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Monday, March 30, 2026
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सीसीटीएनएस कर्मचारियों की मेहनत रंग लाई, जिले ने लगातार दूसरी बार हासिल किया प्रथम स्थान

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फर्रुखाबाद। सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) कार्यालय के कम्प्यूटर ऑपरेटरों एवं कर्मचारियों की कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण का परिणाम एक बार फिर सामने आया है। जनपद ने इस वर्ष भी उत्कृष्ट कार्य करते हुए लगातार दूसरी बार प्रथम रैंक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि से पुलिस विभाग में खुशी का माहौल है और कर्मचारियों के उत्साह में भी वृद्धि हुई है।
प्रभारी सीसीटीएनएस कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी अजय सिंह ने इस सफलता का श्रेय पूरी टीम के समर्पण और निरंतर प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि सभी कम्प्यूटर ऑपरेटरों और सीसीटीएनएस कर्मचारियों ने पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया, जिसके चलते यह उपलब्धि संभव हो सकी। उन्होंने सभी कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए आगे भी इसी तरह बेहतर कार्य करने की अपील की।
इस अवसर पर आरक्षी अरविन्द सिंह सहित अन्य कर्मचारियों ने भी अपनी खुशी जाहिर की और कहा कि यह सम्मान पूरे जनपद के लिए गर्व की बात है। सीसीटीएनएस कार्यालय, जनपद फर्रुखाबाद के कर्मचारियों की इस सफलता को विभागीय अधिकारियों ने भी सराहा है और भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई है।

मजदूर के बेटे ने रचा इतिहास, पीसीएस पास कर बना डीएसपी

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लखीमपुर खीरी। संघर्ष और मेहनत की मिसाल पेश करते हुए एक मजदूर के बेटे ने बड़ी सफलता हासिल की है। अमीरनगर क्षेत्र के गंगापुर ग्रंट निवासी संतराम के पुत्र वरुण कुमार ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की पीसीएस परीक्षा पास कर डीएसपी पद हासिल किया है। रविवार रात परिणाम घोषित होते ही परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।

वरुण की सफलता के पीछे उनके परिवार का त्याग और उनका अटूट संकल्प रहा है। पिता संतराम ने मजदूरी कर बेटे को पढ़ाया और उसकी पढ़ाई के लिए तीन बीघा जमीन तक बेच दी। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी, जिसका परिणाम आज सभी के सामने है।

वरुण की शुरुआती शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने अमीरनगर के जहीर हसन इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और मोहम्मदी के पीडी इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। आगे की पढ़ाई उन्होंने शाहजहांपुर के जीएफ कॉलेज से बीएससी कर पूरी की और फिर प्रयागराज जाकर छह साल तक लगातार तैयारी की।

परिवार आज भी गांव में कच्चे मकान में रहता है, लेकिन बेटे की इस सफलता ने उनकी जिंदगी बदलने की उम्मीद जगा दी है। वरुण के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और पूरे इलाके में उनके संघर्ष की चर्चा हो रही है।

इसी परीक्षा में मितौली क्षेत्र के चटौरा गांव की निधि वर्मा ने भी सफलता हासिल कर समाज कल्याण अधिकारी का पद प्राप्त किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया, जिससे क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिल रही है।

सीएम योगी ने डीबीटी से छात्रों को दी बड़ी राहत, 28 लाख विद्यार्थियों के खातों में भेजे 3350 करोड़

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लखनऊ
प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छात्रवृत्ति एवं पारिवारिक लाभ योजनाओं के तहत बड़ी धनराशि का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) किया। इस दौरान कक्षा 9-10 और दशमोत्तर के कुल 27,99,982 छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में करीब 3,350 करोड़ रुपये सीधे भेजे गए।

यह छात्रवृत्ति योजना सभी वर्गों के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर लागू की गई है। इसमें सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को शामिल किया गया है। स्कूल से लेकर कॉलेज तक पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को इस पहल से सीधा लाभ मिला है, जिससे उनकी पढ़ाई में आर्थिक बाधाएं कम होंगी।

सरकार के अनुसार अनुसूचित जाति के 6.68 लाख छात्रों को लगभग 467.94 करोड़ रुपये, सामान्य वर्ग के 4.95 लाख छात्रों को 779.10 करोड़ रुपये और अन्य पिछड़ा वर्ग के 13.52 लाख छात्रों को 1838.59 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है। इससे बड़ी संख्या में जरूरतमंद छात्रों को राहत मिली है।

इसी तरह अल्पसंख्यक वर्ग के 2.75 लाख छात्रों को करीब 252.76 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति के 7,236 छात्रों को लगभग 11.61 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई है। सरकार का कहना है कि यह राशि छात्रों की पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम के दौरान सरकार ने शिक्षा को बढ़ावा देने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस पहल को छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे प्रदेश में शिक्षा के स्तर को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

