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Tuesday, April 7, 2026
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एसपी फतेहगढ़ आरती सिंह व पुलिस को हाईकोर्ट से राहत

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– जस्टिस जे.मुनीर की बेंच ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई की पूरी
– फर्रुखाबाद के वकील अवधेश मिश्रा के कथित षड्यंत्र का खुलासा
प्रयागराज /फर्रुखाबाद। जनपद फर्रुखाबाद के चर्चित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के मामले में कथित षड्यंत्र और भ्रामक तथ्यों के जरिए न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश आखिरकार उजागर हो गई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पूरे प्रकरण की सुनवाई पूरी करते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में अब कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है, जिससे फतेहगढ़ पुलिस अधीक्षक को राहत मिली है।
मामले की शुरुआत कायमगंज निवासी प्रीति यादव पत्नी अर्जुन सिंह यादव द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 8 सितंबर की रात कायमगंज कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनुराग मिश्रा व अन्य पुलिसकर्मियों ने उनके पति को अवैध रूप से हिरासत में लेकर बंधक बनाया और छोड़ने के नाम पर रिश्वत मांगी। इस संबंध में उन्होंने उच्च अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजने के साथ-साथ उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी।
हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने स्वयं न्यायालय को बताया कि उन्हें न तो अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था और न ही उनके साथ वैसा व्यवहार हुआ जैसा आरोप लगाया गया था। इस बयान के बाद न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिवक्ता अनमोल यादव और राजेंद्र प्रसाद दुबे को नोटिस भी जारी किया था ।
प्रकरण में अक्टूबर 2025 को उस समय नाटकीय मोड़ आया, जब हाईकोर्ट के अधिवक्ता संतोष पांडे ने हलफनामा दाखिल कर आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदार फर्रुखाबाद निवासी अधिवक्ता अवधेश मिश्रा के घर 11 अक्टूबर की रात पुलिस ने छापा मारा, जो कथित रूप से इस याचिका से जुड़ा था। इस पर न्यायालय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए फतेहगढ़ की पुलिस अधीक्षक आरती सिंह को अगले दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए।
पुलिस अधीक्षक न्यायालय में उपस्थित हुईं और उन्होंने स्पष्ट किया कि अवधेश मिश्रा के घर छापा याचिका के कारण नहीं, बल्कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 271/2025 के तहत एसआईटी जांच के आधार पर की गई कार्रवाई के कारण डाला गया था। पुलिस ने न्यायालय को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे . मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका संख्या 854/2025 पर 2 अप्रैल 2026 को निर्णय सुनाते हुए कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता को हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया गया, इसलिए अब इस याचिका में किसी आदेश की आवश्यकता नहीं
है। साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं संतोष पांडे और अवधेश मिश्रा द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की जांच इस याचिका के दायरे में नहीं आती।
बताना जरुरी है कि अवधेश मिश्रा संबंधित याचिकाकर्ता प्रीति यादव के अधिवक्ता रहे ही नहीं थे। याचिकाकर्ता प्रीति यादव और उनके फर्रुखाबाद के अधिवक्ता रोहित यादव ने इस संबंध में शपथ पत्र देकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की।
पूरे घटनाक्रम में यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के अधिवक्ता संतोष पांडे ने अपने रिश्तेदार अवधेश मिश्रा को बचाने के उद्देश्य से बिना अधिकृत जानकारी के याचिका में हस्तक्षेप किया और भ्रामक तथ्यों के आधार पर न्यायालय व मीडिया को भी गुमराह किया, कि एसपी फतेहगढ़ को उच्च न्यायालय ने हाउस अरेस्ट किया और अधिवक्ता समाज का उत्पीड़न किया जबकि ऐसा नहीं हुआ । गौरतलव हो कि अवधेश मिश्रा का संबंध कथित रूप से माफिया अनुपम दुबे, संजीव परिया, गैंगेस्टर अनुराग दुबे डब्बन, अमित दुबे बब्बन, योगेंद्र सिंह यादव चंन्नू, और देवेंद्र सिंह यादव जग्गू सहित कई आपराधिक गिरोहों से रहा है और उनके खिलाफ पूर्व में भी मुकदमे दर्ज रहे हैं।अपनी गिरफ़्तारी से बचने के लिए और
पुलिस को बदनाम करने के लिए पूरा हाईटेक ड्रामा किया गया, जिसमें यह तक प्रचारित किया गया कि पुलिस अधीक्षक को न्यायालय में “हाउस अरेस्ट” कर लिया गया, जबकि वास्तविकता यह थी कि न्यायालय ने केवल जवाब-तलब के लिए उन्हें तलब किया था।
न्यायालय के फैसले के बाद स्पष्ट हो गया कि पूरे प्रकरण में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था। वहीं, फतेहगढ़ पुलिस की कार्रवाई को न्यायालय के समक्ष सही ठहराव मिला, जिससे पुलिस प्रशासन को बड़ी राहत मिली है।

