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Monday, April 20, 2026
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भीषण बस हादसा: खाई में गिरी बस, 20 तक पहुंची मौतों की संख्या, कई घायल

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जम्मू

उधमपुर जिला के रामनगर क्षेत्र के कागोट गांव के पास सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक यात्री बस अनियंत्रित होकर पहाड़ी रास्ते से गहरी खाई में जा गिरी, जिसमें अब तक 15 से 20 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के समय बस एक दूरदराज गांव से उधमपुर की ओर जा रही थी और एक खतरनाक मोड़ पर चालक संतुलन खो बैठा, जिससे यह भयावह दुर्घटना हो गई।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया। पुलिस, प्रशासनिक टीमों और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को खाई से निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है। चिकित्सकों की टीम लगातार घायलों का उपचार कर रही है और गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर करने की प्रक्रिया भी जारी है।
हादसे की सूचना मिलते ही केंद्र सरकार के मंत्री जितेंद्र सिंह ने जिला प्रशासन से संपर्क कर हालात की जानकारी ली और गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट कर उच्च चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है और राहत कार्यों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक आशंका के अनुसार, पहाड़ी मार्ग पर तेज गति या चालक की लापरवाही हादसे की वजह हो सकती है, हालांकि वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और मृतकों के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।

तेजतर्रार आईएएस आशुतोष निरंजन को यूपी परिवहन विभाग की कमान

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 रिकॉर्ड, प्रोजेक्ट और सख्त प्रशासनिक छवि के दम पर मिली बड़ी जिम्मेदारी
 रह चुके हैं यूपी के सूचना निदेशक
 18 महीने में बना दिया था आगरा लखनऊ एक्सप्रेस हाईवे
 अब परिवहन विभाग में चलेगा क्लींन -अप मिशन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल के बीच एक अहम और रणनीतिक निर्णय लेते हुए तेजतर्रार आईएएस अधिकारी आशुतोष निरंजन को परिवहन विभाग का आयुक्त नियुक्त किया है। प्रदेश में सड़क सुरक्षा, अवैध वसूली, ओवरलोडिंग और परिवहन तंत्र की पारदर्शिता जैसे गंभीर मुद्दों के बीच यह नियुक्ति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिससे विभाग में व्यापक सुधार की उम्मीदें जगी हैं।
2010 बैच के आईएएस अधिकारी आशुतोष निरंजन अपनी सख्त प्रशासनिक शैली, तेज निर्णय क्षमता और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने यूपीडा में तैनाती के दौरान महज 18 महीनों में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा कराने में अहम भूमिका निभाई, जिसे प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इस परियोजना ने न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत किया बल्कि निवेश और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी खोले।
उनका प्रशासनिक अनुभव भी बेहद व्यापक रहा है। वे उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक के रूप में सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में सफल रहे। इसके अलावा गोंडा, बस्ती और देवरिया जैसे संवेदनशील जिलों में जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाते हुए प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व दिया। गोंडा में कलेक्टर के साथ कॉफी जैसी पहल के जरिए उन्होंने प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर नवाचार की मिसाल पेश की।
केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के निजी सचिव के रूप में कार्य करते हुए प्रशासनिक अनुभव को और धार दी। उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई है और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में 11वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था।
सरकार की प्राथमिकता अब परिवहन विभाग में डिजिटल मॉनिटरिंग को मजबूत करना, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और सड़क सुरक्षा के स्तर में सुधार लाना है। प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है और विभाग पर अवैध वसूली के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसे में आशुतोष निरंजन की नियुक्ति को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अपने पिछले कार्यकाल की तरह आशुतोष निरंजन परिवहन विभाग में कितनी तेजी से सुधार लागू कर पाते हैं और क्या वे विभाग को पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बना पाने में सफल होंगे।

प्रचंड गर्मी का कहर, 11 जिलों में हीटवेव अलर्ट जारी

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लखनऊ
प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। दिन के साथ-साथ रात में भी गर्म हवाओं की तपिश लोगों को परेशान कर रही है। मौसम में नमी की कमी और तेज धूप के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जिससे आम लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि फिलहाल अगले एक सप्ताह तक प्रदेश को गर्मी से कोई राहत मिलने की संभावना नहीं है। खासकर बुंदेलखंड और दक्षिणी यूपी के 11 जिलों में हीटवेव यानी लू चलने की आशंका जताई गई है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर सहित छह जिलों में उष्ण रात्रि की स्थिति रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि रात के समय भी तापमान सामान्य से काफी अधिक रहेगा और लोगों को गर्मी से आराम नहीं मिल पाएगा।

राज्य के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। प्रयागराज, वाराणसी, सुल्तानपुर, झांसी और बांदा जैसे शहरों में पारा लगातार बढ़ रहा है, जिससे दिन में लू के थपेड़े लोगों को झुलसा रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, शुष्क पछुआ हवाएं इस गर्मी को और अधिक खतरनाक बना रही हैं।

भीषण गर्मी का सबसे अधिक असर किसानों, मजदूरों और रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले लोगों पर पड़ रहा है। खेतों में काम करना मुश्किल हो गया है, वहीं शहरों में भी सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिल रहा है। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी की चेतावनी दी है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे दिन के सबसे गर्म समय में बाहर न निकलें, पर्याप्त पानी पिएं और लू से बचाव के उपाय अपनाएं, ताकि इस भीषण गर्मी के प्रभाव से सुरक्षित रह सकें।

प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: बिना फार्मर रजिस्ट्री के भी बेच सकेंगे गेहूं

