प्रशांत चौहान
आज का समय प्रतिस्पर्धा का समय है। हर व्यक्ति अपने जीवन में जल्दी से जल्दी सफल होना चाहता है। आधुनिक तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने सफलता की कहानियों को हर घर तक पहुंचा दिया है। लेकिन इन चमकदार कहानियों के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष, त्याग और अनुशासन की जो लंबी यात्रा होती है, वह अक्सर दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि कई युवा यह मान बैठते हैं कि सफलता रातों-रात हासिल की जा सकती है, जबकि वास्तविकता यह है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना आवश्यक है। जिस व्यक्ति को अपनी मंजिल का पता नहीं होता, वह सही दिशा में प्रयास भी नहीं कर सकता। लक्ष्य तय होने के बाद उसके प्रति पूरी निष्ठा, ईमानदारी और निरंतर मेहनत ही सफलता की नींव रखती है। रास्ते में आने वाली कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनसे सीखना ही आगे बढ़ने का सबसे बड़ा मंत्र है।
इतिहास गवाह है कि दुनिया के लगभग हर सफल व्यक्ति ने अपने जीवन में अनेक असफलताओं का सामना किया। किसी ने आर्थिक तंगी देखी, किसी ने संसाधनों की कमी झेली, तो किसी को समाज की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन इन चुनौतियों ने उन्हें रोका नहीं, बल्कि और अधिक मजबूत बनाया। यही संघर्ष आगे चलकर उनकी सफलता की सबसे बड़ी पहचान बना।
आज सोशल मीडिया पर कुछ मिनटों की सफलता दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे वर्षों का अभ्यास और अथक परिश्रम छिपा होता है। एक खिलाड़ी की जीत के पीछे हजारों घंटे का अभ्यास होता है। एक वैज्ञानिक की खोज के पीछे वर्षों का शोध होता है। एक सफल उद्यमी के पीछे अनगिनत असफल प्रयास, जोखिम और धैर्य की कहानी होती है। इसलिए केवल परिणाम देखकर किसी की सफलता का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
युवा पीढ़ी को यह समझने की आवश्यकता है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि अनुशासन, समय प्रबंधन और निरंतर सीखने की आदत से प्राप्त होती है। जो व्यक्ति हर दिन स्वयं को पहले से बेहतर बनाने का प्रयास करता है, वही धीरे-धीरे अपने लक्ष्य के करीब पहुंचता है। छोटी-छोटी उपलब्धियां मिलकर एक दिन बड़ी सफलता का आधार बनती हैं।
असफलता से डरना नहीं चाहिए। असफलता यह नहीं बताती कि व्यक्ति हार गया है, बल्कि यह बताती है कि अभी सीखना बाकी है। हर असफल प्रयास भविष्य की सफलता का अनुभव बन जाता है। इसलिए जो लोग गिरकर दोबारा उठना जानते हैं, वही अंततः अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं।
समय का सदुपयोग भी सफलता का महत्वपूर्ण आधार है। जो लोग समय का सम्मान करते हैं, समय भी उन्हें सम्मान देता है। आलस्य, टालमटोल और बिना योजना के काम करना सफलता के सबसे बड़े शत्रु हैं। इसके विपरीत, नियमित दिनचर्या, सकारात्मक सोच और लगातार अभ्यास व्यक्ति को दूसरों से अलग पहचान दिलाते हैं।
परिवार, शिक्षक और समाज भी व्यक्ति की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी अपने आत्मविश्वास को बनाए रखता है। इसलिए सफलता मिलने पर विनम्र बने रहना और अपने संघर्ष के दिनों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
जीवन की सबसे बड़ी सीख यही है कि सफलता मंजिल नहीं, बल्कि एक सतत यात्रा है। हर उपलब्धि के बाद नए लक्ष्य सामने आते हैं और नई चुनौतियां भी। इसलिए सीखने और आगे बढ़ने का क्रम कभी नहीं रुकना चाहिए।
अंततः यही कहा जा सकता है कि सफलता भाग्य से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, धैर्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। जो व्यक्ति कठिनाइयों को अवसर में बदलना सीख लेता है, वही जीवन के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूता है। याद रखिए—धीमी गति से चलने वाला व्यक्ति भी मंजिल तक पहुंच सकता है, लेकिन चलना बंद कर देने वाला कभी सफल नहीं हो सकता। सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो हर परिस्थिति में अपने प्रयासों को निरंतर जारी रखते हैं।