गैस सिलेंडर न मिलने से भड़के उपभोक्ता, नेशनल गैस सर्विस के बाहर जाम लगाकर किया हंगामा

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गाड़ी ना आने की वजह से वितरित नहीं हो पाई गए, डीएसओ के समझाने पर खोला गया जाम
फर्रुखाबाद। शहर के लाल सराय क्षेत्र में गैस सिलेंडर न मिलने से नाराज उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को बड़ी संख्या में लोगों ने नेशनल गैस सर्विस के बाहर सड़क पर जाम लगाकर जोरदार हंगामा किया। इस दौरान महिलाओं की भी भारी भागीदारी रही, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गैस एजेंसी के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। एजेंसी की ओर से पहले ही सूचना चस्पा की गई थी कि मंगलवार को गैस सिलेंडर का वितरण किया जाएगा, लेकिन जब लंबे इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिले तो लोगों का आक्रोश भड़क उठा और उन्होंने सड़क जाम कर दी।


स्थिति को संभालने के लिए गैस एजेंसी मालिक फैजल ने उपभोक्ताओं को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित लोग किसी भी तरह मानने को तैयार नहीं थे। मामला बढ़ता देख पुलिस को सूचना दी गई, जिस पर शहर कोतवाली के कार्यवाहक कोतवाल संजीव सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी लोगों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और पुलिस की बात सुनने से इनकार कर दिया।


हालात बिगड़ते देख जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) सुरेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने उपभोक्ताओं से बातचीत कर उन्हें आश्वासन दिया कि जिन उपभोक्ताओं की बुकिंग पहले हुई है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि गैस की सप्लाई गाड़ी समय पर न आने के कारण वितरण नहीं हो सका।
डीएसओ ने यह भी कहा कि अब सभी उपभोक्ताओं को उनके घर तक गैस सिलेंडर पहुंचाया जाएगा और किसी को भी एजेंसी पर आकर लाइन में लगने की आवश्यकता नहीं होगी। उनके इस आश्वासन के बाद धीरे-धीरे उपभोक्ताओं का गुस्सा शांत हुआ और जाम खोल दिया गया।

फर्जी नंबर प्लेट से दौड़ रहे ओवरलोड ट्रक, टोल-परिवहन विभाग की मिलीभगत उजागर

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– 480 फर्जी नंबरों से 3200 ट्रकों का खेल, कई जिलों में फैला सिंडिकेट—इटौंजा में 900 ट्रक बिना रिकॉर्ड पार

लखनऊ।कई जिलों में ओवरलोड ट्रकों के बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें परिवहन विभाग, खनन विभाग और टोल प्लाजा के बीच कथित मिलीभगत सामने आ रही है। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि करीब 480 फर्जी नंबर प्लेटों के जरिए लगभग 3200 ट्रक लगातार टोल पार कर रहे हैं, लेकिन इनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, इस सिंडिकेट में शामिल ट्रक मालिक और ऑपरेटर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल कर ओवरलोड गाड़ियों को बेधड़क सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। यही नहीं, टोल प्लाजा पर इन ट्रकों की एंट्री तक दर्ज नहीं हो रही, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह अवैध नेटवर्क केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि बरेली , जालौन , हमीरपुर , कानपुर देहात , बाँदा और उन्नाव समेत कई जिलों में सक्रिय बताया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि यह कोई छोटा खेल नहीं, बल्कि संगठित स्तर पर संचालित बड़ा सिंडिकेट है।
लखनऊ के इटौंजा क्षेत्र में इस खेल का बड़ा उदाहरण सामने आया है, जहां करीब 900 ट्रकों ने फर्जी नंबर प्लेट के जरिए टोल प्लाजा पार किया, लेकिन उनके गुजरने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही से ज्यादा सुनियोजित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
इस पूरे मामले में परिवहन विभाग, खनन विभाग और टोल प्लाजा की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा बिना अधिकारियों की जानकारी के कैसे संभव हो सकता है।

