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Thursday, May 28, 2026
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यूपी में चली तबादला एक्सप्रेस, 9 PCS अफसरों का हुआ ट्रांसफर

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर तबादला एक्सप्रेस चली है। योगी सरकार (yogi government) ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) संवर्ग के 9 अफसरों का ट्रांसफर (Transfer) किया है। इस नई तबादला सूची में, दो एसडीएम, दो अपर नगर आयुक्त, प्रयागराज सिटी मजिस्ट्रेट और एक प्रधान प्रबंधक अधिकारी के नाम शामिल हैं।

सरकार ने जिन अफसरों का तबादला किया है। उनमें विनोद कुमार सिंह को अपर जिलाधिकारी मिर्जापुर, विनय कुमार सिंह को नगर मजिस्ट्रेट प्रयागराज बनाया गया है। जबकि उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ के प्रधान प्रबंधक (UP PCS Officer Transfers) गुलशन को मुख्य राजस्व अधिकारी बलिया और सुरेश कुमार पाल को उप निदेशक बाल विकास पुष्टाहार निदेशालय नियुक्त किया गया है।

वहीं भदोही एसडीएम रहीं बरखा सिंह प्रधान प्रबंधक सहकारी चीनी मिल संघ को जिम्मेदारी दी गई है। प्रतीक्षारत अविनाश कुमार गौतम को एसडीएम आजमगढ़ और कानपुर नगर निगम में अपर नगर आयुक्त रहीं अमृता सिंह को अमेठी में एडीएम नियुक्त किया गया है। साथ ही प्रतीक्षारत रहे अभिषेक वर्मा (UP PCS Officer Transfers) एसडीएम फर्रूखाबाद और अनूप कुमार को कानपुर नगर निगम का अपर नगर आयुक्त बनाया गया है।

वहीं भदोही एसडीएम रहीं बरखा सिंह प्रधान प्रबंधक सहकारी चीनी मिल संघ को जिम्मेदारी दी गई है। प्रतीक्षारत अविनाश कुमार गौतम को एसडीएम आजमगढ़ और कानपुर नगर निगम में अपर नगर आयुक्त रहीं अमृता सिंह को अमेठी में एडीएम नियुक्त किया गया है। साथ ही प्रतीक्षारत रहे अभिषेक वर्मा (UP PCS Officer Transfers) एसडीएम फर्रूखाबाद और अनूप कुमार को कानपुर नगर निगम का अपर नगर आयुक्त बनाया गया है।

बता दें कि इसस पहले योगी सरकार ने प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) संवर्ग के 19 अफसरों का ट्रांसफर किया था। जिसमें कई जिलों के अपर जिलाधिकारी (ADM), मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO) और नगर आयुक्त स्तर के अधिकारी शामिल थे। तबदला सूची में दुर्गेश मिश्रा, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, वाराणसी को अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, गोरखपुर, अनिरुद्ध प्रताप सिंह, स्थानांतरणाधीन अपर जिलाधिकारी (नगर), मेरठ को अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०), मुजफ्फरनगर बनाया गया था।

 

 

मेरठ में बड़े भाई ने छोटे भाई को मारकर जमीन में गाड़ा, 23 दिन बाद मिला शव

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मेरठ: यूपी के मेरठ (Meerut) जिले के बहसूमा क्षेत्र के मखदुमपुर सीखेड़ा गांव (Makhdumpur Sikheda Village) में जमीन विवाद को लेकर सगे भाई की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने 5 फीट गहरे गड्ढे की खुदाई कर छोटे भाई का शव बरामद किया, जिसे 23 दिन पहले गोली मारकर हत्या के बाद जमीन में दबा दिया गया था।

बताया जा रहा है कि मखदुमपुर सीखेड़ा गांव निवासी अंकुर (32 वर्षीय) एक महीने से लापता था। उसके परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल रहा था। छानबीन के दौरान पुलिस को उसके बड़े भाई पर शक हुआ। जिसके बाद पुलिस ने उसके कस्टडी में लिया और पूछताछ शुरू की।

पूछताछ के दौरान बड़े भाई ने पहले तो कुछ भी कहने से इनकार कर दिया और पुलिस को इधर-उधर की बात बताई। पुलिस ने जब सख्ती बरती तो आरोपी ने जमीन हड़पने के इरादे से हत्या की बात कबूल कर ली। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामला सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

