25 C
Lucknow
Saturday, May 30, 2026
Home Blog

बदले वक्त में राजनैतिक पतन की ओर इंसाफ सेना प्रमुख बादशाह सिंह

0

– कभी श्रम मंत्री के रूप में रहे सत्तासीन , आज लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक समय ऐसा था जब इंसाफ सेना के मुखिया रहते बादशाह सिंह सत्ता के केंद्र में हुआ करते थे। बहुजन समाज पार्टी सरकार में श्रम मंत्री के रूप में उनका प्रभाव प्रदेश भर में देखा जाता था। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और अब वही बादशाह सिंह प्रशासनिक कार्रवाई के कारण चर्चा में हैं।

जिलाधिकारी गजल भारद्वाज द्वारा बादशाह सिंह के रिवॉल्वर और राइफल के शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जाने की कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले नेता के खिलाफ हुई यह कार्रवाई लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

बादशाह सिंह का राजनीतिक जीवन हमेशा सुर्खियों में रहा। श्रम मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी , लेकिन बाद के वर्षों में उन पर करोड़ों रुपये के कथित श्रमिक कल्याण घोटाले को लेकर आरोप लगे और मामला न्यायालय तक पहुंचा। इसी प्रकरण में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। उस समय यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना था।

वर्ष 2007 के फर्रुखाबाद बिधानसभा उपचुनाव के दौरान भी बादशाह सिंह अपने एक बयान को लेकर चर्चाओं में आए थे। उन्होंने बसपा सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को “असली क्षत्राणी” बताया था। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की थी।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि राजनीति में समय और परिस्थितियां कितनी तेजी से बदलती हैं। कभी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने वाले नेता आज प्रशासनिक कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। जिले में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और लोग इसे प्रदेश की बदलती राजनीतिक तस्वीर के रूप में देख रहे हैं।

लखनऊ में जमीन सोने के भाव ! कृषि योग्य जमीन महंगी होने जा रही, 332 गांवों में सर्किल रेट 200% तक बढ़ेंगे

0

लखनऊ: राजधानी लखनऊ (Lucknow) के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि योग्य जमीन खरीदना अब और महंगा होने जा रहा है। जिला प्रशासन (district administration) ने राजधानी के 332 गांवों में डीएम सर्किल रेट 100% से 200% तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। संशोधित दरें 4 जून से लागू की जाएंगी, जबकि 2 जून तक आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। अब आपत्तियों के निस्तारण के बाद चार जून को संशोधित दरें लागू होंगी। संशोधित दरों के लागू होने के बाद जिन गांवों में डीएम सर्किल रेट पहले प्रति हेक्टेयर बीस लाख था, वहां बढ़कर 35 से 40 लाख रुपये तक हो जाएगा।

नई दरें लागू होने के बाद जिन गांवों में कृषि भूमि का सर्किल रेट अब तक 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर था, वहां यह बढ़कर 35 से 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है। मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, बख्शी का तालाब, मलिहाबाद और सदर क्षेत्र के गांवों में दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है। लखनऊ के मोहनलालगंज में 161 सरोजनीनगर में 52, बख्शी का तालाब में 95, मलिहाबाद में 13 और सदर क्षेत्र में छह गांवों की कृषि योग्य भूमि की दरों में वृद्धि का प्रस्ताव है।

डीएम विशाख जी के मुताबिक, एलडीए के विस्तारित क्षेत्र और नगर निगम सीमा में आने वाले गांवों को छोड़कर बाकी ग्रामीण क्षेत्रों में दरें संशोधित की जा रही हैं। प्रशासन का कहना है कि बाजार दर और मौजूदा सर्किल रेट में भारी अंतर के कारण यह फैसला लिया गया है। कृषि भूमि को चार श्रेणियों जनपदीय मार्ग के आसपास, संपर्क मार्ग, आबादी से सटी जमीन और सामान्य भूमि में बांटकर नई दरें तय की गई हैं।

 

दिल्ली में साकेत के पास भरभराकर गिरी 5 मंजिला इमारत, मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका

0

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली (Delhi) के साकेत (Saket) इलाके में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसा सामने आया। साउथ दिल्ली के महरौली थाना क्षेत्र स्थित सैदुलाजाब में एक पांच मंजिला इमारत अचानक धराशायी हो गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरते ही तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी।

घटना की जानकारी शाम करीब 7:45 बजे दमकल विभाग को मिली, जिसके बाद पुलिस, दमकल कर्मी और मेडिकल टीम मौके पर पहुंच गई। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक अब तक चार से पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। सभी घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि राहत एवं बचाव कार्य अभी जारी है और मलबे में कई अन्य लोगों के फंसे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। एहतियात के तौर पर आसपास की इमारतों और दुकानों को खाली कराया जा रहा है ताकि किसी और अप्रिय घटना से बचा जा सके।

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि एक जर्जर और खंडहरनुमा इमारत पास की रिहायशी बिल्डिंग पर गिर गई, जिसके कारण यह बड़ा हादसा हुआ। मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

 

 

 

4 साल बाद यूपी को मिलेगा स्थायी डीजीपी, राजीव कृष्ण के नाम पर लगी मुहर

0

 

बीवी IRS, साले साहब MLA तो सरहज IPS… UP डीजीपी राजीव कृष्‍ण का पूरा परिवार रसूखदार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को करीब चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिलने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को ही प्रदेश का नया स्थायी डीजीपी बनाए जाने का फैसला लगभग तय हो चुका है। राज्य सरकार जल्द ही इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर सकती है।

नियमों के अनुसार स्थायी डीजीपी की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रक्रिया और उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत की जाती है। इन प्रावधानों के अनुसार नियुक्त अधिकारी को कम से कम दो वर्ष का निश्चित कार्यकाल दिया जाता है। राजीव कृष्ण 1 जून 2025 से उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और अब उनके स्थायी डीजीपी बनने का रास्ता साफ माना जा रहा है।

स्थायी डीजीपी के चयन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपीएससी को 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम भेजे थे। इसके बाद 26 मार्च को नई दिल्ली में आयोग की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें तीन वरिष्ठ अधिकारियों—रेणुका मिश्रा, पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण—के नामों का पैनल तैयार किया गया। आयोग ने यह पैनल राज्य सरकार को भेज दिया, जिसके बाद अंतिम निर्णय की प्रक्रिया पूरी की गई।

राजीव कृष्ण का पुलिस सेवा में लंबा और व्यापक अनुभव रहा है। वर्ष 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण की पहली तैनाती प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में हुई थी। इसके बाद उन्होंने बरेली, कानपुर और अलीगढ़ में सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) के रूप में सेवाएं दीं। 10 मार्च 1997 को उन्हें पहली बार जिले की कमान सौंपी गई और वे फिरोजाबाद के पुलिस अधीक्षक बनाए गए।

अपने करियर के दौरान उन्होंने इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, लखनऊ और बरेली जैसे महत्वपूर्ण जिलों में एसएसपी के रूप में कार्य किया। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में बड़े जिलों में डीआईजी स्तर के अधिकारियों की तैनाती की व्यवस्था लागू होने पर उन्हें लखनऊ का डीआईजी बनाया गया था।

राजीव कृष्ण मेरठ रेंज के आईजी भी रह चुके हैं। वर्ष 2012 में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। सितंबर 2017 में उत्तर प्रदेश लौटने के बाद उनकी तैनाती पुलिस अकादमी मुरादाबाद में की गई। इसके बाद 5 फरवरी 2018 को उन्हें लखनऊ जोन का एडीजी बनाया गया। उन्होंने आगरा जोन में भी लगभग ढाई वर्ष तक एडीजी जोन के रूप में सेवाएं दीं। लंबे प्रशासनिक और पुलिसिंग अनुभव के आधार पर अब उन्हें प्रदेश की पुलिस व्यवस्था की स्थायी कमान सौंपे जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की बेटी टिफ़नी और उनके पति ने ताजमहल का किया दीदार

0

आगरा: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया यात्रा के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Trump) की बेटी टिफ़नी (Tiffany) अपने पति माइकल बोलस के साथ आज शनिवार को यहां के ऐतिहासिक ताजमहल का दीदार करने पहुंचीं। दंपति ने ताजमहल में लगभग एक घंटा बिताया। टिफ़नी ऐतिहासिक स्मारक की सुंदरता से बेहद प्रभावित दिखीं और उन्होंने गाइड रमेश धवन से कई सवाल पूछे। रमेश ने ताजमहल के इतिहास के बारे में विस्तार से बताया।

दंपति ने न सिर्फ हाथ पकड़कर बल्कि अलग-अलग पोज़ में तस्वीरें खिंचवाईं। उन्होंने अपने स्टाफ के साथ एक ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। टिफ़नी नारंगी रंग की लंबी ड्रेस में और माइकल टी-शर्ट और ट्राउजर में नजर आए। दोनों ने धूप का चश्मा पहना हुआ था। इससे पहले, टिफ़नी का चार्टर्ड विमान सुबह 11:30 बजे खेरिया हवाई अड्डे पर उतरा। होटल जाने के बजाय, उनका काफिला सीधे ताजमहल की ओर रवाना हुआ।

गोल्फ कार्ट में बैठकर, टिफ़नी और माइकल ने ताजमहल परिसर में प्रवेश किया और लोगों का आभार व्यक्त किया। उनके साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी थे। ताजमहल से निकलने के बाद टिफ़नी और माइकल अमर विलास पैलेस होटल की ओर रवाना हुए। टिफ़नी के कमरे से ताजमहल साफ़ दिखाई देता है। दोपहर के भोजन के बाद वे चार्टर्ड विमान से राजस्थान के जैसलमेर के लिए रवाना हो गए।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2000 में अपनी पत्नी मेलानिया, बेटी इवांका और दामाद जेरेड कुशनर के साथ ताजमहल का दौरा किया था। लगभग छह साल बाद, ट्रम्प परिवार का एक और सदस्य ताजमहल पहुंचा है। 25 मई को, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी पत्नी जेनेट के साथ ताजमहल का दौरा किया।

 

 

सरकारी जमीन पर मस्जिद और मकान! संभल जामा मस्जिद के शाही इमाम समेत दो पर मुकदमा, 7 करोड़ जुर्माने के बाद बढ़ी कार्रवाई

0

 

संभल। जिले में जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन के खिलाफ सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला दर्ज होने से हड़कंप मच गया है। प्रशासन का आरोप है कि ग्राम समाज की आरक्षित भूमि पर मस्जिद, मजार और मकान का निर्माण कर कब्जा किया गया, जबकि संबंधित जमीन सार्वजनिक उपयोग और वृक्षारोपण के लिए सुरक्षित थी।

हल्का लेखपाल मुकेश कुमार यादव की तहरीर पर संभल कोतवाली में दर्ज मुकदमे के अनुसार, गांव सैफखां सराय स्थित गाटा संख्या 452 की भूमि चकबंदी के दौरान सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित की गई थी। आरोप है कि वर्षों पहले खतौनी में दर्ज नामों को 27 जनवरी 2003 को तहसीलदार न्यायालय द्वारा निरस्त कर भूमि को पुनः ग्राम समाज के नाम दर्ज कर दिया गया था। इसके बावजूद कब्जा बरकरार रखा गया।

प्रशासन का यह भी दावा है कि कब्जे को वैध दिखाने के लिए वक्फ बोर्ड के समक्ष गलत तथ्यों के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किया गया और भूमि का वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकरण करा लिया गया। लेखपाल ने अपनी शिकायत में कहा है कि आवेदन में यह तथ्य छिपाया गया कि जमीन सार्वजनिक संपत्ति है।

मामला पहले से ही राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है। तहसीलदार न्यायालय सरकारी भूमि पर मस्जिद, मजार और मकान निर्माण को अवैध मानते हुए शाही इमाम और उनके भाई पर लगभग सात करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगा चुका है। हालांकि इस आदेश के खिलाफ डीएम न्यायालय में अपील दायर की गई है, जिस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है।

अब आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच रिपोर्ट के आधार पर होगा। प्रशासन की इस कार्रवाई ने संभल में सरकारी भूमि और वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।