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Wednesday, February 25, 2026
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पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की सख्ती से बदला माहौल, दलाल तंत्र पर शिकंजा; थाना अध्यक्ष की विदाई बनी चर्चा

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अमृतपुर फर्रुखाबाद: जनपद में कानून व्यवस्था (Law and order) को लेकर इन दिनों बड़ा बदलाव महसूस किया जा रहा है। आरती सिंह (Aarti Singh) के सख्त रुख के बाद कथित दलालों और बिचौलियों पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है। लंबे समय से चली आ रही शिकायतों—रेप पीड़िता का मुकदमा दर्ज न करना, गरीब महिला को दहेज एक्ट में फंसाना तथा निर्दोष युवक पर हरिजन एक्ट लगाकर दबाव बनाने—जैसे गंभीर मामलों को लेकर पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही या कानून के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि पीड़ितों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। लंबित प्रकरणों की समीक्षा की जा रही है और थानों में पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले कुछ मामलों में कथित दलालों की सक्रियता के कारण पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधाएं आती थीं। सख्ती के बाद ऐसे तत्वों में हताशा देखी जा रही है। वहीं गरीब और वंचित वर्ग इस बदलाव को राहत के रूप में देख रहा है।

इसी बीच हाल ही में एक थाना अध्यक्ष की विदाई भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। विदाई समारोह औपचारिक रूप से आयोजित हुआ, लेकिन आम जनमानस की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही। कुछ कथित लोग ही थाना अध्यक्ष के साथ नजर आए। क्षेत्र में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।

जनता के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे “राहत का दिन” बताया तो कुछ ने निजी बातचीत में कहा कि “आज हमारी रोजी-रोटी चली गई।” हालांकि विदाई समारोह भावनात्मक माहौल में संपन्न हुआ और थाना अध्यक्ष ने अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि किसी भी जिले में पुलिस की निष्पक्षता और पारदर्शिता ही जनता के विश्वास की आधारशिला होती है। यदि शिकायतों का समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान हो तो आमजन का भरोसा स्वतः मजबूत होता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई तैनाती के बाद व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है। आम लोगों की अपेक्षा है कि न्याय और पारदर्शिता की यह पहल निरंतर जारी रहे।

सर्राफा दुकान का शटर तोड़कर लाखों की चोरी, पुलिस जांच में जुटी

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मोहम्मदाबाद: मोहम्मदाबाद कस्बे के राठौरा बाजार (Rathora Bazaar) में स्थित एक सर्राफा दुकान (jewellery shop) में बीती रात अज्ञात चोरों ने शटर तोड़कर लाखों रुपये के जेवरात व नकदी चोरी कर ली। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है। काशीराम कॉलोनी निवासी अमन वर्मा की राठौरा बाजार में सर्राफा की दुकान है। सुबह दुकान के मालिक शिवजीत सिंह ने अमन वर्मा को फोन कर सूचना दी कि दुकान का शटर टूटा हुआ है।

सूचना मिलते ही अमन वर्मा ने पुलिस को अवगत कराया। मौके पर चौकी प्रभारी अनिल सिकरवार तथा कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला पुलिस बल के साथ पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। चोरी की सूचना पर डीएसपी अजय वर्मा भी मौके पर पहुंचे और फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य एकत्र कराए गए।

 

पीड़ित अमन वर्मा के अनुसार, दुकान से लगभग 5 किलोग्राम चांदी, 20 ग्राम सोने के जेवरात तथा करीब 30 हजार रुपये नकद चोरी हुए हैं, जो लॉकर में रखे गए थे। फॉरेंसिक टीम की प्रारंभिक जांच में दुकान में तोड़फोड़ के स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि चोरों ने लॉकर की चाबी का उपयोग कर सामान निकाला।

