32 C
Lucknow
Tuesday, April 28, 2026
Home Blog

PNB ने 200 से अधिक स्थानों पर मेगा एमएसएमई आउटरीच कार्यक्रम की मेजबानी की

0

नई दिल्ली: भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी बैंकों में से एक पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने देशभर में 200 से अधिक स्थानों पर मेगा एमएसएमई आउटरीच कार्यक्रम की मेजबानी की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सुलभ, अनुकूलित और प्रतिस्पर्धी दरों पर वित्तीय समाधान प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना है, जो उद्यमिता और आर्थिक विकास के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करता है।
सार्थक जुड़ाव को बढ़ावा देने और एमएसएमई को उनके विकास के लिए सही वित्तपोषण विकल्पों को खोजने में सक्षम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया यह कार्यक्रम, व्यवसाय करने वालों, उद्योग प्रतिभागियों और बैंकिंग विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर साथ लाया।

“जहाँ अवसरों की शुरुआत होती है और व्यवसाय फलते-फूलते हैं” की थीम पर आधारित यह आउटरीच कार्यक्रम ऋण तक पहुँच को सरल बनाने और विशेष रूप से तैयार किए गए वित्तीय समाधान प्रदान करने पर केंद्रित रहा, जो एमएसएमई को अपने संचालन के विस्तार और उत्पादकता में सुधार करने में मदद करते हैं।

कार्यक्रम के आकर्षण:

विशेषज्ञों तक सीधी पहुँच: तत्काल मार्गदर्शन और अनुकूलित वित्तीय समाधानों के लिए पीएनबी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधे संवाद। ऋण की तुरंत स्वीकृति: चयनित एमएसएमई ऋण योजनाओं को तुरंत स्वीकृति मिली। डिजिटल एक्सपीरियंस ज़ोन: डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का अनुभव, अपनी पात्रता की जाँच और तुरंत ऑफर। अनुकूलित पेशकश: विभिन्न व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किए गए एमएसएमई-केंद्रित ऋण उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला।

कार्यक्रम के बारे में बोलते हुए, श्री फिरोज हसनैन, सीजीएम, पीएनबी ने कहा: “एमएसएमई नवाचार, रोजगार और समावेशी विकास के शक्तिशाली इंजन हैं। इस मेगा आउटरीच कार्यक्रम के माध्यम से, हम उद्यमियों को, यहाँ तक कि जमीनी स्तर पर भी, समय पर ऋण, निर्बाध डिजिटल पहुँच और विशेष वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

हमारा ध्यान बैंकिंग को सरल बनाने, निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने और व्यवसायों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाने पर है, जिससे देश के जीडीपी में सार्थक योगदान दिया जा सके।” इस पहल के साथ पीएनबी ने अपने ग्राहक केंद्रित नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए देश के करोडों लोगों के लिए एक भरोसेमंद वित्तीय साझीदार होने की अपनी विरासत को सुदृढ़ किया।

UAE ने OPEC और OPEC+ से अलग होने का किया ऐलान, 1 मई से लागू होगा यह फैसला

0

अबू धाबी: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए खुद को पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) और OPEC+ से बाहर कर लिया है। यह फैसला 1 मई से लागू होगा। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच यह तेल निर्यातक समूहों और सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका है। UAE ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल-मजरूई ने बताया कि क्षेत्रीय शक्ति की ऊर्जा रणनीतियों पर विचार के बाद फैसला लिया है।

बता दें कि, यह कदम लंबे समय से चर्चा में था, क्योंकि उत्पादन पर लगी सीमाओं को लेकर UAE में असंतोष बढ़ रहा था और क्षेत्रीय स्तर पर सऊदी अरब के साथ संबंध भी तनावपूर्ण होते जा रहे थे। खास बात यह है कि UAE कई दशकों से OPEC का सदस्य रहा है। सबसे पहले 1967 में अबू धाबी के माध्यम से यह संगठन से जुड़ा था और बाद में 1971 में देश बनने के बाद UAE पूर्ण सदस्य बना।

हाल के वर्षों में UAE ने मध्य पूर्व में अपनी स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की कोशिश की है, जो कई मुद्दों पर सऊदी अरब की नीतियों से अलग रही है। खासकर तब, जब सऊदी अरब ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए आक्रामक आर्थिक नीतियां अपनाईं, जिससे दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई। UAE ने अपनी सरकारी समाचार एजेंसी WAM के जरिए OPEC और OPEC+ से अलग होने का ऐलान किया। बयान में कहा गया कि यह फैसला देश की दीर्घकालिक रणनीति और आर्थिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

UAE के ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “यह निर्णय UAE के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण और विकसित हो रही ऊर्जा प्रोफ़ाइल को दर्शाता है। इसमें घरेलू ऊर्जा उत्पादन में त्वरित निवेश शामिल है। साथ ही, वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक जिम्मेदार, विश्वसनीय और दूरदर्शी भूमिका निभाने की उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।” मंत्रालय ने बताया कि उसने यह निर्णय UAE की उत्पादन नीति, उसकी वर्तमान और भविष्य की क्षमता की व्यापक समीक्षा के बाद लिया है।

UAE ने कहा कि वह अपनी घरेलू ऊर्जा उत्पादन क्षमता में तेजी से निवेश कर रहा है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक जिम्मेदार, भरोसेमंद और भविष्य उन्मुख भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। बयान में यह भी कहा गया कि OPEC से बाहर होने के बाद भी UAE धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से बाजार में अतिरिक्त तेल उत्पादन जारी रखेगा, जो मांग और बाजार की स्थिति के अनुसार होगा। OPEC, जिसका मुख्यालय वियना में है, लंबे समय से वैश्विक तेल बाजार में एक प्रमुख संगठन माना जाता रहा है।

OPEC की स्थापना के समय, इसके शुरुआती संस्थापक सदस्य ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेज़ुएला हैंं। इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना में है। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के तेल उत्पादन और निर्यात नीतियों का समन्वय करना, वैश्विक तेल की कीमतों को स्थिर रखना और सदस्य देशों के हितों की रक्षा करना है। OPEC+ 2016 में बना बना था, जो बड़ा संगठन है। इसमें OPEC के सदस्य देशों के अलावा 10 अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देश भी शामिल हैं।

अमेरिका कभी OPEC का सदस्य नहीं रहा, लेकिन शेल ऑयल की वजह से वह सबसे बड़ा तेल उत्पादक है। 1960 में अमेरिकी तेल कंपनियों के वर्चस्व को खत्म करने के लिए OPEC बना था। यह अमेरिकी शेल ऑयल के बढ़ते उत्पादन से गिरती तेल कीमतों को नियंत्रित करता है और वैश्विक तेल बाजार में मांग-आपूर्ति बैलेंस बनाता है। OPEC+ दुनिया का लगभग 40-41 प्रतिशत तेल उत्पादन नियंत्रित करता है। अब तक एंगोला, कतर, इंडोनेशिया और इक्वाडोर संगठन छोड़ चुके हैं।

हाल के वर्षों में अमेरिका द्वारा तेल उत्पादन बढ़ाने के कारण OPEC का बाजार प्रभाव कुछ कम हुआ है। सऊदी अरब अब भी OPEC का सबसे प्रभावशाली सदस्य माना जाता है। UAE और सऊदी अरब के बीच आर्थिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है, खासकर लाल सागर क्षेत्र में। दोनों देशों ने 2015 में यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक सैन्य गठबंधन में साथ काम किया था, लेकिन बाद में संबंधों में तनाव आ गया। UAE के इस फैसले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार और मध्य पूर्व की भू-राजनीति पर महत्वपूर्ण असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

यूपी पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आयोग गठन में देरी पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

0

 

लखनऊ

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 मई की तिथि निर्धारित की गई है।
न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने पूर्व में दिए गए आश्वासन के बावजूद अब तक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं किया, जो कोर्ट के आदेश की अवहेलना है।
याचिकाकर्ता की ओर से 4 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश का हवाला दिया गया, जिसमें राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि पंचायत चुनाव से पहले आयोग का गठन कर लिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया था कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी आरक्षण लागू किया जाएगा। इसी आश्वासन के आधार पर अदालत ने पूर्व याचिका का निस्तारण कर दिया था।
मौजूदा याचिका में कहा गया है कि सरकार द्वारा समय सीमा के भीतर आयोग का गठन न करना सीधे तौर पर अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है। इस पर गंभीरता दिखाते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा है।
अब इस मामले में 19 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इस फैसले का सीधा असर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव और ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

गाजीपुर कांड पर सियासत तेज अखिलेश का दौरा रद्द बोले -भाजपा राज में न्याय की उम्मीद बेकार

0

 

