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Monday, June 15, 2026
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समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने विकास कार्यों की परखी नब्ज

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– डीएम अंकुर लाठर के प्रयासों की खुलकर सराहना

फर्रुखाबाद। जनपद के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर रविवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री तथा जनपद के प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ विस्तृत मंथन किया। बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट का बिंदुवार परीक्षण किया गया तथा विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए।

बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि आम जनता को योजनाओं का लाभ पारदर्शी और प्रभावी तरीके से मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से जानकारी ली और अपराध नियंत्रण, जनसुनवाई तथा शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

समीक्षा बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने जनपद में चल रहे विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने जिलाधिकारी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जनपद में विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय में बेहतर प्रयास दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इसी तरह विकास कार्यों को गति देता रहेगा और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा।

बैठक में जनप्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास संबंधी सुझावों को रखा, जिस पर प्रभारी मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक के बाद प्रशासनिक अमले में भी सक्रियता दिखाई दी और विभिन्न विभागों को लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश जारी किए गए।

रक्तदान महादान: 22 लोगों ने किया रक्तदान, मानवता की मिसाल पेश करने वालों का हुआ सम्मान

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फर्रुखाबाद। द केयर हॉस्पिटल ब्लड सेंटर द्वारा आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में समाजसेवा और मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला। शिविर में कुल 22 लोगों ने रक्तदान कर जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभाई। रक्तदान करने वाले सभी दानदाताओं को सम्मानित कर उनके इस पुनीत कार्य की सराहना की गई।शिविर में A+ रक्त समूह के 09, B+ के 07, O+ के 05 तथा AB+ के 01 रक्तदाता शामिल रहे। इस प्रकार कुल 22 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। रक्तदान करने वाले युवाओं और नागरिकों ने यह संदेश दिया कि रक्तदान से बढ़कर कोई दान नहीं है, क्योंकि एक यूनिट रक्त कई लोगों को नया जीवन दे सकता है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने कहा कि रक्त की आवश्यकता कभी भी किसी के सामने आ सकती है, ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान समाज के प्रति सबसे बड़ी जिम्मेदारी और सेवा है। रक्तदाताओं के उत्साह और समाज के प्रति समर्पण की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
शिविर की जानकारी देते हुए वीरेंद्र पटेल ने बताया कि रक्तदान करने वाले सभी लोगों को प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे सामाजिक कार्यों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने रक्तदाताओं के इस सराहनीय कदम को मानवता की सच्ची सेवा बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

पुलिस की घेराबंदी ध्वस्त, ऑटो में सवार होकर वाराणसी पहुंचीं पल्लवी पटेल; बीएचयू मार्च को लेकर प्रशासन की बड़ी किरकिरी

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वाराणसी। नीट पेपर लीक समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले अपना दल (कमेरावादी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और सिराथू विधायक पल्लवी पटेल ने एक बार फिर पुलिस-प्रशासन की चौकसी को चुनौती दे दी। जिले की सीमाओं, टोल प्लाजा और प्रमुख मार्गों पर भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद पल्लवी पटेल खेतों की पगडंडियों से निकलकर सवारी ऑटो में बैठ वाराणसी पहुंच गईं। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार रविवार रात लखनऊ से वाराणसी आ रहीं पल्लवी पटेल को जौनपुर के हौज टोल प्लाजा के पास पुलिस ने रोक लिया था। पुलिस की निगरानी के बीच वह अपने कुछ समर्थकों के साथ कार से उतरकर खेतों की ओर निकल गईं। बताया जा रहा है कि उन्होंने मोबाइल फोन भी बंद कर दिया और करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद मुख्य मार्ग पर पहुंचीं। इसके बाद वह एक सवारी ऑटो में आम यात्रियों के बीच बैठकर देर रात वाराणसी के बाबतपुर क्षेत्र पहुंच गईं। वहां उन्होंने एक कार्यकर्ता के घर रात्रि विश्राम किया।

सोमवार को बीएचयू गेट से प्रधानमंत्री के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय तक मार्च निकालने का आह्वान किया गया था। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया था। लंका चौराहा, बीएचयू गेट, बाबतपुर और शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कई कार्यकर्ताओं को एकत्र होने से रोका गया और कुछ पदाधिकारियों को नजरबंद किए जाने की भी चर्चा रही। इसके बावजूद पल्लवी पटेल का धरनास्थल तक पहुंच जाना प्रशासनिक तैयारियों पर बड़ा प्रश्नचिह्न माना जा रहा है।

