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Saturday, February 21, 2026
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प्रकृति से रोजगार: हरियाली में छिपी आत्मनिर्भरता की संभावनाएँ

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सूर्या अग्निहोत्री
भारत की सभ्यता और अर्थव्यवस्था का मूल आधार प्रकृति रही है। खेत, जंगल, जलस्रोत, पशुधन और मिट्टी—इन सबने सदियों तक न केवल जीवन दिया, बल्कि रोजगार का स्थायी साधन भी प्रदान किया। आधुनिक दौर में जब बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, तब आवश्यकता है कि हम प्रकृति आधारित रोजगार के पारंपरिक और आधुनिक दोनों मॉडलों को समझें और उन्हें संगठित रूप दें।
प्रकृति से जुड़ा रोजगार केवल खेती तक सीमित नहीं है। कृषि के साथ-साथ बागवानी, औषधीय पौधों की खेती, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन, डेयरी, मुर्गी पालन और जैविक खाद निर्माण जैसे अनेक क्षेत्र हैं, जो कम पूंजी में शुरू किए जा सकते हैं और निरंतर आय का स्रोत बन सकते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल युवाओं के लिए स्वरोजगार का मजबूत विकल्प प्रस्तुत करता है।
आज बाजार में जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। रासायनिक मुक्त अनाज, सब्जियां, मसाले और फल उपभोक्ताओं की प्राथमिकता बन रहे हैं। यदि किसान और युवा संगठित तरीके से जैविक खेती करें, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के साथ सीधे बाजार तक पहुंचें, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। प्रकृति आधारित उत्पादों को मूल्य संवर्धन के साथ बेचा जाए—जैसे आंवला से मुरब्बा, आम से अचार, हल्दी और अदरक से प्रोसेस्ड पाउडर—तो रोजगार की श्रृंखला और लंबी हो जाती है।
वन और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्र भी रोजगार के बड़े स्रोत हैं। वनोपज संग्रह, हर्बल उत्पाद निर्माण, बांस और लकड़ी आधारित हस्तशिल्प, इको-टूरिज्म, प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र—ये सभी गतिविधियाँ स्थानीय युवाओं को आय का अवसर देती हैं। यदि इन क्षेत्रों को सरकारी योजनाओं और तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, तो हजारों परिवार आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन भी रोजगार सृजन का माध्यम बन सकते हैं। तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण अभियान, नर्सरी विकास—इन सबमें स्थानीय श्रमिकों और युवाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आय का स्रोत भी तैयार होता है।
प्रकृति आधारित रोजगार का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें बड़े उद्योगों की तरह भारी निवेश की आवश्यकता नहीं होती। स्थानीय संसाधन ही इसकी पूंजी होते हैं। यदि प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहायता का समुचित समन्वय हो जाए, तो यह मॉडल गांवों में आर्थिक क्रांति ला सकता है।
आज समय की मांग है कि रोजगार को केवल शहरी उद्योगों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रकृति से जुड़े पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संयोजन से नए अवसर पैदा किए जाएं। जब युवा खेत, जंगल और जल से जुड़ी संभावनाओं को पहचानेंगे, तब बेरोजगारी की समस्या का समाधान स्वाभाविक रूप से निकलने लगेगा।
प्रकृति हमें केवल जीवन ही नहीं देती, बल्कि जीवनयापन का आधार भी प्रदान करती है। आवश्यकता है उसे समझने, संजोने और संगठित रूप से अपनाने की। तभी हरियाली सच मायने में समृद्धि का प्रतीक बन सकेगी।

(लेखक यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप के डिप्टी एडिटर हैं।)

सर्वण मोर्चा के प्रदर्शन के चलते भारी फोर्स तैनात

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परिवर्तन चौक बना छावनी, यूजीसी के विरोध में प्रदर्शन
लखनऊ। सर्वण मोर्चा के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। परिवर्तन चौक और आसपास के क्षेत्रों को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, सर्वण मोर्चा ने यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शन के मद्देनजर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना जताई गई थी।
स्थिति को देखते हुए पुलिस ने भारी पुलिस बल तैनात किया है।
ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था
अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। साथ ही आम नागरिकों से अनावश्यक भीड़भाड़ से बचने और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने को कहा गया है।फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

