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Saturday, April 4, 2026
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मौन कमजोरी नहीं धैर्य, जो सीमा पार होते परिणाम में बदलता

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शरद कटियार
आज के तेज़ और प्रतिक्रियात्मक दौर में “मौन” को अक्सर गलत अर्थों में लिया जाता है। जो व्यक्ति कम बोलता है, हर विवाद में शामिल नहीं होता या हर उकसावे पर प्रतिक्रिया नहीं देता, उसे कई बार लोग कमजोर समझ बैठते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि मौन कमजोरी नहीं, बल्कि एक गहरी समझ, आत्मनियंत्रण और धैर्य का प्रतीक होता है।
मौन वह अवस्था है, जहाँ व्यक्ति बाहरी शोर से ऊपर उठकर अपने भीतर की शक्ति को महसूस करता है। यह वह शक्ति है जो हर परिस्थिति को समझने, परखने और सही समय का इंतज़ार करने की क्षमता देती है। जो व्यक्ति हर बात पर प्रतिक्रिया देता है, वह अपने भावनाओं का दास बन जाता है, जबकि जो मौन रहकर परिस्थितियों को देखता है, वह अपने विवेक का स्वामी होता है।
धैर्य, मौन का ही विस्तार है। यह वह गुण है जो इंसान को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी टूटने नहीं देता। जब कोई व्यक्ति अन्याय सहते हुए भी तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता, तो वह हार नहीं मान रहा होता, बल्कि वह समय को अपना साथी बना रहा होता है। वह जानता है कि हर चीज़ का एक सही समय होता है और जब वह समय आता है, तो परिस्थितियाँ स्वयं बदल जाती हैं।
समाज में अनेक उदाहरण मिलते हैं, जहाँ लोगों ने वर्षों तक अन्याय सहा, लेकिन अंततः न्याय ने अपना रास्ता बनाया। यह इस बात का प्रमाण है कि समय कभी भी अन्याय को स्थायी नहीं रहने देता। हर गलत कार्य, हर अन्याय, समय के लेखे में दर्ज होता रहता है। यह एक अदृश्य प्रक्रिया है, लेकिन इसका प्रभाव बेहद शक्तिशाली होता है।
जब न्याय आता है, तो वह शोर नहीं करता। वह कोई चेतावनी नहीं देता, बल्कि सीधे परिणाम के रूप में सामने आता है। उस समय शब्दों की आवश्यकता नहीं रहती, क्योंकि परिणाम स्वयं सबसे बड़ा उत्तर बन जाते हैं। यही कारण है कि कहा जाता है—“धैर्य का फल देर से मिलता है, लेकिन जब मिलता है तो न्यायपूर्ण और स्थायी होता है।”
हालाँकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अन्याय को हमेशा चुपचाप सहता रहे। मौन और सहनशीलता का मतलब कायरता नहीं है। बल्कि यह समझदारी है कि कब बोलना है और कब शांत रहना है। सही समय पर, सही तरीके से आवाज़ उठाना ही सच्चा साहस है। लेकिन हर समय प्रतिक्रिया देना बुद्धिमानी नहीं, बल्कि जल्दबाज़ी होती है।
आज समाज में बढ़ती अधीरता और त्वरित प्रतिक्रियाओं के कारण रिश्ते टूट रहे हैं, विवाद बढ़ रहे हैं और मानसिक अशांति फैल रही है। ऐसे समय में मौन, धैर्य और न्याय जैसे मूल्यों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है। ये तीनों ही जीवन को संतुलित, शांत और सार्थक बनाते हैं।
मौन हमें सोचने की शक्ति देता है,
धैर्य हमें सहने की ताकत देता है,
और न्याय हमें सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
जब ये तीनों एक साथ जीवन में आते हैं, तो व्यक्ति न केवल मजबूत बनता है, बल्कि समाज में भी एक सकारात्मक बदलाव का कारण बनता है।
अंततः, यह समझना बेहद आवश्यक है कि मौन हमेशा कमजोरी नहीं होता। कई बार यह आने वाले बड़े परिवर्तन की भूमिका होता है। जब धैर्य अपनी सीमा पार करता है, तो शब्दों की नहीं, बल्कि परिणामों की भाषा शुरू होती है—और वह भाषा सबसे प्रभावशाली होती है।
इसलिए जीवन में हमेशा न्याय के साथ खड़े रहें, धैर्य को अपना हथियार बनाएं और मौन की शक्ति को समझें। क्योंकि यही वह रास्ता है, जो व्यक्ति को सच्ची सफलता, सम्मान और आत्मिक शांति की ओर ले जाता है।

