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Sunday, May 31, 2026
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1 जून से देश में होंगे 8 बड़े बदलाव, LPG से लेकर पेट्रोल-डीजल तक बदल जाएंगे नियम

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नई दिल्ली: आज मई का आखिरी दिन है और कुछ मिंटो बाद जून का महीना शुरू होने जा रहा है। नया महीना अपने साथ कई बदलाव लेकर आ रहा है। 1 जून से एलपीजी सिलेंडर की कीमत (LPG Cylinder Price) से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमत (Petrol-diesel price), यूपीआई, एटीएम, आधार पर नया नियम लागू हो जाएगा। पेट्रोल-डीजल पर नया निर्यात शुल्क भी 1 जून से लागू होने वाला है। जबकि कार के शौकीनों पर भी महंगाई की मार पड़ने वाली है। इन बदलावों का आपकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा। वहीं गृहणियों का बजट बिगड़ेगा।

पहला बदलाव: एलपीजी सिलेंडर को लेकर दो चेंज

हर महीने की पहली तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करती हैं। नए रेट्स (LPG Cylinder New Rates) जारी करती हैं। जून महीने की पहली तारीख को भी एलपीजी प्राइस में बदलाव देखने को मिल सकता है। 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में हाल के महीनों में काफी बढ़ोतरी की गई है। 9 किलोग्राम वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर 2078 रुपये में मिल रहा है। वहीं 14 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर 960 रुपये का मिल रहा है।

इसके अलावा वेस्ट एशिया संकट को देखते हुए लोगों को गैस की कोई दिक्‍कत नहीं आए, इसलिए कुछ अन्य खास बदलाव किए जा रहे हैं। इसमें से एक बदलाव 1 जून से लागू होने जा रहा है, जिसके तहत आपका रसोई सिलेंडर कनेक्‍शन कैंसिल हो सकता है। सरकार ने कहा है कि अगर पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्‍शन हैं, तो एलपीजी को सरेंडर करना होगा।

दूसरा बदलाव: Petrol-Diesel और ATF

जून महीने की पहली तारीख को हवाई ईंधन यानी एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF Price) में भी बदलाव करती हैं। इसमें आने वाले किसी भी उतार-चढ़ाव का सीधा असर हवाई यात्रा करने वाले लोगों की जेब पर पड़ता है। वेस्ट एशिया संघर्ष के चलते गहराए तेल संकट के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात (Petrol-Diesel New Export Duty) पर नए शुल्क लागू करने का फैसला किया है, जो 1 जून 2026 से प्रभावी होंगे।

तीसरा बदलाव: हवाई यात्रा होगी महंगी

ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है। इस कारण विमान ईंधन यानी एटीएफ भी काफी महंगा हो गया है। इसका असर एयरलाइन कंपनियों पर पड़ रहा है। एयर इंडिया और इंडिगो 1 जून से घरेलू उड़ानों की संख्या में कटौती करने की तैयारी में है। यह कटौती 90 दिन तक रह सकती है। इससे आने वाले दिनों में हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है।

चौथा बदलाव: कारें महंगी

कारों के शौकीनों पर 1 जून से महंगाई की तगड़ी मार पड़ने जा रही है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने बीते दिनों अपनी कारों की कीमतों में इजाफा करने का ऐलान किया था। नई कीमतें कल से लागू हो जाएगी। कंपनी ने अपने अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट की कीमतों में 12,800 रुपये तक की बढ़ोतरी का फैसला किया है।

पांचवां बदलाव:पीएफ के पैसे यूपीआई के जरिए निकालें

इस महीने में पीएफ के पैसे यूपीआई के जरिए निकलने की सुविधा शुरू हो सकती है।इसे लेकर ईपीएफओ की तरफ से तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और इसकी टेस्टिंग भी कई महीनों के बाद पूरी हो चुकी है। इस सुविधा के शुरू होने के बाद, आप Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे ऐप्स के माध्यम से अपना पीएफ का पैसा सीधे अपने बैंक खाते में तुरंत ट्रांसफर कर सकेंगे।

छठा बदलावः Solar Panel से जुड़ा नियम

1 जून 2026 से सोलर पैनल के लिए अप्रूव्ड मॉडल और मैन्युफैक्चरर लिस्ट (ALMM List-II) मान्य होगी। इसके लागू होने से सरकारी स्कीम्स और अन्य तमाम सब्सिडी वाले प्रोजेक्ट्स में उन्हीं सोलर मॉड्यूल और सेल का इस्तेमाल करना होगा, जो इस लिस्ट में शामिल होंगे।

