भाजपा चुनावी नहीं अगले राजनैतिक नये युग की तैयारी मे
– थकी भाजपा से नई भाजपा की ओर पार्टी
– अमित शाह का महा-मंथन, यूपी चुनाव के बाद बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा
– विधानसभा चुनाव 2027 मे 300 का टारगेट तय!
– कटेंगी कई हवाई नेताओं की टिकट मिलेगा युवा शक्ति और बेदाग चेहरों को मौका
शरद कटियार
नई दिल्ली/लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के भीतर इन दिनों जो सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया चल रही है, वह केवल चुनाव जीतने की तैयारी नहीं, बल्कि अगले एक दशक की राजनीतिक संरचना को गढ़ने की कवायद मानी जा रही है। इस पूरी रणनीति के केंद्र में केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के सबसे प्रभावशाली चुनावी रणनीतिकार अमित शाह हैं। पार्टी सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा है कि भाजपा अब “थकी हुई भाजपा” से “कड़ी और अनुशासित भाजपा” नई भाजपा की ओर बढ़ रही है, जहां संगठन, नेतृत्व और चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
पिछले दो वर्षों में भाजपा ने कई राज्यों में टिकट वितरण की अपनी परंपरागत शैली बदली है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल में पार्टी ने अनेक वरिष्ठ नेताओं के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया। कई सांसदों और विधायकों को चुनाव मैदान से हटाकर संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गईं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह केवल चुनावी प्रयोग नहीं, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन की लंबी रणनीति का हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश इस रणनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जा रहा है। देश की 403 विधानसभा सीटों वाले सबसे बड़े राज्य में भाजपा ने 2027 के लिए 300 सीटों से अधिक का आंतरिक लक्ष्य तय किया है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि यदि उत्तर प्रदेश में मजबूत जनादेश मिलता है तो उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर बड़े राजनीतिक और संवैधानिक सुधारों का रास्ता और आसान हो सकता है। और अगले चरण वन नेशन वन इलेक्शन जैसे बड़े फैसलों पर काम होगा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी जनगणना के बाद फरवरी 2027 तक परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया तेज होगी । यदि ऐसा होता है तो लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में व्यापक बदलाव भी तय है । उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना लंबे समय से व्यक्त की जाती रही है। इसके साथ ही महिला आरक्षण कानून के पूर्ण क्रियान्वयन की दिशा में भी तेजी से फैसला हो जायेगा । ऐसे में वर्तमान विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक संरचना और चुनावी समीकरण दोनों बदलेंगे ।
भाजपा के भीतर यह भी तय माना जा रहा है कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” का विचार अभी समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि पार्टी इस विषय पर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती, यें उत्तर प्रदेश मे विधानसभा चुनाव पूरा होने के तुरंत बाद शुरू ही नहीं अपने अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का आकलन है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद यदि राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस दिशा में निर्णायक पहल देखने को मिल सकती है।
अमित शाह की कार्यशैली को समझने वाले बताते हैं कि उनकी राजनीति केवल चुनाव तक सीमित नहीं होती। 2014 के बाद भाजपा ने जिस प्रकार बूथ प्रबंधन, सामाजिक विस्तार और संगठनात्मक अनुशासन पर काम किया, उसमें शाह की रणनीति निर्णायक रही। आज भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती है और उसके पास करोड़ों सदस्य तथा लाखों सक्रिय कार्यकर्ता हैं। यह संरचना अचानक नहीं बनी, बल्कि वर्षों की संगठनात्मक योजना का परिणाम है।
पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम, महाराष्ट्र में संगठनात्मक पुनर्गठन, गुजरात मॉडल का विस्तार और उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ती चुनावी सक्रियता इस बात के संकेत माने जा रहे हैं कि भाजपा केवल अगले चुनाव की नहीं, बल्कि अगले राजनीतिक युग की तैयारी कर रही है।
हालांकि विपक्ष इस रणनीति को सत्ता के केंद्रीकरण के रूप में देखता है, लेकिन भाजपा समर्थक इसे प्रशासनिक स्थिरता और दीर्घकालिक राजनीतिक दृष्टि का हिस्सा बताते हैं। फिलहाल इतना तय है कि अमित शाह के नेतृत्व में चल रहा यह राजनीतिक मंथन केवल उम्मीदवारों के चयन तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में संगठन, सामाजिक समीकरण, संवैधानिक सुधार और चुनावी संरचना तक के सवाल शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश का चुनाव इस पूरी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। यदि भाजपा यहां अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य के करीब पहुंचती है तो देश की राजनीति में बड़े बदलावों की चर्चा और तेज हो सकती है। आने वाले महीनों में अमित शाह की रणनीति केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय राजनीतिक परिदृश्य की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।