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Friday, May 8, 2026
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देहरादून पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कानपुर के छात्र-छात्राओं एवं 8 शिक्षकों के दल ने यूपी विधानसभा का शैक्षिक भ्रमण किया

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लखनऊ: देहरादून पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल (Dehradun Public Senior Secondary School), कानपुर (Kanpur) के 43 छात्र-छात्राओं एवं 8 शिक्षकों के दल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा का शैक्षिक भ्रमण किया। ‘ए स्टेप टुवर्ड्स प्रैक्टिकल लर्निंग एंड सिविक अवेयरनेस’ थीम के अंतर्गत आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था, संसदीय परंपराओं एवं शासन प्रणाली की कार्यप्रणाली से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था।

भ्रमण के दौरान छात्र-छात्राओं ने विधानसभा भवन की ऐतिहासिक एवं स्थापत्य विशेषताओं का अवलोकन किया तथा सदन की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की भूमिका एवं कानून निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने विधानसभा की बैठक व्यवस्था, विभिन्न समितियों की कार्यशैली तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी निकट से समझा।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से शिष्टाचार भेंट भी की। श्री महाना ने छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए विधानसभा की भूमिका, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संसदीय परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और विद्यार्थियों को संविधान एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जागरूक होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का संदेश भी दिया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य अशीष शुक्ला के नेतृत्व में आए शिक्षकों में अभिषेक कुमार दीक्षित, अनिल कुमार, शैलजा शुक्ला, अनीता मिश्रा, शोभित शर्मा, आकाश सिंह एवं आरना शुक्ला शामिल रहे। शिक्षकों ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों में जागरूकता, नेतृत्व क्षमता एवं नागरिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

विद्यालय प्रबंधन की ओर से कहा गया कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभवों से जोड़ना भी आवश्यक है। विद्यार्थियों ने विधानसभा भ्रमण को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं यादगार अनुभव बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।

लोन के नाम पर महिलाओं से लाखों की ठगी, ऑफिस पर ताला लगाकर आरोपी फरार, जनता लगा रही न्याय की गुहार

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किशनगंज: बिहार के किशनगंज (Kishanganj) जिला अंतर्गत ठाकुरगंज के जिलेबिया मोड़ पर गुरुवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब दर्जनों महिलाओं (Women) ने एक कथित फाइनेंस कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ठगी का शिकार हुई इन महिलाओं ने कार्यालय के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। आरोप है कि कंपनी ने आसान किस्तों पर लोन दिलाने का झांसा देकर सैकड़ों महिलाओं से अवैध वसूली की और अब रातों-रात चंपत हो गई है।

​पीड़ित महिलाओं ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि संस्था के प्रतिनिधियों ने उन्हें ‘आसान लोन प्रक्रिया’ का लालच दिया था। ठगी को अंजाम देने के लिए जालसाजों ने सिलाई मशीन और वॉशिंग मशीन जैसे आकर्षक ऑफर्स का सहारा लिया। महिलाओं को विश्वास दिलाया गया था कि बहुत कम कागजी कार्रवाई के साथ उन्हें मोटी रकम लोन के रूप में मिल जाएगी। इसी भरोसे में आकर गरीब परिवारों की इन महिलाओं ने अपनी गाढ़ी कमाई और कई ने दूसरों से उधार लेकर पैसे जमा कर दिए।

​मामले में मुख्य आरोपी के रूप में रंजीत सिंह नामक व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है। महिलाओं के अनुसार, 3 मई को रंजीत ने 11 महिलाओं के एक समूह से सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज लिए थे। उसने दावा किया था कि 7 मई को उनका सिबिल (CIBIL) स्कोर चेक किया जाएगा और उसी दिन लोन की राशि स्वीकृत कर दी जाएगी। प्रत्येक महिला से प्रोसेसिंग और अन्य शुल्कों के नाम पर 6,000 रुपये वसूले गए। उन्हें भरोसा दिया गया था कि उसी दिन रात 8 बजे तक लोन की राशि उनके बैंक खातों में क्रेडिट हो जाएगी।

​जब गुरुवार सुबह तक महिलाओं के खातों में पैसे नहीं आए, तो उन्होंने रंजीत सिंह से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। घबराई हुई महिलाएं जब जिलेबिया मोड़ स्थित कंपनी के दफ्तर पहुंचीं, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दफ्तर खाली था और सभी कर्मचारी वहां से फरार हो चुके थे।