सतवां बदलावः मुफ्त आधार अपडेट

ऑनलाइन आधार अपडेट की मुफ्त सुविधा भी जून में खत्म हो जाएगी। इसकी डेडलाइन 14 जून है। उसके बाद आधार में नाम, पता या दूसरी जानकारी अपडेट करने के लिए फीस देनी होगी। नए नियम के मुताबिक ऑनलाइन अपडेट पर 25 रुपये और आधार केंद्र में जाकर अपडेट कराने में 50 रुपये तक फीस लग सकती है।

आठवां बदलावः पैन के नियमों में बदलाव

1 जून 2026 से पैन कार्ड से जुड़े नियमों में भी बदलाव होगा। आयकर विभाग बड़े ट्रांजैक्शंस पर निगरानी बढ़ाने जा रही है। नए इनकम टैक्स नियम के तहत अब 50,000 रुपये से ज्यादा नकदी जमा करने पर पैन देना होता था, लेकिन अब यह शर्त हटा दी गई है। जबकि प्रॉपर्टी खरीद में भी पैन की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।

 

नेपाली पीएम बोले- हमने भी भारतीय जमीन पर कब्जा किया, लिपुलेख मुद्दे पर ब्रिटेन से मध्यस्थता की अपील

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काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री (Nepali PM) बालेन शाह (Balen Shah) ने रविवार को संसद में अपने पहले संबोधन के दौरान भारत-नेपाल सीमा विवाद (India-Nepal border dispute) को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर केवल यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी एक पक्ष ने दूसरे की भूमि पर कब्जा किया है। उनके अनुसार, दोनों देशों को ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर संयुक्त रूप से मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि पदभार संभालने के बाद उन्हें सीमा से जुड़े कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी मिली, जिनकी गहन पड़ताल आवश्यक है। प्रधानमंत्री के इस बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नेपाली कांग्रेस और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कई सांसदों ने मांग की कि बयान को संसद की कार्यवाही से हटाया जाए। विपक्ष का कहना है कि यदि प्रधानमंत्री के पास अपने दावे के समर्थन में ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा बयान वापस लिया जाए।

संसद में भारत और चीन के बीच लिपुलेख तथा लिम्पियाधुरा मार्ग से होने वाले व्यापार को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि नेपाल सीमा विवाद का समाधान संवाद और कूटनीतिक प्रक्रिया के जरिए चाहता है। उन्होंने बताया कि नेपाल पहले ही इस मुद्दे पर भारत को राजनयिक नोट भेज चुका है और भारत की ओर से जवाब भी प्राप्त हो चुका है। जवाब में दोनों देशों के इतिहासकारों, सर्वेक्षण विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों की संयुक्त टीम गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि तथ्यों के आधार पर समाधान खोजा जा सके।

प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि नेपाल ने इस विषय पर केवल भारत और चीन से ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन सरकार से भी चर्चा की है। उनका मानना है कि चूंकि यह सीमा विवाद ब्रिटिश काल में तय हुई व्यवस्थाओं और नक्शों से जुड़ा है, इसलिए ब्रिटेन की ऐतिहासिक भूमिका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्र लंबे समय से भारत और नेपाल के बीच विवाद का विषय रहे हैं। जून 2020 में नेपाल की संसद ने एक नया राजनीतिक नक्शा पारित किया था, जिसमें इन क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। भारत ने उस समय नेपाल के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि यह ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित नहीं है तथा भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है।

प्रधानमंत्री के बयान पर बढ़ते विवाद के बीच नेपाल के विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी का आशय भारत की भूमि पर नेपाल के कब्जे से नहीं था, बल्कि सीमा क्षेत्रों में मौजूद “क्रॉस बॉर्डर ऑक्युपेशन” और “दसगजा” से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाना था।

होमगार्ड संगठन को आधुनिक, प्रशिक्षित और तकनीक-सक्षम बनाने पर जोर, मुख्यमंत्री ने दिए समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश

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होमगार्ड केवल पुलिस बल के सहायक के रूप में ही नहीं, बल्कि आपदा राहत, भीड़ प्रबंधन, चुनावी व्यवस्थाओं, सामुदायिक सेवा तथा जनजागरूकता अभियानों में भी महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री

होमगार्ड के जवानों को अनिवार्य रूप से दी जाए सीपीआर व फर्स्ट एड की ट्रेनिंग, गोल्डन ऑवर के महत्व से भी कराया जाए अवगतः मुख्यमंत्री

41,424 पदों पर एनरोलमेंट की प्रक्रिया जारी, सितम्बर में जारी होगा अंतिम परिणाम

सेवाकाल में मृत्यु पर आश्रितों को ₹5 लाख की अनुग्रह सहायता, दिसंबर 2020 से अब तक 3,153 मामलों में ₹157.65 करोड़ वितरित

₹104.80 करोड़ की 20 निर्माण परियोजनाएं प्रगति पर, प्रशिक्षण और आधारभूत संरचना को मिलेगा नया आयाम

कल्याण, प्रशिक्षण और आधुनिकीकरण पर विशेष फोकस, होमगार्ड संगठन के लिए तैयार की गई व्यापक भविष्य की कार्ययोजना

लखनऊ, 31 मई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को होमगार्ड विभाग की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि होमगार्ड संगठन उत्तर प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन तथा जनसेवा का महत्वपूर्ण स्तंभ है। बदलते समय और नई चुनौतियों के अनुरूप इस संगठन को अधिक सक्षम, प्रशिक्षित, तकनीक-सक्षम और आधुनिक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण क्षमता विस्तार, आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण और मानव संसाधन विकास से जुड़े सभी कार्यों को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाए, ताकि होमगार्ड स्वयंसेवक प्रत्येक परिस्थिति में प्रभावी भूमिका निभा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि होमगार्ड केवल पुलिस बल के सहायक के रूप में ही नहीं, बल्कि आपदा राहत, भीड़ प्रबंधन, चुनावी व्यवस्थाओं, सामुदायिक सेवा तथा जनजागरूकता अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और तकनीकी सशक्तिकरण के माध्यम से होमगार्ड संगठन की कार्यक्षमता को और बढ़ाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पुलिस व होमगार्ड का जवान समाज का फर्स्ट रिस्पांडर होता है। किसी भी घटना में पीड़ित के पास सबसे पहले यही पहुंचते हैं, इसलिए इन्हें सीपीआर व फर्स्ट एड की अनिवार्य रूप से ट्रेनिंग दी जाए और गोल्डन ऑवर के महत्व के बारे में भी बताया जाए। इनकी सजगता जीवन बचाने में काफी महत्वपूर्ण होती है।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 1963 में स्थापित उत्तर प्रदेश होमगार्ड संगठन में 1,18,348 पद स्वीकृत हैं। स्थापना के समय जहां मात्र 2,000 होमगार्ड व्यवस्थापित थे, वहीं आज 67,971 होमगार्ड उपलब्ध हैं। विभाग पुलिस बल के सहयोग, सार्वजनिक व्यवस्था एवं आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने, आपातकालीन सेवाओं तथा लोककल्याण से जुड़े विविध दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। बताया गया कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में 3,812 होमगार्डों को ‘आपदा मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त 1,091 स्वयंसेवकों को अग्नि बचाव तथा 425 को बाढ़ बचाव कार्यों के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने एनरोलमेंट प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्धता के साथ संपन्न की जाए। बैठक में बताया गया कि 3 नवंबर 2025 को जारी उत्तर प्रदेश राज्य होमगार्ड्स एनरोलमेंट मार्गदर्शिका के अंतर्गत 41,424 रिक्त पदों पर एनरोलमेंट प्रक्रिया के तहत अप्रैल 2026 में लिखित परीक्षा पारदर्शी ढंग से संपन्न कराई गई। अंतिम परिणाम सितंबर 2026 में घोषित किए जाने की तैयारी है। चयनित अभ्यर्थियों को उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के प्रशिक्षण संस्थानों में 90 दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण प्रदान जाना प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सक्षम, अनुशासित और पेशेवर होमगार्ड बल के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने विभागीय कार्यप्रणाली में तकनीक के व्यापक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि पारदर्शिता और दक्षता के लिए डिजिटल प्रणालियों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि प्रशिक्षण भत्ता ₹260 प्रतिदिन से बढ़ाकर ड्यूटी भत्ते के समकक्ष कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक होमगार्ड को प्रत्येक तीन वर्ष में ₹3,000 वर्दी भत्ता प्रदान किए जाने की व्यवस्था लागू की गई है।

आधारभूत संरचना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि लगभग ₹104.80 करोड़ की लागत से स्वीकृत 20 निर्माण परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है।

होमगार्ड कल्याण से संबंधित उपायों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयंसेवकों और उनके परिवारों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में बताया गया कि सेवाकाल में मृत्यु की स्थिति में नामित आश्रित को ₹5 लाख की अनुग्रह सहायता प्रदान की जा रही है। दिसंबर 2020 से अब तक 3,153 मामलों में ₹157.65 करोड़ की अनुग्रह राशि वितरित की जा चुकी है। अप्रैल 2022 से अब तक 125 दिवंगत होमगार्ड स्वयंसेवकों के आश्रितों को विभिन्न बैंकिंग बीमा योजनाओं के माध्यम से ₹30 लाख से ₹45 लाख तक की बीमा सहायता प्राप्त हुई है। अंतरजनपदीय संचरण की स्थिति में देय दैनिक भोजन भत्ता ₹30 से बढ़ाकर ₹120 प्रतिदिन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि होमगार्ड संगठन को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाया जाए। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान को राज्य स्तरीय अत्याधुनिक संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, आधुनिक परेड ग्राउंड, ड्रिल क्षेत्र, फिजिकल ट्रेनिंग एवं ऑब्स्टेकल कोर्स, आधुनिक छात्रावास, भोजनालय, डिजिटल पुस्तकालय, डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म तथा सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश होमगार्ड संगठन को आधुनिक, सक्षम, अनुशासित और जनसेवा के लिए सदैव तत्पर बल के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी प्रस्तावित योजनाओं एवं सुधारात्मक पहलों को निर्धारित समयसीमा में लागू करने के निर्देश दिए।

आपदा प्रबंधन और जनसुरक्षा की मजबूत ढाल बनेगा नागरिक सुरक्षा विभाग: मुख्यमंत्री

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प्रदेश के सभी जनपदों में गठित हुईं नागरिक सुरक्षा इकाइयां, प्रशिक्षण और भर्ती अभियान को मिलेगी गति

7,500 नए स्वयंसेवकों की भर्ती, 72 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को दिया गया प्रशिक्षण

आपदा से पहले तैयारी, संकट में त्वरित राहत और बाद में पुनर्वास पर विशेष फोकस

हर जिले में होगी वृहद मॉक ड्रिल, नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश

आर्मी से सेवानिवृत्त लोगों के द्वारा प्रशिक्षण दिए जाने पर भी मुख्यमंत्री जी का रहा जोर

लखनऊ, 31 मई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को नागरिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में नागरिक सुरक्षा की भूमिका केवल युद्धकालीन परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव, जनजागरूकता, सामुदायिक सहभागिता तथा आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव, अग्निशमन, प्राथमिक चिकित्सा, खोज एवं बचाव तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विभाग की क्षमताओं को और मजबूत किया जाना चाहिए। अधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाए तथा अधिक से अधिक लोगों को आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा गतिविधियों से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री जी ने आर्मी से सेवानिवृत्त लोगों के द्वारा प्रशिक्षण दिए जाने पर भी जोर दिया।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान में अवकाश का समय चल रहा है। ऐसे में एनसीसी, एनएसएस आदि के स्वयंसेवकों को भी सिविल डिफेंस की ट्रेनिंग के साथ जोड़ा जाए। इन्हें भी सीपीआर व फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी जाए। मुख्यमंत्री जी ने आपदा से पहले लोगों को जागरूक करने के लिए सायरन के प्रयोग पर विशेष जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि भारत-चीन युद्ध के बाद वर्ष 1962 में नागरिक सुरक्षा की स्थापना की गई थी तथा वर्ष 1968 में नागरिक सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया। नागरिक सुरक्षा संशोधित अधिनियम-2009 के माध्यम से विभाग को आपदा पूर्व, आपदा के दौरान तथा आपदा उपरांत कार्यों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। वर्तमान में विभाग राहत एवं बचाव, क्षति न्यूनीकरण, अग्निशमन, प्राथमिक चिकित्सा, खोज एवं बचाव तथा फंसे हुए लोगों की सुरक्षित निकासी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का निर्वहन कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने विभाग की जनजागरूकता एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि आपदा के समय प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए समाज का प्रशिक्षित और जागरूक होना आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि नागरिक सुरक्षा विभाग द्वारा स्वयंसेवकों को अग्निशमन, खोज एवं बचाव तथा प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही विद्यालयों, महाविद्यालयों, एनसीसी, एनएसएस, रेलवे, महत्वपूर्ण संस्थानों तथा सुरक्षा बलों को ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में तैयार करने के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

बैठक में बताया गया कि भारत सरकार की ‘स्कीम फॉर ट्रेनिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ सिविल डिफेंस इन स्टेट्स’ के अंतर्गत प्रदेश के पूर्व से संचालित 17 जनपदों में लगभग 5,000 वार्डनों एवं स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। 72,438 छात्र-छात्राओं को नागरिक सुरक्षा का सामान्य प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अतिरिक्त होमगार्ड के 7,502 स्वयंसेवकों तथा 4,633 नागरिकों को आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया गया है। नागरिक सुरक्षा की विभिन्न सेवाओं, जिनमें वार्डन सेवा, अग्निशमन सेवा एवं प्राथमिक चिकित्सा सेवा शामिल हैं, में कुल 6,695 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि पूर्व में संस्थान में नागरिक सुरक्षा के 15 जनपदों के स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जाता था, जबकि मई 2025 से नागरिक सुरक्षा इकाइयों एवं प्रशिक्षण व्यवस्था का विस्तार प्रदेश के सभी 75 जनपदों तक कर दिया गया है।

विभागीय उपलब्धियों की समीक्षा के दौरान बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी जनपदों में नागरिक सुरक्षा इकाइयों का गठन कर दिया गया है तथा जिलाधिकारियों को नियंत्रक, नागरिक सुरक्षा के रूप में नामित किया गया है। नवसृजित जनपदों में उपनियंत्रक के 61 नए पद तथा सहायक उपनियंत्रक साधारण वेतनमान के 60 नए पद सृजित किए गए हैं। नागरिक सुरक्षा विभाग के स्वयंसेवकों के ड्यूटी भत्ते एवं प्रशिक्षण भत्ते की दरों में वृद्धि की गई है। विभिन्न रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अधियाचन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजे जा चुके हैं। 60 नवसृजित जनपदों में लगभग 7,500 स्वयंसेवकों की भर्ती की जा चुकी है तथा उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया प्रचलित है। मुख्यमंत्री ने विभाग में रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए।

भविष्य की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नवसृजित जनपदों में नागरिक सुरक्षा की महायोजनाओं को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए तथा आवश्यकता के अनुरूप स्वयंसेवकों की भर्ती पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त स्वयंसेवकों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। प्रत्येक नागरिक सुरक्षा जनपद में वर्ष में कम से कम दो बार सभी हितधारकों की सहभागिता के साथ वृहद मॉक ड्रिल आयोजित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक सुरक्षा विभाग को जनसुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मजबूत, आधुनिक और सक्षम संस्था के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने विभागीय योजनाओं और प्रस्तावों के समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश देते हुए कहा कि नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों की क्षमता, दक्षता और संख्या बढ़ाकर प्रदेश की आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाए।

एनएफएचएस-6 की ताजा रिपोर्ट में यूपी की बड़ी छलांग: 8 साल में बदली सामाजिक विकास की तस्वीर

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बिजली, स्वास्थ्य बीमा, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और महिला बैंक खातों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

योगी सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तीकरण मानकों में सुधार

परिवार नियोजन अभियान रहा सफल, प्रजनन दर 2.74 से घटकर 2.2 हुई

संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंची

स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत पहुंचा

लखनऊ, 31 मई। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश में सामाजिक विकास की बदलती तस्वीर को सामने रखा है। वर्ष 2015-16 और 2023-24 के बीच के आंकड़ों की तुलना बताती है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के व्यापक क्रियान्वयन, महिला कल्याण कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे के विकास का असर अब राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षणों में भी दिखाई देने लगा है।

सबसे पहले यदि बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो बिजली और स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 2015-16 में जहां केवल 71 प्रतिशत घरों तक बिजली की पहुंच थी, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 95.8 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार स्वास्थ्य बीमा या किसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जुड़े परिवारों का प्रतिशत 6.1 से बढ़कर 37.2 प्रतिशत पहुंच गया है। आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी पहलों ने लाखों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच उपलब्ध कराया है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता भी 96.4 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 97.9 प्रतिशत (ग्रामीण) पहुंच गई है, जो जीवन स्तर में सुधार का संकेत है।

जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2015-16 के 2.74 से घटकर 2023-24 में 2.2 रह गई है। यह आंकड़ा जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। परिवार नियोजन के किसी भी साधन का उपयोग करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 45.5 से बढ़कर 63.8 प्रतिशत हो गया है। वहीं ऐसी महिलाएं जो बच्चों के जन्म में अंतर तो रखना चाहती थीं परंतु परिवार नियोजक साधनों का उपयोग नहीं कर पा रहीं थीं, उनकी संख्या में भी काफी गिरावट आई है। यह 18 प्रतिशत से घटकर 10.8 प्रतिशत रह गई है। किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है। 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की युवतियों में मां बनने अथवा गर्भवती होने का प्रतिशत 4 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत हो गया है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। सरकारी अस्पतालों के विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी सुरक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का असर अब आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। वर्ष 2015-16 में केवल 26.4 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था के दौरान चार या उससे अधिक बार स्वास्थ्य जांच कराती थीं, जबकि अब गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 70.6 तक पहुंच गया है। संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत हो गई है, जो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

टीकाकरण के क्षेत्र में भी प्रदेश ने बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 2015-16 में 12 से 23 माह आयु वर्ग के केवल 51.1 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 81.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मिशन इंद्रधनुष और नियमित टीकाकरण अभियानों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों में गंभीर बीमारियों का खतरा कम हुआ है और बाल स्वास्थ्य में सुधार आया है।

कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बच्चों में बौनापन यानी उम्र के अनुसार कम ऊंचाई की समस्या 46.2 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत पर आ गई है। इसी प्रकार कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 39.5 से घटकर 34.5 प्रतिशत रह गया है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, पोषण अभियान और आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है।

महिला सशक्तीकरण के मोर्चे पर सर्वेक्षण ने सबसे सकारात्मक तस्वीर पेश की है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 10 वर्ष या उससे अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 32.9 से बढ़कर 42.5 प्रतिशत हो गया है। वहीं वित्तीय आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत पहुंच गया है। जनधन योजना, स्वयं सहायता समूहों और मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रमों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े संकेतकों में भी सुधार दर्ज हुआ है। पति द्वारा शारीरिक अथवा यौन हिंसा का सामना करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 34.4 से घटकर 28.5 प्रतिशत रह गया है। यह बदलाव महिलाओं में बढ़ती जागरूकता, शिक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और सरकारी सहायता तंत्र की मजबूती का परिणाम माना जा रहा है। प्रदेश के विकास की यह तस्वीर आने वाले वर्षों में और बेहतर होने की उम्मीद जगाती है।

यूपी भाजपा में बड़े संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी, 2 जून को नई टीम का हो सकता है एलान

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लखनऊ। प्रदेश भाजपा संगठन में लंबे समय से चल रही इंतजार की घड़ी अब समाप्त होने के करीब है। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और 2 जून को नई प्रदेश कार्यकारिणी तथा क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों की घोषणा हो सकती है। चुनावी वर्ष को देखते हुए भाजपा नेतृत्व संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत कई पुराने चेहरों की जगह नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी मिलने की संभावना है।

जानकारी के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एक जून को दिल्ली में सभी प्रदेश अध्यक्षों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा होगी, वहीं उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन के पुनर्गठन पर भी अंतिम मंथन किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह पिछले कई दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और शीर्ष नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकों में हिस्सा ले चुके हैं।

सूत्र बताते हैं कि बिहार भाजपा की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी व्यापक बदलाव की योजना बनाई जा रही है। पार्टी सामाजिक और जातीय समीकरणों के साथ-साथ युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। संगठन में सक्रिय सामाजिक चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि इसे लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।

भाजपा के छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के चयन को लेकर भी मंथन जारी है। काशी क्षेत्र के अध्यक्ष पद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहमति मिलने की चर्चा है, जिसके बाद अन्य क्षेत्रों के जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा। हाल ही में वाराणसी जिले में राम सकल पटेल को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद क्षेत्रीय अध्यक्षों के चयन में नए समीकरण उभरकर सामने आए हैं।

पार्टी नेतृत्व इस बार संगठन में उम्र, अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन पर विशेष ध्यान दे रहा है। ऐसे संकेत हैं कि कई वर्तमान पदाधिकारियों को संगठन से हटाकर निगमों, आयोगों और बोर्डों में समायोजित किया जा सकता है ताकि उनके अनुभव का लाभ पार्टी को मिलता रहे। इसी कारण अंतिम सूची तैयार करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।

भाजपा के अंदर नई टीम को लेकर उत्सुकता चरम पर है। संगठन के पुराने और नए दावेदारों की निगाहें दिल्ली पर टिकी हुई हैं। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो यह हाल के वर्षों में भाजपा संगठन का सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जाएगा, जिसका सीधा असर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर दिखाई देगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठनात्मक ढांचा ही आगामी चुनावी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।