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Monday, February 16, 2026
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आईआरएडी/ईडीएआर पोर्टल को लेकर पुलिस लाइन में बैठक, एसपी ने दुर्घटना डेटा समय से अपलोड करने के निर्देश

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फर्रुखाबाद: पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के निर्देशन में पुलिस लाइन स्थित सभागार में आईआरएडी/ईडीएआर (IRAD/EDAR) पोर्टल के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता क्षेत्राधिकारी यातायात अभय वर्मा ने की।

बैठक में पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ ने सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया कि सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर तत्काल iRAD फॉर्म भरा जाए। दुर्घटना से संबंधित सभी आवश्यक विवरण जैसे फोटो, वीडियो, गवाहों के बयान एवं अन्य साक्ष्यों को सटीक और पूर्ण रूप से पोर्टल पर दर्ज किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि डेटा अपलोडिंग में किसी प्रकार की लापरवाही या देरी न हो। समयबद्ध और सही सूचना अपलोड करने से सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण बेहतर ढंग से किया जा सकेगा, जिससे दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति बनाई जा सके।

बैठक के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटरों को iRAD पोर्टल पर डेटा एंट्री, वैरिफिकेशन, रिपोर्ट जनरेशन तथा तकनीकी समस्याओं के समाधान हेतु विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पारदर्शिता और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।

यह पहल सड़क सुरक्षा डेटा की गुणवत्ता में सुधार लाने और यातायात प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, डिजिटल एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पूर्व रंजिश के चलते पिता-पुत्र ने किशोर को पीटा, मामला पहुंचा थाने

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शमशाबाद, फर्रुखाबाद: नगर क्षेत्र में पूर्व रंजिश के चलते एक किशोर के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजन घायल किशोर को लेकर थाने पहुंचे, जिससे क्षेत्र में कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शमशाबाद नगर निवासी लाइनमैन शफीक खान का 17 वर्षीय पुत्र मुजम्मिल उर्फ बसर पास ही स्थित एक कैफे पर फोटोकॉपी कराने गया था। इसी दौरान मोहल्ले के ही एक पिता-पुत्र ने पुरानी रंजिश को लेकर उसे घेर लिया और कथित रूप से मारपीट कर घायल कर दिया।

अचानक हुए हमले से किशोर घबरा गया और शोर मचाया। आसपास के लोगों की हलचल देख आरोपित मौके से हट गए। घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और घायल मुजम्मिल को अपने साथ लेकर थाने पहुंचे। थाना अध्यक्ष रमेश सिंह ने बताया कि पीड़ित पक्ष की ओर से अभी तक कोई लिखित तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलने पर नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

घटना के बाद मोहल्ले में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरानी रंजिशों के चलते इस प्रकार की घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। पुलिस का कहना है कि यदि शिकायत प्राप्त होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आठ घंटे तक लापता रहा किशोर, सकुशल मिलने पर परिजनों ने ली राहत की सांस

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शमसाबाद, फर्रुखाबाद: नगर क्षेत्र में एक किशोर के अचानक लापता हो जाने से परिजनों में हड़कंप मच गया। करीब आठ घंटे तक तलाश के बाद किशोर के सकुशल मिलने पर परिवार ने राहत की सांस ली।

जानकारी के अनुसार नगर पंचायत के मोहल्ला मछली हवेली निवासी जह नूल (16) पुत्र अनवर सोमवार दोपहर करीब 1 बजे घर से बाजार सामान लेने के लिए निकला था। देर शाम तक जब वह वापस नहीं लौटा तो परिजनों को चिंता सताने लगी। काफी देर इंतजार के बाद परिवार ने मोहल्ले के लोगों के साथ उसकी तलाश शुरू कर दी।

परिजन संभावित स्थानों पर खोजबीन करते रहे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। इसी बीच देर रात करीब 10 बजे थाना क्षेत्र के गांव उलियापुर से एक ग्रामीण के मोबाइल फोन से किशोर ने परिजनों से संपर्क कर अपनी कुशलता की जानकारी दी।

सूचना मिलते ही परिजन रात में ही उलियापुर पहुंचे और जह नूल को सकुशल घर ले आए। मंगलवार सुबह परिजन किशोर को लेकर थाने पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी। थाना अध्यक्ष रमेश सिंह ने बताया कि किशोर कहीं चला गया था और बाद में स्वयं ही परिजनों के संपर्क में आ गया। फिलहाल वह पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है।

