यरूशलम: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। क्षेत्र में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। मिसाइल और ड्रोन हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच यह संघर्ष अब पंद्रहवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
शनिवार को ताजा घटनाक्रम में इराक की राजधानी बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर एक मिसाइल गिरने की खबर सामने आई। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार मिसाइल दूतावास परिसर के हेलिपैड के पास गिरी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि इस हमले को लेकर अभी तक अमेरिकी दूतावास की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
बगदाद में मौजूद अमेरिकी दूतावास को दुनिया के सबसे बड़े राजनयिक परिसरों में गिना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में इस परिसर को कई बार रॉकेट और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया जा चुका है। इन हमलों के पीछे अक्सर ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों पर आरोप लगाए जाते रहे हैं।
इसी बीच लेबनान के दक्षिणी हिस्से में इस्राइली हवाई हमले की भी खबर सामने आई है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक तटीय क्षेत्र तआमीर हरेट सैदा में हुए इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। हमले के बाद इलाके में बचाव कार्य जारी है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इससे पहले एक अन्य हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि इस्राइल के हवाई हमले में दो स्वास्थ्यकर्मियों की भी मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हुए हैं। बताया गया कि हमला एक संयुक्त मेडिकल केंद्र पर हुआ था, जिसे इस्लामिक हेल्थ अथॉरिटी और इस्लामिक मैसेज स्काउट्स मिलकर संचालित कर रहे थे।
लेबनान सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। सरकार का कहना है कि चिकित्सा सेवाओं से जुड़े लोगों को निशाना बनाना अत्यंत खतरनाक और अस्वीकार्य कदम है, क्योंकि युद्ध के समय भी स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा देना अंतरराष्ट्रीय नियमों का हिस्सा है।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। ईरान के सैन्य मुख्यालय के प्रवक्ता एब्राहीम जोल्फाघरी ने बताया कि “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4” की 46वीं लहर शुरू कर दी गई है, जिसके तहत दुश्मन के ठिकानों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं।
ईरानी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई दुश्मन ड्रोन को मार गिराया है। उनके अनुसार फिरोजाबाद और बंदर अब्बास के ऊपर दो एमक्यू-9 ड्रोन तथा तबरीज़ के आसमान में एक अन्य ड्रोन को नष्ट किया गया है।
ईरान ने यह भी दावा किया है कि अब तक कुल 112 ड्रोन और लड़ाकू विमानों को नष्ट किया जा चुका है। इनमें निगरानी ड्रोन, लड़ाकू विमान और कथित सुसाइड ड्रोन भी शामिल बताए गए हैं।
इसी दौरान फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के खार्ग द्वीप पर भी धमाकों की खबर सामने आई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार द्वीप पर एक के बाद एक कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जिसके बाद आसमान में घना धुआं उठता दिखाई दिया।
ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि हमलों के बावजूद द्वीप की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विस्फोटों के करीब एक घंटे के भीतर ही रक्षा प्रणाली फिर से पूरी तरह काम करने लगी।
खार्ग द्वीप को ईरान के तेल कारोबार की लाइफलाइन माना जाता है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात किया जाता है। इसलिए इस क्षेत्र पर हमला होने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी चिंता बढ़ा दी है।
उत्तरी इस्राइल के गलील क्षेत्र में भी रॉकेट और मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की गई है। इस्राइल की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने सीमावर्ती कस्बों के निवासियों से तुरंत सुरक्षित स्थानों और बंकरों में जाने की अपील की है।
इस्राइल की सेना ने भी पुष्टि की है कि ईरान की ओर से देश की दिशा में कई मिसाइलें दागी गई हैं। हमलों को रोकने के लिए इस्राइल की वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया गया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
उधर भारत सरकार ने भी पश्चिम एशिया में तेजी से बदलती परिस्थितियों पर पैनी नजर बनाए रखने की बात कही है। सरकार का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है, इसलिए हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।