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Monday, January 12, 2026
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कुशीनगर में शराबी ने मां और पत्नी की बेरहमी से हत्या, आरोपी गिरफ्तार

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कुशीनगर: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर (Kushinagar) जिले में एक चौंकाने वाली दोहरी हत्या (double murder) ने पूरे जिले को दहला दिया है। पुलिस ने सोमवार को बताया कि शराब के नशे में धुत एक 30 वर्षीय व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी बुजुर्ग मां और पत्नी के सिर पर लोहे की भारी वस्तु से बेरहमी से वार करके उनकी हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, यह घटना अहिराउली बाजार क्षेत्र के परसा गांव में हुई। आरोपी की पहचान सिकंदर गुप्ता के रूप में हुई है, जो शराब का आदी बताया जा रहा है।

रविवार शाम को वह नशे में धुत होकर घर लौटा, जिसके बाद उसकी मां रूना देवी ने उसे डांटा। इसके बाद उसकी मां और 28 वर्षीय पत्नी प्रियंका के साथ तीखी बहस हुई। सोमवार सुबह सिकंदर अपने कमरे में चुपचाप बैठा रहा। उसकी पत्नी रसोई में खाना बना रही थी, जबकि उसकी मां छत पर धूप का आनंद ले रही थी। सुबह करीब 8 बजे सिकंदर छत पर गया, मच्छरदानी के लिए इस्तेमाल होने वाले लोहे की छड़ों से जड़े एक भारी खंभे को उठाया और अपनी मां पर हमला कर दिया। उसने मां के सिर पर बार-बार वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

चीखें सुनकर प्रियंका छत पर दौड़ी। जब उसने भयानक दृश्य देखकर नीचे भागने की कोशिश की, तो सिकंदर ने उस पर भी हमला कर दिया और उसी वस्तु से उसका सिर कुचल दिया, जिससे उसकी भी तुरंत मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हत्याएं करने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर मृतका के सिर से मांस के टुकड़े निकालकर आस-पास के घरों में फेंक दिए, जिससे गांव में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने तुरंत ग्राम प्रधान को सूचना दी, जिन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन और आपातकालीन नंबर डायल-112 के माध्यम से पुलिस को सूचित किया।

सर्किल अधिकारी कुंदन कुमार सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और एक फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का मुआयना किया। खून से सना हथियार बरामद किया गया और फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए गए। पुलिस ने बताया कि परिवार में केवल तीन सदस्य थे। सिकंदर के पिता की छह साल पहले बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद घर की जिम्मेदारी उस पर आ गई थी। हालांकि वह दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करता था और उसके पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा था, लेकिन बताया जाता है कि वर्षों से उसकी शराब की लत बढ़ती जा रही थी, जिसके कारण अक्सर घरेलू झगड़े होते थे।

ग्रामीणों ने बताया कि सिकंदर की शराब की लत पिछले कुछ वर्षों में और भी गंभीर हो गई थी, जिसके कारण उसके अपनी मां और पत्नी के साथ अक्सर झगड़े होते थे। प्रियंका से उसकी शादी पांच साल पहले तय हुई थी। दंपति की कोई संतान नहीं थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ वर्मा ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है।

स्वामी विवेकानंद की स्मृति में रतनपुर पामरान में युवा दिवस का आयोजन

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राजेपुर: युवा कल्याण विभाग (Youth Welfare Department) द्वारा रतनपुर पामरान, राजेपुर स्थित एसआरआरएस पब्लिक स्कूल में स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) की स्मृति में युवा दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं तथा शिक्षकगण उपस्थित रहे। आयोजन क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी जीतू के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक रामकृपाल एवं प्रधानाचार्य राममूर्ति कुशवाह भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, उनके आदर्शों और युवाओं के प्रति दिए गए प्रेरक संदेशों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं को आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। आयोजन से विद्यार्थियों में उत्साह और जागरूकता देखने को मिली तथा कार्यक्रम प्रेरणादायक माहौल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कलेक्ट्रेट सभागार में राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन, स्वामी विवेकानंद जी को श्रद्धांजलि; अभियोजन कार्यों व NCORD समिति की हुई समीक्षा

