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Saturday, July 4, 2026
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मुख्य मार्गों से गली-मोहल्लों तक पहुंची जाम की समस्या, शहरवासी बेहाल

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फर्रुखाबाद। नगर में दिनोंदिन बढ़ती यातायात अव्यवस्था अब विकराल रूप लेती जा रही है। पहले जहां जाम की समस्या केवल मुख्य मार्गों तक सीमित थी, वहीं अब यह समस्या गली-मोहल्लों तक भी पहुंच गई है। संकरी गलियों में वाहनों का दबाव बढ़ने से आम नागरिकों का निकलना तक मुश्किल हो गया है। विशेष रूप से ई-रिक्शा का अनियंत्रित और अनियमित संचालन इस समस्या को और अधिक गंभीर बना रहा है।
नगर के प्रमुख बाजारों और मुख्य सड़कों पर लगने वाले जाम से बचने के लिए अब वाहन चालक वैकल्पिक रास्तों के रूप में गली-मोहल्लों का सहारा ले रहे हैं। इसके चलते इन गलियों में अचानक यातायात का दबाव बढ़ गया है। स्थिति यह है कि जिन रास्तों पर पहले केवल पैदल चलना या साइकिल से निकलना आसान था, वहां अब चार पहिया और ई-रिक्शा तक घुस रहे हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ई-रिक्शा चालकों की मनमानी इस समस्या की मुख्य वजह बन चुकी है। बिना किसी तय रूट और नियम के ये वाहन कहीं भी खड़े हो जाते हैं और सवारियां भरने लगते हैं। इससे न केवल रास्ता बाधित होता है, बल्कि अन्य वाहनों की आवाजाही भी रुक जाती है। कई स्थानों पर तो ई-रिक्शा चालक सड़कों के बीचों-बीच खड़े होकर यात्रियों का इंतजार करते हैं, जिससे जाम की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
गर्मी और तेज धूप के बीच यह समस्या लोगों के लिए और अधिक परेशानी का कारण बन रही है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं जाम में फंसकर घंटों तक परेशान होते रहते हैं। कई बार एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन भी जाम में फंस जाते हैं, जिससे स्थिति चिंताजनक हो जाती है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और भी बदतर हो सकते हैं।
नगर के कई मोहल्लों जैसे कि संकरी बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थिति सबसे अधिक खराब है। यहां पर ई-रिक्शा के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। पार्किंग की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोग अपने वाहन सड़क किनारे खड़े कर देते हैं, जिससे रास्ता और संकरा हो जाता है और जाम लगना आम बात हो गई है।
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी भी इस समस्या को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। अधिकांश वाहन चालक नियमों का पालन नहीं करते, जिससे अव्यवस्था और बढ़ जाती है। बिना हेलमेट, बिना लाइसेंस और गलत दिशा में वाहन चलाना आम हो गया है। इसके अलावा, सड़क किनारे अतिक्रमण और अस्थायी दुकानों के कारण भी यातायात बाधित होता है।
प्रशासन द्वारा समय-समय पर जाम से निजात दिलाने के लिए अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन उनका असर स्थायी नहीं हो पाता। कुछ दिन सख्ती के बाद स्थिति फिर से पहले जैसी हो जाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक ई-रिक्शा संचालन के लिए स्पष्ट नियम और निर्धारित रूट तय नहीं किए जाएंगे, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ई-रिक्शा के संचालन पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इसके लिए ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड बनाए जाएं, रूट तय किए जाएं और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। साथ ही, गली-मोहल्लों में बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए और पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि शहर में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना आवश्यक है। स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, बेहतर सड़क ढांचा और जागरूकता अभियान के माध्यम से ही इस समस्या से निजात पाई जा सकती है।
फिलहाल, नगर के लोग जाम की समस्या से जूझने को मजबूर हैं। यदि प्रशासन और नागरिक मिलकर इस दिशा में प्रयास करें, तो निश्चित रूप से इस समस्या का समाधान संभव है और शहर को जाम मुक्त बनाया जा सकता है।

रेलवे ट्रैक पर मिला युवक का क्षत-विक्षत शव, ट्रेन की चपेट में आने से मौत की आशंका

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फर्रुखाबाद। कोतवाली फतेहगढ़ क्षेत्र में नवादिया के पास रेलवे लाइन किनारे एक अज्ञात युवक का क्षत-विक्षत शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। आशंका जताई जा रही है कि युवक किसी ट्रेन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा रेलवे ट्रैक के किनारे शव पड़े होने की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही कोतवाली फतेहगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच-पड़ताल शुरू की। पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ कर मृतक की पहचान कराने का प्रयास किया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी थी।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक की पहचान कराने के लिए आसपास के थानों को सूचना देने के साथ-साथ अन्य आवश्यक कार्रवाई भी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुट गई। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।

