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Monday, June 8, 2026
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राष्ट्रपति ने 51 वीर जवानों को किया सम्मानित, गगनयान के अंतरिक्ष यात्री भी बने गौरव के प्रतीक

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नई दिल्ली: राष्ट्र की सुरक्षा और सेवा में अदम्य साहस का परिचय देने वाले 51 बहादुर सैनिकों, पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों के जवानों को सोमवार को राष्ट्रपति भवन (President House) में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2026 (फेज-1) में सम्मानित किया गया। भारत की राष्ट्रपति (President) द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने वीरता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करने वाले इन कर्मियों को प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार प्रदान किए।

इस वर्ष सम्मानित होने वालों में 7 कीर्ति चक्र, 15 वीर चक्र और 29 शौर्य चक्र विजेता शामिल रहे। इन योद्धाओं ने आतंकवाद-रोधी अभियानों, चुनौतीपूर्ण सुरक्षा मिशनों और जोखिम भरी परिस्थितियों में असाधारण साहस दिखाते हुए देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

समारोह का एक खास आकर्षण भारतीय वायुसेना के अधिकारी और भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन Gaganyaan Mission के लिए चयनित अंतरिक्ष यात्री प्रशांत बालकृष्णन नायर रहे। ग्रुप कैप्टन (अब एयर कमोडोर) नायर को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण नेतृत्व, साहस और समर्पण के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। वायुसेना में उन्हें उनके कॉल साइन “पापा” के नाम से भी जाना जाता है।

समारोह में उन वीर सपूतों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। राष्ट्रपति ने 2 कीर्ति चक्र, 3 वीर चक्र और 1 शौर्य चक्र मरणोपरांत प्रदान किए। शहीदों के परिजनों ने भावुक माहौल में ये सम्मान ग्रहण किए, जहां पूरा सभागार उनके साहस और त्याग के प्रति सम्मान से भर उठा।

सम्मान पाने वालों में सेना की पैरा स्पेशल फोर्स, राष्ट्रीय राइफल्स, असम राइफल्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान शामिल रहे। इन वीरों ने आतंकवाद-रोधी अभियानों, दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों और अत्यंत जोखिमपूर्ण ऑपरेशनों के दौरान असाधारण बहादुरी का परिचय दिया।

रक्षा अलंकरण समारोह ने एक बार फिर उन नायकों को राष्ट्रीय सम्मान दिलाया, जो अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करते हैं। उनके साहस, समर्पण और बलिदान की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

 

6 साल बाद मिला न्याय: दहेज के लिए पत्नी की हत्या करने वाले पति को कोर्ट ने सुनाया 10 साल जेल की सजा

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जौनपुर: अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार सिंह की अदालत ने रामपुर थाना क्षेत्र के भिऊरा गांव में दहेज की मांग को लेकर हुई विवाहिता को प्रताड़ित करने और उसकी दहेज हत्या करने के दोषी पति दिनेश पटेल को कोर्ट (Court) ने 10 वर्ष कारावास (imprisonment) एवं 55,000 रुपए जुर्माना की सजा सुनाया। जुर्माना की आधी धनराशि वादिनी मृतका की मां को देने का आदेश हुआ।

बता दें कि मड़ियाहूं थाना क्षेत्र के बारी गांव निवासी मृतका की मां कमलावती ने घटना की प्राथमिकी रामपुर थाने में दर्ज कराया था। वादी के अनुसार कामलावती की पुत्री रेनू की शादी 21 नवंबर 2017 को दिनेश पटेल के साथ हुई थी। विवाह में काफी सामान दिया गया था। विवाह के बाद पति दिनेश व दोनों जेठानी दहेज में पांच लाख रुपए की मांग को लेकर रेनू को प्रताड़ित करते थे।

4 मार्च 2020 को 7:00 बजे सुबह रेनू के गांव के व्यक्ति ने मोबाइल से सूचना दिया कि रेनू को ससुराल वाले जान से मार कर उसके शव को कुएं में फेंक दिए हैं।सूचना पर मायके वाले रेनू के ससुराल पहुंचे तो ससुराल वाले फरार थे।

गांव वालों ने बताया कि पुलिस आई थी और रेनू के शव को कुएं से निकलकर थाने ले गई है। मायके वाले थाना रामपुर पहुंचे तो रेनू का शव देखा। उसके गले पर काले रंग का निशान था। ससुराल वाले उसे मार कर कुएं में फेंक दिए थे। पुलिस ने विवेचना करके कोर्ट में केस डायरी दाखिल किया । सरकारी वकील वीरेंद्र प्रताप मौर्य ने कोर्ट में गवाहों का बयान अंकित कराया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद दहेज हत्या में दोषी पति दिनेश पटेल को दोषी पाते हुए कोर्ट ने सजा सुनाया।

देवर-भाभी के प्रेम प्रसंग पर बवाल, गांव में अपमानित कर निकाले जाने का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