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फर्रुखाबाद: भारतीय ज्ञान-परंपरा के ध्वजवाहक, विश्व मंच पर सनातन संस्कृति को पुनर्स्थापित करने वाले राष्ट्रप्रेरक युवा संन्यासी स्वामी विवेकानंद जी (Swami Vivekananda) की जयंती के अवसर पर कलेक्ट्रेट सभागार (Collectorate auditorium) में राष्ट्रीय युवा दिवस गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी एवं पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानंद जी के विचारों और आदर्शों को स्मरण करते हुए उनके चित्र पर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका मार्गदर्शक है। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों को अपनाकर देश व समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के उपरांत जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा समस्त क्षेत्राधिकारियों एवं अभियोजन अधिकारियों के साथ अभियोजन कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में लंबित मामलों, प्रभावी पैरवी, समयबद्ध निस्तारण एवं न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही NCORD समिति (नारकोटिक्स कंट्रोल एवं ड्रग दुरुपयोग रोकथाम) के संबंध में एक गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें मादक पदार्थों की रोकथाम, जागरूकता अभियान तथा आपसी समन्वय को लेकर गहन चर्चा की गई। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए समाज में जागरूकता बढ़ाई जाए।

बैठक के दौरान अधिकारियों से कहा गया कि वे शासन की मंशा के अनुरूप कार्य करते हुए कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखें तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए निरंतर प्रयास करें। कार्यक्रम राष्ट्रप्रेम, युवा चेतना और प्रशासनिक सक्रियता के संदेश के साथ संपन्न हुआ।

राष्ट्रीय युवा दिवस 2027: आयोजन संपन्न, अब आत्ममंथन का समय

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भरत चतुर्वेदी

देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस 2027 (National Youth Day) का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। प्रतिवर्ष 12 जनवरी को महान विचारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) की जयंती पर मनाया जाने वाला यह दिवस इस बार भी पूरे उत्साह और व्यापक सहभागिता के साथ मनाया गया। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और सरकारी संस्थानों में विविध कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनका उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करना था।

इस वर्ष युवा दिवस के अवसर पर विचार गोष्ठियाँ, युवा संवाद, निबंध व भाषण प्रतियोगिताएँ, खेलकूद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और सामाजिक सेवा गतिविधियाँ आयोजित की गईं। अनेक स्थानों पर युवाओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों—आत्मविश्वास, अनुशासन, साहस और सेवा—को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। डिजिटल माध्यमों पर भी युवा दिवस को लेकर खास सक्रियता देखने को मिली, जहाँ युवाओं ने अपने विचार साझा किए।

युवा दिवस के मंचों से युवाओं को आगे बढ़ने, आत्मनिर्भर बनने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने के संदेश दिए गए। हालांकि, आयोजनों के बाद यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या ये संदेश केवल भाषणों तक सीमित रह गए, या वास्तव में नीति और व्यवस्था में उनका प्रभाव दिखाई देगा। बेरोजगारी, शिक्षा की गुणवत्ता, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे आज भी युवाओं की प्रमुख चिंताएँ बने हुए हैं।

आत्ममंथन की आवश्यकता

युवा दिवस के आयोजन युवाओं में ऊर्जा और प्रेरणा भरते हैं, लेकिन इनके बाद ठोस कार्ययोजनाओं की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, शिक्षण संस्थान और समाज मिलकर युवाओं के लिए रोजगारोन्मुखी शिक्षा, कौशल विकास और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन पर गंभीरता से काम करें, तभी युवा दिवस का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।

राष्ट्रीय युवा दिवस की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब साल भर युवाओं की समस्याओं और संभावनाओं पर निरंतर काम हो। केवल एक दिन के आयोजन के बजाय इसे एक सतत अभियान के रूप में देखा जाना चाहिए। विवेकानंद के विचारों को यदि व्यवहार में उतारा जाए, तो युवा शक्ति देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सक्षम है।

