इस्लामाबाद: पाकिस्तान (Pakistan) के फेडरल बोर्ड ऑफ़ रेवेन्यू ने एक टैक्स फ्रेमवर्क शुरू किया है, जिसके तहत पाकिस्तान के दर्शकों से कमाई करने वाले नॉन-रेजिडेंट YouTubers पर हर 1,000 व्यूज़ पर 195 रुपये का फिक्स्ड टैक्स लगाया जाएगा। यह टैक्स उन क्रिएटर्स पर लागू होता है जो सालाना 50,000 से ज़्यादा या हर तीन महीने में 12,250 पाकिस्तानी यूज़र्स से जुड़ते हैं; ऐसे क्रिएटर्स को हर तीन महीने में एडवांस टैक्स फाइल करना ज़रूरी होगा।
रिपोर्ट्स में इसे एक ‘दंडात्मक कदम’ बताया गया है, जो जगह, कंटेंट के प्रकार और विज्ञापनदाताओं की मांग के आधार पर अलग-अलग होने वाली कमाई की दरों को नज़रअंदाज़ करता है।
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यह टैक्स दर्शकों की भागीदारी को टैक्सेबल आय मानता है, भले ही असल कमाई कितनी भी हो, इसके चलते कमाई पर प्रभावी टैक्स दर 16% से 66% तक हो सकती है। इस टैक्स को लागू करने की व्यावहारिकता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि इसके लिए YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ तालमेल बिठाना ज़रूरी होगा, जिससे अधिकार क्षेत्र और डेटा तक पहुँच से जुड़े मुद्दे खड़े हो सकते हैं।
जानकारों ने इसकी तुलना दूसरे क्षेत्रों में लगने वाले एकमुश्त शुल्कों से की है, और उनका तर्क है कि यह निष्पक्षता और स्थिरता के बजाय तुरंत कमाई को ज़्यादा अहमियत देता है, जबकि पारंपरिक कम-टैक्स वाले क्षेत्रों को अछूता छोड़ देता है।
YouTube से होने वाली कमाई CPM दरों पर निर्भर करती है, जो दर्शकों की जगह और कंटेंट की श्रेणी के हिसाब से काफी अलग-अलग होती हैं। भारत में क्रिएटर्स को आमतौर पर हर 1,000 व्यूज़ पर ₹50 से ₹200 के बीच कमाई होती है; वहीं अमेरिका या ब्रिटेन जैसे बाज़ारों में ये दरें ज़्यादा होती हैं, और फाइनेंस या टेक्नोलॉजी जैसे खास विषयों पर ज़्यादा कमाई होती है। चूंकि YouTube विज्ञापन से होने वाली कमाई का 45% हिस्सा अपने पास रख लेता है, इसलिए जगह के आधार पर अंतर न करने वाला यह टैक्स उन क्रिएटर्स पर ज़्यादा असर डाल सकता है जिनकी दर्शकों से होने वाली कमाई, टैक्स की रकम से भी कम है।
विभिन्न स्थितियों के विश्लेषण से पता चलता है कि जिन क्रिएटर्स के वीडियो पाकिस्तान में ज़्यादा देखे जाते हैं, लेकिन जिनकी CPM दरें कम हैं, उनके लिए यह टैक्स उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खा सकता है, ऐसे में उन्हें अपने दर्शकों का दायरा बढ़ाने या अपने कंटेंट के विषय में बदलाव करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। जिन क्रिएटर्स के कंटेंट की CPM दरें ऊँची हैं, वे शायद इस टैक्स का बोझ आसानी से उठा लें, लेकिन उन्हें भी टैक्स से जुड़े नियमों का पालन करने में आने वाले खर्च और दोहरे टैक्स के जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। नीति-निर्माताओं पर इस टैक्स फ्रेमवर्क में सुधार करने का दबाव पड़ सकता है, ताकि क्रिएटर्स पूरी तरह से पाकिस्तान के दर्शकों से दूर न हो जाएं।








