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Wednesday, May 20, 2026
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12वीं हिंदी पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई, पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

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रायपुर: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (Chhattisgarh Board of Secondary Education) द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की कक्षा 12वीं हिन्दी परीक्षा (Hindi exam) का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले वायरल करने के मामले में रायपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला थाना सिटी कोतवाली, मध्य जोन, पुलिस कमिश्नरेट रायपुर का है। पुलिस के अनुसार, 17 मार्च 2026 को कक्षा 12वीं हिन्दी प्रश्नपत्र के हस्तलिखित स्वरूप में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर वायरल होने की शिकायत मिलने पर अपराध दर्ज किया गया था।

मामले में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2008 की धारा 4, 5, 10 एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 112 और 316 के तहत मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला, पुलिस उपायुक्त उमेश प्रसाद गुप्ता, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त तारकेश्वर पटेल और सहायक पुलिस आयुक्त दीपक मिश्रा के निर्देशन में विशेष टीम गठित कर जांच की गई।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी वेणु कुमार जंघेल ने एक छात्र को व्हाट्सएप के जरिए हिन्दी प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था और इसके बदले ऑनलाइन 3 हजार रुपये लिए थे। बैंक खाते की जांच में लेनदेन की पुष्टि भी हुई। वेणु जंघेल से पूछताछ के बाद पुलिस ने बेमेतरा जिले के ग्राम बोरतरा निवासी विकास सेन और हायर सेकेंडरी स्कूल बोरतरा में पदस्थ पीटीआई जवाहर लाल कुर्रे को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पूछताछ में सामने आया कि जवाहर लाल कुर्रे ने ही हस्तलिखित प्रश्नपत्र वेणु जंघेल और विकास सेन को उपलब्ध कराया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जवाहर लाल कुर्रे तक प्रश्नपत्र कैसे पहुंचा। पुलिस ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और प्रश्नपत्र लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

 

 

पंचायत चुनाव की राह साफ करने को बना पिछड़ा वर्ग आयोग की न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को कमान

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अटके पंचायत चुनावों को लेकर योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश Ram Autar Singh को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। आयोग पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण और सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट फार्मूले को लागू करने के उद्देश्य से काम करेगा। सरकार ने आयोग को छह महीने का कार्यकाल दिया है, हालांकि अधिसूचना में तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने का भी प्रावधान रखा गया है।

पांच सदस्यीय इस आयोग में अध्यक्ष के अलावा दो सेवानिवृत्त अपर जिला जज और दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है। आयोग में पूर्व एडीजे Brijesh Kumar और Santosh Kumar Vishwakarma शामिल हैं। वहीं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों Arvind Kumar Chaurasia और S. P. Singh को भी सदस्य नामित किया गया है। आयोग का मुख्यालय लखनऊ में बनाया गया है।

दरअसल 18 मई को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद बुधवार को आयोग के गठन की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। आयोग पंचायत क्षेत्रों का सर्वे कर आरक्षण का नया रोटेशन तय करेगा, जिससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव पहले ही विलंबित हो चुके हैं। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव के नतीजे 2 मई तक आ गए थे, लेकिन इस बार आरक्षण प्रक्रिया और कानूनी बाधाओं के चलते चुनाव कार्यक्रम तय नहीं हो सका। राज्य निर्वाचन आयोग अब 10 जून को अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तैयारी में है, हालांकि इसकी तारीख पहले पांच बार बढ़ाई जा चुकी है।

प्रदेश में ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा। वहीं जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। ऐसे में चुनाव समय पर नहीं होने की स्थिति में पंचायतों में प्रशासक या प्रशासक समितियां नियुक्त करनी पड़ सकती हैं। पंचायती राज विभाग ने शासन को निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने अथवा प्रशासक समिति गठित करने का प्रस्ताव भी भेज दिया है।

ईरान युद्ध में अमेरिका को सबसे बड़ा झटका, 42 विमान तबाह, 29 अरब डॉलर का नुकसान, होर्मुज संकट से दुनिया दहली

