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Saturday, July 18, 2026
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भाजपा के राज में सनातन, युवा, महिलाएं और पीडीए सभी पीड़ित : अखिलेश

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अलग-अलग वर्गों का उत्पीड़न कर रही है और इसे “उत्पीड़न की हैट्रिक” बताया।

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि शंकराचार्य के कथित अपमान और मंदिर में हुई चोरी की घटनाओं से सनातन समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। वहीं शिक्षा व्यवस्था में धांधली, भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं से युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही एक मृतक की मां के कथित अपमान का उल्लेख करते हुए उन्होंने महिलाओं के सम्मान पर भी सवाल उठाए।

सपा प्रमुख ने आगे आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पुलिस कार्रवाई, बुलडोजर अभियान और एनकाउंटर की नीति के जरिए अपनी जाति विशेष को छोड़कर अन्य सभी PDA (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) वर्गों का उत्पीड़न कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का समान रूप से पालन होना चाहिए और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

अखिलेश यादव की इस पोस्ट के बाद प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। विपक्ष सरकार पर लगातार कानून-व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा इन आरोपों को पहले भी राजनीतिक और निराधार बता चुकी है।

आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय पर चलेगा बुलडोजर

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विकास प्राधिकरण का बड़ा एक्शन, अवैध निर्माण ध्वस्त करने का आदेश

रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय परिसर में किए गए कई निर्माण कार्यों को स्वीकृत मानचित्र और भवन निर्माण नियमों के विपरीत बताते हुए अवैध घोषित किया है। आदेश के बाद विश्वविद्यालय परिसर पर बुलडोजर कार्रवाई की संभावना तेज हो गई है, जिससे पूरे प्रदेश में इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है।

प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में कई भवन और अन्य निर्माण बिना विधिवत स्वीकृत नक्शे एवं आवश्यक अनुमति के तैयार किए गए। इस संबंध में लंबे समय से जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद विकास प्राधिकरण ने अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश पारित कर दिया।

जांच में सामने आई नियमों की अनदेखी

रामपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित भवन उपविधियों और विकास प्राधिकरण के नियमों का पालन करने में विफल रहा। जांच के दौरान कई निर्माण स्वीकृत मानचित्र से अलग पाए गए। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया गया।

डीएम ने की कार्रवाई की पुष्टि

रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने ध्वस्तीकरण आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि नियमों के विपरीत किए गए निर्माण पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन सभी मामलों में समान रूप से कानून का पालन कराता है और किसी भी अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। प्रशासन ने कार्रवाई को लेकर आवश्यक तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

सुरक्षा व्यवस्था रहेगी कड़ी

चूंकि मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए प्रशासन ने संभावित कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

विश्वविद्यालय प्रबंधन के सामने कानूनी विकल्प

ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के बाद अब सभी की नजरें विश्वविद्यालय प्रबंधन की अगली रणनीति पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि प्रबंधन इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है या अन्य कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकता है। यदि अदालत से कोई राहत नहीं मिलती है, तो विकास प्राधिकरण नियमानुसार अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू कर सकता है।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा

जौहर विश्वविद्यालय पहले भी कई मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। अब ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और सभी निर्माण कार्य निर्धारित नियमों के अनुरूप ही होने चाहिए। वहीं, अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर है कि आगे प्रशासन कब कार्रवाई करता है और विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

यूपी में रोजगार क्रांति की तैयारी, 16 नए औद्योगिक केंद्रों का होगा निर्माण

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सरदार पटेल रोजगार योजना से बदलेगी युवाओं की किस्मत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने ‘सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (SVPEIJZ)’ परियोजना शुरू की है। इस योजना के तहत प्रदेश में आधुनिक औद्योगिक केंद्र विकसित किए जाएंगे, जहां उद्योग, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।

