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Thursday, April 30, 2026
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कच्चे तेल में जबरदस्त उछाल: ब्रेंट 120 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव से गहराया वैश्विक ऊर्जा संकट

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नई दिल्ली

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को बड़ी तेजी दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नए दबाव के संकेत मिल रहे हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अनिश्चितता के कारण वैश्विक आपूर्ति पर खतरा मंडराने लगा है।
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों और तेल निर्यात पर सख्त नाकेबंदी की नीति को आगे बढ़ाना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही गई थी। ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक व्यापक परमाणु समझौता नहीं होता, तब तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा। इससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
वायदा बाजार के आंकड़ों के अनुसार जून अनुबंध के लिए ब्रेंट क्रूड 1.91 डॉलर बढ़कर 119.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि जुलाई अनुबंध भी 111 डॉलर के पार कारोबार कर रहा है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। लगातार नौ दिनों से जारी इस तेजी ने निवेशकों और तेल आयातक देशों की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
आपूर्ति पक्ष पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अपने नियंत्रण को सख्त करते हुए कई जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है, जबकि अमेरिका ने भी ईरानी जहाजों की नाकेबंदी तेज कर दी है। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात का 1 मई से ओपेक और ओपेक+ गठबंधन से अलग होने का फैसला बाजार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे उत्पादन नियंत्रण की क्षमता कमजोर पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ेगा, जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई दर में उछाल और औद्योगिक लागत में वृद्धि की आशंका है। आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर रहेगा।

सीआईएससीई बोर्ड परिणाम घोषित: इंटर में ओजस्वित पासरीचा ने 100 प्रतिशत अंक लाकर बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

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लखनऊ

भारतीय विद्यालय प्रमाण पत्र परीक्षा परिषद द्वारा वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के परिणाम गुरुवार सुबह जारी कर दिए गए। देशभर के लाखों छात्र-छात्राओं का इंतजार समाप्त हुआ और परिणाम घोषित होते ही विद्यार्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई। परीक्षाएं फरवरी से अप्रैल के बीच आयोजित की गई थीं, जिनमें बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने भाग लिया था।
इस वर्ष बारहवीं कक्षा में कानपुर के छात्र ओजस्वित पासरीचा ने 100 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करते हुए नया इतिहास रच दिया। उनके इस उत्कृष्ट प्रदर्शन ने न केवल उनके विद्यालय बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। इसी क्रम में कानपुर के ही चिंटल्स विद्यालय की छात्रा यशी सचान ने 99.5 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की, जबकि दसवीं कक्षा में आदि अरोड़ा ने 99.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
परिणामों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष बारहवीं कक्षा में कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 99.66 रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। लड़कियों का प्रदर्शन विशेष रूप से सराहनीय रहा, जहां 1,702 में से 1,697 छात्राएं सफल रहीं। वहीं 1,845 में से 1,838 छात्र उत्तीर्ण हुए। इससे स्पष्ट है कि इस बार भी छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बाजी मारी है।
दसवीं कक्षा की परीक्षा 17 फरवरी से 30 मार्च तक तथा बारहवीं कक्षा की परीक्षा 12 फरवरी से 3 अप्रैल तक आयोजित की गई थी। परीक्षा परिणाम देखने के लिए विद्यार्थियों को अपने प्रवेश पत्र में दर्ज विशिष्ट पहचान संख्या और अनुक्रमांक की आवश्यकता होगी। छात्र परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं और अंकपत्र डाउनलोड कर सकते हैं।
परिणाम देखने के बाद विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने अंकपत्र में दर्ज सभी विवरण जैसे नाम, जन्मतिथि, विद्यालय का नाम, विषयवार अंक और कुल प्रतिशत ध्यानपूर्वक जांच लें। किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर तत्काल विद्यालय या परिषद से संपर्क करें।
परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए दसवीं कक्षा में प्रत्येक विषय में न्यूनतम 33 प्रतिशत तथा बारहवीं कक्षा में 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। जो छात्र एक या दो विषयों में असफल हुए हैं, उन्हें सुधार परीक्षा का अवसर प्रदान किया जाएगा।
पिछले वर्ष 2025 में भी परिणाम 30 अप्रैल को घोषित किए गए थे, जिसमें बारहवीं का उत्तीर्ण प्रतिशत 99.02 और दसवीं का 99.09 रहा था। इस वर्ष परिणामों में सुधार देखा गया है, जिससे शिक्षा के स्तर में निरंतर प्रगति का संकेत मिलता है।

