देहरादून।राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रूपऊ में आयोजित कैरियर कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को भविष्य की दिशा दिखाने के उद्देश्य से एक प्रेरणादायक मार्गदर्शन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक पीसीएस अधिकारी एवं स्टेट जीएसटी डिप्टी कमिश्नर विजय कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि शिक्षार्थी स्वयं को अनुशासन के ढांचे में ढालकर निरंतर कठिन परिश्रम करें, तो सफलता निश्चित रूप से उनके कदम चूमती है।
विजय कुमार ने अपने जीवन संघर्ष का उदाहरण देते हुए बताया कि सरकारी सेवा में चयन के लिए उन्होंने लगातार आठ प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं। उनका यह संघर्ष विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बना। उन्होंने कविता के माध्यम से शिक्षा, परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति जागरूकता भी उत्पन्न की, जिसे छात्रों ने अत्यंत रुचि के साथ सुना।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं में अपने भविष्य को लेकर विशेष उत्सुकता देखने को मिली। विद्यार्थियों ने पूछा कि वे जिस क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उसके लिए किस प्रकार पढ़ाई करें, कैसे तैयारी करें और आगे चलकर कौन-कौन से अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। विजय कुमार ने सभी प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए छात्रों का ध्यान आत्मअनुशासन, लक्ष्य निर्धारण और सतत अभ्यास की ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम में मार्गदर्शक के रूप में जियोलॉजिस्ट एवं उत्तराखंड जल विद्युत निगम के डिप्टी जनरल मैनेजर संजय कुमार ने भी छात्रों को विभिन्न विषयों की जटिलताओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छात्र किस प्रकार स्वयं से प्रतिबद्धता कर अपनी प्राथमिकताएं तय करें, दिनचर्या को सुव्यवस्थित करें और समयबद्ध तरीके से अपने लक्ष्य की प्राप्ति करें।
एक छात्रा के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों, प्रवेश प्रक्रियाओं, उपलब्ध अवसरों और सफल जीवन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कृषि विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी डिगंबर सिंह ने कृषि से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार कृषि क्षेत्र में भी बेहतर करियर और रोजगार की संभावनाएं मौजूद हैं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य नंदकिशोर यादव ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अनुभवी और प्रतिभाशाली अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर अपने जीवन को सफलता की दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। विद्यालय के शिक्षक एवं उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के पूर्व सदस्य डॉ जितेन्द्र सिंह बुटोइया ने किया। वहीं व्यवस्थाओं में विद्यालय की शिक्षिका मीनाक्षी तिवारी का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर कक्षा 10 के सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और कार्यक्रम को ध्यानपूर्वक सुनते हुए अपने भविष्य को लेकर नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त की।
अनुशासन से ही सफलता का आगाज – विजय कुमार ‘द्रोणी’
विपक्ष के शोर-शराबे में शुरू हुआ यूपी विधानसभा का बजट सत्र, ‘गो बैक’ नारों के बीच राज्यपाल का अभिभाषण
सीएम योगी बोले—अवरोध नहीं, संवाद से चलता है लोकतंत्र
पहली बार सदन में पेश होगा उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वे
राज्यपाल का दावा—2017 के बाद 267 अपराधी ढेर, 4,137 करोड़ की संपत्ति जब्त
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को हंगामे के साथ शुरू हुआ। सत्र की शुरुआत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण से हुई, लेकिन सदन के भीतर विपक्षी समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ‘गो बैक, गो बैक’ के नारों से सदन गूंजता रहा। विपक्ष का आरोप था कि सरकार जनहित के मुद्दों से भाग रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन बताया। हंगामे के बावजूद राज्यपाल ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और कानून-व्यवस्था से लेकर आर्थिक प्रगति तक का खाका पेश किया।
सत्र से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत में विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और यह संवाद से चलता है, अवरोध से नहीं। उन्होंने साफ कहा कि कार्यवाही में बाधा डालना उन्हीं मुद्दों को कमजोर करता है, जिन्हें उठाने का दावा विपक्ष करता है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार पहली बार विधानसभा में आर्थिक सर्वे पेश कर रही है, ताकि प्रदेश की प्रगति को तथ्यों और आंकड़ों के साथ सदन के सामने रखा जा सके।
राज्यपाल के अभिभाषण में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की सख्त नीति का उल्लेख किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक 267 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए हैं, 977 अभियुक्तों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत निरुद्ध किया गया है और माफिया अपराधियों से 4,137 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है। राज्यपाल ने दावा किया कि प्रदेश में छह करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकाले गए हैं और जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत अपराधियों पर सख्त कार्रवाई जारी है। नवंबर 2019 से अब तक 129 अपराधियों को आजीवन कारावास या अन्य कठोर सजाएं दिलाई गई हैं, जबकि दो को मृत्युदंड सुनाया गया है।
