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Thursday, April 30, 2026
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पीएनबी ने 220 स्थानों पर मेगा एमएसएमई आउटरीच कार्यक्रम की मेजबानी की

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~ शीर्ष नेतृत्व द्वारा संचालित पहल पहुंची 220 स्थानों पर, बड़े पैमाने पर ऋण तक पहुंच को दिया बढ़ावा ~

नई दिल्ली : भारत के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक, पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने देशभर में 220 स्थानों पर अपने मेगा एमएसएमई आउटरीच प्रोग्राम की मेजबानी की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सुलभ, अनुकूलित और प्रतिस्पर्धी दरों पर वित्तीय समाधान प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना था, जो उद्यमिता और आर्थिक विकास के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करता है।

सार्थक जुड़ाव को बढ़ावा देने और एमएसएमई को उनके विकास के लिए सही वित्तपोषण विकल्पों को खोजने में सक्षम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया यह कार्यक्रम, व्यवसाय करने वालों, उद्योग प्रतिभागियों और बैंकिंग विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर साथ लाया।

मजबूत नेतृत्व सहभागिता का प्रदर्शन करते हुए, इस आउटरीच का नेतृत्व एमडी एवं सीईओ श्री अशोक चंद्र और सभी कार्यकारी निदेशकों एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियो के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी किया। “जहाँ अवसरों की शुरुआत होती है और व्यवसाय फलते-फूलते हैं” की थीम पर आधारित यह आउटरीच कार्यक्रम ऋण तक पहुँच को सरल बनाने और विशेष रूप से तैयार किए गए वित्तीय समाधान प्रदान करने पर केंद्रित रहा, जो एमएसएमई को अपने संचालन के विस्तार और उत्पादकता में सुधार करने में मदद करते हैं।

कार्यक्रम के आकर्षण:

• विशेषज्ञों तक सीधी पहुँच: मौके पर मार्गदर्शन और अनुकूलित वित्तीय समाधानों के लिए पीएनबी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधे संवाद।
• ऋण की तुरंत स्वीकृति: एमएसएमई ऋण योजनाओं को तत्काल सैद्धांतिक स्वीकृतियाँ (इन-प्रिंसिपल अप्रूवल्स)।
• डिजिटल एक्सपीरियंस ज़ोन: डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का अनुभव, अपनी पात्रता की जाँच और तुरंत ऑफर।
• अनुकूलित पेशकश: विविध व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किए गए एमएसएमई-केंद्रित ऋण उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला।

इस अवसर पर बोलते हुए, पीएनबी के एमडी एवं सीईओ, श्री अशोक चंद्र ने कहा, “एमएसएमई भारत की आर्थिक प्रगति की आधारशिला हैं और विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने वाले महत्वपूर्ण चालक हैं। इस मेगा आउटरीच कार्यक्रम के माध्यम से, हम देशभर के उद्यमियों को निर्बाध एमएसएमई सेवाएं, ग्राहक-अनुकूल उत्पाद, डिजिटल सुलभता और समय पर वित्तीय समाधान सीधे प्रदान करके क्रेडिट गैप को पाटने के लिए निर्णायक कदम उठा रहे हैं।

इस कार्यक्रम के दौरान मौके पर ही दी गई स्वीकृतियां एमएसएमई क्षेत्र के लचीलेपन और इसे सशक्त बनाने के प्रति पीएनबी की प्रतिबद्धता, दोनों को रेखांकित करती हैं। हम विकसित भारत 2047 की दिशा में एमएसएमई के बीच आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए अपने व्यापक नेटवर्क और डिजिटल क्षमताओं का लाभ उठाना जारी रखेंगे।”
इस पहल के साथ पीएनबी ने अपने ग्राहक केंद्रित नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए देश के करोडों लोगों के लिए एक भरोसेमंद वित्तीय साझीदार होने की अपनी विरासत को सुदृढ़ किया।