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं, केवल निरंतर प्रयास
एक पेड़, कई पीढ़ियों का भविष्य, धरती पर जीवन का अस्तित्व
प्रभात यादव
प्रकृति के संतुलन पर निर्भर करता है और इस संतुलन की सबसे मजबूत कड़ी हैं पेड़। आधुनिक विकास, बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण की दौड़ में हमने जंगलों को तेजी से काटा है, जिसका परिणाम आज जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, प्रदूषण और जल संकट के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे समय में एक पेड़ लगाना केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य में किया गया एक अमूल्य निवेश है।
पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों, वन विभाग या सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। यह प्रत्येक नागरिक का नैतिक और सामाजिक दायित्व है। जिस प्रकार हम अपने परिवार के लिए भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था करते हैं, उसी प्रकार स्वच्छ हवा, पर्याप्त जल और हरियाली भी हमारी जिम्मेदारी है। यदि आज हम प्रकृति के प्रति उदासीन रहे तो आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा और स्वच्छ पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
एक परिपक्व पेड़ प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है और वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों को अवशोषित करता है। पेड़ केवल हवा को शुद्ध नहीं करते, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित करते हैं और अनेक पक्षियों, जीव-जंतुओं तथा सूक्ष्म जीवों का प्राकृतिक आवास भी बनते हैं। इसलिए एक पेड़ वास्तव में संपूर्ण जीवन-चक्र का आधार है।
आज देश के अनेक शहर भीषण गर्मी, हीट वेव और प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। सीमेंट और कंक्रीट के जंगलों ने प्राकृतिक हरियाली को पीछे छोड़ दिया है। यदि शहरों, गांवों, स्कूलों, कार्यालयों, खेतों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जाए और उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए तो स्थानीय तापमान में कमी, स्वच्छ वातावरण और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है।
केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक सेवा तब होती है जब उस पौधे को नियमित पानी दिया जाए, उसकी सुरक्षा की जाए और उसे एक मजबूत वृक्ष बनने तक संरक्षित रखा जाए। अक्सर अभियान के दौरान लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन देखभाल के अभाव में बड़ी संख्या में पौधे जीवित नहीं रह पाते। इसलिए पौधरोपण के साथ-साथ संरक्षण की संस्कृति विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बच्चों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना भी अत्यंत आवश्यक है। यदि विद्यालयों में प्रत्येक विद्यार्थी अपने नाम का एक पौधा लगाए और उसकी जिम्मेदारी स्वयं निभाए, तो यह केवल पर्यावरण संरक्षण का अभियान नहीं रहेगा, बल्कि जीवन भर प्रकृति से जुड़ाव का संस्कार भी बनेगा। परिवारों को भी जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, परीक्षा में सफलता या अन्य शुभ अवसरों पर पौधे लगाने की परंपरा शुरू करनी चाहिए।
भारत की संस्कृति में वृक्षों को सदैव पूजनीय माना गया है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और अन्य अनेक वृक्ष केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को समझते हुए वृक्षों को सम्मान दिया। आज आवश्यकता है कि हम उसी परंपरा को आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाएं।
जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का नहीं, वर्तमान का संकट बन चुका है। अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और बढ़ता तापमान इस बात के संकेत हैं कि प्रकृति हमें लगातार चेतावनी दे रही है। यदि अभी भी व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गंभीर हो सकता है।
एक पेड़ केवल लकड़ी, छाया या फल देने वाला साधन नहीं है। वह जीवन देता है, पर्यावरण को संतुलित रखता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य की नींव तैयार करता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह हर वर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएगा और उसे वृक्ष बनने तक पूरी जिम्मेदारी के साथ संरक्षित करेगा।
याद रखिए, हमने अपने पूर्वजों से पृथ्वी विरासत में नहीं पाई है, बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। यदि हम आज एक पेड़ लगाते हैं और उसकी रक्षा करते हैं, तो वास्तव में हम केवल एक पौधा नहीं, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की नींव रख रहे होते हैं।
डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
रितम कुलश्रेष्ठ
डिजिटल क्रांति ने हमारे जीवन को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है। आज बैंकिंग, खरीदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाएं और यहां तक कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से कुछ ही मिनटों में पूरे हो जाते हैं। डिजिटल तकनीक ने समय और संसाधनों की बचत की है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। ऐसे में डिजिटल सुविधा का लाभ तभी सुरक्षित है, जब उसके साथ सतर्कता भी जुड़ी हो।
आज साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी लापरवाही का फायदा उठाकर लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं। फर्जी बैंक अधिकारी बनकर फोन करना, केवाईसी अपडेट के नाम पर जानकारी मांगना, बिजली बिल या गैस कनेक्शन बंद होने का डर दिखाना, पार्सल रोकने की बात कहना, नौकरी और लॉटरी का झांसा देना या सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को ठगना आम हो गया है। तकनीक जितनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतने ही नए तरीके अपना रहे हैं।
सबसे अधिक ठगी ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम कार्ड की जानकारी, सीवीवी नंबर और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड हासिल करके की जाती है। यह याद रखना चाहिए कि कोई भी बैंक, सरकारी संस्था या अधिकृत कंपनी कभी भी फोन, संदेश या ई-मेल के माध्यम से आपकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी नहीं मांगती। यदि कोई ऐसा करता है, तो समझिए कि वह ठगी का प्रयास है।
आज के समय में फर्जी वेबसाइट और नकली मोबाइल एप भी बड़ा खतरा बन चुके हैं। कई बार अपराधी लोकप्रिय कंपनियों और सरकारी पोर्टलों जैसी दिखने वाली वेबसाइट तैयार कर लोगों से लॉगिन जानकारी और बैंक विवरण चुरा लेते हैं। इसलिए किसी भी वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने से पहले उसका वेब पता और सुरक्षा चिह्न अवश्य जांचें। केवल आधिकारिक वेबसाइट और विश्वसनीय मोबाइल एप का ही उपयोग करें।
सोशल मीडिया ने लोगों को जोड़ने का काम किया है, लेकिन यही मंच साइबर अपराधियों के लिए भी आसान माध्यम बन गया है। अपनी जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, घर का पता, बैंक संबंधी जानकारी, यात्रा की जानकारी या अन्य निजी विवरण सार्वजनिक रूप से साझा करना जोखिम बढ़ा सकता है। जितनी कम निजी जानकारी सार्वजनिक होगी, उतनी ही आपकी डिजिटल सुरक्षा मजबूत रहेगी।