​ठगी का शिकार हुई इन महिलाओं में भारी आक्रोश है। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि वे पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं और लोन की उम्मीद में उन्होंने कर्ज लेकर कंपनी को पैसे दिए थे। मौके पर जमा भीड़ ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन से इस फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच करने और फरार आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उनके पैसे वापस दिलाने की मांग की है।

 

विकास नगर अग्निकांड : आर आर लाइफवन फाउंडेशन ने पीड़ित परिवारों तक पहुंचाया राहत का सहारा

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– भोजन वितरण कर संस्था ने दिया मानवता और संवेदना का संदेश

लखनऊ। विकास नगर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रभावित परिवारों के सामने उत्पन्न संकट के बीच सामाजिक संस्थाएं राहत कार्य में जुटी हुई हैं। इसी क्रम में आर आर लाइफवन फाउंडेशन द्वारा अग्निपीड़ित परिवारों के बीच भोजन वितरण कार्यक्रम आयोजित कर मानवीय संवेदना का परिचय दिया गया।संस्था प्रमुख सौरभ गुप्ता खुद मौके पर मौजूद रह पीड़ितों का दर्द बांटते रहे।

संस्था के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने प्रभावित परिवारों तक पहुंचकर ताजा एवं पौष्टिक भोजन वितरित किया। राहत वितरण के दौरान महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। संस्था के कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में समाज उनके साथ खड़ा है।

फाउंडेशन की ओर से कहा गया कि “साथ मिलकर दर्द को कम करेंगे, आशा की नई किरण जगाएंगे” केवल एक संदेश नहीं बल्कि संस्था का संकल्प है। संस्था लगातार जरूरतमंदों की मदद, समाज में सहयोग की भावना और मानवता की सेवा के लिए कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान संस्था के सदस्यों ने कहा कि विकास नगर अग्निकांड से प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाना बेहद आवश्यक था। इसी उद्देश्य से भोजन वितरण अभियान चलाया गया ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके।

आरआर लाइफवन फाउंडेशन ने लोगों से भी अपील की कि जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए आगे आएं और संवेदनशील समाज निर्माण में सहयोग करें। संस्था ने सेवा कार्य में योगदान देने वाले सभी सहयोगियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।

जौनपुर: दोनों हाथ बांधकर आरोपियों ने बुजुर्ग को नदी में फेका, पुरानी रंजिश के चलते दिया वारदात को अंजाम

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जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर (Jaunpur) में केराकत कोतवाली क्षेत्र स्थित नाउपुर गांव में पुरानी रंजिश को लेकर एक वृद्ध की निर्मम हत्या (murder) किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने 62 वर्षीय बंगाली निषाद को पकड़कर नाव के जरिए गहरे पानी में ले जाकर नदी में फेंक दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

परिजनों के अनुसार बंगाली निषाद बीते बुधवार शाम बाजार से सब्जी लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया और जबरन अपने साथ ले गए। काफी देर तक घर न पहुंचने पर परिवार वालों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में घटना की सूचना केराकत पुलिस को दी गई। पुलिस ने मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम नाव से गांव से करीब दो किलोमीटर दूर नदी के गहरे पानी तक पहुंची जहां से बंगाली निषाद का शव बरामद किया गया। शव के दोनों हाथ बंधे होने से हत्या की आशंका और गहरा गई. घटना के बाद इलाके में सनसनी और दहशत का माहौल है।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हिरासत में लिए गए लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा।

 

स्मार्ट मीटर के झटके से घिरे एके शर्मा! जनता के गुस्से के बाद ऊर्जा विभाग छिनने के संकेत, संघ ने सरकार को दी थी सख्त चेतावनी

