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Wednesday, April 8, 2026
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नाला खुदाई के नाम पर गरीबों के आशियाने ढहाने पहुंचे निगम कर्मी, कांग्रेस के विरोध पर रुकी कार्रवाई

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शाहजहांपुर। नगर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मामूडी ककरा स्थित पुरानी व खाली पड़ी रेलवे लाइन किनारे बसे गरीब बेघर परिवारों के आशियानों पर बुधवार को कार्रवाई शुरू कर दी गई। बताया जा रहा है कि नाला खुदाई के नाम पर नगर निगम के कर्मचारी जेसीबी लेकर पहुंचे और बांस-बल्लियों व पन्नी से बने झोपड़ों को गिराने लगे। अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और गरीब परिवार खुद को बेघर होने से बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सूचना मिलते ही जिलाध्यक्ष रजनीश गुप्ता अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए और कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस समय मौसम लगातार खराब चल रहा है और कभी भी बारिश हो सकती है। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए गरीबों के घर उजाड़ना अमानवीय है।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि “पुरानी गलतियों को लोग भूले नहीं हैं, ऐसे में संवेदनशीलता के साथ काम करने की जरूरत है। विकास के नाम पर जनता को परेशान करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रजनीश गुप्ता ने संबंधित अधिकारी से फोन पर वार्ता कर इन परिवारों के लिए उचित व्यवस्था होने तक कार्रवाई रोकने की मांग की। इसके बाद जेसीबी द्वारा चल रही तोड़फोड़ की कार्रवाई को तत्काल रोक दिया गया। मौके पर अनिल श्रीवास्तव, गौरव त्रिपाठी, वकार आलम, अफजाल खान, सईद अंसारी व प्रत्यूष मिश्रा सहित कई लोग मौजूद रहे।

एलपीजी गैस आपूर्ति में देरी से उपभोक्ता परेशान

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संभल
एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति में देरी और केवाईसी (KYC) अधूरी होने के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग गैस एजेंसियों से बिना सिलेंडर के लौटने को मजबूर हैं, जबकि कुछ परिवारों को गैस खत्म होने के बाद चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, ओटीपी (OTP) मिलने के बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी में 8 से 10 दिन तक का समय लग रहा है। शहरी क्षेत्रों में गैस बुकिंग के बाद लगभग 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे उपभोक्ताओं की दैनिक जीवनचर्या पर सीधा असर पड़ रहा है।

जिले में करीब 20,000 ऐसे उपभोक्ता हैं जिन्होंने पिछले दो-तीन वर्षों से अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है। इस वजह से उनकी बुकिंग लंबित पड़ी है और उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। एजेंसियों द्वारा बार-बार केवाईसी अपडेट कराने की अपील की जा रही है, लेकिन कई उपभोक्ता अब भी इससे अनजान या लापरवाह बने हुए हैं।

कमर्शियल सिलेंडर की कमी का असर छोटे व्यापारियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। होटल संचालक और चाट-पकौड़ी बेचने वाले दुकानदार गैस न मिलने के कारण परेशान हैं। संभल कोतवाली क्षेत्र में संचालित 8 गैस एजेंसियां शहरी और आसपास के 50 से अधिक गांवों को सेवा देती हैं, लेकिन आपूर्ति में देरी के कारण कई व्यवसायियों ने कोयला भट्टी का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

हालांकि, जिला पूर्ति अधिकारी शिवि गर्ग का कहना है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। उनके अनुसार सभी गैस एजेंसियों पर पर्याप्त मात्रा में एलपीजी और कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध हैं, और आपूर्ति सुचारू रूप से की जा रही है।

जनपद में कुल 39 गैस एजेंसियां कार्यरत हैं, जिनसे 5 लाख से अधिक उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। इनमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लगभग 2 लाख लाभार्थी और करीब 750 कमर्शियल उपभोक्ता शामिल हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं की समस्याएं बनी हुई हैं, जिससे प्रशासनिक दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर साफ नजर आ रहा है।

