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Monday, July 6, 2026
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योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: होमगार्ड्स को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज, पदक विजेताओं को सीधी नौकरी; जलालाबाद अब ‘परशुरामपुरी’

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28 प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर |

स्टार्टअप मिशन और डेटा सेंटर नीति को नई रफ्तार |

पशुधन बीमा, नए विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज को भी मंजूरी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल से जुड़े 28 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। बैठक में शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलकर ‘परशुरामपुरी’ करने का निर्णय लिया गया, जबकि एक मदरसा संबंधी प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित रखा गया। कैबिनेट के फैसलों में होमगार्ड्स के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज सुविधा, अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को सीधी सरकारी नौकरी, स्टार्टअप नीति, डेटा सेंटर नीति और पशुधन बीमा जैसी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं शामिल रहीं।

होमगार्ड्स को बड़ी राहत, मिलेगा ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज

कैबिनेट ने प्रदेश के होमगार्ड जवानों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इस योजना पर राज्य सरकार प्रतिवर्ष करीब 35.50 करोड़ रुपये खर्च करेगी। साथ ही होमगार्ड्स की वर्दी धुलाई और सिलाई भत्ते की अवधि सात वर्ष से घटाकर पांच वर्ष कर दी गई है, जिससे उन्हें समय पर आर्थिक लाभ मिल सकेगा।

ओलंपिक और एशियाई पदक विजेताओं को मिलेगी सीधी सरकारी नौकरी

खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं को लोक सेवा आयोग की प्रक्रिया से बाहर रखते हुए सीधी सरकारी नियुक्ति देने का निर्णय लिया। क्रीड़ा अधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी और उप क्रीड़ा अधिकारी सहित कई पदों पर सीधी भर्ती होगी।

जलालाबाद का नाम बदलकर ‘परशुरामपुरी’

कैबिनेट ने शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार का कहना है कि यह स्थान भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है और केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद अब इस पर अंतिम स्वीकृति दी गई है।

स्टार्टअप मिशन और डेटा सेंटर नीति को मिली नई गति

प्रदेश में निवेश और रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से नई स्टार्टअप नीति तथा उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के गठन को मंजूरी दी गई। साथ ही समाप्त हो चुकी डेटा सेंटर नीति को फिर से लागू कर दिया गया है। सरकार ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड बनाने का भी निर्णय लिया है।

पशुधन बीमा योजना लागू, किसानों को मिलेगा सुरक्षा कवच

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री जोखिम पशुधन बीमा योजना को भी मंजूरी दी। इसके तहत गाय, भैंस, बैल, घोड़ा, भेड़, बकरी सहित विभिन्न पशुओं का बीमा कराया जाएगा। बीमा प्रीमियम में केंद्र, राज्य और किसान की हिस्सेदारी तय की गई है, जबकि प्राकृतिक आपदा, बीमारी और दुर्घटना की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई अहम फैसले

बैठक में कानपुर, फतेहपुर और गाजियाबाद में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी गई। वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड के अस्पताल तथा रायबरेली और कानपुर में कृषि एवं उद्यान विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता भी साफ हो गया।

प्रदेश सरकार के इन फैसलों को आगामी वर्षों में स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। कैबिनेट के निर्णयों का लाभ सीधे लाखों होमगार्ड जवानों, खिलाड़ियों, किसानों, युवाओं और उद्यमियों को मिलने की उम्मीद है।

सेवा सप्ताह के तहत विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल ने लगाया चिकित्सा शिविर

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– 200 मरीजों का उपचार कर किया पौधों का वितरण

विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल द्वारा सेवा सप्ताह के अंतर्गत सोमवार को चिकित्सा सेवा और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के तहत निशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन करने के साथ-साथ वृक्षारोपण और पौधा वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधे वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज सेवा के साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और हरित वातावरण के लिए अधिक से अधिक वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करना रहा।

पहला चिकित्सा शिविर पांडेश्वरनाथ मंदिर परिसर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर बजरंग दल के जिला सहसंयोजक रोहन मिश्रा, नगर संयोजक साहिल मिश्रा, निहाल, आर्यन सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। शिविर में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नवनीत गुप्ता ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श एवं निशुल्क दवाइयां वितरित कीं। कार्यकर्ताओं ने शिविर में आने वाले लोगों को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया।