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एजेंसी

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष अब वैश्विक चिंता का कारण बन गया है। अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की ताजा रिपोर्ट ने युद्ध में अमेरिका को हुए भारी नुकसान का खुलासा कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अब तक अपने 42 सैन्य विमान और ड्रोन गंवा चुका है, जबकि इस युद्ध की कुल लागत बढ़कर 29 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। अत्याधुनिक तकनीक और दुनिया की सबसे ताकतवर सेना होने के बावजूद अमेरिका को इस जंग में अप्रत्याशित सैन्य और आर्थिक चोट लगी है।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने अपने कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान खो दिए हैं। इनमें चार एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट शामिल हैं। तीन विमान कुवैत के ऊपर अपनी ही सेना की ‘फ्रेंडली फायर’ का शिकार हुए, जबकि एक विमान ईरान के हवाई क्षेत्र में मार गिराया गया। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35ए लाइटनिंग-2 भी नष्ट हो गया। इसे दुनिया का सबसे सुरक्षित और आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है। ईरान ने दावा किया है कि वह एफ-35 को मार गिराने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

युद्ध में अमेरिका के 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन, एक एमक्यू-4सी ट्राइटन निगरानी ड्रोन, सात केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान, एक ई-3 सेंट्री टोही विमान, दो एमसी-130जे कमांडो विमान और एक एचएच-60डब्ल्यू हेलीकॉप्टर भी नष्ट हुए हैं। इन विमानों की कीमत अरबों डॉलर बताई जा रही है। पेंटागन के सैन्य वित्त प्रमुख जूल्स डब्ल्यू हर्श-तृतीय ने अमेरिकी सीनेट समिति के सामने माना कि युद्ध की लागत लगातार बढ़ रही है और नष्ट हुए विमानों की भरपाई बेहद महंगी साबित हो रही है।

इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। जवाब में ईरान ने अमेरिकी और इस्राइली सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए। इसके बाद ईरान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल आपूर्ति लाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। नाकाबंदी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ऊर्जा संकट गहराने लगा है।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 12 अप्रैल को दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की कोशिश हुई थी, लेकिन बातचीत पूरी तरह विफल रही। फिलहाल क्षेत्र में बेहद नाजुक युद्धविराम लागू है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि स्थिति कभी भी दोबारा युद्ध में बदल सकती है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया कि भविष्य में संघर्ष बढ़ा तो अमेरिका को इससे भी बड़े “सरप्राइज” देखने पड़ेंगे।

पश्चिम एशिया का यह संकट अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया की निगाहें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।

मिशन 2027 के लिए दिल्ली में तैयार हुई यूपी भाजपा की नई रणनीति, 25 नामों पर मंथन तेज

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लखनऊ। प्रदेश में मिशन 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आवास पर हुई अहम बैठक में उत्तर प्रदेश भाजपा की नई टीम के गठन को लेकर व्यापक मंथन किया गया। बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी .एल संतोष , प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद रहे। दो चरणों में चली बैठक में प्रदेश पदाधिकारियों, छह क्षेत्रीय अध्यक्षों और निगम, आयोग व बोर्डों में समायोजन के लिए संभावित नामों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार भाजपा ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद संगठन में भी बड़े बदलाव का खाका तैयार कर लिया है। प्रदेश में नए महामंत्री, उपाध्यक्ष और मंत्रियों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। पार्टी अब सात की जगह छह महामंत्री रखने की तैयारी में है। वर्तमान में प्रदेश इकाई में 45 सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली में संगठन का आकार सीमित रखने पर भी विचार हुआ। हालांकि यूपी इकाई ने राज्य के विशाल क्षेत्रफल और चुनावी वर्ष का हवाला देकर मौजूदा ढांचे को बरकरार रखने की पैरवी की।

बैठक में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर विशेष फोकस किया गया। पश्चिम क्षेत्र में गुर्जर और वैश्य चेहरे पर चर्चा हुई, जबकि अवध क्षेत्र में ब्राह्मण नेतृत्व को प्राथमिकता मिलने की संभावना जताई जा रही है। ब्रज क्षेत्र में शाक्य या लोध समाज से किसी नेता को जिम्मेदारी मिल सकती है। वाराणसी क्षेत्र के नामों पर अंतिम फैसला दिल्ली नेतृत्व की सहमति से होगा, वहीं गोरखपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राय को अहम माना जा रहा है। कानपुर क्षेत्र में भी जातीय समीकरण बदलने की चर्चा तेज है।

