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Saturday, April 4, 2026
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ठेकेदार की सह पर प्रोजेक्ट मैनेजर ने सरकारी नल व मंदिर का थान तोड़ा

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कोलाघाट रामगंगा व बहगुल नदी में बन रहा डबल लेन पुल निर्माण के दौरान बने मंदिर का थान व मंदिर तोड़ने का लगा बाबा ने लगाए गंभीर आरोप,,

शाहजहांपुर जनपद के तहसील जलालाबाद क्षेत्र में नवनिर्माण कोलाघाट रामगंगा नदी में बन रहा डबल लेन पुल में लगातार अनियमिताएं देखने को मिल रही है वही उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम द्वारा पुल निर्माण बनाने का ठेका (ठेकेदार) अनिल गुप्ता को दिया गया जिसको वहां पर पुल निर्माण कार्य सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर राजू सोनकर द्वारा कराया जा रहा पुराने पुल के शुरुआती पुल किनारे पर बाबा ब्रह्मदेव का थान ओर शिव मंदिर का थान बना हुआ था जिसको ठेकेदार की सह पर प्रोजेक्ट मैनेजर ने (देव स्थान) को तोड़ा ओर देव स्थान की देखभाल साफ सफाई कर रहे स्थानीय बाबा शिव ओम पूरी से प्रोजेक्ट मैनेजर राजू सोनकर द्वारा कहा गया कि सेतु निगम मंदिर निर्माण दूसरा बनवाकर देगी बाबा ने आरोप लगाए है कि इतने दिनों से काम चल रहा है पर अभी तक मंदिर नहीं बनाया गया,,

वही बाबा ने आरोप लगाया है कि दिन हो या रात हो ठेकेदार की सह पर जमकर पुराने पुल के पिलरों के पास ओर रामगंगा नदी से खनन करते है जिससे पुराने पुल बाढ़ के समय कमजोर हो सकता है बड़ा पुल निर्माण कार्य है बड़े लोग है इनका कुछ नहीं होगा देखना यह है कि क्या मंदिर निर्माण दूसरा होगा या नहीं,,,

डीएम व एसपी ने भगवान परशुराम मंदिर एवं झील जीर्णोद्धार कार्यों का किया निरीक्षण, गुणवत्ता व समयबद्धता हेतु दिए आवश्यक दिशा निर्देश

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शाहजहांपुर, 04 अप्रैल। जनपद में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित एवं अपर जिलाधिकारी प्रशासन रजनीश कुमार मिश्र ने आज जलालाबाद स्थित भगवान परशुराम मंदिर एवं उससे संबंधित झील के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। यह कार्य भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना आध्यात्मिक परिपथ-1 के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से परशुरामपुरी को एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर एवं झील क्षेत्र में चल रहे निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों की प्रगति का अवलोकन किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था के अभियंताओं एवं संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं। साथ ही उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि कार्य में किसी प्रकार की कमी न हो और सभी कार्य मानकों के अनुरूप हो सके।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि कार्यों में तेजी लाने हेतु एक साप्ताहिक कार्य योजना तैयार की जाए तथा आवश्यकतानुसार मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना जनपद की पर्यटन संभावनाओं को नई दिशा प्रदान करेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के अवसर भी बढ़ाएगी। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि परिसर की स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था एवं आगंतुकों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्राप्त हो सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने भगवान परशुराम के मंदिर में विधिवत दर्शन एवं पूजा अर्चना की।
इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्डियो सेवा फाउंडेशन किसी वरदान से कम नहीं डॉ शराफत अली मंसूरी

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*19 अप्रैल को नि:शुल्क कार्डियो कैंप में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे डॉ शराफत अली मंसूरी*

 

जलालाबाद जनपद शाहजहांपुर।

कार्डियो सेवा फाउंडेशन की शुरुआत करीब 5 वर्ष पहले लखनऊ एक बहुत छोटे स्तर से शुरू हुई। कार्डियो सेवा फाउंडेशन का मुख्य कार्य लोगो को फ्री मेडिकल कैंप, फ्री हृदय की जांच , कॉलेज, संस्थानों, कम्पनी, ग्रामीण और उनको नि:शुल्क इलाज आदि पर एक सहनशीलता गंभीरतापूर्वक कार्य कर रहा। आज कार्डियो सेवा फाउंडेशन लोगो की जरूरत बनती जा रही है। अब तक 2 हजार से ज्यादा लोगो को कार्डियो सेवा फाउंडेशन की तरफ से राहत मिल चुकी है। आगे भी लगातार कार्डियो सेवा का बिस्तर और सेवा का कार्य सभी के सहयोग से प्रगति पर है । आज कार्डियो सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष डॉ फैक अहमद मंसूरी और डॉ शराफत अली मंसूरी के बीच काफी देर चर्चाएं हुई जिसमें शाहजहांपुर जनपद में भी कार्डियो सेवा फाउंडेशन द्वारा जल्द सेवाओं का संचालन शुरू किया जाएगा जिससे गरीब एवं निर्धन परिवारों को काफी आसानी से इलाज मुहैया हो सकेगा। कार्डियक सेवा फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य की देखरेख पर आधारित कार्य है। 19 अप्रैल को लखनऊ कार्डियो सेवा फाउंडेशन द्वारा एक भव्य विशाल फ्री मेडिकल कैंप का आयोजन किया जा रहा है इसमें शाहजहांपुर जनपद से डॉक्टर शराफत अली मंसूरी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। सभी आयोजक एवं कार्डियो सेवा फाउंडेशन टीम को सामाजिक हित के लिए शुभकामनाएं दी।

