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Wednesday, May 6, 2026
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जालंधर: BSF मुख्यालय के बाहर एक्टिवा में हुआ जोरदार धमाका, हिरासत में डिलीवरी बॉय, साजिश की आशंका

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जालंधर: पंजाब के जालंधर (Jalandhar) में BSF चौक स्थित पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय (Punjab Frontier Headquarters) के गेट के बाहर एक एक्टिवा में हुए जोरदार धमाके से हड़कंप मच गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि शुरुआती जांच में इसमें विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही जालंधर कमिश्नरेट पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गईं। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके को घेरकर सील कर दिया गया है और आसपास की आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक्टिवा चला रहे युवक को हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ जारी है ताकि धमाके के कारणों का पता लगाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियां मामले की हर एंगल से जांच कर रही हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस एक्टिवा में ब्लास्ट हुआ वह एक डिलीवरी बॉय की बताई जा रही है, जो पार्सल लेकर जा रहा था। चूंकि घटना बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय जैसे संवेदनशील इलाके के बाहर हुई है, इसलिए जांच एजेंसियां इसे महज हादसा मानने को तैयार नहीं हैं।

फिलहाल जांच का फोकस इस बात पर है कि यह एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई साजिश छिपी है। साथ ही, हिरासत में लिए गए युवक की पृष्ठभूमि खंगाली जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पार्सल में क्या था और धमाका किस वजह से हुआ।

 

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर हलचल तेज, विजय ने कांग्रेस से मांगा समर्थन

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चेन्नई। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। टीवीके प्रमुख थलापति विजय ने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से समर्थन मांगा है, जिसके बाद राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार अपनी तमिलनाडु प्रदेश इकाई को दे दिया है, जिसकी बैठक बुधवार सुबह प्रस्तावित है।
मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक के बाद संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि विजय ने औपचारिक रूप से कांग्रेस से समर्थन का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मानना है कि तमिलनाडु की जनता ने धर्मनिरपेक्ष सरकार के पक्ष में जनादेश दिया है और कांग्रेस किसी भी स्थिति में भाजपा या उसके सहयोगियों को सत्ता में आने से रोकना चाहती है।
कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों, जनभावनाओं और चुनावी जनादेश को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा लिया जाएगा। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि विजय ने अपने राजनीतिक आदर्श के रूप में के. कामराज से प्रेरणा लेने की बात कही है।
गौरतलब है कि 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में विजय की पार्टी टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं, जो बहुमत के आंकड़े से 10 सीट कम है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए उन्हें अन्य दलों के समर्थन की आवश्यकता है। कांग्रेस के पास 5 सीटें हैं, जबकि पीएमके के पास 4 और वाम दलों—सीपीआई व सीपीआई(एम)—के पास 2-2 विधायक हैं। अब सबकी नजर कांग्रेस के फैसले पर टिकी है, जो राज्य की सत्ता की दिशा तय करेगा।

ट्रैक्टर से टकराई स्कॉर्पियो, यूपी के चार पुलिसकर्मी समेत पांच की मौत

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तावड़ू/ हरियाणा

तावड़ू क्षेत्र में कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर मंगलवार सुबह करीब 10 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसे में उत्तर प्रदेश पुलिस के चार जवानों सहित पांच लोगों की मौत हो गई। हादसा तावड़ू सदर थाना क्षेत्र में धुलावट टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर पहले हुआ, जहां तेज रफ्तार स्कॉर्पियो आगे खड़े डंपर से जा टकराई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए नूंह भेज दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के उरई कोतवाली की पुलिस टीम एक अपहरण मामले की जांच के सिलसिले में जींद जा रही थी। स्कॉर्पियो में चालक समेत चार पुलिसकर्मी सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे किनारे एक डंपर खड़ा था, जिसका चालक पास के ढाबे पर गया हुआ था। इसी दौरान पीछे से आ रही तेज रफ्तार स्कॉर्पियो डंपर से जा टकराई, जिससे मौके पर ही सभी सवारों की मौत हो गई।
हादसे के बाद डंपर चालक वाहन समेत फरार हो गया। सूचना पर तावड़ू सदर थाना, धुलावट ट्रैफिक थाना पुलिस और डीएसपी अभिमन्यु लोहान मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो में शव बुरी तरह फंसे हुए थे, जिन्हें करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।
पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन से लगभग डेढ़ लाख रुपये नकद और दो पिस्टल बरामद की हैं, जिन्हें कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। मृतकों की पहचान इंस्पेक्टर मोहित कुमार यादव (32) निवासी आदमपुर थाना सौरिख, सब-इंस्पेक्टर सत्यभान (59) निवासी अलीपुर जटिमाला जिला कासगंज, सिपाही अशोक कुमार (28) निवासी बबेरू जिला बांदा, सिपाही प्रदीप कुमार (30) निवासी रायबरेली और चालक अमरीक सिंह निवासी जींद के रूप में हुई है। सभी पुलिसकर्मी उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में तैनात थे।
इस हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक्सप्रेसवे किनारे अवैध ढाबों और अनियंत्रित पार्किंग के चलते आए दिन हादसे होते रहते हैं। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां भी एक ढाबे के पास वाहन खड़ा था, जिससे यह दुर्घटना हुई।
मामले में एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है कि टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे खराब थे, जिससे फरार डंपर चालक की पहचान करना मुश्किल हो गया है। पुलिस अब मानेसर और गुरुग्राम पुलिस की मदद से मामले की जांच में जुटी है।
फिलहाल पुलिस ने तेज रफ्तार और सड़क पर खड़े वाहन को हादसे का प्रारंभिक कारण माना है, जबकि प्रशासन ने अवैध ढांचों को हटाने की कार्रवाई जारी होने का दावा किया है। इसके बावजूद इस भीषण हादसे ने एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है और सख्त कदम उठाने की मांग तेज हो गई है।

ममता का इस्तीफा देने से इनकार,संवैधानिक प्रक्रिया से होगी नई सरकार का गठन

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव तय हो गया है, जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ रही है। वहीं करीब 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
ममता बनर्जी ने साफ तौर पर कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उनकी हार जनादेश से नहीं बल्कि साजिश के तहत हुई है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव नहीं हारी हैं, इसलिए पद छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। साथ ही उन्होंने चुनौती दी कि यदि कोई कार्रवाई करनी है तो संवैधानिक नियमों के तहत की जाए।
हालांकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने या बहुमत खोने के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार करता है, तो स्थिति को कानून के तहत सुलझाया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही मौजूदा सरकार का अस्तित्व स्वतः खत्म हो जाता है। पश्चिम बंगाल में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई तक ही है, जिसके बाद सरकार स्वतः समाप्त मानी जाएगी और मुख्यमंत्री पद भी स्वतः रिक्त हो जाएगा।
इसके बाद राज्यपाल नई सरकार के गठन के लिए सबसे बड़े दल को आमंत्रित करेंगे। नई सरकार के शपथ ग्रहण के साथ ही पुरानी सरकार पूरी तरह समाप्त हो जाती है। वहीं यदि बहुमत को लेकर किसी तरह का विवाद होता है, तो राज्यपाल फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दे सकते हैं या जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति शासन की संस्तुति भी कर सकते हैं।
ऐसे में स्पष्ट है कि भले ही ममता बनर्जी इस्तीफा न दें, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल में नई सरकार का गठन तय है और सत्ता परिवर्तन अब केवल औपचारिकता भर रह गया है।

बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद 9 मई को शपथग्रहण

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मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस बरकरार

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद नई सरकार के गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी ने ऐलान किया है कि 9 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। खास बात यह है कि यह दिन रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती का भी है, जिससे इस आयोजन को सांस्कृतिक रूप से खास बनाने की तैयारी की जा रही है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण 9 मई को होगा, हालांकि मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। पार्टी नेतृत्व ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को विधायक दल का नेता चुनने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है, जबकि मोहन चरण माजी को सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जा सकता है, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुटने की संभावना है। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
भाजपा ने यह भी संकेत दिया है कि नई सरकार का संचालन ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग से किया जाएगा। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने अपने कार्यकाल के दौरान सचिवालय को नबान्न भवन में स्थानांतरित कर दिया था, लेकिन भाजपा अब राज्य की प्रशासनिक विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से राइटर्स बिल्डिंग से शासन चलाने की तैयारी में है।
राज्य में पहली बार भाजपा को मिली इस बड़ी जीत के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं, और अब सबकी नजर मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा पर टिकी हुई है।

सीएम योगी के कड़े रुख के बाद यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था खत्म

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आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से 24 घंटे में मांगा जवाब

लखनऊ। प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने राज्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था समाप्त कर दी है। हालांकि, इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कॉरपोरेशन से 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया है।
दरअसल, स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों के बाद उपभोक्ता परिषद ने आयोग में याचिका दाखिल की थी। आयोग ने 16 अप्रैल को पावर कॉरपोरेशन को 10 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी जवाब दाखिल नहीं किया गया। इस पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए अब अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को 24 घंटे में स्पष्टीकरण देने का आदेश जारी किया है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन ने विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। उनका कहना है कि बिना उपभोक्ताओं की सहमति के पोस्टपेड कनेक्शनों को प्रीपेड में बदला गया और नए कनेक्शन भी अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में दिए गए, जो नियमों के खिलाफ है।
आयोग ने साफ कर दिया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया गया तो पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश में बिजली व्यवस्था और उपभोक्ता हितों को लेकर प्रशासनिक सख्ती बढ़ती नजर आ रही है।