पुलिस ने दुकान में लगे डीवीआर को कब्जे में ले लिया है। बताया गया कि घटना के समय दुकान के सभी कैमरे बंद थे और लाइट की एमसीबी भी गिरी हुई थी। समाचार लिखे जाने तक पीड़ित द्वारा थाने में लिखित तहरीर नहीं दी गई थी।

भूमि विवाद व विकास कार्यों को लेकर अनशन की चेतावनी, प्रशासनिक वार्ता के बाद मामला शांत

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अमृतपुर/फर्रुखाबाद: तहसील क्षेत्र के ग्राम आसमपुर तितर्फा, (Village Assampur Titrafa) ब्लॉक राजेपुर निवासी दिव्यांग कौशल कुमार अग्निहोत्री ने राजस्व एवं ग्राम्य विकास विभाग से जुड़ी समस्याओं को लेकर आमरण अनशन की चेतावनी दी थी। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) को संबोधित ज्ञापन में आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

कौशल कुमार का कहना था कि उन्होंने गोरखपुर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम एवं तहसील अमृतपुर के सम्पूर्ण समाधान दिवस में कई बार प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी रहीं। उनके अनुसार राजस्व विभाग की बंजर भूमि गाटा संख्या 2296घ (लगभग 5 डिसमिल) तथा नवीन परती भूमि गाटा संख्या 2294 (0.1090 हेक्टेयर) पर कथित अवैध कब्जा है। साथ ही चकमार्ग गाटा संख्या 2312 पर भी अतिक्रमण की शिकायत की गई।

ज्ञापन में कुछ अधिकारियों पर गलत निस्तारण रिपोर्ट लगाने का आरोप भी लगाया गया तथा संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जांच और कार्रवाई की मांग की गई। इसके अतिरिक्त ग्राम हरसिंहपुर गहलवार में मुख्य मार्ग से श्री शिव शंकर मंदिर एवं ब्रह्मदेव स्थान तक पक्की सड़क निर्माण की मांग उठाई गई, ताकि बरसात के दौरान जलभराव की समस्या से ग्रामीणों को राहत मिल सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी संजय सिंह ने दिव्यांग बाबा से वार्ता की। वार्ता के दौरान तहसीलदार शशांक सिंह, चिकित्साधिकारी गौरव वर्मा, निरीक्षक रवि सोलंकी तथा राघवेंद्र भदोरिया सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने बाबा को समझाया तथा उनकी मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।

डॉक्टर की निगरानी में स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दिव्यांग बाबा ने सहमति जताई और जूस पीकर अनशन समाप्त कर दिया। प्रशासन की ओर से प्रकरण की जांच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है। तहसीलदार शशांक सिंह ने बताया है कि जो मांगे बाबा के द्वारा दी गई थी उन पर एक हफ्ते के अंदर गहनता से जांच कर निस्तारण किया जाएगा

