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Sunday, February 15, 2026
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बोर्ड परीक्षा की तैयारी के बीच गांव में अंधेरा, 5 दिन से ठप बिजली सप्लाई

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अमृतपुर फर्रुखाबाद: बोर्ड परीक्षाओं (board exams) की तैयारियों के बीच बिजली संकट ने छात्रों की परेशानी बढ़ा दी है। क्षेत्र के थाना अंतर्गत ग्राम रामप्रसाद नगला में पिछले पांच दिनों से बिजली आपूर्ति (power supply) पूरी तरह बाधित है, जिससे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

प्रदेश सरकार द्वारा गांव-गांव तक बिजली व्यवस्था सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। 18 फरवरी से शुरू होने जा रही बोर्ड परीक्षाओं को लेकर छात्र-छात्राएं दिन-रात तैयारी में जुटे हैं, ऐसे में बिजली कटौती उनके भविष्य पर सीधा असर डाल रही है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में करीब 500 से अधिक की आबादी है और लगभग 12 विद्युत कनेक्शन हैं। एक बिजली का खंभा टूटा पड़ा है, जिसकी सूचना कई बार विभाग को दी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लगातार अंधेरे के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है और ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

इस संबंध में जब विभाग के अवर अभियंता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि गांव की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। साथ ही कई उपभोक्ताओं पर लंबे समय से बिजली बिल बकाया है, जिसको लेकर पूर्व में चेतावनी भी दी गई थी। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि दो दिन के भीतर विद्युत सप्लाई को दुरुस्त कर गांव में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

ग्रामीणों ने मांग की है कि बोर्ड परीक्षा को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर बिजली व्यवस्था तुरंत ठीक की जाए, ताकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो।

थर्ड हैंड साइकिल से मल्टीनेशनल पहचान तक: 42 वर्षीय सौरभ गुप्ता ने लिखी सफलता की नई इबारत

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लखनऊ /रायबरेली: कभी थर्ड हैंड साइकिल (third-hand bicycle)  से सफर करने वाले युवा ने आज सफलता के ऐसे आयाम छू लिए हैं कि उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। 42 वर्षीय सौरभ गुप्ता ने संघर्षों के बीच अपने सपनों को आकार दिया और आज वे लाइफ वन वैलनेस प्राइवेट लिमिटेड (Life One Wellness Private Limitedके माध्यम से हजारों परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने का दावा करते हैं।

रायबरेली की साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले सौरभ गुप्ता के पास शुरुआत में संसाधन सीमित थे। बताया जाता है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत छोटे स्तर पर की, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच ने उन्हें आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उन्होंने हेल्थ सेक्टर में संभावनाएं तलाशीं और एक व्यवस्थित नेटवर्क तैयार किया।

कंपनी सूत्रों के अनुसार,करीब 20 हजार से अधिक सक्रिय सहयोगी नेटवर्क से जुड़े हैं।प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों को आय के अवसर मिल रहे हैं।उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली, हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों में वितरण व्यवस्था स्थापित की गई है।सौरभ गुप्ता को कंपनी में एम डी (लीडरशिप डेवलपमेंट हेड) के रूप में देखा जाता है और सहयोगी उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं।

कंपनी हेल्थ से जुड़े विभिन्न उत्पाद बनाती है। प्रचार सामग्री के अनुसार, इनके उत्पाद निम्न स्वास्थ्य क्षेत्रों में उपयोग के लिए तैयार किए जाते हैं शुगर (डायबिटीज) सपोर्ट,

हाई ब्लड प्रेशर सपोर्ट,हार्ट, लिवर और किडनी हेल्थ हार्मोनल बैलेंस,बवासीर (पाइल्स) सपोर्ट जबरदस्त है।

कंपनी का दावा है कि इन उत्पादों ने कई उपभोक्ताओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

रोस्टेड मसालों का बढ़ता बाजार

हेल्थ सेगमेंट के साथ कंपनी ने रोस्टेड मसालों के क्षेत्र में भी कदम रखा है। नियंत्रित रोस्टिंग तकनीक के माध्यम से स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखने का दावा किया जाता है। बाजार में इन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ने की बात कही जा रही है।

कंपनी का अल्कलाइज़र 5.0 स्टील वाटर जग भी उपभोक्ताओं के बीच चर्चा में है। दावा किया जाता है कि यह पानी के पी एच और ओआरपी स्तर में सुधार करता है। स्टेनलेस स्टील डिजाइन और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग बढ़ रही है।