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए प्रशासन ने असाधारण सख्ती दिखाई।

नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच वाराणसी का यह घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। पल्लवी पटेल पहले भी कई मौकों पर पुलिस की निगरानी से बचकर आंदोलन स्थलों तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन इस बार ऑटो में आम सवारियों के बीच बैठकर वाराणसी पहुंचने की घटना ने प्रशासनिक रणनीति की पोल खोल दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर विपक्ष को सरकार और प्रशासन पर निशाना साधने का बड़ा अवसर दे दिया है।

बगैर बंटवारा पैतृक भूमि के मुख्य फ्रंट पर पर कब्ज़ा , पीड़ित ने जिला प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

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– न्यायालय से जीत के बाद भी नहीं मिल रहा कब्ज़ा
– दवंग भू माफिया पुलिस से कर लेते साठ गाठ
फर्रुखाबाद। पैतृक भूमि के बंटवारे को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। पजावा याकूतगंज निवासी सुरेश चंद्र कटियार ने जिला प्रशासन से शिकायत कर अपनी पैतृक भूमि के मुख्य फ्रंट पर कथित कब्जे और पुराने विवादित विक्रय प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।

सुरेश चंद्र कटियार पुत्र रामचंद्र कटियार ने प्रशासन को दिए प्रार्थना पत्र में बताया है कि ग्राम कोटगंज स्थित पैतृक भूमि गाटा संख्या 258, 292 तथा 931 में उनका और उनके भाइयों बृजभान चंद्र, सुभाष चंद्र, उमेश चंद्र तथा सतीश चंद्र का संयुक्त स्वामित्व है। उन्होंने बताया कि उक्त भूमि के बंटवारे को लेकर लंबे समय से पारिवारिक विवाद चला आ रहा है।

पीड़ित के अनुसार मामले को लेकर विभिन्न न्यायालयों में वाद दायर किए गए थे, जहां सुनवाई के बाद संबंधित पत्रावलियां निरस्त हो चुकी हैं। इसके बावजूद भूमि विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो सका। सुरेश चंद्र का आरोप है कि उनके भाई स्वर्गीय बृजभान चंद्र कटियार ने कथित रूप से षड्यंत्र के तहत भूमि के मुख्य फ्रंट वाले हिस्से का विक्रय रमेंद्री देवी पत्नी नरेंद्र सिंह के पक्ष में कर दिया था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्ष 1993 में किया गया यह विक्रय बाद में 21 अगस्त 1993 को निष्प्रभावी हो गया था, लेकिन इसके बावजूद भूमि के मुख्य हिस्से को लेकर विवाद बना रहा। उनका आरोप है कि आज भी भूमि के महत्वपूर्ण फ्रंट हिस्से पर कब्जे और स्वामित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे उन्हें अपने अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है।

सुरेश चंद्र कटियार ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की राजस्व अभिलेखों और न्यायालयी अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा संयुक्त भूमि का विधिक रूप से बंटवारा सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक भूमि का स्पष्ट बंटवारा नहीं होगा, तब तक विवाद समाप्त होना संभव नहीं है।

नदी में डूबने से पांच बच्चों की दर्दनाक मौत

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लखनऊ

प्रदेश में रविवार और सोमवार को नदी में डूबने की दो अलग-अलग घटनाओं में पांच बच्चों की मौत हो गई। बांदा और कानपुर देहात में हुए इन हादसों के बाद परिवारों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

बांदा जिले के जसपुरा थाना क्षेत्र स्थित गौरीकलां गांव में तीन भाई-बहन मंदिर दर्शन के बाद चंद्रावल नदी में नहाने के दौरान गहरे पानी में चले गए और डूब गए। बताया गया कि बच्चे अपनी दादी के साथ मंदिर दर्शन के लिए गए थे। हादसे की सूचना मिलते ही ग्रामीणों और गोताखोरों ने बचाव अभियान शुरू किया। तीनों बच्चों को बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसपुरा पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतकों में 10 वर्षीय अंश, 13 वर्षीय माधुरी और 13 वर्षीय प्रतीक शामिल हैं। वहीं 15 वर्षीय ऋषभ नदी किनारे ही खड़ा रहा, जिससे उसकी जान बच गई। घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