दोहरा हत्याकांड: मुख्य आरोपी के भाइयों ने कोर्ट में किया आत्मसमर्पण

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बदायूं
चर्चित दोहरे हत्याकांड में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब दो फरार आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले आरोपी केशव और चंद्रशेखर हैं, जो मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह के सगे भाई बताए जा रहे हैं। घटना के बाद से दोनों लगातार फरार चल रहे थे और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी।

दोनों आरोपियों ने पहले ही अपने वकील के माध्यम से जेएम प्रथम सौम्या अरुण की अदालत में आवेदन दाखिल कर दिया था। इसके बाद बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे दोनों ने नाटकीय अंदाज में कोर्ट पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया।

यह मामला 12 मार्च को मूसाझाग थाना क्षेत्र के सैजनी गांव स्थित एचपीसीएल प्लांट में हुई दो अधिकारियों की दिनदहाड़े हत्या से जुड़ा है। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी थी। मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह पहले ही आत्मसमर्पण कर जेल जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच में सामने आई थी।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि इस हत्या की साजिश में अजय के भाई केशव सिंह और तहेरे भाई अभय प्रताप सिंह की भी अहम भूमिका थी। दोनों प्लांट में कार्यरत थे और घटना के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया था। इसी आधार पर पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या की साजिश रचने की धाराएं जोड़ी थीं और उनकी तलाश तेज कर दी गई थी।

इस बीच, पुलिस ने फरार आरोपियों पर इनाम भी घोषित किया था। डीआईजी अजय कुमार साहनी ने अभय प्रताप सिंह और केशव पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। हालांकि, इनाम घोषित होने के अगले ही दिन केशव ने अपने भाई चंद्रशेखर के साथ अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे मामले में नया मोड़ आ गया।

पुलिस अब दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। सीओ सिटी रजनीश उपाध्याय के अनुसार, कोर्ट ने रिमांड के लिए अगली तारीख तय कर दी है और पूछताछ के बाद मामले में और खुलासे होने की संभावना है। वहीं, फरार आरोपी अभय प्रताप सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

25 मिनट में 35 वाहनों की फिटनेस जांच पर उठे सवाल

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बरेली
ट्रांसपोर्ट नगर में वाहन फिटनेस जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि संभागीय निरीक्षक (आरआई) ने मात्र 25 मिनट में 35 वाहनों की फिटनेस जांच पूरी कर दी। इस हिसाब से एक वाहन पर औसतन 42 सेकंड का समय दिया गया, जो मानकों के अनुरूप जांच के लिए बेहद कम माना जा रहा है।

इतने कम समय में वाहन की चेसिस और इंजन नंबर का दस्तावेजों से सही मिलान करना भी मुश्किल है, जबकि फिटनेस जांच में ब्रेक, लाइट, प्रदूषण और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच जरूरी होती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जांच प्रक्रिया कितनी गंभीरता से की गई होगी।

मामले की पड़ताल के दौरान सामने आया कि ट्रांसपोर्ट नगर में दोपहर बाद वाहनों की लंबी कतार लगती है और आरआई के आने के बाद जल्दबाजी में जांच प्रक्रिया पूरी की जाती है। वहीं बिथरी चैनपुर स्थित स्वचालित परीक्षण केंद्र पर भी संदिग्ध गतिविधियां देखने को मिलीं, जहां कुछ वाहन कथित रूप से “सिंडिकेट” के जरिए प्राथमिकता से अंदर भेजे जा रहे थे।

वाहन मालिकों ने दलालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फिटनेस जल्दी और आसानी से कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। कुछ मामलों में बाहरी व्यक्तियों द्वारा 10 हजार रुपये तक लेने की बात सामने आई है। इससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हालांकि, एआरटीओ प्रशासन प्रवेश कुमार सरोज ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बाहरी व्यक्तियों का व्यवस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वसूली के आरोपों की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जिले में स्कूली वाहनों की निगरानी को लेकर भी स्थिति चिंताजनक है। यूपी-आईएसवीएमपी पोर्टल पर अब तक केवल 450 बसों का ही विवरण अपलोड किया गया है। प्रशासन ने इसे अनिवार्य करते हुए स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण और सत्यापन वाले वाहनों को वैध नहीं माना जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकारी जमीन पर बने मदरसा और दुकानें ढहाई गईं, ग्रामीणों ने उठाई समान कार्रवाई की मांग

