कानपुर। शहर के बसंत चौराहा पर मंगलवार को दबंगई का मामला सामने आया, जहां मामूली ओवरटेक को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। हैरानी की बात यह रही कि घटना पुलिस पिकेट पॉइंट के पास हुई, बावजूद इसके दबंगों ने खुलेआम मारपीट की।
ओवरटेक बना विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार, दो पक्षों के बीच वाहन ओवरटेक करने को लेकर कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि एक पक्ष ने अपने अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बुलाए गए करीब आधा दर्जन युवकों ने मिलकर चालक की बेरहमी से पिटाई कर दी। घटना के दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई और राहगीरों में दहशत फैल गई।
मारपीट का शिकार हुआ चालक हार्ट का मरीज बताया जा रहा है, जिससे उसकी हालत को लेकर चिंता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप कर किसी तरह मामला शांत कराया।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
घटना गुजैनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है। पिकेट के पास ही इस तरह की वारदात होने से पुलिस की मौजूदगी और सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
दबंगई: बसंत चौराहे पर पिकेट के सामने मारपीट, हार्ट मरीज चालक बना शिकार
छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज होते ही दबंगों का कहर, पीड़िता से मारपीट—तालाब की जमीन कब्जाने का भी आरोप
अमृतपुर/फर्रुखाबाद। जिले के राजेपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में छेड़छाड़ के गंभीर मामले में मुकदमा दर्ज होते ही दबंगों द्वारा पीड़िता के साथ मारपीट किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल व्याप्त है।
बताया गया कि पीड़िता ने आरोप लगाया है कि हमीरपुर सोमवंशी निवासी अरुण सिंह पुत्र गया सिंह लंबे समय से उसकी नाबालिग पुत्रियों पर गलत नजर रखे हुए था और आए दिन अश्लील हरकतें व अभद्र टिप्पणियां करता था। लगातार हो रही इन हरकतों से तंग आकर जब पीड़िता ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया, तो आरोपी पक्ष बौखला गया।
मुकदमा दर्ज होते ही हमला, जान से मारने की धमकी
पीड़िता का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद दबंगों ने उसके साथ मारपीट की और जानमाल की धमकी दी। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी द्वारा गाटा संख्या 131 ब व 132 ख की तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण कर लिया गया है। इस संबंध में पीड़िता ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कर न्याय की गुहार लगाई है।
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि एक ओर बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी जमीन पर कब्जा कर कानून को चुनौती दी जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन सख्त, जांच के आदेश
उप जिलाधिकारी संजय सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए राजस्व टीम को मौके पर जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा पाया गया तो नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पुलिस को पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
समाज कल्याण विभाग में कमाऊ पूत का खेल
18 साल से जमे छात्रावास अधीक्षक पर सभी नियम फेल
फर्रुखाबाद। समाज कल्याण विभाग में तैनात संतोष कुमार को लेकर लेकर इन दिनों चर्चा आम है , जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संतोष कुमार का मूल पद राजकीय अनुसूचित छात्रावास, कमालगंज में अधीक्षक का है, लेकिन प्रभाव और सेटिंग के चलते वह कई वर्षों से महत्वपूर्ण पटल संभाल रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जिला समाज कल्याण अधिकारी रेनू यादव की नजदीकी के चलते संतोष कुमार को बाबुओं से पटल हटाकर छात्रवृत्ति, हरिजन उत्पीड़न, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और लेखाकार जैसे अहम कार्य सौंप दिए गए हैं। आरोप है कि इन महत्वपूर्ण पटल के माध्यम से वह कार्यालय में बैठकर कथित तौर पर धनउगाही करता है, जबकि छात्रावास की जिम्मेदारी पूरी तरह नजरअंदाज कर दी गई है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संतोष कुमार पिछले करीब 18 वर्षों से जनपद में ही जमे हुए हैं। कई बार तबादले के आदेश भी हुए, लेकिन हर बार कथित रूप से पैसे और प्रभाव के बल पर उन्हें रुकवा लिया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि वह खुलेआम यह दावा करता है कि उसकी निदेशालय स्तर तक ‘सेटिंग’ है और वह नियमित रूप से पैसे पहुंचाता है, इसलिए कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
इसके अलावा ठेकेदारों से भी उसकी करीबी संबंधों की चर्चा है, जिससे विभागीय कार्यों में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। कमालगंज में अधीक्षक पद पर तैनाती के बावजूद छात्रावास में उसकी अनुपस्थिति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर नाराजगी बनी हुई है।