नेहरू से मोदी तक: भारत-इस्राइल रिश्तों का यथार्थ और संतुलन

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शरद कटियार

भारत और इस्राइल के संबंधों की कहानी केवल कूटनीति की नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों, राष्ट्रीय हितों और वैचारिक प्राथमिकताओं की भी दास्तान है। एक समय था जब जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल के गठन का विरोध किया था, और आज वही भारत नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस्राइल के साथ खुली और प्रगाढ़ रणनीतिक साझेदारी निभा रहा है। यह बदलाव आकस्मिक नहीं, बल्कि समय और परिस्थितियों की उपज है।
स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि में भारत की विदेश नीति नैतिकता और उपनिवेशवाद-विरोधी दृष्टिकोण से प्रेरित थी। महात्मा गांधी का यह कथन कि “फलस्तीन अरबों का है” उस दौर की सोच को प्रतिबिंबित करता था। भारत ने 1947 की संयुक्त राष्ट्र विभाजन योजना के खिलाफ मतदान किया और लंबे समय तक इस्राइल से दूरी बनाए रखी। हालांकि 1950 में भारत ने इस्राइल को औपचारिक मान्यता दे दी, परंतु पूर्ण राजनयिक संबंध 1992 में ही स्थापित हो सके।
यह भी सच है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 व 1971 के युद्धों के दौरान इस्राइल ने परदे के पीछे भारत की मदद की। 1974 में भारत ने फलस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) को मान्यता दी और 1988 में फलस्तीन को राष्ट्र के रूप में स्वीकार किया। शीत युद्ध की समाप्ति और आर्थिक उदारीकरण के बाद 1992 में दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए, जिसने सहयोग के नए आयाम खोले।
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान इस्राइल से मिले रक्षा उपकरणों ने रिश्तों को नई मजबूती दी। 2003 में एरियल शेरोन की भारत यात्रा और 2017 में नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक इस्राइल यात्रा ने संबंधों को सार्वजनिक और रणनीतिक आयाम प्रदान किया। आज भारत इस्राइल के रक्षा उपकरणों का प्रमुख खरीदार है और कृषि, साइबर सुरक्षा, जल प्रबंधन व स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग निरंतर बढ़ रहा है।
लेकिन इस साझेदारी के साथ संतुलन की चुनौती भी है। भारत ऐतिहासिक रूप से फलस्तीन के अधिकारों का समर्थक रहा है और आज भी दो-राष्ट्र समाधान की वकालत करता है। पश्चिम एशिया में भारत के ऊर्जा, प्रवासी भारतीयों और व्यापारिक हित व्यापक हैं। ऐसे में भारत को इस्राइल के साथ घनिष्ठ संबंध रखते हुए अरब देशों के साथ अपने पारंपरिक रिश्तों को भी सहेजना है।
दरअसल, नेहरू युग की वैचारिक प्रतिबद्धता और मोदी युग की रणनीतिक स्पष्टता—दोनों ही अपने-अपने समय की आवश्यकताओं का परिणाम हैं। विदेश नीति का मूल मंत्र अंततः राष्ट्रीय हित होता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत ने यह दिखाया है कि वह सिद्धांतों और यथार्थ के बीच संतुलन साध सकता है।
भारत-इस्राइल संबंधों की यह यात्रा हमें यही सिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होते, केवल स्थायी हित होते हैं। और भारत ने अपने हितों की रक्षा करते हुए एक नई कूटनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया है।

नेहरू के विरोध से मोदी की रणनीतिक साझेदारी तक: भारत-इस्राइल रिश्तों की बदलती दास्तान

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय इस्राइल दौरे के साथ भारत-इस्राइल संबंध एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। करीब आठ वर्षों बाद हो रही इस यात्रा में पीएम मोदी अपने समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से मुलाकात करेंगे तथा इस्राइली संसद नेसेट को संबोधित कर सकते हैं। यह वही देश है, जिसके गठन का कभी भारत ने पुरजोर विरोध किया था और संयुक्त राष्ट्र में उसके पक्ष में मतदान से दूरी बनाई थी।
1930-40 के दशक में जब यूरोप में यहूदियों पर अत्याचार बढ़े और फलस्तीन में अलग यहूदी राष्ट्र की मांग उठी, तब महात्मा गांधी ने स्पष्ट कहा था कि “फलस्तीन अरबों का है।” स्वतंत्रता के बाद जवाहरलाल नेहरू सरकार ने 1947 की संयुक्त राष्ट्र विभाजन योजना के खिलाफ मतदान किया और 1949 में इस्राइल की सदस्यता का भी विरोध किया। हालांकि 1950 में भारत ने इस्राइल को औपचारिक मान्यता दे दी, परंतु चार दशकों तक पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए।
1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 व 1971 के युद्धों के दौरान इस्राइल ने गुप्त रूप से सैन्य सहायता दी, जबकि भारत सार्वजनिक रूप से फलस्तीन के समर्थन में खड़ा रहा। 1974 में भारत ने फलस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) को मान्यता दी और 1988 में फलस्तीन को राष्ट्र के रूप में स्वीकार किया। शीत युद्ध की समाप्ति और आर्थिक उदारीकरण के बाद 1992 में भारत और इस्राइल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए, जिसने रक्षा, कृषि और तकनीक सहयोग का नया अध्याय खोला।
1999 के कारगिल युद्ध से लेकर 2003 में इस्राइली प्रधानमंत्री एरियल शेरोन की भारत यात्रा और 2017 में पीएम मोदी की ऐतिहासिक इस्राइल यात्रा तक, दोनों देशों के रिश्तों में निरंतर प्रगाढ़ता आई है। आज भारत इस्राइल के रक्षा उपकरणों का प्रमुख खरीदार है और द्विपक्षीय व्यापार अरबों डॉलर तक पहुंच चुका है।
हालांकि भारत अब भी दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है और फलस्तीन के प्रति अपनी ऐतिहासिक प्रतिबद्धता दोहराता है, लेकिन रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा हितों के चलते इस्राइल के साथ उसकी साझेदारी अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी है। नेहरू युग की वैचारिक दूरी से लेकर मोदी युग की खुली रणनीतिक मित्रता तक, भारत-इस्राइल संबंधों की यह यात्रा भारतीय विदेश नीति के बदलते स्वरूप की एक महत्वपूर्ण कहानी बयान करती