कार्डियो सेवन टीम सी.ओ डॉ हस्साम अहमद, सीनियर क्लिनिकल एडवाइजर डॉ अबुबाकेर, मैनेजिंग डायरेक्टर अली रिजवी, क्लिनिकल एडवाइजर डॉ अंशिका, सी. एम. ओ डॉ अमीर, साइकोलॉजिस्ट डॉ नाजिया सिद्दीकी, क्लिनिकल एडवाइजर डॉ शादाव आदि।

पाकिस्तान पर ‘बिजली बम’ की तैयारी, आईएमएफ के दबाव में बढ़ेंगी दरेंपेट्रोल विवाद के बाद सरकार पर दोहरी मार

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इस्लामाबाद। आर्थिक संकट से

जूझ रहे पाकिस्तान में आम जनता पर महंगाई का बोझ और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर भारी विरोध झेल चुकी शहबाज शरीफ सरकार अब बिजली दरों में इजाफा करने की तैयारी में है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को दिए गए भरोसे के बाद साफ हो गया है कि आने वाले समय में पाकिस्तान के लोगों को ‘बिजली बम’ का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और विदेशी कर्ज तथा महंगाई ने आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है। ‘द न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, IMF के साथ हुए 7 अरब डॉलर के ‘एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी’ (EFF) कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधारों का वादा किया है। इसके तहत बिजली की नई बेसलाइन टैरिफ 15 जनवरी 2027 से लागू की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में सीधा असर देखने को मिलेगा।

सरकार ने IMF को यह भी आश्वासन दिया है कि ऊर्जा क्षेत्र में दी जा रही सब्सिडी को घटाकर 830 अरब रुपए तक सीमित किया जाएगा। इसके साथ ही बिजली वितरण कंपनियों—लेसको, जेसको और फैसको—के निजीकरण की प्रक्रिया भी 2027 तक पूरी करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से सरकार की वित्तीय स्थिति में सुधार तो हो सकता है, लेकिन आम जनता पर इसका सीधा असर बढ़े हुए बिजली बिल के रूप में पड़ेगा।

इसके अलावा, सरकार ‘नेट बिलिंग’ जैसे नए नियम लागू कर सौर ऊर्जा और पारंपरिक ग्रिड के बीच संतुलन बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। हालांकि, इन बदलावों का असर भी उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ के रूप में सामने आ सकता है। सरकार का तर्क है कि इन उपायों से ‘सर्कुलर डेट’ यानी ऊर्जा क्षेत्र का बढ़ता कर्ज नियंत्रित किया जा सकेगा और आर्थिक स्थिरता हासिल होगी।

वहीं दूसरी ओर, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर पहले से घिरी सरकार को जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। हालात इतने बिगड़े कि सरकार को बढ़ी हुई कीमतें वापस लेनी पड़ीं और पेट्रोल की कीमत में 80 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर इसे 378 रुपए प्रति लीटर पर लाना पड़ा। यह फैसला उस समय लिया गया जब देशभर में लोग सड़कों पर उतर आए और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं।

अब ऐसे हालात में जहां एक ओर पेट्रोल विवाद से सरकार की साख को झटका लगा है, वहीं दूसरी ओर बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी से आम जनता की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। पाकिस्तान में इस समय महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता के चलते हालात पहले ही तनावपूर्ण बने हुए हैं, ऐसे में ‘बिजली बम’ की आशंका ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

ईरान में गिराया गया अमेरिकी F-15, लापता पायलट की तलाश में ‘रेस अगेंस्ट टाइम’—इनाम के ऐलान से बढ़ा तनाव

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तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराए जाने के बाद हालात और अधिक गंभीर हो गए हैं। इस घटना में विमान के दो क्रू सदस्य इजेक्ट कर अपनी जान बचाने में सफल रहे, जिनमें से एक पायलट को अमेरिकी सेना ने सुरक्षित निकाल लिया है, जबकि दूसरा पायलट अब भी ईरान की जमीन पर लापता है, जिसकी तलाश तेज़ी से जारी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने इस मिशन को ‘रेस अगेंस्ट टाइम’ का नाम दिया है और अपने विशेष बलों को अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों के साथ दक्षिण-पश्चिमी ईरान के दुर्गम इलाकों में उतार दिया है। माना जा रहा है कि लापता पायलट कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के पहाड़ी और घने जंगलों वाले क्षेत्र में कहीं छिपा हो सकता है। यह इलाका जाग्रोस पर्वतमाला का हिस्सा है, जो अपनी ऊंची चोटियों, गहरी घाटियों और दुर्गम रास्तों के लिए जाना जाता है। ऐसे में यह रेस्क्यू ऑपरेशन अमेरिकी सेना के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा माना जा रहा है।