राष्ट्रीय युवा दिवस 2027 के आयोजन पूरे होने के बाद अब देश के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि युवाओं से किए गए वादे और दिए गए संदेश किस हद तक ज़मीनी स्तर पर उतर पाएँगे। हर मंच से युवाओं को राष्ट्र की धुरी बताया गया, लेकिन उनकी वास्तविक समस्याओं—रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसर—पर ठोस समाधान अभी भी अपेक्षित हैं।

युवा आज केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि अवसर चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी प्रतिभा को पहचान मिले और मेहनत का उचित परिणाम प्राप्त हो। यदि पुरस्कार, भर्ती और योजनाओं में पारदर्शिता नहीं होगी, तो ऐसे आयोजनों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। समाज की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। परिवार, शिक्षण संस्थान और सामाजिक संगठन यदि युवाओं को केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग और संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाएँ, तो एक संतुलित सामाजिक वातावरण बन सकता है।

अंततः, राष्ट्रीय युवा दिवस का संदेश यही है कि युवा केवल भविष्य नहीं, वर्तमान हैं। यदि उनके विचारों और समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और नीति-निर्माण में उन्हें भागीदार बनाया जाए, तभी यह दिवस वास्तव में सार्थक कहलाएगा।

सामाजिक व्यवस्था: समाज की रीढ़ और भविष्य की दिशा. संदीप सक्सेना

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किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी सामाजिक व्यवस्था (Social order) से होती है। सामाजिक व्यवस्था वह अदृश्य ढांचा है, जो व्यक्ति, परिवार, समुदाय और राष्ट्र (community and nation) को आपस में जोड़कर संतुलन बनाए रखता है। यही व्यवस्था यह तय करती है कि समाज में अधिकार और कर्तव्य कैसे निभाए जाएंगे, कमजोर वर्गों की सुरक्षा कैसे होगी और विकास का लाभ सब तक कैसे पहुँचेगा।

भारतीय संदर्भ में सामाजिक व्यवस्था केवल कानूनों और नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परंपरा, संस्कृति, नैतिकता और सामूहिक जिम्मेदारी से भी गहराई से जुड़ी हुई है। भारत की सामाजिक संरचना विविधताओं से भरी है, जहाँ जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीय पहचान के बावजूद “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना समाज को एक सूत्र में बाँधने का प्रयास करती रही है।

एक मजबूत सामाजिक व्यवस्था की नींव समानता, न्याय और सहभागिता पर टिकी होती है। जब समाज में सभी को समान अवसर मिलते हैं और निर्णय प्रक्रिया में जनभागीदारी होती है, तब सामाजिक संतुलन बना रहता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं तक समान पहुँच सामाजिक व्यवस्था को सशक्त बनाती है।

परिवार इस व्यवस्था की पहली पाठशाला होता है, जहाँ से व्यक्ति संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी सीखता है। इसके बाद विद्यालय, सामाजिक संस्थाएँ और शासन व्यवस्था मिलकर व्यक्ति को एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में गढ़ते हैं। आज की सामाजिक व्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। बढ़ती आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, सामाजिक भेदभाव, और डिजिटल युग में बढ़ती एकाकी प्रवृत्ति ने सामूहिकता की भावना को कमजोर किया है। सोशल मीडिया ने जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है, वहीं नफरत, अफवाह और ध्रुवीकरण को भी बढ़ावा दिया है, जो सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा रहा है।

युवाओं की भूमिका

समाज को दिशा देने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवा यदि केवल अपने व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रहकर सामाजिक सरोकारों से जुड़ें, तो व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। स्वामी विवेकानंद का यह विचार आज भी प्रासंगिक है कि “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।” सामाजिक सेवा, जागरूकता अभियान और रचनात्मक सोच के माध्यम से युवा सामाजिक व्यवस्था को नई ऊर्जा दे सकते हैं।

एक सशक्त सामाजिक व्यवस्था के लिए जरूरी है कि शासन पारदर्शी और जवाबदेह हो, समाज संवेदनशील बने और व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहे। केवल अधिकारों की मांग नहीं, बल्कि कर्तव्यों का निर्वहन ही सामाजिक संतुलन को बनाए रखता है। अंततः, सामाजिक व्यवस्था कोई स्थिर संरचना नहीं है, बल्कि यह समय के साथ विकसित होने वाली प्रक्रिया है। यदि इसमें मानवीय मूल्यों, समानता और न्याय को केंद्र में रखा जाए, तो यही व्यवस्था समाज को स्थिरता, शांति और प्रगति की ओर ले जाने वाली सबसे मजबूत शक्ति बन सकती है।

