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Friday, March 20, 2026
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यूपी में मौसम अलर्ट: 27 जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी, तेज हवाएं और बारिश के आसार

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लखनऊ। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। शुक्रवार को तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश के साथ कई जिलों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है, जिसके चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

ऑरेंज अलर्ट वाले जिले फतेहपुर , फर्रुखाबाद , कन्नौज , कानपुर देहात , कानपुर नगर , सहारनपुर , शामली , मुज़फ्फरनगर , मेरठ , हापुड़ , बुलंदशहर , अलीगढ , मथुरा , हाथरस , कासगंज , एटा , बाँदा , आगरा , फ़िरोज़ाबाद , मैनपुरी , इटावा , औरैया , बिजनौर , अमरोहा , संभल , जालौन और हमीरपुर आदि मे आसार है

मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना है।

नवाबगंज में सभासद की ठेकेदारी सरकारी धन का गोलमाल जाँच की तैयारी

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➤ ‘आकाश सेवा संस्थान’ के नाम से फर्म चलाकर नगर पंचायत में कर रहा शातिर युवक कार्य

➤ चेयरमैन से मांगी जाएगी जानकारी, नियमों पर उठे सवाल

फर्रुखाबाद / नवाबगंज। नवाबगंज नगर पंचायत में एक सभासद की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारी के अनुसार, संबंधित शातिर सभासद जो कभी सपा विधायक रहे विजय सिंह जो (पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड के मुख्य आरोपी )विजय सिंह का गुर्गा कहा जाता था ‘आकाश सेवा संस्थान’ नाम से फर्म संचालित करता है और उसी के माध्यम से नगर पंचायत में ठेकेदारी कार्य कर रहा है।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जनप्रतिनिधि होने के बावजूद ठेकेदारी में सक्रिय भूमिका को लेकर हितों के टकराव की स्थिति बन रही है। इससे नगर पंचायत की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि उक्त फर्म को नगर पंचायत में विभिन्न कार्यों के ठेके मिले हैं। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया और कार्य आवंटन को लेकर आधिकारिक रूप से अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पंचायत चेयरमैन से इस संबंध में विस्तृत जानकारी ली जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि क्या किसी सभासद द्वारा ठेकेदारी करना नियमों के अनुरूप है या नहीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है और सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से पूरी की गई हैं या नहीं।

चांद न दिखने से ईद-उल-फितर 21 मार्च को, रुयत-ए-हिलाल कमेटी की बैठक में हुआ ऐलान

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नई दिल्ली। इमारत-ए-शरिया-ए-हिंद की रुयत-ए-हिलाल कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में ईद के चांद को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। गुरुवार को बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक के बाद आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई कि देश में कहीं भी ईद का चांद नजर नहीं आया है। इसके चलते अब ईद-उल-फितर का पर्व शनिवार, 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।

कमेटी के सदस्यों ने विभिन्न राज्यों से प्राप्त सूचनाओं और चांद देखने के दावों की गहन समीक्षा की, लेकिन कहीं से भी चांद दिखने की पुष्टि नहीं हो सकी। बैठक में मौजूद उलेमा और विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि रमजान का महीना 30 दिनों का पूरा होगा और उसके बाद ही ईद मनाई जाएगी।

इमारत-ए-शरिया-ए-हिंद की ओर से जारी बयान में देशभर के मुस्लिम समुदाय से अपील की गई है कि वे इस आधिकारिक घोषणा का पालन करें और निर्धारित तारीख पर ही ईद-उल-फितर का त्योहार मनाएं। साथ ही लोगों से भाईचारे, शांति और सौहार्द के साथ त्योहार मनाने का संदेश भी दिया गया है।

गौरतलब है कि हर वर्ष ईद का त्योहार चांद दिखने पर निर्भर करता है, जिसके चलते तारीख में बदलाव संभव होता है। इस बार चांद नजर न आने के कारण एक दिन का इजाफा हुआ है, जिससे अब पूरे देश में शनिवार को ईद का जश्न मनाया जाएगा।

बीजेपी नेता बोले- नीतीश कुमार से सहमति लेकर होगा सीएम का पद

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पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में इस मुद्दे पर किसी प्रकार का कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम का चयन पूरी तरह से सामूहिक सहमति से किया जाएगा और इसमें सभी सहयोगी दलों की राय को महत्व दिया जाएगा।

उन्होंने विशेष रूप से नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा और जेडीयू का गठबंधन वर्षों पुराना और मजबूत रहा है। दोनों दल लंबे समय से साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे आपसी तालमेल और समझ काफी बेहतर हो चुकी है। ऐसे में नेतृत्व के चयन को लेकर किसी तरह की असहमति की गुंजाइश नहीं है।

प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि जब भी मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की आवश्यकता होगी, एनडीए का शीर्ष नेतृत्व बैठकर सामूहिक रूप से निर्णय लेगा। इस प्रक्रिया में सहयोगी दलों के साथ-साथ नीतीश कुमार की सहमति भी अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बिहार के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है।

भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि एनडीए का लक्ष्य “विकसित बिहार” का निर्माण करना है, जिसके लिए सभी सहयोगी दल एकजुट होकर काम कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अनावश्यक विवाद खड़ा करना केवल राजनीतिक भ्रम फैलाने का प्रयास है, जबकि वास्तविकता यह है कि एनडीए पूरी तरह एकजुट है और विकास के एजेंडे पर केंद्रित है।

ईरान हमले से एलएनजी सप्लाई पर संकट, भारत में गैस किल्लत बढ़ने की आशंका

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की गैस सप्लाई को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। ईरान द्वारा कतर की अहम ऊर्जा परियोजना पर किए गए मिसाइल हमले के बाद वैश्विक एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) सप्लाई पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यह हमला कतर की राजधानी दोहा से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुआ, जो दुनिया के प्रमुख गैस निर्यात केंद्रों में से एक है।

हमले के बाद इस अत्याधुनिक एनर्जी हब में भीषण आग लग गई, जिससे वहां मौजूद एलएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर और कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इस नुकसान की भरपाई में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है। इससे न केवल कतर की उत्पादन क्षमता प्रभावित होगी, बल्कि वैश्विक बाजार में गैस की आपूर्ति भी लंबे समय तक बाधित रह सकती है।

कतर की सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के सीईओ साद अल-काबी ने बताया कि इस हमले से देश की लगभग 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात क्षमता को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आशंका जताई कि कंपनी को अपने कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर “फोर्स मैज्योर” लागू करना पड़ सकता है, जिससे इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों को गैस सप्लाई में बाधा आ सकती है।

भारत के लिए यह स्थिति और भी गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि कतर उसका सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर है। भारत हर साल करीब 2.7 करोड़ टन एलएनजी का आयात करता है, जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले कतर से आता है। ऐसे में सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर घरेलू गैस उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।

इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई बाधित हुई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखने लगा है, जहां कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द नहीं सुधरे, तो कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।

कुल मिलाकर, इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दिया है और भारत सहित कई देशों के लिए आने वाले समय में गैस संकट और महंगाई की चुनौती बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

मिशन दिल्ली’ पर नीतीश कुमार: राष्ट्रीय अध्यक्ष रहकर निशांत कुमार को बनाएंगे सियासत का धुरंधर

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पटना (शरद कटियार)। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। स्वास्थ्य कारणों के चलते मुख्यमंत्री पद छोड़ने की चर्चाओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से भी हटेंगे? लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसा होना मुश्किल है, क्योंकि बीते वर्षों की घटनाओं ने उन्हें अधिक सतर्क बना दिया है।

दरअसल, नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर में कई बार उत्तराधिकारी तय करने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। सबसे पहले उन्होंने उपेन्द्र कुशवाहा को आगे बढ़ाया और उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां सौंपीं। लेकिन समय के साथ दोनों के बीच मतभेद बढ़े और यह प्रयोग सफल नहीं हो सका।

इसके बाद उन्होंने अपने करीबी माने जाने वाले आरसीपी सिंह पर भरोसा जताया। एक समय ऐसा था जब आरसीपी सिंह को उनका सबसे विश्वसनीय सहयोगी माना जाता था। लेकिन राज्यसभा और केंद्रीय मंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर विवाद और नेताओं के बीच टकराव के चलते यह समीकरण भी बिगड़ गया, जिससे नीतीश कुमार का भरोसा दूसरी बार टूटा।

तीसरे प्रयास में नीतीश कुमार ने पारंपरिक राजनीति से हटकर एक बड़ा दांव खेला और प्रशांत किशोर को पार्टी में अहम स्थान दिया। उन्हें संगठन में शीर्ष स्तर पर लाया गया, लेकिन विचारधारा और कार्यशैली के मतभेदों के कारण यह प्रयोग भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका।

इन लगातार असफल प्रयासों और राजनीतिक घटनाक्रमों ने नीतीश कुमार को काफी सतर्क बना दिया है। यही वजह है कि अब उन्होंने अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में आने की अनुमति दी है। हालांकि, वे यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि निशांत को सही मार्गदर्शन और संरक्षण मिले, ताकि वे लंबे समय तक राजनीति में टिक सकें।

विश्लेषकों का मानना है कि यही कारण है कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। वे संगठन की कमान अपने हाथ में रखकर दिल्ली से पार्टी को मजबूत करने और नए नेतृत्व को तैयार करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, बीते वर्षों की राजनीतिक घटनाओं और असफल प्रयोगों ने नीतीश कुमार को यह सिखाया है कि पार्टी की कमान अपने हाथ में रखना ही फिलहाल सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है, ताकि भविष्य में किसी तरह की अनिश्चितता से बचा जा