वहीं दूसरा चिकित्सा शिविर खानपुर ग्राम में आयोजित किया गया, जहां मुख्य अतिथि के रूप में विभाग संयोजक अभिषेक, जिला मंत्री अखिलेश, जिला उपाध्यक्ष शिवाकांत तथा जिला बलोपासना प्रमुख अनुज श्रीवास्तव उपस्थित रहे। शिविर में ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की गई और उन्हें निशुल्क दवाइयों के साथ पौधे भी वितरित किए गए। दोनों शिविरों में मिलाकर लगभग 200 मरीजों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। आयोजन के दौरान कार्यकर्ताओं ने लोगों को स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया।

कार्यक्रम के समापन पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने कहा कि सेवा सप्ताह का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक सेवा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जनकल्याणकारी कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें और अधिक से अधिक लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया जा सके। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा खुलासा: दान के गहनों का रिकॉर्ड गायब, SIT जांच में बढ़ीं मुश्किलें

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अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए बहुमूल्य आभूषणों और दान सामग्री को लेकर चल रही जांच में नया मोड़ सामने आया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को अब तक दान में प्राप्त सोने-चांदी के आभूषणों का पूरा और प्रमाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सका है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने मंदिर में दान प्रबंधन प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि रामलला को समर्पित कई आभूषणों का मूल रिकॉर्ड अधूरा है और कुछ गहनों के गायब होने की आशंका भी जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जांच में यह जानकारी सामने आई है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कई आभूषणों को उनके मूल स्वरूप में सुरक्षित रखने के बजाय गलवाकर सोना और चांदी की ईंटों में परिवर्तित कर दिया गया। हालांकि, इस प्रक्रिया का पूरा हिसाब-किताब, कितना सोना-चांदी प्राप्त हुआ, कितनी मात्रा गलवाई गई और वर्तमान में कितना सुरक्षित है, इसका स्पष्ट एवं सत्यापित रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को नहीं मिल पाया है। यही वजह है कि SIT की जांच और अधिक जटिल होती जा रही है।

जांच का सबसे अहम पहलू यह है कि आखिर दान में मिले आभूषणों को गलाने का निर्णय किस स्तर पर और किसके आदेश से लिया गया। साथ ही यह भी जांच के दायरे में है कि इस पूरी प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और पारदर्शिता का पालन किया गया था या नहीं। यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों से जवाब-तलब किया जा सकता है।

मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्ष मंदिर के दान प्रबंधन और रिकॉर्ड व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, जबकि संबंधित पक्ष जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की बात कह रहा है। उधर, SIT जल्द ही मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ कर सकती है।

फिलहाल यह मामला केवल दान में मिले आभूषणों के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मंदिर में दान प्रबंधन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें SIT की जांच रिपोर्ट और उससे सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।

अखिलेश जी उठ जाइए सुबह हो गई : राजभर

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए अपने पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव पर व्यंग्य करते हुए उन्हें चुनावी राजनीति में सक्रिय होने की सलाह दी और दादरी की रैली को लेकर भी निशाना साधा।

राजभर ने अपने पोस्ट की शुरुआत ‘गुड मॉर्निंग अखिलेश जी’ से करते हुए लिखा कि “उठ जाइए, सुबह हो चुकी है। कितना सोएंगे महाराज।” उन्होंने दावा किया कि दादरी में समाजवादी पार्टी की रैली अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी, जिसके बाद सपा नेतृत्व निराश हो गया है। उनका कहना था कि रैली के बाद अखिलेश यादव दूसरी जनसभा करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं और उनके करीबी भी इसी तरह की बातें बता रहे हैं।

कैबिनेट मंत्री ने आगे लिखा कि वह अखिलेश यादव को अपना राजनीतिक मित्र मानते हैं और इसी कारण उनकी चिंता भी करते हैं। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि चुनावी मैदान में उतरने के लिए केवल सोशल मीडिया या आरामदायक माहौल से काम नहीं चलेगा, बल्कि जनता के बीच जाकर संवाद करना होगा।

अपने बयान में राजभर ने समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल यादव और मुस्लिम मतदाताओं के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि सभी वर्गों का विश्वास हासिल किए बिना सत्ता तक पहुंचना संभव नहीं है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से ओम प्रकाश राजभर लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर हमलावर हैं। इससे पहले भी उन्होंने पिछड़े वर्गों, विशेषकर कुर्मी समाज के सम्मान और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर सपा नेतृत्व को घेरा था। वहीं समाजवादी पार्टी भी भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार पलटवार कर रही है।

