मुलाकात के दौरान साझा की पुरानी यादें, मंच पर दिखा आत्मीय पल
फर्रुखाबाद। अंगूरीबाग स्थित एसआरएस स्कूल के स्पोर्ट्स डे कार्यक्रम में एक भावुक क्षण उस समय देखने को मिला जब अंतरराष्ट्रीय रेसलर द ग्रेट खली की मुलाकात भाजपा नेता सचिन सिंह यादव से हुई।
मंच पर स्वागत के दौरान दोनों के बीच आत्मीय बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार, खली ने सचिन सिंह यादव से मिलकर पुरानी मुलाकातों और कार्यक्रमों की यादें साझा कीं। इस दौरान खली भावुक भी नजर आए और उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में मिलने वाला स्नेह और सम्मान उन्हें हमेशा विशेष महसूस कराता है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस आत्मीय पल का जोरदार स्वागत किया। मंच पर माल्यार्पण और स्मृति चिन्ह भेंट कर खली का सम्मान किया गया।
द ग्रेट खली ने अपने संबोधन में युवाओं को खेलों के प्रति जागरूक रहने और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
यह मुलाकात कार्यक्रम का खास आकर्षण बन गई और उपस्थित लोगों ने इसे यादगार क्षण बताया।
सचिन सिंह यादव से मिलकर भावुक हुए द ग्रेट खली
इटावा–बरेली हाईवे पर ट्रैक्टरों की भिड़ंत, एक की मौत, एक गंभीर
मोहम्मदाबाद|
इटावा बरेली हाईवे पर रोज होता है मौत का खेल कई परिवार के घर का चिराग बुझा, जिम्मेदार नहीं ले रहे संज्ञान,
इटावा–बरेली हाईवे पर देर रात दो ट्रैक्टरों की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। हादसे में एक ट्रैक्टर सवार युवक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किया गया है।
मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम हरकमपुर निवासी 28 वर्षीय धीरेंद्र कुमार उर्फ धीरू, पुत्र अवधेश सिंह, अपने साथियों 23 वर्षीय दीपक, पुत्र रामवीर सिंह तथा सुखेंद्र, पुत्र प्रेम सिंह के साथ ट्रैक्टर पर आलू लादकर फर्रुखाबाद स्थित एसआर कोल्ड स्टोरेज जा रहे थे।
जब उनका ट्रैक्टर इटावा–बरेली हाईवे (NH-730C) पर पीपर गांव चौराहे से लगभग 100 मीटर आगे पहुंचा, तभी सामने से आ रहे दूसरे ट्रैक्टर ने तेज रफ्तार व लापरवाही से टक्कर मार दी। इस हादसे में धीरेंद्र कुमार और दीपक गंभीर रूप से घायल हो गए।
सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और दोनों घायलों को निजी वाहन से डॉ. राम मनोहर लोहिया जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक एन. हुड्डा ने धीरेंद्र कुमार को मृत घोषित कर दिया। शव को मोर्चरी में रखवाकर, मृतक के बड़े भाई धर्मेंद्र कुमार की सूचना पर उप निरीक्षक आशु यादव ने पंचनामा भरते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
घायल दीपक की हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
मृतक धीरेंद्र कुमार आठ भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मचा है। मृतक की मां मुन्नी देवी, पत्नी वंदना, 4 वर्षीय पुत्री कशिश और 2 वर्षीय पुत्र वंश का रो-रोकर बुरा हाल है।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि प्रार्थना पत्र प्राप्त हो गया है। मामले की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
भीषण सड़क हादसा: पांच महिलाओं को पिकअप ने रौंदा, तीन की मौत
महोबा। कानपुर–सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने तीन परिवारों के चिराग बुझा दिए। विवाह समारोह में खाना बनाकर पैदल घर लौट रही पांच महिलाओं को पीछे से आ रही तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने कुचल दिया। इस भीषण दुर्घटना में तीन महिलाओं की मौके और उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार, शहर के मोहल्ला कल्याण सागर निवासी स्वर्गीय फूलचंद्र की पत्नी भगवती (50), डाकबंगला निवासी स्वर्गीय बालकिशन की पत्नी गीता (35), भटीपुरा निवासी शंभू की पत्नी तुलसिया (65), उनकी बहू राजकुमारी उर्फ कपूरी (40) तथा भटीपुरा निवासी कालीचरण की पत्नी श्यामारानी (40) कानपुर–सागर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित मीना पैलेस में आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में मजदूरी पर पूड़ी बनाने गई थीं।
रात करीब ढाई बजे कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी महिलाएं पैदल अपने घर लौट रही थीं। जैसे ही वे मां बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर के पास पहुंचीं, तभी छतरपुर की ओर से आ रही तेज रफ्तार पिकअप ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहन की रफ्तार अत्यधिक तेज थी, जिससे महिलाओं को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
हादसे में भगवती और श्यामारानी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल गीता ने जिला अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं तुलसिया और उनकी बहू राजकुमारी की हालत नाजुक बनी हुई है। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया गया है।
दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटना से मृतकों के परिवारों में मातम पसरा है। रोते-बिलखते परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं।
