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Monday, April 27, 2026
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ललितपुर में तूफान से गिरी दीवार, महिला की मौत, पति घायल

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ललितपुर: उत्तर प्रदेश के ललितपुर (Lalitpur) जिले में आज सोमवार को अचानक आए तूफान (storm) के दौरान एक मिट्टी के घर की दीवार गिरने से 45 वर्षीय महिला की मौत हो गई और उसका पति गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना तालबेहट पुलिस थाना क्षेत्र के चुरावनी गांव में हुई।

खबरों के मुताबिक, मेघराज (55) और उनकी पत्नी अहिल्या (45) अपने घर के अंदर काम कर रहे थे जब हल्की बारिश शुरू हुई। दंपति अपना काम जारी रखने के लिए घर के बाहर बने मिट्टी के अस्थायी आश्रय में चले गए।

हालांकि, तेज हवा के झोंके ने इलाके में दस्तक दी, जिससे उनके मिट्टी के ढांचे की एक दीवार गिर गई। दोनों मलबे के नीचे दब गए। उनकी चीखें सुनकर परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे और उन्हें मलबे से बाहर निकाला और पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गए।

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने अहिल्या को मृत घोषित कर दिया। मेघराज गंभीर रूप से घायल हो गया था, उसे प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए झांसी के एक मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

शादी की दावत बनी हादसा, 100 से अधिक लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार

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उत्तर प्रदेश के संभल जिले के थाना रजपुरा क्षेत्र के गांव मोलनपुर डांडा में एक शादी समारोह के बाद बड़ा फूड प्वाइजनिंग का मामला सामने आया है। शादी में बनी लौकी की लौज (बर्फी) खाने के बाद करीब 15 बच्चों समेत 100 से अधिक लोग बीमार हो गए, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार, वीरपाल की बेटी की शादी में सिंघोला दौलत सिंह गांव से बारात आई थी। रविवार देर रात दावत का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 300 से 400 लोगों ने भोजन किया। भोजन के कुछ घंटों बाद ही कई लोगों को बेचैनी और पेट दर्द की शिकायत होने लगी, जिसे शुरुआत में गर्मी की वजह मानकर नजरअंदाज किया गया।

सोमवार दोपहर तक स्थिति गंभीर हो गई और बड़ी संख्या में लोगों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी। इसके बाद परिजन बीमार लोगों को तुरंत अलग-अलग निजी अस्पतालों में ले गए, जहां उनका इलाज किया गया। डॉक्टरों के अनुसार सभी मरीजों की हालत अब स्थिर है।

इलाज कर रहे डॉक्टरों ने प्रारंभिक तौर पर बताया कि मरीजों में डिहाइड्रेशन की समस्या पाई गई है, जो संभवतः मिठाई या भोजन में गड़बड़ी के कारण हुई हो सकती है। हालांकि, बीमारी की असली वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

घटना की सूचना मिलते ही खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम गांव पहुंची। मुख्य खाद्य अधिकारी राहुल सिंह और खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर शादी में बनी लौकी की लौज के सैंपल लिए और उन्हें जांच के लिए लैब भेज दिया।

एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने से गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है। फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा का प्रदर्शन, विपक्ष का पुतला फूंका

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उत्तर प्रदेश के संभल जिले के चंदौसी क्षेत्र में सोमवार शाम भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विपक्ष के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। यह विरोध प्रदर्शन बदायूं-मुरादाबाद रोड स्थित ब्लॉक बनियाखेड़ा के सामने किया गया।

कार्यक्रम के दौरान भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी सत्यपाल सिंह सैनी ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल को रोककर नारी शक्ति का अपमान किया है। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज महिलाओं के अधिकारों की बात कर रहे हैं, उन्होंने अपने शासनकाल में हमेशा महिलाओं की अनदेखी की है। वहीं भाजपा सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अवसरों को प्राथमिकता दी है।

कार्यक्रम में महिला मोर्चा पश्चिम की क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मोनिका पंडिता, विधायक एवं शिक्षामंत्री गुलाब देवी और जिलाध्यक्ष चौधरी हरेंद्र सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने भाजपा सरकार की नीतियों को महिलाओं के हित में बताया और इसे समाज में सकारात्मक बदलाव का आधार बताया।

मोनिका पंडिता ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और सरकार की विभिन्न योजनाओं से उन्हें नया मंच मिला है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाएं।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और महिला सशक्तिकरण के समर्थन में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

गंगा एक्सप्रेस-वे उद्घाटन से पहले संभल में कड़ा सुरक्षा घेरा, पुलिस के नियंत्रण में 38.6 किमी हिस्सा

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उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे के 594 किलोमीटर लंबे हिस्से का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल को हरदोई में किए जाने की तैयारी है। इससे पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कई हिस्सों पर सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह सख्त कर दिया गया है।

संभल जिले में एक्सप्रेस-वे का 38.6 किलोमीटर हिस्सा पुलिस के पूर्ण नियंत्रण में ले लिया गया है। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि उद्घाटन समारोह पूरा होने तक इस मार्ग पर किसी भी वाहन के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत एक्सप्रेस-वे पर वाहनों के लिए गति सीमा भी निर्धारित की गई है। हल्के वाहनों के लिए अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा तय की गई है। इसके अलावा दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है और ओवर-स्पीडिंग पर स्वचालित कैमरों के जरिए चालान की व्यवस्था की गई है।

संभल जिले में यह एक्सप्रेस-वे 92 से 131 चैनेज के बीच आता है, जिसके लिए 31 गांवों की भूमि अधिग्रहित की गई है। जिले के अचलपुर गांव में लहरावन कट के पास 29 अप्रैल को स्थानीय उद्घाटन समारोह भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें 5,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है और इसके लिए जर्मन हैंगर लगाया जा रहा है।

इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के होमगार्ड एवं राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति भी शामिल होंगे। प्रशासन का कहना है कि इस एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक गलियारे के विकास की योजना है, जिसके लिए चार गांवों में 239 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की जा चुकी है, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पीएम मोदी की रैली को लेकर तैयारियां तेज, क्षेत्रीय अध्यक्ष ने की समीक्षा

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उत्तर प्रदेश के हरदोई में भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित रैली को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार देर शाम भाजपा जिला कार्यालय में क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलेश मिश्रा ने अंतिम तैयारियों की समीक्षा करते हुए रैली प्रभारियों के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक की।

बैठक के दौरान अध्यक्ष ने भीड़ प्रबंधन, जनसंपर्क और सुरक्षा व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत जानकारी ली। रैली की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने मॉनिटरिंग टीम को अगले 48 घंटों तक विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।

उन्होंने सभी संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान बेहद जरूरी है। इससे संभावित समस्याओं को समय रहते हल किया जा सकेगा और कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न होगा।

क्षेत्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं और रैली को सफल बनाने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुटें। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम संगठन की ताकत और जनसमर्थन को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

वर्चुअल बैठक में जिला पदाधिकारी, विधानसभा रैली संयोजक, मंडल अध्यक्ष और मॉनिटरिंग टीम के सदस्य शामिल रहे। बैठक के अंत में सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री की रैली को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का संकल्प दोहराया।

असम-बंगाल चुनाव में CM योगी का मैराथन प्रचार, 27 सभाओं से साधे हर वर्ग के मतदाता

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लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असम और वेस्ट बंगाल में चुनावी अभियान के दौरान जबरदस्त सक्रियता दिखाते हुए कुल 27 जनसभाएं और रोड शो किए। उनके इस दौरे को भाजपा की व्यापक चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं को साधने की कोशिश की गई।
मुख्यमंत्री योगी ने अपने प्रचार अभियान की शुरुआत असम के सोनितपुर (बरछला) और बारपेटा क्षेत्रों से की, जहां शुरुआती सभाओं के जरिए माहौल तैयार किया गया। इसके बाद 12 अप्रैल से पश्चिम बंगाल में प्रचार ने रफ्तार पकड़ी। पूर्व मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पश्चिम बर्धमान और वीरभूम जैसे जिलों में लगातार जनसभाएं कर उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया।
चुनावी रणनीति के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति आरक्षित सीटों पर विशेष फोकस रखा गया। साथ ही शहरी मतदाताओं के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच बनाकर व्यापक जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की गई। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ का यह मैराथन दौरा भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने और विभिन्न वर्गों को एकजुट करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
चुनाव के इस अहम दौर में मुख्यमंत्री के लगातार जनसंपर्क और आक्रामक प्रचार अभियान ने असम और पश्चिम बंगाल की सियासत को और भी गर्मा दिया है। अब देखना यह होगा कि इस व्यापक प्रचार का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है।