नौकरीपेशा महिलाएं दोहरी जिम्मेदारियों के साथ जीवन की दौड़

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डॉ. विजय गर्ग
आज के आधुनिक समाज में नौकरीपेशा महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। वे न केवल घर का रखरखाव करती हैं, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत परिवार बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। लेकिन इस योगदान के साथ उन्हें दोहरी जिम्मेदारियों का बोझ भी उठाना पड़ता है। एक तरफ कार्यालय की ड्यूटी और दूसरी तरफ घर की देखभाल।

नौकरीपेशा महिला की सुबह ज्यादातर दूसरों से पहले शुरू होती है। घर के सभी काम, बच्चों की देखभाल, खाना बनाना और फिर समय पर कार्यालय पहुंचना यह सब एक दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है। ऑफिस में भी उन्हें अपना काम पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से करना पड़ता है। दिन भर की थकान के बाद भी वे घर आकर दोबारा घरेलू कार्यों में शामिल हो जाती हैं।

यह दोहरी जिम्मेदारी कभी-कभी महिलाओं के लिए मानसिक और शारीरिक दबाव का कारण बनती है। समय की कमी, अपने लिए समय न मिलना और सामाजिक अपेक्षाओं का बोझ उनके जीवन को चुनौतीपूर्ण बना देता है। फिर भी, वे हर कठिनाई का सामना अपनी हिम्मत और समर्पण से करते हैं।

समाज में अभी भी यह धारणा पूरी तरह से नहीं बदली है कि घरेलू काम केवल महिला की जिम्मेदारी है। यदि परिवार के अन्य सदस्य भी घरेलू कार्यों में भाग लेते हैं, तो नौकरीपेशा महिलाओं का जीवन काफी आसान हो सकता है। साथ ही, कार्यस्थल पर भी उनके लिए सुविधाएं और लचीले समय की व्यवस्था होनी चाहिए।

आज के समय में महिला सिर्फ घर की देखभाल तक ही सीमित नहीं रही। वह आसमान की ऊंचाइयों को छू रही है। चाहे वह विज्ञान, शिक्षा, बैंकिंग या राजनीति का क्षेत्र हो। लेकिन जब एक महिला घर से बाहर काम करने जाती है, तो उसकी जिम्मेदारियां कम होने के बजाय दोगुनी हो जाती हैं।

घर और कार्यालय के बीच संतुलन: एक नौकरीपेशा महिला के लिए दिन सूर्योदय से पहले शुरू होता है। रसोई का काम, बच्चों को तैयार करने और बुजुर्गों की देखभाल करने के बाद वह अपने कार्यालय के लिए रवाना होती है। कार्यालय में वह अपनी पूरी मेहनत और योग्यता के साथ काम करती है, लेकिन शाम को घर लौटने पर ही वह फिर से ‘गृहिणी’ की भूमिका में आ जाती है।
मानसिक और शारीरिक बोझ दोहरी भूमिका निभाते हुए महिलाएं अक्सर ‘सुपरवुमन” बनने की कोशिश करती हैं। इस दौड़ में वे अपने स्वास्थ्य और आराम को पीछे छोड़ देती हैं। थकान: पूरे दिन काम करने के बाद भी रात में घर के कामों की चिंता करना मानसिक थकान का कारण बनता है। अपराध बोध: कभी-कभी काम की व्यस्तता के कारण वे बच्चों को पूरा समय नहीं दे पाते, जिससे उन्हें अंदर से दोषी महसूस होने लगता है।
सामाजिक चुनौतियां हमारा समाज अभी भी पूरी तरह से मानसिक रूप से विकसित नहीं हुआ है। आज भी यह अपेक्षा की जाती है कि चाहे महिला कितनी भी बड़ी अधिकारी क्यों न हो, घर का सारा काम उसकी जिम्मेदारी होती है। कार्यस्थल पर भी कभी-कभी महिलाओं को पूर्वाग्रह या कम समझा जाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।

