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Saturday, April 18, 2026
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पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लड़कियों को धमकाकर रंगदारी मांगने वाले 2 बदमाश गिरफ्तार

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चंदौली: यूपी के चंदौली (Chandauli) जिले की धानापुर पुलिस ने लड़कियों को धमकाकर रंगदारी मांगने वाले दो अभियुक्तों को गिरफ्तार (arrested) किया है। ये आरोपी अपने शौक पूरे करने के लिए लड़कियों को निशाना बनाते थे और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी देकर गहने और नगदी ऐंठते थे। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक, धानापुर थाना क्षेत्र के प्रसादपुर निवासी घनश्याम यादव ने पुलिस को लिखित तहरीर देते हुए बताया था कि मोहित यादव पुत्र शिवकुमार यादव और नीरज यादव पुत्र निर्गुण यादव (निवासी ग्राम बड़ी रामराज, धानापुर) ने उनकी बेटी को परिवार को जान से मारने की धमकी दी। डर के कारण उनकी बेटी ने घर में रखे मां के गहने और एक लाख रुपये इन आरोपियों को दे दिए।

शिकायत के आधार पर धानापुर पुलिस ने दोनों आरोपियों मोहित यादव और नीरज यादव को शहीद गांव के पास से गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से एक जोड़ी चांदी की पैजनी, एक सोने का मांग टीका, एक सोने की अंगूठी, एक चांदी की कमरबंद, दो सोने के कान के टॉप्स, एक सोने की नथिया और 1 लाख 350 रुपये बरामद किए गए। बरामद सामान की कुल कीमत तीन लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

क्षेत्राधिकारी सकलडीहा स्नेहा तिवारी ने मीडिया को बताया कि ये दोनों अभियुक्त शातिर किस्म के हैं और अपने शौक पूरे करने के लिए ऐसी वारदातें करते थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे इन पैसों को घूमने-फिरने पर खर्च करते थे और बाकी बचे गहनों को बेचने की फिराक में थे।

 

 

हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से युवक की मौत, घर में पसरा मातम

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बदायूं: यूपी के बदायूं (Badaun) जिले के वजीरगंज थाना क्षेत्र के धिमरपुरा गांव में हाईटेंशन लाइन (high-tension line) पर काम कर रहे युवक अरविंद यादव की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब युवक शटडाउन के बाद पोल पर चढ़कर कार्य कर रहा था, लेकिन अचानक लाइन में करंट दौड़ गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा बेहद भयावह था, जिसमें युवक का शरीर बुरी तरह झुलस गया। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और बिजली विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए गएग्रामीणों का कहना है कि शटडाउन के बावजूद सप्लाई चालू कर दी गई या तकनीकी गड़बड़ी के चलते करंट आया।

वहीं, घटना के दौरान मौजूद साथी युवक के फरार होने की बात भी सामने आई है। आस-पास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। घटना से परिजनों में कोहराम मच गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, महंगाई भत्ता 2% बढ़ाकर 60% किया

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नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार (Modi government) ने सभी सरकारी कर्मचारियों (central employees) को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) दो प्रतिशत बढ़ा दिया है। ये फैसला 1 जनवरी से लागू होगा। बढ़ती महंगाई के इस दौर में यह बढ़ोतरी कुछ राहत लेकर आई है। जानकारी के अनुसार सरकार ने DA 58% से बढ़कर 60% किया है। इस फैसले से सरकारी खजाने पर सालाना 6,791 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे पहले अक्टूबर में महंगाई भत्ते को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था। पिछला रिविजन 1 जुलाई 2025 से प्रभावी माना गया था, जिसका भुगतान एरियर के साथ किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार (18 अप्रैल) को दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक में इसका ऐलान किया गया। इससे लगभग 50.5 लाख कर्मचारियों और 68.3 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। केंद्र सरकार साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बदलाव करती है। इस फैसले से कर्मचारियों की मंथली सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में इजाफा होता है।

महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला ‘कॉस्ट-ऑफ-लिविंग’ एडजस्टमेंट है। इसका कैलकुलेशन बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में किया जाता है। इसका मुख्य मकसद बढ़ती कीमतों के बीच कर्मचारियों की वास्तविक आय की सुरक्षा करना है, ताकि उनकी सैलरी महंगाई के साथ तालमेल बिठा सके।