शहर में दिनभर जाम से लोग बेहाल, प्रमुख मार्गों पर थमा रहा यातायात

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फर्रुखाबाद। बुधवार को शहर के कई प्रमुख मार्गों पर भीषण जाम की स्थिति बनी रही, जिससे आमजन को घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी। सुबह से लेकर शाम तक विभिन्न इलाकों में यातायात बाधित रहा और लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए जूझते नजर आए।
जानकारी के अनुसार, आवास विकास से बढ़पुर, लाल गेट से लेकर घूमना चौराहा और चौक से टाउन हॉल तक सड़कों पर लंबा जाम लगा रहा। इन व्यस्त मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे पैदल राहगीरों को भी निकलने में दिक्कत हुई।
जाम के चलते स्कूली बच्चे, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी और मरीजों को खासा परेशान होना पड़ा। कई जगहों पर एंबुलेंस भी ट्रैफिक में फंसी नजर आईं, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में बढ़ते वाहनों की संख्या, अवैध पार्किंग और यातायात व्यवस्था की कमी के कारण आए दिन जाम की समस्या बनी रहती है। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हालात काबू में नहीं आ पा रहे हैं।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, प्रमुख चौराहों पर पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाए और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जाए, ताकि शहरवासियों को जाम की समस्या से राहत मिल सके।

पीड़ित तथा उसकी पत्नी के साथ मारपीट कर किया घायल

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मोहम्मदाबाद

एक दिन पूर्व हुआ था दो पक्षों का शांति भंग में चालान किया था, जमानत के बाद आज सुबह लगभग 10 बजे घर पर अकेला पाकर पीड़ित तथा उसकी पत्नी के साथ की मारपीट कर घायल कर दिया थाना पुलिस ने चिकित्सीय परीक्षण कराया।

थाना क्षेत्र के ग्राम तेरा निवासी विश्वनाथ के पुत्र ओमवीर ने शिकायती प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसकी पैतृक जमीन का वह 1/3 का हिस्से दार है जबकि 28 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे उसके भाई राम शंकर, भाभी जसोदा, भतीजे गोलू, प्रिंस तथा भतीजी पूनम ने मारपीट की थी
तथा पीड़ित ने आरोप लगाया कि थाना पुलिस ने उक्त लोगों को बंद नहीं किया और पीड़ित को ही बंद कर दिया था। पीड़ित का शांति भंग में चालान किया गया था उसके वह जमानत करवा घर आया था। आज दिनांक 29 अप्रैल 2026 को सुबह लगभग 10 बजे वह अपने घर था तभी उक्त लोगों ने गाली गलौज करने लगे तथा पीड़ित व उसकी पत्नी नेहा के साथ लात घुसे लाठी डंडों से मारपीट कर दी। जिससे पीड़ित व उसकी पत्नी के शरीर पर चोट आई है।

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मदन मोहन चतुर्वेदी ने मामले को।गंभीरता से लेते हुए संबंधित हलका इंचार्ज को जांच कर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।

सीएचसी में एक्स-रे सुविधा ठप, मरीजों को भटकना पड़ रहा, टेक्नीशियन न होने से मशीन बनी ‘सफेद हाथी’

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शमशाबाद, फर्रुखाबाद। नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शमशाबाद में एक्स-रे सुविधा ठप होने से मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में एक्स-रे मशीन तो मौजूद है, लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में यह सुविधा लंबे समय से बंद पड़ी है, जिससे यह मशीन लोगों की नजर में ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सीएचसी शमशाबाद क्षेत्र का एकमात्र प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जब मरीज एक्स-रे जांच की उम्मीद लेकर अस्पताल आते हैं, तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि टेक्नीशियन उपलब्ध नहीं है।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि गंभीर बीमारियों की जांच के लिए एक्स-रे बेहद जरूरी होता है, लेकिन सुविधा न मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहां एक्स-रे के नाम पर 400 से 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा कम शुल्क पर उपलब्ध होती है।
तीमारदारों ने बताया कि कई महीनों से यह समस्या बनी हुई है और रोजाना मरीजों को भटकते देखा जा सकता है। इस स्थिति से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