श्यामारानी के पुत्र संतोष ने पिकअप चालक के विरुद्ध कोतवाली में तहरीर दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अपर पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह, क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सिंह तथा कोतवाली पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर परिजनों से जानकारी ली। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी चालक की तलाश की जा रही है और दोषी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मिश्रिख नगर पालिका में आयकर विभाग का छापा, दस्तावेजों की गहन जांच जारी
सीतापुर। जिले के मिश्रिख नगर पालिका परिषद कार्यालय में गुरुवार को आयकर विभाग की टीम ने अचानक छापा मारकर हड़कंप मचा दिया। अधिकारियों की एक विशेष टीम सुबह कार्यालय पहुंची और वहां मौजूद अभिलेखों तथा वित्तीय दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू कर दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टीम कार्यालय के विभिन्न अनुभागों में रखी फाइलों, लेखा-जोखा संबंधी रजिस्टरों और अन्य महत्वपूर्ण कागजातों का बारीकी से परीक्षण कर रही है। छापे की कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर में आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई और कर्मचारियों से आवश्यक पूछताछ भी की जा रही है।
हालांकि आयकर विभाग की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच का दायरा क्या है और किन बिंदुओं के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। सूत्रों का कहना है कि हाल के वित्तीय लेन-देन और कुछ प्रशासनिक निर्णयों को लेकर विभाग को सूचनाएं प्राप्त हुई थीं, जिनके आधार पर यह कदम उठाया गया।
गौरतलब है कि हाल ही में हुए उपचुनाव में मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामकृष्ण भार्गव की पुत्रवधू सीमा भार्गव नगर पालिका अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुई हैं। उनके अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
नगर पालिका परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पूरे घटनाक्रम पर जिला प्रशासन की नजर बनी हुई है। आयकर विभाग की टीम द्वारा दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल अधिकारी जांच प्रक्रिया में जुटे हुए हैं और किसी भी प्रकार की आधिकारिक टिप्पणी से बच रहे हैं।
मानवाधिकारों पर राजनीति से ऊपर उठने की ज़रूरत: संयुक्त राष्ट्र मंच से एस. जयशंकर का संदेश, आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता की वकालत
नई दिल्ली/जिनेवा। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मानवाधिकारों के प्रश्न पर ‘राजनीतिक बयानबाजी’ से आगे बढ़ते हुए विकास, क्षमता निर्माण और आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों का वास्तविक उद्देश्य सबसे कमजोर और वंचित निकायों के जीवन में ठोस, प्रकट देने वाला और स्थायी सुधार लाना चाहिए, न कि इसे केवल वैचारिक बहस या आरोप-प्रत्यारोप का विषय बनाया जाए।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में अपने मानवीय मंत्रियों में विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य संघर्ष, ध्रुवीकरण और अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है। ऐसे समय में भारत साझा आधार तलाशने और उसे खोलने का प्रयास करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने हमेशा टकराव के स्थान पर संवाद, विभाजन की जगह सहमति और संकीर्ण हितों की बजाय मानव-संगठन विकास को प्राथमिकता दी है।
विदेश मंत्री ने कहा कि यदि मानवाधिकारों को सार्थक बनाना है तो उन्हें रोजमर्रा के जीवन की वास्तविकताओं से जुड़ना होगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ठोस प्रगति ही मानवाधिकारों की सच्ची अभिव्यक्ति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास स्वयं मानवाधिकारों की बुनियाद है और इसके बिना अधिकारों की चर्चा अधूरी है।
आतंकवादियों मानवाधिकारों का सबसे जघन्य उल्लंघन
अपने संबोधन में श्री जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे को विशेष रूप से निर्देशांक किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार परिषद को मानवाधिकारों के प्रति अपनी मांगों को व्यवहार में लाने के लिए आतंकवादी समुदायों के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनीनी चाहिए। उनके अनुसार, आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे घोर उल्लंघन है और निर्दोष नागरिकों को प्रभावित करने वाले किसी भी कृत्य का कोई औचित्य नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति गंभीर है, तो उसे आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और ठोस रुख दिखाना होगा। चयनात्मक दृष्टिकोण या विपरीत माप इस लड़ाई को कमजोर करते हैं।
सातवीं बार परिषद का सदस्य बना भारत
विदेश मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि भारत हाल ही में सातवीं बार मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए वोटिंग में भारत को 188 में से 177 देशों का समर्थन मिला। उन्होंने इसे वैश्विक समुदाय, स्वैच्छिक वैश्विक दक्षिण के देशों के विश्वास का प्रतीक बताया।
श्री जयशंकर ने कहा कि भारत मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिकरण, चयनात्मक आलोचना और द्विपक्षीय मानकों के बजाय संवाद, साझेदारी और क्षमता निर्माण के मार्ग पर विश्वास करता है। उनके अनुसार, सहयोगी दृष्टिकोण ही स्थायी और समावेशी समाधान दे सकता है।