नोएडा,एनसीआर में “युवा शक्ति महोत्सव”, की तैयारी

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– यूथ इंडिया करेगा मेगा इवेंट का आयोजन
– इंटर स्कूल क्रिकेट चैंपियनशिप से लेकर मिस/मिस्टर नोएडा–दिल्ली तक कई भव्य प्रतियोगिताएं की जाएंगी शामिल
नोएडा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर ) में युवाओं को एक बड़ा मंच देने के उद्देश्य से यूथ इंडिया न्यूज़ ग्रुप द्वारा नोएडा में भव्य “युवा शक्ति महोत्सव 2026” आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इस मेगा इवेंट में खेल, फैशन, व्यक्तित्व विकास और व्यापारिक सम्मान समारोह जैसे कई बड़े कार्यक्रम एक ही मंच पर आयोजित किए जाएंगे।
आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन एनसीआर के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत “यूथ इंडिया इंटर स्कूल क्रिकेट चैंपियनशिप – एनसीआर ” से होगी। इसमें दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम के प्रतिष्ठित स्कूलों की टीमें भाग लेंगी। लीग और नॉकआउट फॉर्मेट में आयोजित होने वाले इस टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला नोएडा स्टेडियम में होगा।
विजेता टीम को “यूथ इंडिया क्रिकेट चैंपियनशिप ट्रॉफी” से सम्मानित किया जाएगा।
महोत्सव के तहत “मिस नोएडा” और “मिस दिल्ली” प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रतिभागियों को ग्रूमिंग, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और मीडिया ट्रेनिंग दी जाएगी। फाइनल नाइट में भव्य रैंप वॉक, टैलेंट राउंड और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित होंगे। विजेताओं को ब्रांड एंबेसडर बनने का अवसर मिलेगा।
युवा पुरुष प्रतिभाओं के लिए “मिस्टर नोएडा” और “मिस्टर दिल्ली” प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें फिटनेस, व्यक्तित्व और प्रतिभा के आधार पर विजेताओं का चयन होगा।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में “यूथ इंडिया बिजनेस एवं लीडरशिप अवॉर्ड” आयोजित किए जाएंगे, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्टार्टअप, रियल एस्टेट और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थानों व व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि युवाओं को करियर, खेल और ग्लैमर की दुनिया में आगे बढ़ने का अवसर देना है। कार्यक्रम की व्यापक कवरेज यूथ इंडिया के डिजिटल और प्रिंट प्लेटफॉर्म पर की जाएगी।
नोएडा में होने वाला यह महाआयोजन एनसीआर के युवाओं के लिए एक नई पहचान और संभावनाओं का द्वार खोल सकता है।