हिमाचल प्रदेश: सोलन के अर्की बाजार में लगी भीषण आग, चार वर्षीय बच्चे की जलकर मौत, नौ लापता

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सोलन: हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सोलन (Solan) जिले में जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर अर्की कस्बे के लोअर बाजार इलाके में रविवार रात एक निजी इमारत में भीषण आग लग गई, जिसमें कम से कम नौ लोगों के जिंदा जलने की आशंका है। राहत कार्यों में जुटे बचाव दल ने बिहार के प्रवासी मजदूरों के चार वर्षीय बच्चे प्रियांश का शव बरामद कर लिया है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि अर्की बाजार में स्थित एक दो मंजिला पुरानी आवासीय-सह-व्यावसायिक इमारत में आग लगभग 2.45 बजे लगी। इमारत के भूतल पर कई दुकानें थीं, जबकि ऊपरी मंजिल का उपयोग नेपाल और बिहार के मजदूरों के रहने के लिए किया जा रहा था। आग तेजी से फैल गई और दमकल कर्मियों और स्थानीय निवासियों के घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही आसपास की दुकानों और इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया।

इमारत और आसपास की दुकानों में रखे चार से पांच एलपीजी सिलेंडर एक के बाद एक फटने से स्थिति और भी गंभीर हो गई, जिससे आग और भी भड़क उठी। बाजार क्षेत्र में तेज धमाकों की आवाज गूंज उठी, जिससे चारों ओर दहशत फैल गई और लोग अंधेरे में अपने घरों से बाहर निकलकर अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे।

दमकल गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए पुरजोर मशक्कत की। तमाम कोशिशों के बाद आखिरकार तड़के आग पर काबू पा लिया गया। हालांकि, तब तक लकड़ी से बनी पूरी पुरानी इमारत राख में तब्दील हो चुकी थी और साथ ही लाखों रुपये का सामान भी जलकर राख हो गया था।
इस त्रासदी पर गहरी संवेदना और दुख व्यक्त करते हुए, अरकी के मौजूदा कांग्रेस विधायक संजय अवस्थी, जो स्वयं राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे थे, ने यूएनआई को बताया कि लापता नौ लोगों की तलाश जारी है, जिनमें से अधिकतर नेपाल के हैं। उन्होंने कहा कि बचाव कार्य में आसानी हो और आगे किसी के हताहत होने की आशंका को खत्म करने के लिए मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया जा रहा है।

इस बीच, सोलन के उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने अरकी उपमंडल प्रशासन को सोमवार सुबह अरकी बाजार में लगी आग में राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि अरकी अग्निशमन विभाग के दमकल वाहनों के साथ-साथ शिमला जिले के बालूगंज, सोलन जिले के बनलागी और अंबुजा सीमेंट कंपनी के दमकल वाहनों को तुरंत घटनास्थल पर भेजा गया था।

शर्मा ने बताया कि पुरानी इमारत लकड़ी की बनी थी, जिससे आग तेजी से फैल गई। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवार को तत्काल सहायता प्रदान की गई है। डीसी ने बताया कि आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश भी दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि आग में घायल हुए दो लोगों का इलाज अर्की स्थित सिविल अस्पताल में चल रहा है। स्थानीय प्रशासन को उन्हें पर्याप्त सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।

डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर राहुल जैन और प्रशासन एवं पुलिस की एक टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई है। यह टीम पीड़ितों को कपड़े और अन्य सहायता प्रदान करेगी। शर्मा ने बताया कि लगभग नौ लापता लोगों की तलाश जारी है। इस बीच, स्वास्थ्य मंत्री डीआर शांडिल और शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप ने भी इस भीषण आग दुर्घटना पर शोक और दुख व्यक्त किया है, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं।