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Tuesday, April 28, 2026
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सदर में चुनावी हलचल : सैयद शमीम अब्बास ने निर्दलीय चुनाव का किया ऐलान

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फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश की सियासत में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। फर्रुखाबाद सदर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला और दिलचस्प हो गया है, क्योंकि सैयद शमीम अब्बास ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी ताल ठोक दी है।
“ना पैसा की ताकत, ना पार्टी का दबाव सिर्फ ईमानदारी और सेवा का इरादा” जैसे सीधे और आक्रामक नारे के साथ मैदान में उतरे अब्बास खुद को पारंपरिक राजनीति के खिलाफ एक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं। उनका दावा है कि वे किसी दल या दबाव समूह के नहीं, बल्कि सीधे जनता के उम्मीदवार हैं।
सदर सीट पर अब तक मुकाबला मुख्य रूप से बड़े दलों के बीच सिमटा रहता था, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार की एंट्री ने समीकरण बिगाड़ने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सैयद शमीम अब्बास मुस्लिम, पिछड़ा और स्थानीय असंतुष्ट वोट बैंक को साधने में सफल रहे, तो वे “कटिंग फैक्टर” बन सकते हैं, जो बड़े दलों के जीत-हार का गणित बदल देगा।
घोषणाओं में लोकल मुद्दों पर फोकस, युवाओं को साधने की कोशिश
अब्बास ने अपने प्रचार में स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी है,हर गांव में साफ पानी, 24 घंटे बिजली, बेहतर सड़कें, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं उनके एजेंडे में शामिल हैं। खास बात यह है कि उनके अभियान में युवाओं और बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है, जिससे युवा मतदाताओं को सीधे टारगेट किया जा रहा है।
चुनावी पोस्टर में बूथ स्तर तक की रणनीति भी स्पष्ट दिखाई दे रही है। हर बूथ पर टीम गठन, मतदाताओं की श्रेणीकरण, व्यक्तिगत संपर्क और अंतिम 7 दिन की आक्रामक रणनीति जैसे बिंदु यह संकेत देते हैं कि यह चुनाव सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ लड़ा जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि निर्दलीय उम्मीदवार का प्रभाव दो तरह से पड़ सकता है या तो वह निर्णायक वोट काटकर किसी बड़े दल को नुकसान पहुंचाएगा, या खुद मजबूत दावेदारी पेश कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना देगा।
फर्रुखाबाद की सियासत में पहले भी निर्दलीय उम्मीदवारों ने चौंकाने वाले प्रदर्शन किए हैं, ऐसे में इस बार भी “ईमानदारी बनाम संगठन” की लड़ाई देखने को मिल सकती है।

रिश्तों का कत्ल: शादी के विवाद में बेटे ने बुजुर्ग पिता को उतारा मौत के घाट

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– पुलिस ने आरोपी को दबोचा
फर्रुखाबाद। जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली सनसनीखेज वारदात हुईं , जहां एक बेटे ने ही अपने बुजुर्ग पिता की निर्मम हत्या कर दी। पुलिस नें आरोपी को गिरफ्तार किया है।
मामला मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव अर्हा पहाड़पुर का है, जहां पारिवारिक विवाद और शादी को लेकर चल रही तनातनी ने आखिरकार खून-खराबे का रूप ले लिया।
जानकारी के मुताबिक करीब 70 वर्षीय रामसनेही पाल अपने बेटों अनिल और ओमकार के साथ घर में रहते थे। बीती रात लगभग 11 बजे घर के अंदर ही विवाद इतना बढ़ गया कि बेटों ने पिता पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोप है कि किसी भारी वस्तु से सिर पर वार कर बुजुर्ग की हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलते ही मऊदरवाजा थाना प्रभारी अजय सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर साक्ष्य जुटाए और त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़े बेटे ओमकार को हिरासत में ले लिया। फील्ड यूनिट ने मौके से अहम साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनके आधार पर आगे की जांच तेज कर दी गई है।
शादी बना विवाद की जड़, बिखरा परिवार जांच में सामने आया है कि परिवार लंबे समय से आपसी कलह से जूझ रहा था। ओमकार की शादी पहले हो चुकी थी लेकिन उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। वहीं अनिल की दो शादियां हो चुकी थीं पहली पत्नी ने आत्महत्या कर ली, जबकि दूसरी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई। इन घटनाओं के बाद परिवार में तनाव लगातार बढ़ता गया।
सूत्रों के अनुसार अनिल अपने पिता रामसनेही पर लगातार शादी कराने का दबाव बना रहा था, जबकि बुजुर्ग पिता इसके लिए तैयार नहीं थे। बताया जा रहा है कि रामसनेही का तर्क था कि घर की परिस्थितियों में बहू टिक नहीं पा रही है, इसलिए वे दोबारा शादी कराने के पक्ष में नहीं थे। यही विवाद धीरे-धीरे हिंसक रूप लेता गया।
बुजुर्ग पिता संभाल रहे थे बिखरा घर परिवार की स्थिति यह थी कि पत्नी के निधन के बाद रामसनेही ही दोनों बेटों का सहारा थे। वे खुद खाना बनाकर बेटों का पालन-पोषण कर रहे थे। लेकिन जिन बेटों को उन्होंने सहारा दिया, उन्हीं ने उनकी जिंदगी खत्म कर दी यह तथ्य पूरे इलाके में चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में पारिवारिक विवाद ही हत्या की मुख्य वजह सामने आ रही है। हिरासत में लिए गए आरोपी से पूछताछ जारी है और अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हत्या के तरीके और समय को लेकर और स्पष्टता सामने आएगी।

