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Wednesday, May 6, 2026
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20 मई को आगरा में दवा दुकानें बंद, फार्मा एसोसिएशन हड़ताल में शामिल

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आगरा
20 मई को दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। आगरा फार्मा एसोसिएशन ने ऑल इंडिया स्तर पर बुलाई गई हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है। यह हड़ताल ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर आयोजित की जा रही है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप बंसल के अनुसार, हड़ताल का मुख्य कारण ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग है। इसके अलावा कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट पर रोक और बाजार में बढ़ती नकली दवाओं पर नियंत्रण भी प्रमुख मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर व्यापारी लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।

फार्मा कारोबारियों का कहना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव से पारंपरिक दवा दुकानों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं बड़े कॉरपोरेट समूह भारी छूट देकर छोटे व्यापारियों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन बना रहे हैं। इसके साथ ही नकली दवाओं की समस्या भी लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 20 मई को शहर भर की मेडिकल स्टोर बंद रहेंगी। इस दौरान दवा कारोबार पूरी तरह ठप रहेगा, जिससे आम लोगों को अस्थायी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो आगे आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

जल संकट और यमुना प्रदूषण पर सख्ती, डीएम ने दिए कड़े निर्देश

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आगरा
भीषण गर्मी के बीच आगरा में पेयजल आपूर्ति और यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। डीएम मनीष बंसल ने मंगलवार को कैंप कार्यालय में जल निगम (नगरीय) के कार्यों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि पानी की आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही यमुना में गिरने वाले 38 नालों को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक के दौरान ट्रांसयमुना जोन पेयजल पुनर्गठन योजना की धीमी प्रगति पर डीएम ने नाराजगी जताई। अगस्त 2025 में शुरू हुई इस परियोजना की अब तक सिर्फ 22.5 प्रतिशत प्रगति हुई है। डीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि 31 अगस्त 2027 तक हर हाल में 11 ओवरहेड टैंक और पूरे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का काम पूरा किया जाए।

यमुना को साफ करने के लिए प्रशासन ने ठोस कदम उठाने की बात कही है। बल्केश्वर, भैरों और मंटोला जैसे प्रमुख नालों सहित सभी गंदे नालों की तत्काल टैपिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में 38 नालों को पाइपलाइन के माध्यम से टैप करने की प्रक्रिया जारी है, ताकि गंदा पानी सीधे नदी में न जाए।

इसके अलावा जलकल विभाग को कई अहम निर्देश दिए गए हैं। पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने, जिन इलाकों में पानी की किल्लत है वहां टैंकर भेजने और पालड़ा झाल से आने वाले गंगाजल की आपूर्ति सुचारू रखने के लिए कहा गया है। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

बैठक में एडीएम नमामि गंगे जुहैर बेग, जल निगम और जलकल विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का कहना है कि इन कदमों से शहर में जल संकट कम होगा और यमुना को प्रदूषण से राहत मिलेगी।

केजीएमयू कार्यपरिषद में दलित-पिछड़े प्रोफेसरों को शामिल न करने पर राजभवन सख्त

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लखनऊ
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की कार्यपरिषद में अब तक दलित और पिछड़े वर्ग के प्रोफेसरों को शामिल न किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजभवन उत्तर प्रदेश ने गंभीर रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजकर जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, प्रदेश सरकार ने 2 जनवरी 2026 को केजीएमयू की नियमावली में संशोधन करते हुए “किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश (संशोधन) अधिनियम 2025” लागू किया था। इसके तहत अधिनियम की धारा 24(1) में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि कार्यपरिषद में अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के वरिष्ठतम आचार्य को शामिल किया जाए। इसके बावजूद अब तक इस नियम का पालन नहीं किया गया।

इस मामले को लेकर कई स्तरों पर आपत्तियां उठीं। विधायक जय देवी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर इस मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया। वहीं कार्यपरिषद सदस्य डॉ. सुरेश अहिरवार ने भी ज्ञापन भेजकर नियमों के अनुपालन की मांग की। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राजभवन ने पूरे मामले को संज्ञान में लिया।

राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज कुमार एल जानी ने 24 अप्रैल को कुलपति को भेजे पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दलित और पिछड़े वर्ग के प्रोफेसरों को कार्यपरिषद में शामिल करने की प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाए। पत्र में विभिन्न शिकायतों और ज्ञापनों का भी उल्लेख किया गया है।

इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया जारी है और जल्द ही मनोनयन कर लिया जाएगा। हालांकि, मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है।

पुलिस मुठभेड़: तांबा चोरी के तीन आरोपी गिरफ्तार, दो के पैर में लगी गोली

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बरेली
सीबीगंज क्षेत्र में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान तांबा चोरी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुठभेड़ के दौरान दो बदमाशों के पैर में गोली लगी, जिससे वे घायल हो गए। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किया गया तांबा, अवैध हथियार और नकदी भी बरामद की है।

पुलिस के अनुसार, पद्मावती एसोसिएट फर्म के गोदाम से करीब 20 लाख रुपये का दो टन तांबा स्क्रैप चोरी हुआ था। इस संबंध में 28 अप्रैल 2026 को फर्म की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। चोरों ने गोदाम की दीवार के पास सुरंग बनाकर इस वारदात को अंजाम दिया था, जिसके बाद से पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी।

बुधवार तड़के पुलिस टीम बंडिया नहर के पास चेकिंग कर रही थी, तभी मुखबिर से सूचना मिली कि तीन संदिग्ध ई-रिक्शा से चोरी का तांबा बेचने जा रहे हैं। पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपी भागने लगे। इस दौरान उनका ई-रिक्शा पलट गया और खुद को घिरा देख उन्होंने पुलिस पर फायरिंग कर दी।

जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें दो आरोपियों—निजाम (24) और अब्दुल समी (22)—के पैर में गोली लगी। तीसरा आरोपी मोहम्मद खालिद (55) को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों आरोपी महेशपुर, सीबीगंज के निवासी बताए गए हैं।

पुलिस ने आरोपियों के पास से तमंचे, कारतूस, नकदी और 65 किलोग्राम तांबे का तार बरामद किया है, साथ ही एक ई-रिक्शा भी जब्त किया गया है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। मामले में संबंधित धाराओं के तहत नया मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है।

आईटीआई प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, अब विषय और अंकों के आधार पर मिलेगा ट्रेड

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लखनऊ
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए इस बार महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह नई प्रणाली से जोड़ा गया है। अब छात्रों को केवल कुल प्रतिशत के आधार पर नहीं, बल्कि उनके विषयवार अंकों के आधार पर उपयुक्त ट्रेड का चयन करने में मदद मिलेगी।

नई व्यवस्था के तहत ऑनलाइन आवेदन से पहले सभी कोर्स को सॉफ्टवेयर के जरिए मैप किया जाएगा। छात्रों को अपने अंक विज्ञान, गणित, हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के अनुसार भरने होंगे। इसके बाद सॉफ्टवेयर खुद ही छात्रों को उनके प्रदर्शन के आधार पर उपयुक्त ट्रेड सुझाएगा, जिससे गलत कोर्स चयन की संभावना कम हो जाएगी।

इस बदलाव के तहत 10वीं में विज्ञान और गणित पढ़ने वाले छात्रों के लिए इलेक्ट्रीशियन, ड्रोन पायलट, मशीनिस्ट और मोटर मैकेनिक जैसे तकनीकी ट्रेड उपलब्ध होंगे। वहीं आर्ट्स स्ट्रीम के छात्र फिटर, सीएनसी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) से जुड़े कोर्स चुन सकेंगे। 8वीं पास छात्रों के लिए भी वायरमैन और वेल्डर जैसे व्यावसायिक विकल्प खुले रहेंगे, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ा जा सके।

राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) के अनुसार प्रदेश के करीब 3500 आईटीआई संस्थानों में 10 मई से प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। इस बार 75% सीटें संबंधित जिले के छात्रों के लिए आरक्षित होंगी, जबकि 25% सीटों पर अन्य जिलों के अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा।

इसके अलावा, पढ़ाई बीच में छोड़ चुके छात्रों (ड्रॉपआउट) को भी एक और अवसर दिया जाएगा। मुख्य प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के एक महीने बाद खाली सीटों पर उन्हें सरकारी आईटीआई में प्रवेश दिया जाएगा। नए सत्र में 20 नए राजकीय आईटीआई भी शुरू किए जा रहे हैं, जिससे हजारों नई सीटें जुड़ेंगी और युवाओं के लिए रोजगारपरक शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे।

ज़मीन पर दिख रहा ‘जीरो टॉलरेंस’ का असर

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– डीएम डॉ. अंकुर लाठर और एसपी आरती सिंह की जोड़ी बनी सख्त प्रशासन की पहचान
फर्रुखाबाद। जनपद में लंबे समय बाद प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही का ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है, जहां सरकारी तंत्र पर पकड़ भी दिखाई दे रही है और कार्रवाई का असर भी ज़मीन पर उतरता नजर आ रहा है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की सक्रिय कार्यशैली ने जिले में “जीरो टॉलरेंस” नीति को नई धार दे दी है।
चाहे भूमाफियाओं पर कार्रवाई हो, भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन, अवैध कब्जों पर बुलडोजर, पुलिस विभाग में लगातार फेरबदल, अपराधियों पर गैंगस्टर और गुंडा एक्ट की कार्रवाई या फिर सरकारी दफ्तरों में जवाबदेही तय करने की मुहिम प्रशासन की हर कार्रवाई अब सीधे संदेश दे रही है कि लापरवाही और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं होगी।
हाल ही में तहसील स्तर पर कई कर्मचारियों के निलंबन, पुलिस विभाग में निरीक्षक और उपनिरीक्षकों की तैनाती में बदलाव तथा संवेदनशील मामलों में तेज कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि डीएम और एसपी की जोड़ी जिले में प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह कसने में जुटी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक डीएम डॉ. अंकुर लाठर लगातार विभागीय समीक्षा बैठकों में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे रहे हैं कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही सामने आई तो सीधे कार्रवाई होगी। वहीं एसपी आरती सिंह ने कानून व्यवस्था को लेकर थानों की जवाबदेही बढ़ाई है और फील्ड पुलिसिंग पर विशेष फोकस किया है।
जनपद में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस की सक्रियता भी बढ़ी है। हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी, रात्रि गश्त, महिला सुरक्षा अभियान और थाना स्तर पर त्वरित सुनवाई से आम लोगों में भरोसा बढ़ा है। वहीं प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अब “सिफारिश संस्कृति” कमजोर पड़ रही है और कामकाज प्रदर्शन के आधार पर तय हो रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी डीएम-एसपी की इस जोड़ी को लेकर चर्चा है। लोगों का कहना है कि फर्रुखाबाद में पहली बार प्रशासनिक मशीनरी इतनी सक्रिय और समन्वित दिखाई दे रही है, जहां अफसर केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं बल्कि फील्ड में उतरकर व्यवस्था सुधारने में जुटे हैं।
जनता के बीच यह संदेश तेजी से जा रहा है कि जिले में अब “जीरो टॉलरेंस” केवल सरकारी नारा नहीं, बल्कि कार्रवाई की वास्तविक नीति बन चुका है।