सरकार को सौंपे गए एक ज्ञापन में नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने वेतन में भारी बढ़ोतरी की मांग की है। इसमें न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 3.83 रखने की मांग शामिल है। अगर यह मांग मान ली जाती है तो न्यूनतम मूल वेतन मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा वेतन ढांचे में एक बड़ा बदलाव होगा। अन्य मांगों में 6 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि, एचआरए की न्यूनतम सीमा 30 प्रतिशत और पुरानी पेंशन योजनाओं की बहाली शामिल है।

 

महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों की नीयत का खुलासा

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(डॉ. सुधाकर आशावादी-विभूति फीचर्स)

लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल राजनीतिक दलों की सियासी सोच के चलते पारित नहीं हो सका। यह पहला अवसर नहीं है, जब जब देश में लोकतांत्रिक सुधार की प्रक्रिया शुरू की जाती है, तब तक राजनीतिक दल अपने स्वार्थ की परिधि में अपने नफे नुकसान का आकलन करते हुए निर्णय लेते ही हैं। पक्ष और विपक्ष की दृष्टि में उस समय राष्ट्र सर्वोपरि की भावना नहीं रहती। बहरहाल महिला आरक्षण देने के तरीके तथा चुनाव क्षेत्र संबंधी परिसीमन पर सहमति इसलिए नहीं बनी, क्योंकि सत्ता के पास बिल पारित कराने हेतु अपेक्षित दो तिहाई बहुमत का अभाव था।

ऐसा नहीं है, कि सत्ता पक्ष को इसकी जानकारी न रही हो, अपने पाँव तले की धरती का सभी को पता रहता है, फिर भी प्रयास किये जाते रहते हैं। कई बार अविश्वास प्रस्ताव भी इसलिए धराशायी होते हैं, कि अविश्वास व्यक्त करने वाले वाले के पास अपेक्षित मत नहीं होते। यहाँ भी यही हुआ सत्ता पक्ष को जानकारी थी, कि संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं है, फिर भी लंबी बहस हुई और राजनीतिक दलों के मंसूबों का खुलासा हुआ।

एक सच यह भी है, कि आम आदमी राजनीतिक दलों के स्वार्थी मंसूबों को समझता तो है, लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा समाज में उत्पन्न की गई परिस्थितियों के सम्मुख राजनीतिक दलों को सबक सिखाने में सक्षम नहीं होता, जिसकी परिणति यही होती है, कि कभी उसे जातीय अलगाववाद का शिकार होना पड़ता है और कभी क्षेत्रीय या धार्मिक विघटनकारी विमर्श का।

देश की बहुसंख्यक आबादी का अशिक्षित और लोभी होना देश को सशक्त राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ने नहीं देता। आम आदमी को मुफ्त राशन, मुफ्त बिजली, मुफ्त यातायात, मुफ्त की सुविधाएं मिल जाएं, बस इतना ही उसके लिए पर्याप्त रहता है। जिसका फायदा उठाना राजनीतिक दल बखूबी जानते हैं, तभी मुफ्तखोरी बढ़ाने वाले आश्वासन देकर जनता को गुमराह करते हैं।

वैसे देखा जाए, तो देश में किसी भी प्रकार के आरक्षण का कोई औचित्य नहीं है। बरसों से महिला आरक्षण लागू है, मगर कितनी महिला जनप्रतिनिधि ऐसी हैं, जो अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम हैं। महिला ग्राम प्रधानों या महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविकता यही है, कि अधिकांश महिलाएं स्वयं अपने ही क्षेत्र की समस्याएं नहीं सुलझा पाती।

उन्हें क्षेत्रीय समस्याओं के निदान के लिए अपने प्रतिनिधि की जरूरत रहती है, प्रधान पति, प्रधान पुत्र, प्रधान प्रतिनिधि की तर्ज पर उन्हें बैसाखियाँ चाहिए होती हैं। जिस देश में मात्र एक वोट के अभाव में सरकारें तक गिर जाती हों तथा देश पर चुनाव का बोझ लद जाता हो, ऐसे देश में यदि 131 वे संविधान संशोधन विधेयक को अपेक्षित दो तिहाई बहुमत नहीं मिला, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इतना अवश्य है, कि इस संशोधन विधेयक के गिरने से राजनीतिक दलों की महिलाओं के प्रति सोच की कलई खुल गई है।

