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Monday, May 25, 2026
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रोडवेज चौकी के पास शराबी गैंग का हंगामा, खुद को वकील बताकर पुलिस से भिड़े सुनार अमित वर्मा और साथी

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यूथ इंडिया | फर्रुखाबाद

थाना कादरी गेट क्षेत्र में रोडवेज बस स्टैंड पुलिस चौकी के पास देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नशे में धुत तीन लोगों ने खुद को प्रभावशाली और अधिवक्ता बताकर पुलिस से ही भिड़ंत शुरू कर दी। घंटों चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद मौके पर पहुंचे कथित व्यापारी नेता की पैरवी और माफी के बाद मामला शांत हुआ।

जानकारी के मुताबिक रेलवे रोड निवासी सुनार अमित वर्मा पुत्र रामरतन अपने साथियों कथित वकील जितेन्द्र सिंह सोलंकी निवासी आवास विकास और राजीव कटियार के साथ नशे की हालत में रोडवेज चौकी के पास पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीनों शराब के नशे में बुरी तरह धुत थे और पुलिसकर्मियों से अभद्रता करते हुए खुद को रसूखदार बताकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले आवास विकास कॉलोनी में शराब और गोश्त की पार्टी चली थी, जिसके बाद तीनों सीधे रोडवेज चौकी क्षेत्र पहुंच गए। वहां नशे में हंगामा, बहस और धौंस का खेल शुरू हो गया।

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक कथित वकील बताने वाले जितेन्द्र सिंह सोलंकी बार-बार कानून का रौब झाड़ते रहे, जबकि अमित वर्मा पुलिसकर्मियों से उलझता रहा। हंगामे के दौरान राहगीरों और दुकानदारों की भीड़ जमा हो गई।

सूचना फैलते ही कथित व्यापारी नेता अंकुर श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और मामले में पैरवी शुरू की। काफी देर तक चली बातचीत के बाद पुलिस से माफी मांगकर मामला शांत कराया गया। हालांकि पूरे घटनाक्रम ने देर रात पुलिस चौकी क्षेत्र को अखाड़ा बना दिया।

घटना के बाद इलाके में चर्चा रही कि आखिर नशे में कानून का रौब दिखाने वालों पर कार्रवाई होगी या मामला रसूख और पैरवी में दब जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आम व्यक्ति पुलिस चौकी पर इस तरह हंगामा करता तो अब तक सख्त कार्रवाई हो चुकी होती।

शराबियों ने ट्रैफिक सिपाही पर किया हमला, विरोध करने पर गाड़ी चढ़ाने का किया प्रयास

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बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया (Baliya)से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक सिपाही (traffic cop) के साथ शराबियों ने मारपीट कर दी। मौके पर मौजूद लोगों ने साहस दिखाते हुए सिपाही को बचाया और एक आरोपी को पकड़ लिया। इस दौरान गाड़ी में तोड़फोड़ भी की गई।

घटना शहर कोतवाली क्षेत्र के जगन्नाथ चौधरी तिराहा की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि सिपाही ने बीच सड़क पर खड़ी गाड़ी हटाने को कहा, जिससे नाराज होकर शराब के नशे में धुत लोगों ने उस पर हमला कर दिया।वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि सिपाही खुद को बचाने के लिए लोगों से मदद की गुहार लगा रहा है। आरोप है कि हमलावरों ने गाड़ी से सिपाही और भीड़ को कुचलने की भी कोशिश की।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।पीड़ित सिपाही ने बताया कि अगर स्थानीय लोग मदद नहीं करते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

 

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर विस्फोट, 10 दिन में चौथी बढ़ोतरी से जनता बेहाल

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ईरान-अमेरिका युद्ध, कमजोर रुपया और तेल कंपनियों के घाटे ने बढ़ाई महंगाई की आग

यूथ इंडिया | नई दिल्ली

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी की कमर तोड़ दी है। सोमवार 25 मई 2026 को तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी। बीते 10 दिनों में यह चौथी वृद्धि है, जिसने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में महंगाई और भयावह होने वाली है।
राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है, जबकि उत्तर प्रदेश में पेट्रोल 101.86 रुपये और डीजल 95.34 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों में कीमतें इससे भी ऊपर चली गई हैं।
देश में बढ़ती ईंधन कीमतों के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट माना जा रहा है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ईरान-अमेरिका संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को झकझोर दिया। युद्ध से पहले 65 से 72 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने वाला ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर तक पहुंच गया था और फिलहाल भी लगभग 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।
हालात तब और बिगड़ गए जब ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बढ़ा दिया। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। युद्ध के माहौल में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई, बीमा प्रीमियम बढ़े और माल ढुलाई का खर्च कई गुना बढ़ गया। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ा, जो अपनी जरूरत का करीब 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की मुश्किल सिर्फ महंगे तेल तक सीमित नहीं है। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 95 रुपये तक कमजोर हो चुका है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। दूसरी तरफ सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय तक कीमतें न बढ़ाने के कारण भारी घाटे में पहुंच गईं। बताया जा रहा है कि इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों को रोजाना करीब 1600 करोड़ रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ा और कुल घाटा 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया।
अब तेल कंपनियां धीरे-धीरे उसी घाटे की भरपाई कर रही हैं। यही वजह है कि महज 10 दिनों में पेट्रोल करीब 7.35 रुपये और डीजल लगभग 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।
देश के कई राज्यों में टैक्स की वजह से जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में वैट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस ज्यादा होने के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर पहुंच गई हैं। जानकारों का कहना है कि पेट्रोल पंप पर उपभोक्ता जो कीमत चुका रहा है, उसमें 40 से 55 प्रतिशत हिस्सा टैक्स का है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल राहत की उम्मीद कम है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं तो तेल कंपनियां पांचवीं बार भी कीमतें बढ़ा सकती हैं। इससे परिवहन, खाद्य पदार्थ, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में नई उछाल आना तय माना जा रहा है।
केंद्र सरकार ने महंगाई के दबाव को कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती की है, लेकिन राज्यों से वैट घटाने की अपील अब तक ज्यादा असरदार साबित नहीं हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से ईंधन बचाने, कार पूलिंग अपनाने और सार्वजनिक परिवहन के ज्यादा इस्तेमाल कर चुके हैं ।

त्वरित टिप्पणी: महाराज का तोहफा, गांव की सल्तनत प्रधानों के हाथ

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शरद कटियार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब गांव सिर्फ वोट बैंक नहीं रहे, बल्कि सत्ता का असली प्रयोगशाला बन चुके हैं। सरकार की योजनाओं का खजाना खुलता है, तो उसकी चाबी सीधे प्रधानों के हाथ पहुंच जाती है। यही वजह है कि गांवों में प्रधान अब जनसेवक कम और “स्थानीय सत्ता के महाराजा” ज्यादा दिखाई देने लगे हैं।

सड़क से लेकर शौचालय तक, आवास से लेकर पंचायत भवन तक और तालाब से लेकर खेल मैदान तक,हर योजना का रास्ता प्रधान की चौखट से होकर गुजरता है। गांव की जनता लाइन में खड़ी रहती है, लेकिन फैसला अक्सर वही होता है जो पंचायत की सत्ता चाहती है।

सरकार गांवों के विकास का दावा करती है, मगर जमीनी हकीकत यह है कि कई जगह विकास से ज्यादा “वितरण की राजनीति” चल रही है। पात्रता का पैमाना जरूरत नहीं, बल्कि नजदीकी और राजनीतिक निष्ठा बनता जा रहा है। यही कारण है कि पंचायत चुनावों में अब वैचारिक लड़ाई नहीं, बल्कि संसाधनों पर कब्जे की जंग दिखाई देती है।

गांवों में प्रधानों की बढ़ती ताकत ने प्रशासन को भी कई जगह बैकफुट पर ला दिया है। अफसर आते-जाते रहते हैं, लेकिन गांव की स्थायी सत्ता प्रधान और उसका नेटवर्क ही बना रहता है। यही वजह है कि अब हर सरकारी घोषणा को गांव में “महाराज का तोहफा” और प्रधान की कृपा के रूप में प्रचारित किया जाता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है, या फिर लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई भी अब सत्ता और प्रभाव की राजनीति में फंसती जा रही है?

गांव की चौपाल फिलहाल यही कह रही है,सरकार लखनऊ से चलती होगी, लेकिन गांव की सल्तनत अभी प्रधानों के हाथ में है।

चंदौली में सड़क हादसा, डंपर ने ट्रक को मारी टक्कर, केबिन में फंसा चालक और शरीर में धंसा स्टेयरिंग

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चंदौली: चंदौली (Chandauli) जनपद में सोमवार को नेशनल हाईवे-19 (National Highway-19) पर एक भीषण सड़क हादसे ने लोगों को दहला दिया। सदर थाना क्षेत्र के जगदीश सराय के समीप तेज रफ्तार डंपर ने आगे चल रहे ट्रक में पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि डंफर का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया। हादसे के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना भयावह था कि टक्कर की आवाज करीब आधा किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। आसपास के लोग तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। देखा कि डंफर का बोनट और स्टेयरिंग चालक के शरीर में धंस गया था। चालक दर्द से कराह रहा था और बाहर निकलने में असमर्थ था। स्थानीय लोगों ने बिना देर किए राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया और पुलिस को सूचना दी।