 

केन्या के बालिका आवासीय स्कूल में भीषण आग, 16 छात्राओं की जिंदा जलकर मौत

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केन्या: पूर्वी अफ्रीकी देश Kenya में गुरुवार देर रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। मध्य केन्या के गिलगिल इलाके में स्थित Utumishi Girls Academy के छात्रावास में भीषण आग लगने से 16 छात्राओं की जिन्दा जलकर मौत हो गई, जबकि दर्जनों छात्राएं घायल हो गईं। इनमें से कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। जिस स्कूल में हादसा हुआ वह राजधानी Nairobi से लगभग 120 किलोमीटर दूर स्थित है।

जानकारी के अनुसार, आधी रात के आसपास आग छात्रावास की पहली मंजिल पर भड़की थी और देखते ही देखते इसने पूरे ब्लॉक को अपनी चपेट में ले लिया। जिस वक्त हादसा हुआ उस समय हॉस्टल में करीब 220 छात्राएं मौजूद थीं। आग इतनी भयावह थी कि पूरा भवन करीब दो घंटे तक धधकता रहा। मौके पर पहुंची बचाव टीमों ने तड़के करीब 3 बजे आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। हादसे में 79 लोग घायल हुए, जिनमें से 71 को प्राथमिक उपचार के बाद सुरक्षित बताया गया है।

शिक्षा मंत्री जूलियस मिगोस ने बताया कि स्कूल में 800 से अधिक छात्राएं पढ़ाई और आवासीय सुविधा के साथ रहती हैं। प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। केन्या में बोर्डिंग स्कूलों में आग लगने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं।

कई मामलों में छात्रों द्वारा जानबूझकर आग लगाने की बात सामने आई थी। सबसे भयावह घटना साल 2001 में हुई थी, जब मचाकोस काउंटी के एक स्कूल हॉस्टल में आग लगने से 67 छात्रों की मौत हो गई थी। वहीं, 2024 में भी मध्य केन्या के एक छात्रावास में आग लगने से 21 लोगों की जान चली गई थी। इस ताजा हादसे ने एक बार फिर स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था और छात्रावासों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

 

तकनीक, संवेदनशीलता और प्रोफेशनल दक्षता से लैस रहे यूपी पुलिस: मुख्यमंत्री

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पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाया जाए: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

देश में iGOT प्रशिक्षण पूर्णता में यूपी पुलिस अव्वल, 59 लाख से अधिक कोर्स पूर्ण

जनसंवाद, व्यवहार और तकनीकी दक्षता पर विशेष फोकस के साथ बदलेगी पुलिस ट्रेनिंग व्यवस्था

ड्रोन, साइबर फॉरेंसिक और सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण से सशक्त होगी यूपी पुलिस

लखनऊ, 28 मई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए कहा कि बदलते समय में पुलिसिंग केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक, संवेदनशील व्यवहार, संवाद कौशल, साइबर अपराधों की समझ और फॉरेंसिक दक्षता प्रभावी पुलिसिंग की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को पूरी तरह परिणामोन्मुख, व्यवहारिक, तकनीक आधारित और समयानुकूल बनाया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश पुलिस दक्षता, अनुशासन, संवेदनशीलता और जनविश्वास के मानकों पर देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस बल के रूप में स्थापित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण व्यवस्था में गुणवत्ता, एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। प्रशिक्षण संस्थानों में आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग हो तथा प्रशिक्षण का नियमित मूल्यांकन किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को केवल कानून लागू करने तक सीमित न रखते हुए उन्हें संवाद कौशल, मानवीय व्यवहार और तनावपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित निर्णय लेने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

बैठक में बताया गया कि पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय के अंतर्गत पुलिस अकादमी मुरादाबाद, 11 प्रशिक्षण संस्थान, 6 पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, 2 आर्म्ड पुलिस ट्रेनिंग संस्थान तथा 62 अस्थायी एवं 31 स्थायी रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर संचालित हैं। 112 RTC पर एक साथ प्रशिक्षण प्रारंभ कर अंतिम परीक्षाओं को शुचितापूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया गया तथा एक साथ परीक्षा परिणाम घोषित किए गए। प्रशिक्षण क्षमता को 18 हजार से बढ़ाकर 60,244 तक किया गया है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का उच्चीकरण किया गया है तथा बाह्य विषयों में आवधिक मानक निर्धारित कर गुणवत्ता सुनिश्चित की गई है। यूपी पुलिस ट्रेनिंग पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं को उपलब्ध कराई जा रही है और 5,000 विशेषज्ञ प्रशिक्षक तैयार किए गए हैं।

बैठक में बताया गया कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत iGOT पोर्टल पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 27 मई 2026 तक 3,90,799 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं तथा 59,02,703 कोर्स पूर्ण किए जा चुके हैं। 20 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश पुलिस की 149 इकाइयों का iGOT पोर्टल पर सृजन कराया गया, जिससे जनपद, वाहिनी और इकाई स्तर पर प्रशिक्षण का प्रभावी पर्यवेक्षण संभव हुआ है।

बैठक में बताया गया कि 2 अप्रैल से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित साधना सप्ताह में उत्तर प्रदेश पुलिस ने देश की समस्त राज्य पुलिस एवं केंद्रीय पुलिस बलों में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग ने अकेले 28 लाख से अधिक कोर्स पूर्ण किए, जो कई राज्यों के समस्त विभागों के संयुक्त प्रदर्शन से भी अधिक रहा। इस अवधि में 2,61,032 कर्मियों ने 2 घंटे से अधिक तथा 2,16,724 कर्मियों ने 4 घंटे से अधिक का लर्निंग समय पूरा किया। 2,45,645 कर्मियों ने AI कोर्स भी पूर्ण किए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रोल आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तेजी से विकसित किया जाए।

बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ हुए एमओयू के तहत नवंबर 2025 में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 34 पुलिस उपाधीक्षकों को ‘एमए इन पुलिस साइंस एंड स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट’ की डिग्री प्रदान की गई। वहीं मई 2026 में पुलिस अकादमी मुरादाबाद में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 47 उपनिरीक्षकों को ‘पीजी डिप्लोमा इन पुलिस एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट’ प्रदान किया गया।

बैठक में आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 4,253 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस, 15,131 आरक्षी पीएसी/सशस्त्र पुलिस, 2,282 महिला पीएसी आरक्षी, 10,469 आरक्षी नागरिक पुलिस तथा 1,341 यूपीएसएसएफ आरक्षियों सहित बड़ी संख्या में कार्मिकों का आधारभूत प्रशिक्षण प्रस्तावित है। इसके साथ ही 4,500 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस एवं प्लाटून कमांडरों के प्रस्तावित प्रशिक्षण के लिए विस्तृत तैयारियां की जा रही हैं। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संशोधित कर 11 संवेदनशीलता मॉड्यूल जोड़े गए हैं। ATS, STF, NDRF, SDRF, RAF, यूपी-112, विमेन पावरलाइन, चाइल्डलाइन, BDS और फायर सर्विसेज जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा ऑपरेशनल मॉक ड्रिल और कैप्सूल कोर्स संचालित किए जाएंगे।

बैठक में बताया गया कि प्रशिक्षण में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश किया जा रहा है। इसके तहत ड्रोन प्रशिक्षण, साइबर फॉरेंसिक लैब, फॉरेंसिक लैब, ड्राइविंग सिम्युलेटर और फायरिंग सिम्युलेटर जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से अतिथि विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार ही पुलिस की वास्तविक पहचान बनाता है। बैठक में बताया गया कि जनता से दुर्व्यवहार की शिकायत वाले 5,816 पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर उनके लिए संवाद कौशल एवं सौम्य व्यवहार का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई द्वारा 3 से 5 फरवरी 2026 तक 37 पुलिसकर्मियों को Behaviour, Operational Soft Skills एवं Caselets का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन करने के लिए इम्पैक्ट असेसमेंट व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें महिला सम्मान, संवाद क्षमता, आत्मनियंत्रण, तनाव प्रबंधन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और संवेदनशील व्यवहार जैसे 18 प्रमुख बिंदुओं पर मूल्यांकन किया जा रहा है।

बैठक में बताया गया कि पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी मुरादाबाद में मालदीव पुलिस सेवा के उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव भारत सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित इस प्रस्ताव को गृह मंत्रालय के माध्यम से विचारार्थ भेजा गया है। मुख्यमंत्री जी ने इसे भारत और पड़ोसी देशों के बीच आंतरिक सुरक्षा सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण प्रणाली में निरंतर नवाचार, जवाबदेही और आधुनिकता सुनिश्चित की जाए, ताकि उत्तर प्रदेश पुलिस हर चुनौती का सामना अधिक दक्षता, संवेदनशीलता और प्रोफेशनल क्षमता के साथ कर सके।

कानपुर: गड्ढे में नहाने गए 2 दोस्त, कुछ देर बाद दोनों की उतराती मिली लाश

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कानपुर: यूपी के कानपुर (Kanpur) में पानी भरे गड्ढे में नहाने गए 2 दोस्तों की डूबने से मौत हो गई। दोनों की मौत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलते ही पुलिस (Police) मौके पर पहुंची और दोनों की लाश को गड्ढे से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बता दें कि पूरा मामला रूरा थाना क्षेत्र के अम्बरपुर गांव का है। जहां एक निर्माणाधीन पानी टंकी के पास मौजूद गड्ढे में पानी भरा हुआ है। दोनों दोस्त गर्मी से राहत पाने के लिए गड्ढे में नहाने के लिए उतर गए। वहीं जब दोनों काफी देर तक वापस नहीं लौटे तो साथ में काम करने वाले मजदूर खोजने के लिए निकले।

वहीं काफी देर खोजबीन करने के बाद दोनों की लाश गड्ढे में उतराते पाया। दोनों की लाश देखते ही तुरंत मामले की जानकारी पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस पहुंची औऱ दोनों की लाश को बाहर निकलवाया। मृतकों की पहचान दिव्यांशु (16) और शादाब (15) के रूप में हुई है, पुलिस घटना की जांच  रही है।

दिल्ली के न्यू राजेंद्र नगर में बंद मकान से मिला दो बुजुर्ग महिलाओं का शव, बदबू आने से हुआ खुलासा

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नई दिल्ली: दिल्ली (Delhi) के न्यू राजेंद्र नगर (New Rajendra Nagar) इलाके में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पुराने मकान से तेज बदबू आने की सूचना पुलिस को मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो घर के भीतर दो बुजुर्ग महिलाओं के शव संदिग्ध हालत में पड़े मिले। मृतकों की पहचान 80 वर्षीय चंद्रकांता और उनकी ननद सरोज बाला के रूप में हुई है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुबह करीब 10:30 बजे बरामदे की सफाई करने वाली घरेलू कामवाली से सूचना मिली। उसने पुलिस को बताया कि घर के सभी दरवाजे बंद थे और अंदर से तेज दुर्गंध आ रही थी। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और कमरे में चंद्रकांता (80) और सरोज बाला (80) नाम की दो महिलाओं को मृत पाया। एक महिला का शव पलंग पर था, जबकि दूसरी का शव फर्श पर पड़ा था। मौके पर पहुंची सीएटी एम्बुलेंस टीम ने दोनों महिलाओं को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बताया कि घर एक मंजिला है और इसमें चार प्रवेश द्वार हैं। विस्तृत जांच में जबरन प्रवेश, चोरी, तोड़फोड़ या किसी प्रकार की गड़बड़ी के कोई संकेत नहीं मिले।

पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों महिलाएं वर्षों से न्यू राजेंद्र नगर स्थित करीब 200 वर्गमीटर के पुराने एक मंजिला मकान में साथ रह रही थीं। सरोज बाला अविवाहित थीं, जबकि चंद्रकांता उनके दिवंगत भाई की पत्नी थीं। दोनों की देखभाल के लिए दो घरेलू सहायिकाएं नियुक्त थीं, जो सुबह-शाम खाना और साफ-सफाई का काम करती थीं।

स्थानीय पूछताछ में पता चला कि दोनों महिलाएं लंबे समय से एक ही घर में साथ रह रही थीं। सरोज बाला अविवाहित थीं, जबकि चंद्रकांता उनकी भाभी थीं। अपराध जांच दल और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। दोनों शवों को बीएनएसएस की धारा 194 के तहत पोस्टमार्टम के लिए आरएमएल अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घटना की सूचना मिलते ही क्राइम टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे और कई नमूने एकत्र किए। पुलिस रिश्तेदारों, घरेलू सहायिकाओं और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। मध्य जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में किसी आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन मामले की हर एंगल से जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।