जो इस पाप से जुड़ा है, उसे सजा जरूर दिलाएंगे : महंत नृत्यगोपाल दास

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अयोध्या। राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा/रामधन गबन प्रकरण पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति इस कथित अनियमितता या गबन का दोषी पाया जाता है तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

महंत नृत्य गोपाल दास ने लिखित बयान जारी करते हुए कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थल से जुड़ा कोई भी विवाद अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि मंदिर की गरिमा, पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से काम करेंगी और जो भी व्यक्ति इस कथित पाप या वित्तीय अनियमितता में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

महंत ने कहा कि इस संवेदनशील प्रकरण को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और तथ्य सामने आने के बाद दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर लगातार नए दावे और आरोप सामने आने के बीच महंत नृत्य गोपाल दास का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

प्रेम प्रसंग में नातिन ने प्रेमी संग रची दादा की हत्या की साजिश, फर्जी सुसाइड नोट से गुमराह करने की कोशिश नाकाम

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फिरोजाबाद
जिले के टूंडला थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदाबाद में 24 जून की रात 70 वर्षीय ब्रह्मऋषि का जला हुआ शव मिलने का सनसनीखेज मामला आखिरकार हत्या का निकला। प्रारंभिक जांच में पुलिस इसे आग लगने की दुर्घटना या शॉर्ट सर्किट का मामला मान रही थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, मृतक की नातिन रश्मि ने अपने प्रेमी विपिन के साथ मिलकर दादा की हत्या की साजिश रची थी। हत्या के बाद दोनों ने वारदात को हादसा और आत्महत्या का रूप देने की पूरी कोशिश की, लेकिन पुलिस की गहन जांच के आगे उनकी योजना विफल हो गई। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त चाकू और खून से सने कपड़े भी बरामद कर लिए हैं।

पुलिस क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार चौरसिया ने बताया कि रश्मि का शिकोहाबाद निवासी विपिन के साथ लंबे समय से प्रेम संबंध था और वह उसी से विवाह करना चाहती थी। लेकिन उसके दादा ब्रह्मऋषि इस रिश्ते के खिलाफ थे और उन्होंने उसकी शादी दूसरी जगह तय कर दी थी। परिवार ने 6 जुलाई को विवाह की तिथि भी निर्धारित कर दी थी। इस फैसले से नाराज रश्मि ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर दादा को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। तय योजना के अनुसार 24 जून की रात विपिन गांव पहुंचा और चारदीवारी वाले प्लॉट में सो रहे ब्रह्मऋषि पर चाकू से लगातार वार कर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद साक्ष्य मिटाने और घटना को दुर्घटना दर्शाने के उद्देश्य से उसने शव के ऊपर चारपाई और गद्दा रखकर आग लगा दी तथा मौके से फरार हो गया।

मामले की दिशा तब बदली जब पुलिस को परिजनों की ओर से एक कथित सुसाइड नोट सौंपा गया। शुरुआत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आग से मौत की बात सामने आई थी, लेकिन मृतक के गले पर मिले कट के निशानों और सुसाइड नोट की लिखावट ने पुलिस को संदेह में डाल दिया। फोरेंसिक और हस्तलेखन की जांच में सामने आया कि सुसाइड नोट मृतक ने नहीं, बल्कि उनकी नातिन रश्मि ने लिखा था। पूछताछ के दौरान रश्मि ने स्वीकार किया कि उसने दादा के नाम से फर्जी सुसाइड नोट तैयार किया था, जिसमें संपत्ति दोनों बेटों के बीच बराबर बांटने और अपनी मर्जी से नातिन की शादी कराने जैसी बातें लिखी गई थीं, ताकि पुलिस इसे आत्महत्या मानकर जांच बंद कर दे। पुलिस की सख्त पूछताछ में पूरा षड्यंत्र उजागर हो गया।

घटना का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी विपिन को बन्ना रोड स्थित टॉवर के पास से गिरफ्तार किया, जबकि रश्मि को उसके घर के बाहर से हिरासत में लिया गया। दोनों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू और वारदात के समय पहने गए खून से सने कपड़े भी बरामद किए गए हैं। मृतक की पत्नी की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पारिवारिक संवाद और सामाजिक मूल्यों के कमजोर पड़ने से रिश्तों में अविश्वास और अपराध किस हद तक बढ़ते जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और सभी साक्ष्यों को अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।