डंफर का केबिन पूरी तरह पिचक जाने के कारण चालक को निकालना मुश्किल हो रहा था। लोगों ने काफी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद हाइड्रा मशीन मंगाई गई। कड़ी मशक्कत के बाद करीब आधे घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में केबिन को काटकर चालक को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया। चालक के सिर, पैर और सीने में गंभीर चोटें आई हैं।

घायल चालक को तत्काल एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत चिंताजनक बताई है। समाचार लिखे जाने तक चालक की पहचान नहीं हो सकी थी। उसके पास से कोई दस्तावेज भी बरामद नहीं हुआ है। पुलिस पहचान का प्रयास कर रही है। हादसे के कारण नेशनल हाईवे-19 पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। वाराणसी-प्रयागराज लेन पर करीब 2 किलोमीटर तक जाम की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने क्रेन की मदद से दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाकर किनारे कराया। इसके बाद यातायात व्यवस्था बहाल हो सकी।

पुलिस की प्राथमिक जांच में हादसे की मुख्य वजह तेज रफ्तार और लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि आगे चल रहे ट्रक ने अचानक ब्रेक लगाया। पीछे से तेज गति में आ रहा डंफर नियंत्रित नहीं हो सका और ट्रक में जा घुसा। पुलिस ने दोनों वाहनों को कब्जे में ले लिया है। सदर थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। ट्रक चालक से भी पूछताछ की जाएगी। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद हाईवे पर चलने वाले वाहन चालकों से अपील है कि गति सीमा का पालन करें और आगे चल रहे वाहन से उचित दूरी बनाकर चलें।

अभिषेक बनर्जी के घर पर कोलकाता पुलिस ने दी दस्तक, अवैध निर्माण का मिला था नोटिस

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कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस पार्टी (Trinamool Congress Party) के नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के आवास पर कोलकाता पुलिस पहुंची है। इस समय अभिषेक के घर के बाहर भारी पुलिसबल तैनात है। अभिषेक बनर्जी के 188ए हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास पर सोमवार को पुलिस पहुंची। कहा जा रहा है कि यह कार्रवाई कोलकाता नगर निगम की ओर से जारी किए गए एक नोटिस के बाद हुई है, लेकिन पुलिस के वहां पहुंचने का आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।

यह नोटिस अभिषेक बनर्जी के घर के कई हिस्सों में कथित तौर पर अवैध निर्माण से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। दरअसल अभिषेक को इस मामले में सात दिनों का नोटिस दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, सात दिनों के समयसीमा की यह अवधि आज समाप्त हो गई है। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) अभिषेक बनर्जीके अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी की कथित तौर पर स्वामित्व वाली या सह-स्वामित्व वाली कई प्रॉपर्टीज के खिलाफ जांच शुरू की थी, जिसके तहत उनके 17 प्रॉपर्टीज को लेकर नोटिस जारी किए गए थे।

इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने केएमसी को पत्र लिखकर अवैध निर्माणों के संबंध में नोटिस का जवाब देने के लिए समय मांगा था। इन नोटिसों की प्रतियां ऐसी प्रॉपर्टीज की दीवारों पर चिपका दी गई हैं। डायमंड हार्बर के सांसद के दो आवास, 188ए हरीश मुखर्जी रोड और दूसरा पास ही 121 कालीघाट रोड पर है और दोनों केएमसी की जांच के दायरे में हैं। हरीश मुखर्जी रोड स्थित प्रॉपर्टी के मामले में ‘लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक कॉर्पोरेट संस्था को नोटिस जारी किया गया है, जिसका स्वामित्व कथित तौर पर बनर्जी परिवार के पास है।

कालीघाट रोड स्थित प्रॉपर्टी के मामले में, नोटिस अभिषेक बनर्जी की मां लता बनर्जी को जारी किया गया है। दोनों प्रॉपर्टी कोलकाता में स्थित हैं और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के काफी करीब हैं। बंगाल में जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सरकार रही, विपक्षी दल सीपीएम, कांग्रेस और बीजेपी इस मुद्दे पर मुखर रही कि बनर्जी परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम पर बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड है।

हालांकि उस समय ममता बनर्जी ने इन आरोपों को विपक्षी दलों की ओर से कीचड़ उछालने की एक कवायद बताकर सिरे से खारिज कर दिया था। अभिषेक बनर्जी को नोटिस भेजे जाने को लेकर ममता बनर्जी ने कोलकाता के टीएमसी पार्षदों की बैठक बुलाई थी, लेकिन 136 पार्षदों में से काफी कम संख्या में ही पार्षद पहुंचे थे।