बच्चों और बुजुर्गों को साइबर सुरक्षा के प्रति विशेष रूप से जागरूक करने की आवश्यकता है। बच्चे ऑनलाइन गेम, फर्जी लिंक और आकर्षक ऑफरों के जाल में जल्दी फंस सकते हैं, जबकि बुजुर्ग बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर किए गए फर्जी फोन कॉल का शिकार हो सकते हैं। परिवार के प्रत्येक सदस्य को डिजिटल सुरक्षा के मूल नियमों की जानकारी देना आज समय की आवश्यकता बन चुकी है।
डिजिटल सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना, समय-समय पर उसे बदलना, दो-स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) का प्रयोग करना और मोबाइल व कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट रखना अत्यंत आवश्यक है। सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर बैंकिंग या वित्तीय लेन-देन करने से बचना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो घबराने के बजाय तुरंत संबंधित बैंक को सूचना दें, अपने खाते को सुरक्षित कराएं और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई कराई जा सकती है। समय पर की गई शिकायत कई मामलों में धन की रिकवरी में सहायक साबित होती है।
डिजिटल इंडिया का सपना तभी सफल होगा जब प्रत्येक नागरिक डिजिटल रूप से जागरूक और जिम्मेदार बने। तकनीक हमारे जीवन को सरल बनाने के लिए है, लेकिन यदि उसका उपयोग बिना सतर्कता के किया जाए तो वही सुविधा बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
अंततः यही कहा जा सकता है कि डिजिटल युग में सुरक्षा का सबसे मजबूत पासवर्ड जागरूकता है। एक छोटी-सी सावधानी आपकी वर्षों की मेहनत की कमाई, आपकी पहचान और आपके भविष्य को सुरक्षित रख सकती है। इसलिए हमेशा याद रखें—सोच-समझकर क्लिक करें, किसी पर आंख बंद करके विश्वास न करें और अपनी निजी जानकारी को अपनी सबसे बड़ी पूंजी की तरह सुरक्षित रखें।
युवा शक्ति ही विकसित भारत की असली ताकत
भरत चतुर्वेदी
भारत आज उस ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है, जहां उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। दुनिया के अनेक विकसित देशों में जहां युवा जनसंख्या लगातार घट रही है, वहीं भारत के पास करोड़ों ऊर्जावान, प्रतिभाशाली और सपनों से भरे युवा हैं। यही युवा शक्ति भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सबसे मजबूत आधारशिला है। यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल, रोजगार और नवाचार के पर्याप्त अवसर मिलें, तो भारत केवल आर्थिक महाशक्ति ही नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नेतृत्व के क्षेत्र में भी विश्व का अग्रणी देश बन सकता है।
आज का युवा केवल नौकरी पाने का सपना नहीं देखता, बल्कि नए अवसरों का सृजन भी करना चाहता है। स्टार्टअप संस्कृति, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि नवाचार, ई-कॉमर्स, हरित ऊर्जा, पर्यटन, खेल और सामाजिक उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए असीम संभावनाएं मौजूद हैं। आवश्यकता केवल सही मार्गदर्शन, संसाधन और आत्मविश्वास की है। जब एक युवा स्वयं रोजगार शुरू करता है, तो वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करता है।
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की पहली शर्त होती है। लेकिन केवल डिग्री प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में तकनीकी ज्ञान, डिजिटल कौशल, संचार क्षमता, नेतृत्व, समस्या समाधान और नवाचार की सोच भी उतनी ही आवश्यक है। बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में वही युवा आगे बढ़ पाएगा, जो निरंतर सीखने और स्वयं को समय के अनुसार ढालने के लिए तैयार रहेगा।
