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Monday, February 16, 2026
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युवती के भाइयों ने युवक का ब्लेड से गला रेता, 25 टांके लगे

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लखनऊ। राजधानी के पारा क्षेत्र में रविवार शाम प्रेम प्रसंग के चलते सनसनीखेज वारदात सामने आई। मोहान रोड स्थित खुशहालगंज गांव में युवती के दो सगे भाइयों ने युवक के घर में घुसकर सर्जिकल ब्लेड से उसका गला रेत दिया। गंभीर रूप से घायल युवक के गले में 25 टांके लगाए गए हैं। फिलहाल उसका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है और हालत गंभीर बताई जा रही है।
खुशहालगंज निवासी सन्तू कन्नौजिया के बेटे महेन्द्र कन्नौजिया (25) का बीते एक वर्ष से काकोरी क्षेत्र की एक युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। परिजनों के अनुसार, रविवार शाम करीब चार बजे युवती स्वयं युवक के घर पहुंची थी। इसी दौरान शाम करीब साढ़े पांच बजे युवती के भाई शिवम गौतम (25) और अनुराग गौतम (19) घर के बरामदे में पहुंचे। शुरुआत में सामान्य बातचीत की, लेकिन कुछ ही देर बाद दोनों ने महेन्द्र को जमीन पर गिरा दिया और ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले सर्जिकल ब्लेड से उसके गले पर दो बार वार कर दिया।
अचानक हुए हमले से घर में अफरा-तफरी मच गई। पीड़ित के पिता सन्तू कन्नौजिया और चाचा रमेश ने साहस दिखाते हुए आरोपियों के हाथ से ब्लेड छीन ली, जिससे युवक की जान बच सकी। गले में गहरे जख्म लगने से महेन्द्र मौके पर ही बेहोश हो गया। घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य मुकेश कन्नौजिया, जगदीश कन्नौजिया और ममता भी मौजूद थे।
घायल युवक को तत्काल पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के मुताबिक गले में दो स्थानों पर गंभीर चोट आई है, जिसमें एक जगह 18 और दूसरी जगह 7 टांके लगाए गए हैं। डॉक्टरों ने फिलहाल युवक को खतरे से बाहर बताया है, हालांकि उसकी स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।
परिजनों ने दोनों आरोपियों को मौके से पकड़ लिया और वारदात में प्रयुक्त ब्लेड के साथ थाने ले जाकर पुलिस को सौंप दिया। थाना पारा के इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने बताया कि देर रात रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जनता दर्शन में सीएम योगी सख्त: हर फरियादी को न्याय का भरोसा, उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश

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लखनऊ। योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राजधानी में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में स्वयं उपस्थित रहकर फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी शिकायत लेकर सीधे लखनऊ आने से पहले जनपद और मंडल स्तर पर तैनात अधिकारियों से अवश्य मिलें। उन्होंने कहा कि जिला और मंडल स्तर पर अधिकारी आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं। यदि वहां समाधान न हो पाए, तभी राजधानी आकर अपनी बात रखें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिकतम शिकायतों का निस्तारण जनपद स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाए।
जनता दर्शन के दौरान कुछ उद्यमियों ने औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) और जिला प्रशासन को समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। निवेश और उद्योग विकास में किसी भी प्रकार की देरी या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।
कार्यक्रम में एक नागरिक ने बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने इस मांग पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल और शारीरिक गतिविधियां भी आवश्यक हैं।
इसके अलावा अवैध कब्जों और पुलिस से जुड़े मामलों में भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनता दर्शन के दौरान अभिभावकों के साथ आए बच्चों से मुख्यमंत्री ने आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पढ़ाई के बारे में पूछा और उन्हें मन लगाकर पढ़ने, खूब खेलने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की। कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक सक्रियता और संवेदनशीलता का संदेश स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

दीपावली की पुरानी रंजिश ने लिया हिंसक रूप: दो पक्षों में जमकर चले लाठी-डंडे, दो युवक गंभीर घायल; फायरिंग की अफवाह निकली झूठी