क्षेत्राधिकारी मोहम्मदाबाद ने थाना नवाबगंज का किया वार्षिक निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

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फर्रुखाबाद: सोमवार को क्षेत्राधिकारी मोहम्मदाबाद (Circle Officer Mohammadabad) द्वारा थाना नवाबगंज (Nawabganj police station) का वार्षिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान थाने की विभिन्न व्यवस्थाओं और अभिलेखों की गहन समीक्षा की गई। निरीक्षण क्रम में सर्वप्रथम मिशन शक्ति केंद्र का अवलोकन किया गया, जहां महिलाओं की सहायता एवं सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई। इसके पश्चात थाना परिसर की बैरक, मेस, थाना कार्यालय तथा हवालात का सम्यक रूप से निरीक्षण किया गया।

क्षेत्राधिकारी ने थाने में रखे समस्त अभिलेखों की जांच कर उनके सुव्यवस्थित रखरखाव के निर्देश दिए। साथ ही साफ-सफाई, अभिलेखों के अद्यतन रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था तथा आगंतुकों के प्रति व्यवहार को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।

उन्होंने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण, महिला संबंधित मामलों में संवेदनशीलता बरतने तथा कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। निरीक्षण के दौरान थाना प्रभारी सहित समस्त पुलिस स्टाफ उपस्थित रहा। अधिकारियों ने बेहतर कार्यप्रणाली बनाए रखने और शासन की मंशानुसार कार्य करने के निर्देश दिए।

वोट, विश्वास और वैचारिक संघर्ष: आरोपों के बीच सियासत का तापमान

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शरद कटियार

उत्तर प्रदेश की राजनीति (Politics) एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप के तीखे दौर में प्रवेश कर चुकी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav द्वारा भारतीय जनता पार्टी और प्रदेश सरकार पर लगाए गए आरोप केवल चुनावी बयानबाजी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, सामाजिक समीकरणों और ऐतिहासिक विमर्श को लेकर गंभीर प्रश्न भी खड़े करते हैं।

वोट कटवाने का आरोप: लोकतंत्र की बुनियाद पर सवाल

अखिलेश यादव ने जिस प्रकार “नकली हस्ताक्षर” के माध्यम से वोट कटवाने का आरोप लगाया है, वह सीधा-सीधा चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न है। यदि वास्तव में किसी मतदाता का नाम फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर मतदाता सूची से हटाया गया है, तो यह न केवल प्रशासनिक त्रुटि बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।

हालांकि ऐसे आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है, परंतु इस तरह के दावे चुनाव आयोग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर जनता के मन में संदेह पैदा करते हैं। लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि मतदाता सूची निष्पक्ष, अद्यतन और पारदर्शी हो।

(पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) का मुद्दा समाजवादी राजनीति के मूल में रहा है। अखिलेश यादव का यह कहना कि एक बूथ पर 76 प्रतिशत नोटिस इसी वर्ग को जारी हुए, और उनमें 46 प्रतिशत यादव व मुस्लिम समुदाय से थे, यह संकेत देता है कि वे इसे एक संगठित राजनीतिक रणनीति के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं।

यह आरोप यदि डेटा आधारित है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि नहीं, तो इसे चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति भी माना जा सकता है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक समूहों के वोट अधिकार को लेकर आशंका पैदा होना स्वयं में गंभीर विषय है।

फॉर्म-7 और (स्पेशल इंटेंसिव रेविशन ) की प्रक्रिया पर सवाल भी इसी बहस का हिस्सा हैं। मतदाता सूची संशोधन की कानूनी प्रक्रियाएं स्पष्ट हैं, परंतु इनकी पारदर्शिता और स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहे हैं।

ऐतिहासिक और वैचारिक टकराव

अखिलेश यादव ने अपने भाषण में केवल वर्तमान प्रशासनिक मुद्दों तक सीमित न रहकर ऐतिहासिक संदर्भों को भी जोड़ा। “वंदे मातरम्” और जयप्रकाश नारायण जैसे प्रतीकों का उल्लेख यह दर्शाता है कि यह संघर्ष केवल चुनावी नहीं, बल्कि वैचारिक भी है।