पहले चरण में 16 नए औद्योगिक केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें एमएसएमई और यूपीसीडा द्वारा 5-5 केंद्र, यूपीईडा और यीडा द्वारा 2-2 केंद्र तथा ग्रेटर नोएडा और गीडा द्वारा 1-1 केंद्र विकसित किए जाएंगे। आगे चलकर पूरे प्रदेश को 9 ‘हब एंड स्पोक’ औद्योगिक जोन के रूप में विकसित किया जाएगा।

ये सभी केंद्र ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर तैयार होंगे। यानी उद्योग लगाने के इच्छुक उद्यमियों को पहले से विकसित भूमि, बिजली, पानी, सड़क और अन्य जरूरी सुविधाएं एक ही परिसर में मिलेंगी, जिससे उद्योग स्थापित करना आसान होगा।

प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील के अनुसार ये केंद्र ‘वन स्टॉप स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट इकोसिस्टम’ के रूप में काम करेंगे। यहां युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा और प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था होगी।

सरकार का कहना है कि इस योजना से एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, नए निवेश आएंगे, स्थानीय उद्योगों का विस्तार होगा और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को भी नई गति देगी।

विश्व कप 2027 का नया प्रारूप घोषित, तीन चरणों में होगा टूर्नामेंट, 14 टीमें लेंगी हिस्सा

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने एकदिवसीय विश्व कप 2027 के नए प्रारूप की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उन सभी अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें कहा जा रहा था कि इस बार विश्व कप में 14 के बजाय 12 टीमें खेलेंगी। आईसीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रतियोगिता में पहले की तरह 14 टीमें ही भाग लेंगी, लेकिन इस बार मुकाबलों का प्रारूप पूरी तरह बदला हुआ होगा। नए ढांचे का उद्देश्य प्रतियोगिता को अधिक रोमांचक, प्रतिस्पर्धी और संतुलित बनाना है।

आईसीसी की वार्षिक बैठक में लिए गए इस फैसले के अनुसार विश्व कप का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में 11वें, 12वें और 13वें स्थान पर रहने वाली टीमें आपस में मुकाबला करेंगी। इन तीनों टीमों में जो सबसे बेहतर प्रदर्शन करेगी, वही दूसरे चरण में जगह बनाएगी।

दूसरे चरण में कुल 12 टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा। दोनों समूहों की टीमें एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबले खेलेंगी। प्रत्येक समूह की शीर्ष तीन टीमें अगले चरण के लिए क्वालीफाई करेंगी। इसके बाद तीसरे चरण में सात सर्वश्रेष्ठ टीमें पहुंचेंगी, जहां सभी टीमें एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबले खेलेंगी। इस चरण के अंत में अंक तालिका में शीर्ष चार स्थान हासिल करने वाली टीमें सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगी और फिर विजेता टीमों के बीच फाइनल मुकाबला खेला जाएगा।

आईसीसी का कहना है कि नए प्रारूप से प्रत्येक मुकाबले का महत्व बढ़ेगा और किसी भी टीम के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं होगा। इससे छोटी और उभरती हुई क्रिकेट टीमों को भी अपनी क्षमता साबित करने का बेहतर अवसर मिलेगा, जबकि दर्शकों को पूरे टूर्नामेंट में अधिक रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।

विश्व कप 2027 की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे संयुक्त रूप से करेंगे। प्रतियोगिता का आयोजन अक्टूबर और नवंबर 2027 में होगा। तीन देशों की संयुक्त मेजबानी और नए प्रारूप के कारण यह विश्व कप क्रिकेट इतिहास के सबसे अलग और रोमांचक संस्करणों में से एक माना जा रहा है।

आईसीसी ने इसी बैठक में टी-20 विश्व कप 2028 के प्रारूप में भी बदलाव की घोषणा की है। यह प्रतियोगिता ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की संयुक्त मेजबानी में होगी। इसमें 20 टीमें हिस्सा लेंगी। पहले जहां दूसरे चरण में आठ टीमें खेलती थीं, वहीं अब 10 टीमों को मौका मिलेगा। इससे अधिक देशों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और प्रतियोगिता पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी होगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल के 7 बड़े फैसलों पर मुहर

