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Friday, May 22, 2026
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रायबरेली में बदमाश बेखौफ, मामूली बात को लेकर दुकानदार की डंडों से पिटाई

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रायबरेली: यूपी के रायबरेली (Raebareli) जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र में खंड विकास कार्यालय स्थित तिराहे पर मामूली बात को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस दौरान एक दुकानदार (shopkeeper) की डंडों से बेरहमी से पिटाई की गई। मारपीट का यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बता दें कि ये घटना हरचंदपुर थाना क्षेत्र के खंड विकास कार्यालय के पास तिराहे पर हुई, किसी मामूली बात को लेकर दो पक्षों में विवाद शुरू हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ लोग दुकान में घुसकर दुकानदार को डंडों से पीट रहे हैं।

इतना ही नहीं इस दौरान ईंट और डंडों का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लिया है और उसके आधार पर मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही जा रही है।

 

5 साल बाद मिला न्याय, अपहरण कर बच्चे की हत्या करने वाले दोषियों को उम्रकैद की सजा

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जौनपुर: अपर सत्र न्यायाधीश सुरेन्द्र प्रताप यादव की अदालत ने शाहगंज थाना क्षेत्र में 5 वर्ष पूर्व 7 लाख रुपए की मांग को लेकर 6 वर्षीय बच्चे की हत्या (murdering) करने एवं साक्ष्य छिपाने के दो दोषी को कोर्ट ने आजीवन कारावास (life imprisonment) एवं प्रत्येक को सवा दो लाख रुपए जुर्माना की सजा सुनाया। जुर्माना की आधी धनराशि वादी मुकदमा को देने का आदेश हुआ।

बता दें कि घटना की प्राथमिकी बच्चे के पिता दीपचंद्र यादव निवासी बैंकर्स कॉलोनी गौशाला ने थाना शाहगंज में दर्ज कराया था। वादी के अनुसार वादी के 6 वर्षीय बच्चे अभिषेक को आरोपी आकाश श्रीवास्तव निवासी बैंकर्स कॉलोनी शाहगंज ,ट्यूशन पढ़ता था।बाद में वादी ने बच्चे का एडमिशन मधुलिका रघुवंशी के कोचिंग सेंटर में करा दिया। दिनांक 2 जनवरी 2021 को उसका बच्चा कोचिंग पढ़ने गया था। वापस नहीं आया।

पत्नी प्रियंका ने फोन कर बताया तब वह घर आकर बच्चे को खोजने लगा। करीब 3: 27 बजे उसके मोबाइल पर मैसेज आया कि आपके बच्चे को किडनैप कर लिया गया है‌। सात लाख रुपए फिरौती की मांग की गई। वादी ने थाने पर सूचना दिया। वादी के साले आजाद यादव ने बताया कि शिवम श्रीवास्तव व आकाश शाह उसके बच्चे अभिषेक को चिरैया मोड़ चौराहे से मोटरसाइकिल पर बैठा कर ले जा रहे थे। उसने सोचा कि वे लोग अभिषेक को कोचिंग पढ़ाने ले जा रहे हैं। जब बच्चा नहीं मिला तो वादी को विश्वास हो गया कि बच्चे का अपहरण शिवम व आकाश ने किया है। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया।

आरोपी की निशानदेही पर बच्चे का शव, किताब,कापी व चप्पल जमुनिया आईटीआई पानी टंकी के पास से बरामद हुआ। आला कत्ल मफलर भी पुलिस ने बरामद किया। पुलिस ने विवेचना करके कोर्ट में केस डायरी दाखिल किया। सरकारी वकील प्रदीप कुमार ने कोर्ट में गवाहों का बयान दर्ज कराया कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाया।

 

आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, माता-पिता आईएएस अधिकारी हैं तो बच्चों को आरक्षण क्यों?” क्रीमी लेयर पर सख्त हुई सर्वोच्च अदालत

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नई दिल्ली। देश में आरक्षण व्यवस्था और क्रीमी लेयर को लेकर चल रही बहस के बीच शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़े वर्गों के संपन्न परिवारों को लगातार आरक्षण का लाभ दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि माता-पिता दोनों आईएएस अधिकारी हैं, आर्थिक रूप से सक्षम हैं और समाज में प्रभावशाली स्थिति में पहुंच चुके हैं, तो फिर उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए?

