– उच्च न्यायालय मे याचिका.प्रेस काउंसिल नई दिल्ली मे अवमानना
– अंदरखाने विधायक का दवाव और जिला सुरक्षा समिति की भ्रामक रिपोर्ट का हवाला
– बोले, शरद कटियार कभी भी उनके व परिवार साथ हो सकती अनहोनी
– सरकार पर नहीं भरोसा,जिले के नेता विरोध मे
फर्रुखाबाद। निष्पक्ष पत्रकारिता करने की कीमत अब जान का खतरा बनती दिख रही है। दैनिक यूथ इंडिया के संपादक शरद कटियार ने अपनी सुरक्षा हटाए जाने और प्रशासनिक स्तर पर “भ्रामक रिपोर्ट” तैयार करने के गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे भारतीय प्रेस परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है। मामला अब प्रदेश की कानून-व्यवस्था और “जीरो टॉलरेंस” नीति पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है।साथ ही मुख्यमंत्री समेत उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया है।
शरद कटियार ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि उन्होंने वर्ष 2012 से लगातार जिले में सक्रिय माफिया नेटवर्क, अवैध कब्जे, और अपराधियों के गठजोड़ को उजागर किया। इन रिपोर्टों के चलते कथित रूप से कई प्रभावशाली माफिया और उनके सहयोगी उनके “जान-माल के दुश्मन” बन गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के खिलाफ खबरें प्रकाशित हुईं, उन्हीं के दबाव और साठगाठ में फर्रुखाबाद का चर्चित राजनैतिक ताकतवर तंत्र उनकी सुरक्षा व्यवस्था के पीछे पढ़ गया और जनपद से लेकर कानपुर जोन स्तर और शासन को गुमराह किया जाने लगा है।
पत्र में उल्लेख है कि भारतीय प्रेस परिषद के आदेश और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद वर्ष 2020 में उन्हें सुरक्षा प्रदान की गईं थी । लेकिन 23 फरवरी 2023 को बिना समुचित जांच के यह सुरक्षा हटा दी गई। क्योंकि उन्होंने अपने कार्यक्रम में प्रदेश के ताकतवर मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को बुलाया था खन्ना का हेलीकाप्टर पुलिस लाइन मे लैंड हुआ था,और वह 6 फरवरी 2023 को न केवल उनके कार्यक्रम में आए थे बल्कि उसी दिन उन्होंने जनपद मे लिंक एक्सप्रेस- वे बनाए जाने की घोषणा भी की थी,जो की जिले के कुछ नेताओं को नागवार गुजारी थी। उस कार्यक्रम के चंद दिनों बाद ही बिना किसी कारण शासन से उनकी सुरक्षा में लगा गनर वापस करा दिया गया था और उनके सहयोगी एक वरिष्ठ पत्रकार को झूठ दलित उत्पीड़न के मुकदमे में फसवाया गया था।जबकि जनपद से आयुक्त कानपुर के माध्यम से संस्तुति जिला प्रशासन ने शासन को की थी।
उनके आवेदन के बाद भी आज तक उनके शस्त्र लाइसेंस रिवाल्वर का भी नवीनीकरण नहीं होने दिया गया।न ही लाइसेंस निरस्त हुआ, जबकि 4 साल बिना नवीनीकरण के उनका लाइसेंस निरस्त हो जाना चाहिए,इससे भी अधिक गंभीर आरोप यह है कि सुरक्षा बढ़ाने की संस्तुति शासन तक भेजे जाने के बावजूद उसे नजरअंदाज कर दिया गया। प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना जिले के प्रभारी और प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह,जनपद न्यायाधीश के दखल के बाद, और पुलिस महानिदेशक व अपर मुख्य सचिव गृह द्वारा निष्पक्ष जांच आख्या मांगने के बाद भी जनपद से राजनीतिक दबाव के चलते भ्रामक रिपोर्ट प्रेषित कराई जा रही।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि फर्रुखाबाद जनपदीय सुरक्षा समिति ने 2025 और 2026 में तीन अलग-अलग रिपोर्ट भेजीं,19 नवंबर 2025, 6 फरवरी 2026 और 22 अप्रैल 2026 जो एक-दूसरे से पूरी तरह विरोधाभासी हैं। कहीं प्रार्थी को लखनऊ में रहने वाला बताया गया, तो कहीं फर्रुखाबाद में। यहां तक कि पारिवारिक स्थिति तक में गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए। यह तक कह दिया कि उनकी माता जी का देहांत पूर्व में ही हो चुका है, जबकि वह जिंदा हैं,इसे लेकर उन्होंने आरोप लगाया गया है कि ये रिपोर्टें “राजनीतिक और माफिया दबाव” में तैयार की गईं।
इस पूरे प्रकरण में फर्रुखाबाद सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, उनके भाई और कई अन्य प्रभावशाली लोगों के दबाव का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
कटियार ने यह भी आशंका जताई है कि उनके खिलाफ कभी भी झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा सकते हैं या किसी बड़ी साजिश के तहत उन्हें नुकसान पहुंचाया जा सकता है। पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और झूठी रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक और वर्तमान जिलाधिकारी सहित कई उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है।
फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक पत्रकार की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश में माफिया के खिलाफ लिखने वाले पत्रकार सुरक्षित हैं? और क्या प्रशासनिक तंत्र राजनीतिक दबाव में सच को दबा रहा है?