सामाजिक प्रभाव और युवा प्रेरणा

सौरभ गुप्ता की सफलता की कहानी युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। उनका मानना है कि “बड़ा सोचो, निरंतर सीखो और टीम के साथ आगे बढ़ो” यही सफलता का मूल मंत्र है।

आज रायबरेली से शुरू हुई यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। संघर्ष से सफलता तक की यह यात्रा न केवल एक उद्यमी की कहानी है, बल्कि हजारों परिवारों की आशा और आत्मनिर्भरता की दास्तान भी है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आतंकवादियों के निर्माण की फैक्ट्रियां हैं मदरसे, इन पर प्रतिबंध लगना चाहिए: ईश्वर दास ब्रह्मचारी

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फर्रुखाबाद| आवास विकास कालोनी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हिंदू सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने समाज, शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक परंपराओं पर अपने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन में बड़ी संख्या में संघ पदाधिकारी, संत-महात्मा और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कुछ वक्ताओं ने मदरसों को लेकर विवादित बयान भी दिए, जिन पर चर्चा तेज हो गई है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय ने गुरुकुल पद्धति को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के माध्यम से बच्चों में संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मदरसों की निगरानी और नियंत्रण की बात कही और समाज की एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए दुर्वासा ऋषि आश्रम के महंत ईश्वर दास ब्रह्मचारी ने सनातन परंपरा की रक्षा और समाज की एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को एक सूत्र में बांधकर सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करनी होगी। अपने संबोधन में उन्होंने मदरसों को लेकर कड़े शब्दों का प्रयोग किया और उन पर प्रतिबंध की मांग की, जिससे कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

सम्मेलन में वक्ताओं ने समाज को जागरूक और संगठित रहने का संदेश दिया। हालांकि मदरसों को लेकर दिए गए बयानों को लेकर विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और आयोजकों ने इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

भारत–पाकिस्तान: विश्व कप में सबसे बड़ा महा मुकाबला आज

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आर प्रेमदासा मैदान में शाम सात बजे भिड़ंत, बादलों की दस्तक के बीच रोमांच चरम पर, क्या हाथ मिलाए गए भारतीय खिलाड़ी, उस्मान तारीख की गेंदबाजी सबसे बड़ा सवाल

नई दिल्ली/कोलंबो। विश्व कप के सबसे बहुप्रतीक्षित मुकाबले में आज भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने होंगी। शाम सात बजे से आर प्रेमदासा मैदान पर खेल शुरू होगा, जबकि सिक्का उछाल साढ़े छह बजे होगा। शनिवार रात से रुक-रुक कर वर्षा हो रही है, किंतु मुकाबले के समय वर्षा की संभावना बहुत कम बताई जा रही है। यदि मौसम बाधा बना तो दोनों टीमों को एक-एक अंक से संतोष करना पड़ सकता है, क्योंकि अतिरिक्त दिन की व्यवस्था नहीं है।

भारत इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दो बार विजेता रह चुका है। पहली बार खिताब जीतते समय उसने पाकिस्तान को ही पराजित किया था। दूसरी ओर पाकिस्तान भी एक बार चैंपियन बन चुका है और दो अवसरों पर उपविजेता रहा है। आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो विश्व कप में अब तक खेले गए आठ मुकाबलों में से सात में भारत ने जीत दर्ज की है, जिससे मनोवैज्ञानिक बढ़त स्पष्ट दिखाई देती है।

भारतीय दल लगातार दस मुकाबले जीतकर आत्मविश्वास से भरा हुआ है। शीर्ष क्रम में ईशान किशन और कप्तान सूर्यकुमार यादव अच्छी लय में हैं, जबकि हार्दिक पंड्या मध्यक्रम में आक्रामक भूमिका निभा रहे हैं। गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह की सटीकता और कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती तथा अक्षर पटेल की फिरकी विरोधी दल पर दबाव बना सकती है। हालांकि पिछली दो भिड़ंतों में भारतीय बल्लेबाजों को धीमी और घूमती गेंदों पर कठिनाई हुई है, जो आज भी चुनौती बन सकती है।

पाकिस्तान की शक्ति उसकी गेंदबाजी मानी जा रही है। शाहीन अफरीदी नई गेंद से शुरुआती झटके देने में सक्षम हैं। मध्य ओवरों में अबरार अहमद, शादाब खान और उस्मान तारिक किफायती साबित हो सकते हैं। बल्लेबाजी में साहिबजादा फरहान ने अब तक प्रभाव छोड़ा है, किंतु अन्य बल्लेबाजों को जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि शीर्ष क्रम विफल रहा तो पाकिस्तान पर दबाव बढ़ सकता है।