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरक्षण का मकसद सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाना है, लेकिन जब कोई परिवार आरक्षण का लाभ लेकर उच्च प्रशासनिक पदों, आर्थिक मजबूती और सामाजिक प्रतिष्ठा तक पहुंच चुका हो, तब उसी परिवार की अगली पीढ़ी को भी लगातार आरक्षण देना व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ माना जा सकता है।

दरअसल मामला कर्नाटक का है। एक अभ्यर्थी को Karnataka Power Transmission Corporation Limited में आरक्षित श्रेणी के तहत असिस्टेंट इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) पद के लिए चुना गया था। हालांकि जिला जाति एवं आय सत्यापन समिति ने यह कहते हुए जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार कर दिया कि अभ्यर्थी क्रीमी लेयर के अंतर्गत आता है। जांच में सामने आया कि अभ्यर्थी के माता-पिता दोनों सरकारी कर्मचारी हैं और उनकी संयुक्त आय निर्धारित आठ लाख रुपये की सीमा से अधिक है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक गतिशीलता भी आती है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब परिवार समाज में प्रभावशाली स्थिति हासिल कर चुका है, तब लगातार आरक्षण का लाभ उठाना उन लोगों के अधिकारों पर असर डाल सकता है जो वास्तव में अब भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।

पीठ ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा पहले से ऐसे कई प्रावधान बनाए गए हैं जिनमें संपन्न वर्गों को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने की व्यवस्था है, लेकिन अब उन्हीं आदेशों को चुनौती दी जा रही है। अदालत ने संकेत दिया कि क्रीमी लेयर की अवधारणा को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश में आरक्षण की सीमा, आर्थिक आधार और सामाजिक न्याय को लेकर लगातार बहस चल रही है। राजनीतिक दलों के बीच भी इस मुद्दे पर मतभेद दिखाई देते रहे हैं। अदालत की इस सख्त टिप्पणी के बाद अब एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या आरक्षण का लाभ केवल पहली पीढ़ी तक सीमित होना चाहिए या फिर आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम हो चुके परिवारों की अगली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिलता रहना चाहिए।

इस मामले के दौरान अदालत ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस को लेकर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में सामाजिक पिछड़ापन नहीं बल्कि केवल आर्थिक पिछड़ापन होता है, इसलिए आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

गौरतलब है कि इससे पहले जनवरी 2025 में भी सुप्रीम कोर्ट ने आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बच्चों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण लाभ से बाहर रखने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। हालांकि अदालत ने तब भी यह स्पष्ट किया था कि क्रीमी लेयर को लेकर अंतिम फैसला लेने का अधिकार विधायिका के पास है।

अब सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद देशभर में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाने या घटाने और प्रभावशाली परिवारों को मिलने वाले लाभों को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों की निगाहें अब केंद्र सरकार की अगली रणनीति पर टिक गई हैं।

“राज्यसभा सीटें कितने में बिकीं, समय आने पर सब बताऊंगा”, बीजेपी में जाते ही भज्जी का आप पर बड़ा हमला, पंजाब की राजनीति में मचा बवाल

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चंडीगढ़। हरभजन सिंह के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद पंजाब की राजनीति में सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह भज्जी ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए राज्यसभा सीटों की खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयान के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल मच गई है और विपक्षी दलों ने भी आम आदमी पार्टी को घेरना शुरू कर दिया है।

सोशल मीडिया पर गद्दार कहकर की जा रही ट्रोलिंग का जवाब देते हुए भज्जी ने कहा कि उन्हें गद्दार कहने वाले पहले अपने नेताओं से पूछें कि पंजाब की राज्यसभा सीटें किस-किस को और कितने पैसों में बेची गई थीं। उन्होंने दावा किया कि समय आने पर वह पूरे मामले का खुलासा करेंगे और बताएंगे कि किसे कितना “चढ़ावा” दिया गया था और किसके इशारे पर मंत्री और संतरी बनाए गए।

