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Saturday, July 4, 2026
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जाली नोटों का तस्कर पहुंचा जेल, UP ATS ने पश्चिम बंगाल से दबोचा

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने भारतीय जाली मुद्रा तस्करी (Indian counterfeit currency smuggling) के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी को एक दिन पूर्व पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान जाकिर (पश्चिम बंगाल) के रूप में हुई है। यूपी एटीएस को सूचना मिली थी कि पश्चिम बंगाल के कुछ तस्कर बांग्लादेश में छपी भारतीय जाली मुद्रा को अवैध रूप से भारत में लाकर उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के जिलों में सप्लाई कर रहे हैं।

इस सूचना के आधार पर एटीएस ने इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक सर्विलांस के माध्यम से जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि मोहम्मद सुलेमान अंसारी, निवासी वैशाली (बिहार), भारतीय जाली मुद्रा की तस्करी में सक्रिय है और जाली नोट लेकर उत्तर प्रदेश आने वाला है। इसके बाद एटीएस ने कार्रवाई करते हुए सुलेमान अंसारी और उसके सहयोगी इदरीश को वाराणसी से दो लाख रुपये की जाली भारतीय मुद्रा के साथ गिरफ्तार किया था।

पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें बांग्लादेश में छपी जाली भारतीय मुद्रा मालदा निवासी जाकिर उपलब्ध कराता था जाकिर तक यह नकली नोट बांग्लादेश निवासी रफीकुल पहुंचाता था, जिसके बाद वह अपने सहयोगियों के माध्यम से इन्हें देश के विभिन्न राज्यों में खपवाता था। यूपी एटीएस की तरफ से जाकिर को गिरफ्तार कर वाराणसी लाया गया है, जहां उससे पूछताछ और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में मोहम्मद सुलेमान अंसारी और इदरीश के खिलाफ थाना सारनाथ, वाराणसी में 19 नवंबर 2024 को मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था। जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद फरार चल रहे जाकिर पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

एनआरसी से तभी डिस्चार्ज हों बच्चे जब हीमोग्लोबिन 11 से अधिक हो: डीएम डॉ. अंकुर लाठर

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कुपोषण मुक्त फर्रुखाबाद के लिए सभी विभाग मिलकर करें काम, जिला पोषण समिति व संभव अभियान की समीक्षा

फर्रुखाबाद। कुपोषण के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की अध्यक्षता में शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पोषण समिति एवं संभव अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लोहिया अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती अति कुपोषित बच्चों का हीमोग्लोबिन स्तर 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक होने के बाद ही उन्हें डिस्चार्ज किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि एनआरसी में भर्ती सभी अति कुपोषित बच्चों का समुचित स्वास्थ्य परीक्षण और समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात चिकित्सा अधीक्षकों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के कार्यों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंच सकें।
उन्होंने कहा कि कुपोषण मुक्त फर्रुखाबाद का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, पंचायतीराज तथा अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करेंगे। अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की नियमित पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार और पोषण सेवाएं समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को शासन की सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ दिलाया जाए।
संभव अभियान की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फील्ड स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना सभी अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

बैठक में पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें टीकाकरण, पोषण ट्रैकर, बच्चों का वजन एवं लंबाई मापन, अनुपूरक पोषाहार वितरण, आंगनबाड़ी केंद्रों की सेवाएं तथा स्वास्थ्य विभाग एवं बाल विकास विभाग के बीच समन्वय जैसे बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय, क्षेत्राधिकारी अजय वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुशील कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

यूपी टीईटी 2026: अंतिम दिन डीएम और एसपी ने किया परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण, निष्पक्ष परीक्षा के दिए निर्देश

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फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) 2026 के अंतिम दिन जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर एवं पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने संयुक्त रूप से कमालगंज स्थित श्री फिरोज गांधी जनता इंटर कॉलेज और आर.पी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय का औचक निरीक्षण कर परीक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सभी सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टैटिक मजिस्ट्रेट एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि परीक्षा केंद्रों पर लगातार निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों की पहचान, प्रवेश प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों के संचालन और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। यदि कहीं भी नकल, अनियमितता या संदिग्ध गतिविधि मिले तो तत्काल कार्रवाई करते हुए कंट्रोल रूम को सूचना दी जाए।
सबसे पहले जिलाधिकारी ने श्री फिरोज गांधी जनता इंटर कॉलेज, कमालगंज का निरीक्षण किया। केंद्र व्यवस्थापक ने बताया कि यहां 384 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 327 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। निरीक्षण के दौरान सभी कक्षों में परीक्षा शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित होती मिली।
इसके बाद अधिकारियों ने आर.पी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कमालगंज का निरीक्षण किया। यहां 480 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 400 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। इस केंद्र पर भी परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित पाई गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप शिक्षक पात्रता परीक्षा को पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी गंभीरता से निर्वहन करें, ताकि परीक्षा की शुचिता और विश्वसनीयता बनी रहे।

सीएम योगी की मौजूदगी में 8 जुलाई को होगा बड़ा समझौता

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– शिक्षकों को मिलेगी कैशलेस इलाज और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा की नई सौगात

