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Tuesday, June 16, 2026
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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने की अटकलें तेज, 9 में से 6 सांसद उद्धव ठाकरे का छोड़ सकते हैं साथ

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मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने की अटकलें तेज हो गई हैं। खबरों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) का साथ छोड़ने की तैयारी में हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो 19 जून को होने वाले शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से पहले उद्धव ठाकरे को बड़ा राजनीतिक झटका लग सकता है।

सूत्रों के अनुसार, दो सांसद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि चार अन्य सांसदों के भी राजधानी पहुंचने की खबर है। बताया जा रहा है कि ये सांसद पहले अलग गुट का गठन कर सकते हैं और बाद में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। संभावित बगावत की खबरों के बीच पार्टी नेतृत्व भी सक्रिय हो गया है। सांसद अनिल देसाई और संजय राउत दिल्ली पहुंच चुके हैं और नाराज सांसदों को मनाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।

माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिन उद्धव ठाकरे के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चल रही हैं। दावा किया जा रहा था कि इसके तहत कुछ सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, एकनाथ शिंदे ने ऐसे दावों को खारिज करते हुए कहा था कि चुनाव खत्म हो चुके हैं और अब किसी भी प्रकार के ‘नंबर गेम’ की आवश्यकता नहीं है।

स्थिति की गंभीरता तब और बढ़ गई जब उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में 9 में से केवल 4 सांसद ही व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने संकेतों में कहा कि “जिसे जाना है, वह खुशी से जाए। समय आने पर सच्चाई सबके सामने होगी।”

अगर सांसदों की यह संभावित बगावत हकीकत में बदलती है, तो यह चार वर्षों में उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका होगा। इससे पहले 2022 में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में हुई बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। उसी घटनाक्रम के बाद पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी शिंदे गुट के हिस्से में चला गया था। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है।

 

परीक्षा सुरक्षा के लिए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक, संस्थापक ने जताई आपत्ति

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा की पुनर्परीक्षा से पहले परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने और प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी अफवाहों पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक लोकप्रिय संदेश भेजने वाले मंच पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की सिफारिश पर उठाया गया है। इस निर्णय के बाद देशभर के करोड़ों उपयोगकर्ताओं पर इसका असर पड़ा है और इसे लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार 21 जून को प्रस्तावित पुनर्परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की नकल, प्रश्नपत्र लीक या भ्रामक संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों का मानना है कि विभिन्न माध्यमों से परीक्षा से संबंधित गलत जानकारियां तेजी से फैल रही थीं, जिससे अभ्यर्थियों में भ्रम और मानसिक तनाव पैदा हो रहा था।

संदेश मंच के संस्थापक पावेल डुरोव ने इस निर्णय की सार्वजनिक रूप से आलोचना करते हुए कहा कि कुछ लोगों की कथित गलती की सजा करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं को दी जा रही है। उनका कहना है कि प्रतिबंध लगाने से समस्या समाप्त नहीं हुई, बल्कि ऐसी गतिविधियां अन्य माध्यमों पर स्थानांतरित हो गई हैं।

वहीं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी नए प्रश्नपत्र लीक की घटना के कारण नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं तथा अभ्यर्थियों को गुमराह करने वाले फर्जी संदेशों पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक था।

इस फैसले के बाद तकनीक और शिक्षा जगत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल माध्यमों की जिम्मेदारी तथा परीक्षा सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार की इस रणनीति की प्रभावशीलता और इसके व्यापक प्रभावों पर नजर रहेगी। फिलहाल पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

पीएम मोदी को देखकर सीट से खड़े हो गए ट्रंप, मिलाया हाथ; जी-7 सम्मेलन में दिखी गर्मजोशी, आज होगी कई अहम मुद्दों पर निर्णायक वार्ता