हरभजन सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्हें कुछ “बिके हुए लोगों” द्वारा गद्दार कहे जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि पूरा देश जानता है कि उन्होंने देश और पंजाब के लिए क्या किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने किसी नेता को गाली नहीं दी, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो वह उन लोगों का सच सामने लाएंगे जिन्होंने पंजाब को लूटने का काम किया।

भज्जी के इस बयान को आम आदमी पार्टी पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक हमला माना जा रहा है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि वह लंबे समय तक पार्टी के करीबी माने जाते रहे और पार्टी ने ही उन्हें राज्यसभा भेजा था। अब बीजेपी में शामिल होने के बाद उनके तेवर पूरी तरह बदले नजर आ रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरभजन सिंह के इस बयान से पंजाब की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। विपक्षी दल पहले ही आम आदमी पार्टी सरकार पर कई मुद्दों को लेकर हमलावर हैं और अब राज्यसभा सीटों की कथित खरीद-फरोख्त का मुद्दा भी सियासी गलियारों में गर्माने लगा है।

हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से फिलहाल इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन भज्जी के आरोपों ने पंजाब की सियासत में नई बहस जरूर छेड़ दी है।

सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में पुणे की लेक्चरर गिरफ्तार

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पुणे: सीबीआई ने नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे की एक लेक्चरर मनीषा संजय हवलदार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा के फिजिक्स प्रश्नपत्र को चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाया। एजेंसी के अनुसार, उन्हें इस पूरे लीक नेटवर्क का एक अहम स्रोत माना जा रहा है।

सीबीआई के मुताबिक, आरोपी मनीषा हवलदार पुणे के एक स्कूल में कार्यरत थीं और उन्हें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा परीक्षा प्रक्रिया में विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया था। इसी कारण उन्हें फिजिक्स प्रश्नपत्र तक पहुंच प्राप्त थी। आरोप है कि अप्रैल 2026 में उन्होंने कुछ प्रश्न दूसरी आरोपी मनीषा मंधारे को साझा किए थे, जिन्हें बाद में लीक नेटवर्क में इस्तेमाल किया गया।

जांच एजेंसी ने बताया कि इस मामले में पहले भी मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो बॉटनी की शिक्षिका हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि लीक किए गए प्रश्न नीट परीक्षा के फिजिक्स पेपर से मेल खाते हैं। सीबीआई ने देशभर में कई जगह छापेमारी कर लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और अन्य सबूत जब्त किए हैं।

अब तक इस मामले में कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सीबीआई का दावा है कि वह पेपर लीक नेटवर्क के मुख्य स्रोत तक पहुंच चुकी है और बिचौलियों की भी पहचान कर ली गई है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है, जबकि मामला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

एसबीआई कर्मचारियों की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल टली, बैंक सेवाएं राहत में

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नई दिल्ली
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के कर्मचारियों की 25 और 26 मई को प्रस्तावित दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल टाल दी गई है। यह निर्णय बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संघों के बीच मुंबई में हुई सकारात्मक बातचीत के बाद लिया गया, जिससे बैंक सेवाओं पर पड़ने वाला संभावित असर समाप्त हो गया।

अखिल भारतीय एसबीआई स्टाफ महासंघ ने इस महीने की शुरुआत में 16 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल का आह्वान किया था। इन मांगों में भर्ती प्रक्रिया, आउटसोर्सिंग रोकने, कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और कार्य परिस्थितियों में सुधार जैसे कई अहम मुद्दे शामिल थे। कर्मचारी संगठनों का कहना था कि लगातार बढ़ते कार्यभार और रिक्त पदों से कर्मचारियों पर दबाव बढ़ रहा है।

एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के अनुसार, मुंबई स्थित कॉर्पोरेट केंद्र में हुई बैठक काफी सकारात्मक रही, जिसमें कई मांगों पर प्रगति दर्ज की गई। बातचीत में कैरियर प्रगति, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, पेंशन सुधार और स्थानांतरण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रबंधन द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल स्थगित करने का फैसला लिया।

इस फैसले से लाखों बैंक ग्राहकों को राहत मिली है, क्योंकि प्रस्तावित हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका थी। फिलहाल दोनों पक्ष आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं, ताकि लंबित मुद्दों का स्थायी समाधान निकाला जा सके।