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अमृतपुर/फर्रुखाबाद।

थाना अमृतपुर क्षेत्र के गांव पंचम नगला में पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों के बीच उस समय तनाव फैल गया, जब मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। दोनों ओर से जमकर लाठी-डंडे चले, जिससे दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में फायरिंग की चर्चा फैल गई, लेकिन पुलिस जांच में गोली चलने की बात असत्य पाई गई।
घायलों की पहचान दिनेश पुत्र शालिग्राम (उम्र 30 वर्ष) और ध्यानपाल पुत्र अहिलकार (उम्र 19 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को तत्काल अस्पताल भिजवाकर मेडिकल परीक्षण कराया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद अचानक भड़का और देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए।
घायल दिनेश ने आरोप लगाया कि संदीप यादव समेत कई लोग अचानक मौके पर पहुंचे और मारपीट शुरू कर दी। दिनेश ने स्वयं को गोली लगने की बात कही, लेकिन चिकित्सीय परीक्षण में गोली लगने की पुष्टि नहीं हुई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल से ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे फायरिंग की पुष्टि हो सके।
बताया जा रहा है कि बीती दीपावली पर संदीप के साथ हुई मारपीट को लेकर दोनों पक्षों में पहले से रंजिश चली आ रही थी। उसी विवाद की आग दोबारा भड़कने से यह घटना सामने आई।
फायरिंग की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी संजय वर्मा मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर दोनों पक्षों से पूछताछ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया मामला लाठी-डंडों से मारपीट का है और गोली चलने की घटना निराधार है।
पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहनता से जांच की जा रही है तथा दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर शांति व्यवस्था बनाए रखी गई है।

25 साल पुराने भवनों को मिलेगा नया जीवन: योगी सरकार ने लागू की ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’

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लखनऊ। प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पुराने हो चुके ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की जर्जर स्थिति को देखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ लागू कर दी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शहरी एवं नियोजन विभाग द्वारा इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। इस नीति का उद्देश्य 25 वर्ष या उससे अधिक पुराने तथा संरचनात्मक रूप से असुरक्षित भवनों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधायुक्त स्वरूप में पुनर्विकसित करना है, ताकि नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिल सकें।
प्रदेश के कई शहरों में पुराने अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं अब कमजोर हो चुकी हैं। ऐसे भवनों में निवास करना जोखिमपूर्ण बनता जा रहा है और महंगी शहरी भूमि का समुचित उपयोग भी नहीं हो पा रहा। नई नीति के माध्यम से सरकार इन परिसरों का सुनियोजित पुनर्विकास कर शहरों के स्वरूप को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
नीति के तहत वे सभी सार्वजनिक और निजी आवासीय प्रोजेक्ट पुनर्विकास के पात्र होंगे, जो कम से कम 25 वर्ष पुराने हैं या जिन्हें स्ट्रक्चरल ऑडिट में असुरक्षित घोषित किया गया हो। हाउसिंग सोसायटी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के मामलों में प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों की सहमति अनिवार्य होगी। हालांकि 1500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल की भूमि, एकल आवास, नजूल भूमि, लीज पर आवंटित भूमि तथा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की भूमि को इस नीति से बाहर रखा गया है।
पुनर्विकास के लिए सरकार ने तीन मॉडल तय किए हैं। पहला, शासकीय एजेंसी द्वारा सीधे कार्य निष्पादन; दूसरा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल, जिसमें निजी डेवलपर की भागीदारी होगी; और तीसरा सोसायटी या एसोसिएशन द्वारा स्वयं पुनर्विकास। पीपीपी मॉडल के तहत शासकीय अभिकरण, डेवलपर और सोसायटी के बीच त्रिपक्षीय समझौता होगा, जिसमें सभी पक्षों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएंगी।
हर परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करना अनिवार्य होगा। इसमें नए फ्लैट्स का कारपेट एरिया, पार्किंग व्यवस्था, कॉन्ट्रीब्यूटरी एरिया, ट्रांजिट आवास या किराया व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और तय समयसीमा का स्पष्ट उल्लेख होगा। पुनर्विकास के दौरान अस्थायी रूप से विस्थापित होने वाले निवासियों को वैकल्पिक आवास या किराया प्रदान किया जाएगा, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सरकार ने परियोजनाओं को सामान्यतः तीन वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। विशेष परिस्थितियों में अधिकतम दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकेगा। नियोजन मानकों में व्यावहारिक लचीलापन भी रखा गया है, जिससे बोर्ड की मंजूरी से केस-टू-केस आधार पर कुछ शर्तों में ढील दी जा सके। साथ ही, आपस में जुड़े एक से अधिक भूखंडों को मिलाकर समेकित पुनर्विकास की अनुमति दी गई है, जिससे बेहतर शहरी नियोजन संभव हो सके।

ई-मेल से लखनऊ कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस-डॉग स्क्वॉड ने घंटों चलाया सर्च अभियान

