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Friday, June 26, 2026
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तीन दिन से लापता अधेड़, भाई ने गुमशुदगी दर्ज कराने को दी तहरीर

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फर्रुखाबाद। थाना कोतवाली सदर क्षेत्र के मोहल्ला तलैया फतेह अली इमाम निवासी एक 49 वर्षीय अधेड़ के तीन दिन से लापता होने का मामला सामने आया है। परिजनों ने काफी तलाश के बाद भी कोई सुराग न मिलने पर पुलिस से गुमशुदगी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित अशोक गुप्ता पुत्र पुरुषोत्तम नारायण गुप्ता ने कोतवाली में दी गई तहरीर में बताया कि उनके बड़े भाई अनुपम गुप्ता (49 वर्ष) 23 जून को घर से निकले थे, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटे। परिवार ने रिश्तेदारों व परिचितों सहित संभावित स्थानों पर उनकी तलाश की, मगर उनका कोई पता नहीं चल सका।

तहरीर में यह भी बताया गया है कि अनुपम गुप्ता घर से जाते समय अपना मोबाइल फोन भी साथ नहीं ले गए थे, जिससे उनसे संपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है। इस कारण परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

पीड़ित ने पुलिस से गुमशुदगी दर्ज कर अनुपम गुप्ता की तलाश शुरू करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि तहरीर के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

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ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ही प्रशासक नियुक्त किए जाने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने प्रथम दृष्टया इस व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे असंवैधानिक माना और सरकार से जवाब तलब किया है।

यह आदेश न्यायालय ने अरविंद राठौर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के शासनादेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई निर्धारित की है। इस फैसले के बाद प्रदेशभर में ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर नई स्थिति पैदा हो गई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

आस्था जितनी बड़ी, पारदर्शिता उतनी ही अनिवार्य

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अयोध्या का श्रीराम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था, विश्वास और भावनाओं का केंद्र है। ऐसे में मंदिर से जुड़े प्रत्येक निर्णय, प्रत्येक दान और प्रत्येक वित्तीय प्रक्रिया पर समाज की स्वाभाविक निगाह रहती है। जब किसी संस्था का संचालन जनसहयोग और श्रद्धालुओं के चढ़ावे से होता है, तब पारदर्शिता केवल कानूनी आवश्यकता नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व भी बन जाती है।

हाल के घटनाक्रम में भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह की शिकायत के आधार पर प्रधानमंत्री कार्यालय से संदर्भित पत्र जिला प्रशासन तक पहुंचा। इसके बाद प्रशासन ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से वित्तीय जानकारी मांगी। ट्रस्ट की ओर से महासचिव चंपत राय ने उत्तर दिया कि मामला पहले से एसआईटी की जांच के दायरे में है, इसलिए अलग से वित्तीय जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।

यहीं से बहस शुरू होती है। एक पक्ष का तर्क है कि जब जांच चल रही हो तो अलग से दस्तावेज साझा करना उचित नहीं हो सकता। वहीं दूसरा पक्ष यह सवाल उठाता है कि यदि सब कुछ नियमानुसार है तो वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने में संकोच क्यों होना चाहिए। यही प्रश्न जनमानस के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

लोकतंत्र में विश्वास प्रश्न पूछने से कमजोर नहीं होता, बल्कि पारदर्शी उत्तर देने से मजबूत होता है। राम मंदिर जैसा राष्ट्रीय महत्व का संस्थान यदि अपनी वित्तीय व्यवस्था को अधिक खुला और जवाबदेह बनाए, तो इससे न केवल विवाद समाप्त होंगे बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास भी और सुदृढ़ होगा।

यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी घोषित करना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। जांच एजेंसियों को निष्पक्ष रूप से अपना कार्य करना चाहिए और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं, तो वह भी समान स्पष्टता के साथ जनता के सामने आना चाहिए।

राम के नाम पर बना मंदिर केवल भव्यता का प्रतीक नहीं, बल्कि मर्यादा, सत्य और उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है। इसलिए इस पूरे प्रकरण का सबसे उचित समाधान आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और अधिकतम पारदर्शिता है। आस्था को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन आस्था से जुड़े संस्थानों को पारदर्शिता का सर्वोच्च उदाहरण अवश्य बनना चाहिए। यही रामराज्य की भावना के भी सबसे निकट होगा।