दूसरी ओर, ईरान भी इस पायलट को पकड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक चुका है। ईरानी मीडिया के अनुसार, पायलट को पकड़वाने वाले को 66 हजार डॉलर के इनाम का ऐलान किया गया है। इस कदम को स्थानीय कबाइली लोगों को खोज अभियान में शामिल करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र के भौगोलिक हालात से स्थानीय लोग भली-भांति परिचित हैं और बाहरी सैन्य बलों के लिए यहां ऑपरेशन चलाना बेहद कठिन है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान इस अमेरिकी पायलट को अपनी हिरासत में लेने में सफल हो जाता है, तो यह पूरे संघर्ष की दिशा बदल सकता है। पायलट को कूटनीतिक सौदेबाजी के एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे अमेरिका पर दबाव बढ़ेगा। वहीं अगर पायलट को सुरक्षित निकालने में अमेरिका असफल रहता है, तो जमीनी सैन्य कार्रवाई की आशंका भी बढ़ सकती है।

इस बीच, अमेरिकी सेना का कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR) मिशन पूरी तरह सक्रिय है, जिसे दुनिया के सबसे जटिल और संवेदनशील सैन्य अभियानों में गिना जाता है। इस मिशन में विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। टीमें लगातार उस आखिरी लोकेशन के आधार पर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं, जहां पायलट के होने की संभावना जताई गई थी।

पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। एक ओर जहां युद्ध का खतरा गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस लापता पायलट की तलाश अब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का नया केंद्र बन गई है। आने वाले समय में यह मामला न केवल सैन्य बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी बड़े बदलाव ला सकता

ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने बदली युद्ध की तस्वीर

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अमेरिका-इजरायल के एयर डिफेंस पर भारी दबाव—वैश्विक शक्ति संतुलन पर बड़ा असर

 

 

 

तेहरान। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता के दम पर आधुनिक युद्ध की परिभाषा को चुनौती दे दी है। हालात यह हैं कि अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी ईरानी मिसाइलों के सामने पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं। इससे वैश्विक स्तर पर सैन्य रणनीतियों और शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक 12,500 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए हैं। इसके बावजूद खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि ईरान की 50 प्रतिशत से अधिक मिसाइल क्षमता अब भी बरकरार है, जो यह दर्शाता है कि वह लंबे समय तक युद्ध लड़ने की स्थिति में है। ईरान की मिसाइलों ने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और इजरायल जैसे देशों में भारी तबाही मचाई है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधों के चलते मजबूत वायुसेना विकसित न कर पाने के बावजूद ईरान ने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोन तकनीक के जरिए युद्ध को एक नई दिशा दी है। ईरान ने अपनी मिसाइल शक्ति को केवल हमले के हथियार के रूप में नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक निवारक’ के तौर पर विकसित किया है, जो दुश्मन को हमले से पहले कई बार सोचने पर मजबूर करता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास 3,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों का विशाल भंडार है, जो मध्य पूर्व में सबसे बड़ा माना जाता है। इनमें मध्यम दूरी की मिसाइलें—जैसे खुर्रमशहर, इमाद और सज्जील—1500 से 2000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं। वहीं ‘फतह’ जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें 15 मैक की रफ्तार से उड़ान भर सकती हैं, जो किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती हैं।

इसके अलावा, ज़ुल्फ़िकार, देजफुल, हाजी कासिम और खैबर शिकन जैसी कम दूरी और टैक्टिकल मिसाइलें भी ईरान के हथियारों का अहम हिस्सा हैं। इन मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत इनके मोबाइल लॉन्चर हैं, जो इन्हें तेजी से तैनात और फायर करने के बाद तुरंत स्थान बदलने की क्षमता देते हैं, जिससे दुश्मन के जवाबी हमलों से बचना आसान हो जाता है।

दूसरी ओर, इजरायल और अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम—जैसे THAAD, पैट्रियट, डेविड्स स्लिंग और आयरन डोम—पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। इन सिस्टम्स को ऑपरेट करना बेहद महंगा है और इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक भी तेजी से घट रहा है। ऐसे में ईरान की अपेक्षाकृत कम लागत वाली मिसाइल रणनीति उसे रणनीतिक बढ़त दिला रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ईरान की मिसाइल क्षमता पूरे मध्य पूर्व में बड़े स्तर पर तबाही मचा सकती है, जिसकी भरपाई वर्षों तक संभव नहीं होगी। यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि वैश्विक राजनीति और रक्षा नीतियों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

कुल मिलाकर, ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन रणनीति के जरिए यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल बड़ी सेनाओं या अत्याधुनिक वायुसेना पर निर्भर नहीं रह गया है, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभावी रणनीति से भी बड़ी शक्तियों को चुनौती दी जा सकती है।