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Thursday, July 9, 2026
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भारत में लॉन्च हुआ Awiqli, डायबिटीज मरीजों को अब रोज नहीं, हफ्ते में एक बार लगेगा इंसुलिन इंजेक्शन

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नई दिल्ली: डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) (insulin icodec) लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार, यह देश का पहला सप्ताह में एक बार दिया जाने वाला बेसल इंसुलिन है, जिसे टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के वयस्क मरीजों के लिए विकसित किया गया है। इसके इस्तेमाल से रोजाना इंसुलिन लेने की जरूरत घटकर साल में सिर्फ 52 इंजेक्शन रह जाएगी।

कंपनी का कहना है कि रोजाना इंजेक्शन लगाने के डर और असुविधा के कारण कई मरीज इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में 7 से 9 साल तक की देरी कर देते हैं। Awiqli का उद्देश्य इस बाधा को कम करना, उपचार को आसान बनाना और मरीजों की दवा लेने की नियमितता (Adherence) बढ़ाना है।

कीमत और उपलब्धता

Awiqli दो वेरिएंट में उपलब्ध होगा—

  • 1 ml (700 यूनिट) FlexTouch पेन: ₹2,611
  • 3 ml (2,100 यूनिट) FlexTouch पेन: ₹7,833

700 यूनिट वाले पेन की लागत ₹3.73 प्रति यूनिट पड़ती है। यदि किसी मरीज को प्रतिदिन 10 यूनिट इंसुलिन की जरूरत है, तो सप्ताह में 70 यूनिट की खुराक पर खर्च करीब ₹261 होगा। कंपनी के मुताबिक यह मौजूदा दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में 30-40% तक सस्ता है।

नोवो नॉर्डिस्क ने बताया कि ONWARDS-1 क्लिनिकल प्रोग्राम के आंकड़ों के अनुसार, Awiqli ने दैनिक इंसुलिन ग्लार्जिन U100 की तुलना में HbA1c कम करने और ब्लड शुगर को लक्ष्य सीमा में बनाए रखने में बेहतर प्रदर्शन किया। कंपनी का दावा है कि टाइप-2 डायबिटीज के अधिक मरीज हाइपोग्लाइसीमिया के बिना HbA1c को 7% से नीचे लाने में सफल रहे।

भारत में 10.1 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज और 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज से प्रभावित हैं। वहीं, 9 लाख से अधिक टाइप-1 डायबिटीज मरीजों के लिए इंसुलिन जीवनभर का प्रमुख उपचार है, जबकि टाइप-2 डायबिटीज के लगभग 10% मरीजों को भी इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है।

 

चीन की जूता फैक्ट्री में लगी भीषण आग, 28 लोगों की मौत

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फुजियान: चीन (China) के फुजियान प्रांत के जिनजियांग शहर (Jinjiang City) में गुरुवार 9 जुलाई 2026 में हुईतेंग शूज फैक्टरी में लगी भीषण आग में कम से कम 28 लोगों की मौत हो गई। इमरजेंसी में सैकड़ों फायरफाइटर को तैनात किया गया और क्रू घंटों तक आग बुझाने में लगा रहा। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार जारी वीडियो में फैक्ट्री भवन से ऊंची-ऊंची लपटें उठती दिखाई दे रही हैं, जिससे थोड़ी ही देर में आसमान में काला धुआं छा गया।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुर्घटना के कारण की जल्द से जल्द पहचान की जानी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, आग आज दोपहर करीब 12.04 बजे जिनजियांग शहर के चेंडाई टाउनशिप के जियांगटौ गांव में काइतुओ रोड ईस्ट पर हुईतेंग शूज फैक्टरी में लगी। लोग कुछ समझ पाते इससे पहले ही आग ने बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज और भयावह थी की कुछ ही देर में घना काला धुआं आसमान में छा गया।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बिना कोई सटीक संख्या बताए ‘भारी जान-माल के नुकसान’ की बात कही है। शी जिनपिंग ने कहा, दुर्घटना के कारण की जल्द से जल्द पहचान की जानी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। CCTV द्वारा जारी किए गए वीडियो में कई मंजिला फैक्ट्री आग की लपटों में घिरी हुई और आसमान में घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दिया। आग में फंसे कई लोग छत पर दिखाई दिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, 9 जुलाई को पूर्वी चीन में जूतों की एक फैक्ट्री में लगी आग से कम से कम 28 लोगों की मौत हो गई है। फायर और रेस्क्यू टीमों ने 183 लोगों और 35 गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा। स्थानीय अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि आग फैक्ट्री की ग्राउंड फ्लोर पर लगी थी।

