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Tuesday, June 16, 2026
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उच्चाधिकारियों के निर्देश पर चला प्रशासन का बुलडोजर, कब्जा मुक्त कराई गई भूमि

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अमैयापुर में वर्षों पुराने भूमि विवाद का हुआ निस्तारण, शिकायतकर्ता को मिली राहत

अमृतपुर, फर्रुखाबाद। तहसील अमृतपुर क्षेत्र के ग्राम अमैयापुर में भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का आखिरकार प्रशासन ने निस्तारण कर दिया। मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को भेजी गई शिकायत के बाद राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हुए भूमि को कब्जा मुक्त करा दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम अमैयापुर स्थित गाटा संख्या 223, रकबा 0.166 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में खातेदार नरेंद्र पाल सिंह पुत्र रामपाल सिंह के नाम दर्ज है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसके लंबे समय तक गांव से बाहर रहने का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने उक्त भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया था तथा वहां अस्थायी एवं स्थायी निर्माण के साथ अन्य सामान रखकर स्वामित्व जताने का प्रयास किया जा रहा था।

बताया गया कि वर्ष 2025 में राजस्व विभाग द्वारा भूमि की पैमाइश कराई गई थी और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी, लेकिन कार्रवाई पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई। पुनः पैमाइश के बावजूद कब्जा न हटने पर मामला मुख्यमंत्री कार्यालय सहित जिले के उच्च अधिकारियों तक पहुंचा।
मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर से कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए। निर्देशों के क्रम में नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार राजस्व टीम और अमृतपुर थाना पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कर भूमि का स्थलीय निरीक्षण किया तथा कथित अवैध कब्जे को हटवाते हुए भूमि को कब्जा मुक्त करा दिया।
कार्रवाई के दौरान पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा, जिससे पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार ने बताया कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार भूमि पर किए गए अस्थायी अवैध कब्जे को हटवा दिया गया है और भूमि की स्थिति अभिलेखों के अनुरूप सुनिश्चित कर दी गई है।
प्रशासन की इस कार्रवाई से शिकायतकर्ता को बड़ी राहत मिली है। वहीं ग्रामीणों ने राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। क्षेत्र में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है।

अग्निशमन विभाग ने सीएचसी पहुंचकर यंत्रों की जांच की

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नवाबगंज नगर में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर लाखों की लागत से अग्निशमन यंत्र को लगाया गया है। यंत्र लगाने के बाद आज तक चालू नहीं किया गया है। जिससे यंत्र शोपीस बनकर रह गया है। लाखों की लागत से लगाए गए इस यंत्र का न तो पानी का सिस्टम चालू है। और न ही उसका अलार्म चालू है। अक्सर सरकारी कार्यालयों, प्रतिष्ठानों में हो रही आग की घटनाओं को लेकर मंगलवार अग्निशमन विभाग से उपनिरीक्षक प्रांशु अवस्थी व कांस्टेबल राहुल यादव के साथ सीएचसी पहुंचे। उन्होंने सीएचसी में लगे अग्निशमन यंत्र की जांच की। उन्हें भी यंत्र बंद पड़ा मिला।
उपनिरीक्षक प्रांशु अवस्थी ने बताया कि सीएचसी में लगे यंत्र का पानी व अलार्म सिस्टम बंद मिला है। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नवाबगंज का एसीएमओ ने औचक निरीक्षण किया

