“सपा सांसद को बर्खास्त करो” के नारों से गूंजा परिसर, अखिलेश यादव की चुप्पी पर भी हमला
फर्रुखाबाद।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर समाजवादी पार्टी के एक सांसद द्वारा की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बुधवार को भाजपा महिला मोर्चा ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष बबीता पाठक ने किया।
प्रदर्शन के दौरान महिला कार्यकर्ताओं ने “सपा सांसद मुर्दाबाद” और “अखिलेश यादव जवाब दो” जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है।
भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष बबीता पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद होता है, जिसकी गरिमा और सम्मान पूरे राष्ट्र से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि सपा सांसद की टिप्पणी से पूरे देश में आक्रोश है, लेकिन समाजवादी पार्टी नेतृत्व की चुप्पी यह साबित करती है कि पार्टी इस बयान का समर्थन कर रही है। उन्होंने मांग की कि यदि सपा मुखिया अखिलेश यादव में नैतिकता बची है तो संबंधित सांसद को तत्काल पार्टी से बाहर किया जाए।
जिला उपाध्यक्ष भाजपा श्वेता दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर लोकप्रिय नेता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी लगातार लोकतांत्रिक परंपराओं और संविधान की मर्यादाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। श्वेता दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष से मामले का संज्ञान लेकर संबंधित सांसद की सदस्यता रद्द करने की मांग भी उठाई।
कलेक्ट्रेट परिसर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म दिखाई दिया। भाजपा महिला मोर्चा कार्यकर्ताओं ने 2027 विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा समाजवादी पार्टी को जवाब देने का दावा भी किया।
प्रदर्शन में ममता सक्सेना, मीना मिश्रा, डॉ. विनीता मिश्रा, चित्रा अग्निहोत्री, रमला राठौर, प्रतिभा राजपूत, सुमन राजपूत, रेखा सोमवंशी, मीरा सिंह, किरण सिंह, नीलम शाक्य, अनिल तिवारी, वीरेंद्र कठेरिया, कृष्ण मुरारी राजपूत, अभिषेक बाथम, गौरव सक्सेना, सर्वेश कुशवाह और शिवांग रस्तोगी सहित कई भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का स्तर लगातार नीचे जाने को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद यूपी की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत हमलों की तीव्रता और बढ़ सकती है।