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एवियन (फ्रांस)/नई दिल्ली। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान उस समय दुनिया की निगाहें भारत और अमेरिका पर टिक गईं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखते ही अपनी सीट से खड़े हो गए और आगे बढ़कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और कुछ देर तक आपस में बातचीत की। लगभग 16 महीने बाद हुई यह आमने-सामने की मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आए इस दृश्य ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी। दोनों नेताओं के बीच भले ही संक्षिप्त बातचीत हुई हो, लेकिन इसे बुधवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक की प्रस्तावना माना जा रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में सामने आए विभिन्न मतभेदों के बावजूद यह मुलाकात संबंधों को नई मजबूती देने का संकेत है।

बुधवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी, आपूर्ति श्रृंखला, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दे भी वार्ता के केंद्र में रहेंगे।

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव देखने को मिला था। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने, भारत-पाकिस्तान से जुड़े बयानों तथा अन्य कूटनीतिक घटनाक्रमों ने संबंधों में कुछ दूरी पैदा की थी। हालांकि दोनों देशों ने लगातार संवाद बनाए रखा और अब जी-7 सम्मेलन के मंच पर दोनों नेताओं की मुलाकात को रिश्तों में नई ऊर्जा भरने वाला कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। भारत भले ही जी-7 समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन विश्व की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंच पर बढ़ते प्रभाव के कारण उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में लगातार बुलाया जा रहा है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों से मुलाकात कर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में पहुंचने के बाद कहा कि विश्व के प्रमुख नेताओं के साथ संवाद और विचार-विमर्श वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए आवश्यक है। वहीं अमेरिकी प्रशासन की ओर से भी संकेत मिले हैं कि भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा।

अब पूरी दुनिया की नजर बुधवार को होने वाली मोदी-ट्रंप द्विपक्षीय वार्ता पर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में लिए जाने वाले निर्णय केवल भारत और अमेरिका के संबंधों को ही नई दिशा नहीं देंगे, बल्कि वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के भविष्य को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में जी-7 सम्मेलन में हुई यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक बन गई है।

यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा परिणाम घोषित, वंदन सिंह बने प्रदेश टॉपर; शीर्ष-10 में 6 बेटियों का दबदबा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों का इंतजार मंगलवार को समाप्त हो गया। राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा-2026 का परिणाम घोषित कर दिया। इस वर्ष वंदन सिंह ने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर सफलता का परचम लहराया है। वहीं परिणामों में बेटियों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है। प्रदेश की शीर्ष-10 मेरिट सूची में 6 महिला अभ्यर्थियों ने स्थान बनाकर नारी शक्ति का दम दिखाया है।

इस वर्ष बीएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन अत्याधुनिक तकनीक और कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच कराया गया। परीक्षा प्रदेश के 72 जिलों में बनाए गए 1011 केंद्रों पर संपन्न हुई, जहां पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी और बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था लागू की गई। सरकार का दावा है कि इन व्यवस्थाओं के चलते परीक्षा पूरी तरह नकलविहीन और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने परिणाम घोषित होने पर सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने परीक्षा आयोजन में जुटे अधिकारियों और कर्मचारियों की भी सराहना की।

बीएड प्रवेश परीक्षा में इस बार अभ्यर्थियों का उत्साह भी देखने को मिला। कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों में लगभग 90 प्रतिशत परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए। उपस्थिति के मामले में कासगंज और पीलीभीत जिले प्रदेश में सबसे आगे रहे। परीक्षा परिणाम जारी होने के साथ ही 4 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की रैंक सूची भी घोषित कर दी गई है।

अब अभ्यर्थियों की निगाहें काउंसलिंग प्रक्रिया पर टिकी हैं। उच्च शिक्षा विभाग जल्द ही काउंसलिंग का विस्तृत कार्यक्रम जारी करेगा, जिसके आधार पर अभ्यर्थियों को विभिन्न शिक्षण संस्थानों में प्रवेश दिया जाएगा। मेरिट और विकल्पों के आधार पर महाविद्यालय आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के परिणामों में छात्राओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदेश में बढ़ती शैक्षिक जागरूकता और महिलाओं की शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल को दर्शाता है। शीर्ष-10 में 6 महिलाओं का शामिल होना इस बात का संकेत है कि बेटियां अब हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।