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लखनऊ। राजधानी स्थित न्यायालय परिसर को सोमवार सुबह एक बार फिर ई-मेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन तत्काल अलर्ट मोड में आ गया। आनन-फानन में भारी पुलिस बल, डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ता कोर्ट परिसर पहुंचा और सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। कई घंटे चली जांच के बाद कोई संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति नहीं मिला, जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
सूत्रों के अनुसार, यह धमकी भरा ई-मेल न्यायालय से जुड़े आधिकारिक पते पर भेजा गया था। सुरक्षा के मद्देनजर कोर्ट परिसर में प्रवेश और निकास पर सख्ती बढ़ा दी गई। अधिवक्ताओं और वादकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई तथा हर आने-जाने वाले की जांच की गई। तलाशी अभियान के दौरान कोर्ट परिसर के भीतर और आसपास के क्षेत्रों को खंगाला गया, लेकिन किसी प्रकार का विस्फोटक या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।
गौरतलब है कि तीन दिन पहले भी इसी तरह का धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था, जिसमें लखनऊ समेत प्रदेश के 18 जिलों में कचहरी परिसर को निशाना बनाने की बात कही गई थी। उस ई-मेल में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद दोपहर दो बजे धमाका करने की धमकी दी गई थी। संदेश मिलते ही कचहरी को तत्काल खाली कराया गया था। न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया था और बम निरोधक दस्ते ने पूरे परिसर की जांच की थी। हालांकि उस समय भी कोई विस्फोटक नहीं मिला और मामला शरारतपूर्ण हरकत निकला।
ताजा मामले में भी वजीरगंज पुलिस को तत्काल सूचना दी गई, जिसके बाद खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गईं। कोर्ट परिसर के सभी गेटों पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
इस संबंध में कोर्ट नाजिर की ओर से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ वजीरगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस साइबर सेल की मदद से ई-मेल भेजने वाले की पहचान करने में जुटी है। लगातार मिल रही धमकियों के चलते न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और न्यायिक कार्य प्रभावित न हो।

एसआईआर में वोट कटौती की साजिश का आरोप, भाजपा चुनाव हार के डर से कर रही हेरफेर: अखिलेश यादव

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा सरकार पर मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा पीडीए और विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के वोट कटवाने की साजिश कर रही है। फॉर्म-7 के माध्यम से वोटों की चोरी की जा रही है और निर्वाचन आयोग इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा सरकार वोट काटकर चुनाव जीतना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की एक गुप्त बैठक में यह तय किया गया कि हर विधानसभा क्षेत्र में वोट कटवाए जाएंगे। कन्नौज का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां एक नेता ने बयान दिया था कि ज्यादा पढ़ा-लिखा व्यक्ति कभी-कभी गलती कर देता है। उन्होंने कहा कि भाजपा को आभास हो चुका है कि इस बार उत्तर प्रदेश का चुनाव वह नहीं जीत पाएगी, इसलिए इस तरह की हरकतें की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सकलडीहा विधानसभा में फॉर्म-7 के 16 आवेदन जमा किए गए, जबकि बाबागंज विधानसभा के बूथ संख्या 365 पर फर्जी हस्ताक्षर कर करीब 100 वोट कटवा दिए गए। यहां तक कि समाजवादी पार्टी के एक बीएलए का भी नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। इसे उन्होंने सीधी साजिश करार देते हुए कहा कि असली वोटरों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि औरैया नगर अध्यक्ष का नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया। इसके अलावा बलिया के सिकंदरपुर क्षेत्र से सपा विधायक की पत्नी का नाम भी सूची से काट दिया गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को उलझाए रखने और कमजोर करने की यह रणनीति है।
अयोध्या का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक बूथ पर 181 नोटिस जारी हुए, जिनमें से 76 प्रतिशत पीडीए समाज को मिले। इनमें 46 प्रतिशत नोटिस यादव और मुस्लिम समुदाय के लोगों को दिए गए। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में सपा ने 47 फॉर्म-7 भरे, जबकि भाजपा की ओर से लगभग एक हजार आवेदन दिए गए।
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने एक करोड़ वोट बढ़वाए हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईआर से पहले पूरा देश परेशान था और अब भाजपा खुद परेशान नजर आ रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और हर बात का जवाब देगी। उन्होंने चेतावनी दी कि समाजवादी पार्टी वोट में किसी भी प्रकार का घोटाला नहीं होने देगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।