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Friday, May 22, 2026
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भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश सीमा होगी ‘स्मार्ट बॉर्डर’, अमित शाह का ऐलान

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नई दिल्ली।अमित शाह ने देश की सीमाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह “स्मार्ट बॉर्डर” में बदला जाएगा। केंद्र सरकार का दावा है कि इस नई हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था के जरिए घुसपैठ, पशु तस्करी और सीमा क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जाएगी।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आने वाले समय में पारंपरिक कंटीले तारों के साथ आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके तहत सीमाओं पर हाईटेक कैमरे, अत्याधुनिक सेंसर, रडार सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस नेटवर्क लगाए जाएंगे ताकि हर गतिविधि पर रियल टाइम निगरानी रखी जा सके।

सरकार के अनुसार “स्मार्ट बॉर्डर” परियोजना का उद्देश्य केवल सीमा सुरक्षा को मजबूत करना नहीं, बल्कि सीमा पार होने वाली अवैध गतिविधियों पर तकनीकी नियंत्रण स्थापित करना भी है। खासतौर पर पाकिस्तान सीमा पर घुसपैठ और ड्रोन गतिविधियों तथा बांग्लादेश सीमा पर अवैध प्रवेश और पशु तस्करी को लेकर लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां चिंता जताती रही हैं।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत की पाकिस्तान सीमा लगभग 3,323 किलोमीटर और भारत-बांग्लादेश सीमा करीब 4,096 किलोमीटर लंबी है। इतनी विशाल सीमाओं पर केवल मानव निगरानी के भरोसे सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। इसी वजह से अब तकनीक आधारित “स्मार्ट फेंसिंग” मॉडल को तेजी से लागू किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक इस योजना में

हाई रिजोल्यूशन नाइट विजन कैमरे,मूवमेंट डिटेक्शन सेंसर,

थर्मल इमेजिंग सिस्टम,

ड्रोन मॉनिटरिंग,और रडार आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि इससे सीमा सुरक्षा बलों की क्षमता कई गुना बढ़ेगी और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान हो सकेगी।

अमित शाह ने “डेमोग्राफी चेंज” यानी सीमा क्षेत्रों की जनसंख्या संरचना में बदलाव का भी उल्लेख किया। राजनीतिक रूप से यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में अवैध घुसपैठ और नागरिकता को लेकर देश में बड़ा राजनीतिक विमर्श रहा है। केंद्र सरकार लगातार दावा करती रही है कि अवैध घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन दोनों के लिए खतरा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना पूरी तरह लागू होती है तो भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था पारंपरिक मॉडल से निकलकर तकनीक आधारित आधुनिक ढांचे में बदल जाएगी। हालांकि इसके लिए भारी बजट, लगातार तकनीकी रखरखाव और प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की आवश्यकता होगी।

फिलहाल केंद्र सरकार के इस ऐलान को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि “स्मार्ट बॉर्डर” परियोजना जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ लागू हो पाती है।

बिहार ATS ने पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहे एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, डिजिटल सबूत जब्त

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मुजफ्फरपुर: आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में बिहार (Bihar) से एक व्यक्ति को गिरफ्तार (arrests) किया है। अधिकारियों ने बताया कि एटीएस की विशेष खुफिया इकाई से मिली सूचना के आधार पर मुजफ्फरपुर जिले में छापेमारी के दौरान आरोपी मोहम्मद मुस्तफा को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने दावा किया कि आरोपी भारत विरोधी तत्वों के साथ काम कर रहा था और पाकिस्तान स्थित हथियार तस्कर शहजाद भट्टी और उसके साथियों से उसके सीधे संबंध थे।

उन्होंने कहा, “मुस्तफा राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के उद्देश्य से गतिविधियों को समन्वित करने के लिए सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करता था।” रतनपुर गांव में छापेमारी के दौरान, एटीएस ने मुस्तफा का मोबाइल फोन जब्त किया, जिसमें कथित तौर पर संदिग्ध चैट, फोटो और वीडियो थे।

एटीएस ने कहा, “फोरेंसिक विश्लेषण से आपत्तिजनक और राष्ट्र-विरोधी सामग्री मिली, जिसमें भारत के भीतर संवेदनशील और प्रतिबंधित स्थलों की तस्वीरें और वीडियो शामिल हैं। आरोपी ने इन स्थानों के सटीक भौगोलिक निर्देशांक अपने पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ साझा किए थे।” प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि मुस्तफा ने रणनीतिक स्थानों की वीडियो रिकॉर्डिंग की और गोपनीय जानकारी विदेश भेजी।