ऑपरेशन सिंदूर पर रक्षा मंत्री का बड़ा खुलासा: “अपनी शर्तों पर रोका अभियान, लंबी लड़ाई के लिए तैयार था भारत”

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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को किसी दबाव में नहीं, बल्कि पूरी तरह अपनी शर्तों पर स्वेच्छा से रोका था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर जरूरत पड़ती तो भारत पाकिस्तान के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार था।
उन्होंने कहा कि यह अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इस हमले के जवाब में 7 मई 2025 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के कई ठिकानों को नष्ट कर दिया था। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन के जरिए दुनिया को यह स्पष्ट संदेश गया कि भारत अब केवल कड़ी निंदा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सेना ने पूरी रणनीति के साथ केवल आतंकी अड्डों को ही निशाना बनाया, जिससे आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचे।
राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए उसे “अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र” बताया और कहा कि भारत की पहचान सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के क्षेत्र में है, जबकि पाकिस्तान की पहचान आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के रूप में बन चुकी है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए उसके ऑपरेशनल, वैचारिक और राजनीतिक—तीनों पहलुओं पर एक साथ प्रहार करना जरूरी है।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि ऑपरेशन के दौरान भारत को परमाणु हमले की धमकी भी मिली थी, लेकिन देश ने किसी भी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैन्य ताकत पहले से कहीं अधिक मजबूत है और देश के पास युद्ध के समय तेजी से संसाधन जुटाने की पूरी क्षमता मौजूद है।
रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। उन्होंने दोहराया कि भारत की प्राथमिकता शांति है, लेकिन यदि देश की सुरक्षा पर खतरा आता है तो सशक्त जवाब देने में कोई हिचक नहीं होगी।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से भी ड्रोन हमले और सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी की गई थी, जिससे दोनों देशों के बीच चार दिन तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। हालांकि 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई थी।

तेज रफ्तार कार की टक्कर से दंपती समेत दो मासूम बच्चों की मौत

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शाहजहांपुर

जनपद के पुवायां थाना क्षेत्र में गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शाहजहांपुर-पलिया हाईवे पर गांव भूड़ा मैनारी ओवरब्रिज के पास तेज रफ्तार बोलेरो कार ने बाइक सवार परिवार को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुवायां भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया।
मृतकों की पहचान निगोही थाना क्षेत्र के मोहल्ला रामनगर बगिया निवासी अरुण कुमार उर्फ कन्हैया (40 वर्ष), उनकी पत्नी सीमा देवी (35 वर्ष), पुत्री दीक्षा (8 वर्ष) और पुत्र नैतिक (6 वर्ष) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अरुण अपनी ससुराल गांव सिरखिड़ी में आयोजित एक शादी समारोह में परिवार सहित शामिल होने आए थे और गुरुवार को वापस घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। दुर्घटना के बाद बोलेरो चालक वाहन मौके पर छोड़कर फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस टीम जुटी हुई है।
परिवार में अरुण की एक बेटी प्रांशी घर पर मौजूद थी, जो इस हादसे में बच गई। अरुण मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है और फरार चालक को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

यूपी विधानमंडल में गरमाया माहौल: सपा-कांग्रेस की प्रवृत्ति मौलवियों के सामने नाक रगड़ने की : सीएम योगी

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*सपा ने लगाया झूठ फैलाने का आरोप
*पास किया अति निंदा प्रस्ताव, बोले- परिसीमन की थी साजिश

लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित विधानमंडल भवन में गुरुवार को महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर बुलाए गए एक दिवसीय विशेष सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला। सत्र की शुरुआत से ही माहौल गरम रहा, जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए निंदा प्रस्ताव पेश करने की तैयारी की, वहीं समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया। सदन के भीतर और बाहर दोनों ही जगहों पर जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन हुआ।

 

सीएम योगी का सपा-कांग्रेस पर हमला, शाहबानो प्रकरण का किया जिक्र

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्र शुरू होने से पहले और सदन में अपने संबोधन के दौरान सपा और कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि इन दलों का इतिहास महिलाओं के अधिकारों के विरोध से भरा रहा है। शाहबानो प्रकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सपा-कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करते हुए मौलवियों के सामने घुटने टेकने का काम किया। उन्होंने कहा कि यदि इन दलों में नैतिक साहस है तो वे संसद में अपने आचरण के लिए माफी मांगें और महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

महिला सशक्तिकरण पर सरकार का पक्ष: मोदी सरकार ने बदली महिलाओं की तस्वीर

 

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनधन योजना के तहत महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन दिए गए और देशभर में करोड़ों शौचालय बनवाए गए, जो महिलाओं की गरिमा के प्रतीक हैं। उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का हमला: सपा का इतिहास महिला विरोधी

उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने भी सपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग आज महिला सम्मान की बात कर रहे हैं, वही अतीत में बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ स्टेट गेस्ट हाउस कांड जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सपा कार्यकर्ताओं ने गंभीर साजिश रचने की कोशिश की थी, जो उनके महिला विरोधी चरित्र को दर्शाता है।

सपा का पलटवार: सीएम पुराना भाषण दोहरा रहे हैं

 

विपक्ष की ओर से सपा विधायक संग्राम यादव ने मुख्यमंत्री के भाषण को पुराना बताते हुए कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण पर ठोस चर्चा से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हर बार एक ही बातें दोहराते हैं और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास करते हैं। सपा ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भाजपा झूठ फैला रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि सभी दलों ने मिलकर इसे समर्थन दिया था।

सदन में हंगामा और नारेबाजी: शुरुआत से ही टकराव

विशेष सत्र शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक वेल में आ गए और एक-दूसरे के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे। भाजपा की महिला विधायकों ने महिला आरक्षण के समर्थन में पैदल मार्च किया, जबकि सपा विधायकों ने गैलरी में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया। सपा सदस्यों ने प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ भी प्रदर्शन किया और विधेयक लागू करने की मांग उठाई।
निंदा प्रस्ताव पर बहस: देर रात तक चलने के आसार
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा सदन में निंदा प्रस्ताव पेश किया जाना है, जिस पर सभी दलों के नेता और विधायक अपनी बात रखेंगे। सरकार का कहना है कि यह सत्र विपक्ष की कथित साजिश को उजागर करने और महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनकी भूमिका स्पष्ट करने के लिए बुलाया गया है। वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक नाटक करार दे रहा है।