लोकतांत्रिक मूल्यों और डिजिटल आयामों का उल्लेख
उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत सभी नागरिकों के लिए समानता, गरिमा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस संदर्भ में उन्होंने भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार तकनीक के माध्यम से करोड़ों लोगों तक समावेशी ढंग से कल्याणकारी योजनाएं, वित्तीय सेवाएं और सरकारी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपने अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को वैश्विक हित में साझा करने के लिए तैयार है, ताकि विकास और अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
वैश्विक अक्षरों के बीच विकास का महत्व
उन्होंने यह भी निर्देशांक किया कि महामारी, जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबावों ने वैश्विक असमानताओं को और गहरा किया है। ऐसे समय में विकास को मानवाधिकारों के मूल आधार के रूप में स्वीकार करना बेहद जरूरी है।
अपने मंत्रियों के माध्यम से श्री जयशंकर ने स्पष्ट संकेत दिया कि भारत मानवाधिकारों को केवल पुरातनपंथी विमर्श का विषय नहीं, बल्कि भू-परिवर्तन के माध्यम से माना है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह मानवाधिकारों की बहस को राजनीतिक ध्रुवीकरण से मुक्त कर वास्तविक सुधार, समावेशी विकास और आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ें।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: आठवीं की एनसीईआरटी पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अंश पर उठने वाला सवाल, माफी से काम नहीं चलेगा
नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की एनसीईआरटी पुस्तक में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक वाले अंश को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका की गरिमा और भ्रष्टाचार सम्मान से जुड़े मामलों में केवल औपचारिक माफी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान पीठ ने खुलवाए<extra_id_1> करते हुए कहा कि स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में प्रकाशित सामग्री अत्यंत संवेदनशील होती है और उनके प्रभाव विद्यार्थियों के दृष्टिकोण पर उन्नयन पड़ सकता है।
कोर्ट ने कहा कि संबंधित अंश को पुस्तक में शामिल किए जाने की प्रक्रिया और देनदारी स्पष्ट की जानी चाहिए। कोर्ट ने शिक्षा सचिव और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक कोर्ट इस मामले में पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, सुनवाई जारी रहेगी।
सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी की ओर से बिना शर्त माफी की पेशकश की गई और यह भरोसा दिलाया गया कि विवादित अंश को पुस्तक से हटा दिया जाएगा। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि “केवल माफी मांगना और पाठ हटाना पर्याप्त नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि एनसीईआरटी के निदेशक को यह बताना होगा कि इस विषयवस्तु को शामिल करने का निर्णय किन परिस्थितियों में और किस स्तर पर लिया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी को भी न्यायपालिका की छवि धूमिल करने की छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो कोर्ट इस प्रकरण को अवमानना के दृष्टिकोण से भी देख सकती है। साथ ही, विवादित पुस्तक की ऑनलाइन उपलब्ध प्रतियों को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश भी दिया गया, ताकि संबंधित सामग्री का आगे प्रसार न हो।
बताया जाता है कि इस मुद्दे को वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी ने कोर्ट के स्पष्टीकरण उठाए थे। इसके बाद शीर्ष कोर्ट ने मामले का व्यक्तिपरक लेते हुए सख्त रुख अपनाया।
जानकारी के अनुसार, एनसीईआरटी ने 24 फरवरी को कक्षा आठ की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक जारी की थी। इसी पुस्तक के एक अध्याय में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से संबंधित अंश शामिल था, जिस पर आपत्ति बताई गई। विवाद बढ़ने के बाद स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने अगली सूचना तक पुस्तक के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए।
एनसीईआरटी ने एक आधिकारिक बयान में स्वीकार किया कि यह त्रुटि अनजाने में हुई और किसी भी संवैधानिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था। परिषद ने कहा है कि संबंधित अध्याय को स्वयंसेवकों से परामर्श लेकर पुनर्लेखित किया जाएगा और प्राधिकृत संस्करण अकादमी सत्र 2026-27 की शुरुआत में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा।
शीर्ष अदालत की सख्त कार्यवाही से यह संदेश स्पष्ट है कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या असावधानी को कमजोर में नहीं लिया जाएगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनसीईआरटी और शिक्षा मंत्रालय अदालत के उदाहरण क्या विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हैं और भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को लेकर किस तरह की दंड बरती जाती है।








