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Saturday, April 4, 2026
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मदरसे में नाबालिग लड़के की बेरहमी से पिटाई, दो मौलाना गिरफ्तार

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सहारनपुर: यूपी के सहारनपुर (Saharanpur) में गंगोह के एक मदरसे में 10 वर्षीय लड़के (Minor boy) की बेरहमी से पिटाई का एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर लोग स्तब्ध रह गए हैं। वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो आरोपी मौलानाओं को गिरफ्तार कर लिया है, जो अब जेल में हैं।

1 मिनट 49 सेकंड का यह वीडियो मदरसा दारुल उलूम जकारिया में फिल्माया गया बताया जा रहा है। इसमें एक भयावह दृश्य दिखाया गया है, जहां एक मौलाना बच्चे को भागने से रोकने के लिए उसके पैरों से उल्टा लटकाए हुए है, जबकि दूसरा उसे बार-बार लाठी से पीट रहा है। अनुमान के अनुसार, बच्चे को लगभग 36 बार पीटा गया। दर्द से कराहते और दया की गुहार लगाते बच्चे के बावजूद, आरोपियों ने कोई दया नहीं दिखाई। एक तीसरे व्यक्ति ने पूरी घटना को रिकॉर्ड किया।

हालांकि वीडियो एक साल से अधिक पुराना है, लेकिन यह 3 अप्रैल को वायरल हो गया, जिससे स्थानीय समुदाय में आक्रोश फैल गया। खानपुर गुर्जर गांव के करी साजिद हसन ने गंगोह पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पुलिस पूछताछ के दौरान, आरोपी जुनैद और शोएब ने बताया कि लड़के ने मदरसे से भागने की कोशिश की थी, और उन्होंने उसे सबक सिखाने के लिए यह “सजा” दी। गंगोह सर्कल ऑफिसर (सीओ) अशोक कुमार सिसोदिया ने आज पुष्टि की कि वीडियो सामने आते ही पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया। आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या मदरसे के अन्य बच्चों के साथ भी इसी तरह का दुर्व्यवहार हुआ था।

कानपुर किडनी कांड का बड़ा खुलासा, कर्मचारी की सूचना से उजागर हुआ अवैध ट्रांसप्लांट रैकेट

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कानपुर के आहूजा हॉस्पिटल में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसका खुलासा उसी अस्पताल के एक कर्मचारी की सूचना से हुआ। बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन से नाराज कर्मचारी ने पुलिस को गुप्त रूप से जानकारी दी कि यहां रात के समय अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं।

इस सूचना के आधार पर कमिश्नरेट पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ 30 मार्च को अस्पताल में छापा मारा, जिसके बाद पूरे रैकेट का पर्दाफाश हो गया। फिलहाल, सूचना देने वाले कर्मचारी को सुरक्षा दी गई है और उसने अदालत में अहम गवाह बनने की सहमति भी जताई है।

पुलिस ने इस मामले में अस्पताल संचालक डॉ. सुरजीत आहूजा और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस अवैध नेटवर्क के तार कानपुर के अलावा लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के कई निजी अस्पतालों तक फैले हुए हैं।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ में नौ अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए 10 टीमें गठित कर अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी जा रही है। एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए लगातार कार्रवाई जारी है।

जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल में अब तक कम से कम सात किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह अस्पताल किडनी ट्रांसप्लांट या यूरोलॉजी के लिए अधिकृत ही नहीं था। इसके बावजूद यहां अवैध सर्जरी की जा रही थी।

अवैध ट्रांसप्लांट को अंजाम देने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया जाता था। देर रात या तड़के सुबह के समय ऑपरेशन किए जाते थे, जब अस्पताल में भीड़ कम होती थी। उस दिन स्टाफ को छुट्टी दे दी जाती थी और बाहरी डॉक्टरों व पैरामेडिकल टीम को बुलाया जाता था। यहां तक कि सर्जरी के दौरान सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते थे।

मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मरीजों और डोनर के बयान तथा मेडिकल रिपोर्ट भी पुलिस के हाथ लगे हैं। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं और अन्य शामिल लोगों की तलाश जारी है।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने शहर के अन्य सर्जनों से भी पूछताछ की तैयारी की है, जिन पर ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों का इलाज करने और मामले को छिपाने का आरोप है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि यदि कहीं भी इस तरह की अवैध गतिविधि की जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि ऐसे रैकेट पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

