यूथ इंडिया | शरद कटियार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाजपा में अब बड़ा संगठनात्मक विस्फोट होने जा रहा है। लंबे मंथन, जातीय गणित और चुनावी फीडबैक के बाद पार्टी ने प्रदेश संगठन की नई रूपरेखा लगभग तय कर ली है। अब सिर्फ नामों की औपचारिक घोषणा बाकी है। सत्ता और संगठन के गलियारों में चर्चा तेज है कि इस बार भाजपा पुराने ढांचे को तोड़कर पूरी तरह “2027 मिशन मोड” में उतरने जा रही है।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अगुवाई में बनने वाली नई टीम में करीब 50 प्रतिशत नए चेहरों को मौका मिलेगा। संगठन में उन नेताओं की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है जो लंबे समय से पदों पर बैठे हैं लेकिन जमीन पर प्रभाव कमजोर पड़ा है। पार्टी इस बार सिर्फ निष्ठा नहीं बल्कि “मैदान में सक्रियता” और सामाजिक पकड़ को भी पैमाना बना रही है।
भाजपा नेतृत्व समझ चुका है कि 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में जो राजनीतिक झटके लगे, उनका असर सीधे 2027 की तैयारी पर पड़ सकता है। यही वजह है कि लखनऊ से दिल्ली तक कई दौर की बैठकों में संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति बनाई गई है। पार्टी अब बूथ स्तर तक नए समीकरण साधने में जुटी है।
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को इस पूरे बदलाव का केंद्रीय चेहरा माना जा रहा है। कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को भाजपा ने सिर्फ संगठन प्रमुख नहीं बनाया, बल्कि उन्हें पिछड़े वर्ग की राजनीति का बड़ा चेहरा बनाकर आगे बढ़ाया है। पार्टी के अंदर यह संदेश साफ दिया गया है कि अब भाजपा गैर यादव OBC और गैर जाटव दलित वोट बैंक को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगी।
सूत्र बताते हैं कि पंकज चौधरी ने संगठन में नए चेहरों को लाने के लिए जिलों से रिपोर्ट मंगवाई है। कई क्षेत्रीय अध्यक्षों, मोर्चा पदाधिकारियों और जिला स्तर के नेताओं के कामकाज का मूल्यांकन कराया गया है। कमजोर प्रदर्शन वाले नेताओं पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
नई टीम में सबसे ज्यादा जोर सामाजिक संतुलन पर रहेगा। भाजपा का पूरा फोकस इस बार दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग पर है। पार्टी पीडीए की राजनीति का जवाब अपने संगठनात्मक ढांचे से देना चाहती है। संभावित संगठनात्मक फार्मूले के अनुसार लगभग आधे पद ओबीसी नेताओं को मिल सकते हैं। युवा नेताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय चेहरों को प्राथमिकता मिलेगी।
पूर्वांचल, पश्चिम, बुंदेलखंड और अवध के बीच क्षेत्रीय संतुलन साधा जाएगा।निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है भाजपा अब जातीय समीकरण के साथ-साथ “आक्रामक संगठन” मॉडल पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि सिर्फ सरकार की योजनाओं के भरोसे चुनाव नहीं जीते जा सकते, इसके लिए मजबूत बूथ नेटवर्क जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश संगठन की सूची को लेकर दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ कई दौर की चर्चा हो चुकी है। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि यूपी भाजपा की टीम ऐसी हो जो 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हर जिले में राजनीतिक ऊर्जा पैदा कर सके।
बताया जा रहा है कि संगठन में उन चेहरों को आगे बढ़ाया जाएगा जिनकी पकड़ कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत है। भाजपा अब “सिर्फ बड़े नाम” नहीं बल्कि “काम करने वाले नेताओं” को आगे लाने की तैयारी में है। प्रदेश भाजपा इस समय 1918 मंडलों और हजारों बूथों के फीडबैक पर काम कर रही है। पार्टी की कोशिश है कि हर सामाजिक वर्ग में अपनी पैठ मजबूत की जाए। यही वजह है कि नई टीम को सिर्फ पद बांटने की कवायद नहीं बल्कि 2027 की चुनावी रणनीति का ट्रेलर माना जा रहा है।








