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Monday, March 16, 2026
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इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इंडिया में गूँजी भाईचारे की सदाएँ

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हिन्दू–मुस्लिम एकता और अमन-शांति की दुआओं के साथ सम्पन्न हुआ पत्रकार एसोसिएशन का भव्य रोज़ा इफ्तार

गंगा-जमुनी तहज़ीब की दिखी मिसाल, विभिन्न धर्मगुरु एक साथ रोज़ा इफ्तार में हुए शामिल

लखनऊ: पाक माह-ए-रमज़ान के मुबारक अवसर पर गंगा-जमुनी तहज़ीब की नगरी लखनऊ ने एक बार फिर आपसी सौहार्द, भाईचारे और एकता की अनूठी मिसाल पेश की। उ.प्र. ज़िला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन एवं जश्न-ए-आजादी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भव्य रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम में सभी धर्मों और सम्प्रदायों के लोगों ने एक साथ बैठकर रोज़ा इफ्तार किया और प्रदेश में अमन-शांति, खुशहाली तथा आपसी सद्भाव के लिए दुआएँ कीं।

कार्यक्रम का आयोजन तैयब हॉल, ऐशबाग ईदगाह में किया गया, जहाँ विभिन्न धर्मगुरुओं, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण बताया।

इस अवसर पर इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फ़रंगी महली, जश्न-ए-आजादी के अध्यक्ष मुरलीधर आहूजा, वेदव्रत बाजपेई,राजेंद्र सिंह बग्गा,हरपाल सिंह जग्गी, वी बी पांडेय,संदीप पांडेय,मो अली साहिल सहित अनेक प्रख्यात हस्तियों ने शिरकत की। विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं ने एक साथ बैठकर रोज़ा इफ्तार किया और समाज में प्रेम, भाईचारे और एकजुटता का संदेश दिया।

इफ्तार के बाद मौलाना मुश्ताक ने रोज़ेदारों को नमाज़ अदा कराई और देश की अखंडता, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को मजबूत बनाए रखने के लिए विशेष दुआ कराई।

इस अवसर पर जश्न-ए-आजादी के अध्यक्ष मुरलीधर आहूजा ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी विश्वास को और मज़बूत करते हैं। वहीं पत्रकार एसोसिएशन के महामंत्री अब्दुल वहीद ने कहा कि संस्था पत्रकारिता के दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा के साथ निभा रही है।

एसोसिएशन के सचिव जुबैर अहमद ने कहा कि इस रोज़ा इफ्तार मे सभी धर्मों के लोगों ने शिरकत कर एकता का सन्देश दिया हैं जो इसकी सबसे बड़ी सफलता है और यह लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक भी है।

कार्यक्रम में एसोसिएशन के चेयरमैन अज़ीज़ सिद्दीकी,एम एम मोहसिन,तौसीफ हुसैन, वामिक खान, अभय अग्रवाल, संजय गुप्ता, डॉ जफर खान, मोहम्मद इरफ़ान,नजम अहसन, समाजसेवी आरिफ ज्वेलर्स, सहित समाजसेवियों, चिकित्सकों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं पत्रकारों सहित बड़ी संख्या में सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजन में आए सभी अतिथियों का मुरलीधर आहूजा, अज़ीज़ सिद्दीकी, अब्दुल वहीद, जुबैर अहमद और तौसीफ हुसैन ने अंगवस्त्र पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने प्रदेश में शांति, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने का संकल्प लिया। यह आयोजन केवल एक रोज़ा इफ्तार नहीं, बल्कि एक संदेश था — एकता का, प्रेम का और उस लखनऊ की पहचान का, जहाँ दिल मिलते हैं और दुआएँ सबके लिए होती हैं।

देशभर में महंगा हुआ फास्टैग एनुअल पास, 1 अप्रैल से बढ़ी दरें लागू

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हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों पर पड़ेगा असर, जानें क्या है नया नियम और कितना देना होगा शुल्क

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए अहम खबर है। सरकार ने फास्टैग एनुअल पास की कीमत में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें आगामी 1 अप्रैल से लागू की जाएंगी। इसके बाद फास्टैग एनुअल पास लेने वाले वाहन मालिकों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा।