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महिला ने परिजनों पर मारपीट, धमकी और बच्चों से अलग करने का लगाया आरोप, सीओ बोले- मामले की जांच जारी

फर्रुखाबाद। नवाबगंज थाना क्षेत्र में देवर-भाभी के कथित प्रेम प्रसंग को लेकर एक परिवार का विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। महिला ने अपने परिजनों पर मारपीट, अपमानित करने, धमकी देने और घर से निकालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक और उसकी रिश्ते की भाभी के बीच नजदीकियां बढ़ गई थीं। दोनों के बीच लगातार संपर्क और मुलाकातों की जानकारी परिवार के अन्य सदस्यों को लग गई। इसके बाद परिवार ने महिला को युवक से दूरी बनाने की हिदायत दी और उस पर निगरानी बढ़ा दी।

आरोप है कि 17 मई को युवक महिला के घर ठंडा पानी लेने पहुंचा था। इसी दौरान घर के सदस्यों ने उसे उस कमरे में भेजा जहां महिला मौजूद थी। कुछ देर बाद कमरे को बाहर से बंद कर दिया गया और शोर मचाकर अन्य परिजनों को बुला लिया गया। परिजनों ने दोनों को एक साथ देखकर नाराजगी जताई और विवाद बढ़ गया।

महिला का आरोप है कि इसके बाद उसके और युवक के साथ मारपीट की गई। साथ ही उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और गांव छोड़ने की धमकी दी गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

घटना के बाद दोनों गांव छोड़कर विभिन्न स्थानों पर रहे। बाद में महिला फर्रुखाबाद पहुंची और पुलिस से संपर्क किया। पहले वह कादरीगेट थाने पहुंची, जहां घटना का क्षेत्राधिकार नवाबगंज होने के कारण उसे संबंधित थाने भेज दिया गया। नवाबगंज थाने में महिला ने तहरीर देकर कार्रवाई और अपने तीन बच्चों को वापस दिलाने की मांग की है।

क्षेत्राधिकारी अजय वर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों के बीच प्रेम संबंध होने की बात सामने आई है। लगभग दो सप्ताह पूर्व परिजनों ने दोनों को एक साथ पकड़ लिया था, जिसके बाद परिवार में विवाद हुआ। उन्होंने बताया कि महिला रविवार को थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई है। महिला ने अपने बच्चों को वापस दिलाने की मांग भी की है।

सीओ ने कहा कि महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है। सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने संबंधी आरोपों की भी पुष्टि कराई जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

गोवर्धन लीला के रस में डूबा दरौरा गांव, श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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बाबा बगलेश्वर मंदिर परिसर में चल रही कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन, भाजपा नेता शैलेन्द्र सिंह राठौर ने किया व्यास पीठ का सम्मान

कमालगंज। ग्राम दरौरा स्थित प्राचीन बाबा बगलेश्वर मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं।

कथा के दौरान कथा व्यास शास्त्री श्री प्रदीप कुमार द्विवेदी ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का विस्तृत और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्र के अहंकार का नाश करने के लिए अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं दिव्य लीलाओं का ऐसा मधुर वर्णन हुआ कि पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो गया।

सुंदर छायादार एवं भव्य बाबा बगलेश्वर मंदिर प्रांगण में आयोजित कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे मनोयोग से कथा श्रवण कर आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन और जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।

कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शैलेन्द्र सिंह राठौर भी पहुंचे। उन्होंने कथा व्यास शास्त्री श्री प्रदीप कुमार द्विवेदी का माल्यार्पण कर सम्मान किया तथा आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं।

कथा आयोजन को सफल बनाने में ग्राम प्रधान विनीत सिंह उर्फ कुक्कू, हरविन्द्र सिंह ‘कल्लू’, समरपाल सिंह, नीलू ठाकुर, शत्रुघ्न शुक्ला, हरिहर सिंह, गौरव सहित समस्त ग्रामवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए बैठने, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

ग्राम दरौरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

वस्त्रोद्योग के लिए नई कौशल विकास व्यवस्था तैयार हो, ग्रामोद्योग और माटीकला क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को मिले नई गति : मुख्यमंत्री

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पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री

उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होगा कुशल मानव संसाधन, प्रशिक्षण और रोजगार को जोड़ने पर जोर

ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

वित्तीय सहायता, कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन और विपणन सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए

लखनऊ, 08 जून:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वस्त्र क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप व्यापक कौशल विकास कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार की दृष्टि से देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उद्योगों को समय पर प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित न होकर युवाओं को रोजगार और आजीविका से जोड़ना होना चाहिए।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार समर्थ योजना के अंतर्गत अब तक 2.28 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि 1.60 लाख से अधिक प्रशिक्षार्थियों को रोजगार से जोड़ा गया है। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है और कुल प्रशिक्षार्थियों में उनका हिस्सा 87 प्रतिशत से अधिक है। वहीं उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से भी बड़ी संख्या में युवाओं को वस्त्र क्षेत्र से संबंधित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्त्र क्षेत्र में तकनीकी बदलाव अत्यंत तेजी से हो रहे हैं। ऑटोमेशन, आधुनिक मशीनरी तथा टेक्निकल टेक्सटाइल्स जैसे नए क्षेत्रों के विस्तार को देखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समयानुकूल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक उपयोगी और रोजगारपरक बनाया जाए।