बिरयानी खत्म होने पर शादी में जमकर चले कुर्सियां और कैंपर

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अमरोहा। हसनपुर क्षेत्र स्थित एक बैंक्वट हॉल में शादी समारोह के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दावत के बीच बिरयानी खत्म हो गई। मामूली कहासुनी ने देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया और बरातियों व घरातियों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।

बताया गया कि शनिवार शाम करीब छह बजे बरात पहुंची थी और सभी मेहमान भोजन कर रहे थे। इसी दौरान बिरयानी खत्म हो गई और दोबारा तैयार होने में देरी होने लगी। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में पहले बहस हुई, जो कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुस्साए लोगों ने एक-दूसरे पर कुर्सियां फेंकनी शुरू कर दीं। हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ लोग पानी के कैंपर उठाकर भी हमला करते नजर आए। देखते ही देखते पूरा बैंक्वट हॉल रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।

इस दौरान महिलाओं और बच्चों में दहशत फैल गई और मौके पर भगदड़ जैसे हालात बन गए। कई लोग जान बचाकर इधर-उधर भागते दिखे। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सीओ पंकज त्यागी के अनुसार वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। फिलहाल किसी पक्ष की ओर से तहरीर नहीं मिली है, लेकिन शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व मंत्री संग्राम सिंह वर्मा का हुआ निधन

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बाराबंकी।
संग्राम सिंह वर्मा का सोमवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले एक सप्ताह से लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही बाराबंकी समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।

संग्राम सिंह वर्मा प्रदेश सरकार में कृषि राज्य मंत्री और रेशम उद्योग मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। वह बाराबंकी से तीन बार विधायक चुने गए और लंबे समय तक क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। कुर्मी समाज के प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती थी।

उन्होंने दिग्गज नेता बेनी प्रसाद वर्मा के बाद कुर्मी समाज में अपनी अलग पहचान बनाई। संगठनात्मक क्षमता और जनाधार के चलते वे जिले की राजनीति में मजबूत पकड़ रखते थे। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने समय-समय पर दल परिवर्तन भी किया, जिससे क्षेत्रीय राजनीति पर खासा प्रभाव पड़ा।

वर्ष 2017 में उन्होंने समर्थकों के साथ भाजपा का दामन थामा, जबकि 2022 में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे। उनके इस कदम को जिले की राजनीति में बड़ा बदलाव माना गया था और इसका असर चुनावी समीकरणों पर भी पड़ा।

उनका परिवार भी राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है। उनके भाई सुरेंद्र वर्मा ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं, जबकि उनकी पत्नी शीला सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष के बाद वर्तमान में नगर पालिका अध्यक्ष हैं। संग्राम सिंह वर्मा के निधन को जिले की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है, और विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

मैनाठेर कांड: नाबालिग बताकर गुमराह करते रहे दोषी, उम्रकैद की सजा

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मुरादाबाद। चर्चित मैनाठेर कांड में सजा पाए तीन दोषियों ने खुद को नाबालिग बताकर पुलिस और अदालत को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जांच में उनकी सच्चाई सामने आ गई। दस्तावेजों की पड़ताल और मेडिकल परीक्षण में तीनों के बालिग होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद उन्हें अन्य आरोपियों के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

दरअसल, मैनाठेर बवाल के दौरान डीआईजी पर हमले समेत कई गंभीर मामलों में कुल 16 लोगों को उम्रकैद की सजा मिली है। इनमें दो सगे भाई समेत तीन दोषियों के परिजनों ने उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश कर उन्हें नाबालिग बताया था, जिसके चलते मामला किशोर न्यायालय भेजा गया।

कोर्ट के आदेश पर जब दस्तावेजों की गहन जांच की गई तो वे फर्जी पाए गए। इसके बाद मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें तीनों के वयस्क होने की पुष्टि हुई। सच्चाई सामने आने के बाद उनकी फाइल फिर से एडीजे कोर्ट में भेजी गई।

यह मामला छह जुलाई 2011 का है, जब मैनाठेर के असालतनगर बघा गांव में बवाल की सूचना पर जा रहे डीआईजी अशोक कुमार सिंह और उनके पीआरओ पर भीड़ ने हमला कर दिया था। हमलावरों ने पिस्टल छीन ली और मोबाइल भी लूट लिया था, जिसके बाद कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को सजा सुनाई। इस फैसले को कानून व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है, वहीं फर्जी दस्तावेज पेश कर न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश पर भी सख्त संदेश गया है।