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Saturday, April 25, 2026
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पांडेश्वर नाथ मंदिर में कमरों पर ताले लगाने का आरोप, अवैध वसूली को लेकर संगठन ने दी चेतावनी

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फर्रुखाबाद। जनपद के प्राचीन श्री पांडेश्वर नाथ महाराज मंदिर परिसर में बने जनसुविधा कक्षों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू महासंघ, फर्रुखाबाद इकाई ने मंदिर कमेटी पर कमरों पर अवैध रूप से ताले लगाने और श्रद्धालुओं से मनमाने तरीके से शुल्क वसूलने का आरोप लगाया है।
संगठन के जिला अध्यक्ष अरविंद शुक्ला ने जारी बयान में कहा कि मंदिर परिसर में बनाए गए ये कमरे विशेष रूप से श्रद्धालुओं की सुविधा और वर-वधू की दिखाई जैसे शुभ कार्यों के लिए बनाए गए हैं। ऐसे में इन कमरों पर ताला लगाना और उपयोग के लिए 251 का शुल्क लेना अनुचित है।
बताया गया कि संगठन के संरक्षक आनंद प्रकाश गुप्ता मुन्ना गुप्ता के माध्यम से यह जानकारी संगठन तक पहुंची। संगठन का कहना है कि इस शुल्क को लेकर मंदिर परिसर में कोई लिखित सूचना या नियम प्रदर्शित नहीं किया गया है, जिससे यह अवैध वसूली प्रतीत होती है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए संगठन ने मंदिर कमेटी से जल्द वार्ता कर कमरों पर लगे ताले खुलवाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो संगठन जनहित में कड़े कदम उठाने को बाध्य होगा।
संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी अपील की है कि सूचना मिलते ही अधिक संख्या में मंदिर परिसर पहुंचकर इस मुद्दे पर सहयोग करें।

टाउन हॉल तिराहे कै पाह जाम का ‘तांडव’, भीषण गर्मी में बिलबिलाये लोग

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फर्रुखाबाद। भीषण गर्मी के बीच शहर की ट्रैफिक व्यवस्था एक बार फिर ध्वस्त नजर आई। टाउन हॉल तिराहे के निकट लगा भीषण जाम आम नागरिकों के लिए मुसीबत बन गया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लोग घंटों तक तपती धूप में फंसे रहकर पसीने से तर-बतर होते रहे। हालात इतने खराब हो गए कि पैदल निकलना भी दूभर हो गया।

जाम की स्थिति इतनी भयावह थी कि राहगीरों, मरीजों, छात्रों और जरूरी काम से निकलने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गर्मी की मार और जाम की मार—दोनों ने मिलकर लोगों की हालत बिगाड़ दी। कई लोग बेबस होकर छांव तलाशते दिखे, तो कुछ गाड़ियों में ही गर्मी से जूझते रहे।

सिविल पुलिस और ट्रैफिक पुलिस ने हालात काबू में किये। । काफी मशक्कत के बाद किसी तरह जाम खुलवाया जा सका, तब जाकर मुख्य मार्ग पर आवागमन बहाल हो पाया। लेकिन सवाल यह है कि आखिर हर बार ऐसी स्थिति क्यों बनती है?

शहर में जाम अब रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। तमाम दावों और योजनाओं के बावजूद ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आ रही है। मुख्य मार्गों और व्यस्त चौराहों पर बार-बार लगने वाला जाम प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और भी बदतर हो सकते हैं। गर्मी के इस कहर में जाम का यह ‘तांडव’ लोगों के लिए किसी सजा से कम नहीं है।

“एक क्लिक से बच सकती है जान: सेफ्टी वीक में सीट बेल्ट को लेकर जागरूकता अभियान”

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लखनऊ: सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के उद्देश्य से ‘सेफ्टी वीक 2026’ के तहत सीट बेल्ट के महत्व को लेकर सुएज द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि एक छोटी-सी आदत—सीट बेल्ट लगाना—जीवन और मृत्यु के बीच बड़ा अंतर बना सकती है।

अभियान में आम धारणा (मिथ) और वास्तविकता (फैक्ट) के बीच का फर्क स्पष्ट किया गया है। अक्सर लोग मानते हैं कि दुर्घटना के समय सीट बेल्ट उन्हें वाहन में फंसा सकती है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि सीट बेल्ट तेजी से खुलने के लिए ही डिजाइन की जाती है और यह व्यक्ति को वाहन से बाहर फेंके जाने से बचाती है, जो अधिक खतरनाक होता है।