वहीं कानपुर देहात के मूसानगर थाना क्षेत्र में यमुना नदी में डूब रही सहेली को बचाने के प्रयास में एक किशोर और किशोरी की मौत हो गई। नयापुरवा गांव निवासी 12 वर्षीय जाह्नवी उर्फ भूरी अपनी सहेली ज्योति के साथ यमुना नदी में नहाने गई थी। नहाने के दौरान दोनों गहरे पानी में फंस गईं। मौके पर मौजूद 16 वर्षीय अनंतराम ने साहस दिखाते हुए ज्योति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन जाह्नवी को बचाने के प्रयास में वह स्वयं भी नदी में डूब गया। सूचना पर पहुंची पुलिस और गोताखोरों ने तलाश शुरू की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद एसडीआरएफ टीम को बुलाया गया।

सोमवार सुबह एसडीआरएफ टीम ने घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर मूसानगर के पक्का घाट के पास से पहले अनंतराम और फिर जाह्नवी का शव बरामद किया। दोनों शव मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पुलिस ने पंचनामा भरकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

राम मंदिर चढ़ावा कांड: एसआईटी ने संभाली कमान, कर्मचारियों से लेकर ट्रस्ट व्यवस्था तक जांच के घेरे में

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अयोध्या।

राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी और चोरी के आरोपों ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार से अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में दान की रकम गिनने वाले वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों की सूची मांगी गई है, जबकि उनके परिजनों की आर्थिक स्थिति और संपत्ति की भी पड़ताल किए जाने की तैयारी है। मामले ने अब राजनीतिक गलियारों से लेकर संत समाज तक हलचल मचा दी है।

एसआईटी ने गणना कक्ष से शुरू की पड़ताल

लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई में गठित एसआईटी ने राम मंदिर परिसर के गणना कक्ष का निरीक्षण किया। जांच टीम दान पेटियों से नकदी निकालने, उसकी गिनती, रिकॉर्डिंग और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण कर रही है। सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों की भूमिका और पूरी व्यवस्था को जांच के दायरे में लिया गया है।

कर्मचारियों और रिश्तेदारों की संपत्ति की होगी जांच

सूत्रों के अनुसार एसआईटी उन कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति का भी परीक्षण करेगी जो पिछले वर्षों में चढ़ावे की गिनती में शामिल रहे हैं। मंदिर में नियुक्ति के बाद उनकी संपत्ति में हुए बदलाव और उनके करीबी रिश्तेदारों की आर्थिक प्रगति की भी जांच की जाएगी।

अखिलेश यादव का तंज, बोले- वापस रख दीजिए चढ़ावा

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी ने चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी की है तो कैमरे बंद करके वह रकम वापस रख दे, भगवान उसे माफ कर देंगे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे की जांच होना सनातन परंपरा के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

अवधेश प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग की

अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद ने राज्य सरकार की एसआईटी पर भरोसा न जताते हुए मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित स्वतंत्र समिति से कराने की मांग की। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

ब्रजेश पाठक का पलटवार

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग राम मंदिर के चढ़ावे पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अन्य धार्मिक स्थलों पर मिले चंदे की भी चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया।

विनय कटियार बोले- दोषी बच नहीं पाएंगे

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने कहा कि चढ़ावे में गड़बड़ी अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने दावा किया कि जांच आगे बढ़ने पर दोषी या तो जेल जाएंगे या फिर जिम्मेदारी से बच नहीं पाएंगे।

पूर्व लेखापाल ने लगाए गंभीर आरोप

राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखापाल महिपाल सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने पहले भी कथित गड़बड़ी पकड़ी थी, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज भी हटाई गई थी।

चंपत राय ने आरोपों को बताया निराधार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर की आय और चढ़ावे का नियमित ऑडिट कराया जाता है। उन्होंने दावा किया कि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और किसी प्रकार की हेराफेरी की बात सही नहीं है।

संतोष दुबे का बड़ा दावा

धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे ने आरोप लगाया कि मंदिर व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों की संपत्ति पिछले कुछ वर्षों में असामान्य रूप से बढ़ी है। उन्होंने कुछ व्यक्तियों के करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाने के दावे करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

सियासत से लेकर संत समाज तक मचा घमासान

राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक दलों, संत समाज और सामाजिक संगठनों के बीच बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर एसआईटी सात दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट और पंद्रह दिन में अंतिम रिपोर्ट देने की तैयारी में है, वहीं पूरे देश की निगाहें इस बहुचर्चित जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।