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Wednesday, June 17, 2026
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आरएसएस जिला प्रचारक की बाइक चेक करना पड़ा भारी, चौकी इंचार्ज समेत चार पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

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फर्रुखाबाद। सड़क सुरक्षा नियमों के तहत चल रही वाहन चेकिंग के दौरान आरएसएस के जिला प्रचारक की बाइक रोकना रोडवेज चौकी इंचार्ज और तीन पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया। मामले में चौकी इंचार्ज कपिल कुशवाहा समेत चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किए जाने के बाद पुलिस महकमे में नाराजगी और चर्चा का माहौल है। रोडवेज चौकी के सामने शाम करीब 6:30 बजे वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान बिना हेलमेट जा रहे एक बाइक सवार को पुलिस ने रोक लिया। बाद में पता चला कि बाइक सवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के जिला प्रचारक हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन रोकने पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और मामला बढ़ गया।सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने वाहन की जांच के बाद बाइक को कब्जे में लेकर थाने भिजवा दिया। इसके बाद मामला संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंचा और शिकायत किए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने रोडवेज चौकी इंचार्ज कपिल कुशवाहा, सिपाही अनुज कुमार तथा रिक्रूट आरक्षी अजय सिंह और विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में सवाल उठ रहे हैं कि जब पुलिस यातायात नियमों का पालन कराने के लिए वाहन चेकिंग करती है तो फिर केवल ड्यूटी निभाने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई। पुलिसकर्मियों का कहना है कि यदि बिना हेलमेट चलने वालों को रोकना और पूछताछ करना भी जोखिम भरा हो जाएगा तो सड़क सुरक्षा अभियान प्रभावित होंगे।मामले ने जिले में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। लोगों का कहना है कि कानून और यातायात नियम सभी नागरिकों के लिए समान होने चाहिए, चाहे वह किसी भी संगठन, पद या प्रभाव से जुड़े हों। वहीं पुलिस महकमे में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है और कई कर्मचारी इसे अपने मनोबल से जोड़कर देख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में ₹1.31 लाख करोड़ के मेगा निवेश की दस्तक!

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– हरित ऊर्जा, एआई डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं का जे डब्लू ग्लोबल नें दिया प्रस्ताव
– कई मंत्री सहमत, जल्द मुख्यमंत्री करेंगे वार्ता
शरद कटियार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक और बड़े निवेश प्रस्ताव ने औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय कंपनी जे डब्लू ग्लोबल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने प्रदेश में ₹1.31 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की इच्छा जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव भेजा है।प्रस्ताव से कई मंत्री गण भी सहमत हैँ।

कंपनी राज्य में अपनी महत्वाकांक्षी “द सीड” परियोजना स्थापित करना चाहती है। यह परियोजना हरित ऊर्जा, डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन और आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना पर आधारित होगी। इसी मॉडल पर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में भी कार्य किया जा रहा है।

कंपनी के अनुसार उत्तर प्रदेश का तेजी से विकसित हो रहा एक्सप्रेसवे नेटवर्क, बेहतर कानून व्यवस्था, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग अनुकूल नीतियां निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही हैं।

जे डब्लू ग्लोबल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं अध्यक्ष जयदीप वानखेड़े ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में निवेश और सतत विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि कंपनी प्रदेश में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा और तकनीक आधारित एकीकृत औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करना चाहती है।

प्रस्तावित परियोजना के तहत 2000 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट, 1000 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, 1400 मेगावाट क्षमता का एआई और एचपीसी आधारित डेटा सेंटर, तथा 6900 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित करने की योजना है।

इसके अलावा परियोजना में भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीक माने जाने वाले स्मॉल मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर (एसएमआर) को भी शामिल करने का प्रस्ताव है।
कंपनी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण देने के लिए समय मांगा है। यदि यह निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरता है तो यह उत्तर प्रदेश के इतिहास के सबसे बड़े निजी निवेशों में शामिल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा, ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख ग्रीन एनर्जी एवं डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकता है।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में ₹1.31 लाख करोड़ का यह संभावित निवेश राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति देने वाला साबित हो सकता है।

श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन

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– छप्पन भोग के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कायमगंज। स्वर्गीय श्री चंद्र प्रकाश अग्रवाल (पिक्को बाबू) एवं स्वर्गीय श्रीमती शकुंतला देवी अग्रवाल (अम्माजी) की पावन स्मृति में सी.पी. गेस्ट हाउस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं गोवर्धन पर्वत धारण करने के दिव्य प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को भव्य छप्पन भोग अर्पित किया गया। छप्पन भोग के दर्शन और कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे पूरा पंडाल खचाखच भरा रहा। कथा स्थल पर भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष फतेहचंद्र राजपूत , पूर्व विधायक एवं जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष कुलदीप गंगवार , पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष रुपेश गुप्ता सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त डॉ. मिथिलेश अग्रवाल, सत्य प्रकाश अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल, रश्मि अग्रवाल, डॉ. सुभाष गुप्ता, अनिल अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के जिलाध्यक्ष संजय गुप्ता, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला कोषाध्यक्ष नीरज अग्रवाल, लखपति सक्सेना, आलोक अग्रवाल, अशोक राजपूत, महेंद्र राजपूत सहित बड़ी संख्या में सामाजिक, व्यापारिक एवं धार्मिक क्षेत्र के लोग कथा श्रवण हेतु पहुंचे।