भारतीय क्रिकेटर राहुल चाहर ने किया तलाक का ऐलान, भावुक पोस्ट वायरल

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर राहुल चाहर ने सोशल मीडिया के जरिए अपने तलाक की घोषणा कर दी है। उनके इस भावुक पोस्ट के बाद क्रिकेट जगत और फैंस के बीच चर्चा तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर दी जानकारी
राहुल चाहर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए पोस्ट में बताया कि आपसी सहमति से उन्होंने और उनकी पत्नी ने अलग होने का निर्णय लिया है। उन्होंने लिखा कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन दोनों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
पोस्ट में उन्होंने निजी जीवन की गरिमा बनाए रखने की अपील भी की और कहा कि इस कठिन समय में उन्हें और उनके परिवार को निजता दी जाए।
राहुल के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
कई फैंस ने उन्हें हिम्मत और सकारात्मकता बनाए रखने की सलाह दी।
कुछ लोगों ने उनके निजी फैसले का सम्मान करने की बात कही।
क्रिकेट करियर पर फोकस
राहुल चाहर भारतीय टीम और आईपीएल में अपनी लेग स्पिन गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। हाल के समय में वे घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में सक्रिय रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि निजी जीवन में आए इस बदलाव के बावजूद उनका पेशेवर करियर प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि वे लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय और उच्च स्तरीय क्रिकेट का अनुभव रखते हैं।
फिलहाल राहुल चाहर की ओर से तलाक के कारणों को लेकर अधिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

एआई समिट विवाद पर सियासी संग्राम तेज

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कांग्रेस के प्रदर्शन के खिलाफ बीजेपी का घेराव, माफी की मांग
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आयोजित इंडिया ए आई इम्पैक्ट समिट 2026 को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस मुख्यालय का घेराव किया।
क्या है मामला?
बताया जा रहा है कि एक दिन पहले कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ए आई समिट के दौरान सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया था। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया।
बीजेपी का आरोप
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदर्शन कर कांग्रेस ने देश का अपमान किया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर नारेबाजी की और कहा कि वैश्विक निवेश व तकनीकी मंचों पर राजनीतिक प्रदर्शन करना राष्ट्रहित के खिलाफ है।
वहीं कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का अधिकार है। पार्टी नेताओं ने कहा कि उनका प्रदर्शन सरकार की नीतियों के खिलाफ था, न कि देश के खिलाफ।
स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने दोनों दलों के मुख्यालयों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया।
ए आई समिट के बहाने शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। दोनों दल एक-दूसरे पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं।

रमजान में लाउडस्पीकर पर कोई छूट नहीं: यूपी सरकार

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला, शिवपाल बोले—मुस्लिम समुदाय को किया जा रहा टारगेट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने रमजान के दौरान मस्जिदों में लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर किसी भी प्रकार की विशेष छूट देने से इनकार कर दिया है। सरकार ने कहा है कि ध्वनि प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है और नियम सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होते हैं।
राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि निर्धारित डेसीबल सीमा और समय-सीमा के भीतर ही लाउडस्पीकर का उपयोग किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था और पर्यावरण मानकों को देखते हुए कोई भी विशेष छूट नहीं दी जा सकती। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि योगी सरकार मुस्लिम समुदाय को टारगेट कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों में सरकार का रवैया पक्षपातपूर्ण है।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि रमजान जैसे पवित्र महीने में प्रशासन को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, न कि प्रतिबंधात्मक नीति।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां सरकार इसे कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन बता रही है, वहीं विपक्ष इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रशासन ने मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों को ध्वनि सीमा और समय-निर्धारण के नियमों की जानकारी दी है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
मामले को लेकर आगामी दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

मोबाइल गोदाम में भीषण आग, लाखों का सामान राख

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एक घंटे बाद पहुंची दमकल, महमूदाबाद क्षेत्र में मची अफरातफरी
सीतापर।जनपद के महमूदाबाद कोतवाली क्षेत्र में एक मोबाइल गोदाम में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग की चपेट में आकर मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान जलकर राख हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार कई लाख रुपये का नुकसान बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, गोदाम से अचानक धुआं और आग की लपटें उठती देख अफरातफरी मच गई। आसपास के दुकानदारों और लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग तेजी से फैल गई।
सूचना के बाद भी दमकल कर्मियों को मौके पर पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लग गया। तब तक गोदाम का अधिकांश सामान जल चुका था। बाद में फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
आग में बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, एक्सेसरीज़ और अन्य सामान नष्ट हो गया। सटीक नुकसान का आकलन किया जा रहा है, लेकिन व्यापारियों के अनुसार लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट से आग लगने की जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारण जांच के बाद स्पष्ट होगा।
दमकल के देर से पहुंचने को लेकर व्यापारियों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से फायर व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।