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। 8 जुलाई को वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का भी औपचारिक शुभारंभ होगा।

यह कार्यक्रम वाराणसी के हस्तकला संकुल (ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर) में आयोजित किया जाएगा। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य बेसिक शिक्षा विभाग के स्थायी एवं संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत करना है।
राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ-साथ प्रदेश के सभी जिलों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला मुख्यालयों तथा उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में तहसील स्तर पर कार्यक्रम होंगे, जहां शिक्षकों को एमओयू और मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना की जानकारी दी जाएगी।
महानिदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे भारतीय स्टेट बैंक के स्थानीय अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। साथ ही एमओयू के उद्देश्य, बैंकिंग सुविधाओं और शिक्षकों को मिलने वाले लाभों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक शिक्षक इस योजना से लाभान्वित हो सके।
प्रदेश सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना और एसबीआई के सहयोग से होने वाला यह समझौता शिक्षकों और विभागीय कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा, वित्तीय सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगा। इसे शिक्षक हितों को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

केजीएमयू में दलित-पिछड़ा वर्ग से कुलपति नियुक्त करने की मांग

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– सांसद लालजी वर्मा ने राज्यपाल को लिखा पत्र

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के सांसद ने के अगले कुलपति की नियुक्ति दलित या पिछड़ा वर्ग से किए जाने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने राज्यपाल को संबोधित एक पत्र भेजकर विश्वविद्यालय में आरक्षण व्यवस्था और शिक्षकीय पदों पर भर्ती से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं।

पत्र में सांसद ने कहा है कि केजीएमयू के इतिहास में अब तक दलित या पिछड़ा वर्ग से किसी व्यक्ति को कुलपति नियुक्त नहीं किया गया है। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व की भावना को ध्यान में रखते हुए इस बार कुलपति की नियुक्ति अनुसूचित जाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से की जानी चाहिए।

सांसद ने विश्वविद्यालय में आरक्षित शिक्षकीय पदों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षित वर्ग के पदों को “नोट फाउंड सूटेबल ” बताकर लंबे समय से रिक्त रखा जा रहा है। पत्र के अनुसार, 108 आरक्षित शिक्षकीय पदों के सापेक्ष केवल 30 नियुक्तियां की गईं, जबकि 78 आरक्षित पद खाली छोड़ दिए गए।

इसके अलावा सांसद ने दावा किया कि कार्य परिषद से अनुमोदित करीब 100 बैकलॉग शिक्षकीय पदों का विज्ञापन अब तक जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे आरक्षित वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिल पा रहा है और विश्वविद्यालय में आरक्षण नीति का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

लालजी वर्मा ने राज्यपाल से मांग की है कि केजीएमयू में आरक्षण संबंधी प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, रिक्त आरक्षित पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए तथा अगले कुलपति की नियुक्ति में सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जाए।

विधायक डॉ. सुरभि ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तहत सिवारा मार्ग पर दो रोडवेज बसों को दिखाई हरी झंडी

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ग्रामीण क्षेत्र के यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ, कचहरी, अस्पताल और बाजार तक पहुंच होगी आसान

फर्रुखाबाद। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कायमगंज की विधायक डॉ. सुरभि ने शनिवार को रोडवेज बस अड्डे से सिवारा मार्ग के लिए दो नई रोडवेज बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस नई सेवा के शुरू होने से सिवारा, कम्पिल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों लोगों को प्रतिदिन आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी।

शुभारंभ के अवसर पर विधायक डॉ. सुरभि ने कहा कि सिवारा क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग थी कि उन्हें सीधे फर्रुखाबाद मुख्यालय तक रोडवेज बस सेवा उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से अब यह मांग पूरी हो गई है। इससे विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों, मरीजों तथा न्यायालय में कार्य से आने-जाने वाले लोगों को काफी राहत मिलेगी।

 

उन्होंने बताया कि पहली बस प्रतिदिन सुबह सिवारा से रवाना होकर लगभग 10 बजे तक फर्रुखाबाद रोडवेज बस अड्डे पहुंचेगी। इससे कचहरी में तारीख पर आने वाले वादकारियों, अस्पताल जाने वाले मरीजों और अन्य आवश्यक कार्यों से आने वाले लोगों को समय पर शहर पहुंचने में सुविधा होगी। वहीं दूसरी बस सुबह फर्रुखाबाद से चलकर लगभग 10 बजे सिवारा पहुंचेगी। इसके अलावा दोनों बसें प्रतिदिन सायंकाल 4 बजे अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना होंगी, जिससे यात्रियों को आने-जाने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान विधायक ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य सड़क नेटवर्क और सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से दूरदराज के गांवों तक रोडवेज बसों का संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

इस अवसर पर सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ), सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (रोडवेज) सहित परिवहन विभाग के अधिकारी एवं रोडवेज कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि जिले में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के अंतर्गत कुल 11 ग्रामीण मार्गों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। चरणबद्ध तरीके से सभी निर्धारित मार्गों पर बस सेवाएं प्रारंभ की जाएंगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित, सुलभ और नियमित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हो सकेगा।

नई बस सेवा शुरू होने से क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब उन्हें निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और कम खर्च में समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना संभव होगा।