भाजपा संगठन ने निगम, आयोग, बोर्ड और प्राधिकरणों में समायोजन के लिए पहले चरण में 25 नामों पर विचार किया है। माना जा रहा है कि प्रदेश संगठन की घोषणा के बाद इन नियुक्तियों की सूची भी जारी की जाएगी। पार्टी पहले ही मार्च में प्रदेश के 761 नगरीय निकायों में 2805 सभासदों का समायोजन कर बड़ा संदेश दे चुकी है। इसके अलावा 98 संगठनात्मक जिलों में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति भी की गई थी।

सूत्रों का कहना है कि इस बार महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहेगा। प्रदेश संगठन और विभिन्न बोर्डों में एक-तिहाई महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का दबाव पार्टी नेतृत्व पर बताया जा रहा है। दिल्ली में चली लंबी बैठकों के बाद अब भाजपा कार्यकर्ताओं और दावेदारों की निगाहें नई टीम की आधिकारिक घोषणा पर टिक गई हैं। चुनावी दृष्टि से इसे भाजपा की सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक कवायद माना जा रहा है।

देश के टॉप डीएम में चमके यूपी के अफसर

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संभल के राजेंद्र पेंसिया और आजमगढ़ के रविंद्र कुमार सबसे ज्यादा चर्चा में

रविंद्र कुमार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

लखनऊ। देश के 100 ‘बेस्ट परफॉर्मिंग’ जिला मजिस्ट्रेटों की सूची में उत्तर प्रदेश के आठ जिलाधिकारियों ने जगह बनाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। प्रतिष्ठित फेम इंडिया मैगजीन के अखिल भारतीय सर्वेक्षण में चयनित अधिकारियों के प्रशासनिक नेतृत्व, जनसेवा, कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को आधार बनाया गया।

इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा राजेंद्र पेंसिया और रविंद्र कुमार की रही। संभल में राजेंद्र पेंसिया अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली, पारदर्शिता और त्वरित निर्णयों के लिए पहचान बना चुके हैं। जिसके बलबूते अब उनको बड़े जनपद मुरादाबाद की जिम्मेदारी सौंपी गई है वहीं आजमगढ़ के रविंद्र कुमार ने विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनसुनवाई और प्रशासनिक सक्रियता से राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई है।

डीएम आजमगढ़ रविंद्र कुमार

इसके अलावा सत्येंद्र कुमार को वाराणसी में विकास परियोजनाओं और व्यवस्थाओं के बेहतर संचालन के लिए सराहा गया। विशाख जी अय्यर ने राजधानी में प्रशासनिक समन्वय और स्मार्ट प्रबंधन को मजबूत किया। विजय कुमार सिंह को कानून व्यवस्था और विकास कार्यों में प्रभावी भूमिका के लिए पहचान मिली।अंजनी कुमार सिंह ने ग्रामीण विकास और जनकल्याण योजनाओं के बेहतर संचालन से अपनी छाप छोड़ी। अस्मिता लाल को महिला सुरक्षा, शिक्षा और प्रशासनिक नवाचारों के लिए सराहा गया।

वहीं अविनाश सिंह ने जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और प्रशासनिक दक्षता से लोगों का भरोसा जीता।फेम इंडिया मैगजीन अपने विशेष संस्करण “बेस्ट डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट-2026” में इन अधिकारियों की उपलब्धियों, नवाचारों और जनसेवा से जुड़े कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करेगी। करीब 800 जिलों में हुए इस सर्वेक्षण में चयनित होना उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

आपकी समस्या का अंतिम पड़ाव वाले अफसर की खासियत

लखनऊ

राजेंद्र पेंसिया की पहचान सिर्फ एक सख्त और प्रभावी प्रशासक के रूप में ही नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने वाले अधिकारी के तौर पर भी होती है। मुरादाबाद में बतौर जिला अधिकारी वह अक्सर खड़े होकर फरियादियों के पास जाकर जन समस्याएं सुनते हुए देखे जाते हैं उनकी कार्यशैली का अंदाजा उनकी टेबल पर रखी दो खास पट्टिकाओं से लगाया जाता है, जो अक्सर अधिकारियों, कर्मचारियों और फरियादियों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं।

