचालित ‘आईओएस डेवलपमेंट सेंटर’ के माध्यम से नवाचार, रचनात्मकता और उद्योग-अनुकूल कौशलों को बढ़ावा देने की एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को यह वैश्विक मंच रेखांकित करता है ।

लखनऊ: मड़ियांव पुलिस ने एक दिन में ढाबा संचालक हत्याकांड का किया खुलासा, 4 आरोपियों को दबोचा

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लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ (Lucknow) के मड़ियांव इलाके के भिटौली तिराहे के पास यादव ढाबा एंड फैमिली रेस्टोरेंट (Yadav Dhaba And Family Restaurant) के मालिक विजय यादव को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने 24 घंटे में खुलासा किया है। मड़ियांव पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह वारदात एक लड़के की पिटाई का वीडियो बनाने के विरोध में हुई थी।

जानकारी के अनुसार, सैरपुर इलाके के तरहिया निवासी विजय यादव (28) को बीते रविवार को गोली मार दी गई थी। भिटौली तिराहे के पास यादव ढाबा एंड फैमिली रेस्टोरेंट के मालिक विजय शाम को ढाबे के पास मौजूद थे। तभी बाइक सवार 2 युवकों ने वारदात को अंजाम दिया। मृतक के भाई आयुष यादव ने मड़ियांव थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके भाई विजय यादव और दोस्त विवेक पांडे एक लड़के की पिटाई का वीडियो बना रहे थे।

इसी बात को लेकर आरोपियों ने उनसे गाली-गलौज और हाथापाई की। उन्होंने जान से मारने की धमकी देकर मौके से चले गए। शिकायत के अनुसार, घटना के लगभग 20 मिनट बाद दो लड़के बाइक से वापस आए। उन्होंने विजय यादव पर गोली चला दी। गोली विजय के सिर में लगी, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

क्राइम ब्रांच, डीसीपी नॉर्थ की क्राइम टीम और मड़ियांव पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। विजय की मौत के बाद पुलिस ने मामले में हत्या की धारा 103(1) बीएनएस जोड़ दी थी। मड़ियांव पुलिस ने आज सोमवार को शाम 6:10 बजे मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए घैला पुल के नीचे नदी किनारे से चारों आरोपियों को दबोच लिया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान निखिल पांडे (कल्याणपुर, गुडंबा, लखनऊ, मूल निवासी लखीमपुर), अतुल सिंह (जगरानी अस्पताल के पीछे, गुडंबा, मूल निवासी सीतापुर), नवीन पांडे (कल्याणपुर, गुडंबा, लखनऊ, मूल निवासी लखीमपुर) और ऋषभ कुमार शुक्ला (शमशेरबाग, सीतापुर, मूल निवासी सीतापुर) के रूप में हुई है।

पुलिस ने आरोपियों के पास से हत्या में इस्तेमाल किए गए दो देशी तमंचे (315 बोर), एक खाली खोखा और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इसके अलावा, बिना नंबर की हीरो स्प्लेंडर प्लस और यूपी 34 एन 3310 नंबर की हीरो होंडा स्प्लेंडर बाइक भी जब्त की गई हैं।

बच्चों को छुई-मुई मत बनाइए, छोटे बच्चों से काम कराने पर शिक्षकों को सज़ा नहीं सम्मान मिलना चाहिए : मुख्यमंत्री

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– छोटे बच्चों से काम कराने पर शिक्षकों को सज़ा नहीं सम्मान मिलना चाहिए : मुख्यमंत्री

– योगी आदित्यनाथ के इस बेतुके बयान के बाद पूरे प्रदेश के लापरवाह और कामचोर शिक्षकों में खुशी का इजाफा

लखनऊ। राजधानी में आयोजित बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों के श्रमदान और स्कूलों में काम करने को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसकी पूरे प्रदेश में चर्चा शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि स्कूलों में बच्चों से स्वच्छता और छोटे-छोटे काम कराना गलत नहीं है, बल्कि यह उनके संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का हिस्सा है। भारत आत्मनिर्भर हो रहा है। मुख्यमंत्री के इस बेतुके बयान के बाद पूरे प्रदेश के लापरवाह और कामचोर शिक्षकों में खुशी की लहर का इजाफा हो गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजकल स्कूलों में बच्चों के झाड़ू लगाने, सफाई करने या श्रमदान करने के वीडियो वायरल होते ही शिक्षकों पर कार्रवाई शुरू हो जाती है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ऐसे शिक्षकों से स्पष्टीकरण मत मांगिए, बल्कि उन्हें बुलाकर सम्मानित करिए। वे भारत की भावी पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बच्चों को जरूरत से ज्यादा नाज़ुक बनाने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है। उन्होंने मंच से कहा, “बच्चों को छुई-मुई मत बनाइए। उन्हें इतना तेज और मजबूत बनाइए कि कोई आंख उठाकर देखने से भी डरे।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ताकत केवल पढ़ाई से नहीं, बल्कि अनुशासन, संस्कार और स्वच्छता जैसी आदतों से पैदा होती है।

 

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के संस्कारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन कर रहे हैं और इसे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की सोच बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि उनका उद्देश्य बच्चों में जिम्मेदारी, अनुशासन और स्वच्छता की भावना विकसित करना है।

 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और नई पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ मजबूत संस्कार भी दिए जाएं।

प्रदेश में 27.94 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध

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*यूपी के किसानों को अनुदान पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करा रही सरकार*

 