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नवाबगंज
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नवाबगंज का अपर मुख्य चिकित्साधिकारी ( एसीएमओ ) डॉ सर्वेश यादव ने मंगलवार सुबह औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधीक्षक कक्ष में बैठकर स्वास्थ कर्मियों के उपस्थिति रजिस्टर का अवलोकन किया। अधीक्षक डॉ लोकेश शर्मा अवकाश पर बताए गए। इस दौरान उन्होंने डॉ गौरव राजपूत से आवश्यक जानकारी ली। उन्होंने जननी सुरक्षा योजना में अस्पताल में प्रसव होने के बाद प्रसूताओं को मिलने वाली धनराशि के भुगतान के बारे में बीपीएम पीयूष पवन दीक्षित, बीसीपीएम प्रदीप कुमार से जानकारी लीं। जिसपर योजना में मात्र 43 प्रतिशत भुगतान होने की जानकारी दी गई। जिसपर एसीएमओ ने संबंधित कर्मचारियों को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि लगभग 90 प्रतिशत भुगतान होना चाहिए था। लेकिन 43 प्रतिशत भुगतान होना कर्मचारियों की लापरवाही उजागर कर रहा है। उन्होंने शेष भुगतान को शीघ्र ही कराने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान व 14 वर्ष आयु की किशोरियों को होने वाले एचबी वैक्सीनेशन की समीक्षा की। इसमें भी गति न मिलने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर कर सुधार करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने सीएचसी के दवा वितरण कक्ष, नेत्र परीक्षण कक्ष आदि का भी अवलोकन कर दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। एसीएमओ के औचक निरीक्षण से स्वास्थ कर्मियों में अफरा तफरी मची रही।
इस दौरान हिना खान, अतुल गुप्ता, डॉ गौरव राजपूत, डॉ जशवीर सिंह, फार्मासिस्ट सर्वेश श्रीवास्तव, विभोर, रतन देव, डॉ श्याम किशोर समेत स्वास्थ कर्मी रहे।
एसीएमओ डॉ सर्वेश यादव ने बताया कि सीएचसी पर अधीक्षक मौजूद नहीं मिले। उनके लंबी छुट्टी पर जाने से स्वास्थ कर्मी ढ़िलाई बरत रहे हैं। सीएमओ से बात कर सीएचसी पर शीघ्र ही किसी सक्षम अधिकारी की तैनाती का प्रयास किया जाएगा। जननी सुरक्षा योजना में 90 प्रतिशत के सापेक्ष 43 प्रतिशत भुगतान मिला। जो बेहद कम है। इसे शीघ्र कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान व 14 वर्ष की किशोरियों को होने वाले एचबी वैक्सीनेशन में भी शिथिलता मिली है। संबंधित को सुधार के निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्र में बिना पंजीकृत प्राइवेट चिकित्सक व झोलाछाप को चिन्हित कर उन्हें बंद कराया जाएगा। जिसको लेकर निरंतर अभियान चलाया जा रहा है।

मथुरा में बीएसएफ भूमि पर विकसित होगा मंडल का पहला जैव विविधता क्षेत्र

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– 12 हेक्टेयर में बनेंगी 6 विशेष वाटिकाएं, नक्षत्र, नवग्रह, औषधि वाटिका होंगी मुख्य आकर्षण

– ‘अमर बलिदानी वाटिका’ में देश के शहीद जवानों की याद में लगेंगे पौधे

– कुल 7200 पौधे रोपे जाएंगे, पक्षियों- तितलियों का बनेगा अनुकूल ईको-सिस्टम

– पर्यावरण संरक्षण के लिए योगी सरकार का आगरा मंडल में अनूठा कदम

मथुरा, 16 जून। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में कान्हा की नगरी मथुरा में सामाजिक वानिकी प्रभाग एक अभिनव कार्य करने जा रहा है। मथुरा में हाईवे किनारे बाद गांव स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 12 हेक्टेयर भूमि पर एक वृहद जैव विविधता क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसके लिए बीएसएफ और वानिकी विभाग के बीच 10 वर्ष का करार हुआ है। इस पूरे क्षेत्र में दो-दो हेक्टेयर की छह विशेष वाटिकाएं बनाई जाएंगी, जिनमें कुल 7200 पौधे रोपे जाएंगे। सुरक्षा के लिए इन वाटिकाओं की तारों से फेंसिंग भी कराई जाएगी।