परिणाम घोषित होने के साथ ही लाखों अभ्यर्थियों के शिक्षक बनने के सपनों को नई उड़ान मिल गई है। अब काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया के बाद प्रदेश के शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होगी।

बीजेपी को लाभ पहुंचाने वाली ताकतें आएंगी,ओवैसी पर अखिलेश का बड़ा हमला

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बिना नाम लिए उन पर भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। अखिलेश यादव के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और विपक्षी खेमे में भी हलचल बढ़ा दी है।

मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि देश और प्रदेश में विपक्षी दलों का गठबंधन पूरी मजबूती के साथ कायम है और आगे भी बना रहेगा। उन्होंने कहा कि जिस गठबंधन ने हाल के चुनावों में भाजपा को चुनौती दी और कई स्थानों पर पराजित किया, वह भविष्य में भी जनता के मुद्दों को लेकर एकजुट रहेगा। उन्होंने संकेतों में कहा कि चुनाव नजदीक आते ही ऐसे कई लोग सामने आएंगे जो विपक्षी एकता को कमजोर करने की कोशिश करेंगे।

सपा प्रमुख ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए कई तरह के राजनीतिक प्रयोग किए जाएंगे। उनका आरोप था कि कुछ ताकतें विपक्षी वोटों के बिखराव की रणनीति पर काम कर रही हैं, जिससे सत्तारूढ़ दल को फायदा मिल सके। उन्होंने कहा कि जनता अब राजनीतिक चालों को समझ चुकी है और विकास, रोजगार, शिक्षा, महंगाई तथा किसानों के मुद्दों पर जवाब चाहती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी की उत्तर प्रदेश में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता से जुड़ा हुआ है। पिछले चुनावों में भी समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने ओवैसी की पार्टी को भाजपा की “बी टीम” बताते हुए आरोप लगाए थे कि उनकी मौजूदगी से विपक्षी मतों का विभाजन होता है।

प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग का वोट बैंक बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न दल इन वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में जुटे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समाजवादी पार्टी नहीं चाहती कि उसके पारंपरिक वोट बैंक में किसी अन्य दल की सेंध लगे, इसलिए पार्टी नेतृत्व लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

वहीं ओवैसी की पार्टी भी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। चुनावी समीकरणों के बीच अखिलेश यादव का यह बयान साफ संकेत देता है कि विपक्षी राजनीति में नेतृत्व और जनाधार को लेकर संघर्ष अब खुलकर सामने आने लगा है।

राम मंदिर चढ़ावा घोटाले को दबाना चाहती थी सरकार : डिंपल यादव

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मैनपुरी। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी की मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी की केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रही थी। उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मुद्दे को मजबूती से न उठाते, तो मामला जनता के सामने नहीं आ पाता।
मीडिया से बातचीत के दौरान डिंपल यादव ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और उससे जुड़े किसी भी मामले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ियों की खबरें सामने आने के बावजूद सरकार ने लंबे समय तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस विषय को प्रमुखता से उठाया और सवाल किए, तब जाकर जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और मामले में कार्रवाई शुरू हुई।सांसद ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई महत्वपूर्ण मामलों में संवैधानिक व्यवस्था और नियमों की अनदेखी की जा रही है। उनका आरोप था कि जनता से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही और पारदर्शिता कम होती जा रही है, जबकि सरकार आलोचना से बचने का प्रयास करती है।डिंपल यादव ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर से जुड़े आर्थिक मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि जनता का विश्वास कायम रहे।गौरतलब है कि हाल के दिनों में राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि को लेकर सामने आए विवाद तथा संदिग्ध व्यक्तियों के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेर रही है, जबकि भाजपा की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताया जा रहा है।