खेला होवे… मोदी जीतेंगे या दीदी भारी, एग्जिट पोल की उलझी कहानी

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(पवन वर्मा-विनायक फीचर्स)
​राजनीति की उर्वर धरा पश्चिम बंगाल में ‘खेला होवे’ की गूँज न सुनाई दे, तब तक चुनावी उत्सव अधूरा सा प्रतीत होता है। 2026 के विधानसभा चुनाव भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण कालखंडों में से एक के रूप में दर्ज हो चुके हैं। यह चुनाव केवल संख्या बल की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह बंगाल की भविष्यगामी दृष्टि और दो विपरीत राजनीतिक ध्रुवों के बीच एक निर्णायक संघर्ष था। जैसे ही मतदान की प्रक्रिया संपन्न हुई,चुनावी ‘आमोद-प्रमोद’ में डूबे बंगाल की नजरें उन एग्जिट पोल्स पर आकर टिक गई हैं जो राज्य की अगली सरकार की धुंधली सी तस्वीर पेश कर रहे हैं। मतदाताओं ने इस बार जिस प्रकार अभूतपूर्व उत्साह के साथ मतदान केंद्रों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, वह वाकई ‘असाधारण’ है।
‘नूतन बांगलार’ का स्वप्न और राष्ट्रीय आह्वान
​भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे चुनाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और उनकी नेतृत्व क्षमता के इर्द-गिर्द केंद्रित रखा। भाजपा की रणनीति स्पष्ट थी कि ‘पोरिबोर्तन’ (परिवर्तन) के संकल्प के साथ बंगाल को एक नई पहचान दिलाना। प्रधानमंत्री की सभाओं में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि राज्य का एक वर्ग ‘नूतन बांगलार’ (नए बंगाल) के विचार से प्रभावित है।
​भाजपा का मुख्य विमर्श शासन की कार्यशैली में पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधारों पर आधारित रहा। पार्टी ने केंद्रीय स्तर पर जारी नीतियों और बंगाल की क्षेत्रीय आवश्यकताओं के बीच एक सामंजस्य स्थापित करने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री के चेहरे पर लड़ा गया यह चुनाव इस बात का प्रतीक था कि भाजपा बंगाल को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कितनी ‘तत्पर’ है। उनके समर्थकों के लिए यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि विकास की एक नई ‘जागृति’ थी।
​क्षेत्रीय अस्मिता और ‘मां-माटी-मानुष’ की रक्षा
​दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस का संपूर्ण चुनावी अभियान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संघर्ष और उनके व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द बुना गया। ममता बनर्जी ने इस चुनाव में एक ऐसी राजनेता की भूमिका निभाई जो अपनी मिट्टी और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए ‘एकला चोलो’ की नीति पर अडिग खड़ी है। उनकी तरफ से प्रचारित हुआ कि ये चुनाव केवल सत्ता बचाने की चुनौती नहीं थी, बल्कि बंगाल की स्वायत्तता और बंगाली गौरव को अक्षुण्ण रखने की लड़ाई है।
​तृणमूल कांग्रेस ने अपने प्रचार तंत्र को क्षेत्रीय संवेदनाओं और जन-सरोकारों से जोड़कर रखा। ममता बनर्जी ने अपने भाषणों में निरंतरता, संघर्ष और बंगाल के सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने की अपील प्रमुखता से की। उन्होंने राज्य के हर क्षेत्र के साथ अपना जो जुड़ाव बनाया है, उसी विश्वास की पूंजी के साथ वे इस चुनावी रण में उतरीं थी। उनके समर्थकों के लिए वे केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि बंगाल के हितों की सबसे प्रखर आवाज बनी रहीं।
​ऐतिहासिक मतदान: एक ‘विराट’ जन-भागीदारी
​बंगाल ने एक बार फिर सिद्ध किया कि लोकतंत्र की जड़ें यहाँ कितनी गहरी हैं। मतदान के प्रतिशत ने जिस प्रकार ऐतिहासिक आंकड़ों को छुआ, वह यह दर्शाता है कि राज्य का प्रत्येक वर्ग, चाहे वह प्रथम बार का युवा मतदाता हो या अनुभव की थाती समेटे वृद्ध, अपने मत की कीमत समझता है। यह ‘विराट’ जन-भागीदारी किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर की आहट भी हो सकती है और वर्तमान व्यवस्था के प्रति गहन विश्वास की अभिव्यक्ति भी।
​इतनी बड़ी संख्या में लोगों का बाहर निकलना यह संदेश देता है कि जनता अब केवल मूक दर्शक नहीं है। इस ‘जन-सृष्टि’ ने चुनावी विश्लेषकों को भी अचंभित कर दिया है, क्योंकि बंगाल की राजनीति में ‘मौन मतदाता’ का व्यवहार अक्सर बड़े-बड़े अनुमानों को ‘धुलिसात’ कर देता है।
​एग्जिट पोल्स का ‘जटिल’ गणित
​विभिन्न न्यूज़ चैनलों और सर्वेक्षण एजेंसियों द्वारा जारी एग्जिट पोल्स ने राज्य के राजनीतिक समीकरण को और अधिक ‘रोमांचक’ बना दिया है। आंकड़ों के अनुसार ​परिवर्तन की संभावना है और अधिकांश सर्वेक्षण भाजपा को स्पष्ट बढ़त या बहुमत के अत्यंत निकट दिखा रहे हैं। सभी एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार भाजपा 95 से 208 के मध्य सीटें प्राप्त कर सकती है। यदि ये आंकड़े सच साबित होते हैं तो यह निश्चित है कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील ने बंगाल के हृदय स्थल में अपनी जगह बनाई है।​ वहीं, कुछ दूसरे विश्वसनीय सर्वेक्षणों का मानना है कि टीएमसी अपनी जड़ों को बचाए रखने में इस बार कठिन दौर से गुजर रही है और वह 85 से 189 सीटों के बीच रह सकती है। यदि इन सभी अनुमानों का औसत देखा जाए, तो मुकाबला 2026 के इस चुनाव को अत्यंत संघर्षपूर्ण बना रहा है।
​ जनादेश का सम्मान और भविष्य की राह
​एग्जिट पोल्स के अनुमान चाहे जो भी हों, अंतिम परिणाम तो ‘ईश्वर’ स्वरूप जनता के हाथ में ही है। बंगाल की जनता ने अपना निर्णय सुना दिया है, जो फिलहाल मशीनों में सुरक्षित है। जीत किसी भी पक्ष की हो, लेकिन इस चुनाव ने यह प्रमाणित कर दिया है कि बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से द्वि-ध्रुवीय हो चुकी है। ​यह चुनाव बंगाल के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। जहाँ भाजपा एक नए युग की शुरुआत के प्रति आशान्वित है, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपनी विरासत को विस्तार देने के लिए दृढ़ संकल्पित है। अब सभी की प्रतीक्षा की घड़ियां उस दिन समाप्त होंगी जब मतपेटियां खुलेंगी और बंगाल के भविष्य का नया सूरज उगेगा। यह तो तय है कि विजय लोकतंत्र की ही होगी, क्योंकि बंगाल के सजग मतदाताओं ने अपनी सक्रियता से यह सुनिश्चित किया है कि ‘सत्ता’ का मार्ग केवल और केवल जनमत से होकर ही गुजरता है। (विनायक फीचर्स)