भारत का ग्रामीण युवा भी आज नई पहचान बना रहा है। आधुनिक खेती, जैविक कृषि, ड्रोन तकनीक, डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों के माध्यम से गांवों में भी नए अवसर विकसित हो रहे हैं। यदि कृषि को तकनीक और उद्यमिता से जोड़ा जाए, तो गांव आत्मनिर्भर बन सकते हैं और युवाओं का पलायन भी कम होगा।
देश के विकास में खेलों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह साबित किया है कि अवसर मिलने पर भारतीय युवा किसी भी मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं। खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और आत्मविश्वास विकसित करने का भी सबसे प्रभावी माध्यम है।
डिजिटल भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे अधिक दिखाई देती है। आज लाखों युवा सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और स्टार्टअप के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। भारत का आईटी क्षेत्र आज विश्व में अपनी अलग पहचान बना चुका है और इसमें युवाओं का योगदान सबसे अधिक है।
हालांकि युवाओं के सामने कई चुनौतियां भी हैं। बेरोजगारी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रभाव, मानसिक तनाव और गलत सूचनाओं का प्रसार उनकी ऊर्जा को भटका सकता है। इसलिए परिवार, समाज और शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सकारात्मक दिशा दें, उनमें नैतिक मूल्यों, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करें।
एक जागरूक युवा केवल अपने करियर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाता है। स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, महिला सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी देश को मजबूत सामाजिक आधार प्रदान करती है। राष्ट्र निर्माण केवल संसद और सरकारों तक सीमित नहीं है; इसमें हर जागरूक नागरिक और विशेष रूप से युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना तभी साकार होगा, जब युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लगेगी। उन्हें अवसर, विश्वास और संसाधन मिलेंगे, तो वे असंभव लगने वाले लक्ष्यों को भी संभव बना देंगे। इतिहास गवाह है कि जब-जब युवाओं ने परिवर्तन का संकल्प लिया है, तब-तब समाज और राष्ट्र ने नई दिशा प्राप्त की है।
अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसकी युवा शक्ति है। यदि यह शक्ति शिक्षित, कुशल, आत्मनिर्भर, अनुशासित और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित होगी, तो विकसित भारत का सपना केवल कल्पना नहीं, बल्कि निकट भविष्य की वास्तविकता बन जाएगा। आज का युवा ही कल का नेतृत्व है और उसी के हाथों में भारत के उज्ज्वल, समृद्ध और आत्मनिर्भर भविष्य की बागडोर सुरक्षित है।
ईमानदारी की कमाई सबसे बड़ी दौलत
प्रो. राजकुमार
आज के दौर में सफलता का मापदंड अक्सर धन, पद और भौतिक संसाधनों से लगाया जाता है। समाज में वही व्यक्ति सफल माना जाता है जिसके पास आलीशान घर, महंगी गाड़ियां और ऊंचा पद हो। लेकिन यदि इन उपलब्धियों की नींव ईमानदारी पर नहीं टिकी हो, तो उनका मूल्य अधिक समय तक नहीं रहता। जीवन की वास्तविक संपत्ति वह सम्मान और विश्वास है, जो व्यक्ति अपने चरित्र और सत्यनिष्ठा से अर्जित करता है। इसलिए यह कहना बिल्कुल उचित है कि ईमानदारी की कमाई ही सबसे बड़ी दौलत है।
ईमानदारी केवल एक नैतिक गुण नहीं, बल्कि एक ऐसा जीवन-मूल्य है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व को महान बनाता है। ईमानदार व्यक्ति अपने कार्य, व्यवहार और निर्णयों में पारदर्शिता रखता है। वह परिस्थितियां कैसी भी हों, सही रास्ते से समझौता नहीं करता। यही कारण है कि ऐसे लोगों पर परिवार, समाज और संस्थाएं आंख बंद करके भरोसा करती हैं। विश्वास किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी पूंजी है और यह केवल ईमानदारी से ही अर्जित किया जा सकता है।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि बेईमानी और छल-कपट से अर्जित धन और वैभव अधिक समय तक नहीं टिकते। ऐसे लोगों को भले ही कुछ समय के लिए सफलता मिल जाए, लेकिन अंततः सत्य सामने आ ही जाता है। दूसरी ओर, ईमानदारी से जीवन जीने वाले लोगों का नाम वर्षों बाद भी सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी पहचान उनकी संपत्ति से नहीं, बल्कि उनके चरित्र से होती है।
