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Friday, February 20, 2026
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बांदा की अदालत ने 50 से अधिक नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करने वाले दंपत्ति को सुनाई मौत की सजा

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बांदा: बांदा (Banda) की एक विशेष POCSO अदालत (Special POCSO Court) ने शुक्रवार को एक पति-पत्नी को 50 से अधिक नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करने और डार्क वेब पर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को अश्लील वीडियो बेचने के आरोप में मौत की सजा सुनाई। चित्रकूट में तैनात सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर रामभवन (55) और उनकी पत्नी दुर्गावती (50) को 18 फरवरी को दोषी पाया गया था। फैसला सुनाते हुए पीओसीएसओ अदालत के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने दंपत्ति को फांसी की सजा देने का आदेश दिया।

तीन मोबाइल नंबरों से जुड़े बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार के बारे में इंटरपोल के माध्यम से मिली सूचना के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 31 अक्टूबर, 2020 को मामला दर्ज किया था। रामभवन को 18 नवंबर, 2020 को गिरफ्तार किया गया था और दुर्गावती को बाद में इस मामले में संलिप्तता और गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

जांच में पता चला कि दंपति ने 5 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों को पैसे, खिलौने, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का लालच देकर बहला-फुसलाया। आरोप है कि उन्होंने लैपटॉप कैमरे से यौन शोषण के वीडियो रिकॉर्ड किए और डार्क वेब के माध्यम से पैसे लेकर यौन शोषण करने वाले नेटवर्क पर अपलोड किए। जांच के दौरान जब्त की गई पेन ड्राइव में बांदा, चित्रकूट और आसपास के जिलों के नाबालिग पीड़ितों के 34 वीडियो और 679 तस्वीरें मिलीं।

सीबीआई ने गिरफ्तारी के 88 दिनों के भीतर चिकित्सा रिपोर्ट, पीड़ितों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर 700 पृष्ठों की आरोपपत्र दाखिल की। ​​मुकदमे के दौरान कुल 74 गवाहों से पूछताछ की गई। अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट को प्रत्येक पीड़ित को 10 लाख रुपये का मुआवजा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। अभियोजन पक्ष के वकीलों के अनुसार, अवैध वीडियो चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान सहित 47 देशों के खरीदारों को बेचे गए। पीड़ित बच्चों का नई दिल्ली के एम्स में इलाज किया गया।

28 फरवरी तक इग्नू में प्रवेश का मौका, तिलक महाविद्यालय केंद्र पर प्रक्रिया तेज

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औरैया: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के जनवरी 2026 सत्र में प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर जनपद में उत्साह बढ़ गया है। तिलक महाविद्यालय (Tilak College) में संचालित इग्नू अध्ययन केंद्र पर अब प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ाकर 28 फरवरी कर दी गई है, जिससे इच्छुक विद्यार्थियों को आवेदन का अतिरिक्त अवसर मिल गया है।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. रवि कुमार ने बताया कि इग्नू का पाठ्यक्रम न केवल औपचारिक शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थी नौकरी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं, जो वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता है।

समन्वयक उपनिदेशक डॉ. अनामिका सिन्हा ने जानकारी दी कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के उन विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत शुल्क छूट प्रदान की जाएगी, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 2.50 लाख रुपये से कम है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

अध्ययन केंद्र पर हिंदी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास जैसे पारंपरिक विषयों के अलावा विभिन्न आनर्स पाठ्यक्रम एवं रोजगारपरक डिप्लोमा कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। इग्नू समन्वयक डॉ. राजेश कुमार ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे समय रहते अध्ययन केंद्र पर संपर्क कर 28 फरवरी तक प्रवेश सुनिश्चित करें और अपने करियर को नई दिशा दें।

25 हजार के इनामी प्रधान आरेन्द्र यादव अलीगढ़ से गिरफ्तार, कासगंज पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दबोचा गया

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कासगंज: पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। लंबे समय से फरार चल रहे 25,000 रुपये के इनामी बदमाश आरेन्द्र यादव को पुलिस ने पड़ोसी जनपद अलीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी कासगंज जिले के थाना सोरों क्षेत्र के गांव कुमरौआ का प्रधान है और उस पर कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है।

पुलिस अधीक्षक कासगंज अंकिता शर्मा के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार के नेतृत्व में सर्विलांस और एसओजी टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। खुफिया सूचना के आधार पर टीम ने अलीगढ़ जिले के थाना दादों क्षेत्र के गांव औंदा खेड़ा में दबिश दी, जहां से आरोपी को गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि आरोपी काफी समय से फरार चल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए ठिकाने बदल रहा था।

पुलिस के अनुसार आरेन्द्र यादव पर एसपी द्वारा 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। वह कासगंज जिले में दर्ज कई आपराधिक मामलों में वांछित था। उसके खिलाफ मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा डालना, जानलेवा हमला और अन्य गंभीर धाराओं में कुल नौ मुकदमे थाना सोरों और कासगंज कोतवाली में दर्ज हैं। आरोपी का आपराधिक इतिहास लंबा और विवादित रहा है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ था।

गिरफ्तारी के दौरान कुछ ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, जिससे मौके पर हल्का विवाद भी हुआ। हालांकि पुलिस टीम ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए आरोपी को सुरक्षित हिरासत में ले लिया। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी तरह के अपराध या अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि जनपद में अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और फरार चल रहे अन्य वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए भी विशेष टीमें सक्रिय हैं। इस गिरफ्तारी को पुलिस की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

अवैध हथियार रखने के मामले में दोषी करार, ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत न्यायालय ने लगाया अर्थदंड