सरकारी जानकारी के अनुसार फास्टैग एनुअल पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। यानी वाहन चालकों को अब इस सुविधा के लिए 75 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। यह संशोधित शुल्क नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रभावी होगा।

फास्टैग एनुअल पास उन वाहन चालकों के लिए विशेष सुविधा है जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर अक्सर यात्रा करते हैं। इस पास के माध्यम से टोल प्लाजा पर बार-बार भुगतान करने की जरूरत नहीं पड़ती और डिजिटल माध्यम से स्वचालित रूप से टोल शुल्क कट जाता है।

यह पास मुख्य रूप से गैर-व्यावसायिक वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए उपलब्ध है। एनुअल पास लेने के बाद वाहन चालक एक वर्ष की अवधि या अधिकतम 200 बार टोल प्लाजा पार करने तक इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इनमें से जो भी सीमा पहले पूरी हो जाती है, उसी के अनुसार पास की वैधता समाप्त हो जाती है।

सरकार ने देशभर में टोल भुगतान को आसान और डिजिटल बनाने के लिए फास्टैग प्रणाली लागू की थी। इस प्रणाली से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आई है और ईंधन की भी बचत होती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में करोड़ों वाहन फास्टैग प्रणाली से जुड़े हुए हैं और बड़ी संख्या में वाहन मालिक एनुअल पास सुविधा का उपयोग करते हैं। ऐसे में फीस में बढ़ोतरी का असर सीधे लाखों वाहन चालकों पर पड़ेगा।

वाहन चालकों पर क्या पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि एनुअल पास की कीमत में बढ़ोतरी भले ही मामूली है, लेकिन नियमित रूप से हाईवे पर यात्रा करने वाले लोगों को अब पहले से अधिक भुगतान करना होगा। हालांकि सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से टोल प्रबंधन, हाईवे रखरखाव और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

फास्टैग के माध्यम से टोल भुगतान पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से होता है। वाहन की विंडस्क्रीन पर लगे टैग को स्कैन करते ही टोल शुल्क सीधे बैंक खाते या वॉलेट से कट जाता है। इससे समय की बचत होती है और नकद लेन-देन की जरूरत समाप्त हो जाती है।

सरकार लगातार देशभर में फास्टैग प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को अधिक सुगम और तेज बनाया जा सके। नए वित्तीय वर्ष से लागू होने वाली बढ़ी हुई दरों के बाद अब हाईवे पर नियमित रूप से यात्रा करने वाले वाहन चालकों को फास्टैग एनुअल पास के लिए पहले से अधिक शुल्क देना

उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र रहा व्यापक, रीजनिंग और इतिहास के सवालों ने बढ़ाई अभ्यर्थियों की मुश्किलें

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कासगंज। पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में इस बार प्रश्नपत्र का स्तर काफी व्यापक और विविध विषयों पर आधारित रहा। परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों के अनुसार प्रश्नपत्र में रीजनिंग, सामान्य ज्ञान, हिंदी, गणित, इतिहास और नागरिक शास्त्र जैसे कई विषयों से सवाल पूछे गए, जिससे कई अभ्यर्थियों को प्रश्न हल करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलने के बाद अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रश्नपत्र में कुछ सवाल अपेक्षाकृत आसान थे, लेकिन कई प्रश्न ऐसे भी थे जिन्होंने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। खास तौर पर रीजनिंग और इतिहास से जुड़े प्रश्नों ने कई अभ्यर्थियों के लिए चुनौती खड़ी कर दी। वहीं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं से जुड़े सवालों में भी कुछ परीक्षार्थी उलझते नजर आए।

अभ्यर्थियों के मुताबिक प्रश्नपत्र में सामान्य ज्ञान से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल थे। इनमें पुलिस विभाग के सबसे बड़े अधिकारी का नाम, भारतीय संविधान से संबंधित जानकारी, हिंदी भाषा के मुहावरे और पर्यायवाची शब्द, प्रसिद्ध लेखकों के नाम तथा वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से पहले ब्रिटिश शासन की नीति के कारण किन भारतीय रियासतों का विलय हुआ, जैसे सवाल पूछे गए।