एटीएस ने कहा, “हम उसके नेटवर्क के विस्तार और किसी भी विदेशी फंडिंग का पता लगाने के लिए उसकी यात्रा इतिहास, डिजिटल उपकरणों, वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच कर रहे हैं।” एजेंसी ने मुस्तफा के खिलाफ जासूसी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से संबंधित धाराओं के तहत मामला भी दर्ज किया है। आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

मुजफ्फरपुर में पहले भी इसी तरह की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। संवेदनशील डेटा पाकिस्तान भेजने के आरोपी एक नेटवर्क के संबंध में फरीदाबाद में नौशाद अली उर्फ ​​लालू को गिरफ्तार किया गया था। गाजियाबाद पुलिस ने इससे पहले नौ संदिग्धों को हिरासत में लिया था और उनसे पूछताछ के आधार पर नौशाद समेत 11 लोगों को मार्च में हिरासत में लिया गया था। एटीएस ने कहा, “हम राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।”

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार से बृज भूषण सिंह, राजा भैया और 17 अन्य बाहुबलियों के हथियार लाइसेंस का पूरा ब्यौरा मांगा

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प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने सार्वजनिक रूप से हथियारों का प्रदर्शन सामाजिक सद्भाव के लिए हानिकारक बताते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi government) से राज्य के 19 लोगों के हथियार लाइसेंस का विवरण देने को कहा है, जिनमें राजनेता बृज भूषण सिंह, राजा भैया और धनंजय सिंह शामिल हैं। बुधवार को पारित अपने आदेश में न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा, “आत्मरक्षा के नाम पर, धमकी के हथियार वास्तविक सुरक्षा के बजाय भय को बढ़ावा देते हैं। जिस समाज में सशस्त्र व्यक्ति प्रत्यक्ष बल और धमकियों के माध्यम से अपना वर्चस्व स्थापित करते हैं, वह न तो अधिक स्वतंत्र होता है और न ही अधिक शांतिपूर्ण; बल्कि यह जनविश्वास को कमज़ोर करता है।”

न्यायालय ने आगे कहा, “इस न्यायालय का प्रथम दृष्टया यह मत है कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन वर्चस्व, शक्ति और सुरक्षा का भ्रम पैदा कर सकता है, लेकिन यह अक्सर सामाजिक सद्भाव को भंग करता है और आम लोगों में भय और असुरक्षा उत्पन्न करता है। यद्यपि आत्मरक्षा के नाम पर कभी-कभी खुलेआम बंदूकें ले जाना उचित ठहराया जा सकता है, लेकिन धमकी के हथियार वास्तविक सुरक्षा के बजाय भय को बढ़ावा देते हैं।”

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ ​​राजा भैया, बृजभूषण सिंह और धनंजय सिंह के अलावा जिन 16 लोगों का ब्योरा मांगा गया है उनमें सुशील सिंह, विनीत सिंह, अजय मारहड़, सुजीत सिंह बेलवा, उपेन्द्र सिंह गुड्डु, पप्पू भौकाली, इंद्रदेव सिंह, सुनील यादव, फरार अजीम, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सन्नी सिंह, छुन्नू सिंह और डॉ. उदय भान सिंह शामिल हैं।

विस्तृत जानकारी मांगने से पहले, न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की, “बहस के दौरान यह महसूस किया गया है और इस न्यायालय के समक्ष लंबित ऐसे ही अन्य मामलों पर विचार करते हुए, जिनमें सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में संलग्न व्यक्तियों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, यह आवश्यक पाया गया है कि तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए और अधिक जानकारी की आवश्यकता है।”

न्यायालय ने आगे कहा, “यह न्यायालय इस विचार का है कि निष्पक्षता विधि के शासन के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है; इसलिए, सुशासन सुनिश्चित करने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए, राज्य को न केवल नीति में निष्पक्षता और गैर-भेदभाव का पालन करना चाहिए, बल्कि इन सिद्धांतों को दैनिक प्रशासन में भी प्रतिबिंबित करना चाहिए।”

न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई को तय की है। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश की एक प्रति अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), सभी जिला मजिस्ट्रेटों और सभी 75 जिलों के पुलिस आयुक्तों/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को भेजें ताकि इसका कड़ाई से और प्रभावी ढंग से अनुपालन किया जा सके।

इससे पहले, अदालत ने उत्तर प्रदेश में जारी किए गए हथियार लाइसेंसों पर व्यापक डेटा मांगा था, क्योंकि उसने बढ़ती बंदूक संस्कृति पर कड़ा संज्ञान लिया था और पाया था कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं वाले या संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति लाइसेंस प्राप्त हथियारों का उपयोग अधिकार जताने, एक प्रभावशाली छवि बनाने और अप्रत्यक्ष रूप से दूसरों को डराने के लिए कर रहे हैं, जिससे भय का माहौल पैदा हो रहा है।

