– स्टेज पर गिरे हालत गंभीर, आरोपी फरार
कायमगंज/फर्रुखाबाद। शादियों में दिखावे की संस्कृति ने एक बार फिर खून-खराबे का रूप ले लिया। कोतवाली कायमगंज क्षेत्र के परमानंद की बगीची (मैरिज होम) में चल रहे विवाह समारोह के दौरान हर्ष फायरिंग ने दुल्हन पक्ष के परिवार को दहला दिया। फायरिंग में दुल्हन के जीजा गौरव सक्सेना को गोली लग गई, जिसके बाद वह लहूलुहान होकर स्टेज पर ही गिर पड़े। मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।
घटना 24 अप्रैल की रात जय सक्सेना के विवाह समारोह के दौरान हुई, जो मोहल्ला जवाहरगंज निवासी प्रदीप सक्सेना के पुत्र बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जयमाल कार्यक्रम के दौरान स्टेज से करीब 50 मीटर दूर बैठे लोगों के बीच अचानक गोली चली। उसी दौरान चली गोली सीधे गौरव सक्सेना (निवासी बाजार कला, शमशाबाद) को जा लगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जयमाल स्थल के पास कुछ लोग बैठे थे, जिनमें एक स्थानीय नेता के साथ आए बाउंसर भी शामिल बताए जा रहे हैं। फायरिंग किसने की, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन भीड़ का फायदा उठाकर आरोपी मौके से फरार हो गया।
गोली लगते ही गौरव सक्सेना गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। परिजन और मौजूद लोग उन्हें तत्काल फर्रुखाबाद के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार शुक्ला और कस्बा चौकी इंचार्ज अंकुर भट्टी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मैरिज होम में मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और हर पहलू पर जांच की जा रही है।
शादियों में हर्ष फायरिंग पर पहले से प्रतिबंध होने के बावजूद इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। सवाल यह है कि आखिर पुलिस और प्रशासन की सख्ती जमीन पर क्यों नहीं दिखती? क्या रसूखदारों की मौजूदगी में नियमों को नजरअंदाज किया जाता है?
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आएगी, लेकिन एक बात साफ है—एक खुशियों का माहौल चंद सेकंड में मातम में बदल गया।
मैरिज होम में हर्ष फायरिंग का खूनी खेल दुल्हन के जीजा को लगी गोली
“रैलियों का जनसैलाब अब ईवीएम में बंद”पहले चरण ने बदली चुनावी दिशा : शाह
– की दूसरे चरण में निर्णायक वोटिंग की अपील
नई दिल्ली। पहले चरण के मतदान के बाद सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है और इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अन्य नेताओं की रैलियों व रोड शो को जो जबरदस्त समर्थन मिला, वह अब वोटिंग मशीनों में कैद हो चुका है। यह बयान केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि चुनावी माहौल को प्रभावित करने की रणनीतिक कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
अमित शाह ने उस प्रमुख आशंका का भी जिक्र किया जो चुनाव से पहले लगातार उठ रही थी क्या रैलियों में दिखने वाला जनसमर्थन वास्तव में मतदान केंद्रों तक पहुंचेगा? उन्होंने कहा कि पहले चरण की भारी वोटिंग ने इन सभी संदेहों को खत्म कर दिया है। उनके अनुसार, मतदाताओं ने न केवल उत्साह के साथ भागीदारी की, बल्कि यह संकेत भी दे दिया कि वे निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बयान एक मनोवैज्ञानिक संदेश भी है, जो दूसरे चरण के मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से दिया गया है। “जनसमर्थन ईवीएम में बंद हो गया” जैसी पंक्ति चुनावी नैरेटिव को मजबूत करने और अपने समर्थकों में आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास मानी जा रही है।
अमित शाह ने दूसरे चरण के मतदाताओं से सीधे अपील करते हुए कहा कि अब उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। उन्होंने इसे “परिवर्तन का दौर” बताते हुए कहा कि यदि जनता इसी उत्साह के साथ मतदान करती रही, तो चुनावी परिणाम भी उसी दिशा में जाएंगे जिसकी झलक पहले चरण में दिखाई दे चुकी है।
इस बयान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। पहला सत्ताधारी दल अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि शेष चरणों में वोटिंग प्रतिशत और बढ़े। दूसरा यह संदेश अपने कोर वोट बैंक को सक्रिय रखने और विपक्षी मतदाताओं के मनोबल को प्रभावित करने का भी हिस्सा हो सकता है।
यूथ इंडिया की गहन पड़ताल:
देश के चुनावों में पिछले कुछ वर्षों में एक नया ट्रेंड उभरा है रैलियों की भीड़ और वास्तविक वोटिंग प्रतिशत के बीच तुलना। कई बार बड़ी रैलियां वोट में तब्दील नहीं हो पातीं, जबकि शांत मतदान भी सत्ता परिवर्तन का कारण बन जाता है। ऐसे में अमित शाह का यह बयान सीधे इसी बहस को संबोधित करता दिख रहा है।
