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Sunday, May 24, 2026
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एआरटीओ व यातायात प्रभारी ने अभियान चलाकर की बड़ी कार्रवाई, डग्गामार बस समेत कई वाहनों पर जुर्माना

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फर्रुखाबाद। इटावा-बरेली हाईवे पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई, जिससे हड़कंप मच गया।
अभियान के दौरान एआरटीओ सुभाष राजपूत और यातायात प्रभारी सत्येंद्र कुमार की टीम ने एक डग्गामार बस को पकड़ते हुए उस पर कार्रवाई की। बस सहित संबंधित मामलों में कुल 49 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा करीब 13 अन्य छोटे और बड़े वाहनों का भी चालान किया गया।
एआरटीओ सुभाष राजपूत ने बताया कि पूरे अभियान के दौरान लगभग एक लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना परमिट, ओवरलोडिंग, फिटनेस और अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
वहीं यातायात प्रभारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि नगर के विभिन्न क्षेत्रों में भी नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि यातायात नियमों का पालन करें, अन्यथा उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अभियान के चलते हाईवे पर वाहन चालकों में खासी हलचल देखी गई और कई लोग अपने दस्तावेज दुरुस्त करते नजर आए। प्रशासन की इस कार्रवाई को सड़क सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।

लखनऊ के बड़े निजी स्कूलों पर प्रशासन सख्त, आरटीई के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश न देने पर मान्यता रद्द करने की चेतावनी

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राजधानी Lucknow में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई)-2009 के तहत चयनित गरीब बच्चों को प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। लगातार चेतावनी के बावजूद इस वर्ष कई बड़े स्कूलों ने आरटीई के तहत चयनित बच्चों का दाखिला नहीं लिया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने करीब एक दर्जन स्कूलों को नोटिस जारी कर मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी है।

शनिवार को अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने संबंधित विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी। खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर जिन स्कूलों के नाम प्रशासन को भेजे गए हैं, उनमें सिटी मांटेसरी स्कूल की सभी शाखाएं, एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, सेंट मेरी इंटर कॉलेज, लखनऊ पब्लिक कॉलेज, बाल गाइड, ब्राइट वे कॉलेज और सिटी इंटरनेशनल स्कूल शामिल हैं। प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि आरटीई के तहत आवंटित बच्चों का तत्काल प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश से वंचित करना सर्वोच्च न्यायालय के 28 अप्रैल 2026 के आदेश की अवमानना माना जाएगा। साथ ही यह आरटीई अधिनियम-2009 और 8 जनवरी 2026 के शासनादेश का भी सीधा उल्लंघन है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूल प्रबंधन आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई के साथ-साथ मान्यता समाप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। प्रशासन ने इसे गरीब बच्चों के शिक्षा के अधिकार का हनन बताया है।

बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ निजी विद्यालय मनमानी कर रहे हैं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने से बच रहे हैं। ऐसे स्कूलों की सूची जिलाधिकारी को सौंप दी गई है और संबंधित प्रबंधनों को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यदि अब भी दाखिला नहीं लिया गया तो आगे कठोर कार्रवाई तय है। इस मामले ने शिक्षा व्यवस्था और निजी स्कूलों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।

यूपी के राजकीय महाविद्यालयों में बड़ा फेरबदल, 230 प्रवक्ताओं के तबादले, कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों पर कार्रवाई

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उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने शनिवार देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रदेशभर के राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत 230 प्रवक्ताओं के तबादले कर दिए। विभाग की ओर से जारी सूची में जरूरत और छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों की नई तैनाती की गई है। लंबे समय से कई कॉलेजों में शिक्षकों की कमी और असंतुलित तैनाती की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके बाद शासन ने यह कदम उठाया है। तबादला सूची जारी होने के साथ ही शिक्षकों को तत्काल नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने को लेकर राज्यपाल Anandiben Patel लगातार सख्त रुख अपनाए हुए हैं। पिछले कुछ महीनों में कॉलेजों के निरीक्षण, समीक्षा बैठकें और विशेष अभियान चलाए गए। इसी दौरान यह मामला भी सामने आया कि कई महाविद्यालयों में आवश्यकता के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कुछ कॉलेजों में अपेक्षाकृत अधिक शिक्षक तैनात हैं। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने पहले सभी शिक्षकों की संबद्धता निरस्त की और अब बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं।

तबादला सूची में कम छात्र संख्या वाले रायबरेली जिले के निहस्था राजकीय महाविद्यालय से चार शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। वहीं सोनभद्र जिले के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में करीब आधा दर्जन शिक्षकों की नई तैनाती की गई है। हालांकि लखीमपुर खीरी के कुछ ऐसे कॉलेज, जहां छात्र संख्या अच्छी बताई जा रही है, वहां अब भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल भी उठने लगे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार अभी आगे भी कुछ और समायोजन किए जा सकते हैं।

उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रवक्ताओं को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि तबादले के बाद किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। शासन का उद्देश्य प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता संतुलित करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना बताया जा रहा है।

भीषण गर्मी से गैस सिलिंडर फटा, 100 मीटर दूर तक गिरे टुकड़े, कई मकानों में दरारें

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Moradabad के घनी आबादी वाले लालबाग इलाके में शनिवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक मकान की तीसरी मंजिल की छत पर रखा गैस सिलिंडर तेज धमाके के साथ फट गया। धमाका इतना जोरदार था कि सिलिंडर के टुकड़े करीब 100 मीटर दूर तक जा गिरे और आसपास के कई मकानों की दीवारों में दरारें पड़ गईं। घटना के समय इलाके का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक बताया गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। तेज धमाके और धुएं की आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए।

