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Monday, June 1, 2026
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वाराणसी एयरपोर्ट से 19.70 करोड़ रुपये का गांजा जब्त, 6 थाई नागरिक गिरफ्तार

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वाराणसी: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (बाबतपुर) पर एयर कस्टम्स (Air Customs) की बड़ी कार्रवाई में करीब ₹19.70 करोड़ कीमत की हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद की गई है। यह कार्रवाई बैंकॉक से वाराणसी (Varanasi ) पहुंची फ्लाइट संख्या IX-215 के यात्रियों की जांच के दौरान की गई। एयर कस्टम्स अधिकारियों को कुछ ट्रॉली बैगों में संदिग्ध छिपाव का संदेह हुआ, जिसके बाद छह विदेशी यात्रियों को अलग कर विस्तृत जांच की गई।

एक्स-रे स्क्रीनिंग और भौतिक तलाशी के दौरान ट्रॉली बैगों के निचले हिस्से में विशेष रूप से बनाई गई गुप्त कैविटी से हाइड्रोपोनिक गांजा के 22 पैकेट बरामद किए गए। बरामद मादक पदार्थ का कुल वजन 19.7049 किलोग्राम है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 19.70 करोड़ बताई गई है।

गिरफ्तार किए गए विदेशी नागरिकों की पहचान विचनचाई फलाकित, नत्थाफोंग चंतराक, प्राचाया यीकोर, प्रिसाना चोडमोन, पट्टामावान चोटिमोन तथा सुनिसा पुएटपाकवान के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि इस काम के लिए 25-25 हजार रुपये दिए जाने थे। उनके साथ एक थाई महिला भी आई थी। वही गांजे की खेप की डिलीवरी सुनिश्चित करती थी। आरोपी पहले कोलकाता और गया के रास्ते भी मादक पदार्थों की तस्करी कर चुके हैं।

 

3.25 लाख करोड़ की मेगा डील: भारत खरीदेगा 114 राफेल लड़ाकू विमान, 94 जेट देश में बनेंगे

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नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना की ताकत को नई उड़ान देने की दिशा में भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत ने फ्रांस को 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदे का अनुरोध पत्र (एलओआर) भेज दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 114 में से 94 राफेल विमान भारत में ही तैयार किए जाएंगे, जिससे देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अधिग्रहण विभाग ने पिछले सप्ताह फ्रांसीसी सरकार को प्रस्ताव भेजा है। योजना के तहत फ्रांस की डसॉ एविएशन किसी भारतीय साझेदार कंपनी के साथ मिलकर भारत में राफेल विमानों का निर्माण करेगी। यह पहली बार होगा जब राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस के बाहर बनाए जाएंगे। परियोजना में लगभग 50 प्रतिशत स्थानीयकरण होगा, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण पुर्जों और प्रणालियों का निर्माण भारत में किया जाएगा।

भारतीय वायु सेना इस समय लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रनों की कमी से जूझ रही है। ऐसे में अत्याधुनिक 4.5 पीढ़ी के राफेल विमानों की बड़ी संख्या में खरीद को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में भारतीय वायु सेना और नौसेना कुल 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। यदि 114 नए विमानों की खरीद पूरी होती है तो देश में राफेल विमानों की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। वहीं नौसेना द्वारा भविष्य में 31 अतिरिक्त राफेल विमानों की मांग पूरी होने पर यह संख्या 200 के पार पहुंच सकती है।

सूत्रों का कहना है कि फ्रांस अगले दो से तीन महीनों में भारत के प्रस्ताव का जवाब दे सकता है। दोनों देशों के बीच विस्तृत वार्ता और तकनीकी चर्चाओं के बाद अगले एक वर्ष में समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित फ्रांस यात्रा के दौरान भी इस महत्वपूर्ण रक्षा सौदे पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा केवल वायु सेना की मारक क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत को अत्याधुनिक रक्षा तकनीक, रोजगार सृजन और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने में भी बड़ी मदद मिलेगी। सरकार का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और इसमें किसी भी प्रकार के बिचौलिए की भूमिका नहीं रहेगी।

बिजली उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत, 10 फीसदी अतिरिक्त बिल वसूली पर आयोग ने उठाए सवाल