पहले चरण में उच्च मतदान प्रतिशत ने यह जरूर संकेत दिया है कि मतदाता इस बार अधिक सक्रिय है। युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है, जो किसी भी चुनाव का परिणाम बदलने में अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, यह तय करना अभी जल्दबाजी होगी कि यह मतदान किसके पक्ष में जाएगा।
रामलला दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ‘विशिष्ट दर्शन’ खत्म
– स्लॉट फुल एक पास पर संख्या भी घटी
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए अपनी वेबसाइट से ‘विशिष्ट दर्शन’ का विकल्प हटा दिया है। अब श्रद्धालुओं के लिए केवल ‘सुगम’ और ‘सामान्य’ दर्शन के विकल्प ही उपलब्ध रहेंगे। इस फैसले के साथ ही दर्शन की पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित और भीड़ प्रबंधन के अनुरूप ढालने की कोशिश की गई है।
नई व्यवस्था के तहत सुगम दर्शन में श्रद्धालु रामलला, राम परिवार और परिसर के 6 प्रमुख मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे, जबकि सामान्य दर्शन में रामलला और राम परिवार के साथ अन्य प्रमुख स्थल शेषावतार मंदिर, सप्त मंदिर और कुबेर टीला को भी शामिल किया गया है। ट्रस्ट ने एक और अहम बदलाव करते हुए एक पास पर श्रद्धालुओं की संख्या 8 से घटाकर 5 कर दी है, जिससे भीड़ नियंत्रण को और सख्त किया जा सके।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते 8 मई तक सुगम दर्शन के सभी स्लॉट पहले ही फुल हो चुके हैं, जबकि सामान्य दर्शन के स्लॉट भी पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं। इससे साफ है कि अयोध्या में दर्शन के लिए अभूतपूर्व भीड़ उमड़ रही है और ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम पर भारी दबाव है।
ट्रस्ट के इस फैसले को भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था सुधार के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन “विशिष्ट दर्शन” हटाने से उन श्रद्धालुओं के बीच नाराजगी भी देखी जा रही है जो विशेष व्यवस्था के तहत त्वरित दर्शन चाहते थे।
अयोध्या में रिकॉर्ड स्तर की भीड़ ने प्रशासन और ट्रस्ट दोनों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ व्यवस्था को सुचारु रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ श्रद्धालुओं की बढ़ती अपेक्षाएं भी हैं। “विशिष्ट दर्शन” हटाना समानता की दिशा में कदम माना जा सकता है, लेकिन इससे भीड़ का दबाव और बढ़ने की आशंका भी है।
मिलावटी तेल का काला खेल बेनकाब 14 फर्मों पर बैन
– 210 सैंपल फेल खाद्य तेल में लेड जैसी खतरनाक मिलावट का खुलासा
लखनऊ। मिलावटी तेल के संगठित नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए 14 फर्मों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि खाद्य तेल में न सिर्फ गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन किया जा रहा था, बल्कि कई सैंपलों में लेड (सीसा) जैसे खतरनाक तत्व भी पाए गए, जो सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं।
खाद्य विभाग द्वारा लिए गए 210 नमूनों की जांच में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार कई सैंपल “असुरक्षित” श्रेणी में पाए गए, जिनमें तेल में पोषण मानकों के विपरीत विटामिन की मात्रा बेहद कम थी, जबकि हानिकारक तत्व अधिक मात्रा में मिले। यह संकेत देता है कि बड़े स्तर पर मिलावट कर बाजार में सप्लाई की जा रही थी।
कार्रवाई के दायरे में आई प्रमुख फर्मों में मंटोरा ऑयल प्रोडक्शन (कानपुर देहात), हिंद वेज ऑयल, संकट मोचन इंटरप्राइजेज, भीम श्री प्रोडक्ट (कानपुर), एनआर उद्योग (कानपुर), कटारिया एडिबल्स, वैभव एडिबल्स, आगरा ऑयल, एनएम ऑयल, जीएस एग्रो, जेपी एग्रो ऑयल और केएल वेजिटेबल ऑयल जैसी इकाइयां शामिल हैं, जिन पर भंडारण और बिक्री दोनों पर रोक लगा दी गई है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने कानपुर, कानपुर देहात, हापुड़ और मेरठ समेत कई जिलों में बड़े पैमाने पर छापेमारी की, जबकि लखनऊ और आगरा में भी संदिग्ध यूनिट्स पर कार्रवाई की गई। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिला है कि यह नेटवर्क कई जिलों में फैला हुआ था और लंबे समय से मिलावटी तेल बाजार में खपाया जा रहा था।
यह मामला सिर्फ मिलावट का नहीं, बल्कि “साइलेंट हेल्थ क्राइसिस” का संकेत है। लेड जैसे तत्व शरीर में जमा होकर लंबे समय में गंभीर बीमारियों जैसे किडनी डैमेज, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और बच्चों के मानसिक विकास पर असर का कारण बन सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े स्तर पर मिलावट का कारोबार आखिर कब से चल रहा था और निगरानी तंत्र अब तक क्या कर रहा था?
