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Tuesday, June 9, 2026
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आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई ताकत, यूपी में बनेगा स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप

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– 10 जिलों से होगी शुरुआत

लखनऊ/यूथ इंडिया। उत्तर प्रदेश सरकार आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में अब स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप (SRG) का गठन किया जाएगा, जिसे राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप यह विशेष बल प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के दौरान त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रस्तावित योजना के तहत पहले चरण में प्रदेश के 10 जिलों में एसआरजी इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए 240 चयनित कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन जवानों को NDRF, BSF, ITBP और CISF जैसे प्रतिष्ठित सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन संस्थानों में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में प्रभावी ढंग से राहत और बचाव कार्य कर सकें।

सरकार की योजना के अनुसार एसआरजी को अत्याधुनिक रेस्क्यू उपकरणों और तकनीकी संसाधनों से लैस किया जाएगा। यह विशेष बल भवन ढहने, बाढ़, भूकंप, आग, रासायनिक दुर्घटनाओं और अन्य आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अंजाम देगा। तेजी से शहरीकरण और बढ़ती आबादी को देखते हुए इस बल की उपयोगिता और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

समीक्षा बैठकों में यह भी तय किया गया है कि प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं का विस्तार तहसील स्तर तक किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक तहसील तक फायर सर्विस की पहुंच सुनिश्चित हो, जिससे आगजनी जैसी घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।

विशेष रूप से लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर और अन्य तेजी से विकसित हो रहे शहरों में हाईराइज इमारतों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर विशेष अग्निसुरक्षा व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके लिए आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती पर जोर दिया जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की 350 तहसीलों में से वर्तमान में 296 तहसीलों में फायर स्टेशन संचालित हो रहे हैं। वहीं पिछले नौ वर्षों में फायर सर्विस की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। फायर वाहनों की संख्या 750 से बढ़कर 1660 तक पहुंच गई है। इसके अलावा 26 नए फायर स्टेशन तैयार हो चुके हैं, जबकि 25 अन्य फायर स्टेशनों का निर्माण कार्य जारी है।

योगी सरकार का मानना है कि आधुनिक आपदा प्रबंधन व्यवस्था केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जोखिम को कम करने और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा। ऐसे में स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप का गठन उत्तर प्रदेश की आपदा प्रबंधन प्रणाली को नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर योगी सरकार का फोकस

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– 1.60 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा

लखनऊ/यूथ इंडिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को हथकरघा एवं ग्रामोद्योग विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक, ई-कॉमर्स और वैश्विक बाजार से जोड़कर उत्तर प्रदेश को रोजगार और उद्यमिता का बड़ा केंद्र बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जाए।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि प्रदेश में अब तक 1.60 लाख से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा चुका है। उल्लेखनीय बात यह है कि कुल प्रशिक्षणार्थियों में 87 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय के साथ हथकरघा और ग्रामोद्योग क्षेत्र में ऑटोमेशन, आधुनिक मशीनरी तथा टेक्निकल टेक्सटाइल्स को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धी बाजार में प्रदेश के उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी।

योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण को आजीविका से जोड़ने पर विशेष बल देते हुए कहा कि पर्यावरण अनुकूल मिट्टी से बने उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाए। इससे एक ओर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हथकरघा और ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तथा आधुनिक मार्केटिंग नेटवर्क से जोड़ा जाए, ताकि ग्रामीण कारीगरों और उद्यमियों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के उत्पादों की अलग पहचान स्थापित करने की रणनीति पर भी जोर दिया।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक प्रदेश में 1,331 नई इकाइयों की स्थापना की गई है। इन इकाइयों में 3,302.37 लाख रुपये का पूंजी निवेश हुआ है, जबकि उद्यमियों को 557.18 लाख रुपये की मार्जिन मनी सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के कारीगरों, बुनकरों और ग्रामीण उद्यमियों को नई तकनीक और नए बाजारों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

योगी सरकार की इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आपदा से मुकाबले की नई तैयारी: उत्तर प्रदेश में विशेष बचाव दल की जरूरत और चुनौतियां

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उत्तर प्रदेश भौगोलिक दृष्टि से देश का सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। बाढ़, अग्निकांड, भवन ध्वस्त होने की घटनाएं, औद्योगिक दुर्घटनाएं और प्राकृतिक आपदाएं यहां समय-समय पर जनजीवन को प्रभावित करती रही हैं। बढ़ती आबादी, तेजी से हो रहे शहरीकरण और बहुमंजिला इमारतों के विस्तार ने आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल बना दिया है। ऐसे समय में प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की तर्ज पर विशेष बचाव दल के गठन का निर्णय स्वागत योग्य और दूरगामी महत्व का कदम है।

