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Monday, June 1, 2026
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यूपी में समय से पहले चुनाव की आहट?

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– जनगणना के बहाने सियासी बिसात बिछनी शुरू
– सत्ता और विपक्ष दोनों अलर्ट

शरद कटियार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक सवाल तेजी से तैर रहा है—क्या 2027 का विधानसभा चुनाव तय समय से पहले कराया जा सकता है? अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सत्ता के गलियारों से लेकर विपक्षी खेमों तक गतिविधियां जिस तेजी से बढ़ी हैं, उसने राजनीतिक पर्यवेक्षकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

कारण है आगामी जनगणना। यदि फरवरी-मार्च 2027 में जनगणना का बड़ा अभियान चलना है, तो उसी समय प्रदेश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक महायज्ञ विधानसभा चुनाव को कराना प्रशासनिक दृष्टि से आसान नहीं माना जा रहा। यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि चुनाव 2026 के अंतिम महीनों में भी कराए जा सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि चुनाव की कोई घोषणा नहीं हुई, लेकिन राजनीतिक दलों की गतिविधियां देखकर लगता है कि उन्हें किसी संकेत का इंतजार नहीं है। भाजपा बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार जिलों के दौरे, समीक्षा बैठकों और विकास परियोजनाओं के उद्घाटन में व्यस्त हैं। मंत्रियों को जिलों में भेजा जा रहा है और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी असामान्य रूप से सक्रिय दिखाई दे रही है। पीडीए का नारा हो, संगठन विस्तार हो या सरकार के खिलाफ मुद्दों की तलाश—अखिलेश यादव की टीम चुनावी मोड में नजर आ रही है। सवाल यह है कि आखिर दोनों बड़े दलों को ऐसी कौन सी आहट सुनाई दे रही है जो आम जनता को अभी सुनाई नहीं दे रही?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि दिल्ली और लखनऊ दोनों जगहों पर जनगणना, परिसीमन और भविष्य की चुनावी रणनीतियों को लेकर मंथन चल रहा है। भाजपा जानती है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले संदेश को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं सपा मानती है कि यदि उसे सत्ता में वापसी करनी है तो 2027 का इंतजार करने के बजाय अभी से मैदान में उतरना होगा।
यूपी की राजनीति में एक पुरानी कहावत है”जब नेता अचानक जनता के बीच ज्यादा दिखने लगें, तो समझिए चुनाव दूर नहीं हैं।” आज वही तस्वीर दिखाई दे रही है। मंत्री जिलों में हैं, सांसद गांवों में हैं, विधायक जनता दरबार लगा रहे हैं और विपक्ष सरकार की हर सांस पर नजर रखे हुए है।
हालांकि संवैधानिक रूप से विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराने का फैसला चुनाव आयोग और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, लेकिन राजनीति में कई बार घटनाएं घोषणा से पहले संकेतों में दिखाई देने लगती हैं। आज उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसे ही संकेत दिखाई दे रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि चुनाव कब होंगे। बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा तीसरी बार सत्ता का रिकॉर्ड बनाएगी या सपा सत्ता में वापसी का रास्ता खोज लेगी? जनगणना तो एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन उसके बहाने शुरू हुई राजनीतिक हलचल ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश का चुनावी रण अब दूर नहीं है।
यूपी में चुनाव की तारीख भले तय न हुई हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी घड़ियां चुनावी समय पर सेट कर दी हैं।

भोजपुर विधानसभा से प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह को उतारने की उठी मांग

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– जनसंपर्क और कार्यशैली से प्रभावित सभी वर्ग!
– जिले की बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने की मुहिम बन रही प्रशंसा का केंद्र

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री को आगामी विधानसभा चुनाव में भोजपुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। जनपद में हाल के दौरों और समीक्षा बैठकों के दौरान उनकी सक्रिय कार्यशैली, अधिकारियों के प्रति सख्त रुख और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की पहल से प्रभावित होकर विभिन्न वर्गों के लोगों ने यह मांग उठाई है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रभारी मंत्री के रूप में जयवीर सिंह ने जिले में विकास कार्यों, स्वास्थ्य सेवाओं, कानून-व्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं की लगातार समीक्षा की है। अधिकारियों को जवाबदेह बनाने और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देशों ने आम लोगों के बीच उनकी अलग पहचान बनाई है।

जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों का मानना है कि जयवीर सिंह ने केवल औपचारिक बैठकों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। स्वास्थ्य विभाग में हाल में हुई कार्रवाई और विभिन्न विभागों की जवाबदेही तय करने की पहल को भी उनकी सक्रिय कार्यशैली से जोड़कर देखा जा रहा है।
भोजपुर विधानसभा क्षेत्र के कई स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र को ऐसे जनप्रतिनिधि की आवश्यकता है जो सरकार और जनता के बीच मजबूत सेतु का कार्य कर सके। उनका मानना है कि जयवीर सिंह का प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हालांकि भाजपा की ओर से अभी उम्मीदवारों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में जयवीर सिंह के नाम को लेकर चर्चा लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मांग आगे भी इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले समय में भोजपुर विधानसभा की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल यह मांग जनचर्चा का विषय बनी हुई है और राजनीतिक हलकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व भविष्य में इस संबंध में क्या निर्णय लेता है।