बैठक में अधिकारियों ने वस्त्र क्षेत्र के लिए प्रस्तावित कौशल विकास व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें उद्योगों, प्रशिक्षण संस्थानों तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता, पारदर्शिता, निगरानी और रोजगार परिणामों को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्थाओं के विकास पर भी चर्चा हुई।

माटीकला क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जुड़ा हुआ है। मिट्टी से निर्मित उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बड़ी संख्या में कारीगर परिवारों की आजीविका का आधार भी हैं। उन्होंने माटीकला उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने, कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, सोलर चाक उपलब्ध कराने, नई तकनीक, बेहतर उपकरण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं से जोड़ने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 तक 1,331 इकाइयों की स्थापना की गई है। इन इकाइयों में 3,302.37 लाख रुपये का पूंजी निवेश हुआ है तथा 557.18 लाख रुपये की मार्जिन मनी सहायता उपलब्ध कराई गई है। माटीकला महोत्सवों, प्रदर्शनियों और मेलों के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 300 इकाइयों की स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने लंबित ऋण प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक उद्योगों को केवल संरक्षण की नहीं, बल्कि नवाचार, ब्रांडिंग, डिजिटलीकरण और आधुनिक बाजार से जुड़ाव की आवश्यकता है। माटीकला के उत्पादों को ई-कॉमर्स, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन प्रणालियों से जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रशिक्षण, बैंकों से समन्वय बनाकर वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन, विपणन और रोजगार सृजन की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

तकनीक की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को बनाएं पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल: मुख्यमंत्री

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पिछले एक दशक में विभागीय आय लगभग तीन गुना, डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर मुख्यमंत्री का जोर

पेपरलेस रजिस्ट्रेशन, जियो-टैगिंग और एआई आधारित प्रणाली को तेजी से लागू करने के निर्देश

पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित होंगे रजिस्ट्री कार्यालय, नागरिक सुविधाएं होंगी बेहतर

मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था से रुकेगी स्टाम्प शुल्क चोरी, घटेंगे विवाद

मुख्यमंत्री का निर्देश, सरल होंगे कानून, कहा,कॉरपोरेट पुनर्गठन, एलएलपी और रेरा से जुड़े प्रावधानों को समयानुकूल बनाने की आवश्यकता

लखनऊ, 08 जून:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश गतिविधियों और शहरीकरण की आवश्यकताओं के अनुरूप विभाग को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित, उत्तरदायी और जनसुविधा केंद्रित बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय आमजन के प्रत्यक्ष संपर्क वाले कार्यालय हैं, इसलिए वहां की व्यवस्थाएं आधुनिक, व्यवस्थित और नागरिक केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने उप निबंधक कार्यालयों को चरणबद्ध ढंग से पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की आवश्यकता बताई।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में प्रतिवर्ष लगभग 2.4 करोड़ लोगों का प्रत्यक्ष संपर्क होता है। इसे देखते हुए हेल्प डेस्क, टोकन एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष, डिजिटल सुविधाएं तथा अन्य नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग राज्य की राजस्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2016-17 में विभाग की सकल आय 11,613.84 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 32,598.49 करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में पंजीकृत लेखपत्रों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख से अधिक हो गई। मुख्यमंत्री ने इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए राजस्व वृद्धि के साथ सेवा गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस विभागीय सुधारों का प्रमुख आधार बनना चाहिए। संपत्ति एवं विवाह पंजीकरण में आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक और आईरिस आधारित सत्यापन, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन तथा खतौनी आधारित डिजिटल जांच जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाए। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली, अभिलेखों के डिजिटाइजेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली तथा जियो-टैगिंग व्यवस्था को तेजी से लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, विवाद कम करने और राजस्व अपवंचन रोकने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्तियों के मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे बाजार आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित होगा तथा मूल्यांकन संबंधी विवादों में कमी आएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश और औद्योगिक विकास का केंद्र बन रहा है। ऐसे में विधिक व्यवस्थाओं को भी वर्तमान आर्थिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं में स्पष्टता होने से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, अनावश्यक विवाद और मुकदमेबाजी कम होती है तथा कारोबार करने की सुगमता को बल मिलता है।

बैठक में कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण, सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी), शेयरधारिता में परिवर्तन, आवासीय सहकारी समितियों तथा रेरा के अंतर्गत विक्रय करारों से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में स्पष्ट और व्यावहारिक स्टाम्प शुल्क व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए ऐसा विधिक ढांचा तैयार किया जाए जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिले, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मजबूत हो, विवादों में कमी आए और राज्य के राजस्व हित भी सुरक्षित रहें।