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वाराणसी को एलिवेटेड कॉरिडोर, चिप निर्माण, मोबाइल उत्पादन और रेलवे परियोजनाओं को मिली मंजूरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में देश के बुनियादी ढांचे, उद्योग, रेलवे, उर्वरक और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े सात महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं पर करीब 2.19 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी और देश को प्रौद्योगिकी तथा उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।

बैठक में वाराणसी के लिए दो बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। पहली परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-19 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने वाले नए संपर्क मार्ग का निर्माण होगा। दूसरी परियोजना में वरुणा नदी के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने के लिए लगभग 43 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। करीब 10,998 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में फ्लाईओवर, रैंप, सेवा मार्ग और बहुलेन सड़कें शामिल होंगी। इससे शहर में यातायात का दबाव कम होगा और एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों, गंगा घाटों तथा आसपास के क्षेत्रों तक आवागमन पहले से अधिक आसान होगा।

मंत्रिमंडल ने देश में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सेमीकॉन 2.0 मिशन को भी मंजूरी दी है। इस योजना पर 1.27 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नई उत्पादन प्रोत्साहन योजना को भी स्वीकृति दी गई है, जिस पर 62,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है।

उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए नई राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देश में नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

रेलवे क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी दो अहम परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड के दोहरीकरण तथा डंगोआपोसी-राजखरसवां के बीच चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से माल और यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम होगा, यातायात क्षमता बढ़ेगी और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।

सरकार का मानना है कि इन सात बड़े फैसलों से देश में बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा, लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत की आर्थिक विकास गति को नई मजबूती मिलेगी।

सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील, शशि थरूर बोले- आपकी लड़ाई अब संसद में लड़ी जाएगी

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नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से जारी सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोनम वांगचुक और आंदोलन में शामिल युवाओं के नाम एक खुला पत्र लिखकर उनसे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की भावुक अपील की है। थरूर ने कहा कि इस आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान छात्रों और युवाओं के मुद्दों की ओर आकर्षित कर दिया है और अब इन सवालों को संसद के भीतर मजबूती से उठाया जाना चाहिए।

अपने पत्र में शशि थरूर ने कहा कि वह यह अपील किसी राजनीतिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे भारतीय के रूप में कर रहे हैं जो युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने लिखा कि एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण वह जानते हैं कि ईमानदार परीक्षा, योग्यता के आधार पर चयन और छात्रवृत्ति ही लाखों युवाओं के सपनों को पूरा करने का सबसे बड़ा माध्यम होती है। यदि परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा टूटता है तो इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को उठाना पड़ता है।

थरूर ने कहा कि पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और चयन प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों ने युवाओं का विश्वास कमजोर किया है। उन्होंने आंदोलन कर रहे युवाओं से कहा कि उनका गुस्सा व्यवस्था के खिलाफ एक लोकतांत्रिक आवाज है और पूरा देश उनकी बात सुन रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं के अधिकारों और निष्पक्ष व्यवस्था की लड़ाई संसद के भीतर भी पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।

सोनम वांगचुक से सीधे अपील करते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने अपने आंदोलन के माध्यम से देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और अब उनके स्वास्थ्य की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने आग्रह किया कि आमरण अनशन समाप्त कर लोकतांत्रिक संवाद का रास्ता अपनाया जाए, क्योंकि संसद का आगामी सत्र इन मुद्दों को उठाने का सबसे उपयुक्त मंच है।

थरूर ने केंद्र सरकार से भी बातचीत शुरू करने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही हर समस्या का सबसे प्रभावी समाधान होता है। उन्होंने सरकार से युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया।

उधर, लगातार 18 दिनों से जारी भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने भी उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों के बावजूद वांगचुक फिलहाल अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं।