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Sunday, March 1, 2026
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कुल्लू: 100 मीटर गहरी खाई में कैंपर वाहन गिरने से दो युवकों की मौत, तीन घायल

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कुल्लू: कुल्लू (Kullu) जिले के नागर के पास जाना गांव के नजदीक एक गहरी खाई में कैंपर वाहन (camper vehicle) के लगभग 100 मीटर नीचे गिरने से दो युवकों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। बताया जा रहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण वाहन शनिवार देर रात संकरी और घुमावदार सड़क पर दुर्घटना का शिकार हुआ, जब यह वाहन पारंपरिक फाग उत्सव से लौट रहा था।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चालक के वाहन से नियंत्रण खो देने का संदेह है, जिसके बाद वाहन सड़क से उतरकर पहाड़ी से नीचे लुढ़क गया। दुर्घटना की आवाज सुनकर स्थानीय निवासी मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। बचाव दल ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर अंधेरे में क्षतिग्रस्त वाहन से लोगों को निकालने के लिए कठिन अभियान चलाया। कुल्लू के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतकों की पहचान अविनाश और सोनम कुमार के रूप में हुई है, दोनों कुल्लू जिले के सौर गांव के निवासी थे। इस हादसे में तीन अन्य युवक घायल हो गए। उन्हें कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। इस दुखद घटना से सौर गांव में शोक की लहर दौड़ गई है, क्योंकि बताया जा रहा है कि पीड़ित हादसे से कुछ घंटे पहले ही त्योहार के उत्सव में शामिल हुए थे।

लखनऊ: बीकेटी में वेज बिरयानी की दुकान के फ्रीजर के अंदर 35 वर्षीय व्यक्ति का मिला शव

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लखनऊ: लखनऊ (Lucknow) के बख्शी का तालाब (बीकेटी) इलाके में एक शाकाहारी बिरयानी (veg biryani) की दुकान के फ्रीजर के अंदर 35 वर्षीय व्यक्ति का शव मिला। यह घटना लखनऊ के बीकेटी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले जीसीआरजी कॉलेज के सामने हुई। शनि रावत की यह दुकान उनके पिता के निधन के बाद पिछले चार दिनों से बंद थी।

पुलिस के अनुसार, रावत रविवार सुबह दुकान खोलने पहुंचे तो उन्होंने फ्रीजर के अंदर शव देखा। यह देखकर वे स्तब्ध रह गए और उन्होंने शोर मचाया, जिससे आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जो मौके पर पहुंची और शव को फ्रीजर से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मौके से एक आधार कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया।

आधार कार्ड के विवरण के आधार पर मृतक की पहचान विजय पाल (35) के रूप में हुई, जो बीकेटी क्षेत्र के इंदौरा बाग स्थित किशनपुर माजरा मदारीपुर का निवासी था। वह स्वर्गीय ढलाई का पुत्र था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि विजय पांच साल पहले अपनी पत्नी से अलग हो गया था और दिहाड़ी मजदूरी करके अपना जीवन यापन करने के लिए अकेला रहता था।

उनके परिवार में उनकी बेटी हैं जो अपनी मां के साथ रहती हैं। रिश्तेदारों ने बताया कि उन्हें आखिरी बार शनिवार को उनके घर के पास देखा गया था। बाद में उन्हें पुलिस से उनकी मृत्यु की सूचना मिली। विजय के चचेरे भाई भानु ने बताया कि विजय पहले वाई-फाई इंस्टॉलेशन के क्षेत्र में काम करते थे और बीकेटी में बसने से पहले दिल्ली में भी काम कर चुके थे।

पत्नी से अलग होने के बाद, कथित तौर पर उन्हें शराब पीने की लत लग गई थी। पुलिस ने मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। हालांकि, स्थानीय लोगों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शव मिलने के बाद फ्रीजर को जब्त नहीं किया गया और लोग घटनास्थल पर रखी चीजों को छूते रहे, जिससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है। अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चल रही जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

करंट की चपेट में आने से 2 किसानों की गई जान, बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

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बाराबंकी: करंट की चपेट में आने से 2 किसानों (farmers) की मौत हो गई है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों की लाश का पंचनामा कर पीएम के लिए भेजा। वहीं हादसे के गुस्साए ग्रामीणों ने बिजली विभााग पर गंभीर आरोप लगाते हंगामा किया। ग्रामीणों ने उचित कार्रवाई की मांग की है।

बता दें कि पूरा मामला असंद्रा थाना क्षेत्र के रतौली गांव का है, जहां रहने वाला एक किसान खेत जा रहा था। खेत में लगे एक बिजली के खंभे को टच कर दिया, जिसमें बिजली आ रही थी, जिससे किसान करंट की चपेट में आ गया। किसान को करंट की चपेट में आता देख गांव के ही दूसरे किसान ने बचाने की कोशिश की।

वहीं बचाने के चक्कर में दूसरा किसान भी करंट की चपेट में आ गया. घटना में दोनों की मौत हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही गांव के लोग मौके पर पहुंचे और परिजनों को घटना की जानकारी दी। जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। दोनों मरने वाले किसान की पहचान रामकुमार पाल (50) और साहेब प्रसाद पाल (52) के रूप में हुई है। वहीं गांव के लोगों ने बिजली विभाग पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बेटी की शादी के लिए छुट्टी न मिलने पर फतेहपुर में बीएलओ ने की आत्महत्या

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फतेहपुर: यूपी के फतेहपुर में 45 वर्षीय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) व शिक्षा मित्र ने कथित तौर पर अपनी बेटी की आगामी शादी के लिए छुट्टी न मिलने पर एक प्राथमिक विद्यालय के कक्षाकक्ष में आत्महत्या (suicide) कर ली। मृतक की पहचान अखिलेश कुमार सविता के रूप में हुई है, जो फतेहपुर जिले के कोतवाली क्षेत्र के अलियाबाद गांव के निवासी थे और एसआईआर-2026 कार्यक्रम के तहत ड्यूटी पर तैनात थे।

खबरों के अनुसार, बार-बार उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) से मिलने के बावजूद छुट्टी न मिलने से वे परेशान थे। वे शनिवार को काम पर गए थे और स्कूल लगभग 3:00 बजे बंद हो गया था। उन्होंने अपने बेटे से आखिरी बार लगभग 4:00 बजे बात की थी। जब वे शाम तक घर नहीं लौटे, तो पास में रहने वाले एक साथी शिक्षा मित्र ने उन्हें देखने के लिए गए और कक्षा का दरवाजा अंदर से बंद पाया। दरवाजा खोलने पर उन्होंने सविता को छत के पंखे से लटका हुआ पाया।

परिवार के सदस्य उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फोरेंसिक जांच के दौरान, उनकी जेब से एक आत्महत्या पत्र बरामद हुआ, जिस पर “SIR-2026 जीवनमुक्ति” लिखा था। इस पत्र में उन्होंने कथित तौर पर उल्लेख किया था कि उनकी बेटी दिव्यांशी की शादी 8 मार्च को निर्धारित थी और सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद छुट्टी न मिलने पर उन्होंने अपना दुख व्यक्त किया।

इस घटना के कारण परिवार और पुलिस अधिकारियों के बीच तनाव पैदा हो गया, और रिश्तेदारों ने एसडीएम (ईआरओ) पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। बाद में वरिष्ठ जिला अधिकारी परिवार के घर पहुंचे और लगभग दो घंटे तक बातचीत की। प्रशासन ने कथित तौर पर 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, उनकी पत्नी को कस्तूरबा स्कूल में नौकरी और उनके बेटे के बालिग होने पर रोजगार का आश्वासन दिया है। विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

21 साल बाद फिर खुला दोहरे हत्याकांड का पन्ना: क्या अब मिलेगा न्याय?

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शरद कटियार
मैनपुरी के वेवर थाना क्षेत्र स्थित गांव नवीगंज में वर्ष 2005 में हुए दोहरे हत्याकांड की फाइल एक बार फिर खुल गई है। अदालत के आदेश के बाद पुनर्विवेचना शुरू होने जा रही है। यह केवल एक आपराधिक मामले की कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की कसौटी भी है।
6 अगस्त 2005 को कौशल किशोर दुबे और उनकी पत्नी कृष्णा देवी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना। कई लोगों को नामजद किया गया, जिनमें चर्चित नाम भी शामिल थे। जांच चली, लेकिन 5 फरवरी 2006 को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने का हवाला देते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई और मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया।
करीब दो दशक बाद मृतक दंपति की बेटी राधिका (पत्नी सौरभ मिश्रा) ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि घटना के समय वे और उनके भाई-बहन नाबालिग थे, इसलिए न्याय के लिए संघर्ष करने की स्थिति में नहीं थे। वयस्क होने के बाद उन्होंने पुनः जांच की मांग की।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मैनपुरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुनर्विवेचना की अनुमति दी। अदालत की यह टिप्पणी कि “अपराध कभी समाप्त नहीं होता और सत्य की खोज के लिए जांच अधिकारी स्वतंत्र है” न्यायिक संवेदनशीलता को दर्शाती है। यह संदेश भी देती है कि समय बीत जाने से न्याय की आवश्यकता समाप्त नहीं होती।
यह भी एक तथ्य है कि शुरुआती जांच के दौरान प्रभाव और दबाव जैसे सवाल उठते रहे। हालांकि उस समय की अंतिम रिपोर्ट अदालत ने स्वीकार कर ली थी, लेकिन अब पुनः जांच का अवसर इस बात की परीक्षा है कि क्या नई परिस्थितियों, तकनीकी साक्ष्यों और बदले सामाजिक वातावरण में सच्चाई सामने आ सकेगी।
आज इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, डिजिटल रिकॉर्ड, आर्थिक लेन-देन की ट्रैकिंग जैसी तकनीकें जांच एजेंसियों के पास उपलब्ध हैं। ऐसे में यदि कहीं कोई तथ्य छूटा था, तो उसके सामने आने की संभावना अधिक है। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, साक्ष्य-आधारित और कानूनी दायरे में रहे।
वर्तमान में इस प्रकरण से जुड़े एक आरोपी अनुराग दुबे उर्फ डब्बन गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल में बंद हैं। पुनर्विवेचना के आदेश के बाद बी-वारंट की प्रक्रिया और अन्य कानूनी कदम संभावित हैं। यह प्रशासनिक सक्रियता का संकेत तो है, परंतु अंतिम निर्णय न्यायालय के अधीन ही होगा।
कानून का तकाजा है कि हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिले और हर पीड़ित को न्याय की उम्मीद।
पीड़ित परिवार का यह कहना कि उन्हें अब भी खतरा महसूस होता है, समाज के सामने एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है—क्या गवाह और पीड़ित वास्तव में सुरक्षित हैं? यदि न्याय की प्रक्रिया भयमुक्त नहीं होगी, तो सत्य सामने आना कठिन होगा।
राज्य और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि पुनर्विवेचना के दौरान पीड़ित परिवार और संभावित गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
अक्सर कहा जाता है कि “जस्टिस डिलेयद इज जस्टिस देनीड ” — परंतु यह भी उतना ही सत्य है कि न्याय का अवसर मिलना, भले देर से हो, न्याय प्रणाली में विश्वास को पुनर्जीवित करता है। 21 साल बाद यह मामला फिर चर्चा में है तो इसका अर्थ है कि न्याय व्यवस्था अब भी खुली है, अंतिम नहीं।
यह पुनर्विवेचना केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि यह संदेश है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, यदि सच्चाई दबाई गई है तो उसे सामने लाने का प्रयास जारी रह सकता है।
अब निगाहें जांच एजेंसियों और न्यायालय पर हैं। क्या नए सिरे से जुटाए गए साक्ष्य न्याय की दिशा तय करेंगे? क्या पीड़ित परिवार की उम्मीद पूरी होगी?
समाज, प्रशासन और न्यायपालिका तीनों की संयुक्त जिम्मेदारी है कि यह मामला निष्पक्षता, पारदर्शिता और विधि सम्मत प्रक्रिया के साथ आगे बढ़े।
21 वर्ष पुराने इस दोहरे हत्याकांड की पुनर्विवेचना केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि न्याय के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास की परीक्षा है।

श्री महा मंगलेश्वर मंदिर के चार दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का हुआ समापन

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फर्रुखाबाद। श्री महा मंगलेश्वर नाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग धाम पर चार दिवसी वार्षिक उत्सव का सुंदरकांड एवं भंडारे के साथ विराम हो गया।
श्री महा मंगलेश्वर नाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग धाम पुराना कोठा पार्चा पर वार्षिक उत्सव चिंतामणि सुंदरकांड पाठ समिति द्वारा सुंदरकांड कापाठ किया गया। जिसमें निर्मल दीक्षित प्रशांत सिंह कमलेश दीक्षित अनूप मिश्रा नागेश अग्निहोत्री घनश्याम बाजपेई पवन गुप्ता आदि समिति केसदस्यों नेसंगीत में सुंदरकांड का पाठ किया
“कवन सो काज कठिन जग माही जो नहीं होय तात तुम पाही”
के साथ सुंदरकांड का पाठ किया गया महा आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ भंडारे का भी आयोजन किया गया भंडारा देर रात तक चलता रहा
भंडारे की व्यवस्था व्यवस्थापक योगेश मिश्रा मनोज मिश्रा,गौतम भदोरिया ,प्रमोद द्विवेदी दिनेश मिश्रा दिन्नू सौरभ भदौरियाआदि भक्तों ने सहयोग प्रदान किया।