लखनऊ

गाजीपुर में हुए मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का 29 अप्रैल को प्रस्तावित गाजीपुर दौरा अचानक रद्द कर दिया गया। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कानून-व्यवस्था सामान्य होने के बाद ही वह पीड़ित परिवार से मिलने जाएंगे, लेकिन इस फैसले के बाद सियासी आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं और बेटियों के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल रहा। गाजीपुर, हरदोई, प्रतापगढ़ और फतेहपुर जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दोषियों को बचाने में लगी है और पीड़ितों की आवाज दबाई जा रही है।
अखिलेश ने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो चुके हैं। उनका कहना था कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय राजनीतिक दबाव में काम हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सपा प्रमुख ने बंगाल चुनाव के दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि इससे उत्तर प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने सरकार से ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि महिलाओं के सम्मान के दावे केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।
इस बीच समाजवादी पार्टी ने गाजीपुर के पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद भी दी है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने परिवार से मुलाकात कर कुल 5 लाख रुपये की सहायता सौंपी। सपा ने इसे सामाजिक एकता और पीड़ितों के साथ खड़े होने का प्रतीक बताया है।
गाजीपुर कांड को लेकर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। एक तरफ विपक्ष सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर हमलावर है, तो वहीं सरकार अपनी नीतियों और कार्रवाई का बचाव कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के संकेत दे रहा है।

राजस्थान रॉयल्स की शानदार जीत, पंजाब किंग्स का अजेय अभियान टूटा

0

 

राजस्थान रॉयल्स ने एक रोमांचक मुकाबले में पंजाब किंग्स को 6 विकेट से हराकर बड़ा उलटफेर किया। इस जीत के साथ राजस्थान ने पंजाब का आईपीएल 2026 में जारी अजेय अभियान भी समाप्त कर दिया। पंजाब ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट पर 222 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था।

 

लक्ष्य का पीछा करते हुए राजस्थान की शुरुआत दमदार रही। यशस्वी जायसवाल ने शानदार अर्धशतक लगाते हुए टीम को मजबूत आधार दिया। उनके साथ वैभव सूर्यवंशी ने भी आक्रामक पारी खेली, हालांकि वह 43 रन बनाकर अर्धशतक से चूक गए। मध्यक्रम में ध्रुव जुरेल और कप्तान रियान पराग ने भी उपयोगी योगदान दिया।

 

मैच का असली मोड़ डोनोवान फरेरा और इम्पैक्ट प्लेयर शुभम दुबे की साझेदारी से आया। दोनों ने मिलकर पांचवें विकेट के लिए नाबाद 77 रन जोड़कर मैच राजस्थान की झोली में डाल दिया। फरेरा ने 52 रन और शुभम ने 31 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली।

 

पंजाब की ओर से गेंदबाजी में युजवेंद्र चहल सबसे सफल रहे, जिन्होंने तीन विकेट लिए। अर्शदीप सिंह को एक सफलता मिली, लेकिन उनकी गेंदबाजी भी लक्ष्य को रोकने में नाकाम रही।

 

इस जीत के साथ पंजाब किंग्स को सीजन की पहली हार झेलनी पड़ी, हालांकि टीम अभी भी अंक तालिका में शीर्ष पर बनी हुई है। वहीं राजस्थान रॉयल्स ने इस जीत से महत्वपूर्ण अंक हासिल करते हुए अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

 

पूरा मैच हाई-स्कोरिंग और रोमांच से भरपूर रहा, जिसमें आखिरी ओवरों तक मुकाबला किसी भी दिशा में जा सकता था। राजस्थान की इस जीत ने प्लेऑफ की रेस को और दिलचस्प बना दिया है।

अलर्ट मोड में बसपा, मायावती का निर्देश :यूपी के साथ उत्तराखंड व पंजाब चुनाव की भी तेज करें तैयारी

0

 

 

लखनऊ

 

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री Mayawati ने मंगलवार को दिल्ली में पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक कर आगामी चुनावों को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अगले वर्ष उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने पर जोर दिया।

बैठक में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और आर्थिक स्थिति की समीक्षा की गई। मायावती ने जहां बेहतर काम करने वाले पदाधिकारियों की सराहना की, वहीं कमजोर प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए कई स्तरों पर फेरबदल के निर्देश भी दिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे मिशनरी भावना के साथ काम करते हुए पार्टी के जनाधार को मजबूत करें और हर घर तक पार्टी की नीतियों को पहुंचाएं।

मायावती ने कहा कि “कानून द्वारा कानून का राज” ही बसपा की पहचान है और यही व्यवस्था समाज के हर वर्ग के हित में है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इस संदेश को तेजी से जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया, ताकि पार्टी को मजबूत आधार मिल सके।

दिल्ली की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के बाद अब भाजपा सरकार से भी जनता निराश हो रही है। उनके मुताबिक, वर्तमान सरकारें आमजन की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही हैं, जिससे बसपा के लिए एक विकल्प के रूप में उभरने का अवसर है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे पूरी लगन और मेहनत से जनता के बीच जाएं, खासकर मेहनतकश वर्ग की समस्याओं को उठाएं और उन्हें न्याय व बेहतर शासन का भरोसा दिलाएं। आगामी चुनावों को देखते हुए बसपा अब संगठन को धार देने और रणनीति मजबूत करने में जुट गई है।