अंत में यह कहा जा सकता है कि नौकरीपेशा महिलाएं हमारे समाज की रीढ़ हैं। वे अपने घर और काम दोनों को अच्छी तरह से संभालती हैं। उनकी कुशलता, उत्साह और समर्पण हमें सिखाता है कि किसी भी कठिनाई को इरादे के बल से जीया जा सकता है। समाज का कर्तव्य है कि वह उनका सम्मान करे और उन्हें समान अधिकार और सुविधाएं प्रदान करे।
डॉ. विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब

तेज आंधी से नवाबगंज में बिजली व्यवस्था ठप, घंटों रही आपूर्ति बाधित

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नवाबगंज क्षेत्र में बीती रात आई तेज आंधी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया, खासकर बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। नवाबगंज विद्युत उपकेंद्र से जुड़े तीन प्रमुख फीडरों पर घंटों तक बिजली गुल रही, जिससे लोगों को रात भर परेशानी का सामना करना पड़ा।

अठसेनी ग्रामीण फीडर रात करीब 2 बजे बंद हो गया था, जिसे सुबह 7 बजे बहाल किया जा सका। वहीं, जगदीशपुर ग्रामीण फीडर रात 12 बजे से बंद रहा और सुबह करीब 8 बजे जाकर चालू हो पाया। लंबे समय तक बिजली न रहने से लोगों को गर्मी और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।

बिजली बाधित होने का मुख्य कारण तेज आंधी के चलते पेड़ों की डालियों का बिजली लाइनों पर गिरना रहा। गांव त्यौरी के पास लाइन पर गिरी डाली को काटकर हटाया गया। नवाबगंज नगर के बाईपास मार्ग पर जम्फर टूट गया था, जबकि नगला दमू के पास भी पेड़ों की डालियों के कारण आपूर्ति प्रभावित रही।

सिरमौरा ग्रामीण फीडर पर स्थिति और गंभीर रही, जहां रात 1 बजे तार टूट गया था और सुबह 10 बजे तक भी आपूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी। बिजली घर के पास टूटे तार को जोड़ने का कार्य जारी रहा। इसके अलावा, गांव वेग के पास भी एक पेड़ लाइन पर गिर गया, जिसे हटाने में समय लगा।

सुबह होते ही लाइनमैन मंजेश कुमार, वीरसिंह और हकूम सिंह ने क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर खराबियों का पता लगाया और मरम्मत कार्य शुरू किया। उनके प्रयासों से धीरे-धीरे बिजली आपूर्ति बहाल की जा सकी, जिससे लोगों को राहत मिली।

तेज आंधी में पेड़ गिरने से परिवार दबा, तीनों घायल

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नवाबगंज क्षेत्र में शुक्रवार देर रात आई तेज आंधी ने एक परिवार पर भारी संकट ला दिया। रात करीब 11:30 बजे अचानक मौसम खराब हुआ और तेज हवाओं के चलते एक विशाल पीपल का पेड़ सलेमपुर निवासी राज कुमार के घर पर गिर गया। घटना इतनी अचानक हुई कि परिवार के तीनों सदस्य—राज कुमार, उनकी पत्नी काजल और पुत्री सृष्टि—मलबे के नीचे दब गए।

पेड़ गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने बिना देर किए बचाव कार्य शुरू किया और सभासद ललित कुमार श्रीवास्तव को भी सूचना दी। सभी के संयुक्त प्रयास से मलबे में दबे तीनों लोगों को बाहर निकाला गया।

घटना में राज कुमार और उनकी बेटी सृष्टि को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है। काजल को भी चोटें आई हैं, हालांकि उनकी स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है।

