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Friday, June 19, 2026
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खेल विभाग को मिला ‘सेवारत विभाग’ का दर्जा, स्टेडियमों के लिए मुफ्त मिलेगी जमीन

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लखनऊ। प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार और खिलाड़ियों को बेहतर आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग को ‘सेवारत विभाग’ का दर्जा प्रदान कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश में स्टेडियम, खेल मैदान और अन्य खेल अधोसंरचना के निर्माण के लिए जिला प्रशासन निश्शुल्क भूमि उपलब्ध करा सकेगा। सरकार के इस कदम को प्रदेश में खेल क्रांति की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब तक खेल विभाग को सेवारत विभाग का दर्जा प्राप्त नहीं था, जिसके कारण कई जिलों में स्टेडियम और खेल परिसरों के निर्माण के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया अटक जाती थी। जिला प्रशासन नियमों का हवाला देते हुए मुफ्त भूमि उपलब्ध कराने में असमर्थता जताता था। इससे कई महत्वाकांक्षी खेल परियोजनाएं वर्षों से लंबित पड़ी थीं।

खेल सचिव सुहास एल.वाई. ने बताया कि सरकार के नए निर्णय से खेल अधोसंरचना विकास की राह में आने वाली प्रशासनिक बाधाएं दूर हो जाएंगी। अब जिन जिलों में खेल सुविधाओं की आवश्यकता होगी, वहां जिला प्रशासन द्वारा विभाग को निश्शुल्क भूमि उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे स्टेडियम निर्माण और खेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

सरकार का लक्ष्य प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विस्तार करना है, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपने जिले या क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण और अभ्यास की सुविधाएं मिल सकें। इससे युवाओं को खेलों की ओर प्रोत्साहन मिलेगा और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी बेहतर होगा।

हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार खेल क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ा रही है। गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम सहित कई बड़े खेल प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नए फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों में नए स्टेडियम, बहुउद्देश्यीय खेल परिसर और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का रास्ता और आसान हो जाएगा।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर अखिलेश का हमला: ‘दूध का दूध नहीं, सोने का सोना करो’, रोजाना ब्रीफिंग की मांग

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लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित गड़बड़ियों को लेकर सियासत और तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जनता को हर दिन यह बताया जाना चाहिए कि जांच कहां तक पहुंची। उन्होंने कहा कि यह केवल पैसों का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

जारी बयान में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अयोध्या में चढ़ावे, दान और शिलाओं से जुड़े विवादों ने देशभर के श्रद्धालुओं को झकझोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण के बाद अयोध्या आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या पर भी असर पड़ा है, जिससे स्थानीय व्यापार और आम लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की कथित लापरवाही का खामियाजा अयोध्या की जनता क्यों भुगते।

सपा प्रमुख ने कहा कि अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच आक्रोश और अविश्वास का माहौल बन रहा है। जांच की प्रगति को लेकर स्पष्ट जानकारी न मिलने से संदेह और बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जांच एजेंसियां प्रतिदिन प्रेस ब्रीफिंग कर जनता को बताएं कि मामले में क्या कार्रवाई हुई और किन तथ्यों का खुलासा हुआ है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया अयोध्या दौरे पर भी कटाक्ष करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि जांच को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल औपचारिक बयान नहीं, बल्कि ठोस जवाब चाहती है।

अपने सबसे तीखे बयान में अखिलेश ने कहा कि “दूध का दूध, पानी का पानी” वाली कहावत अब पर्याप्त नहीं है। जनता चाहती है कि “सोने का सोना और चांदी का चांदी” सामने आए। मंदिर में चढ़ाए गए नकद दान, बहुमूल्य धातुओं, जेवरों और अनमोल शिलाओं का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं के मन में उठ रहे सभी सवालों का जवाब मिल सके।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नशीले पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद के साथ तीन लोगों को किया गिरफ्तार

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जम्मू: जम्मू-कश्मीर पुलिस (Jammu and Kashmir Police) ने जम्मू के पॉश इलाके गांधी नगर से तीन लोगों को नशीले पदार्थों और हथियारों व गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार (arrested) किया है। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि ड्रग तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए, गांधी नगर पुलिस स्टेशन की टीम ने हेरोइन जैसा नशीला पदार्थ (व्यावसायिक मात्रा में) और हथियार व गोला-बारूद बरामद किया है और तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

इस ऑपरेशन के तहत गिरफ्तार किए गए तीन लोगों की पहचान जम्मू के गुर्जर नगर निवासी आफताब भट, जम्मू के शास्त्री नगर निवासी चंचल सिंह और कठुआ की कृष्णा कॉलोनी निवासी अनूप सिंह जसरोटिया के तौर पर हुई है। ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने उनके पास से 260 ग्राम हेरोइन, दो पिस्तौल, दो देसी पिस्तौल (देसी कट्टे), एक रिवॉल्वर और एक धारदार हथियार बरामद किया।

उन्होंने कहा, “कानून की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली गई है और जांच चल रही है।” उन्होंने आगे कहा कि जम्मू पुलिस इस इलाके में ड्रग नेटवर्क को खत्म करने और संगठित अपराध पर रोक लगाने के अपने संकल्प को दोहराती है और नागरिकों से अपील करती है कि वे ऐसी कोई भी जानकारी दें जिससे इन प्रयासों में मदद मिल सके।

मलेशिया से डिपोर्ट किए गए दो खालिस्तानी आतंकी, दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही पुलिस ने किया गिरफ्तार

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चंडीगढ़: पंजाब पुलिस (Punjab Police) ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और रॉयल मलेशिया पुलिस (RMP) के साथ मिलकर, प्रतिबंधित खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) से जुड़े दो कथित ऑपरेटिव्स को डिपोर्ट करवाया और दिल्ली (Delhi) के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Indira Gandhi International Airport) पर उनके पहुंचने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) गौरव यादव के अनुसार, यह कार्रवाई एक इंटेलिजेंस-बेस्ड रणनीति के तहत की गई, जिसका मकसद पंजाब में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में कथित तौर पर शामिल विदेशी नेटवर्क को खत्म करना था।

गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान अंबाला के रहने वाले गुरविंदर सिंह और पटियाला के रहने वाले मंजीत सिंह के तौर पर हुई है। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि ये दोनों मलेशिया से काम कर रहे थे और KZF-समर्थित मॉड्यूल्स से जुड़ी गतिविधियों के कोऑर्डिनेशन और फाइनेंसिंग में अहम भूमिका निभा रहे थे। पुलिस ने बताया कि पंजाब में रेलवे के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर (जिसमें डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के हिस्से भी शामिल हैं) को निशाना बनाने की कोशिशों की जांच के दौरान इन संदिग्धों के बारे में पता चला था।

अधिकारियों ने पहले एक ऐसे आतंकी मॉड्यूल का पता लगाया था जो इस साल 23 जनवरी को फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद के पास हुए IED ब्लास्ट और उसके बाद 27 अप्रैल को पटियाला जिले के शंभू के पास धमाका करने की कोशिश से कथित तौर पर जुड़ा था। इन घटनाओं की जांच के दौरान, सुरक्षा एजेंसियों ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए। बरामद सामान में कथित तौर पर एक RPG लॉन्चर, एक IED, RDX, हैंड ग्रेनेड, आधुनिक पिस्तौल और गोला-बारूद शामिल थे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बाद में हुई वित्तीय जांच से पता चला कि इस मॉड्यूल द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फंड को कथित तौर पर विदेशी चैनलों के ज़रिए भेजा जा रहा था। जांच के दौरान जांचकर्ता मलेशिया पहुँचे, जहाँ दो आरोपी कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन के लिए काम करने वाले ऑपरेटिव्स को वित्तीय मदद दिलाने में शामिल थे।

DGP यादव ने कहा कि जांच से पंजाब में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विदेश से काम कर रहे हैंडलर्स और फाइनेंसरों के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पता चला। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों ने राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश में KZF से जुड़े लोगों को मदद पहुँचाने के लिए विदेशी खातों और वित्तीय चैनलों का इस्तेमाल किया।

भारत आने के बाद, आरोपियों को पटियाला की अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। जांचकर्ता अब उनके अन्य साथियों के साथ कथित संबंधों की जांच कर रहे हैं और इस बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। पंजाब पुलिस ने कहा कि इस साजिश से जुड़े ऑपरेटिव्स, फाइनेंसरों और मदद करने वालों की पूरी चेन का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं। अधिकारियों ने कहा कि राज्य पुलिस आतंकी मदद के ढांचे को खत्म करने, अवैध फंडिंग नेटवर्क को तोड़ने और पूरे पंजाब में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

ट्रंप के राजनीतिक समर्थन के कूटनीतिक निहितार्थ

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(राज कुमार सिन्हा-विभूति फीचर्स)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह संकेत देना कि किसी बाहरी हमले की स्थिति में अमेरिका भारत के साथ खड़ा होगा, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। हालांकि इसे औपचारिक सुरक्षा गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन यह स्पष्ट रूप से बताता है कि अमेरिका भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन और भारत-चीन सीमा विवाद जैसे मुद्दों ने भारत की सामरिक भूमिका को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। इसी कारण अमेरिका भारत के साथ रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार और भू-राजनीतिक सहयोग को लगातार विस्तार दे रहा है। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है, लेकिन दोनों देशों के बीच ऐसा कोई सैन्य गठबंधन या कानूनी समझौता नहीं है, जैसा कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन ( नाटो ) के सदस्य देशों के बीच होता है। इसलिए ट्रंप के किसी भी बयान को औपचारिक सैन्य प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और रणनीतिक संकेत के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भारत और अमेरिका ने पिछले वर्षों में रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास, तकनीकी साझेदारी, खुफिया सहयोग और रक्षा उत्पादन में तेजी आई है। इसके बावजूद भारत ने अपनी विदेश नीति की मूल भावना यानी रणनीतिक स्वायत्तता को बरकरार रखा है। भारत किसी एक शक्ति-गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने की नीति पर कायम है। यहीं सबसे बड़ी चुनौती भी मौजूद है। डोनाल्ड ट्रंप का राजनीतिक व्यवहार अक्सर अप्रत्याशित रहा है। एक ओर वे भारत को महत्वपूर्ण साझेदार बताते हैं, वहीं दूसरी ओर भारत के निर्यात पर टैरिफ लगाने, रूस से तेल खरीदने पर आलोचना करने और व्यापारिक दबाव बनाने से भी नहीं हिचकिचाते। इससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका की विदेश नीति स्थायी मित्रता से अधिक अपने आर्थिक और सामरिक हितों पर आधारित होती है।
भारत ने भी कई मौकों पर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार नीति और विदेश नीति किसी बाहरी दबाव से संचालित नहीं होगी। रूस से तेल खरीदने का निर्णय भारत की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों पर आधारित है। 140 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति केवल कूटनीतिक दबावों के आधार पर तय नहीं की जा सकती। भारत-अमेरिका संबंधों में एक अन्य संवेदनशील विषय भारत-पाकिस्तान मुद्दा है। ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम कराने या युद्ध रुकवाने में भूमिका निभाई है। भारत ने लगातार इन दावों को खारिज करते हुए दोहराया है कि जम्मू-कश्मीर सहित सभी द्विपक्षीय मुद्दे केवल भारत और पाकिस्तान के बीच ही सुलझाए जाएंगे और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है।
दूसरी तरफ रूस आज भी भारत का सबसे पुराना और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बना हुआ है। शीत युद्ध के समय से ही तत्कालीन सोवियत संघ ने संयुक्त राष्ट्र में कई महत्वपूर्ण अवसरों पर भारत का समर्थन किया। आज भी भारत की सैन्य संरचना का बड़ा हिस्सा रूसी उपकरणों पर आधारित है। परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरे संबंध बने हुए हैं।भारत और रूस का संबंध केवल खरीदार-विक्रेता का नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का है।
भारत के लिए आने वाला दशक किसके साथ खड़ा होना है का नहीं, बल्कि सभी के साथ संतुलन बनाकर अपने हितों को सुरक्षित रखने का होगा। भारत अब किसी सैन्य गुट का अनुयायी नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिका भारत के लिए प्रौद्योगिकी, निवेश और चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन का महत्वपूर्ण साझेदार है, जबकि रूस ऊर्जा, रक्षा और दीर्घकालिक रणनीतिक भरोसे का आधार बना हुआ है। भारत की वास्तविक ताकत इसी बहुध्रुवीय कूटनीति में निहित है। ट्रंप के बयानों को भारत के लिए स्थायी सुरक्षा गारंटी मानना जल्दबाजी होगी। अमेरिकी राजनीति में नेतृत्व बदलने के साथ नीतियां भी बदल जाती हैं। इसलिए भारत को किसी एक देश पर निर्भर होने के बजाय अपनी सैन्य आत्मनिर्भरता, आर्थिक शक्ति और कूटनीतिक स्वतंत्रता को और मजबूत करना होगा। 21वीं सदी की नई विश्व व्यवस्था में भारत की सबसे बड़ी सफलता यही होगी कि वह अमेरिका के साथ साझेदारी, रूस के साथ भरोसा और वैश्विक दक्षिण के साथ नेतृत्व,इन तीनों को एक साथ संतुलित रख सके। यही भारत की वास्तविक रणनीतिक शक्ति है। (विभूति फीचर्स)

अयोध्या को मिली 290 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात

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अयोध्या। नगर निगम क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को नई गति देते हुए आज ₹290 करोड़ से अधिक लागत की 245 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। इस अवसर पर रामायण वैक्स म्यूजियम तथा जोनल कार्यालय भवन का भी लोकार्पण संपन्न हुआ।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अयोध्या केवल आस्था की नगरी ही नहीं, बल्कि आधुनिक विकास का भी केंद्र बन रही है। नई परियोजनाओं के माध्यम से सड़क, जल निकासी, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा।

इस दौरान नगरवासियों से नगर निगम की विकास यात्रा में निरंतर सहयोग देने की अपील की गई। कहा गया कि जनसहभागिता के बिना किसी भी शहर का समग्र विकास संभव नहीं है। नागरिकों के सहयोग से अयोध्या को स्वच्छ, सुंदर और आधुनिक सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि आदरणीय प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन के अनुरूप अयोध्या को विश्वस्तरीय धार्मिक, सांस्कृतिक और स्मार्ट सिटी के रूप में स्थापित करने की दिशा में ये परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

245 विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास के साथ नगर निगम क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है, जिससे आने वाले समय में लाखों नागरिकों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाओं का लाभ मिलेगा।