उनकी टेबल पर लगी पहली पट्टिका पर लिखा है —
“आपकी समस्या का अंतिम पड़ाव”

वहीं दूसरी पट्टिका उनकी प्रशासनिक सोच और जिम्मेदारी को दर्शाती है। उस पर लिखा होता है —
“मेरी मेज पर रखी हुई प्रत्येक पत्रावली के पीछे एक व्यक्ति खड़ा अपने कार्य होने की प्रतीक्षा कर रहा है। मेरा यह पहला कर्तव्य है कि मैं सबसे पहले इस पत्रावली का निस्तारण कर उस व्यक्ति को राहत प्रदान करूं।”

प्रशासनिक गलियारों में माना जाता है कि यही सोच राजेंद्र पेंसिया को अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाती है। संभल में उनकी त्वरित कार्रवाई, पारदर्शी कार्यशैली और जनसुनवाई की व्यवस्था ने आम लोगों के बीच भरोसा मजबूत किया है। यही वजह रही कि राष्ट्रीय स्तर पर हुए सर्वेक्षण में उन्हें देश के उत्कृष्ट जिलाधिकारियों में स्थान मिला।

ईरान युद्ध में अमेरिका को सबसे बड़ा झटका, 42 विमान तबाह, 29 अरब डॉलर का नुकसान, होर्मुज संकट से दुनिया दहली

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एजेंसी: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष अब वैश्विक चिंता का कारण बन गया है। अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की ताजा रिपोर्ट ने युद्ध में अमेरिका को हुए भारी नुकसान का खुलासा कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अब तक अपने 42 सैन्य विमान और ड्रोन गंवा चुका है, जबकि इस युद्ध की कुल लागत बढ़कर 29 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। अत्याधुनिक तकनीक और दुनिया की सबसे ताकतवर सेना होने के बावजूद अमेरिका को इस जंग में अप्रत्याशित सैन्य और आर्थिक चोट लगी है।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने अपने कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान खो दिए हैं। इनमें चार एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट शामिल हैं। तीन विमान कुवैत के ऊपर अपनी ही सेना की ‘फ्रेंडली फायर’ का शिकार हुए, जबकि एक विमान ईरान के हवाई क्षेत्र में मार गिराया गया। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35ए लाइटनिंग-2 भी नष्ट हो गया। इसे दुनिया का सबसे सुरक्षित और आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है। ईरान ने दावा किया है कि वह एफ-35 को मार गिराने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

युद्ध में अमेरिका के 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन, एक एमक्यू-4सी ट्राइटन निगरानी ड्रोन, सात केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान, एक ई-3 सेंट्री टोही विमान, दो एमसी-130जे कमांडो विमान और एक एचएच-60डब्ल्यू हेलीकॉप्टर भी नष्ट हुए हैं। इन विमानों की कीमत अरबों डॉलर बताई जा रही है। पेंटागन के सैन्य वित्त प्रमुख जूल्स डब्ल्यू हर्श-तृतीय ने अमेरिकी सीनेट समिति के सामने माना कि युद्ध की लागत लगातार बढ़ रही है और नष्ट हुए विमानों की भरपाई बेहद महंगी साबित हो रही है।

इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। जवाब में ईरान ने अमेरिकी और इस्राइली सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए। इसके बाद ईरान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल आपूर्ति लाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। नाकाबंदी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ऊर्जा संकट गहराने लगा है।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 12 अप्रैल को दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की कोशिश हुई थी, लेकिन बातचीत पूरी तरह विफल रही। फिलहाल क्षेत्र में बेहद नाजुक युद्धविराम लागू है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि स्थिति कभी भी दोबारा युद्ध में बदल सकती है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया कि भविष्य में संघर्ष बढ़ा तो अमेरिका को इससे भी बड़े “सरप्राइज” देखने पड़ेंगे।

पश्चिम एशिया का यह संकट अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया की निगाहें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।