ईमानदारी का मार्ग हमेशा आसान नहीं होता। कई बार ईमानदार व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उसे आर्थिक चुनौतियां झेलनी पड़ सकती हैं, अवसरों में देरी हो सकती है और कभी-कभी गलत लोगों के कारण नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। लेकिन इन सबके बावजूद उसका आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और मानसिक शांति बनी रहती है। यही वह अमूल्य संपत्ति है, जिसे कोई भी धन नहीं खरीद सकता।
आज जब समाज भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और अनैतिक प्रतिस्पर्धा जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तब ईमानदारी का महत्व और भी बढ़ जाता है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने कार्य के प्रति ईमानदार हो जाए तो न केवल संस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि देश के विकास की गति भी तेज होगी। एक ईमानदार शिक्षक बेहतर पीढ़ी तैयार करता है, ईमानदार डॉक्टर लोगों का विश्वास जीतता है, ईमानदार व्यापारी ग्राहकों का भरोसा कायम रखता है और ईमानदार अधिकारी शासन व्यवस्था को मजबूत बनाता है।
बच्चों और युवाओं में ईमानदारी का संस्कार बचपन से विकसित किया जाना चाहिए। माता-पिता और शिक्षक यदि स्वयं अपने व्यवहार से ईमानदारी का उदाहरण प्रस्तुत करें, तो अगली पीढ़ी स्वतः ही इन मूल्यों को अपनाएगी। केवल किताबों में नैतिक शिक्षा पढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है।
ईमानदारी का संबंध केवल आर्थिक लेन-देन से नहीं है। अपने वादों को निभाना, समय का सम्मान करना, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना और सच बोलने का साहस रखना भी ईमानदारी का ही हिस्सा है। जो व्यक्ति अपने कार्य के प्रति निष्ठावान होता है, वह हर क्षेत्र में सम्मान प्राप्त करता है।
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में कई बार लोगों को लगता है कि सफलता पाने के लिए किसी भी रास्ते का सहारा लिया जा सकता है। लेकिन यह सोच अल्पकालिक लाभ तो दे सकती है, स्थायी सम्मान नहीं। जीवन का वास्तविक मूल्य इस बात से तय होता है कि व्यक्ति ने अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए कौन-सा मार्ग चुना। सही रास्ते पर चलकर मिली छोटी सफलता भी गलत रास्ते से मिली बड़ी उपलब्धि से कहीं अधिक मूल्यवान होती है।
समाज में ऐसे लोगों की सबसे अधिक आवश्यकता है जिनके शब्द और कर्म में समानता हो। ईमानदार व्यक्ति केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का विश्वास बन जाता है। उसका जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है और उसकी पहचान पीढ़ियों तक कायम रहती है।
अंततः यही कहा जा सकता है कि धन, पद और प्रतिष्ठा जीवन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उनका वास्तविक महत्व तभी है जब वे ईमानदारी और नैतिकता के साथ अर्जित किए जाएं। जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि अमीर बनना नहीं, बल्कि ऐसा इंसान बनना है जिस पर लोग बिना संकोच विश्वास कर सकें। यही विश्वास, यही सम्मान और यही चरित्र मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। सच तो यह है कि ईमानदारी से कमाई गई एक छोटी रोटी भी बेईमानी से कमाए गए महलों से कहीं अधिक सुकून और सम्मान देती है।
लेखक देश के जाने माने न्यूरोसर्जन और चिकित्सा विज्ञान के वैज्ञानिक हैँ।
जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट ने पीजीडीएम बैच के नए छात्रों को एआई कौशल एवं उद्योग जगत के अनुकूल जानकारी के साथ बनाया सशक्त
लखनऊ: स्टूडेंट फर्स्ट (छात्र-उन्मुख), एआई-नेटिव और करियर रैडी प्रोफेशनल्स तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता को मज़बूत बनाते हुए, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, लखनऊ ने 2026-28 के नए पीजीडीएम बैच के लिए 12-दिवसीय ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम (ओआईपी) सफलतापूर्वक पूरा किया। “जयपुरिया के साथ करियर के लिए तैयार रहें” (बी करियर रैडी विद जयपुरिया) थीम के तहत आयोजित इस प्रोग्राम में एकेडमिक ओरिएंटेशन, इंडस्ट्री से जुड़ाव, एआई-इनेबल्ड लर्निंग, अनुभव-आधारित गतिविधियाँ और सर्वांगीण विकास का बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। इस प्रोग्राम ने छात्रों को आत्मविश्वास के साथ मैनेजमेंट यात्रा शुरू करने में सक्षम बनाया और साथ ही उन्हें बिज़नेस के बदलते माहौल में सफल होने के लिए ज़रूरी ज्ञान, कौशल एवं सकारात्मक सोच के साथ प्रेरित भी किया।
इंडक्शन प्रोग्राम की शुरुआत रजिस्ट्रेशन, कैंपस टूर तथा छात्रों एवं अभिभावकों के लिए ओपन हाउस के साथ हुई, जहां उन्हें जयपुरिया के अकादमिक माहौल और छात्रों की अनुकूल संस्कृति को जानने-समझने का मौका मिला। नए बैच का स्वागत डायरेक्टर डॉ. सुषमा विश्नानी के साथ डॉ. हेमेंद्र गुप्ता (डीन – एकेडमिक्स), डॉ. रश्मि चौधरी (डीन – स्टूडेंट अफेयर्स) और डॉ. आरती चंदानी (डीन – रिसर्च) ने किया। उन्होंने छात्रों को संस्थान के अकादमिक दृष्टिकोण, रिसर्च इकोसिस्टम, सपोर्ट सिस्टम और लर्निंग फ्रेमवर्क के बारे में जानकारी दी। प्रोग्राम के दौरान छात्रों को करियर के लिए तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया। उद्घाटन सत्र में श्नाइडर इलेक्ट्रिक के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्री अंशुम जैन मुख्य अतिथि के रूप में और पीडब्ल्यूसी इंडिया के डायरेक्टर व जयपुरिया के पूर्व छात्र (बैच 1997-99) श्री अर्पण सान्याल माननीय अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपनी प्रेरणादायक बातचीत के ज़रिए उन्होंने छात्रों को परिस्थितियों के अनुसार ढलने, लगातार सीखते रहने और भविष्य के लिए तैयार लीडरशिप अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रोग्राम के दौरान छात्रों को जयपुरिया के एआई-नेटिव लर्निंग इकोसिस्टम से परिचित कराया गया। एआई-केंद्रित सेशन, बुनियादी कोर्सवर्क और प्रोग्राम चेयर व फैकल्टी सदस्यों के साथ एकेडमिक्स, रिसर्च, एंटरप्रेन्योरशिप और करियर जैसे पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आकर्षण केन्द्र था 4 डी रीसेट (खुशी, मानसिक सेहत और भीतरी संतुलन के लिए एक जर्नल) सेशन, जिसे जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के एकेडमिक्स डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) प्रभात पंकज ने आयोजित किया। दिलचस्प चर्चाओं और रोचक गतिविधियों के ज़रिए, इस सत्र ने छात्रों को विकास की मानसिकता अपनाने, मुश्किलों का सामना करने की क्षमता विकसित करने और अपनी उम्मीदों को कॉर्पोरेट जगत की बदलती ज़रूरतों के साथ जोड़ने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्हें आत्मविश्वास और उद्देश्य के साथ अपनी पीजीडीएम यात्रा शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। एकेडमिक ओरिएंटेशन के साथ-साथ, इस प्रोग्राम में उद्योग जगत के जाने-माने लीडर्स, खास पूर्व-छात्र और विषय विशेषज्ञ भी शामिल हुए। इनमें शामिल थेः श्री शाह अंबर (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, पीडब्ल्यूसी इंडिया); श्री गंगा आर. गुप्ता (संस्थापक एवं