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Sunday, May 31, 2026
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मिर्जापुर में दो फॉर्च्यूनर से करोड़ों रुपये बरामद, आयकर विभाग ने दो व्यापारियों को भेजा नोटिस

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मिर्जापुर: यूपी के मिर्जापुर (Mirzapur) जिले में दो फॉर्च्यूनर (two Fortuners) गाड़ियों से करोड़ों रुपये नकदी बरामद होने के बाद मामला अब सिर्फ कैश रिकवरी का नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क, मुखबिरी और जांच की गंभीरता का सवाल बन गया है। इस मामले में आयकर विभाग ने दो व्यापारियों को नोटिस जारी करते हुए पैसों का हिसाब मांगा है। उन्हें चार दिन के भीतर जवाब देना होगा।

चील्ह थाना क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस ने दो फॉर्च्यूनर गाड़ियों को रोका। शुरुआती जानकारी में नकदी करीब 4 करोड़ रुपये बताई गई। नोटों की गिनती के लिए बैंक से मशीन मंगानी पड़ी और कई घंटे तक गिनती चली। लेकिन बाद में पुलिस की ओर से रकम करीब 1.90 करोड़ रुपये बताई जाने लगी। यही सबसे बड़ा सवाल है, पहले 4 करोड़ की चर्चा और बाद में 1.90 करोड़ का आंकड़ा, आखिर बीच में यह अंतर क्यों आया?

सूत्रों के मुताबिक एक गाड़ी ट्रांसपोर्ट/गिट्टी-बालू कारोबार से जुड़ी फर्म के नाम बताई जा रही है, जबकि दूसरी गाड़ी भी खनन, गिट्टी, बालू और पेट्रोल पंप कारोबार से जुड़े लोगों से संबंधित बताई जा रही है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी नकदी आखिर किसकी थी? यह पैसा कहां से आया और किसे दिया जाना था?

बताया जा रहा है कि वाहन मिर्जापुर की तरफ आ रहे थे। पुलिस को पहले से सूचना मिली और चील्ह चौराहे पर गाड़ियों को रोका गया। यानी यह सामान्य चेकिंग में अचानक पकड़ी गई रकम थी या किसी ने सटीक मुखबिरी की थी। यह भी जांच का बड़ा बिंदु है।

अभिनीत बंसल को मिर्जापुर का बड़ा कारोबारी बताया जा रहा है, जिनका गिट्टी सप्लाई, पेट्रोल पंप, क्रशर प्लांट और ट्रांसपोर्ट से जुड़ा कारोबार बताया जाता है। भारत सिंह मध्य प्रदेश के सीधी से जुड़े बताए जा रहे हैं। अब जांच इस बात की होनी चाहिए कि दोनों के बीच कारोबारी संबंध क्या हैं और नकदी का वास्तविक स्रोत क्या है।

सबसे बड़ा सवाल आयकर विभाग की कार्रवाई पर भी है। करोड़ों की नकदी मिलने के बाद सिर्फ नोटिस जारी करना पर्याप्त है या तत्काल व्यापक छापेमारी होनी चाहिए थी? इतनी बड़ी रकम बरामद होने के बाद अगर तत्काल ठिकानों, फर्मों, पेट्रोल पंपों, क्रशर प्लांटों, बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच नहीं हुई, तो क्या संभावित सबूत हटाने का समय मिल गया?

यह मामला खनन कारोबार, नकद लेनदेन, टैक्स चोरी और संभावित हवाला नेटवर्क तक जा सकता है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि क्या केवल आयकर विभाग की नोटिस कार्रवाई काफी है या अब ED और अन्य एजेंसियों की एंट्री भी होनी चाहिए?

फिलहाल नकदी, गाड़ियां और संबंधित लोग जांच के दायरे में हैं। लेकिन जनता का सवाल साफ है क्या यह सिर्फ व्यापारी का पैसा है या इसके पीछे खनन, टैक्स और काले धन का बड़ा खेल छिपा है?

गाजियाबाद में युवक की हत्या के बाद शव ले उड़े बदमाश, लोनी थाना प्रभारी सस्पेंड

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गाजियाबाद: यूपी के गाजियाबाद (Ghaziabad) जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक युवक की पहले निर्ममता से हत्या कर दी गई और उसके बाद हत्यारे शव को लेकर फरार हो गए। इस पूरे मामले में लोनी थाना पुलिस (Loni police station) की ओर से घोर लापरवाही देखने को मिली। जिसके बाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने एक्शन लिया और तत्काल प्रभाव से लोनी थाना प्रभारी मुकेश सोलंकी को सस्पेंड कर दिया है।

यह पूरा मामला जिले के लोनी थाना क्षेत्र का है। जहां, बेखौफ बदमाशों ने खरखड़ी मोड़ पर ओमकार नाम के युवक की दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। आरोपी नहीं रुके और मृतक की डेड बॉडी को अपनी गाड़ी में भरकर फरार हो गए। इस पूरे मामले में लोनी थाना पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई। जिसके बाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने लोनी थाना प्रभारी मुकेश सोलंकी को सस्पेंड कर दिया।

