लखनऊ। प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार और खिलाड़ियों को बेहतर आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग को ‘सेवारत विभाग’ का दर्जा प्रदान कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश में स्टेडियम, खेल मैदान और अन्य खेल अधोसंरचना के निर्माण के लिए जिला प्रशासन निश्शुल्क भूमि उपलब्ध करा सकेगा। सरकार के इस कदम को प्रदेश में खेल क्रांति की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब तक खेल विभाग को सेवारत विभाग का दर्जा प्राप्त नहीं था, जिसके कारण कई जिलों में स्टेडियम और खेल परिसरों के निर्माण के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया अटक जाती थी। जिला प्रशासन नियमों का हवाला देते हुए मुफ्त भूमि उपलब्ध कराने में असमर्थता जताता था। इससे कई महत्वाकांक्षी खेल परियोजनाएं वर्षों से लंबित पड़ी थीं।
खेल सचिव सुहास एल.वाई. ने बताया कि सरकार के नए निर्णय से खेल अधोसंरचना विकास की राह में आने वाली प्रशासनिक बाधाएं दूर हो जाएंगी। अब जिन जिलों में खेल सुविधाओं की आवश्यकता होगी, वहां जिला प्रशासन द्वारा विभाग को निश्शुल्क भूमि उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे स्टेडियम निर्माण और खेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
सरकार का लक्ष्य प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विस्तार करना है, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपने जिले या क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण और अभ्यास की सुविधाएं मिल सकें। इससे युवाओं को खेलों की ओर प्रोत्साहन मिलेगा और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी बेहतर होगा।
हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार खेल क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ा रही है। गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम सहित कई बड़े खेल प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नए फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों में नए स्टेडियम, बहुउद्देश्यीय खेल परिसर और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का रास्ता और आसान हो जाएगा।








