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Monday, April 27, 2026
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यूपी में 28 अप्रैल से सात दिवसीय श्रमिक स्वास्थ्य मेला

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हर जिले में होंगे कैंप, गंभीर बीमारियों की पहचान कर मिलेगा इलाज
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लखनऊ। प्रदेश में श्रमिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए Yogi Adityanath सरकार 28 अप्रैल से प्रदेश के सभी जिलों में सात दिवसीय ‘श्रमिक स्वास्थ्य मेला’ आयोजित करने जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य श्रमिक वर्ग के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की जांच करना, गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान करना और जरूरतमंदों को बेहतर उपचार के लिए संबंधित अस्पतालों में रेफर करना है।
इस संबंध में अपर मुख्य सचिव Amit Kumar Ghosh ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, प्रमुख चिकित्साधीक्षकों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश जारी कर मेले की व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार का मानना है कि श्रमिक वर्ग की सेहत बेहतर हुए बिना ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है, इसलिए इस वर्ग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन मेलों में श्रमिकों की सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ टीबी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, त्वचा रोग, आंखों की बीमारी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की भी स्क्रीनिंग की जाएगी। खासतौर पर टीबी जैसी गंभीर बीमारी के मरीजों की पहचान पर जोर रहेगा, ताकि उन्हें समय रहते इलाज मिल सके और संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।
मेले में डॉक्टरों की टीम द्वारा परामर्श, जरूरी दवाइयों का वितरण और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जिन मरीजों में गंभीर बीमारी के लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाएगा। साथ ही, श्रमिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और कार्यस्थल पर सुरक्षा के उपायों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
सरकार की इस पहल को श्रमिकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अक्सर आर्थिक तंगी और जागरूकता की कमी के कारण वे समय पर इलाज नहीं करा पाते हैं। यह स्वास्थ्य मेला न केवल बीमारियों की पहचान करेगा, बल्कि उन्हें समय पर उपचार दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, प्रदेशव्यापी यह अभियान श्रमिकों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे लाखों मजदूरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है और राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और मजबूत बनाया जा सकेगा।

आईएएस रिंकू सिंह राही ने वापस लिया तकनीकी इस्तीफा, काम न मिलने से थे नाराज

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी Rinku Singh Rahi ने अपना तकनीकी इस्तीफा वापस ले लिया है। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से कार्य आवंटन को लेकर असंतुष्ट थे और इसी कारण उन्होंने पहले इस्तीफा भेजा था। हालांकि अब उन्होंने अपने फैसले को वापस लेते हुए स्थिति को सामान्य करने का संकेत दिया है।
जानकारी के अनुसार, रिंकू सिंह राही ने 26 मार्च 2026 को राष्ट्रपति, उत्तर प्रदेश के नियुक्ति विभाग और केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को तकनीकी इस्तीफा भेजा था। अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रशासनिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम काम कर रहा है, जिससे उन्हें अपेक्षित जिम्मेदारियां नहीं मिल पा रही थीं। उनका यह पत्र 30 मार्च को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया था।
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में रिंकू सिंह राही ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। यह प्रक्रिया इतनी गोपनीय तरीके से पूरी की गई कि इसकी जानकारी सीमित स्तर पर ही रही। फिलहाल इस पूरे मामले को उच्चस्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है और जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
वर्तमान में रिंकू सिंह राही राजस्व परिषद से संबद्ध हैं और संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने इस्तीफे में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर पुनः भेजे जाने की मांग भी की थी। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
प्रशासनिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। माना जा रहा है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे।
कुल मिलाकर, आईएएस अधिकारी द्वारा इस्तीफा देना और फिर उसे वापस लेना एक असामान्य स्थिति मानी जा रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ मुद्दे अभी भी सुलझाए जाने बाकी हैं। आने वाले समय में इस मामले पर शासन स्तर से स्पष्ट आदेश जारी होने की संभावना है।

पत्नी की पिटाई से मौत के मामले में पति को 10 साल की सजा

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हरदोई जिले में गैर इरादतन हत्या के एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीता कौशिक ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पति मंशाराम को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

मामला वर्ष 2020 का है, जब आरोपी ने अपनी पत्नी सुनीता को घरेलू विवाद के दौरान ईंट और लाठी-डंडों से गंभीर रूप से घायल कर दिया था। घटना के बाद घायल महिला को पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे लखनऊ रेफर किया गया, जहां 27 अगस्त 2020 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इस घटना के संबंध में मृतका के पिता शिवनाथ, निवासी रामापुर रहोलिया (बेहटा गोकुल क्षेत्र), ने 26 अगस्त 2020 को हरियावां थाने में मामला दर्ज कराया था। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की शादी वर्ष 2005 में मंशाराम से हुई थी और शादी के बाद से ही वह उसे प्रताड़ित करता था तथा आए दिन मारपीट करता था।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता चंदन कुमार ने नौ गवाहों को अदालत में पेश किया। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा जैसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है, ताकि समाज में ऐसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके। मृतका अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गई है, जिनका पालन-पोषण अब परिवार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।

यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति हिंसा के खिलाफ एक सख्त संदेश भी देता है।