इसके अलावा विज्ञान और सामान्य अध्ययन से जुड़े कुछ प्रश्न भी शामिल किए गए थे। रिक्त स्थान से जुड़े प्रश्नों में मानव अंगों में निषेचन की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी तथा भारतीय कानून के अंतर्गत किसी व्यक्ति को कब से किशोर नहीं माना जाता, जैसे प्रश्न पूछे गए। इन प्रश्नों ने कई अभ्यर्थियों को थोड़ी देर तक सोचने के लिए मजबूर कर दिया।

गणित खंड में भी परीक्षार्थियों की परीक्षा ली गई। इसमें लाभ-हानि, ब्याज दर के आधार पर दी गई राशि से मूलधन निकालने जैसे प्रश्न पूछे गए। कुछ अभ्यर्थियों का कहना था कि गणित के सवाल हल करने में समय अधिक लगा, जिससे उन्हें अन्य प्रश्नों के लिए समय का संतुलन बनाना पड़ा।

कुल मिलाकर अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्नपत्र का स्तर संतुलित था, लेकिन कई विषयों को शामिल किए जाने के कारण परीक्षा व्यापक हो गई थी। हालांकि अधिकांश परीक्षार्थियों ने उम्मीद जताई कि यदि कटऑफ सामान्य रही तो उन्हें अच्छे अंक मिलने की संभावना है। परीक्षा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही और केंद्रों पर प्रशासन की ओर से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं।

शादी समारोह में युवती पर फब्तियां कसने से बवाल, दो पक्षों में मारपीट और कुर्सियां चलीं

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इटावा। शहर के यशोदा नगर स्थित कोकिला मैरिज होम में शनिवार रात एक शादी समारोह के दौरान युवती पर फब्तियां कसने को लेकर विवाद हो गया, जिसके बाद समारोह में जमकर हंगामा और मारपीट हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चलने लगे और कुर्सियां तक फेंकी जाने लगीं। करीब एक घंटे तक चले इस हंगामे से शादी समारोह में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

जानकारी के अनुसार लाइनपार क्षेत्र के यशोदा नगर स्थित कोकिला मैरिज होम में शनिवार रात सुल्तानपुरा मोहल्ले के एक व्यक्ति की बेटी की शादी का कार्यक्रम चल रहा था। इस समारोह में शामिल होने के लिए ख्यालीराम मड़ैया क्षेत्र के रहने वाले भाई-बहन भी दावत में पहुंचे थे। रात करीब 10 बजे दोनों भाई-बहन मैरिज होम के काउंटर पर टिक्की खाने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां खड़े कुछ युवकों ने युवती पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी।

युवती पर की गई टिप्पणी का जब उसके भाई ने विरोध किया तो आरोपित युवक उससे बहस करने लगे। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और युवकों ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर भाई-बहन के साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट के दौरान भाई को बचाने के प्रयास में बहन को भी चोटें आईं। इस घटना से शादी समारोह में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर मौजूद लोग इधर-उधर भागने लगे।

विवाद बढ़ने पर दूसरे पक्ष के लोग भी एकत्रित हो गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट होने लगी। इस दौरान लात-घूंसे चलने के साथ ही कुर्सियां भी एक-दूसरे पर फेंकी गईं, जिससे दो कुर्सियां टूट गईं। लगभग एक घंटे तक मैरिज होम में हंगामा और तनावपूर्ण माहौल बना रहा, जिससे शादी समारोह का माहौल भी बिगड़ गया और कुछ देर के लिए कार्यक्रम प्रभावित हो गया।

घटना की सूचना मिलने पर थाना फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच पड़ताल शुरू की। थानाध्यक्ष अमित मिश्रा ने बताया कि शनिवार रात यशोदा नगर स्थित एक मैरिज होम में शादी समारोह के दौरान आपसी कहासुनी को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी, लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जानकारी कर रही है।

टीकाकरण के बाद चार माह के मासूम की मौत, परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप

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इटावा। जिले के इकदिल क्षेत्र स्थित ग्राम चितभवन में नियमित टीकाकरण के बाद चार माह के एक मासूम की मौत हो जाने से परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर गलत वैक्सीन लगाने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। इकलौते पुत्र की असमय मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार ग्राम चितभवन निवासी इरशाद के चार माह के पुत्र हुसैन को बीती 11 तारीख को गांव में आयोजित नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के दौरान एएनएम द्वारा टीका लगाया गया था। परिजनों का आरोप है कि टीकाकरण के कुछ ही समय बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी और उसे तेज बुखार आ गया। शुरुआत में परिजनों ने इसे सामान्य प्रतिक्रिया समझकर घरेलू स्तर पर ही देखभाल की, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे की हालत और गंभीर होती चली गई।

शनिवार को जब मासूम की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो परिजन उसे तत्काल बसरेहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंचे। वहां मौजूद डॉक्टरों ने बच्चे की हालत गंभीर देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में भी उपचार के दौरान स्थिति में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उसे उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के लिए रेफर कर दिया।

सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती किए जाने के बाद चिकित्सकों ने बच्चे का इलाज शुरू किया, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती चली गई और उपचार के दौरान मासूम हुसैन ने दम तोड़ दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

मृतक बच्चे के पिता इरशाद का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और सही समय पर उचित सलाह व उपचार न मिलने के कारण उनके इकलौते बेटे की जान चली गई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही उपचार मिलता तो शायद बच्चे की जान बच सकती थी।

वहीं इस मामले में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसरेहर के अधीक्षक से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे बात नहीं हो सकी। घटना के बाद गांव में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

भाई-बहन बने सेना में लेफ्टिनेंट, एक साथ हासिल की ऐतिहासिक सफलता

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एटा। जिले के नगला जगरूप गांव के एक भाई-बहन ने भारतीय सेना में एक साथ लेफ्टिनेंट बनकर जिले का नाम रोशन कर दिया है। सीडीएस परीक्षा के माध्यम से चयनित होकर दोनों ने कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार ही नहीं बल्कि पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। युवाओं के लिए यह सफलता प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

जानकारी के अनुसार नगला जगरूप गांव निवासी मानसी दीक्षित (25) और उनके छोटे भाई प्रियांशु दीक्षित (23) ने हाल ही में चेन्नई स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) से कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया है। एक ही परिवार के भाई-बहन का एक साथ सेना में अधिकारी बनना अपने आप में दुर्लभ उपलब्धि मानी जा रही है।

मानसी दीक्षित ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी मैथ ऑनर्स के साथ एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है, जबकि उनके भाई प्रियांशु दीक्षित ने गलगोटिया विश्वविद्यालय से गणित ऑनर्स की शिक्षा प्राप्त की। प्रियांशु की बचपन से ही सेना में जाने की इच्छा थी और उन्होंने अपनी बहन को भी आर्म्ड फोर्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। दोनों ने लगातार मेहनत और तैयारी कर इस लक्ष्य को हासिल किया।

मानसी ने बताया कि उन्होंने पहले भारतीय वायुसेना में पायलट बनने का प्रयास किया था, लेकिन मात्र एक सेंटीमीटर की ऊंचाई कम होने के कारण वह उस चयन में सफल नहीं हो सकीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य तय किया। सर्विस सिलेक्शन बोर्ड द्वारा उनका चयन पांच बार हुआ, जिसके बाद उन्होंने अंतिम रूप से सेना में जाने का निर्णय लिया।

प्रियांशु ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए कहा कि परिवार ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। माता-पिता ने पढ़ाई के दौरान हर कदम पर सहयोग किया और स्कूल-कॉलेज आने-जाने तक में उनका पूरा ध्यान रखा। उनकी प्रेरणा और सहयोग के कारण ही आज दोनों भाई-बहन यह मुकाम हासिल कर सके हैं।

मानसी ने बताया कि भाई के साथ प्रशिक्षण करने के कारण उन्हें कभी भी अकेलापन महसूस नहीं हुआ और दोनों ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए कठिन प्रशिक्षण को पूरा किया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। गांव और जिले के लोग भी इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं और दोनों को बधाई दे रहे हैं।