युद्ध का असर: शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों में डर, कारोबार में आई बड़ी कमी

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अमेरिका, ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मार्च महीने में निफ्टी और सेंसेक्स में 11 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो और उनके निवेश व्यवहार पर पड़ा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा जारी मासिक बुलेटिन के अनुसार, युद्ध से पहले जनवरी और फरवरी में शहर के निवेशक शेयर बाजार के कैश सेगमेंट में प्रतिमाह करीब 5000 करोड़ रुपये का कारोबार कर रहे थे। हालांकि मार्च में यह घटकर लगभग 3600 करोड़ रुपये रह गया, जो निवेशकों की घटती भागीदारी और बाजार में बढ़ते डर को दर्शाता है।

यदि दैनिक कारोबार के आधार पर देखा जाए तो जनवरी-फरवरी में जहां औसत ट्रेडिंग 250 करोड़ रुपये प्रतिदिन से अधिक थी, वहीं मार्च में यह घटकर करीब 190 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गई। यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और बाजार की स्थिति स्पष्ट होने तक इंतजार कर रहे हैं।

कानपुर, जो कभी यूपी स्टॉक एक्सचेंज की विरासत को संभाले हुए था, आज भी निवेश के मामले में देश के प्रमुख शहरों में शामिल है। म्यूचुअल फंड निवेश के मामले में यह उत्तर प्रदेश में दूसरे स्थान पर है और देश के टॉप 15 शहरों में अपनी जगह बनाए हुए है। दिलचस्प बात यह है कि यहां का म्यूचुअल फंड निवेश पूरे उत्तराखंड राज्य से भी अधिक है और देश के कुल निवेश में इसकी हिस्सेदारी लगभग 0.47 प्रतिशत है।

नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार में भी कमी आई है। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में उत्तर प्रदेश में 4.20 लाख नए निवेशक जुड़े थे, जबकि मार्च में यह संख्या घटकर 3.87 लाख रह गई। यानी नए निवेशकों की वृद्धि दर में लगभग 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि बाजार की अनिश्चितता का असर नए निवेशकों के भरोसे पर भी पड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। केश्री ब्रोकिंग के को-फाउंडर राजीव सिंह के अनुसार, इस समय “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाना बेहतर है। साथ ही मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश और एसआईपी के जरिए नियमित निवेश जारी रखना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है, जिससे लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बनी रहती है।

केवाईसी अपडेट न होने से बढ़ी गैस उपभोक्ताओं की परेशानी, एजेंसियों पर उमड़ रही भीड़

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एलपीजी गैस उपभोक्ताओं को इन दिनों भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर बुक कराने के बावजूद उपभोक्ताओं के मोबाइल पर डिलीवरी कोड नहीं पहुंच रहा, जिससे वे गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इस समस्या के चलते एजेंसियों पर भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।

इस संबंध में भारतीष मिश्रा ने बताया कि हजारों उपभोक्ताओं ने लंबे समय से अपनी केवाईसी (KYC) अपडेट नहीं कराई है। इसके अलावा कई मामलों में उपभोक्ताओं की मृत्यु के बाद उनके वारिसों ने कनेक्शन में नाम और मोबाइल नंबर अपडेट नहीं कराया है।

उन्होंने कहा कि यही मुख्य कारण है कि गैस बुकिंग के बाद उपभोक्ताओं तक ओटीपी या डिलीवरी कोड नहीं पहुंच पा रहा है। बिना कोड के गैस वितरण संभव नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं को एजेंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे अनावश्यक भीड़ बढ़ रही है।

एजेंसी संचालकों का कहना है कि वे उपभोक्ताओं को बार-बार केवाईसी अपडेट कराने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के चलते लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसका सीधा असर वितरण व्यवस्था पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद केवाईसी और मोबाइल नंबर अपडेट होना बेहद जरूरी हो गया है। इससे न केवल पारदर्शिता बनी रहती है, बल्कि गलत वितरण और कालाबाजारी पर भी रोक लगती है।

संघ के अध्यक्ष ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें और सही मोबाइल नंबर दर्ज कराएं। इससे गैस वितरण व्यवस्था सुचारू होगी और एजेंसियों पर लगने वाली भीड़ भी कम हो सकेगी।