आवश्यक यही है, कि राजनीतिक दलों की महिला विरोधी तथा राजनीतिक स्वार्थ के चलते लोकतांत्रिक मूल्यों की अवहेलना करने वाले विमर्श पर व्यापक चर्चा हो, ताकि लोकतांत्रिक सुधारों की प्रक्रिया में बाधक बने तत्वों से आम आदमी परिचित हो सके।

(विभूति फीचर्स)

रिश्तेदारों के साथ रास्ता रोककर मारपीट और जान से मारने की धमकी

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मोहम्मदाबाद: थाना क्षेत्र के ग्राम गोसरपुर निवासी पाती राम के पुत्र भूपेन्द्र सिंह ने पुलिस को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि 17 अप्रैल 2026 को उनके भतीजे विकास पाल (पुत्र अविनाश चंद्र) की लगन के लिए आ रहे रिश्तेदारों के साथ रास्ता रोककर मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।
प्रार्थी के अनुसार, जनपद एटा के अलीगंज थाना क्षेत्र के ग्राम गढ़ी निवासी जयपाल सिंह (पुत्र बाकेलाल), जो समधी हैं, लगन कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे थे। इसी दौरान आरोप है कि अखिलेश (पुत्र भूरे राजपूत), पप्पू (पुत्र देवी दयाल) निवासी वनपोई तथा देवेंद्र उर्फ ललू (पुत्र नरेंद्र पाल), विमल (पुत्र राजबहादुर) निवासी गोसरपुर सहित लगभग 7 अज्ञात लोग मौके पर पहुंचे और उनका रास्ता रोक लिया।
बताया गया कि आरोपियों ने लगन न करने की बात कहते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर ईंट-पत्थर चलाए गए तथा अवैध तमंचे से फायरिंग भी की गई।
पीड़ित के अनुसार, घटना की सूचना मिलने पर डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची। घटना रात लगभग 9:30 से 10:00 बजे के बीच की बताई जा रही है।
इस संबंध में कोतवाली प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि मामले की जांच संबंधित हल्का इंचार्ज को सौंप दी गई है और जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, STF ने रखा था एक लाख का इनाम

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नोएडा: यूपी STF ने नोएडा (Noida) में मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन के मुख्य मास्टरमाइंड (mastermind) में शामिल आरोपी को गिरफ्तार किया है। STF ने लंबी छानबीन के बाद श्रमिक हिंसा के मास्टरमाइंड आदित्य आनंद को तमिलनाडु से अरेस्ट कर लिया है। नोएडा पुलिस ने आदित्य पर एक लाख का इनाम रखा था। आदित्य आनंद अल्ट्रा लेफ्ट संगठन से जुड़ा हुआ है और प्रदर्शन को भड़काने में उसकी अहम भूमिका बताई जा रही है।

यूपी एसटीएफ श्रमिक आंदोलन को लेकर लगातार छापेमारी कर रही है। नोएडा के अरुण बिहार, दिल्ली के आदर्श नगर और शाहबाद डेयरी के इलाकों में भी छापेमारी की गई है। इस दौरान 6 संदिग्धों को STF ने हिरासत में लिया है। जिनसे पूछताछ की जाएगी। इधर, नोएडा में हालात अब सामान्य हो गए हैं। हालांकि अभी भी सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए है। पुलिस ने सेक्टर-आधारित तैनाती योजना के तहत फ्लैग मार्च किए हैं और गश्त बढ़ा दी है।

वहीं हिंसक प्रदर्शन के बाद योगी सरकार ने मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की घोषणा की है और भविष्य के विवादों को सुलझाने के लिए एक ‘वेज बोर्ड’ बनाने का प्रस्ताव रखा है। श्रमिक इस फैसले के बाद खुशी से काम पर लौट आए हैं। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने गौतमबुद्धनगर के श्रमिकों समेत आम लोगों से अपील की। उन्होंने कहा कि किसी के भी उकसावे में न आए। अफवाहों पर ध्यान न दें, ऐसी किसी भी घटना को पुलिस के संज्ञान में लाए। गौमतबुद्ध नगर शांतिप्रिय जिला रहा है, यहां उद्योग-धंधों के साथ आम जनजीवन भी सामान्य रहा है। इसे बरकरार रखने में पुलिस का सहयोग करे।