इसी तरह पहाड़ी क्षेत्रों में कई लोग सीट बेल्ट को अनावश्यक समझते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार अचानक ब्रेक या फिसलन की स्थिति में बिना सीट बेल्ट के वाहन से बाहर फेंके जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यहां तक कि 30–40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर भी बिना सीट बेल्ट गंभीर या जानलेवा चोट लग सकती है।

विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुभवहीनता या अनुभव—दोनों ही दुर्घटनाओं को नहीं रोक सकते, लेकिन सीट बेल्ट चोट के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है।

इस अवसर पर सुएज के हेल्थ एंड सेफ्टी मैनेजर पंकज सिंह ने कहा कि हर व्यक्ति को यात्रा से पहले सीट बेल्ट अवश्य लगानी चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सुएज लखनऊ में अपनी विभिन्न साइटों पर इस अभियान को सक्रिय रूप से चला रहा है और अपने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस विषय में जागरूक कर रहा है।

“सीट बेल्ट—एक क्लिक जो सब कुछ बदल दे,” यही संदेश इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।

केदारनाथ यात्रा में हेलीकॉप्टर बुकिंग को लेकर एक्टर ने उठाए सवाल, कहा- शुरू होते ही …

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देहरादून: चारधाम यात्रा का सीजन शुरू होते ही श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है। केदारनाथ (Kedarnath) जाने के लिए लोग अक्सर ऑनलाइन हेलीकॉप्टर (helicopter) की सीटें बुक करवा रहे हैं लेकिन हेलीकॉप्टर की बुकिंग शुरू होते ही फुल हो जा रही है। इसे लेकर एक्टर हेमंत पांडेय (Hemant Pandey) ने सवाल खड़े किया है। एक्टर हेमंत पांडेय (Hemant Pandey) ने कुछ समय पहले ही अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने चार धाम यात्रा के काले सच से पर्दा उठाने की बात कही है।

वीडियो में उन्होंने पहले चारधाम यात्रा के सभी को बधाई दिया है। इसके बाद उन्होंने कहा- चारधाम यात्रा के पीछे जो घोटाले का जाल फैल रहा है एक बड़े तंत्र के रूप में ये काफी डराने वाला है। हमारी एक सिनियर एक्ट्रेस ने 15 अप्रैल को चारधाम यात्रा के लिए हेली बुकिंग खुलने के समय में उन्होंने बुकिंग करना चाहा लेकिन एक मिनट में ही सभी टिकटें फूल हो गई थीं।

उन्होंने आगे कहा- ये किसने बेचा, कौन खरीद रहा है, कोई इसका कमिशनखोरी कर रहा है नहीं पता। सरकारी अधिकारी सभी से बचके भी इसकी जांच करा सकते हैं। इसके लिए कोई आदेश लेना नहीं पड़ता है। बाहर के लोगों के लिए ये अच्छा मेसेज नहीं जा रहा है. हमें नेताओं से कोई उम्मीद नहीं है। सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट heliyatra.irctc.co.in पर जाएं. इस वेबसाइट पर बुक टिकट ऑप्शन पर क्लिक करने के बाद मिल दिशा निर्देशों का पालन करें।

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर जानेवाले श्रद्दालुओं के लिए उत्तराखंड पर्यटन पोर्टल पर रिजस्ट्रेशन करना भी जरूरी है। इसी रजिस्ट्रेशन के आधार पर IRCTC के heliyatra.irctc.co.in पर आप लॉग इन कर हेलीकॉप्टर यात्रा के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं।

बता दें कि केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सर्विस तीन जगह गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी से संचालित होती हैं। वहीं किराए की बात करें तो गुप्तकाशी से केदारनाथ का किराया (दोनों तरफ का) लगभग 12,762 रुपये है, फाटा से केदरानाथ का किराया 10,164 और सिरसी से केदारनाथ का किराया 6,390 रुपये है।

 

कानपुर: दुकान में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, चपेट में आने से दुकानदार की मौत, पांच घायल

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कानपुर: कानपुर (Kanpur) के दीना मार्केट में शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे भीषण आग लग गई, जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्य सवार थे। आग की चपेट में आने से एक दुकानदार (shopkeeper) की दुखद मौत हो गई, जबकि परिवार के पांच अन्य सदस्य झुलस गए। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, आग एक दुकान में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। कुछ ही मिनटों में आग तेजी से फैल गई और भूतल पर स्थित तीनों दुकानें जल गईं। इमारत की ऊपरी मंजिलें परिवार का निवास स्थान थीं, जहां तीन भाइयों के परिवारों के लगभग 15 सदस्य घटना के समय सो रहे थे।