महिला पर फायरिंग मामले में लापरवाही भारी, एसएसपी ने थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को किया सस्पेंड

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बिथरी चैनपुर के पुरनापुर कांड में एक्शन, विभागीय जांच के भी दिए आदेश
बरेली। महिला पर फायरिंग के मामले में लापरवाही बरतने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी चन्द्र प्रकाश शुक्ला को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही उपनिरीक्षक (एसआई) अमरेश कुमार और बीट कांस्टेबल आकाश के खिलाफ भी सख्त कदम उठाते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है।
यह कार्रवाई बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के पुरनापुर गांव में हुई महिला पर फायरिंग की घटना को लेकर की गई है। आरोप है कि इस गंभीर मामले में पुलिस ने समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की, जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती। इसी आधार पर एसएसपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से तीनों को निलंबित कर दिया।
एसएसपी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश जारी किए हैं। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में लापरवाही हुई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के रूप में देखा जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की लापरवाही, खासकर गंभीर अपराधों के मामलों में, कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुलिस-बदमाश मुठभेड़, 25 हजार का इनामी घायल—दो शातिर गिरफ्तार

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– 41 दिन पहले दंपति से लूट की वारदात का खुलासा, पुरवा-अचलगंज मार्ग पर हुई कार्रवाई
उन्नाव। पुलिस और शातिर बदमाशों के बीच मुठभेड़ का मामला सामने आया है। पुरवा-अचलगंज मार्ग पर हुई इस मुठभेड़ में 25 हजार रुपये का इनामी बदमाश पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसका साथी पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए बदमाशों की पहचान गैंगस्टर इरफान अहमद और प्रेम सिंह के रूप में हुई है। ये दोनों अपराधी लंबे समय से पुलिस के रडार पर थे और इन पर कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं।
41 दिन पहले की लूट का खुलासा
जांच में सामने आया है कि इन बदमाशों ने करीब 41 दिन पहले एक दंपति से लूटपाट की घटना को अंजाम दिया था। घटना के बाद से ही पुलिस इनकी तलाश में जुटी हुई थी। लगातार दबिश और सर्विलांस के जरिए पुलिस को इनके मूवमेंट की जानकारी मिली, जिसके बाद घेराबंदी कर मुठभेड़ की कार्रवाई की गई।
पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि बदमाश पुरवा-अचलगंज मार्ग से गुजरने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की। खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें एक बदमाश घायल हो गया।
घायल बदमाश को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। वहीं दूसरे आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अब दोनों आरोपियों के आपराधिक इतिहास को खंगाल रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इनके गैंग में और कौन-कौन शामिल हैं और किन-किन वारदातों को अंजाम दिया गया।
उन्नाव पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देती है। लगातार हो रही मुठभेड़ों से साफ है कि कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन सक्रिय है। हालांकि जरूरी है कि ऐसी कार्रवाई के साथ-साथ अपराध के मूल कारणों पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि स्थायी समाधान निकल सके।

एनसीईआरटी सिलेबस को लेकर डीएम का सख्त रुख, निजी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

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– मनमानी किताबों पर रोक की तैयारी, आदेश उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर चलेगा प्रशासन का डंडा
एटा । शिक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। जिलाधिकारी ने साफ निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी निजी स्कूलों को एनसीईआरटी सिलेबस का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। किसी भी प्रकार की अनियमितता या आदेश की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी निजी विद्यालय एनसीईआरटी के अलावा अन्य महंगी और अनधिकृत किताबें छात्रों पर थोपता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता पर सवाल, जुर्माना और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू कर रहे हैं। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था। कई मामलों में स्कूलों द्वारा तय दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव भी बनाया जा रहा था।
इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने यह सख्त कदम उठाया है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और नियंत्रित बनाया जा सके।
डीएम ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी निजी विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया जाए। स्कूलों में पढ़ाई जा रही किताबों, फीस संरचना और अन्य व्यवस्थाओं की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
यदि किसी भी विद्यालय में आदेशों का उल्लंघन पाया जाता है, तो तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम ने यह भी कहा कि एनसीईआरटी सिलेबस देशभर में एक समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे लागू करने से छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में भी लाभ मिलेगा और शिक्षा का स्तर बेहतर होगा।