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Friday, June 19, 2026
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प्राकृतिक खेती ही किसानों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी, भुसेरा में दो दिवसीय कार्यशाला में जुटे सैकड़ों किसान

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भाजपा नेता डॉ. युवराज सिंह ने किसानों को किया सम्मानित, विशेषज्ञों ने बताई जैविक खेती की आधुनिक तकनीकें

अमृतपुर, फर्रुखाबाद

खेती की बढ़ती लागत, घटती भूमि उर्वरता और रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों के बीच किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से ग्राम भुसेरा स्थित जी.एस. चौहान पैलेस में दो दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजक भाजपा नेता डॉ. युवराज सिंह रहे, जिन्होंने क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे किसानों एवं कृषक महिलाओं का सम्मान करते हुए प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर और समृद्ध किसान का आधार बताया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे भाजपा जिला अध्यक्ष फतेहचंद राजपूत ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री एवं प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्राकृतिक खेती से न केवल उत्पादन लागत कम होती है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया। कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. खलील खान, मृदा विशेषज्ञ एस.एम. सुनील पांडे, मौसम विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह परिहार, सीनियर रिसर्च फेलो प्रशांत सिंह परिहार तथा चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के पूर्व शोध निदेशक डॉ. एच.जी. प्रकाश ने किसानों को प्राकृतिक खेती की नवीनतम तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि मिट्टी, जल और पर्यावरण संरक्षण का एक प्रभावी माध्यम भी है।विशेषज्ञों ने किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत तथा गोबर आधारित किंवित जैविक खाद तैयार करने की विधि समझाई। उन्होंने बताया कि किसान अपने घरों पर उपलब्ध संसाधनों से ही गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद तैयार कर सकते हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह खाद बुवाई से 7 से 10 दिन पूर्व खेत में डालने के साथ-साथ खड़ी फसल में भी प्रयोग की जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान जैविक खाद के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह खाद बड़े पैमाने पर कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट में फसलों, सब्जियों, पौधों एवं पशुओं से प्राप्त अपशिष्ट पदार्थों को वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से तैयार की जाती है। इस खाद में 12 से 25 प्रतिशत कार्बनिक पदार्थ, 1 से 3 प्रतिशत नाइट्रोजन, 0.5 से 2.5 प्रतिशत फास्फोरस, 1 से 3 प्रतिशत पोटाश तथा 15 से 25 प्रतिशत नमी पाई जाती है, जो भूमि की संरचना को बेहतर बनाने और फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक होती है।कार्यशाला में उपस्थित कृषक महिलाओं ने भी प्राकृतिक खेती के प्रति विशेष रुचि दिखाई और विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं। किसानों ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर न केवल उत्पादन लागत कम की जा सकती है बल्कि स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न का उत्पादन भी संभव है।कार्यक्रम के अंत में डॉ. युवराज सिंह ने सभी वैज्ञानिकों, अतिथियों एवं किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी किसानों को नई कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में किसानों, कृषक महिलाओं, कृषि विशेषज्ञों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

विकास के दावों के बीच कुछ आरओ प्लांटों की कार्यप्रणाली पर सवाल

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फर्रुखाबाद। नगर में स्थापित कुछ आरओ वाटर प्लांटों की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय नागरिकों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। महावीरगंज फर्स्ट, नई बस्ती समेत कुछ क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि आरओ प्लांटों से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है और कहीं-कहीं पानी में खारापन महसूस हो रहा है।

क्षेत्रवासियों के अनुसार कुछ प्लांटों में फिल्टर खराब होने या समय पर रखरखाव न होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। लोगों का कहना है कि जिन प्लांटों का उद्देश्य स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था, उनमें तकनीकी खामियों के चलते अपेक्षित गुणवत्ता का पानी नहीं मिल पा रहा है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में राहगीर, मजदूर और आसपास के निवासी इन प्लांटों का उपयोग करते हैं। ऐसे में पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने से लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, नागरिकों का यह भी कहना है कि समस्या सभी आरओ प्लांटों में नहीं है, बल्कि कुछ स्थानों पर फिल्टर और रखरखाव संबंधी दिक्कतें सामने आई हैं। लोगों ने नगरपालिका से खराब फिल्टरों को जल्द बदलने, जल गुणवत्ता की जांच कराने तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि स्वच्छ पेयजल एक मूलभूत आवश्यकता है और संबंधित विभाग को समय रहते तकनीकी खामियों को दूर कर लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।