विगत वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अनेक बड़ी आपदाओं का सामना किया है। पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में हर वर्ष आने वाली बाढ़ हजारों परिवारों को प्रभावित करती है। वहीं महानगरों में अग्निकांड, भवन ध्वस्त होने और औद्योगिक दुर्घटनाओं की घटनाएं प्रशासनिक तंत्र की तत्परता की परीक्षा लेती हैं। अक्सर देखा गया है कि आपदा के शुरुआती घंटों में राहत और बचाव कार्य सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि प्रशिक्षित और संसाधनयुक्त दल समय पर पहुंच जाए तो अनेक बहुमूल्य जीवन बचाए जा सकते हैं।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में विशेष बचाव दल की स्थापना की जा रही है। प्रथम चरण में दस जनपदों में इसकी इकाइयों का गठन किया जाएगा तथा चयनित कर्मियों को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल जैसे संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण केवल शारीरिक दक्षता तक सीमित नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, आपदा मनोविज्ञान, रासायनिक दुर्घटनाओं से निपटने और उच्च स्तरीय खोज एवं बचाव अभियानों की विशेषज्ञता भी प्रदान करेगा।

आज के समय में आपदाओं का स्वरूप बदल रहा है। पहले जहां बाढ़ और आग जैसी पारंपरिक चुनौतियां प्रमुख थीं, वहीं अब रासायनिक रिसाव, औद्योगिक विस्फोट, बहुमंजिला इमारतों में आग, लिफ्ट दुर्घटनाएं और शहरी आपदाएं नई चुनौतियों के रूप में सामने आ रही हैं। ऐसे में सामान्य अग्निशमन व्यवस्था पर्याप्त नहीं रह जाती। विशेष प्रशिक्षित बचाव दल की आवश्यकता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि उसके पास आधुनिक उपकरण, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता होती है।

प्रदेश सरकार का प्रत्येक तहसील तक अग्निशमन सेवाओं का विस्तार करने का लक्ष्य भी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश की अनेक तहसीलें आज भी ऐसी हैं जहां आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों को दूरस्थ जनपदों से पहुंचना पड़ता है। इससे राहत कार्यों में विलंब होता है और नुकसान बढ़ जाता है। यदि प्रत्येक तहसील में सशक्त अग्निशमन व्यवस्था उपलब्ध हो जाए तो आपदाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विशेष रूप से लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में तेजी से बढ़ती ऊंची इमारतें नई सुरक्षा चुनौतियां उत्पन्न कर रही हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में बहुमंजिला भवनों में लगी आग की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पारंपरिक संसाधनों के भरोसे ऐसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से नहीं निपटा जा सकता। इसके लिए विशेष उपकरण, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, उच्च क्षमता वाले अग्निशमन वाहन और प्रशिक्षित मानव संसाधन अनिवार्य हैं।

हालांकि केवल विशेष बचाव दल का गठन ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ निरंतर प्रशिक्षण, उपकरणों का नियमित आधुनिकीकरण, जनजागरूकता अभियान और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय भी सुनिश्चित करना होगा। आपदा प्रबंधन का सबसे मजबूत आधार केवल सरकारी तंत्र नहीं बल्कि जागरूक समाज भी होता है। यदि नागरिकों को प्राथमिक बचाव उपायों और आपदा के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों की जानकारी हो तो क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश में विशेष बचाव दल का गठन केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर की गई रणनीतिक तैयारी है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो प्रदेश आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थान बना सकता है। बदलते समय की मांग भी यही है कि राहत और बचाव व्यवस्था को पारंपरिक ढांचे से निकालकर आधुनिक, वैज्ञानिक और त्वरित प्रतिक्रिया वाले स्वरूप में विकसित किया जाए। विशेष बचाव दल उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले वर्षों में लाखों लोगों की सुरक्षा का आधार बन सकता है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने डॉ. रजनी सरीन के निधन पर जताया शोक

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लखनऊ/फर्रुखाबाद/यूथ इंडिया। भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने वरिष्ठ भाजपा नेत्री, प्रख्यात चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. रजनी सरीन के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