यह घटना मुगलपुरा थाना क्षेत्र के लालबाग कहारों वाले मंदिर के पास गली नंबर एक में रहने वाले मोहम्मद इमरान के घर पर हुई। बताया गया कि शुक्रवार रात उनके यहां मेहमान आए थे और गर्मी अधिक होने के कारण छत पर खाना बनाया गया था। खाना बनने के बाद गैस सिलिंडर और अन्य सामान छत पर ही छोड़ दिया गया। जिस स्थान पर सिलिंडर रखा गया था, उसके ठीक पास एयर कंडीशनर की आउटडोर यूनिट भी लगी हुई थी, जिससे लगातार गर्म हवा निकल रही थी।

परिजनों के अनुसार शनिवार दोपहर करीब एक बजे भीषण गर्मी और एसी यूनिट की लगातार तपिश के कारण सिलिंडर अचानक फट गया। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि छत की दीवारें टूट गईं और सिलिंडर के कई हिस्से आसपास के मकानों की छतों तक जा पहुंचे। घटना के दौरान ईंटें और मलबा हवा में उछल गया, जिससे पूरे इलाके में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि कुछ पल के लिए ऐसा लगा मानो कोई बड़ा विस्फोट हुआ हो।

गनीमत रही कि हादसे के समय छत पर कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा जनहानि टल गई। हालांकि धमाके से कई मकानों को नुकसान पहुंचा है और लोग अब भी सहमे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में गैस सिलिंडर और बिजली उपकरणों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे तथा हालात को संभाला गया।

पांच महीने की कानूनी लड़ाई के बाद सपा के ललित तिवारी बने पार्षद, हाईकोर्ट के आदेश पर दिलाई गई शपथ

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राजधानी Lucknow में नगर निगम के 66 साल के इतिहास में पहली बार कोर्ट के आदेश पर किसी पार्षद को शपथ दिलाई गई। फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड से समाजवादी पार्टी के नेता ललित तिवारी को रविवार को पार्षद पद की शपथ दिलाई गई। महापौर Sushma Kharkwal ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह मामला पिछले पांच महीनों से कानूनी और राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में बना हुआ था।

फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड में नगर निकाय चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवार प्रदीप शुक्ला टिंकू विजयी घोषित हुए थे, जबकि सपा के ललित तिवारी दूसरे स्थान पर रहे थे। दोनों उम्मीदवारों के बीच करीब 1700 वोटों का अंतर था। चुनाव परिणाम आने के बाद ललित तिवारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि प्रदीप शुक्ला टिंकू ने अपने शपथ पत्र में वैवाहिक स्थिति को लेकर गलत जानकारी दी है। मामले की सुनवाई के बाद अपर जिला जज की अदालत ने प्रदीप शुक्ला का निर्वाचन निरस्त करते हुए ललित तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया।

निर्वाचित घोषित होने के बावजूद ललित तिवारी को लंबे समय तक शपथ नहीं दिलाई गई। इसके लिए उन्होंने नगर निगम, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त कार्यालय और शासन स्तर तक लगातार पत्राचार किया। जब इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने शपथ ग्रहण कराने के स्पष्ट निर्देश दिए, लेकिन आदेश के पालन में देरी होने पर 21 मई को अदालत ने महापौर Sushma Kharkwal के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए। इसी दौरान महापौर अस्पताल में भर्ती रहीं और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देती रहीं। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद रविवार को उन्होंने शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराई।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। भाजपा के कुछ पार्षदों और नेताओं ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रकार रामपुर में अब्दुल्ला आजम मामले में दोबारा चुनाव कराया गया था, उसी तरह यहां भी पुनर्मतदान होना चाहिए था। भाजपा पार्षद अनुराग मिश्रा ने भी हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए दोबारा चुनाव कराने की मांग उठाई। वहीं महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि उन्होंने न्यायालय के आदेश का पालन किया है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत राय में वार्ड में दोबारा चुनाव होना चाहिए था क्योंकि प्रदीप शुक्ला को अधिक मत मिले थे। दूसरी ओर सपा समर्थकों ने इसे न्याय और लोकतंत्र की जीत बताया है।

लखनऊ में बसपा की बड़ी बैठक, मायावती ने विधानसभा चुनाव तैयारियों पर कसा संगठनात्मक फोकस

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Mayawati ने रविवार को राजधानी Lucknow स्थित मॉल एवेन्यू आवास पर बहुजन समाज पार्टी की महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद और वरिष्ठ नेता आनंद कुमार भी मौजूद रहे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों, मंडलीय प्रभारियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को विशेष रूप से बुलाया गया है, जिससे बैठक को आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार बैठक में संगठन की मौजूदा स्थिति, बूथ स्तर तक पार्टी की सक्रियता और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। पार्टी नेतृत्व जिलाध्यक्षों से जमीनी फीडबैक ले रहा है और कमजोर क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि बसपा सुप्रीमो कार्यकर्ताओं को नए सिरे से सक्रिय करने और दलित, पिछड़े तथा अल्पसंख्यक वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने की रणनीति पर विशेष निर्देश दे सकती हैं।

बैठक में युवाओं और नए चेहरों को संगठन में अधिक जिम्मेदारी देने पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हाल के महीनों में पार्टी के अंदर संगठनात्मक बदलावों और चुनावी तैयारियों को लेकर लगातार गतिविधियां बढ़ी हैं। इसी क्रम में आकाश आनंद की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। पार्टी आगामी चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए हर जिले में सक्रिय नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीतिक रूपरेखा तय करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। बैठक के बाद पार्टी की ओर से नए निर्देश, संगठनात्मक फेरबदल या आगामी कार्यक्रमों की घोषणा भी की जा सकती है। बसपा नेतृत्व का फोकस इस समय कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और प्रदेशभर में पार्टी की राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने पर दिखाई दे रहा है।