आयोजकों द्वारा सभी विशिष्ट अतिथियों का मंच पर पटका पहनाकर सम्मान किया गया। कथा के दौरान भजन गायकों ने भी मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते और श्रीकृष्ण नाम के जयकारे लगाते दिखाई दिए।

कथा आयोजकों ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के अब केवल दो दिन शेष हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे अपने परिवार सहित अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करें और धर्मलाभ प्राप्त करें।

ज्वैलर पर नाबालिग सेल्सगर्ल से दुष्कर्म का आरोप, गिरफ्तारी के बाद भेजा गया जेल

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कानपुर। शहर के एक ज्वैलरी कारोबारी के खिलाफ नाबालिग सेल्सगर्ल से कथित दुष्कर्म के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पुलिस ने मामले में आरोपी ज्वैलर अशोक कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार पीड़िता की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नौकरी देने के बाद आरोपी ने उसके साथ छेड़छाड़ और अशोभनीय व्यवहार करना शुरू किया। आरोप है कि बाद में उसे एक फार्महाउस पर ले जाया गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया और कथित तौर पर घटना का वीडियो भी बनाया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पीड़िता को दबाव और भय के माहौल में रखा गया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार घटना के संबंध में मुकदमा दर्ज होने में एक माह से अधिक समय लगा, जिसके बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी के खिलाफ पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2018 में भी एक सेल्सगर्ल से दुष्कर्म के मामले में उसका नाम सामने आया था और वह उस प्रकरण में जेल भी जा चुका है। हालांकि पूर्व मामलों की कानूनी स्थिति और अंतिम न्यायिक निष्कर्ष संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही तय होंगे।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी है। नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून के तहत पीड़ित की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट तथा अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में अन्य आरोपों की पुष्टि होती है तो उन्हें भी केस डायरी में शामिल किया जाएगा।

नगर पालिका में आदेशों को लेकर उठे सवाल, हटाए गए सफाई नायक की वार्ड-3 में दोबारा सक्रियता से मचा बवाल

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वार्ड-19 में तैनाती के बावजूद वार्ड नंबर-3 में काम करने की चर्चाएं, स्थानीय लोगों ने उठाई जांच की मांग
फतेहगढ़। नगर पालिका परिषद फतेहगढ़ में सफाई व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। शिकायतों के बाद वार्ड नंबर-3 से हटाए गए सफाई नायक हरिशंकर की एक बार फिर उसी वार्ड में सक्रियता को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में उनकी तैनाती वार्ड नंबर-19 में है, लेकिन इसके बावजूद वह वार्ड नंबर-3 के कार्यों में नजर आ रहे हैं। इस मामले ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, वार्ड नंबर-3 से सफाई नायक हरिशंकर के खिलाफ लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय लोगों द्वारा कथित वसूली समेत अन्य आरोप लगाए जाने के बाद नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार ने उन्हें वार्ड नंबर-3 की जिम्मेदारी से हटा दिया था। उनके स्थान पर सफाई नायक सर्वेश को तैनात किया गया था।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सर्वेश के कार्यभार संभालने के बाद वार्ड में सफाई व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की विशेष शिकायत सामने नहीं आई थी। इसके बावजूद अचानक परिस्थितियां बदल गईं और सर्वेश को वार्ड के कार्य से अलग कर दिया गया। इसके बाद हरिशंकर के दोबारा वार्ड नंबर-3 में सक्रिय होने की चर्चाएं तेज हो गईं।
मामले को लेकर नगर पालिका के भीतर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में सफाई इंस्पेक्टर आदित्य पांडे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके स्तर से ही व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हरिशंकर की तैनाती वार्ड नंबर-19 में है, तो फिर वह वार्ड नंबर-3 में किसके निर्देश पर कार्य कर रहे हैं। वहीं, जिन शिकायतों के आधार पर उन्हें पहले हटाया गया था, उन परिस्थितियों में दोबारा उसी वार्ड में उनकी सक्रियता लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नगर पालिका परिषद प्रशासन इस मामले पर क्या रुख अपनाता है और वार्ड नंबर-3 की जिम्मेदारी को लेकर उठ रहे सवालों का क्या जवाब देता है।