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लखनऊ
प्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों को एक बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब किसान बिना फार्मर रजिस्ट्री के भी सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं आसानी से बेच सकेंगे। यह फैसला खासतौर पर उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है जो तकनीकी या दस्तावेजी प्रक्रियाओं के कारण पंजीकरण नहीं करा पाए थे।

सरकार के अनुसार, यह कदम किसानों को होने वाली लगातार परेशानियों और प्रक्रिया में आ रही देरी को देखते हुए उठाया गया है। कई किसानों को रजिस्ट्री न होने के कारण फसल बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनकी आय पर भी असर पड़ रहा था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी स्थिति में उन्हें असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य के सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कराएं। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी किसान को क्रय केंद्र पर अनावश्यक परेशानी न हो।

सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसानों से जुड़े सभी काम समय पर और बिना बाधा के पूरे किए जाएं।

इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इससे न केवल खरीद प्रक्रिया तेज होगी बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य भी समय पर मिल सकेगा।

महिला की कुल्हाड़ी से हत्या, शक्की पति ने ली जान, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया

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झांसी
मोंठ क्षेत्र के चेलरा गांव की रहने वाली धनदेवी (27) की उसके पति द्वारा कुल्हाड़ी से हत्या कर दिए जाने की दर्दनाक घटना सामने आई है। यह वारदात मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के चंदेरा थाना क्षेत्र के चंदेरा गांव में हुई, जिससे दोनों राज्यों की सीमावर्ती इलाकों में सनसनी फैल गई है।

घटना के बाद गंभीर रूप से घायल धनदेवी को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। हालांकि, इलाज के दौरान रविवार सुबह उसकी मौत हो गई, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पति हरिओम विश्वकर्मा शक्की स्वभाव का था और उसे अपनी पत्नी पर हमेशा शक रहता था। बताया जा रहा है कि एक बार उसने पत्नी को किसी अन्य व्यक्ति से बात करते देख लिया था, जिसके बाद से दोनों के बीच लगातार विवाद बढ़ता गया।

परिजनों के अनुसार, दोनों ने करीब दस साल पहले घर से भागकर प्रेम विवाह किया था और उनके दो बच्चे भी हैं। कुछ समय तक सब सामान्य रहा, लेकिन बाद में रिश्तों में तनाव बढ़ता गया और दोनों अलग-अलग जगह रहने लगे थे।

घटना वाले दिन हरिओम ने अपने बेटे की बीमारी का बहाना बनाकर धनदेवी को टीकमगढ़ बुलाया था। रात में खाने के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि उसने गुस्से में कुल्हाड़ी से पत्नी की गर्दन पर कई वार कर दिए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी पति के साथ उसके पिता को भी हिरासत में ले लिया। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है, ताकि वारदात के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

इस घटना ने एक बार फिर घरेलू हिंसा और रिश्तों में बढ़ते शक की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

वेलनेस सिटी योजना में बड़ा खुलासा, अतीक अहमद की जमीन समेत बेनामी संपत्तियों की जांच तेज

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लखनऊ
सुल्तानपुर रोड स्थित एलडीए की महत्वाकांक्षी वेलनेस सिटी आवासीय योजना को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। एलडीए की गोपनीय जांच में पता चला है कि योजना क्षेत्र और उसके आसपास दिवंगत माफिया अतीक अहमद की 50 बीघा से अधिक जमीन मौजूद है। इस खुलासे के बाद प्रशासन ने इन जमीनों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जांच में यह भी सामने आया है कि सिर्फ अतीक अहमद ही नहीं, बल्कि करीब 20 से 25 अन्य प्रभावशाली लोगों की भी इस क्षेत्र में बेनामी जमीनें हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 200 बीघा बताया जा रहा है। एलडीए अब इन सभी संपत्तियों की गहन जांच कर रहा है और उनके स्वामित्व की सच्चाई खंगाली जा रही है।

वेलनेस सिटी योजना करीब 1198 एकड़ में लैंडपूलिंग मॉडल के तहत विकसित की जा रही है, लेकिन पिछले कई महीनों में एलडीए को अपेक्षित जमीन नहीं मिल पाई है। इसी वजह से परियोजना की गति धीमी पड़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, जमीनों पर जटिल स्वामित्व और बेनामी लेनदेन इस देरी का प्रमुख कारण है।

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कई रियल एस्टेट कंपनियों ने पहले ही इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जमीन खरीद ली थी और कॉलोनियों के लिए लेआउट भी पास करा लिए हैं। इससे सरकारी योजना के लिए जमीन एकत्र करने में और अधिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।

वेलनेस सिटी की लोकेशन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह गोमती नगर विस्तार के पास स्थित है और शहर के भीतर ही एक प्रीमियम आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना है। इसी कारण यहां जमीन की कीमतें भी अधिक रहने का अनुमान है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और खरीद-फरोख्त तेज रही है।

एलडीए अधिकारियों के अनुसार, अब इन सभी संदिग्ध जमीनों की खसरा और खतौनी की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि असली मालिक कौन हैं और कहीं डमी खरीदारों के जरिए बेनामी संपत्ति तो नहीं बनाई गई है। जिला प्रशासन को भी इस मामले में जांच के लिए पत्र भेजा गया है।

एलडीए उपाध्यक्ष ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी और अवैध या बेनामी संपत्तियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि वेलनेस सिटी योजना को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जाए और किसी भी तरह के अवैध कब्जे या प्रभावशाली हस्तक्षेप को रोका जाए।