पंचाल घाट स्वर्ग धाम के बाहर शोक पर सौदा! लकड़ी के वसूले जा रहे मनमाने दाम

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फर्रुखाबाद। शहर के प्रमुख श्मशान स्थल पांचाल घाट स्वर्ग धाम के बाहर इन दिनों लकड़ी की बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यहां कुछ लकड़ी विक्रेता शोक संतप्त परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं। अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील अवसर पर भी कथित रूप से खुलेआम आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जो लकड़ी सामान्य बाजार में लगभग 200 से 250 रुपये प्रति कुंतल उपलब्ध होती है, वही लकड़ी श्मशान घाट के बाहर 800 से 1000 रुपये प्रति कुंतल तक बेची जा रही है। दुख की घड़ी में पहुंचे परिवार मोलभाव की स्थिति में नहीं होते, जिसका लाभ उठाकर विक्रेता ऊंची कीमतें वसूल रहे हैं।

शोकाकुल परिजनों का कहना है कि जब परिवार पहले ही गहरे मानसिक आघात में होता है, तब इस तरह की अतिरिक्त आर्थिक मार उन्हें और तोड़ देती है। कई लोगों ने बताया कि बरसात के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है। गीली लकड़ी, सीमित उपलब्धता और तात्कालिक आवश्यकता का हवाला देकर दाम और बढ़ा दिए जाते हैं। हालांकि, शिकायतें अन्य मौसमों में भी सामने आती रही हैं।

स्थानीय नागरिकों ने इसे “खुलेआम ठगी” बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि श्मशान घाट जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील स्थल पर लकड़ी के दाम तय करने के लिए स्पष्ट दर सूची प्रदर्शित की जानी चाहिए, ताकि कोई भी विक्रेता मनमानी न कर सके।

कुछ लोगों ने यह भी संकेत दिया कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इस संबंध में जिलाधिकारी से औपचारिक शिकायत की जाएगी। नागरिकों का मानना है कि प्रशासन को नियमित निगरानी, रेट सूची का अनिवार्य प्रदर्शन और उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक या सामाजिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिवार के लिए अत्यंत भावनात्मक क्षण होता है। ऐसे समय में यदि आवश्यक सामग्री भी उचित मूल्य पर उपलब्ध न हो, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और शोक की घड़ी में हो रहे इस कथित आर्थिक शोषण पर कब तक रोक लगती है।

रामपुर ढपर पुर में पक्का नाला निर्माण की मांग को लेकर धरने के चौथे दिन भी नहीं पहुंचा कोई अधिकारी, बढ़ा आक्रोश