कठोर संदेश या औपचारिक कार्रवाई?
सरकार की यह कार्रवाई बड़ी जरूर है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या दोषियों पर आपराधिक मुकदमे और स्थायी बंदी जैसी सख्त कार्रवाई होती है या फिर मामला कुछ समय बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
फिलहाल साफ है प्रदेश में खाने के तेल तक पर भरोसा करना मुश्किल होता जा रहा है, और यह स्थिति सीधे आम जनता की सेहत से खिलवाड़ है।
पश्चिम बंगाल में रिकॉर्डतोड़ मतदान: 92.88% वोटिंग ने बदली सियासी धारा, यह सत्ता परिवर्तन का संकेत?
शरद कटियार
लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में इस बार पश्चिम बंगाल ने ऐसा आंकड़ा पेश किया है जिसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पहले चरण में 92.88 प्रतिशत मतदान सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि जनता के मूड का मजबूत संकेत माना जा रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार इस चरण में करीब 3 करोड़ 34 लाख 40 हजार मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि डाक और सर्विस वोटर्स का डेटा अभी शामिल होना बाकी है। अंतिम आंकड़े 4 मई को जारी किए जाएंगे।
यह असाधारण मतदान प्रतिशत कई सवालों और संभावनाओं को जन्म दे रहा है। आमतौर पर इतना अधिक मतदान तब देखने को मिलता है जब जनता के भीतर बदलाव की तीव्र इच्छा होती है या फिर मौजूदा सत्ता के पक्ष या विपक्ष में मजबूत ध्रुवीकरण होता है। बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में यह आंकड़ा महज चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक तापमान का आईना बन गया है।
ग्राउंड रिपोर्ट्स बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। महिलाओं और युवा मतदाताओं की भागीदारी खास तौर पर उल्लेखनीय रही। कई बूथों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो शाम तक बनी रहीं। यह साफ संकेत देता है कि इस बार मतदाता केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका में हैं।
हालांकि, इतना बड़ा मतदान प्रतिशत हमेशा एकतरफा संदेश नहीं देता। यह सत्ता के समर्थन में भी हो सकता है और उसके खिलाफ भी। लेकिन यह तय है कि मतदाता इस बार खामोश नहीं है। वह अपने अधिकार को लेकर सजग है और परिणामों को प्रभावित करने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतरा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 90 प्रतिशत से ऊपर का मतदान प्रतिशत आमतौर पर त्रिकोणीय या कड़े मुकाबले की ओर इशारा करता है, जहां हर वोट की कीमत बढ़ जाती है। ऐसे में छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े परिणाम तय कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल का यह मतदान प्रतिशत भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश और भी महत्वपूर्ण है। जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं है, वह जवाबदेही चाहती है। युवाओं की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि आने वाला समय नीतियों और प्रदर्शन आधारित राजनीति का होगा।
अब नजर 4 मई पर टिकी है, जब अंतिम आंकड़े सामने आएंगे और इसके बाद चुनावी नतीजे यह तय करेंगे कि यह रिकॉर्डतोड़ मतदान बदलाव की आंधी है या मौजूदा सत्ता के प्रति विश्वास की मुहर।
चलती डीसीएम बनी आग का गोला: हाईवे पर मची अफरा-तफरी
– चालक ने कूदकर बचाई जान
कानपुर देहात। कानपुर-झांसी हाईवे पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब तेज रफ्तार चल रही एक डीसीएम में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते वाहन आग का गोला बन गया और हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना भोगनीपुर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक चालक ने समय रहते स्थिति भांप ली और चलती गाड़ी से कूदकर अपनी जान बचाई। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी डीसीएम को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग मौके पर पहुंचा और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और ट्रैफिक को सुचारु कराया।
प्रारंभिक आशंका है कि आग शॉर्ट सर्किट या इंजन में तकनीकी खराबी के कारण लगी हो सकती है, हालांकि वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।








