34 C
Lucknow
Thursday, March 19, 2026
Home Blog

राष्ट्रपति मुर्मू के अयोध्या दौरे पर कड़ी सुरक्षा, सात घंटे तक हाई अलर्ट पर रही रामनगरी

0

अयोध्या/लखनऊ।
द्रौपदी मुर्मू के अयोध्या दौरे को लेकर बृहस्पतिवार को पूरी रामनगरी अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच रही। करीब सात घंटे तक नभ, थल और जल—तीनों स्तरों पर हाई अलर्ट लागू रहा। शहर के प्रमुख इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया, जिससे बिना अनुमति कोई भी गतिविधि संभव नहीं हो सकी।

राष्ट्रपति सुबह करीब 10:30 बजे महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पर विशेष विमान से पहुंचीं। यहां से कड़े सुरक्षा घेरे में उनका काफिला राम मंदिर के लिए रवाना हुआ। उनके आगमन से करीब तीन घंटे पहले ही पूरे शहर में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया था।

दौरे के मद्देनजर लखनऊ और सुल्तानपुर को जोड़ने वाले हाईवे को पूरी तरह सील कर दिया गया। जगह-जगह बैरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। राष्ट्रपति का काफिला तय मार्ग से गुजरते हुए मोहबरा और टेढ़ी बाजार होते हुए मंदिर परिसर के 11 नंबर द्वार से प्रवेश किया।

मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सीआरपीएफ, एनएसजी, एटीएस और सिविल पुलिस समेत करीब तीन हजार सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। इसके साथ ही प्रमुख स्थानों पर स्नाइपर भी मुस्तैद रखे गए थे।

सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए हाईवे किनारे स्थित मकानों की छतों पर सशस्त्र जवानों को तैनात किया गया। वहीं सरयू नदी में जल पुलिस की विशेष टुकड़ी हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थी, ताकि किसी भी संदिग्ध हलचल पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

आधुनिक तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल किया गया। एंटी-ड्रोन सिस्टम के साथ पुलिस और खुफिया एजेंसियों की टीमें लगातार सक्रिय रहीं। येलो जोन और हनुमानगढ़ी स्थित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि की निगरानी की जाती रही।

यूपी में जुलाई 2026 तक होंगे पंचायत चुनाव

0

 

ओबीसी आरक्षण 2011 जनगणना के आधार पर तय—सरकार का बड़ा फैसला

लखनऊ

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति पर राज्य सरकार ने विराम लगा दिया है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव हर हाल में जुलाई 2026 तक संपन्न करा लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ओबीसी आरक्षण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसके तहत अगली कैबिनेट बैठक में पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी जाएगी और आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर ही किया जाएगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई नई जनगणना नहीं कराई जाएगी और पूर्व में लागू आरक्षण चक्र को ही जारी रखा जाएगा।
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आयोग के गठन के बाद उसकी रिपोर्ट मिलते ही पंचायतों की सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा और इसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा। इससे पहले आरक्षण को लेकर बनी अनिश्चितता अब समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे चुनाव प्रक्रिया में तेजी आएगी।
वहीं, इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक से पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा सकती। वर्तमान में प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिसे देखते हुए समयबद्ध चुनाव प्रक्रिया जरूरी हो गई है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची ने कोर्ट में दलील दी थी कि प्रदेश में ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी, जिसके अनुसार उनका पांच वर्ष का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा और इसके बाद चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है।
कोर्ट ने अपने आदेश में पूर्व के “प्रेम लाल पटेल केस” का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार चुनाव की तिथियां तय करने की शक्ति अपने हाथ में नहीं ले सकती, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 243(क) के तहत चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण केवल राज्य निर्वाचन आयोग के पास ही निहित है। सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से 25 मार्च तक हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराने की क्या तैयारी है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में वर्तमान कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय मांगा गया है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्षों के कार्यकाल भले अलग-अलग समय पर समाप्त हो रहे हों, लेकिन किसी भी पद का कार्यकाल जुलाई 2026 से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है।
सरकार के इस स्पष्ट रुख और हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर कराए जाएंगे और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर भी किसी प्रकार की देरी नहीं होगी।

लंबित भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, पुलिस ने इको गार्डन भेजा

0

 

लखनऊ। हजरतगंज चौराहे पर सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों में लंबित भर्ती को पूरा कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से न्यूनतम 1262 सहायक अध्यापक और 253 प्रधानाध्यापक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा। उनका कहना था कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जिससे हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है।

स्थिति को देखते हुए मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर मौके से हटाया।

पुलिस द्वारा सभी प्रदर्शनकारियों को बसों के माध्यम से इको गार्डन भेज दिया गया, जहां आमतौर पर धरना-प्रदर्शन की अनुमति दी जाती है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई: 7.33 क्विंटल गांजा बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार

0

 

लखनऊ

राजधानी में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स को बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ टीम ने रायबरेली रोड स्थित बिंदौवा गांव के पास छापेमारी करते हुए एक कंटेनर में छिपाकर लाया गया भारी मात्रा में गांजा बरामद किया है। कार्रवाई के दौरान दो तस्करों को मौके से गिरफ्तार किया गया, जबकि बरामद गांजे की कुल मात्रा 7.33 क्विंटल बताई जा रही है, जिसकी अंतरराज्यीय बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।
एसटीएफ के उपाधीक्षक धर्मेश शाही ने बताया कि टीम को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिली थी कि रायबरेली रोड पर स्थित बिंदौवा गांव के पास “बाबा के ढाबा” के नजदीक एक कंटेनर के जरिए अवैध मादक पदार्थ की खेप लाई जा रही है। सूचना के आधार पर एसटीएफ टीम ने घेराबंदी कर कंटेनर को रोक लिया और तलाशी के दौरान उसमें छिपाकर रखा गया 7.33 क्विंटल गांजा बरामद किया। साथ ही मौके से दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में गिरफ्तार तस्करों ने खुलासा किया कि वे गांजा ओडिशा और आंध्र प्रदेश से सस्ते दामों में खरीदकर उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में ऊंचे दामों पर बेचते थे। उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे नेटवर्क का एक सरगना है, जो बिहार सहित कई राज्यों में गांजे की सप्लाई कराता है और बड़े स्तर पर मुनाफा कमाता है।
एसटीएफ के अनुसार, यह एक संगठित अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह का हिस्सा है, जिसकी जड़ें कई राज्यों तक फैली हुई हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और सरगना तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि प्रदेश में किन-किन स्थानों पर इस खेप की सप्लाई की जानी थी।
इस कार्रवाई को राजधानी में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।

गैस किल्लत के बीच हीटर पर बन रहा विधायकों का खाना, समय बढ़ा पर स्वाद बरकरार

0

लखनऊ
दारुल सफा के ए ब्लॉक स्थित भोजनालय में इन दिनों गैस की कमी का असर साफ नजर आ रहा है। विधायकों के लिए भोजन तैयार करने में अब पारंपरिक गैस चूल्हों की जगह इलेक्ट्रिक हीटर का सहारा लिया जा रहा है।

भोजनालय के कर्मचारियों के अनुसार, गैस सिलेंडर न मिलने के कारण खाना बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। पहले जहां भोजन तैयार करने में करीब दो घंटे का समय लगता था, अब वही खाना पकाने में तीन से चार घंटे तक लग रहे हैं।

हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि समय बढ़ने के बावजूद खाने की गुणवत्ता और स्वाद में कोई कमी नहीं आई है। सभी व्यंजन पहले की तरह ही तैयार किए जा रहे हैं, जिससे विधायकों को किसी तरह की असुविधा न हो।

गैस आपूर्ति बाधित होने से रसोई संचालन में दिक्कतें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए काम को सुचारु रूप से चलाया जा रहा है। कर्मचारी सीमित संसाधनों में भी समय पर भोजन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।

इस स्थिति ने यह जरूर दिखाया है कि व्यवस्था में बदलाव के बावजूद काम को जारी रखा जा सकता है, हालांकि इसके लिए अतिरिक्त समय और मेहनत की जरूरत पड़ रही है।

बंद घर में बदल गया बिजली मीटर, उपभोक्ता ने उठाए सवाल

0

लखनऊ। बाजार खाला थाना क्षेत्र स्थित भदेवा कॉलोनी में बिजली व्यवस्था को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां के निवासी दिलशाद ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दिलशाद के अनुसार, वह 16 तारीख को अपना करीब 5000 रुपये का बिजली बिल जमा करने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि उनका मीटर पोस्टपेड में बदल दिया गया है, जबकि इस बदलाव की उन्हें पहले कोई सूचना नहीं दी गई थी।

पीड़ित का कहना है कि जिस समय मीटर बदला गया, उस वक्त उनके घर पर कोई मौजूद नहीं था और मकान पर ताला लगा हुआ था। ऐसे में बिना अनुमति और बिना किसी सदस्य की मौजूदगी के मीटर कैसे बदल दिया गया, यह बड़ा सवाल बन गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मीटर बदलते समय न तो उनका मोबाइल नंबर लिया गया और न ही कोई रसीद या आधिकारिक दस्तावेज उन्हें दिया गया। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

दिलशाद ने संबंधित विभाग से जवाब मांगते हुए कहा कि आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है और बिना सूचना के इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती रहीं तो आम उपभोक्ताओं का भरोसा व्यवस्था पर से उठ सकता है। अब देखना होगा कि बिजली विभाग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।