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Sunday, July 5, 2026
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वाराणसी: करणी सेना की एक आवश्यक बैठक हुई संपन्न, विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा

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वाराणसी: करणी सेना, वाराणसी की एक आवश्यक बैठक आज संपन्न हुई, जिसमें संगठन ने शहर से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर गहरा रोष व्यक्त किया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए पदाधिकारियों ने मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।

मुख्य बिंदु:

राम मंदिर दान चोरी पर आक्रोश: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान की गई राशि और सामग्रियों में कथित अनियमितताओं व चोरी की घटनाओं पर करणी सेना ने गहरी चिंता व्यक्त की। संगठन ने इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए मांग की है कि इस मामले की उच्च-स्तरीय और निष्पक्ष जांच हो ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिले।

काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थानीय दर्शनार्थियों की उपेक्षा: वाराणसी के स्थानीय नागरिकों ने शिकायत की है कि काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के दौरान उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। करणी सेना ने प्रशासन से मांग की है कि काशी के मूल निवासियों और बुजुर्गों के लिए सुगम दर्शन की अलग व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें अपनी ही नगरी में दर्शन के लिए घंटों कतारों में न खड़ा होना पड़े।

अघोषित बिजली कटौती: भीषण गर्मी और उमस के बीच शहर में जारी अघोषित बिजली कटौती ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। संगठन ने बिजली विभाग को चेतावनी दी है कि यदि अविलंब निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो करणी सेना सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

चेतावनी: करणी सेना, वाराणसी ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने इन विषयों पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया और समस्याओं का समाधान नहीं निकाला, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा। जनहित और आस्था के इन मुद्दों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

जारीकर्ता करणी सेना वाराणसी इकाई विशिष्ट पदाधिकारी का नाम वीर प्रताप सिंह प्रदेश संगठन महामंत्री उत्तर प्रदेश मंगलेश त्रिपाठी जिलाध्यक्ष राहुल त्रिपाठी जिला संगठन महामंत्री वाराणसी

नवीन सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष
पूजा सिंह (नीलू) मीडिया प्रभारी अंकित मिश्रा महामंत्री
शुभम सिंह (सीनू) अध्यक्ष अधिवक्ता प्रकोष्ठ
शुभम यादव मंत्री
सोनम सिंह और तनुजा सिंह
प्रदेश उपाध्यक्ष महिला शक्ति दीपा सिंह मौजूद रही।

दिल्ली में तीसरी मंज़िल से गिरने के बाद नवविवाहिता की मौत, ढाई महीने पहले हुई थी शादी, परिवार ने दहेज हत्या का लगाया आरोप

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नई दिल्ली: दिल्ली (Delhi) की लोधी कॉलोनी में शादी के तीन महीने से भी कम समय में एक नई-नवेली दुल्हन (Newlywed woman) की रहस्यमयी मौत के बाद, उसके परिवार ने दहेज के लिए परेशान करने और हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने बताया कि शनिवार को एनडीएमसी (NDMC) फ्लैट्स की तीसरी मंजिल से गिरने के कारण 28 साल की आकृति सुतार गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। एम्स ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

तीसरी मंज़िल की इमारत से गिरने के बाद हुई मौत के मामले में पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है, वहीं परिवार ने पति और ससुराल वालों पर लगातार परेशान करने का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उसकी हत्या की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शनिवार को महिला बी-ब्लॉक की एक इमारत की तीसरी मंज़िल से गिरने के बाद गंभीर हालत में मिली। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक आकृति दक्षिण दिल्ली के पुष्प विहार की रहने वाली थीं और छतरपुर की एक निजी कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव के पद पर काम करती थीं। उनकी शादी इसी साल 24 अप्रैल को अरस्तु सिक्का से हुई थी। शादी को अभी ढाई महीने ही हुए थे। पुलिस ने कहा कि वे सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं और जांच अभी चल रही है। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।”

महिला के परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी को अभी ढाई महीने ही हुए थे, फिर भी उसे लगातार परेशान किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उसे बार-बार प्रताड़ित किया जाता था और अपशब्द कहे जाते थे। मृतक महिला के भाई ने बताया कि उनकी बहन पिछले पांच साल से नौकरी कर रही थी। अपनी मां के साथ हुई आखिरी बातचीत को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उसने परिवार को जानकारी दी थी कि वह काम से निकल चुकी है और घर आ रही है। जब बाद में परिवार के सदस्यों ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, तो उसका मोबाइल फोन बंद था। मृतक महिला के भाई ने दावा किया, “शादी के बाद मेरी बहन को लगातार परेशान किया जा रहा था।”