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संभल
सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। असमोली थाना क्षेत्र के मुबारकपुर बंद गांव में स्थित मदरसा गौसुल और उससे जुड़ी पांच दुकानों को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने स्वयं ही तोड़ दिया। यह निर्माण खाद के गड्ढे और खेल के मैदान की करीब 700 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर किया गया था, जिसे राजस्व विभाग ने अवैध घोषित किया था।

राजस्व विभाग के अनुसार, गाटा संख्या 630 (खेल का मैदान) और गाटा संख्या 623 (खाद का गड्ढा) पर यह निर्माण किया गया था। 27 मार्च को प्रशासन ने भूमि की पैमाइश कराई और 28 मार्च को अवैध निर्माण हटाने का अल्टीमेटम जारी किया गया। इसके बाद 31 मार्च से ही स्थानीय लोगों ने मदरसा और दुकानों को स्वयं तोड़ना शुरू कर दिया था।

रविवार को जेसीबी मशीन की मदद से मदरसा, दुकानों और अन्य संरचनाओं को गिराया गया। इस दौरान मदरसा गेट, प्याऊ और अन्य निर्माण भी हटाए गए। हालांकि, जेसीबी ऑपरेटर ने मीनार गिरने के दौरान खतरे की आशंका जताते हुए आगे काम करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद बाकी हिस्सा ग्रामीणों ने खुद ही हटाया।

इस कार्रवाई के बीच गांव के लोगों ने विरोध भी जताया। ग्राम प्रधान पति हाजी मुनव्वर बब्बू ने कहा कि गांव में अन्य स्थानों पर भी ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे हैं, जिन्हें पहले हटाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रशासन को सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई करनी चाहिए, न कि चयनात्मक तरीके से।

इस मामले में प्रशासन की ओर से सख्ती भी दिखाई गई है। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के निर्देश पर राजस्व टीम गठित कर भूमि का सीमांकन और कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। टीम में तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कई लेखपाल शामिल हैं, जो पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि को पूरी तरह कब्जा मुक्त कराया जाएगा और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, ग्रामीणों की मांग है कि गांव में मौजूद सभी अवैध निर्माणों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो, ताकि किसी एक समुदाय को निशाना बनाने की भावना न बने।

रेल मंडल में सात रेलखंडों के दोहरीकरण की तैयारी

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बरेली
इज्जतनगर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले सात महत्वपूर्ण रेलखंडों के दोहरीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) के लिए 34.22 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। सर्वे पूरा होने के बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी।

मंडल की डीआरएम वीणा सिन्हा ने बताया कि उत्तराखंड समेत कई क्षेत्रों में रेलवे की परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इज्जतनगर मंडल से लंबी दूरी की ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी होगी, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

रेलवे बोर्ड ने 212 किलोमीटर लंबी बरेली-पीलीभीत-मैलानी-सीतापुर रेल लाइन के दोहरीकरण के सर्वे को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा कई अन्य रेलखंडों पर भी सर्वे कराया जाएगा, जिनमें भोजीपुरा-लालकुआं, काठगोदाम-लालकुआं, रामपुर-लालकुआं, भोजीपुरा बाइपास, भोजीपुरा-बरेली सिटी, कासगंज-मथुरा और पीलीभीत-मैलानी शामिल हैं।

वर्तमान में इज्जतनगर मंडल के अंतर्गत आने वाली अधिकांश रेल लाइनें एकल (सिंगल लाइन) हैं, जिसके कारण ट्रेनों के संचालन में देरी और क्षमता की समस्या बनी रहती है। दोहरीकरण होने से ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी और समयबद्धता में सुधार आएगा।

इस परियोजना से बरेली के साथ-साथ उत्तराखंड के कई जिलों, पीलीभीत, बदायूं, लखीमपुर, कासगंज, मथुरा और काठगोदाम जैसे क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अधिकारियों के अनुसार, दोहरीकरण के बाद न केवल यात्री सुविधाएं बेहतर होंगी बल्कि सुरक्षा, संरक्षा और परिचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। रेलवे का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस मंडल को आधुनिक और उच्च क्षमता वाले नेटवर्क में बदलना है, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिल सके।