ट्रेन की चपेट में आने से वृद्ध की मौत

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फर्रुखाबाद। कमालगंज थाना क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के किनारे एक वृद्ध का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में ट्रेन की चपेट में आने से मौत की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम भूलनपुर निवासी 60 वर्षीय राजबहादुर कटेरिया बीते दिनों अपनी बेटी के घर गए थे। परिजनों के मुताबिक, वह घर लौटते समय कमालगंज जाने की बात कहकर निकले थे। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। रविवार सुबह मेडिकल कॉलेज भोजपुर के पीछे रेलवे लाइन के किनारे एक शव पड़ा होने की सूचना रेलवे ट्रैकमैन ने ग्रामीणों को दी।

ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर मृतक की पहचान राजबहादुर कटेरिया के रूप में की और इसकी सूचना परिजनों को दी। खबर मिलते ही परिवार के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। वृद्ध की मौत की सूचना से परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों ने बताया कि राजबहादुर कुछ समय से चंडीगढ़ में नौकरी करते थे और हाल ही में गांव आए थे। घटनास्थल पर उनके सिर में गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं। पुलिस का मानना है कि संभवतः ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौत हुई है, हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
भोजपुर चौकी प्रभारी अखिलेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा भरवाया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। वृद्ध की असामयिक मौत से गांव में शोक का माहौल है।

फर्रुखाबाद में पुलिस की भारी कमी पर प्रभारी मंत्री गंभीर, डीजीपी से करेंगे बात

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लखनऊ /फर्रुखाबाद। जिले में कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के बीच पुलिस विभाग में दरोगाओं और प्रभारी निरीक्षकों की भारी कमी का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। जिले के प्रभारी एवं पर्यटन मंत्री ने इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए आश्वासन दिया है कि वह इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को अवगत कराएंगे।

सूत्रों के अनुसार जिले के कई थाने और चौकियां लंबे समय से स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। कई स्थानों पर एक ही अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था की निगरानी और अपराध नियंत्रण पर प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।

प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने समीक्षा के दौरान पुलिस बल की कमी को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि जनपद की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिले की वास्तविक स्थिति से पुलिस मुख्यालय को अवगत कराया जाएगा ताकि रिक्त पदों पर शीघ्र तैनाती हो सके।
जानकारों का कहना है कि फर्रुखाबाद जैसे बड़े जनपद में अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, वीआईपी ड्यूटी और त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल की आवश्यकता होती है। लेकिन वर्तमान में कई थानों में दरोगा और प्रभारी निरीक्षक स्तर के अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने भी पुलिस बल की संख्या बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होने से अपराधों की रोकथाम, शिकायतों के निस्तारण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रभारी मंत्री की पहल के बाद पुलिस मुख्यालय इस मामले में क्या कदम उठाता है और जिले को अतिरिक्त पुलिस बल कब तक उपलब्ध कराया जाता है।

थकी हुई राजनीति के बीच उभर रही युवा ताकत, फर्रुखाबाद में बदल रहे सियासत के समीकरण

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=नये युवा चेहरों में अभय सिंह, डॉ युवराज सिंह, रुपेश गुप्ता, साहित् कई नाम जो हो रहे जनमानस को स्वीकार
=दागी चेहरों पर खत्म हुआ भरोसा, जुमलेबाजी, झूठे वादे, फज़ऱ्ी घोषणाएं और बढ़े भ्रष्टाचार से लोग हुए परेशान
यूथ इंडिया। फर्रुखाबाद
शरद कटियार
प्रदेश की राजनीति में पिछले एक दशक के दौरान युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जबकि चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि मतदाता सूची में भी युवाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए युवा चेहरों को आगे बढ़ाना मजबूरी भी है और भविष्य की रणनीति भी। फर्रुखाबाद जनपद भी इस बदलाव से अछूता नहीं है।
लंबे समय तक जिले की राजनीति कुछ परंपरागत परिवारों और स्थापित नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही, लेकिन अब हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। जनता विकास, संवाद और सक्रियता को महत्व दे रही है। यही वजह है कि कई युवा चेहरे अपनी अलग पहचान बनाने में सफल होते नजर आ रहे हैं।
इन उभरते नामों में रुपेश गुप्ता, अभय सिंह, डॉ. युवराज सिंह और डॉ. नवल किशोर शाक्य, डा० सुबोध यादव प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। इन नेताओं ने केवल राजनीतिक बयानबाजी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक गतिविधियों, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता के जरिए अपनी पहचान बनाई है।
फर्रुखाबाद की लगभग 19 लाख की आबादी में युवाओं का बड़ा वर्ग रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर नई सोच चाहता है। यही वर्ग अब पारंपरिक राजनीति से इतर ऐसे नेताओं को तलाश रहा है जो सीधे संवाद करें और जमीन पर दिखाई दें।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रुपेश गुप्ता सामाजिक कार्यक्रमों और युवाओं के बीच अपनी सक्रियता के कारण पहचान बना रहे हैं। वहीं अभय सिंह भोजपुर विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जनसंपर्क के माध्यम से अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहे हैं। डॉ. युवराज सिंह स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं, और अमृतपुर विधानसभा में अपनी पहचान को लोकप्रिय कर रहे हैं,जबकि सपा के डॉ. नवल किशोर शाक्य शिक्षित और बौद्धिक वर्ग के बीच अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुए हैं।और पहला लोकसभा चुनाव बहुत कम वोट से हार खुद को जिले की राजनीति में स्थापित कर चुके हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि जनता अब केवल चुनावी वादों से प्रभावित नहीं होती। सोशल मीडिया के दौर में हर गतिविधि पर नजर रहती है और युवाओं की अपेक्षाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक हैं। ऐसे में वही नेता आगे बढ़ पाएगा जो जनता के बीच निरंतर मौजूद रहेगा।
फर्रुखाबाद की राजनीति में यह परिवर्तन केवल चेहरों का बदलाव नहीं है, बल्कि सोच के बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है। जिले की युवा पीढ़ी अब सत्ता के गलियारों में अपनी भागीदारी चाहती है और इसी कारण नए नेतृत्व को समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।
मोनिका यादव जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पल्लव सोमवंशी पहले ही राजेपुर ब्लॉक प्रमुख, और राहुल राजपूत की पत्नी संकिसा नगर पंचायत की अध्यक्ष पद पर आसीन हैं,इसी क्रम में कायमगंज नगर पालिका अध्यक्ष पद पर डॉक्टर शरद गंगवार को भी उनके साथ सुग्रीव छवि को लेकर चुन रखा है।