मृतक की पहचान 70 वर्षीय रामकिशन के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शोर सुनकर उनकी नींद खुली और उन्होंने नीचे आग लगी देखी। जब उन्होंने अपने परिवार को सचेत करने का प्रयास किया, तो वे घने धुएं से घिर गए, गिर पड़े और बाद में आग की चपेट में आ गए। घायलों में रामकिशन की पत्नी गोमती (66), उनके बेटे हरिओम (40), जिन्हें पनाक के नाम से भी जाना जाता है, हरिओम की पत्नी श्रेया, उनका चार महीने का बेटा शिवार्थ और रामकिशन के भाई सत्यनारायण की बेटी आयुषी शामिल हैं।

दमकल कर्मियों ने सीढ़ियों की मदद से सभी घायलों को सुरक्षित निकाला और उन्हें इलाज के लिए घाटमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।दमकल कर्मियों ने लगभग पांच घंटे तक आग पर काबू पाने के लिए पांच दमकल गाड़ियां लगाईं। आग बुझने तक दुकानों के अंदर रखा सारा सामान – बताया जा रहा है कि एक किराना स्टोर, एक कपड़ों की दुकान और एक थोक बिस्कुट की दुकान – जलकर राख हो चुका था।

सत्यनारायण के बेटे अंकुर ने भयावह अनुभव बताते हुए कहा कि परिवार सो रहा था जब उन्होंने घर में धुआं भरते देखा। उन्होंने कहा, जब तक हमें समझ आया कि क्या हो रहा है, आग हमारे कमरों तक पहुंच चुकी थी। हम किसी तरह बच निकले और अपनी जान बचाई। अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है, जबकि स्थानीय निवासी इस दुखद आग से हुए नुकसान पर शोक व्यक्त कर रहे हैं और नुकसान का आकलन कर रहे हैं।

लू के कहर में ‘गौसेवा’ का संकल्प: डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने संभाली कमान

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– गो-आश्रयों में युद्धस्तर पर इंतजाम
– मुख्यमंत्री के आदेशों को धरातल पर उतारने की तैयारी
– सीएम के आदेश के तुरंत बाद एक्टिव हुईं मैडम’ लाठर ‘
फर्रुखाबाद। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच जहां आम जनजीवन बेहाल है, वहीं प्रशासन ने मूक पशुओं की सुरक्षा को लेकर अभूतपूर्व संवेदनशीलता दिखाई है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने साफ संदेश दे दिया है गो-आश्रय स्थलों में एक भी पशु गर्मी से प्रभावित नहीं होना चाहिए। आदेश नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी के तौर पर पूरे तंत्र को एक्टिव मोड में झोंक दिया गया है।
डीएम लाठर के निर्देशों के बाद जनपद के गो-आश्रय स्थलों में व्यवस्थाएं तेजी से दुरुस्त की जा रही हैं। वाटर मिस्टिंग सिस्टम, कूलर, पंखे और छायादार शेड अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर नजर आने लगे हैं। हर आश्रय स्थल पर स्वच्छ पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निरीक्षण में लापरवाही मिली तो सीधी जवाबदेही तय होगी।
सबसे बड़ी चुनौती—चारा संकट—को लेकर भी डीएम ने रणनीतिक मोर्चा खोल दिया है। हरे चारे और भूसे की कमी न हो, इसके लिए जिला स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज किया गया है और खाली कराई गई जमीन पर हाइब्रिड नेपियर घास की बुआई कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
सूत्र बताते हैं कि प्रशासन अब ‘भूसा दान’ को जनआंदोलन बनाने की तैयारी में है। प्रदेश के कई जिले पहले ही इस अभियान में आगे निकल चुके हैं और फर्रुखाबाद को भी अग्रणी बनाने की रणनीति पर काम हो रहा है। समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों को जोड़कर गो-आश्रयों को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद तेज हो गई है।
डीएम अंकुर लाठर की यह पहल सिर्फ प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल बनकर उभरी है। जहां एक ओर लू इंसानों के लिए चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन का यह कदम यह साबित करता है कि व्यवस्था चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, अगर नेतृत्व इच्छाशक्ति दिखाए तो हर संकट से निपटा जा सकता है।
फिलहाल, फर्रुखाबाद में गो-आश्रयों की तस्वीर बदलती नजर आ रही है और यह बदलाव सीधे-सीधे डीएम की सख्ती और संवेदनशीलता का परिणाम माना जा रहा है।