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने में बड़ी राहत मिल सकती है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा फ्यूल सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली बिल वसूलने के आदेश पर गंभीर आपत्ति जताई है। आयोग ने इस आदेश को प्रथम दृष्टया नियामकीय प्रावधानों के विपरीत मानते हुए पावर कॉरपोरेशन से सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है।

पावर कॉरपोरेशन ने 29 मई को जारी आदेश में जून माह के बिजली बिलों के साथ उपभोक्ताओं से लगभग 1610 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूलने का निर्णय लिया था। इस फैसले के खिलाफ विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग में जनहित प्रत्यावेदन दाखिल कर जांच और वसूली पर रोक लगाने की मांग की थी।

आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि फ्यूल एवं पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) की गणना में पुराने बकाया भुगतान, पूर्व अवधि की देनदारियों और अन्य ऐतिहासिक खर्चों को शामिल कर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला गया है, जो उपभोक्ता संरक्षण के मूल सिद्धांतों और नियामकीय व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी लागतों की वैधता और स्वीकार्यता की जांच किए बिना उनका भार सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।

उपभोक्ता परिषद का दावा है कि यदि सही गणना की जाती तो जून में बिजली बिल बढ़ने के बजाय करीब दो प्रतिशत तक कम हो सकता था। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से सभी संबंधित खर्चों, बिजली खरीद लागत, ट्रांसमिशन शुल्क और पुराने भुगतानों का पूरा ब्यौरा मांगा है।

हालांकि फिलहाल अतिरिक्त वसूली पर रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन आयोग के सख्त रुख से यह संकेत मिल रहे हैं कि पावर कॉरपोरेशन को अपना आदेश संशोधित करना पड़ सकता है। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिजली बिलों से राहत मिल सकती है।

टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी, तकनीकी खामी बता बोली खारिज करना उचित नहीं: हाई कोर्ट

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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए उत्तर पूर्व रेलवे (एनईआर) द्वारा कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड की तकनीकी बोली खारिज किए जाने की कार्रवाई को अनुचित ठहराया है। अदालत ने कहा कि केवल स्टांप ड्यूटी की कमी जैसी सुधार योग्य तकनीकी खामी के आधार पर किसी बोलीदाता को टेंडर प्रक्रिया से बाहर करना न्यायसंगत नहीं है।

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अभधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एनईआर द्वारा तैयार वित्तीय बोलियों की टेबुलेशन को निरस्त कर दिया और सभी पात्र निविदाकारों की वित्तीय बोलियों पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। साथ ही कोंकण रेलवे को तीन जून तक स्टांप ड्यूटी की कमी पूरी करने का अवसर भी दिया गया है।

मामला रेलवे विद्युतीकरण परियोजना के एक टेंडर से जुड़ा है, जिसमें कोंकण रेलवे की तकनीकी बोली को पात्रता शर्तें पूरी न करने का हवाला देकर खारिज कर दिया गया था। कंपनी ने आरोप लगाया कि उसे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। बाद में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद रेलवे प्रशासन ने स्टांप शुल्क में कमी को बोली खारिज करने का आधार बताया।

याची की ओर से दलील दी गई कि स्टांप ड्यूटी की कमी कोई गंभीर कानूनी बाधा नहीं बल्कि सुधार योग्य त्रुटि है और केवल इसी आधार पर बोली को खारिज करना उचित नहीं है। अदालत ने भी माना कि प्रारंभिक अस्वीकृति पत्र में कारणों का उल्लेख नहीं किया गया था और बाद में नए कारण जोड़ने का प्रयास कानून की दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी संस्थाएं टेंडर प्रक्रिया में समान अवसर, निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं तथा उनके निर्णय मनमाने नहीं होने चाहिए। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सबसे कम वित्तीय बोली (एल-1) देने वाले याची को प्रक्रिया से बाहर करने का प्रयास किया गया।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल एल-1 बोलीदाता होने से किसी कंपनी को ठेका मिलने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। अंततः हाईकोर्ट ने वित्तीय बोलियों पर पुनर्विचार का आदेश देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।

राफेल डील: आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर बढ़ता भारत

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शरद कटियार

भारत द्वारा 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को भेजा गया 3.25 लाख करोड़ रुपये का प्रस्ताव केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि देश की सामरिक सोच, आत्मनिर्भरता की नीति और भविष्य की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत है। ऐसे समय में जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और आधुनिक युद्ध तकनीकों का सामना कर रही है, भारत का अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने का निर्णय दूरदर्शी और आवश्यक माना जाना चाहिए।

भारतीय वायु सेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही है। कई पुराने विमान अपने सेवा जीवन के अंतिम चरण में हैं, जबकि क्षेत्रीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में अत्याधुनिक राफेल विमानों की संख्या में बड़ा इजाफा न केवल वायु सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाएगा बल्कि देश की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करेगा। राफेल ने पहले ही अपनी क्षमताओं को साबित किया है और भारतीय वायु सेना का भरोसा भी जीता है।

इस सौदे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 114 में से 94 विमान भारत में बनाए जाएंगे। यह केवल विमानों का निर्माण नहीं होगा, बल्कि तकनीक, कौशल, रोजगार और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत की क्षमता निर्माण का अवसर भी होगा। वर्षों से भारत रक्षा उपकरणों का बड़ा आयातक रहा है। यदि इस परियोजना के माध्यम से तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन को वास्तविक रूप से बढ़ावा मिलता है, तो यह देश को आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की दिशा में एक बड़ी छलांग दिला सकता है।

हालांकि, इतने बड़े सौदे के साथ जवाबदेही और पारदर्शिता की जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। करदाताओं के धन से होने वाले इस निवेश में लागत, समय-सीमा, गुणवत्ता और तकनीकी लाभों पर लगातार निगरानी आवश्यक होगी। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सौदा केवल खरीद तक सीमित न रहे, बल्कि भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को स्थायी रूप से मजबूत करे।

साथ ही, यह भी ध्यान रखना होगा कि केवल विदेशी लड़ाकू विमानों की खरीद से आत्मनिर्भरता का लक्ष्य पूरा नहीं होगा। राफेल जैसे आधुनिक विमानों के साथ-साथ स्वदेशी परियोजनाओं, विशेषकर एएमसीए और तेजस कार्यक्रमों को भी समान गति और संसाधन मिलने चाहिए। भारत की वास्तविक शक्ति तब बढ़ेगी जब वह आधुनिक हथियारों का उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक भी बनेगा।

राफेल सौदा भारत की सुरक्षा जरूरतों और आत्मनिर्भरता की महत्वाकांक्षा के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बन सकता है। अब चुनौती इस अवसर को दीर्घकालिक राष्ट्रीय शक्ति में बदलने की है।

दो दिन ऑरेंज अलर्ट, आंधी-तूफान और वज्रपात को लेकर प्रशासन ने जारी की चेतावनी

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फर्रुखाबाद। भारत मौसम विज्ञान विभाग, लखनऊ द्वारा जारी पूर्वानुमान के आधार पर फर्रुखाबाद जनपद में 1 और 2 जून को ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में तेज आंधी, गरज-चमक, वज्रपात और वर्षा की संभावना जताई है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नागरिकों से सतर्क रहने तथा सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

मौसम विभाग के अनुसार 1 जून को 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि झोंकों में इनकी गति 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है। वहीं 2 जून को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने तथा झोंकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। दोनों दिनों में मेघगर्जन, वज्रपात और वर्षा की भी संभावना व्यक्त की गई है।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि तेज हवाओं के कारण कच्चे और कमजोर मकानों को नुकसान पहुंच सकता है। पेड़, बिजली के खंभे और होर्डिंग गिरने की आशंका है, जिससे विद्युत आपूर्ति और यातायात भी प्रभावित हो सकता है। कृषि क्षेत्र पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। विशेष रूप से गन्ना, मक्का, दलहन और सब्जी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।

जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने जनपदवासियों से अपील की है कि मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें। आंधी-तूफान और वज्रपात के दौरान सुरक्षित पक्के भवनों में रहें, खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें तथा अनावश्यक यात्रा से बचें। किसानों को फसलों और पशुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रबंध करने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के अनुसार अगले चार से पांच दिनों तक जिले और आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं वर्षा, तेज हवाएं और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। प्रशासन ने नागरिकों से केवल अधिकृत स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल संबंधित विभाग या नियंत्रण कक्ष को सूचना देने का अनुरोध किया है।