वहीं, सपा विधायकों ने एसआईआर और फॉर्म-7 के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा। विधायक जाहिद बेग नारे लिखी तख्तियां लेकर सदन पहुंचे, जबकि नेता प्रतिपक्ष विधानमंडल दल आराधना मिश्रा ‘मोना’ के नेतृत्व में सपा विधायकों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। बजट सत्र से पहले सपा के विधायक और विधान परिषद सदस्य विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के पास भी धरने पर बैठे और भाजपा सरकार के खिलाफ नारे लगाए। सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा साइकिल से विधानसभा पहुंचे और वाराणसी में मंदिर तोड़े जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाने की बात कही।
राज्यपाल के अभिभाषण के बाद विधायी कार्य निपटाए जाएंगे। मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही पूर्व एवं वर्तमान दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद बुधवार तक के लिए स्थगित रहेगी। बुधवार को योगी सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेगी, जिस पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं
गंगा पर तटबंध की मांग को लेकर जन जागरण यात्रा 11व 12 फरवरी को
फर्रुखाबाद।तटबंध बनाओ जन संघर्ष समिति के तत्वावधान में 11 फरवरी को सुबह 11:00 से कढ़हर से तटबंध बनाने के समर्थन में एक विशाल जन चेतना पदयात्रा अमृतपुर तक के लिए निकल जाएगी ।
उक्त यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए तटबंध बना जन संघर्ष समिति के अध्यक्ष भईयन मिश्रा ने बताया कि यात्रा करहर से प्रारंभ होकर सरी सवासी, खुटिया, बारा खेड़ा अंतर, अर्जुनपुर ज्ञानपुर सलेमपुर होती हुई भरका में रात्रि विश्राम करेगी।
उन्होंने बताया कि बारह फरवरी को तको सुबह भरका से यात्रा पुनः प्रारंभ होकर तारापुर चाचूपुर जमापुर गोटिया इमादपुर रामपुर जोगराजपुर होते हुए अलीगढ़ तिराहे पर पहुंचेगी और वहां से अमृतपुर के लिए प्रस्थान करेगी। अमृतपुर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्र को संबोधित ज्ञापन
उप जिलाधिकारी अमृतपुर को दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न संगठन यात्रा में सहयोग कर रहे हैं और उसे सफल बनाने के लिए वह भीड़ उठाने के लिए संगठनों के नेट बराबर लगे हुए हैं उन्होंने सभी से सहयोग बनाए रखने की की।इस दौरान संगठन के पदाधिकारी व ग्रामीण मौजूद रहे।
जाति जनगणना को लेकर प्रधानमंत्री को खुला पत्र, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने उठाए सवाल
नई दिल्ली। जाति जनगणना के मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री राघवेन्द्र सिंह राजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर कड़ा ऐतराज जताया है। पत्र में जाति जनगणना को सामाजिक सच्चाई से परे बताते हुए इसे एक सुनियोजित राजनीतिक प्रयोग करार दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि सनातन परंपरा में समाज को चार वर्णों—क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य और शूद्र—में विभाजित किया गया था, लेकिन प्रत्येक वर्ण के भीतर अनेक जातियां हैं, जिनमें आपसी बेटी-व्यवहार, रहन-सहन, बोली, पहनावा और खान-पान में स्पष्ट अंतर है। इसके बावजूद राजनीतिक लाभ के लिए विभिन्न जातियों को एक नाम के अंतर्गत समाहित कर दिया गया।
पत्र में विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अहीर, यादव और ग्वाला जैसी अलग-अलग जातियों को राजनीतिक उद्देश्य से “यादव” नाम के अंतर्गत जोड़ दिया गया। आरोप लगाया गया है कि इसी जातीय समीकरण के जरिए सत्ता हासिल की गई और जातीय आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की गई।
राघवेन्द्र सिंह राजू ने बिहार की जाति जनगणना पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 1931 में जिन यादवों की संख्या लगभग 6 प्रतिशत थी, वह हालिया गणना में 14 प्रतिशत दर्शाई गई, जो तथ्यात्मक रूप से संदिग्ध है। उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण और राजपूत जैसी जातियां, जिनकी आबादी 12–13 प्रतिशत के बीच रही है, उन्हें 5 प्रतिशत के आसपास दिखाना वास्तविकता से परे है।
झूठे आंकड़ों पर कार्रवाई की मांग
खुले पत्र में सवाल उठाया गया कि जब झूठा जाति प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी करने, न्यायालय में झूठ बोलने या फर्जी मुकदमा दर्ज कराने पर सजा का प्रावधान है, तो फिर जाति के नाम पर झूठे आंकड़े प्रस्तुत कर समाज को बांटने पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए।
पत्र में केंद्र सरकार से “बछड़ा प्रवृत्ति” छोड़कर “शेर प्रवृत्ति” से शासन करने की अपील की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जाति आधारित राजनीति को समय रहते नहीं रोका गया, तो विपक्षी गठबंधन देश को जातीय संघर्ष की ओर धकेल सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार पर आएगी।
अंत में लेखक ने कटु सत्य लिखने के लिए क्षमा मांगते हुए देश की एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की है।