सभासद ललित श्रीवास्तव ने बताया कि राज कुमार टीन शेड के सहारे अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। इस हादसे में न केवल उनका घर क्षतिग्रस्त हुआ है, बल्कि घरेलू सामान भी पूरी तरह बर्बाद हो गया है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत और सहानुभूति का माहौल है।

रात्रि जनजागरण में सपा ने भरी हुंकार, कई नेताओं ने थामा पार्टी का दामन

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फर्रुखाबाद। समाजवादी पार्टी द्वारा आयोजित रात्रि जन जागरण कार्यक्रम शुक्रवार को भोजपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मैदा श्यामपुर में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी देखने को मिली, जिससे आगामी चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म होता नजर आया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र यादव एडवोकेट एवं युवजनसभा के प्रदेश सचिव प्रवेश कटियार शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता गिरेंद्र सिंह जाटव ने की।
अपने संबोधन में जिला उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र यादव एडवोकेट ने कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि सभी वर्ग एक साथ आते हैं तो वर्ष 2027 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनना तय है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनने पर गांव की सभी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। साथ ही उन्होंने पूर्व सपा सरकार की उपलब्धियों और आगामी चुनाव के लिए घोषित योजनाओं को विस्तार से बताया।
युवजनसभा प्रदेश सचिव प्रवेश कटियार ने अपने संबोधन में कहा कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग यदि एकजुट हो जाए तो कोई भी ताकत उन्हें सत्ता में आने से नहीं रोक सकती। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और घर-घर जाकर पार्टी की नीतियों को पहुंचाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान कई लोगों ने अन्य दलों को छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इनमें दरियागंज निवासी नन्हे, महमदपुर निवासी मिट्टी लाल, मदापुर निवासी अहलकर सिंह, मैदा श्यामपुर निवासी नरेंद्र सिंह गौतम एवं गिरेंद्र सिंह जाटव शामिल रहे। सभी नवागंतुकों का स्वागत पुष्पेंद्र यादव एडवोकेट ने माला पहनाकर किया।
इस अवसर पर विनोद कुमार वाल्मीकि ने डॉ. अंबेडकर एवं अखिलेश यादव पर आधारित गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में जोश भर दिया। वहीं विशाल राजपूत और स्वदेश यादव ने भी अपने विचार रखते हुए सपा सरकार की नीतियों की सराहना की और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
कार्यक्रम में सचिन कुमार, अमन पाल, रामकिशन, नन्हे मिश्री बाबा, रिंकू, प्रतीक, होरीलाल, लाल, शिवम, राजू, रमेश सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में गीत-संगीत और भक्ति गीतों की भी प्रस्तुति दी गई, जिससे माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।
कार्यक्रम का संचालन रजत क्रांतिकारी ने किया।

राजधानी में बड़ी साजिश नाकाम, आईएसआई से जुड़े 4 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

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लखनऊ। राजधानी में एक बड़ी आतंकी साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया। खुफिया इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े बताए जा रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साकिब, लोकेश, विकास और अरबाब के रूप में हुई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, ये सभी पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे और ऑनलाइन माध्यम से फंडिंग प्राप्त कर रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों की योजना रेलवे के सिग्नल बॉक्स को निशाना बनाकर बड़े स्तर पर रेल यातायात को बाधित करने की थी। इसके साथ ही एलपीजी सिलेंडर टैंकर में विस्फोट कर भारी जनहानि करने की भी साजिश रची गई थी। समय रहते इनकी गिरफ्तारी से एक बड़े हादसे को टाल दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण स्थानों और नेताओं की रेकी के वीडियो बरामद हुए हैं, जिससे उनकी मंशा और भी गंभीर मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां अब इन वीडियोज और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि गिरफ्तार चारों में से दो आरोपी मेरठ और दो गाजियाबाद के निवासी हैं। फिलहाल सभी से पूछताछ जारी है और उनके नेटवर्क को खंगालने का काम तेजी से किया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की इस कार्रवाई से राजधानी में एक बड़ी आतंकी घटना को टाल दिया गया है, वहीं पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया गया है।