भारतीय राजनीति में इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत अक्सर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है। लेकिन जब ऐतिहासिक घटनाओं को समकालीन राजनीति से जोड़ा जाता है, तो उसका उद्देश्य प्रायः वैचारिक ध्रुवीकरण होता है।

मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणियां: मर्यादा और राजनीतिक संस्कृति

मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत और पुराने मामलों का उल्लेख राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या इससे जनहित के मुद्दे पीछे नहीं छूट जाते? लोकतांत्रिक संवाद में तीखापन स्वाभाविक है, परंतु मर्यादा और तथ्यों की कसौटी भी उतनी ही आवश्यक है।

धार्मिक स्थलों और शंकराचार्य से जुड़े आरोपों ने बहस को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे विषयों पर आरोप यदि बिना प्रमाण के हों, तो सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। इसलिए राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों के साथ ही अपनी बात रखें।

बहुजन समाज और समाजवादी पार्टी के “गहरे रिश्ते” का उल्लेख यह संकेत देता है कि विपक्षी दल सामाजिक न्याय के व्यापक गठबंधन की संभावना तलाश रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक गठबंधन निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।
यदि पीडीए की राजनीति को पुनर्सक्रिय करने का प्रयास हो रहा है, तो यह आने वाले चुनावों में नए समीकरण गढ़ सकता है। अखिलेश यादव के आरोपों ने निश्चित रूप से प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। अब आवश्यकता है कि इन आरोपों पर तथ्यों और संस्थागत जांच के माध्यम से स्पष्टता लाई जाए।

लोकतंत्र की साख इस बात पर निर्भर करती है कि मतदाता का अधिकार सुरक्षित रहे, चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी हो और राजनीतिक विमर्श तथ्याधारित हो। चुनावी मौसम में बयानबाजी तेज होना स्वाभाविक है, लेकिन अंततः जनता ठोस मुद्दों—रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास—पर जवाब चाहती है। आरोपों की राजनीति तभी सार्थक होगी जब वह लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनहित की दिशा में ठोस परिणाम दे सके।

निजामुद्दीनपुर में इंसानियत की मिसाल: देवरानी ने जेठ को लीवर दान कर बचाई जान

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कंपिल/फर्रुखाबाद: कायमगंज ब्लॉक (Kayamganj Block) के गांव निजामुद्दीनपुर (Nizamuddinpur) से रिश्तों की मिसाल पेश करने वाली एक प्रेरणादायक घटना सामने आई है। यहां एक देवरानी ने अपने जेठ को लीवर दान कर उनकी जिंदगी बचा ली। इस मानवीय त्याग की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है। गांव निवासी अकबर पिछले लगभग आठ महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। लगातार बिगड़ती तबीयत के बाद जब उनकी चिकित्सकीय जांच कराई गई तो डॉक्टरों ने लीवर खराब होने की पुष्टि की। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि जीवन बचाने के लिए लीवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है।

परिजनों के अनुसार, बीमारी के दौरान पारिवारिक परिस्थितियां भी चुनौतीपूर्ण हो गई थीं। बताया जाता है कि अकबर की पत्नी शिफा खान उन्हें छोड़कर अपने मायके चली गई थीं और अपने 8 वर्षीय बेटे असरफ को भी साथ ले गई थीं। ऐसे में परिवार पर भावनात्मक और मानसिक दबाव और बढ़ गया था।

इसी कठिन घड़ी में अकबर के छोटे भाई अमजद की पत्नी निदा परवीन (लगभग 29 वर्ष) ने आगे बढ़कर साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने अपने जेठ को भाई समान मानते हुए लीवर दान करने की सहमति दी। निदा परवीन ने इसे अपना पारिवारिक और मानवीय कर्तव्य बताते हुए कहा कि जब परिवार पर संकट हो तो साथ खड़ा होना जरूरी है।

गुरुवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में सफल ऑपरेशन के बाद निदा परवीन ने अपना लीवर दान किया। चिकित्सकों की टीम ने बताया कि ऑपरेशन सफल रहा और दोनों मरीजों की हालत अब स्थिर है। वे डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना की चर्चा हो रही है। लोग इसे इंसानियत, त्याग और मजबूत पारिवारिक रिश्तों की एक अनूठी मिसाल मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में जहां रिश्तों में दूरी बढ़ती दिख रही है, वहीं निदा परवीन का यह कदम समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।