अयोध्या से दर्शन कर लौट रहे भाई-बहन की सड़क हादसे में मौत

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प्रतापगढ़: प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे (road accident) ने जिले के मुंगराबादशाहपुर के एक परिवार की खुशियां छीन ली। अयोध्या धाम (Ayodhya Dham) से दर्शन कर लौट रहे परिवार की वैगनआर कार पिकअप वाहन से टकरा गई। टक्कर के बाद पिकअप कार के ऊपर पलट गई जिससे कार में बैठे सगे भाई-बहन की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के समय पीछे चल रही दूसरी कार में मौजूद परिजन कुछ ही दूरी से यह मंजर देखते रह गए।

मृतकों की पहचान नईगंज निवासी 25 वर्षीय आकाश सोनी और उनकी 22 वर्षीय बहन प्रिया सोनी उर्फ रोली के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से गोंडा जिले के मनकापुर के रहने वाले थे। माता-पिता के निधन के बाद पिछले तीन वर्षों से वे अपनी बहन और जीजा मनीष सोनी के साथ मुंगराबादशाहपुर में रह रहे थे।मंगलवार को पूरा परिवार दो कारों से अयोध्या दर्शन के लिए रवाना हुआ था। दर्शन के बाद बुधवार रात सभी वापस लौट रहे थे। आगे चल रही वैगनआर में आकाश प्रिया और चालक मोहित सोनी निवासी मोहल्ला कटरा सवार थे जबकि पीछे दूसरी कार में मनीष सोनी अपनी पत्नी दीपा सोनी तथा बच्चों शौर्य, शिवाय और श्याम के साथ चल रहे थे।

रात करीब एक बजे रानीगंज क्षेत्र स्थित सरकारी अस्पताल के समीप वैगनआर की पिकअप से जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप वाहन पलटकर कार के ऊपर जा गिरा। हादसे में कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।आकाश और प्रिया ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जबकि चालक मोहित सोनी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।पीछे आ रहे परिजन तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से राहत कार्य शुरू किया।

सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। काफी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।घटना की सूचना मिलते ही मुंगराबादशाहपुर स्थित मृतकों के आवास पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। पूरे मोहल्ले में मातम पसरा है।मुंगराबादशाहपुर थानाध्यक्ष अश्विनी दूबे ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया है। पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं रानीगंज पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच में जुटी है।

 

नवाबगंज के सीएचसी में एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव ने औचक निरीक्षण किया

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नवाबगंज: नवाबगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में गुरुवार को एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने टीकाकरण व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं और रजिस्टरों में मिलान करने पर भी कुछ नामों में असंगति पाई गई। लापरवाही मिलने पर एक एएनएम को टीकाकरण कार्य से हटाने के निर्देश दिए गए। एसीएमओ ने लेबर रूम, प्रसव वार्ड, टीकाकरण व्यवस्था और विभिन्न रजिस्टरों की गहन जांच की। टीकाकरण कक्ष में उन्होंने एएनएम आरती से संबंधित जानकारी मांगी, लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं। इस पर एसीएमओ ने एएनएम आरती को फटकार लगाई।
इसके बाद एसीएमओ लेबर रूम वार्ड पहुंचे, जहां उन्होंने भर्ती प्रसूता रोशनी से जानकारी ली। उन्होंने रोशनी का आधार कार्ड देखा और टीकाकरण की स्थिति के बारे में पूछताछ की। इस दौरान आशा कार्यकर्ता को बुलाया गया और एएनएम नीलम चौधरी से भी संबंधित जानकारी ली गई। जांच में पता चला कि रोशनी का टीकाकरण अभी होना शेष था। एसीएमओ ने एएनएम आरती से टीकाकरण, खून की जांच और प्रसव संबंधी अभिलेखों की जानकारी मांगी। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने एएनएम को फिर फटकार लगाई। निरीक्षण के दौरान रजिस्टर में कुछ नाम नही दर्ज पाए जाने पर एसीएमओ ने नाराजगी जताई और संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा। प्रसव से संबंधित अभिलेखों की जांच के दौरान भी मास्टर रजिस्टर से नामों का मिलान नहीं हुआ। अस्पताल में हुई विभिन्न जांचों के रिकॉर्ड और रजिस्टर का मिलान करने पर भी कुछ नामों में असंगति पाई गई। एसीएमओ ने नवजात की बाल आईडी बनवाई और एमसीडी कार्ड में जानकारी भरी। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. लोकेश शर्मा से पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद एसीएमओ ने एएनएम आरती को टीकाकरण कार्य से हटाने के निर्देश प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. लोकेश शर्मा को दिए।एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव ने बताया कि निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां सामने आई हैं, उन्हें तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं और अभिलेखों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अज्ञात चोर घर के पास बंधी भैंस को चोरी कर ले गए

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नवाबगंज। थाना क्षेत्र के गांव दरियापुर हीरामन निवासी सेवरमती पत्नी दिनेश बुधवार रात खाना खाकर परिजनों के साथ सो रही थी। रात किसी समय अज्ञात चोर घर के पास बंधी भैंस को चोरी कर ले गए। सुबह जब सेवरमती कि आंख खुली तो उन्हें घर के बाहर बंधी भैंस गायब मिली। सेवरमती ने परिजनों के साथ भैंस को ढूढने का काफी प्रयास किया। लेकिन भैंस नहीं मिल सकी। थाना पुलिस को सेवरमती पत्नी दिनेश ने अज्ञात चोरों के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने जांच कर कार्यवाही का भरोसा दिया।

परंपरा साबित हुए बिना ‘घर-दामाद’ नहीं बन सकता संपत्ति का वारिस : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के उरांव आदिवासी समुदाय से जुड़े एक महत्वपूर्ण संपत्ति विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल ‘घर-दामाद’ के रूप में स्वीकार किए जाने से किसी व्यक्ति को संपत्ति का कानूनी उत्तराधिकारी नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि ऐसी परंपरा का दावा किया जाता है तो उसे ठोस साक्ष्यों के साथ साबित करना आवश्यक होगा।

जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी प्रथा या परंपरा का लाभ लेने का दावा करने वाले पक्ष पर उसे प्रमाणित करने की जिम्मेदारी होती है। अदालत ने माना कि इस मामले में प्रतिवादी यह साबित करने में असफल रहे कि उरांव समुदाय में भतीजी के पति को ‘घर-दामाद’ बनाकर उत्तराधिकारी बनाने की कोई मान्य परंपरा मौजूद है।

मामला झारखंड के उरांव परिवार की पैतृक संपत्ति से जुड़ा था। प्रतिवादियों का दावा था कि संतानहीन लेदुरा उरांव ने अपनी भतीजी के पति पुनाई उरांव को घर-दामाद के रूप में स्वीकार कर उत्तराधिकारी बनाया था। वहीं याचिकाकर्ता बेजला उरांव ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा कि ऐसी कोई स्थापित परंपरा नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों का दावा खारिज करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट, प्रथम अपीलीय अदालत और झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व फैसलों को भी निरस्त कर दिया।

इस फैसले को संपत्ति उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि केवल सामाजिक या पारिवारिक दावे के आधार पर उत्तराधिकार का अधिकार नहीं मिल सकता, बल्कि संबंधित परंपरा का विधिक रूप से प्रमाणित होना आवश्यक है।