दर्दनाक सड़क हादसा, सीएम योगी ने जताया शोक

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– प्रशासन अलर्ट पर
– राहत-बचाव तेज
लखनऊ/लखीमपुर खीरी। मैगलगंज क्षेत्र में हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। तेज रफ्तार और लापरवाही के चलते हुए इस हादसे में कई लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर है, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए अधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। साथ ही, जिला प्रशासन को राहत कार्य में तेजी लाने और हर संभव मदद उपलब्ध कराने को कहा गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती आशंका तेज गति और यातायात नियमों की अनदेखी की बताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है।
हर साल सड़क हादसों में हजारों जानें जाने के बावजूद आखिर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या सिर्फ मुआवजा और शोक संदेश ही सिस्टम की जिम्मेदारी बनकर रह गए हैं?

सीएम योगी का बड़ा ऐलान: “इस साल 1 लाख नई भर्तियां”

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– युवाओं के लिए रोजगार का रोडमैप तैयार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत के बीच रोजगार का मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है। राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वर्ष 2026 में प्रदेश में 1 लाख से अधिक नई सरकारी भर्तियां की जाएंगी। इस घोषणा के बाद प्रदेश के युवाओं में उम्मीद की नई लहर दौड़ गई है।
सीएम योगी ने साफ कहा कि सरकार की प्राथमिकता युवाओं को रोजगार देना है और इसी दिशा में बड़े स्तर पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में पारदर्शी तरीके से लाखों युवाओं को नौकरी दी गई है और अब यह अभियान और तेज किया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ पुलिस विभाग में ही 81 हजार से अधिक भर्तियां करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें सिपाही, दरोगा और तकनीकी पद शामिल हैं। �
यानी कुल मिलाकर विभिन्न विभागों को मिलाकर 1 लाख भर्ती का लक्ष्य तय किया गया है।
सीएम ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया गया है, ताकि योग्य युवाओं को बिना किसी सिफारिश के नौकरी मिल सके। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले समय में अन्य विभागों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन में भी बड़ी संख्या में पद भरे जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था और पुलिस भर्ती को लेकर भी समीक्षा की गई। हाल ही में 60 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती पूरी हुई है, जिसे सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है।
क्या यह 1 लाख भर्ती का वादा जमीन पर उतरेगा या फिर पहले की तरह प्रक्रियाएं लंबित रह जाएंगी? क्योंकि यूपी में कई भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक और विवादों में फंसती रही हैं।

आलू किसानों पर दोहरी मार: मंदी से टूटी कमर

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– अब बिजली बिल और स्मार्ट मीटर ने बढ़ाई मुसीबत
– सीएम से कर्ज माफी और कनेक्शन कटौती पर रोक की मांग
फर्रुखाबाद/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आलू किसानों की हालत लगातार बदतर होती जा रही है। बाजार में आलू के दाम औंधे मुंह गिरने से किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही, वहीं बिजली बिलों का बोझ उनकी कमर तोड़ रहा है। इस गंभीर संकट को लेकर आलू विकास विपणन सहकारी संघ के निदेशक अशोक कटियार ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र में साफ कहा गया है कि प्रदेश का आलू किसान इस समय “आर्थिक आपदा” से गुजर रहा है। पिछले सीजन में आलू की लागत जहां प्रति कुंतल 900 से 1100 रुपये तक पहुंची, वहीं बाजार में कई जगह किसानों को 500–700 रुपये प्रति कुंतल तक ही दाम मिले। इससे किसानों पर कर्ज का दबाव तेजी से बढ़ा है।
सबसे बड़ा मुद्दा बिजली बिल और स्मार्ट मीटर को लेकर सामने आया है। आरोप है कि जिन उपभोक्ताओं के यहां जबरन स्मार्ट मीटर लगाए गए, उनके बिल असामान्य रूप से बढ़ गए हैं। कई मामलों में पहले जहां 1000–1500 रुपये मासिक बिल आता था, वह अब 3000–5000 रुपये तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीण और किसान उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है।
पत्र में यह भी उजागर किया गया है कि सरकार ने फिलहाल स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी है, लेकिन जिन उपभोक्ताओं के यहां पहले से मीटर लगाए जा चुके हैं, उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। ऐसे में मांग उठाई गई है कि प्रत्येक जिले में विशेष शिविर लगाकर उपभोक्ताओं की शिकायतों का तत्काल निस्तारण किया जाए।
मामले का दूसरा बड़ा पहलू बिजली विभाग की कार्रवाई है। भीषण गर्मी के बीच बकाया बिलों को लेकर किसानों और आम उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं। इसे “अमानवीय और किसान विरोधी कदम” बताते हुए मांग की गई है कि गर्मी के मौसम में कनेक्शन कटौती पर तत्काल रोक लगाई जाए।
मुख्य मांगों में शामिल हैं कि बकायेदार आलू किसानों के बिजली बिल माफ किए जाएं
स्मार्ट मीटर से जुड़े विवादों के समाधान के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं,
भीषण गर्मी में बिजली कनेक्शन काटने पर रोक लगे,
बिजली बिल छूट योजना को जून तक बढ़ाया जाए।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में लाखों किसान सीधे तौर पर आलू उत्पादन से जुड़े हैं, और इनमें से बड़ी संख्या इस समय कर्ज और लागत के दबाव में है। यदि जल्द राहत नहीं दी गई तो यह संकट बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
युवा वर्ग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर साफ दिख रहा है खेती से मोहभंग बढ़ रहा है और रोजगार के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी है कि क्या सरकार इस संकट को “आपदा” मानते हुए त्वरित राहत देगी या फिर किसान इसी तरह संघर्ष करते रहेंगे।

सरकारी जमीन पर कब्जे का बड़ा खेल!

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– लेखपालों द्वारा अभिलेखों में हेरफेर कर पार्क की जमीन पर नाम चढ़ाने का आरोप
– डीएम से एफआईआर की मांग
फर्रुखाबाद। सरकारी भूमि पर अभिलेखों मे हेरफेर कर कब्जे के मामले मे जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर राठौर से रामपाल यादव मंगलवार को फिर शिकायत की है। आरोप है कि पार्क व पुस्तकालय के लिए दर्ज जमीन को निजी नामों में दर्ज कराने का आरोप लगाया गया है। मामले में सीधे-सीधे तहसील कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल दागे गए हैं।
पीड़ित रामपाल जाटव निवासी अमेठी जदीद, थाना कादरीगेट ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि गाटा संख्या 374मि, रकबा 0.1300 हेक्टेयर, जो कि बाग लखौला परगना पहाड़, तहसील सदर में स्थित है और राजस्व अभिलेखों में “अंबेडकर पार्क/पुस्तकालय” के रूप में दर्ज है, उसे धोखाधड़ी और कूट रचना के जरिए निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करा दिया गया।
शिकायत में साफ कहा गया है कि कंचन त्रिपाठी पत्नी सतीश चंद्र निवासी नगला दीना व शकुंतला पत्नी रमेश चंद्र निवासी मोहल्ला मित्तूकुंचा ने मिलकर यह खेल रचा। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में फर्जी तरीके से नाम अंकित कराकर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा भी कर लिया गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत में राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत का सीधा आरोप लगाया गया है। दस्तावेजों के अनुसार, गाटा संख्या 374मि से संबंधित खतौनियों (1403-1408, 1409-1414, 1415-1420) और चकबंदी अभिलेखों (अंतर्गत गाटा 41, 45) में हेरफेर कर नाम चढ़ाने का दावा किया गया है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि शकुंतला की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके पुत्र प्रमोद कुमार शुक्ला लेखपाल द्वारा उक्त भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। वहीं, कंचन त्रिपाठी का नाम भी कथित रूप से फर्जी आधार पर दर्ज कराया गया है।
गंभीर आरोप यह भी है कि तत्कालीन लेखपाल अशोक कुमार त्रिपाठी और प्रमोद कुमार शुक्ला ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पूरे मामले को अंजाम दिया। यह पूरा मामला साजिश और संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, जिसमें सरकारी जमीन को निजी संपत्ति में बदलने का प्रयास किया गया।
प्रार्थी के अनुसार, 4 अप्रैल 2026 को तहसील दिवस में भी यह मामला उठाया गया था। उस समय राजस्व टीम गठित कर जांच के आदेश दिए गए, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। उल्टा, जांच के नाम पर मामले को दबाने की आशंका जताई जा रही है।
अब पीड़ित ने जिलाधिकारी से सीधे मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और संबंधित आरोपियों के खिलाफ थाना कादरीगेट में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।