कैलाश–मानसरोवर: जहां आस्था शिखर छूती है और आत्मा मोक्ष की ओर बढ़ती है
यूथ इंडिया
तिब्बत क्षेत्र में स्थित कैलाश मानसरोवर केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि विश्व की सबसे प्राचीन और रहस्यमयी आध्यात्मिक धरोहरों में से एक है। सदियों से यह स्थान मानव आस्था, साधना और आत्मिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां की यात्रा जितनी कठिन मानी जाती है, उतनी ही गहरी और शांति देने वाली भी है।
भगवान शिव का दिव्य निवास
हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों के अनुसार कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। मान्यता है कि यहीं शिव परिवार सहित ध्यानस्थ अवस्था में विराजमान हैं और यहीं से सृष्टि के संतुलन का संचालन होता है। कैलाश पर्वत का शिखर आज तक अजेय माना जाता है—किसी भी पर्वतारोही द्वारा इस पर चढ़ाई नहीं की जा सकी है, जिसे लोग इसकी दिव्यता से जोड़कर देखते हैं।
मानसरोवर झील: आत्मशुद्धि का प्रतीक
कैलाश पर्वत के समीप स्थित मानसरोवर झील को अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार इसके जल में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। कहा जाता है कि स्वयं ब्रह्मा ने इस झील की रचना की थी। इसकी शांत जलराशि श्रद्धालुओं को आंतरिक शांति और आत्मचिंतन की अनुभूति कराती है।
कैलाश परिक्रमा: तपस्या और आस्था की परीक्षा
कैलाश पर्वत की परिक्रमा, जिसे ‘कोरा’ कहा जाता है, लगभग 52 किलोमीटर लंबी होती है। यह यात्रा अत्यंत कठिन मानी जाती है—ऊंचाई, बर्फीली हवाएं, कम ऑक्सीजन और दुर्गम रास्ते हर कदम पर श्रद्धालुओं की परीक्षा लेते हैं। इसके बावजूद श्रद्धालु पूरी श्रद्धा, संयम और धैर्य के साथ परिक्रमा पूरी करते हैं। मान्यता है कि एक बार कैलाश की परिक्रमा करने से जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
चार धर्मों की साझा आस्था
कैलाश–मानसरोवर की विशेषता यह है कि यह केवल एक धर्म तक सीमित नहीं है।
बौद्ध धर्म में इसे ध्यान और करुणा का केंद्र माना जाता है।
जैन परंपरा के अनुसार प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव को इसी क्षेत्र में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
बोन धर्म में कैलाश को ब्रह्मांडीय ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है।
यही कारण है कि कैलाश–मानसरोवर को विश्व की साझा आध्यात्मिक विरासत कहा जाता है।
आत्मा की यात्रा
कैलाश–मानसरोवर की यात्रा केवल शरीर से तय की गई दूरी नहीं है, बल्कि यह आत्मा की यात्रा मानी जाती है। यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु अपने भीतर झांकने, अहंकार त्यागने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने का प्रयास करता है। कठिनाइयों से भरी यह यात्रा अंततः श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतोष और आत्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
कैलाश–मानसरोवर आज भी मानव आस्था का वह शिखर है, जहां पहुंचकर व्यक्ति स्वयं को ईश्वर के सबसे निकट महसूस करता है।
ग्राम पंचायत कुतुबुद्दीनपुर में फर्जीवाड़े का आरोप, प्रधान-सचिव पर गंभीर अनियमितताओं की शिकायत
फर्रुखाबाद। विकास खंड नवाबगंज की ग्राम पंचायत कुतुबुद्दीनपुर में पंचायत राज व्यवस्था को दरकिनार कर कथित रूप से बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत के सदस्यों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए प्रधान और सचिव पर वर्ष 2021 से अब तक पंचायत की कोई भी विधिवत बैठक न कराने, सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर करने और मनमाने ढंग से विकास योजनाएं संचालित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2021 से अब तक न तो ग्राम पंचायत की कोई खुली बैठक कराई गई और न ही किसी सदस्य को पंचायत के विकास कार्यों या योजनाओं की जानकारी दी गई। पंचायत राज अधिनियम 1947 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करते हुए प्रधान द्वारा सभी निर्णय स्वयं लिए जा रहे हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत के सदस्यों के हस्ताक्षर बिना उनकी जानकारी के दस्तावेजों पर किए जा रहे हैं। कार्य योजनाओं, समिति गठन और अन्य अभिलेखों में सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। सदस्यों ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर पाए जाते हैं, तो वे पूरी तरह फर्जी होंगे।
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख है कि जब सदस्यों ने प्रधान से इस संबंध में सवाल किया, तो प्रधान के कथित प्रतिनिधि ने धमकी भरे लहजे में कहा कि “हम अपनी मर्जी से काम करते हैं, कोई कुछ नहीं कर सकता।” सदस्यों का आरोप है कि आवाज उठाने पर उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रधान और सचिव की मिलीभगत से पंचायत में लगातार भ्रष्टाचार किया जा रहा है। विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट हो रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई कार्य नजर नहीं आ रहा।
जांच और कठोर कार्रवाई की मांग
ग्राम पंचायत सदस्यों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, फर्जी हस्ताक्षर कर योजनाएं बनाने और सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही दोषियों पर कानूनी कार्रवाई कर पंचायत की पारदर्शिता बहाल करने की अपील की गई है।