सीईटो, फाइनैंसकार्ट डॉट कॉम); श्री सुप्रियो दासगुप्ता (हेड – एंटरप्राइज एआई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, कंपास ग्रुप इंडिया); मिस भावना धवन (टैलेंट डायरेक्टर, नॉफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड); श्री अमित कुमार जेना (वाइस प्रेसिडेंट, यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड); मिस ईशा बंसल (डायरेक्टर – टैलेंट एक्विजिशन, एस्केलेंट); और श्री रिकू आचार्य (पार्टनर और एसोसिएट डायरेक्टर, स्टैंडर्ड चार्टर्ड ग्लोबल वेल्थ मैनेजमेंट)। छात्रों को रोचक सत्रों एवं पैनल चर्चाओं के ज़रिए, पर्सनल ब्रांडिंग, एआई-आधारित बदलाव, लीडरशिप, वर्कप्लेस के लिए ज़रूरी कौशल और उद्योग जगत की उम्मीदों के बारे में अहम जानकारी मिली। इस प्रोग्राम में टीमवर्क, व्यक्तिगत प्रभाविता, भावनात्मक कल्याण, विविधता, समावेशन, ज़िम्मेदार लीडरशिप और सामाजिक ज़िम्मेदारी जैसे विषयों पर विशेष सत्रों के ज़रिए छात्रों के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया गया। छात्रों को 1टू1 हेल्प के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित विशेष सत्र तथा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जागरूकता प्रोग्राम में हिस्सा लेने का मौका मिला। वहीं, एक्सिस बैंक के डीईआई विशेषज्ञ हरीश अय्यर जी ने छात्रों को सहानुभूति, सम्मान और स्वीकार्यता के ज़रिए समावेशी कार्यस्थल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रोग्राम में बिजनेस ओरिएंटेशन प्रोजेक्ट भी शामिल था, इ समंच पर छात्रों को बिजनेस की समस्याओं हल करने के लिए प्रैक्टिकल लर्निंग का शुरुआती अनुभव मिला। इसी क्रम में छात्रों को ‘तलाश 26 – खोज हुनर की’ के माध्यम से अपनी प्रतिभा दर्शाने का मौका मिला। उन्हें व्यवहारिक लर्निंग के द्वारा टीमवर्क, क्रिएटिविटी, कम्युनिकेशन जैसे कौशल सीखने को मिले, जो मैनेजर के लिए बहुत अधिक मायने रखते हैं। प्रोग्राम के सफल समापन पर बात करते हुए, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ की डायरेक्टर डॉ. सुषमा विश्नानी ने कहा, “ओरिएंटेशन और इंडक्शन प्रोग्राम एक बदलावकारी यात्रा की शुरुआत है। हमारे छात्र अपने पीजीडीएम यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं, इस अवसर पर मैं उन्हें मुश्किलों का डटकर मुकाबला करने, प्रमाणिकता, निडरता और जिज्ञासा जैसे गुणों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हूँ। ’’
करियर की तैयारी के बारे में बात करते हुए, श्नाइडर इलेक्ट्रिक के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्री अंशुम जैन ने कहा, “हालात के अनुसार ढलने की क्षमता और लगातार सीखते रहना आपकी सबसे बड़ी ताकत है। जिज्ञासु बने रहें, बदलाव को अपनाएँ और अपने विकास में निवेश करते रहें।” इसी बात को आगे बढ़ाते हुए, पीडब्ल्यूसी इंडिया के डायरेक्टर और जयपुरिया के पूर्व छात्र (बैच 1997-99) श्री अर्पण सान्याल ने कहा, “जयपुरिया में बिताया गया आपका समय ज्ञान, रिश्ते और अनुभव बनाने का एक मौका है जो आपके करियर को आकार देगा। हर मौके का पूरा फ़ायदा उठाएँ।”
प्रोग्राम का समापन बैटलज़ोन के साथ हुआ, जिसमें कई तरह की खेल गतिविधियों के ज़रिए टीम वर्क, खेल भावना और आपसी भाईचारे को बढ़ावा दिया गया। अंत में आरंभ – फ्रेशर्स सेलेब्रेशन का आयोजन हुआ। जहां नए बैच के उत्साह, क्रिएटिविटी और आत्मविश्वास का जश्न मनाया गया। इसमें शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं और मिस्टर फ्रेशरश् आयुष सिंह व मिस फ्रेशरश् शालिनी सिंह को सम्मानित किया गया। कुल मिलाकर यह आयेाजन जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ में 2026-28 बैच के लिए एक समृद्ध और बदलाव लाने वाले पीजीडीएम सफ़र की शुरुआत का प्रतीक था।