समाज कल्याण अधिकारी से उपहारों की मिठास में ठेकों की तैयारी

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फर्रुखाबाद। समाज कल्याण विभाग में होने वाले कार्यों के ठेकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मैनपुरी निवासी अयाज मंसूरी जो बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात बताया जाता है, अपने परिजनों के नाम से संचालित कई फर्मों के माध्यम से फर्रुखाबाद में समाज कल्याण विभाग के कार्यों के टेंडर लगातार हासिल कर रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अयाज मंसूरी की जिले के कई प्रभावशाली अधिकारियों से नजदीकियां होने की चर्चा है, जिसके चलते उसके खिलाफ शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आरोप यह भी हैं कि विभाग में ठेकों की प्रक्रिया पर कुछ चुनिंदा लोगों का दबदबा कायम हो गया है, जिससे अन्य ठेकेदारों के लिए अवसर लगभग समाप्त होते जा रहे हैं।चर्चाओं का बाजार उस समय और गर्म हो गया जब मैनपुरी से आए उक्त ठेकेदार के समाज कल्याण विभाग की नवनियुक्त अधिकारी शालिनी से मुलाकात करने और महंगे उपहार एवं मिठाई लेकर पहुंचने की बातें सामने आईं। सूत्रों का दावा है कि ठेकेदार ने अपने करीबी लोगों के बीच यह भी कहा कि उसने नए अधिकारी से संबंध स्थापित करने शुरू कर दिए हैं और भविष्य के अधिकांश ठेके भी उसी के पास रहेंगे।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल सरकारी टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि शासन की पारदर्शी व्यवस्था को भी चुनौती देता है। स्थानीय ठेकेदारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टेंडर प्रक्रिया नियमों के अनुसार संचालित हो रही है या नहीं।

कमालगंज-जहानगंज मार्ग का निर्माण शुरू, आवागमन प्रभावित, भारी वाहनों के लिए बदला रूट

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कमालगंज। लंबे समय से जर्जर हालत में पड़े कमालगंज-जहानगंज मार्ग के निर्माण कार्य की शुरुआत हो गई है। रेलवे स्टेशन क्रॉसिंग के पास से सड़क निर्माण का काम शुरू होने के चलते मार्ग पर आवागमन प्रभावित हो गया है। निर्माण कार्य के दौरान विशेष रूप से भारी वाहनों के आवागमन पर असर पड़ा है, जिसके चलते प्रशासन ने उनके लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया है।

निर्माण कार्य के कारण ट्रक, डंपर और अन्य भारी वाहनों को अब नई बस्ती मार्ग से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। इससे वाहन चालकों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी। वहीं दोपहिया और हल्के वाहनों के चालकों को भी निर्माण स्थल के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने इस महत्वपूर्ण सड़क निर्माण परियोजना का शिलान्यास किया था। क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से इस सड़क के निर्माण की मांग थी। सड़क अत्यधिक जर्जर हो चुकी थी, जिसके कारण आए दिन वाहन चालक परेशान होते थे और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती थी। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक खराब हो जाती थी, जिससे ग्रामीणों, व्यापारियों तथा विद्यार्थियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कमालगंज और जहानगंज के बीच आवागमन काफी सुगम हो जाएगा तथा क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी। हालांकि फिलहाल सड़क निर्माण के चलते लोगों को कुछ दिनों तक असुविधा का सामना करना पड़ेगा, लेकिन बेहतर सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद से क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था पर गंभीर सवाल, SIT जांच में खुलीं बड़ी खामियां