पंकज चौधरी ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. रजनी सरीन के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपने जीवन को जनसेवा, सामाजिक सरोकारों और लोककल्याण के कार्यों के लिए समर्पित किया। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. रजनी सरीन केवल एक चिकित्सक ही नहीं थीं, बल्कि संगठन की समर्पित कार्यकर्ता और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच लोकप्रिय व्यक्तित्व थीं। सामाजिक सेवा और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। पंकज चौधरी ने कहा कि इस कठिन समय में भाजपा परिवार शोकाकुल परिजनों के साथ खड़ा है और ईश्वर उन्हें इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
गौरतलब है कि डॉ. रजनी सरीन भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कर समिति की सदस्य थीं और लंबे समय से सामाजिक, चिकित्सा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। उनके निधन से भाजपा संगठन और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।

कांगेस की ओर से सभी को स्नेह और प्रेम मिलेगा : राहुल गाँधी

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अखिलेश यादव ने कांग्रेस से क्षेत्रीय दलों के प्रति बड़ा दिल दिखाने को कहा

 

 

नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन इंडिया (INDIA) की राजधानी नई दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक में एक ओर जहां भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को अपने सहयोगी दलों से स्पष्ट संदेश भी मिला। समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, वामपंथी दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस की भूमिका को स्वीकार करते हुए राज्यों में क्षेत्रीय दलों के प्रति अधिक सहयोगात्मक रवैया अपनाने की सलाह दी।

 

बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस की बड़ी भूमिका है, इसलिए उसे क्षेत्रीय दलों के प्रति बड़ा दिल दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गठबंधन की मजबूती के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं बल्कि राज्यों में भी बेहतर समन्वय और सहयोग जरूरी है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी इस बात से सहमति जताते हुए कहा कि विपक्ष को वर्ष 2029 की राजनीतिक लड़ाई की तैयारी अभी से शुरू करनी होगी।

 

बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी विपक्षी एकजुटता पर जोर देते हुए भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष में कांग्रेस की केंद्रीय भूमिका को स्वीकार किया। वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस को विपक्षी दलों को एकजुट रखने वाला “चुंबक” बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सभी विपक्षी दलों को साथ लाने की क्षमता कांग्रेस में ही है।

 

सूत्रों के अनुसार विभिन्न सहयोगी दलों की नाराजगी और अपेक्षाओं के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सभी नेताओं को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस की ओर से सहयोगी दलों को हमेशा स्नेह, सम्मान और सहयोग मिलेगा। राहुल गांधी ने कहा कि राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं और कई निर्णय स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लिए जाते हैं, लेकिन विपक्षी एकता को मजबूत बनाए रखने की प्रतिबद्धता कायम रहेगी।

 

करीब दस महीने बाद हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में विपक्षी दलों ने चुनावी पारदर्शिता, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। बैठक में यह सहमति बनी कि गठबंधन की सक्रियता बनाए रखने के लिए अब प्रत्येक दो माह में नियमित बैठक आयोजित की जाएगी। अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में प्रस्तावित है।

इथेनॉल बनेगा भारत की नई ताकत

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खेतों से निकलेगा ईंधन, घटेगा तेल आयात और बढ़ेगी किसानों की आय

 

नई दिल्ली। दुनिया में ऑटोमोबाइल क्रांति की शुरुआत करीब 140 वर्ष पहले हुई थी, जब जर्मनी के इंजीनियर कार्ल बेंज ने पहली मोटर कार का निर्माण किया था। तब से लेकर आज तक परिवहन क्षेत्र में कई बड़े बदलाव आए हैं। अब दुनिया एक नई ऊर्जा क्रांति की ओर बढ़ रही है, जहां पेट्रोल और डीजल के विकल्प के रूप में इथेनॉल को भविष्य के ईंधन के तौर पर देखा जा रहा है। भारत भी इसी दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है और इथेनॉल आधारित ईंधन को आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम मान रहा है।

 

देश में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और विदेशी तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है। इथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे न केवल कच्चे तेल के आयात पर होने वाला भारी खर्च कम होगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। गन्ना और अन्य फसलों की खपत बढ़ने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कृषि क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही इथेनॉल को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जिससे प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है।

 

भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र भी तेजी से इस बदलाव को अपना रहा है। कई वाहन निर्माता कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस वाहन बाजार में उतार रही हैं, जो पेट्रोल और इथेनॉल दोनों पर चल सकते हैं। इसे भारतीय परिवहन व्यवस्था में आने वाले बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।