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फर्रुखाबाद । सदर तहसील से कुछ दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत रामपुर ढपरपुर के वाशिंदों ने कच्चे नाले को पक्का बनाने की मांग को लेकर धरने के चौथे दिन भी कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। जिससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति के जिला अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि किसी भी समय धरने को उग्र रूप दिया जा सकता है उन्होंने बताया कि यदि सुनवाई नहीं हुई तो नगर पालिका के पूरे के ट्रैक्टरों को रोका जाएगा और उन्हें वापस किया जाएगा इसके अलावा और भी आंदोलन करने की जरूरत पड़ी तो किया जाएगा। उन्होंने बताया कि डरने के चौथे दिन तक कोई भी अधिकारी धरना स्थल पर धरना दे रहे हैं लोगों से बातचीत करने नहीं पहुंचा नहीं किसी समस्या के बारे में मालूम किया जिम्मेदार कान में तेल डाले बैठे हुए हैं और बरसात का समय पास आता जा रहा है जिससे एक बार फिर क्षेत्र में तबाही देखने को मिल सकती है।
बताते चलें कि हर साल बाढ केरामपुर डंपर पुर में पक्का नाला निर्माण की मांग को लेकर धरना दूसरे दिन भी जारी
फर्रुखाबाद । सदर तहसील से कुछ दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत रामपुर ढपरपुर के वाशिंदों ने कच्चे नल को पक्का बनाने की मांग को लेकर तहसील सदर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति के जिला अध्यक्ष मनोज यादव के नेतृत्व में धरना शुरू कर दिया और चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान ना हुआ तो आमरण अनशन किया जाएगा।
बताते चलें कि हर साल बाढ़ के प्रकोप के दौरान उफनाते नाले का कीचड और गंदगी किसानो के खेत मे खडी फसल को चौपट कर देती है । क्षेत्रीय निवासियों के अनुसार तमाम अधिकारियो जनप्रतिनिधियो से फरियाद की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। जिस पर भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जन शक्ति जिलाध्यक्ष मनोज यादव के नेतृत्व मे आमरण अनशन शुरू किया गया है जो चौथे दिन भी जारी है।
गौरतलब है कि बढपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत रामपुर ढपरपुर के दोनों ओर पूर्व एवं पश्चिम में बह रहे नाले में नगर पालिका का गंदा पानी आ रहा है। जो कि पिछले करीब 17 वर्षों से लगातार आ रहा है जिसके चलते ग्राम पंचायत रामपुर ढपरपुर मौजा की समस्त जमीनें प्रतिवर्ष बरसात के समय नाले के उफान की वजह से डूब जाती हैं। जिसके कारण फसलें नष्ट हो जाती हैं और खेतों में पन्नी, निडिल जैसी तमाम चीजें भर जाती है, जिससे किसानों को काफी नुकसान होता है। इस बावत भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति ने 20 मई को कलेक्ट्रेट में ज्ञापन दिया था। उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई, उसके बाद 18 जून को पुनः बैठक कर अल्टीमेटम दिया गया था और किसानों ने नाले का पक्का निर्माण कराये जाये की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर क्षेत्रीय निवासियों में किसानों ने रामपुर जबलपुर में ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और चेतावनी दिया कि यदि आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। बाढ़ के प्रकोप के दौरान उफनाते नाले के कीचड गंदगी किसानो के खेत मे खडी फसल को चौपट कर देती है । क्षेत्रीय निवासियों के अनुसार तमाम अधिकारियो जनप्रतिनिधियो से फरियाद की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। जिस पर भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जन शक्ति जिलाध्यक्ष मनोज यादव के नेतृत्व मे आमरण अनशन करने का अधिकारियो को अल्टीमेटम दे दिया है।
गौरतलब है। कि बढपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत रामपुर ढफरपुर के दोनों ओर पूर्व एवं पश्चिम में बह रहे नाला में नगर पालिका का गंदा पानी आ रहा है। जो कि पिछले करीब 17 वर्षों से लगातार आ रहा है जिसके चलते ग्राम पंचायत रामपुर डफरपुर मौजा की समस्त जमीनें प्रतिवर्ष बरसात के समय नाला उफान के वजह से डूब जाती है। जिसके कारण फसलें नष्ट हो जाती हैं और खेतों में पन्नी, निडिल जैसी तमाम चीजें खेतों में भर जाती है, जिससे किसानों को काफी नुकसान होता है। इस बावत भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति ने 20 मई को कलेक्ट्रेट में ज्ञापन दिया था। उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई, उसके बाद 18 जून को पुनः बैठक कर अल्टीमेटम दिया गया और किसानो ने नाला का पक्का निर्माण कराया की मांग की । कार्रवाई न होने पर क्षेत्रीय निवासियों में किसानों ने रामपुर
ढपर पुर में ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया दिया जा रहा है जो चौथे दिन भी जारी बना हुआ है।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी शासकीय भूमि से जुड़े वादों की सुनवाई

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– सीएम योगी के निर्देश पर तत्काल लागू की गई नई व्यवस्था, लखनऊ और प्रयागराज में गठित हुई विशेष बेंच

– हर बुधवार को होगी सुनवाई, लंबित और नए सभी वाद होंगे सूचीबद्ध

लखनऊ, 4 जुलाई: योगी सरकार प्रदेश में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण सुधार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने सार्वजनिक महत्व की भूमि से जुड़े मामलों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति (यदि कोई हो) से संबंधित सभी वादों की सुनवाई तीन सदस्यीय विशेष पीठ (थ्री मेंबर बेंच) द्वारा की जाएगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

धारा-9 के तहत लागू की गई नई व्यवस्था
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, भूमि विवादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने तथा राजस्व न्याय प्रणाली को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष बल देते रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-9 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नई व्यवस्था लागू की गयी है। इसका उद्देश्य इन संवेदनशील मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता, न्यायिक गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। यह व्यवस्था तत्काल लागू कर दी गई है, जिसके तहत लखनऊ एवं प्रयागराज स्थित राजस्व परिषद न्यायालयों में इन श्रेणी के सभी लंबित और नए वाद अब विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। नई व्यवस्था के अनुसार आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति से जुड़े मामलों की सुनवाई अब परिषद की एकल पीठ अथवा सर्किट कोर्ट द्वारा नहीं की जाएगी। इन मामलों पर विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ सामूहिक रूप से विचार करेगी। इससे महत्वपूर्ण मामलों में विभिन्न न्यायिक दृष्टिकोणों का समावेश होगा और निर्णय प्रक्रिया अधिक मजबूत, निष्पक्ष तथा न्यायसंगत बन सकेगी।