आर प्रेमदासा मैदान की पिच पहली पारी में अपेक्षाकृत बेहतर रहती है, किंतु दूसरी पारी में सतह टूटने लगती है और गेंद रुककर आती है। ऐसे में सिक्का उछाल जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी को प्राथमिकता दे सकती है। यहां अब तक गिरे कुल इकतालीस विकेटों में तेज और फिरकी गेंदबाजों का योगदान लगभग समान रहा है, जो संतुलित लेकिन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का संकेत देता है।

भारतीय हरफनमौला अभिषेक शर्मा अस्वस्थता से उबरकर अभ्यास में लौट आए हैं और आज अंतिम एकादश में स्थान पा सकते हैं। उनकी उपस्थिति से दल को संतुलन मिलेगा।

इस बहुप्रतीक्षित मुकाबले में खेल भावना की भी परीक्षा होगी। पिछली भिड़ंतों के बाद दोनों दलों के खिलाड़ियों के व्यवहार पर चर्चा रही थी। ऐसे में आज मैदान पर प्रतिस्पर्धा के साथ शालीनता की भी कसौटी होगी।
संभावित अंतिम एकादश
भारत:
अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव अथवा अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह।
पाकिस्तान:
साहिबजादा फरहान, सईम अयूब, सलमान अली आगा (कप्तान), बाबर आजम, उस्मान खान (विकेटरक्षक), शादाब खान, मोहम्मद नवाज, फहीम अशरफ, शाहीन अफरीदी, उस्मान तारिक, अबरार अहमद।

करोड़ों दर्शकों की निगाहें इस महामुकाबले पर टिकी हैं। बादलों के साए, आंकड़ों का दबाव और प्रतिष्ठा की जंग—सब मिलकर इसे विश्व कप का सबसे बड़ा आकर्षण बना रहे हैं। शाम होते-होते स्पष्ट हो जाएगा कि इतिहास की पटकथा में आज कौन नया अध्याय जोड़ता है।