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कासगंज। अवैध हथियार रखने के एक पुराने मामले में कासगंज न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त राजकुमार को दोषी ठहराया है। अदालत ने अभियुक्त पर 2,000 रुपये का अर्थदंड लगाया है तथा अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में 10 दिन के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतने का आदेश दिया है। यह निर्णय उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के अंतर्गत प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप आया है।

यह मामला थाना कासगंज में पंजीकृत मु0अ0सं0 369/2005, धारा 25 आयुध अधिनियम से संबंधित है। अभियुक्त राजकुमार पुत्र सुम्मेर सिंह निवासी ग्राम क्यामपुर बहेड़िया, जनपद कासगंज के खिलाफ अवैध हथियार रखने का आरोप सिद्ध हुआ। न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियुक्त को दोषी मानते हुए दंडित किया।

अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की गई, जिसमें कासगंज पुलिस की मॉनिटरिंग सेल की सक्रिय भूमिका रही। पुलिस विभाग द्वारा लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और अपराधियों को सजा दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत इस मामले को प्राथमिकता पर लिया गया था। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने 20 फरवरी 2026 को यह निर्णय सुनाया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जनपद में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। पुराने मामलों में भी त्वरित सुनवाई सुनिश्चित कर दोषियों को दंडित कराया जा रहा है, जिससे कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल रही है। न्यायालय के इस फैसले को कानून के प्रति सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अवैध हथियार रखने जैसे अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बोर्ड परीक्षा के दौरान पेपर लीक की अफवाह फैलाकर ठगी का प्रयास, मुकदमा दर्ज

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औरैया। बोर्ड परीक्षाओं के बीच सोशल मीडिया पर हिंदी विषय का पेपर लीक होने की अफवाह फैलाकर छात्रों को ठगने की कोशिश का मामला सामने आया है। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने इसे छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर आर्थिक लाभ उठाने की साजिश बताया है।

जानकारी के अनुसार, किसी व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर एक फर्जी आईडी बनाकर यह दावा किया गया कि उसके पास हिंदी विषय का बोर्ड परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध है। आरोपी ने कथित तौर पर छात्रों से संपर्क कर पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर धनराशि की मांग की। जैसे ही यह सूचना शिक्षा विभाग तक पहुंची, तत्काल इसकी सत्यता की जांच कराई गई। जांच में पेपर लीक की खबर पूरी तरह निराधार पाई गई।

जिला विद्यालय निरीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को लिखित तहरीर दी, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने साइबर सेल की मदद से सोशल मीडिया आईडी और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अफवाह फैलाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें और परीक्षा से संबंधित जानकारी केवल अधिकृत स्रोतों से ही प्राप्त करें। बोर्ड परीक्षाएं शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इस घटना को लेकर शिक्षा विभाग और पुलिस दोनों ने स्पष्ट किया है कि पेपर लीक जैसी अफवाहें फैलाकर ठगी करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एक साथ उठीं माता-पिता और पुत्र की तीन अर्थियां, पूरे शहर की आंखें हुईं नम

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इटावा। शहर के मोतीगंज मोहल्ले में शुक्रवार की सुबह ऐसा हृदय विदारक दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया। एक ही परिवार के माता-पिता और उनके जवान पुत्र की अर्थियां जब एक साथ घर से उठीं तो पूरा इलाका शोक में डूब गया। गली-मोहल्लों में सन्नाटा पसरा रहा और परिजनों की चीख-पुकार से वातावरण गमगीन हो उठा। जिसने भी यह मंजर देखा, उसकी आंखें नम हो गईं और कदम स्वतः ही अंतिम यात्रा की ओर बढ़ चले।

शव यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, रिश्तेदार, व्यापारी वर्ग और सामाजिक संगठन के लोग शामिल हुए। परिवार की बेटियां मोहिनी और इति अपने माता-पिता और भाई की अर्थियों के पीछे लगभग एक किलोमीटर तक पैदल चलती रहीं। दोनों बहनों की आंखों से बहते आंसू और उनका विलाप देख उपस्थित लोगों का कलेजा फट पड़ा। महिलाओं ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन उनका दर्द शब्दों से परे था। पूरे मोतीगंज क्षेत्र में दिनभर शोक का माहौल बना रहा और कई लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर संवेदना व्यक्त की।

शव यात्रा सबसे पहले उस स्थान पर पहुंची, जहां कारोबारी राजीव उर्फ कल्लन द्वारा मंदिर का निर्माण कार्य कराया जा रहा था। वहां श्रद्धांजलि अर्पित की गई और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इसके बाद अंतिम यात्रा मोक्ष धाम के लिए रवाना हुई। तीनों पार्थिव शरीरों को वाहनों के माध्यम से बकेवर-भरथना रोड स्थित ओम श्री पागल बाबा गंगासागर धाम के पंचतत्व विलयन स्थल ले जाया गया। वहां वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।

माता-पिता की चिता को उनके बड़े पुत्र सूर्य मोहन ने मुखाग्नि दी। वहीं पुत्र शिवम की चिता को उनके चचेरे भाई उज्जवल गुप्ता उर्फ राजा ने मुखाग्नि दी। जब एक साथ तीन चिताएं प्रज्वलित हुईं तो वहां उपस्थित जनसमूह की आंखें भर आईं। कई लोग फूट-फूटकर रो पड़े। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि लोग देर तक स्तब्ध खड़े रहे।

अंतिम संस्कार में इटावा शहर के अलावा भरथना, बकेवर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। शोकसभा में ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और परिजनों को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई।
इस त्रासदी ने न केवल एक परिवार को बल्कि पूरे शहर को गहरे आघात में डाल दिया है। मोतीगंज की गलियों में शुक्रवार का दिन हमेशा के लिए एक दर्दनाक स्मृति बनकर रह गया, जिसे याद कर लोगों की आंखें आज भी नम हो जाती हैं।