इस पूरे मामले ने समाज कल्याण विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
अतिक्रमण पर सख्ती, चौक से फतेहगंज तक चला अभियान—दुकानदारों पर कार्रवाई, वाहन चालान, सामान जब्त
अयोध्या। शहर को जाम की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से चौक से फतेहगंज तक पुलिस और प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस दौरान सड़क किनारे और बाजार क्षेत्रों में फैले अतिक्रमण को हटाते हुए सख्त कार्रवाई की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
अभियान के दौरान उन दुकानदारों को निशाने पर लिया गया, जिन्होंने अपनी दुकानों का सामान सड़क तक फैला रखा था और यातायात में बाधा उत्पन्न कर रहे थे। टीम ने मौके पर पहुंचकर न केवल अतिक्रमण हटवाया बल्कि कई स्थानों से सामान जब्त कर लिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से व्यापारियों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
इसी के साथ दुकानों के बाहर अवैध रूप से खड़ी गाड़ियों पर भी पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। सड़क किनारे खड़े वाहनों के खिलाफ चालान काटे गए और लोगों को चेतावनी दी गई कि भविष्य में नियमों का उल्लंघन करने पर और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि शहर में लगातार बढ़ रहे जाम की समस्या को देखते हुए यह अभियान चलाया गया है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। अधिकारियों ने साफ किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए निरंतर कार्रवाई की जाएगी।
भरथना में गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल, मुस्लिम युवक ने भजन सम्राट का किया सम्मान
इटावा। जिले के भरथना में उस समय गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली, जब एक मुस्लिम युवक ने भजन सम्राट कन्हैया मित्तल का मंच पर सम्मान कर भाईचारे का संदेश दिया। इस अनोखे दृश्य ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया और पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा होने लगी।
कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम युवक ने कन्हैया मित्तल को खाटूश्याम जी की तस्वीर भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मंच पर यह दृश्य न केवल धार्मिक समरसता का प्रतीक बना, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि आपसी प्रेम और सम्मान ही असली पहचान है।
इस मौके पर मंच से भी सौहार्द और एकता का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता और आपसी भाईचारे में है, जिसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और सभी ने इस पहल की सराहना की।
भरथना का यह आयोजन एक बार फिर साबित करता है कि समाज में आज भी ऐसी मिसालें कायम हैं, जो धर्म और जाति से ऊपर उठकर इंसानियत को सबसे पहले रखती हैं।
ईमानदार आईएएस ने छोड़ी नौकरी… सिस्टम पर बड़ा आरोप, “काम नहीं, सिर्फ वेतन मिल रहा था”
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपने विस्तृत त्यागपत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय से न तो कोई पोस्टिंग दी जा रही थी और न ही कोई गरिमापूर्ण कार्य सौंपा जा रहा था, जिससे वे खुद को पूरी तरह साइडलाइन महसूस कर रहे थे।
राही ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा कि वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनसेवा का कोई अवसर नहीं दिया जा रहा था, जो उनके लिए नैतिक रूप से स्वीकार्य नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में “संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम” काम कर रहा है, जहां कुछ अधिकारियों को जानबूझकर हाशिए पर रखा जाता है।
बताया जाता है कि एसडीएम के रूप में कार्य करते हुए की गई कुछ कार्रवाइयों के बाद उन्हें साइडलाइन कर दिया गया था। इसके बाद से वे संबद्ध (अटैच) रहे और उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। इस स्थिति को लेकर उन्होंने कई बार अपनी बात रखी, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
रिंकू सिंह राही का नाम पहले भी सुर्खियों में रहा है। वर्ष 2009 में एक बड़े घोटाले का खुलासा करने के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगी थीं, बावजूद इसके वे बच गए थे। हाल ही में शाहजहांपुर में वकीलों के एक प्रदर्शन के दौरान उनका उठक-बैठक करते हुए वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद उन्हें अटैच कर दिया गया था और तब से उन्हें कोई नई पोस्टिंग नहीं मिली।
सूत्रों का कहना है कि राही अकेले ऐसे अधिकारी नहीं हैं, जिन्हें इस तरह साइडलाइन किया गया है, बल्कि कई अन्य अधिकारी भी इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। राही का इस्तीफा अब प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल बनकर उभरा है, जिस पर आने वाले समय में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज होने की संभावना