मिली जानकारी के मुताबिक गलौनी निवासी मृतक के बेटे देवांश पर 20 मई को जानलेवा हमला हुआ था। इस घटना के बाद परिजनों ने थाने में लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई और जान का खतरा बताया। परिजनों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद लोनी पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जिसके चलते ओमकार को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

इस घटना ने एक बार फिर यूपी पुलिस की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। पुलिस अब तक मृतक का शव बरामद करने में पूरी तरह से नाकाम रही है। यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और सबसे शर्मनाक पहलू बन गया है।

 

उत्तर प्रदेश के स्थायी DGP बने राजीव कृष्ण, चार साल बाद राज्य को मिला स्थायी पुलिस मुखिया

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में एक वर्ष के कार्यकाल के बाद, राजीव कृष्णा (Rajiv Krishna) को रविवार को इस पद पर स्थायी कर दिया गया। राज्य को चार साल बाद अपना पहला स्थायी DGP मिलेगा। 11 मई, 2022 को सरकार ने तत्कालीन पूर्णकालिक डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटा दिया था और तब से राज्य में केवल कार्यवाहक डीजीपी ही नियुक्त किए गए थे।

सूत्रों ने रविवार को यहां बताया कि राज्य सरकार ने इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। वर्तमान डीजीपी कम से कम दो वर्षों तक इस पद पर रहेंगे। राजीव कृष्णा 1 जून, 2025 से कार्यवाहक डीजीपी थे।

सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने स्थायी डीजीपी के पद के लिए 19 आईपीएस अधिकारियों के नामों की सूची संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को सौंपी थी। आयोग ने 26 मई को दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें रेणुका मिश्रा, पीयूष आनंद और राजीव कृष्णा के नामों को अंतिम रूप दिया गया। इसके बाद आयोग ने तीनों के नाम उत्तर प्रदेश सरकार को भेज दिए।

राजीव कृष्णा 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, जिनका जन्म 26 जून, 1969 को हुआ था। वे वर्तमान में सतर्कता निदेशक और पुलिस भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। 11 मई, 2022 को स्थायी डीजीपी मुकुल गोयल को हटाए जाने के बाद, डी.एस. चौहान को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया, जिसके बाद आर.के. विश्वकर्मा दो महीने के लिए इस पद पर रहे। आर.के. विश्वकर्मा के बाद विजय कुमार ने और विजय कुमार के बाद प्रशांत कुमार ने कार्यवाहक डीजीपी का पद संभाला। प्रशांत कुमार पिछले साल 31 मई को सेवानिवृत्त हुए। उनके बाद राजीव कृष्णा ने यह पद संभाला।

महरौली बिल्डिंग हादसा: मालिक पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज, गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छापेमारी शुरू

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नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के महरौली (Mehrauli) स्थित सैदुलाजाब इलाके में निर्माणाधीन इमारत (building) ढहने के मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए भवन मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं।

घटना के बाद राहत और बचाव अभियान पूरी रात जारी रहा। मलबे में अभी भी लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते एनडीआरएफ समेत कई एजेंसियां मौके पर तैनात हैं और सर्च ऑपरेशन जारी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने रविवार को घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने उचित कार्रवाई का आदेश दिया। जिसके बाद प्रशासन ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए महरौली थाने में आपराधिक मामला दर्ज कराया है। साथ ही दक्षिण जिले के जिलाधिकारी की निगरानी में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आसपास की खतरनाक और जर्जर इमारतों का सर्वेक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, राजधानी में अवैध निर्माणों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने और लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान 26 वर्षीय रवि के रूप में हुई है। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घायलों में साइका खान (27), आदित्य शर्मा (24), तरुण कुमार (26), अनुज दीक्षित (25), नीलम यादव (25), क्षितिज प्रताप (25), आस्था (25) और विशाल (24) शामिल हैं। सभी का इलाज एम्स ट्रॉमा सेंटर में जारी है।

यह हादसा शनिवार शाम उस समय हुआ जब सैदुलाजाब इलाके में एक चार मंजिला निर्माणाधीन व्यावसायिक भवन अचानक भरभराकर गिर गया। इमारत का मलबा पास स्थित टीन शेड कैंटीन पर भी गिरा, जहां उस समय कई लोग मौजूद थे। हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया।

प्रशासन के अनुसार, अब तक कुल नौ लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इनमें दो लोगों को स्थानीय नागरिकों ने बचाया, जबकि सात लोगों को एनडीआरएफ और डीडीएमए की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बाहर निकाला। निकाले गए लोगों में से एक की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य का उपचार जारी है।

आत्मसम्मान आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने में अर्जक संघ की बड़ी भूमिका : जी. करुणानिधि

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लखनऊ। सामाजिक समानता, वैज्ञानिक चेतना और मानवतावादी मूल्यों के प्रसार के संकल्प के साथ अर्जक संघ ने रविवार को अपना 59वां स्थापना दिवस समारोह राजधानी लखनऊ के गांधी भवन स्थित करन भाई सभागार में मनाया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, चिंतकों और प्रगतिशील विचारधारा के लोगों ने भाग लेकर सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक बदलाव की दिशा में अर्जक संघ की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की।