नक्षत्र, नवग्रह और राशि के अनुसार रोपे जाएंगे पौधे
इस जैव विविधता क्षेत्र में ‘नक्षत्र-नवग्रह-राशि वाटिका’ लोगों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र होगी। यहां ग्रहों की शांति और अनुकूल फल की प्राप्ति के लिए विशेष पौधे लगाए जाएंगे। सूर्य के लिए मदार, चंद्रमा के लिए पलाश, बृहस्पति के लिए पीपल, शुक्र के लिए गूलर और शनि के लिए शमी जैसे नवग्रह पौधे रोपे जाएंगे। इसके साथ ही सभी 12 राशियों (जैसे मेष के लिए लाल चंदन, वृषभ के लिए गूलर) और 27 नक्षत्रों के प्रतिनिधि पौधे भी इस वाटिका में लगेंगे, जो भारतीय संस्कृति और वनस्पति विज्ञान का अनूठा संगम होगा।

‘अमर बलिदानी’ और ‘बीएसएफ’ वाटिका में जवान करेंगे पौधरोपण
देश की रक्षा करने वाले वीरों के सम्मान में यहां ‘बीएसएफ’ और ‘अमर बलिदानी’ वाटिका भी विकसित की जाएगी। बीएसएफ वाटिका में सुरक्षा बल के जवान अपने नाम से पौधे रोपेंगे और खुद उनकी देखभाल करेंगे। वहीं देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीरों की याद में ‘अमर बलिदानी वाटिका’ में शहीद जवानों के परिजनों द्वारा पौधे रोपे जाएंगे।

औषधीय और श्रीकृष्ण की प्रिय प्रजातियों से महकेगी वाटिका
स्वास्थ्य और आध्यात्म को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में ‘औषधि वाटिका’ तैयार की जाएगी, जिसमें नीम, अर्जुन, आंवला, बेल, अमलतास, तुलसी और घृतकुमारी (एलोवेरा) जैसे पौधे लगेंगे। इसके अलावा, भगवान कृष्ण की नगरी होने के कारण यहां ‘श्रीकृष्ण वाटिका’ भी बनेगी, जिसमें कान्हा की प्रिय प्रजातियां जैसे कदंब, टेर, पीलू और बरगद के पौधे लगाए जाएंगे। वहीं, ‘वंदे मातरम वाटिका’ में राष्ट्रीय और राजकीय महत्व के पौधे रोपे जाएंगे।

पक्षियों और तितलियों को आकर्षित करेगा जैव विविधता क्षेत्र
यह आगरा मंडल का ऐसा पहला जैव विविधता क्षेत्र होगा, जहां जलवायु के अनुकूल पौधों के साथ-साथ नाशपाती और चीकू जैसे पौधे दूसरे जिलों से मंगाकर लगाए जाएंगे। यह वाटिका केवल पेड़-पौधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यहां फल-फूल के ऐसे पौधे लगाए जाएंगे जो चिड़ियों, तितलियों और अन्य पक्षियों को आकर्षित कर सकें, ताकि एक बेहतरीन प्राकृतिक ईको सिस्टम तैयार हो सके।

इस विशेष पहल पर सामाजिक वानिकी प्रभाग, मथुरा के प्रभागीय निदेशक वेंकट श्रीकर पटेल ने बताया कि बीएसएफ द्वारा 12 हेक्टेयर भूमि वानिकी विभाग को वाटिका बनाने के लिए दी गई है। इसे जैव विविधता नाम दिया जाएगा। इसके अंदर छह वाटिकाएं होंगी, जहां हर प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। ये वाटिकाएं पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा आकर्षण का केंद्र होंगी।