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लखनऊ

प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उठे भारी विरोध और जनता के गुस्से ने आखिरकार सरकार को अपने फैसले पर यू-टर्न लेने के लिए मजबूर कर दिया। प्रदेशभर में बढ़ती नाराजगी, बिजली कटौती और बढ़े हुए बिलों की शिकायतों के बीच सरकार के खिलाफ माहौल बनने लगा था। संघ और भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार संगठन स्तर से सरकार को साफ फीडबैक दिया गया कि यदि स्मार्ट प्रीपेड मीटर का फैसला जल्द वापस नहीं लिया गया, तो आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि जल्द होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से ऊर्जा विभाग वापस लिया जा सकता है। भाजपा और संघ के उच्च स्तर पर इस मुद्दे को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। माना जा रहा है कि स्मार्ट मीटर विवाद ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है, जिसका असर सीधे जनता के बीच दिखाई दिया।

दरअसल, प्रदेश में करीब 3.58 करोड़ घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। फरवरी 2026 तक लगभग 87 लाख घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे, जिनमें से 82 लाख स्मार्ट पोस्टपेड मीटर थे। आरोप है कि विभाग ने उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही इन मीटरों को प्रीपेड सिस्टम में बदलना शुरू कर दिया। जनवरी से यह प्रक्रिया तेज हुई और मार्च-अप्रैल आते-आते बकाया दिखाकर बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू हो गई।

सबसे ज्यादा नाराजगी तब बढ़ी जब विभाग ने एक साथ करीब 5 लाख घरों की बिजली निगेटिव बैलेंस बताकर काट दी। कई उपभोक्ताओं ने रिचार्ज कराने के बाद भी घंटों और कई जगह दिनों तक बिजली सप्लाई बहाल न होने की शिकायत की। लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए, जिसके बाद विभाग ने तकनीकी खराबी का हवाला देकर सफाई दी।

सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें बिना बिजली उपयोग के भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर में यूनिट बढ़ने के दावे किए गए। इससे आम लोगों के बीच यह धारणा मजबूत होती चली गई कि स्मार्ट मीटर तेज चलते हैं और अधिक बिल भेज रहे हैं। हालांकि बिजली विभाग इस डर और भ्रम को दूर करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ।

उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह भी रही कि बिल संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए कोई मजबूत व्यवस्था नहीं थी। हेल्पलाइन नंबर 1912 पर दर्ज शिकायतें बिना समाधान के बंद किए जाने के आरोप लगे। वहीं, सोलर प्लांट लगाने वाले उपभोक्ताओं ने भी विभाग पर गंभीर सवाल उठाए। आरोप है कि कई जगह नेट मीटर हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा दिए गए, जिससे सोलर ऊर्जा का समायोजन बंद हो गया और लोगों को भारी-भरकम बिजली बिल भेजे गए।

स्मार्ट मीटर विवाद अब केवल तकनीकी या बिजली विभाग का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। सरकार अब जनता की नाराजगी को शांत करने और चुनावी नुकसान से बचने के लिए डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई दिखाई दे रही है।

तमिलनाडु की नई सरकार में शामिल हुई कांग्रेस, दो मंत्री पद और राज्यसभा सीट पर बनी सहमति

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चेन्नई। तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बीच कांग्रेस ने अभिनेता-राजनेता विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) सरकार में शामिल होने का फैसला कर लिया है। कांग्रेस और टीवीके के बीच हुई बातचीत के बाद दो मंत्री पद और एक राज्यसभा सीट को लेकर सहमति बनने की जानकारी सामने आई है। इससे राज्य की राजनीति में नए गठबंधन समीकरण मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं।
तमिलनाडु कांग्रेस परिषद के अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगई ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने सरकार में शामिल होने को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस को सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने जा रही हैं, जबकि विभागों को लेकर अंतिम औपचारिक घोषणा जल्द की जाएगी।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सरकार गठन के लिए टीवीके को कांग्रेस, वामपंथी दलों और अन्य सहयोगी दलों का समर्थन मिला है। कांग्रेस के सरकार में शामिल होने के बाद विजय सरकार को विधानसभा में और मजबूती मिलेगी। वहीं गठबंधन सहयोगियों के बीच मंत्री पदों और विभागों के बंटवारे पर भी चर्चा अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
तमिलनाडु में पहली बार विजय के नेतृत्व में नई राजनीतिक व्यवस्था बन रही है, जिसे लेकर समर्थकों में भारी उत्साह है। माना जा रहा है कि कांग्रेस की भागीदारी से सरकार को राजनीतिक स्थिरता और राष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूती मिलेगी।