मोरबी की फैक्ट्रियां बंद, कानपुर का टाइल्स कारोबार संकट में; बढ़े दाम, ठप हुई सप्लाई

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कानपुर
गुजरात के मोरबी में टाइल्स फैक्ट्रियों के बंद होने का असर अब कानपुर के मारबल और टाइल्स कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। पिछले 25 दिनों से मोरबी से टाइल्स की एक भी खेप कानपुर नहीं पहुंची है, जिससे बाजार में आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। इसका सीधा असर कीमतों और व्यापार दोनों पर पड़ा है।

कानपुर के किदवई नगर में टाइल्स और मारबल का बड़ा कारोबार होता है, जहां करीब 100 से अधिक दुकानें और शोरूम संचालित हैं। इसके अलावा शहर के अन्य हिस्सों में भी 150 से ज्यादा प्रतिष्ठान हैं। सामान्य दिनों में यहां 10 से 15 करोड़ रुपये का दैनिक कारोबार होता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

व्यापारियों के अनुसार, मोरबी में सैकड़ों फैक्ट्रियां गैस की कमी के कारण बंद पड़ी हैं। टाइल्स उद्योग गैस पर निर्भर होने के कारण उत्पादन रुक गया है, जिससे नए माल की सप्लाई बंद हो गई है। दुकानों में फिलहाल पुराने स्टॉक के सहारे काम चलाया जा रहा है, लेकिन वह भी तेजी से खत्म हो रहा है।

सप्लाई रुकने के कारण टाइल्स की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। जो टाइल्स पहले 200 रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 250 से 275 रुपये तक पहुंच गई है। कीमतों में इस तेजी के चलते ग्राहक बाजार से गायब हो गए हैं, जिससे व्यापारियों की बिक्री पर भी बुरा असर पड़ा है।

इस संकट का असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। ट्रांसपोर्ट का काम पूरी तरह ठप हो गया है और लोडिंग-अनलोडिंग करने वाले मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।

कानपुर मारबल एंड टाइल्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द ही फैक्ट्रियां शुरू नहीं हुईं, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को भी इसका कारण बताया और उम्मीद जताई कि हालात जल्द सामान्य होंगे, ताकि कारोबार फिर से पटरी पर लौट सके।

हाई-प्रोफाइल जिस्मफरोशी रैकेट का भंडाफोड़, 19 होटलों में छापेमारी

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कानपुर कमिश्नरी पुलिस ने शहर में चल रहे एक बड़े जिस्मफरोशी रैकेट का खुलासा करते हुए शुक्रवार देर रात व्यापक कार्रवाई की। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और कल्याणपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने बर्रा, कल्याणपुर, रावतपुर और सीसामऊ समेत कई क्षेत्रों के 19 होटलों में एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम की छह युवतियां बरामद की गईं, जिन्हें कथित रूप से देह व्यापार में धकेला गया था।

इस पूरे नेटवर्क के मुख्य आरोपी रोहित वर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो कल्याणपुर का निवासी है। पुलिस के अनुसार, वह युवतियों को बाहर के राज्यों से लाकर शहर में होटलों के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाता था। वह अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी नाम और अपनी आईडी का इस्तेमाल कर होटल बुकिंग करता था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक युवती ने आरोपी पर अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने का आरोप लगाया। इस शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के निर्देश पर जांच शुरू की गई। जांच की जिम्मेदारी एडीसीपी शिवा सिंह को सौंपी गई, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर छापेमारी की गई।

छापेमारी के दौरान कई होटलों से संदिग्ध गतिविधियों के प्रमाण मिले और आधा दर्जन युवतियों को मौके से बरामद किया गया। इसके बाद एडीसीपी एसओजी सुमित सुधाकर रामटेके की टीम ने पूरे नेटवर्क को खंगालते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और संभावित नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि एक दरोगा पर आरोपी से मिलीभगत का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि उक्त पुलिसकर्मी ने होटल संचालकों से संपर्क कराने में आरोपी की मदद की थी। इस मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने बताया कि आरोपी रोहित वर्मा पहले से ही कई मामलों में वांछित रहा है और उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। शनिवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस कार्रवाई को शहर में चल रहे अवैध धंधों पर बड़ी चोट माना जा रहा है और पुलिस ने संकेत दिए हैं कि ऐसे अभियानों को आगे भी जारी रखा जाएगा।