भारी सुरक्षा और गर्मी के बीच सड़कों पे उतरे हुसैन के दीवाने

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जिओ में असूर के जुलूस में मातम के बाद ताजिये सुपुर्द ए खाकददं
फर्रुखाबाद। 10 वीं मुहर्रम यौमे आशूरा का जुलूस हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की शहादत की याद में अकीदत और गमगीन माहौल के साथ निकाला गया ।भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुलूस र रोओ
अलमे हजरते अब्बास और गहवारह अली असगर बरामद हुआ जुलूस मुख्य मार्गो से होता हुआ क़र्बला तक पहुंचा जहां ताजिये थंथं भीदफ्न किये गये।
बताते चलें कि इस मौके पर शहर के विभिन्न हिस्सों मातम और मजलिस अजादार (श्रद्धालु) काले कपड़े पहनकर जुलूस में शामिल होते हैं, सीनाजनी (मातम) करते हैं और ‘या हुसैन’ की सदाएं करते हैं।ताजिया सुपुर्द-ए-खाक: 10 मुहर्रम के दिन ताजियों को पूरे गमगीन माहौल में कर्बला ले जाया गया है और सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मुख्य शहर घुमना चौक पक्कापुल रकाबगंज होते हुए क़र्बला पहुंचा। अमेठी से ताजिया जुलूस निकाला गया वहीं जो अंगूरी बाग मनिहारी साहबगंज चौराहा सुथाट्टी रोड घुमना कोतवाली रोड नेहरू रोड चौक चौराहा किराना बाजार पक्का पुल तिकोना चौराहा टाउन हॉल तिराहा होते हुए चिलसरा रोड स्थित कर्बला में जाकर सुपुर्दे खाक हुआ।
मुहर्रम के अवसर पर शीशमबाग़ फतेहगढ़ में कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुहल्ले के सम्मानित निवासियों ने भाग लिया।इस अवसर पर श्री मुहम्मद शरीफ,मुहम्मद हलीम, मुख्तार अहमद,नईम कुरैशी, ऐजाज़ अहमद,इकरार मंसूरी आदि उपस्थित रहे।मुहम्मद साजिद कुरैशी ने बताया कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने ज़ुल्म के ख़िलाफ़ अपना सर्वस्व निछावर कर दिया लेकिन ग़लत व्यक्ति यज़ीद का समर्थन नहीं किया। उन्होंने मुहब्बत का संदेश दिया बताया अल्लाह को खुश करने के लिए अपने पड़ोसियों से मधुर संबंध रखें,पड़ोसी चाहे किसी भी धर्म के एक के हक़ीक़त से पहले में मदद करें।ईरानी महिलाएं सर पर अली असगर का जुला लेकर चल रही थी। सुबह से शाम तक शहर में मातम का माहौल बना रहा है सैकड़ो की तादाद में लोगों ने जुलूस में भागीदारी की।

जनता की समस्याओं का शीघ्र समाधान कराएं अधिकारी: मुख्यमंत्री

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जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने

लोगों से कहा- चिंता मत करिए, सबकी समस्या पर सुनिश्चित होगी प्रभावी कार्रवाई

गोरखपुर, 26 जून। गोरखपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की हर समस्या का शीघ्र समाधान कराएं। लोगों की शिकायतों को संवेदनशीलता से लेकर संतुष्टिप्रद निस्तारण सुनिश्चित कराने में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जनता दर्शन में पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत करिए। सरकार सबकी समस्या पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी।

जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर लगी कुर्सियों पर बैठे लोगों तक सीएम स्वयं चलकर पहुंचे और सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने सबके प्रार्थना पत्रों को पास में खड़े अधिकारियों को हस्तगत कर समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, सबकी समस्या का समाधान कराया जाएगा।

जनता दर्शन में हर बार की तरह कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। हृदय रोग से पीड़ित एक महिला से उन्होंने कहा कि इलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। सीएम योगी ने जमीन कब्जे से जुड़ी शिकायतों पर अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में त्वरित व कड़े कदम उठाए जाएं। जमीन कब्जा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।