शंकराचार्य प्रकरण और बदलती राजनीतिक भाषा : मर्यादा बनाम मुकाबला

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उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों जिस प्रकार की तीखी बयानबाजी से गुजर रही है, वह केवल दलगत प्रतिस्पर्धा का संकेत नहीं देती, बल्कि राजनीतिक संवाद की दिशा और स्तर पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। राजधानी लखनऊ में आयोजित समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर किया गया प्रहार इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।
‘मुख्यमंत्री’ शब्द का राजनीतिक अर्थ
अखिलेश यादव का यह कहना कि “मुख्यमंत्री शब्द का अर्थ बदल गया है” केवल एक तंज नहीं, बल्कि शासन शैली पर सवाल खड़ा करने का प्रयास है। लोकतंत्र में पद केवल संवैधानिक दायित्व नहीं होता, वह प्रतीक भी होता है—संयम का, संवाद का और संतुलन का। जब विपक्ष यह आरोप लगाता है कि भाषा मर्यादा से परे जा रही है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश देता है कि सत्ता का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
हालांकि राजनीति में व्यंग्य और कटाक्ष कोई नई बात नहीं है, किंतु जब यह विमर्श व्यक्तिगत या धार्मिक संवेदनाओं को छूने लगे, तब उसका प्रभाव अधिक व्यापक हो जाता है।
शंकराचार्य प्रकरण : आस्था और राजनीति का संगम
अखिलेश यादव ने अपने वक्तव्य में शंकराचार्य जैसे पूज्य संतों के सम्मान का मुद्दा उठाया। उनका यह कहना कि “शंकराचार्य शंका से परे होते हैं” एक सांस्कृतिक आग्रह है। भारतीय समाज में धार्मिक आस्थाओं का स्थान अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में यदि किसी भी पक्ष से संतों या धार्मिक प्रतीकों को लेकर विवादास्पद टिप्पणी होती है, तो उसका राजनीतिक असर स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
यहां मूल प्रश्न यह नहीं है कि आरोप किसने लगाए, बल्कि यह है कि क्या राजनीति में धार्मिक प्रतिष्ठानों और संतों के संदर्भ में संयम बरता जा रहा है? यदि नहीं, तो यह प्रवृत्ति भविष्य में सामाजिक समरसता के लिए चुनौती बन सकती है।
“हमारे पास फूल आ गए हैं, तो किसी का फूल मुरझाता जा रहा है”—यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रतीकों की ओर संकेत करती है। चुनाव चिह्नों और प्रतीकों के माध्यम से संदेश देना भारतीय राजनीति की पुरानी परंपरा रही है। किंतु जब यह प्रतिस्पर्धा व्यंग्यात्मक रूप ले लेती है, तो वह समर्थकों को उत्साहित करती है, परंतु राजनीतिक संवाद को अधिक तीखा भी बना देती है।
अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था की स्थिति, जनसुनवाई के दौरान सांड घुसने की घटना, रक्षा सौदों के दावे तथा पंचायत चुनाव में देरी जैसे मुद्दों को भी उठाया। ये वे विषय हैं जिनका सीधा संबंध शासन और प्रशासन से है। विपक्ष का दायित्व है कि वह सरकार से जवाब मांगे, और सरकार का दायित्व है कि वह पारदर्शिता से उत्तर दे।
यदि पंचायत चुनाव में देरी या मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगते हैं, तो निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं। इसी प्रकार कानून-व्यवस्था का मुद्दा सदैव राजनीतिक बहस के केंद्र में रहता है, क्योंकि यह आम नागरिक की सुरक्षा से जुड़ा है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राजनीतिक विमर्श किस दिशा में जा रहा है। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, किंतु संवाद की भाषा यदि लगातार आक्रामक होती जाए, तो वह सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकती है।
राजनीति में प्रतिस्पर्धा आवश्यक है, परंतु मर्यादा भी उतनी ही आवश्यक है। धार्मिक आस्थाओं, संवैधानिक पदों और प्रशासनिक संस्थाओं के संदर्भ में शब्दों का चयन अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश की राजनीति देश की राजनीति को भी प्रभावित करती है। ऐसे में यहां के नेताओं की भाषा और आचरण व्यापक संदेश देते हैं। यह समय है जब सभी पक्षों को आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या राजनीतिक लाभ के लिए संवाद की मर्यादा को दांव पर लगाया जाना उचित है?
अखिलेश यादव के वक्तव्य ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में राजनीतिक तापमान बढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि सत्ता पक्ष किस प्रकार प्रतिक्रिया देता है और क्या यह बहस मुद्दों पर केंद्रित रहती है या फिर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के दायरे में सिमट जाती है।
लोकतंत्र की मजबूती इस बात में है कि असहमति भी गरिमा के साथ व्यक्त हो। यदि राजनीतिक नेतृत्व इस संतुलन को साध लेता है, तो मतभेद भी स्वस्थ विमर्श का रूप ले सकते हैं—अन्यथा बयानबाजी का यह दौर लोकतांत्रिक संस्कृति को क्षति पहुंचा सकता है।

नवाबगंज में शिवरात्रि पर गूंजे “बम बम भोले”, पुठरी के ऐतिहासिक शिव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नवाबगंज में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पुठरी स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर पुठरी में सुबह से ही “बम बम भोले” और “हर हर महादेव” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर में देखने को मिली।

भक्तों ने भगवान भोलेनाथ को गंगाजल, दूध, बेल पत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर विधि-विधान से जलाभिषेक किया। दिनभर मंदिर में पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा। मंदिर के पुजारी सुरेश भारती ने शिवलिंग की पूजा के उपरांत भक्तों के लिए मंदिर के पट खोले। एटा, मैनपुरी, बदायूं, कन्नौज सहित नवाबगंज और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में कांवड़िए भी जलाभिषेक के लिए पहुंचे।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर का एक द्वार बंद रखा गया और पुरुषों व महिलाओं को बारी-बारी से प्रवेश दिया गया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित कालेश्वर महादेव और माता दुर्गा की भी पूजा-अर्चना की। मंदिर के आसपास लगे मेले में लोगों ने पूजा सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी की, जिससे क्षेत्र में रौनक बनी रही।

शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना प्रभारी राजीव कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। बढ़ती भीड़ को देखते हुए माइक से लगातार अनाउंसमेंट कर श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की गई। इसके अलावा नगर के मुख्य शिव मंदिर, बरतल शिव मंदिर, पुराना गनीपुर शिव मंदिर और बरतल स्थित खेरे शिव मंदिर समेत अन्य शिवालयों में भी भक्तों ने पूरे श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा-अर्चना की।