ध्वस्त व्यवस्था पर एक्शन में आई सरकार सीएमओ अवनीन्द्र कुमार हटे

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– प्रभारी मंत्री की नाराजगी के बाद देर रात शासन का एक्शन
– खुलेआम डकैती डाल रहे एसीएमओ डॉ रंजन गौतम एक दिन पूर्व हटाए जा चुके
– प्रभारी मंत्री 13 जून फिर करेंगे फर्रुखाबाद में समीक्षा
– अब प्रशासनिक कार्यों और गौ सेवा के मामलों पर होगी रडार
– थानो और क़ानून व्यवस्था की समीक्षा भी होगी प्रमुख

लखनऊ /फर्रुखाबाद। जिले के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से चल रही शिकायतों, विवादों और प्रशासनिक असंतोष के बीच आखिरकार शासन ने बड़ा फैसला लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अवनीन्द्र कुमार का तबादला कर दिया है। देर रात जारी आदेश में उन्हें संयुक्त निदेशक, प्रशिक्षण महानिदेशालय लखनऊ भेज दिया गया, जबकि जालौन के सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय को फर्रुखाबाद की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। खुलेआम अमानक अस्पतालों के जरिए डकैती डाल रहे एसीएमओ डॉ रंजन गौतम को एक दिन पूर्व ही हटाया जा चुका है जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह 13 जून को फिर करेंगे जनपद की समीक्षा इस बार उनके निशाने पर प्रशासनिक कार्य और गोवंश आश्रय स्थल के साथ थानो और कानून व्यवस्था की समीक्षा प्रमुख होगी।
स्वास्थ्य विभाग में हुए इस बदलाव को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से अधिक प्रभारी एवं पर्यटन मंत्री की लगातार नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मंत्री जयवीर सिंह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, कथित अनियमितताओं और कुछ निजी अस्पतालों के संचालन को लेकर लगातार असंतुष्ट थे।
इससे पहले भी प्रभारी मंत्री के हस्तक्षेप के बाद एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम से कई चार्ज छीने गए थे । बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर मंत्री ने शासन स्तर पर कई बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालिया तबादले को उसी क्रम की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति, चिकित्सकों की उपलब्धता, दवा वितरण व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सीएमओ का तबादला स्वास्थ्य महकमे में बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अब नए सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को पटरी पर लाना, स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को मजबूत करना और जनता के बीच विभाग की साख बहाल करना होगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी नए नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर उत्सुक हैं।
उधर प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने संकेत दिए हैं कि स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा है कि वह 13 जून को पुनः फर्रुखाबाद पहुंचकर विभिन्न विभागों की समीक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जिले में सुशासन की नीति धरातल पर दिखाई दे। मंत्री के इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य प्रशासनिक इकाइयों में भी हलचल तेज हो गई है।
अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह तबादला केवल शुरुआत है या आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल इतना तय है कि देर रात हुए इस फैसले ने जिले के स्वास्थ्य महकमे में नई बहस छेड़ दी है। बता दें कि सरकार जनपद में बिगड़ी व्यवस्था और प्रशाशनिक कार्यशैली से ख़ुश नहीं है,पुलिस की आम छवि से भी योगी सरकार का चेहरा ख़राब हुआ जिसकी चर्चा भी शासन में खूब है।