मोहर्रम के चांद के साथ इमामबाड़ों में बिछने लगी फर्श-ए-अजा, मातम का दौर शुरू

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फर्रुखाबाद।आसमान में मंगलवार की शाम मोहर्रम का चांद दिखाई दिया।काजी सैयद मुताहिर अली, मौलाना सैयद फरहत अली जैदी और मौलाना सैयद सदाकत हुसैन सैंथली ने चांद की तस्दीक की, जिसके साथ ही मोहर्रम की पहली तारीख का ऐलान कर दिया गया।
जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मुफ्ती भोआज्जम अली ने भी इसकी पुष्टि की। इसके साथ ही शहर के इमामबाड़ों और अजाखानों में फर्श-ए-अजा बिछने लगी है ताजिए और अलम सजा दिए गए, और मजलिसों व मातम का दौर शुरू हो गया।
मोहर्रम का चांद मंगलवार को नजर आने के साथ ही शहर में जहां इमामबाड़ों में शबीह-ए-अलम, ताबूत और ताजिए सजेने लग है ।वहीं घरों महिलाओं ने दो माह आठ दिन के लिए श्रृंगार त्याग कर गम का लिबास ओढ़ लिया और मजलिसों का आयोजन शुरू हो गया । पुरुषों ने इमामबाडों में पहुंच कर मातम किया और इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। पहली मोहर्रम की तारीख के साथ ही दस दिनों का
अस्ताना-ए-वारिस पाक पर ताजिए के साथ मातमी सिलसिला शुरू हो गया। शहर के गढ़ी अब्दुल मजीद खां, बीबीगंज, अस्ताना-ए-वारिस पाक और दरगाह हजरत अब्बास में मजलिसों की तैयारियां पहले से ही तेज थीं। अनीसा बेगम वारसी द्वारा बनवाया जा रहा पुश्तैनी ताजिया एक बार फिर श्रद्धा का केंद्र बनेगा। यह ताजिया कर्बला नहीं जाता, बड़ी संख्या में लोग इसे देखने आते हैं। दो मुहर्रम को शाम छह बजे पहला मातमी जुलूस लाल सराय की मस्जिद से निकलेगा, जो नेहरू रोड, किराना बाजार, टाउन हाल होते हुए दरगाह हजरत अब्बास पर संपन्न होगा। तीन मुहर्रम को हाजी साधना किन्नर की सरपरस्ती में चांदी का ताजिया जुलूस निकलेगा, जो चीनी ग्रान इमामबाड़ा से शुरू होकर वापसी में वहीं पहुंचेगा।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिया जायेगा न्यू रेसिपी आधारित पोषाहार

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फर्रुखाबाद। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में न्यू रेसिपी आधारित पोषाहार छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को आंगनबाड़ी केन्द्रों में अब शिशु अमृत, शिशु आहार और बाल पुष्टिकर, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी दिया जाएगा।
बताते चलें कि अभी तक दाल, दलिया और रिफाइंड मिलता था। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के तहत 1752 आंगनबाड़ी केन्द्र चल रहे हैं। इनमें लगभग एक लाख 47 हजार 956 लाभार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें से 9303 गर्भवती व 10299 धात्री, छह माह से तीन साल तक 72 हजार अस्सी व तीन साल से छह साल तक 54 हजार सात सौ 64 बच्चे हैं। वहीं 586 अति कुपोषित बच्चे भी शामिल हैं।
छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को शिशु अमृत व आहार (आटा, बेसन का हलवा), तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को बाल पुष्टिकर मीठा और नमकीन (दलिया मूंग सोया खिचड़ी) दिया जाएगा। कुपोषित की श्रेणी वाली छह माह से लेकर एक वर्ष तक के बच्चों क आरोग्य पोषण (ऊर्जायुक्त हलवा) मिलेगा। एक वर्ष से तीन साल के बच्चों को बाल संजीवनी तीन वर्ष से छह वर्ष तक के बच्च को सक्षम पोषण मीठा और सक्षम पोषण नमकीन दलिया दिया जाएगा। धात्रियों और गर्भवती महिलाओं को मीठा और नमकीन संपूर्ण मातृ आहार मिलेगा। यह जानकारी देते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नई रेसिपी के आधार पर वितरण किया जाएगा।