जब सिस्टम खुद कठघरे में खड़ा हो जाए…

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शरद कटियार
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में सामने आई चार बड़ी घटनाओं ने शासन, प्रशासन और व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर राम मंदिर के करोड़ों रुपये के चढ़ावे की जांच में एसआईटी दस्तावेज खंगाल रही है, दूसरी ओर बिजली विभाग में रिश्वतखोरी और करोड़ों के कथित गबन के मामले उजागर हो रहे हैं। वहीं सड़क सुरक्षा के नाम पर सैकड़ों ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए जा रहे हैं। इन सभी घटनाओं को अलग-अलग मामलों के रूप में देखने की बजाय यदि एक साथ रखा जाए तो एक चिंताजनक तस्वीर सामने आती है,व्यवस्था में जवाबदेही का संकट।

अयोध्या का राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां चढ़ाया गया एक-एक रुपया श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। ऐसे में चढ़ावे की राशि को लेकर उठे सवाल केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह जनता के विश्वास से जुड़ा मामला है। एसआईटी द्वारा ट्रस्ट पदाधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ यह संकेत देती है कि जांच एजेंसियां मामले को गंभीरता से ले रही हैं। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी थी तो जांच की नौबत क्यों आई? और यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी केवल कर्मचारियों तक सीमित होगी या जवाबदेही ऊपर तक तय होगी?

दूसरी ओर बिजली विभाग की तस्वीर भी कम चिंताजनक नहीं है। राजधानी लखनऊ में नए कनेक्शन के एस्टीमेट के नाम पर पांच लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में जेई का निलंबन और कर्मचारियों की बर्खास्तगी यह साबित करती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें अभी भी गहरी हैं। आम नागरिक वर्षों से बिजली विभाग में फाइल, कनेक्शन, बिल संशोधन और लाइन विस्तार के नाम पर होने वाली अनौपचारिक वसूली की शिकायत करता रहा है। सवाल यह है कि यदि शिकायत न होती तो क्या यह मामला भी दबा रहता?

इससे भी बड़ा मामला वाराणसी में सामने आया, जहां सात करोड़ रुपये के कथित गबन के आरोप में लेखाकार को बर्खास्त किया गया। सात करोड़ रुपये कोई छोटी रकम नहीं होती। यह रकम बताती है कि निगरानी तंत्र की विफलता कितनी बड़ी रही होगी। किसी भी सरकारी विभाग में करोड़ों रुपये का खेल महीनों या वर्षों तक बिना किसी आंतरिक जांच के चलता रहे, यह अपने आप में गंभीर चिंता का विषय है।

इसी बीच परिवहन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि केवल तीन महीनों में 797 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित और 20 निरस्त किए गए। यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन यह भी संकेत है कि सड़कों पर नियमों की अनदेखी किस स्तर तक पहुंच चुकी है। दुर्घटनाओं के बाद कार्रवाई करना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक दुर्घटनाओं को रोकना है। यदि लाइसेंस जारी करने, वाहन फिटनेस और यातायात प्रवर्तन की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी होती तो शायद इतने बड़े पैमाने पर दंडात्मक कार्रवाई की जरूरत ही न पड़ती।

इन सभी मामलों का एक साझा सूत्र है—जवाबदेही। चाहे मंदिर ट्रस्ट हो, बिजली विभाग हो या परिवहन व्यवस्था, समस्या वहीं पैदा होती है जहां निगरानी कमजोर पड़ती है और जवाबदेही समाप्त होने लगती है। भ्रष्टाचार, अनियमितता और लापरवाही किसी एक विभाग की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति की चुनौती है।

प्रदेश सरकार लगातार “जीरो टॉलरेंस” की बात करती है। हालिया कार्रवाइयां यह भी दिखाती हैं कि कई मामलों में कार्रवाई हो रही है। लेकिन केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि ऐसी व्यवस्थाएं विकसित हों जहां गड़बड़ी होने से पहले ही पकड़ी जा सके। डिजिटल निगरानी, नियमित ऑडिट, स्वतंत्र जांच और पारदर्शी सूचना प्रणाली आज की सबसे बड़ी जरूरत हैं।

जनता का विश्वास किसी भी सरकार और संस्था की सबसे बड़ी पूंजी होता है। राम मंदिर की आस्था हो, बिजली विभाग की सेवा हो या सड़क सुरक्षा का भरोसा—यदि इन पर सवाल खड़े होते हैं तो नुकसान केवल संस्थाओं का नहीं, पूरे तंत्र की विश्वसनीयता का होता है।

आज जरूरत केवल दोषियों को दंडित करने की नहीं, बल्कि व्यवस्था को इस तरह बदलने की है कि भविष्य में ऐसे सवाल खड़े ही न हों। क्योंकि जब सिस्टम खुद कठघरे में खड़ा दिखाई देने लगे, तब सुधार विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन जाता है।