समारोह के मुख्य अतिथि तमिलनाडु सरकार के आंतरिक मामलों के सचिव जी. करुणानिधि ने कहा कि दक्षिण भारत में पेरियार ई.वी. रामास्वामी नायकर द्वारा शुरू किए गए आत्मसम्मान आंदोलन के 100 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस आंदोलन ने सामाजिक असमानता, जातिगत भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ व्यापक जनजागरण किया। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में इसी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने में अर्जक संघ ने महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि आज भी देश की बड़ी आबादी सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों से बराबरी के अधिकारों से वंचित है तथा विभिन्न मानकों पर दोयम दर्जे का जीवन जीने को मजबूर है। ऐसे समय में सामाजिक चेतना और आत्मसम्मान के आंदोलनों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।

प्रसिद्ध लेखक एवं सामाजिक चिंतक विद्या भूषण रावत ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर और पेरियार के मानवतावादी विमर्श को समाज में स्थापित करने और उसे जनआंदोलन का स्वरूप देने में अर्जक संघ का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए वैचारिक संघर्ष और जनजागरण दोनों आवश्यक हैं।

प्रख्यात चित्रकार एवं संस्कृतिकर्मी डॉ. लाल रत्नाकर ने कहा कि अर्जक संघ ने सांस्कृतिक वर्चस्ववाद को चुनौती देकर वैकल्पिक सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि आज समाज के सभी प्रगतिशील वर्गों की जिम्मेदारी है कि वे सांस्कृतिक वर्चस्ववाद के खिलाफ एकजुट होकर लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों की रक्षा करें।

प्रो. रीता चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि अर्जक संस्कृति महिलाओं के नैसर्गिक अधिकारों, सम्मान और न्याय की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समानता का सपना महिलाओं की बराबर भागीदारी और सम्मान के बिना पूरा नहीं हो सकता।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्जक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार भारती ने की। उन्होंने संगठन के संघर्षों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अर्जक संघ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावादी सोच और सामाजिक न्याय की लड़ाई को और व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

समारोह में वैज्ञानिकवादी और मानवतावादी सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई। अर्जक संघ के प्रतिनिधियों ने संगठन की उस मूल अवधारणा को दोहराया जिसके अनुसार रोजगार, धन और धरती पर आबादी के अनुपात में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिलीप गौतम ने किया। इस अवसर पर डॉ. अनूप पटेल, मनोज पासवान, चन्द्रभान यादव, कामरेड राहुल यादव, सुनील वर्मा, मुरली मनोहर कनौजिया, श्यामू चौधरी, भागवत पटेल, हरीश गंगवार, अनिल यादव मास्टर, आलोक यादव, कपिल भार्गव, ब्रजेश सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट: यूथ इंडिया डेस्क

दिल्ली के बक्करवाला में एनकाउंटर, मुठभेड़ के बाद हिमांशु भाऊ गैंग का कुख्यात अपराधी गिरफ्तार

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नई दिल्ली: दिल्ली का बक्करवाला (Bakkarwala) शनिवार देर रात गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। पुलिस और बदमाश के बीच एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस स्पेशल स्टाफ (Delhi Police Special Staff) हिमांशु भाऊ गैंग का कुख्यात बदमाश आशीष बक्करवाला गिरफ्तार करने में सफल हुई। आशीष बक्करवाला कुख्यात ऑटो लिफ्टर मनोज बक्करवाला का बेटा है। पुलिस आगे की जांच में जुट गई है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक आशीष बक्करवाला पर हत्या समेत आठ से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह चार मामलों में वांछित चल रहा था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, वह कुख्यात हिमांशु भाऊ गैंग के लिए काम कर रहा था। कार्रवाई की जानकारी देते हुए दिल्ली स्पेशल स्टाफ ने बताया कि कुख्यात अपराधी आशीष के अपने गांव बक्करवाला आने की खुफिया सूचना मिली थी।

सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके में घेराबंदी कर जाल बिछाया। पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस की तरफ से की गई त्वरित जवाबी कार्रवाई में आशीष घायल हो गया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान दोनों तरफ से दो-दो राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग हुई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आशीष बक्करवाला का पुराना आपराधिक इतिहास है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, हत्या के मामले में जेल की सजा काटकर बाहर आने के बाद वह कुख्यात हिमांशु भाऊ गैंग में शामिल हो गया था और उसी के इशारे पर वारदातों को अंजाम दे रहा था।

पकड़े गए इस शातिर अपराधी पर दिल्ली के विभिन्न थानों में आठ से भी अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह लंबे वक्त से पुलिस की गिरफ्त से दूर था और चार गंभीर मामलों में वांछित (वांटेड) अपराधी के रूप में उसकी तलाश की जा रही थी। हाल ही में 14 मई की रात को राजधानी के मुंडका, रनहोला और कंझावला इलाकों में जो ताबड़तोड़ फायरिंग की वारदातें हुई थीं, उन सभी मामलों में भी इस आरोपी का नाम मुख्य रूप से सामने आया था।