विशेष पीठ हर बुधवार को करेगी मामलों की सुनवाई
परिषद की अध्यक्ष ने बताया कि राजस्व परिषद ने लखनऊ और प्रयागराज दोनों न्यायालयों के लिए अलग-अलग तीन सदस्यीय विशेष पीठों का गठन किया है। इन विशेष पीठों द्वारा प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से इन मामलों की सुनवाई की जाएगी। इससे सरकारी और सार्वजनिक भूमि से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण संभव होगा, साथ ही पूरे प्रदेश में निर्णय प्रक्रिया में एकरूपता भी स्थापित होगी। वहीं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नए वादों की पहचान कर उन्हें निर्धारित विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया जाए। इससे नई व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा और मामलों के अनावश्यक लंबित रहने की संभावना भी कम होगी। व्यवस्थित सूचीकरण और नियमित सुनवाई से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुचारु एवं परिणामकारी बनेगी। सामूहिक निर्णय प्रणाली अपनाए जाने से न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही विभिन्न प्रकार के समान मामलों में एकरूप निर्णय आने से भविष्य में अनावश्यक विवादों और कानूनी असमंजस की स्थिति भी कम होगी।

राजस्व व्यवस्था को बनाया अधिक उत्तरदायी
योगी सरकार पहले ही राजस्व प्रशासन में व्यापक सुधारों की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कर चुकी है। डिजिटल भू-अभिलेख, ऑनलाइन नामांतरण एवं अन्य राजस्व सेवाएं, आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भूमि पैमाइश, पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया तथा सरकारी भूमि की सुरक्षा जैसे कदमों ने राजस्व व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी बनाया है। अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ का गठन इसी सुधार श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है। विशेषज्ञतापूर्ण सामूहिक निर्णय व्यवस्था से न केवल न्याय वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनेगी, बल्कि प्रदेश में राजस्व न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण को भी नई गति मिलेगी।

माध्यमिक विद्यालयों में जुलाई में कक्षाओं के साथ-साथ अन्य कार्यों के कारण रहेगी व्यस्तता

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-योगी सरकार शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के लिए चलाएगी गतिविधियों का व्यापक अभियान

-यूनिट टेस्ट, बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया, आईसीटी प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति और प्रवेश संबंधी कार्यों को मिलेगी गति

-दस्तक अभियान, सड़क सुरक्षा, राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, करियर काउंसिलिंग और जनजागरूकता गतिविधियों से समृद्ध होगा विद्यालयी वातावरण

-‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’, स्काउट-गाइड, अभिभावक-शिक्षक सहभागिता और डिजिटल शिक्षा को मिलेगी नई गति

लखनऊ, 04 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का माध्यम बना रही है। इसी सोच के अनुरूप जुलाई में प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन के साथ बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया, सतत मूल्यांकन, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सांस्कृतिक गतिविधियों और करियर मार्गदर्शन का व्यापक अभियान चलेगा।

शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पूरे माह संचालित होने वाली गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, जीवन कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। नियमित शिक्षण के साथ सीखने की गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता, अनुशासन और व्यावहारिक कौशल को भी समान रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।

जुलाई में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान, वन महोत्सव, सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान तथा करियर काउंसिलिंग (साइकोमेट्रिक टेस्ट) जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा, सामाजिक दायित्व और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया जाएगा।

नियमित पढ़ाई के साथ आगे बढ़ेगी बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया
जुलाई में निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार नियमित शिक्षण कार्य जारी रहेगा। कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश संबंधी कार्य पूरे किए जाएंगे। कक्षा 10 एवं 12 के विद्यार्थियों के विवरण का मिलान कर बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि कक्षा 11 के विद्यार्थियों का पंचम पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा। विद्यार्थियों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आवेदन भी कराए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

यूनिट टेस्ट से होगी सीखने की प्रगति की समीक्षा
कक्षा 9 से 12 तक जुलाई के दूसरे सप्ताह में प्रथम यूनिट टेस्ट आयोजित किया जाएगा। इसमें मई माह के गृहकार्य का मूल्यांकन तथा अप्रैल से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक पढ़ाए गए पाठ्यक्रम पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक अनुश्रवण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कक्षा के बाहर भी सीखने के मिलेंगे अवसर
जुलाई माह में अभिभावक-शिक्षक संघ की सामान्य सभा एवं कार्यकारिणी का गठन कराया जाएगा। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को अरुणाचल प्रदेश और मेघालय की संस्कृति, लोककला और परंपराओं से परिचित कराया जाएगा। स्काउट-गाइड गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ विद्यालयों में योग, खेलकूद, प्रार्थना सभा आधारित प्रेरक कार्यक्रम तथा डिजिटल शिक्षण गतिविधियों का भी आयोजन होगा। इससे विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और सामाजिक सहभागिता का विकास होगा।

कोट
निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, प्रताप सिंह बघेल ने बताया कि जुलाई का शैक्षणिक कैलेंडर विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। नियमित पढ़ाई के साथ मूल्यांकन, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति, खेल, स्वास्थ्य, पर्यावरण, करियर मार्गदर्शन और सह-शैक्षणिक गतिविधियों को समान महत्व दिया गया है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक विद्यालय, कैलेंडर का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करे ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक कौशल और अवसर भी प्राप्त हों।