विकसित बंगाल का संदेश या आखिरी चुनावी दांव

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दूसरे चरण से पहले पीएम का पत्र चर्चा में

नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले सियासी माहौल बेहद गर्म हो गया है। 23 अप्रैल को पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद अब सभी की निगाहें 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण पर टिकी हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की जनता के नाम एक भावुक पत्र और ऑडियो संदेश जारी कर चुनावी चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। इसे राजनीतिक विश्लेषक अंतिम चरण की रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में पश्चिम बंगाल की जनता के प्रति आभार जताते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें जो स्नेह और समर्थन मिला, उसने उन्हें नई ऊर्जा दी है। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और व्यापारियों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी “विकसित बंगाल” के निर्माण के लिए संकल्पित नजर आए। इस संदेश के जरिए उन्होंने राज्य के विकास के विजन को प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश की है।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी के विकास रोडमैप को “मोदी की गारंटी” बताते हुए कहा कि पार्टी बंगाल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने हिंदी और बंगाली में जारी ऑडियो संदेश के माध्यम से सीधे मतदाताओं से संवाद स्थापित किया और 29 अप्रैल को अधिक से अधिक मतदान करने की अपील की।
गौरतलब है कि 23 अप्रैल को हुए पहले चरण में 92.15 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जिसे प्रधानमंत्री ने “इतिहास रचने वाला” बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरे चरण में भी इसी तरह भारी मतदान होगा। चुनाव आयोग द्वारा दो चरणों में कराए जा रहे इस चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे, जो राज्य की अगली सरकार का फैसला करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रचार समाप्त होने के बाद इस तरह का पत्र और ऑडियो संदेश जारी करना मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने और अंतिम समय में समर्थन मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अब देखना यह होगा कि “विकसित बंगाल” का यह विजन और भारी मतदान की अपील मतदाताओं को कितना प्रभावित करती है और क्या दूसरे चरण में भी रिकॉर्ड टूटेगा।

युवती से दुष्कर्म का आरोप, दो आरोपी गिरफ्तार, एक पर 25 हजार का इनाम

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फतेहपुर: जिले के खागा कोतवाली क्षेत्र में एक युवती के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि मंगेतर के साथ जा रही युवती को तीन युवकों ने रास्ते में बंधक बना लिया और उसके साथ जबरन अभद्रता की। इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है।

घटना 24 अप्रैल की सुबह की बताई जा रही है, जब युवती अपने मंगेतर के साथ बाइक से अपनी बुआ के घर जा रही थी। रास्ते में नौबस्ता चौराहे के पास नहर पुलिया पर रुकने के दौरान तीन युवक वहां पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने दोनों को बंधक बनाकर युवती के साथ जबरदस्ती की और मोबाइल से वीडियो भी बनाया।

पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसके मंगेतर से ऑनलाइन 2,500 रुपये अपने खाते में ट्रांसफर भी कराए। युवती ने आरोप लगाया है कि इस दौरान उसके साथ दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर थाना स्तर पर लापरवाही सामने आई, जिसके चलते संबंधित थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों—युवराज और ललित—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं तीसरा आरोपी बबलू ठाकुर फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

इस मामले में राजनीतिक एंगल भी सामने आया है, क्योंकि फरार आरोपी के एक राजनीतिक दल से जुड़े होने की चर्चा है। हालांकि स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है और कहा है कि तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सब रजिस्ट्रार कार्यालय स्थानांतरण का विरोध, अधिवक्ताओं ने सौंपा ज्ञापन

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फतेहपुर
जिले में सब रजिस्ट्रार कार्यालय को माहपुर स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव का अधिवक्ताओं ने विरोध किया है। व्यवस्था परिवर्तन अधिवक्ता संगठन ने इस फैसले को जनहित के खिलाफ बताते हुए कार्यालय को कलेक्ट्रेट परिसर में ही स्थापित करने की मांग उठाई है। इसी को लेकर सोमवार को अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।

संगठन के अध्यक्ष श्रीराम पटेल ने बताया कि नगर पालिका द्वारा राजस्व ग्राम माहपुर में नए भवन के लिए भूमि आवंटित की गई है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है। उनका कहना है कि कलेक्ट्रेट परिसर में पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है, जहां कार्यालय का निर्माण आसानी से किया जा सकता है और लोगों को भी सुविधा मिलेगी।

अधिवक्ताओं का तर्क है कि कार्यालय को शहर से दूर स्थानांतरित करने से आम जनता, खासकर किसानों और ग्रामीणों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्हें दस्तावेज पंजीकरण जैसे जरूरी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी होगी, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे।

संगठन ने यह भी आशंका जताई है कि दूरस्थ स्थान पर कार्यालय बनने से भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि कलेक्ट्रेट परिसर में प्रशासनिक निगरानी बेहतर रहती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और लोगों को राहत मिलती है।

अधिवक्ताओं ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से इस मांग को लगातार उठा रहे हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि माहपुर में कार्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में जनहित को ध्यान में रखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में ही सब रजिस्ट्रार कार्यालय बनाए जाने की मांग दोहराई।