बंगाल का रिकॉर्ड मतदान,लोकतंत्र का उत्सव या पॉलिटिकल वेब

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शरद कटियार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो तस्वीर सामने आई है, उसने भारतीय लोकतंत्र की दिशा और दशा दोनों पर एक साथ सवाल भी खड़े किए हैं और उम्मीद भी जगाई है। दो चरणों में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। यह वह स्तर है, जिसे अब तक देश के किसी भी राज्य ने नहीं छुआ था।
पहले चरण में 93 प्रतिशत से ज्यादा और दूसरे चरण में करीब 92 प्रतिशत मतदान,यह सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक “साइलेंट पॉलिटिकल वेव” का संकेत भी माना जा रहा है। इससे पहले 2013 में त्रिपुरा ने 91.82 प्रतिशत मतदान के साथ रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन बंगाल ने उसे भी पीछे छोड़ दिया। और सबसे बड़ा सवाल यही है,इतनी भारी भागीदारी आखिर किस बदलाव की ओर इशारा कर रही है?

अगर पिछले चुनावों से तुलना करें, तो तस्वीर और भी चौंकाने वाली हो जाती है। 2021 में जहां कुल मतदान 82.17 प्रतिशत था, वहीं इस बार सीधे 90 प्रतिशत के पार पहुंच जाना बताता है कि मतदाता सिर्फ सक्रिय नहीं हुए, बल्कि “निर्णायक भूमिका” में आ गए हैं। जिन सीटों पर पहले 81-83 प्रतिशत मतदान होता था, वहां अब 92-93 प्रतिशत तक पहुंचना यह साबित करता है कि चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक दलों का खेल नहीं रहा, बल्कि जनता खुद मैदान में उतर चुकी है।

लेकिन इस कहानी का दूसरा पहलू भी उतना ही अहम है।

मतदाता सूची में कमी के बावजूद वोटिंग बढ़ना,यह एक असामान्य ट्रेंड है। 2021 में 7.34 करोड़ मतदाताओं में से 6.03 करोड़ ने वोट डाले थे, जबकि 2026 में 6.82 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 6.25 करोड़ लोगों ने मतदान किया। यानी कम मतदाता, लेकिन ज्यादा मतदान,यह संकेत देता है कि जो लोग वोट डालने पहुंचे, वे पहले से ज्यादा प्रतिबद्ध और सजग थे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बयान भी इस पर मुहर लगाता है। उन्होंने इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा मतदान बताते हुए “लोकतंत्र का पर्व” करार दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ ज्यादा मतदान ही स्वस्थ लोकतंत्र की गारंटी है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि कम चरणों में चुनाव, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव आयोग की सख्ती ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। लेकिन बंगाल जैसे राज्य में, जहां चुनाव अक्सर हिंसा और तनाव के साये में होते रहे हैं, वहां इतनी बड़ी संख्या में लोगों का घरों से निकलकर मतदान करना,यह अपने आप में एक सामाजिक बदलाव का संकेत है।

युवाओं के नजरिए से देखें तो यह चुनाव एक बड़ा संदेश देता है“डिसाइडिंग पावर अब वोटर के हाथ में है।” सोशल मीडिया, डिजिटल कैंपेन और जमीनी मुद्दों ने इस बार वोटर को ज्यादा जागरूक और आक्रामक बनाया है। अब वह सिर्फ वोट नहीं डाल रहा, बल्कि सत्ता के भविष्य को तय करने का इरादा लेकर बूथ तक पहुंच रहा है।
लेकिन यहीं सबसे बड़ा खतरा भी छिपा है।

इतना बड़ा मतदान अगर सही दिशा में गया, तो यह लोकतंत्र को मजबूत करेगा। लेकिन अगर यह जातीय, धार्मिक या भावनात्मक ध्रुवीकरण के आधार पर हुआ, तो यह आंकड़ा लोकतंत्र के लिए चुनौती भी बन सकता है। रिकॉर्ड वोटिंग का मतलब हमेशा सकारात्मक बदलाव नहीं होता—कभी-कभी यह बड़े राजनीतिक टकराव की भूमिका भी तैयार करता है।

बंगाल ने एक नया मानक जरूर स्थापित किया है, लेकिन अब नजर नतीजों पर होगी। क्योंकि असली सवाल यही है,क्या यह रिकॉर्ड मतदान “परिवर्तन” लाएगा या सिर्फ “प्रतिस्पर्धा” को और तीखा करेगा?

लोकतंत्र में आंकड़े इतिहास बनाते हैं, लेकिन फैसले भविष्य तय करते हैं,और बंगाल अब उसी मोड़ पर खड़ा है।

निहिलेंट ने लॉन्च किया एन सीपिया (nSEPIA) बीटा प्लेटफॉर्म

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भावनात्मक स्थिति को समझकर उन्हें सुधारने वाला दुनिया का पहला इमोशनल वेलनेस प्लेटफॉर्म

नई दिल्ली: निहिलेंट ने ‘एन सीपिया ‘ बीटा नाम का एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह दुनिया का पहला इमोशनल वेलनेस प्लेटफॉर्म है, जो किसी व्यक्ति की भावनाओं को समझकर कुछ ही मिनटों में उसे बेहतर बनाने के लिए व्यक्तिगत सुझाव देता है। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म मार्केट टेस्टिंग के लिए उपलब्ध है।

एन सीपिया के प्राइवेट बीटा लॉन्च का उद्घाटन श्री किरण देशपांडे (एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेंबर, सेमीएक्स आईआईटी बॉम्बे और बोर्ड मेंबर, ट्रीज फाउंडेशन) के हाथों रिबन काटकर किया गया। इस कार्यक्रम के साथ भावनात्मक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नए बदलाव की शुरुआत हुई। इस अवसर पर “फाउंडिंग सर्कल” नाम का पहला समूह भी बनाया गया, जिसमें चुने गए लोग प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे और इसके आगे के विकास में भी योगदान देंगे।

एन सीपिया एक “क्लोज्ड लूप” तरीके से काम करने वाला प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य है कि भावनात्मक स्वास्थ्य हर व्यक्ति के लिए आसान, समझने योग्य और जरूरत पड़ने पर तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए। इसलिए भावनाओं को व्यवस्थित तरीके से समझने और उसे मापने के लिए इस प्लेटफॉर्म को तैयार किया गया है। यह प्लेटफॉर्म पहले एक छोटे से स्कैन के जरिए यूज़र की भावनात्मक स्थिति पहचानता है, फिर उसी के अनुसार व्यक्तिगत सुझाव देता है और फिर दोबारा स्कैन करके यह दिखाता है कि कितना बदलाव आया है। इस तरह यह प्लेटफॉर्म भावनाओं को केवल अनुमान या व्यक्तिगत सोच पर आधारित रखने के बजाय उन्हें साफ तौर पर समझने और मापने योग्य तरीके से समझने में मदद करता है।

आज के समय में जब तनाव, चिंता, थकान और मानसिक दबाव हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे में एन सीपिया एक ऐसी कमी को पूरा करने की कोशिश करता है, जिसे अब तक ठीक से हल नहीं किया गया था। जहां शारीरिक स्वास्थ्य को आसानी से मापा जा सकता है, वहीं भावनात्मक स्वास्थ्य अब तक खुद की समझ या महसूस करने पर ही निर्भर था। एन सीपिया इसी स्थिति को बदलने के लिए बनाया गया है, ताकि लोग अपनी भावनाओं को साफ तरीके से समझ सकें, उन्हें ट्रैक कर सकें और समय के साथ बेहतर बना सकें।

यह प्लेटफॉर्म 30 सेकंड के स्कैन से शुरू होता है, जो यूज़र की भावनात्मक स्थिति को तुरंत पहचान लेता है। यह इमोस्केप नाम के एक क्लिनिकली टेस्ट किए गए एआई इंजन पर आधारित है। यह भावनाओं को पहचानते समय व्यक्ति के हावभाव, भाषा या संस्कृति पर निर्भर नहीं रहता।

इसलिए यूज़र को यह अधिक सटीक जानकारी मिलती है कि वह वास्तव में कैसा महसूस कर रहा/रही है। इसके बाद यूज़र को उसकी भावनात्मक स्थिति का एक विज़ुअल रूप “इमोशन ऑर्ब” के रूप में दिखाई जाती है। साथ ही, उस स्थिति को आसान भाषा में समझाया जाता है और उसके आधार पर उपयोगी सुझाव भी दिए जाते है।

इस प्लेटफॉर्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इमोस्केप इंजन है। यह एक एआई आधारित सिस्टम है, जो चेहरे के छोटे-छोटे और अपने आप होने वाले संकेतों के आधार पर व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति को तुरंत पहचान लेता है। यह भावनाओं को समझने के लिए हावभाव या भाषा पर निर्भर नहीं रहता। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझने में मदद करना है कि वे वास्तव में क्या महसूस कर रहे हैं और उन भावनाओं को बेहतर तरीके से संभाल सकें।

पहचानी गई भावनात्मक स्थिति के आधार पर एन सीपिया (nSEPIA) यूज़र्स को संगीत, श्वसन व्यायाम, योग और ध्यान जैसे विज्ञान आधारित उपाय सुझाता है। ये सामान्य सुझाव नहीं होते, बल्कि हर व्यक्ति की उस समय की स्थिति के हिसाब से दिए जाते हैं। इस प्लेटफॉर्म में इमोशन स्केल, प्रोग्रेस ट्रैक करने की सुविधा और दोबारा स्कैन करने की सुविधा भी है। इससे यूज़र आसानी से देख सकते हैं कि सुझाव अपनाने के बाद उनकी भावनात्मक स्थिति में कितना बदलाव आया है।

भावनाओं को साफ तौर पर समझना, व्यक्तिगत सुझाव देना और उनके असर को मापना इन तीनों का एक साथ मेल एन सीपिया को खास बनाता है और यही इसे अन्य वेलनेस प्लेटफॉर्म से अलग बनाता है। यह सिर्फ एक मेडिटेशन ऐप या थेरेपी का विकल्प नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिस्टम है जो भावनाओं को मापता है, उसी के अनुसार सुझाव देता है और फिर उनके परिणाम को भी जांचता है।

इस बीटा लॉन्च के जरिए निहिलेंट को एन सीपिया को बाजार में परखने का मौका मिलेगा। इसमें देखा जाएगा कि यूज़र इस प्लेटफॉर्म का कैसे इस्तेमाल करते हैं और उनकी क्या प्रतिक्रिया होती है। इससे मिलने वाला फीडबैक आगे के विकास में मदद करेगा। साथ ही यह भी समझने में मदद मिलेगी कि यूज़र को कौन से उपाय ज्यादा उपयोगी लगते हैं और यह प्लेटफॉर्म रोज़मर्रा के भावनात्मक स्वास्थ्य में कैसे मदद कर सकता है।

लॉन्च के मौके पर निहिलेंट के फाउंडर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन श्री एल. सी. सिंह ने कहा,“आज टेक्नोलॉजी की मदद से हम बाहरी लगभग हर चीज़ को माप सकते हैं, लेकिन हमारी भावनाओं को अभी भी ठीक से समझा नहीं जा सकता। एन सीपिया इसी स्थिति को बदलने का एक प्रयास है। एन सीपिया (nSEPIA) बीटा भावनात्मक स्वास्थ्य को देखने का एक नया तरीका बाजार में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भावनात्मक स्वास्थ्य का हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर बड़ा असर होता है, लेकिन अब तक इसे सही तरीके से मापने और समझने की सुविधा नहीं थी। यह प्लेटफॉर्म यूज़र्स को अपनी भावनात्मक स्थिति को बेहतर तरीके से समझने, उसके अनुसार सही कदम उठाने और समय के साथ उसमें होने वाले बदलाव को देखने में मदद करता है। अब जब बीटा वर्ज़न मार्केट टेस्टिंग के लिए उपलब्ध है, तो हमें यह देखने की उत्सुकता है कि यह प्लेटफॉर्म असल जीवन में कैसे उपयोगी साबित होता है।”

एन सीपिया बीटा लॉन्च के साथ निहिलेंट ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। यह प्लेटफॉर्म लोगों को अपनी भावनाओं को साफ़ तौर पर समझने, सही तरीके से प्रतिक्रिया देने और अपनी प्रगति को मापने में मदद करता है। साथ ही, यह भावनात्मक स्वास्थ्य को देखने और समझने का एक नया और आसान तरीका भी पेश करता है।