*गत वर्ष की तुलना में प्रदेश में 3.13 लाख मीट्रिक टन अधिक उर्वरक उपलब्ध*

 

*उर्वरकों के दुरुपयोग और कालाबाजारी को रोकने के लिए फार्मर आईडी के आधार पर ही की जाएगी बिक्री*

 

किसानों से संतुलित मात्रा में उर्वरक क्रय करने और समय से पूर्व अत्यधिक खरीद व भंडारण न करने की अपील

 

लखनऊ, 18 मई। प्रदेश में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। वर्तमान में प्रदेश में 13.28 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 05.23 लाख मी. टन डीएपी, 04.81 लाख मी. टन एनपीके, 03.69 लाख मी. टन एसएसपी एवं 0.93 लाख मी. टन एमओपी को मिलाकर कुल 27.94 लाख मी. टन उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता है। पिछले वर्ष की तुलना में 3.13 लाख मी. टन अधिक उर्वरक उपलब्ध है।

 

प्रदेश सरकार किसानों को उनकी आवश्यकता अनुसार रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने को संकल्पित है। इसी के दृष्टिगत कृषि विभाग द्वारा प्रदेश के किसानों के लिये अनुदान पर सभी प्रकार के उर्वरकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा किसानों की आवश्यकतानुसार रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार के सक्रिय सहयोग से प्रचुर मात्रा में उर्वरकों की अनवरत उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। आगामी खरीफ फसलों की मांग के अनुसार भारत सरकार द्वारा लगातार आवंटन करते हुए उर्वरकों की निरन्तर आपूर्ति की जा रही है।

अनुदानित उर्वरक का दुरुपयोग रोकने के लिये शासन द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि उर्वरकों का विक्रय किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) उपलब्ध कराने वाले कृषकों को उनकी जोत सम्बन्धी अभिलेखों के आधार पर ही किया जाय। कृषि विभाग द्वारा अनुदानित उर्वरकों (यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी एवं एसएसपी) के साथ किसी अन्य निवेश की टैगिंग को पूर्णतया प्रतिबंधित किया गया है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरकों की सुगमतापूर्वक खरीद के लिये फार्मर आईडी के साथ विक्रय केन्द्रों पर पहुंचें और अपनी बोई गई फसल के लिये कृषि वैज्ञानिकों द्वारा संस्तुत मात्रा के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों की खरीद एवं प्रयोग करें।

कलेक्ट्रेट संग्रह अनुभाग में डीएम का औचक निरीक्षण, अभिलेख व्यवस्था और वसूली कार्यों पर सख्त निर्देश

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फर्रुखाबाद: कलेक्ट्रेट परिसर स्थित संग्रह अनुभाग का जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सोमवार को औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए निरीक्षण से विभागीय कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति देखने को मिली। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यालय में रखी पत्रावलियों, रजिस्टरों एवं महत्वपूर्ण अभिलेखों के रख-रखाव की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया तथा रिकॉर्ड को व्यवस्थित ढंग से सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।डीएम ने अधिकारियों और कर्मचारियों से अभिलेखों के रखरखाव, लंबित प्रकरणों तथा राजस्व वसूली की प्रगति के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकारी अभिलेख प्रशासन की महत्वपूर्ण संपत्ति होते हैं, इसलिए इनके रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। सभी रजिस्टरों और पत्रावलियों को अद्यतन रखते हुए कार्यालय व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाए।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बकायेदारों से राजस्व वसूली की समीक्षा भी की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित बकाया की प्रभावी वसूली सुनिश्चित की जाए और वसूली कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजस्व कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कार्यालय परिसर की साफ-सफाई, रिकॉर्ड रूम की व्यवस्था तथा कर्मचारियों की कार्यशैली का भी जायजा लिया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

यूएस ने रूसी तेल खरीद पर एक महीने की और छूट दी, भारत बोला- 40फीसदी तक सस्ता तेल मिल रहा

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– पहले भी खरीदते थे और आगे भी खरीदते रहेंगे

 

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर लागू राहत अवधि को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद भारत ने भी साफ शब्दों में कहा है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए पहले भी रूस से तेल खरीदता रहा है और आगे भी खरीद जारी रखेगा।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी कुल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत तेल विदेशों से खरीदता है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से बेहद सीमित मात्रा में तेल आयात करता था। वर्ष 2021 तक भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 1 से 2 प्रतिशत थी, लेकिन पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और रूस द्वारा भारी छूट दिए जाने के बाद भारत ने बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया।

ऊर्जा बाजार के हालिया आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 38 से 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। भारत प्रतिदिन करीब 50 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जिसमें 18 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल रूस से खरीदा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार रूस भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार दर से 8 से 15 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता तेल उपलब्ध करा रहा है। कई बार यह छूट 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंची है। इसका सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला है। अनुमान है कि पिछले दो वर्षों में भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदकर करीब 7 से 10 अरब डॉलर तक की बचत की है।

अमेरिका और यूरोपीय देशों ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन वैश्विक बाजार में तेल संकट और कीमतों में उछाल को रोकने के लिए समय-समय पर सीमित राहत भी दी जाती रही है। अब अमेरिका द्वारा छूट की अवधि बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश किसी बाहरी दबाव के बजाय अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा के आधार पर निर्णय लेता है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों और उद्योगों को सस्ती तथा स्थिर ऊर्जा उपलब्ध कराना है। यही वजह है कि जहां बेहतर कीमत और विश्वसनीय आपूर्ति मिलती है, वहां से तेल खरीद जारी रहेगी।