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अयोध्या। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर चल रही एसआईटी जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया जा रहा है। पिछले चार दिनों से चल रही जांच में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि मंदिर के चढ़ावे और व्यवस्थाओं का संचालन मुख्य रूप से ट्रस्ट के तीन सदस्य—चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव—के हाथों में केंद्रित था। आरोप है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया में अन्य पदाधिकारियों तथा सरकारी पदेन सदस्यों की भूमिका लगभग नगण्य कर दी गई थी।

जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर परिसर में स्थापित 14 दानपात्रों से नकदी निकालने, उसे कार्यालय तक पहुंचाने और फिर गणना कक्ष में गिनने की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। एसआईटी को आशंका है कि इसी स्तर पर चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर चूक हुई, जिसके चलते चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बढ़ी।

सूत्रों के अनुसार, भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों का भी कोई स्पष्ट और व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला है। ट्रस्ट की बैठकों में नकद चढ़ावे का विवरण तो प्रस्तुत किया जाता रहा, लेकिन बहुमूल्य धातुओं और आभूषणों की वास्तविक मात्रा तथा उनके रखरखाव को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

एसआईटी की जांच में सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति, सामग्री खरीद के टेंडर और कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में आई है। जांच टीम को ऐसे संकेत मिले हैं कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में कुछ नियुक्तियां की गईं और नियमों की अनदेखी हुई। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर असर पड़ सकता है।

श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी भारी खामियां उजागर हुई हैं। दर्शन व्यवस्था, प्रसाद वितरण, सीता रसोई में भोजन प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रशासनिक विफलता के संकेत मिले हैं। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के बावजूद व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए अपेक्षित निगरानी नहीं पाई गई।

बताया जा रहा है कि एसआईटी अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट के सरकारी पदेन सदस्यों की भूमिका और जिम्मेदारी बढ़ाने की सिफारिश कर सकती है। विशेष रूप से अयोध्या के जिलाधिकारी को वित्तीय और प्रशासनिक निगरानी का प्रमुख केंद्र बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में चढ़ावे और मंदिर व्यवस्थाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है और किन लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

समीक्षा अधिकारी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक कांड में दो वर्ष से फरार आरोपी आलोक मिश्रा गिरफ्तार

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मऊ। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ ने दो वर्षों से फरार चल रहे आरोपी आलोक मिश्रा को मऊ शहर के मुंशीपुरा स्थित उसके आवास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मूल रूप से गाजीपुर जिले के जंगीपुर थाना क्षेत्र के बाबूरायपुर मानपुर गांव का निवासी है।

विशेष कार्य बल के अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह के अनुसार 11 फरवरी 2024 को आयोजित समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में आलोक मिश्रा की संलिप्तता सामने आई थी। जांच के दौरान पता चला कि आलोक मिश्रा और उसके बहनोई कृष्णा पांडेय, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, की मुलाकात वाराणसी रेलवे स्टेशन पर प्रश्नपत्र लीक गिरोह के सरगना अमरजीत शर्मा से हुई थी। परीक्षा में सफल कराने के नाम पर दोनों से 12-12 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था, जिसमें तीन-तीन लाख रुपये अग्रिम रूप से दिए गए थे।

जांच में यह भी सामने आया कि सौदा तय होने के बाद दोनों को भोपाल बुलाया गया, जहां उन्हें एक होटल में ठहराया गया। परीक्षा से पहले उन्हें कथित रूप से प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए दिया गया और कुछ घंटे बाद वापस ले लिया गया। मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके अन्य आरोपियों से पूछताछ के दौरान आलोक मिश्रा का नाम सामने आया था, जिसके बाद से विशेष कार्य बल उसकी तलाश कर रहा था।करीब दो वर्ष तक फरार रहने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। विशेष कार्य बल अब उससे पूछताछ कर प्रश्नपत्र लीक गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और पूरे षड्यंत्र की परतें खोलने का प्रयास कर रहा है। यह मामला प्रदेश की सबसे चर्चित भर्ती परीक्षा अनियमितताओं में शामिल रहा है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ था।