 

अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) को मिला जिला सूचना कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार

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– मीडिया से दूरी रखने वाले एडीएम दिनेश चंद्र करेंगे मीडिया समन्वय
– मेला श्री रामनगरिया में लग चुके हैं कई आरोप

फर्रुखाबाद। प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए जिलाधिकारी डॉ अंकुर लाठर ने अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) दिनेश चंद्र को जिला सूचना कार्यालय के कार्यों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। इस संबंध में कलेक्ट्रेट से आदेश जारी कर दिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार पूर्व में निर्गत आदेश को अधिक्रमित करते हुए अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ जिला सूचना कार्यालय, फर्रुखाबाद के सहायक निदेशक/जिला सूचना अधिकारी के पदीय दायित्वों के निर्वहन हेतु अधिकृत किया गया है।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस अतिरिक्त दायित्व के लिए किसी प्रकार का अतिरिक्त प्रतिकर भत्ता देय नहीं होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासनिक हलकों में इस आदेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जिला सूचना कार्यालय शासन की योजनाओं, सरकारी कार्यक्रमों और मीडिया समन्वय का प्रमुख केंद्र होता है।

हालांकि एडीएम दिनेश का व्यवहार मीडिया कर्मियों के प्रति सदैव रुखा रहा है, ऐसे में मीडिया संबंध में कितना अच्छा होगा यह तो वक्त तय करेगा। लेकिन यह भी माना जा रहा है कि जिला प्रशासन और वास्तविक मीडिया के बीच खटास पड़ने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ गयीं हैं।

झांसी में धारदार हथियार से महिला की गला काटकर हत्या

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झांसी: झांसी (Jhansi) जिले से हत्या की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। जहां टोड़ी फतेहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बुढ़ाई में एक महिला की धारदार हथियार से हत्या (murdered) कर दी गई है। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम बुढ़ाई निवासी रजनी अहिरवार (35) का शव शुक्रवार तड़के घर में खून से लथपथ हालत में मिला। बताया जा रहा है कि मृतका की 10 वर्षीय बेटी मुस्कान ने रात करीब तीन बजे मां को घायल अवस्था में देखा और परिजनों व ग्रामीणों को सूचना दी।

सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने कमरे में खून फैला देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में महिला के गले पर धारदार हथियार से वार किए जाने की बात सामने आई है।

मृतका की सास की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बताया गया है कि मृतका का पति मजदूरी के सिलसिले में दिल्ली गया हुआ है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और पुलिस विभिन्न बिंदुओं पर जांच में जुटी हुई है।

 

 

मुख्यमंत्री डैशबोर्ड समीक्षा में फर्रुखाबाद को प्रदेश में 14वां स्थान, कई योजनाओं की रैंकिंग पर डीएम नाराज

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फर्रुखाबाद। विकास कार्यों की प्रगति को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार फतेहगढ़ में मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के अंतर्गत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अंकुर लाठर ने की। समीक्षा के दौरान अप्रैल 2026 माह की विभिन्न विभागीय योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति का परीक्षण किया गया, जिसमें जनपद फर्रुखाबाद को प्रदेश स्तर पर 14वां स्थान प्राप्त हुआ।

बैठक में 28 विभागों की कुल 86 योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने योजनाओं के क्रियान्वयन, लक्ष्य पूर्ति, प्रगति रिपोर्ट और जनहित पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अधिकारियों से जवाब तलब किया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

समीक्षा के दौरान कई योजनाओं का प्रदर्शन कमजोर पाया गया। डी श्रेणी में चिकित्सा विभाग की जननी सुरक्षा योजना की स्थिति बेहद खराब रही। योजना को प्रदेश में 63वीं रैंक मिली और 10 में से केवल 2 अंक प्राप्त हुए।

सी श्रेणी में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आईसीडीएस पोषण अभियान को 49वीं रैंक और 3 अंक मिले। वहीं अतिरिक्त ऊर्जा विभाग की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भी 49वीं रैंक पर रही, जिसे 5 अंक प्राप्त हुए।

बी श्रेणी में जल निगम (ग्रामीण) की जल जीवन मिशन योजना को 37वीं रैंक और 8 अंक मिले। पर्यटन विभाग की राज्य योजना 55वें स्थान पर रही और उसे 7 अंक प्राप्त हुए। लोक निर्माण विभाग की नई सड़क निर्माण योजना को 41वीं रैंक और 6 अंक मिले।

जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए और फील्ड स्तर पर कार्यों में तेजी लाई जाए, ताकि आगामी माह में जनपद की रैंकिंग में सुधार हो सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए, जिला विकास अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।