नूरपुर में 2.532 किलो चरस के साथ पंजाब का तस्कर गिरफ्तार, बाइक जब्त

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कांगड़ा: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नूरपुर पुलिस (Noorpur Police) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब के एक युवक को 2.532 किलोग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चरस बरामद करने के साथ उसकी मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली है।

जानकारी के अनुसार, सीआईए नूरपुर की टीम रविवार को क्षेत्र में गश्त और वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान नेशनल हाईवे पर निर्माणाधीन नागाबाड़ी टोल प्लाजा के पास एक संदिग्ध हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान बाइक सवार के पास से 2.532 किलोग्राम चरस बरामद हुई।

पुलिस ने मौके पर ही आरोपी को गिरफ्तार कर चरस और मोटरसाइकिल जब्त कर ली। आरोपी की पहचान 33 वर्षीय अश्वनी कुमार निवासी नरोट मेहरा, जिला पठानकोट (पंजाब) के रूप में हुई है।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्म चंद वर्मा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि बरामद चरस कहां से लाई गई थी और इसकी सप्लाई किसे की जानी थी। साथ ही इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

 

पटना: गोली मारकर भाग रहे अपराधी की छत से गिरकर मौत, एक युवक घायल

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पटना: राजधानी पटना (Patna) से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां आपसी विवाद के दौरान एक युवक की छत से गिरकर मौत हो गई। वहीं, दूसरा युवक गोली लगने से गंभीर रूप से घायल (injured) हो गया। पूरा मामला राजीव नगर थाना क्षेत्र का है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची राजीव नगर थाने की पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एफएसएल की टीम को बुलाया। मौके पर पहुंची एफएसएल की टीम ने क्राइम सीन से कुछ जरूरी साक्ष्य एकत्र किए, जो जांच में आगे चलकर काफी काम आ सकते हैं।

पुलिस ने गोली लगने से घायल युवक को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है। वहीं, पुलिस ने मौके से एक हथियार भी बरामद किया है। पुलिस इस मामले को आपसी विवाद से जोड़ कर देख रही है। फिलहाल पुलिस घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

सिटी एसपी ममता कल्याणी ने बताया कि, मृतक युवक की पहचान मोतिहारी निवासी पियेश रंजन के रूप में हुई है, जो राजीव नगर में रहने वाले राजू नाम के युवक को गोली मारने के लिए आया हुआ था, जिसकी गोली लगने से राजू घायल हो गया। वहीं, पियेश रंजन की छत से गिरकर मौत हो गई। उन्होंने बताया कि, घायल राजू मसौढ़ी का रहना वाला है, जो राजीव नगर में किराए के मकान में रहता है।

उन्होंने बताया कि, राजू से पियेश रंजन का पुराना विवाद चल रहा था। प्रथमदृष्टया मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़ा लग रहा है। फिलहाल पुलिस घटना के सभी बिन्दुओं की जांच में जुटी है। उन्होंने जल्द ही मामले का खुलासा करने की बात कही है।

तंबूरे के बाद का सन्नाटा: मद्धिम हुई पंडवानी की धड़कन

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(कुमार कृष्णन-विनायक फीचर्स)
तीजन बाई नहीं रही, यह केवल एक महान लोक कलाकार के निधन का समाचार नहीं है,यह उस लोक-संसार की मद्धिम पड़ती धड़कनों का भी समाचार है, जिसने उन्हें जन्म दिया, गढ़ा और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
कुछ लोग चले जाते हैं, लेकिन उनके साथ एक पूरा युग भी विदा होने लगता है। तीजन बाई का जाना ऐसा ही क्षण है। यह किसी एक कलाकार का अंत नहीं, बल्कि उस जीवित सांस्कृतिक परंपरा की क्षति है, जिसमें गीत केवल गाए नहीं जाते, पीढ़ियों से जिए जाते हैं,कथाएँ केवल सुनाई नहीं जातीं, बल्कि सामूहिक स्मृति बनकर समाज की आत्मा में बसती हैं।
लोक की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि उसका कोई एक रचनाकार नहीं होता। वह किसी एक कवि, लेखक या संगीतकार की निजी संपत्ति नहीं होती। लोक को पूरा समाज रचता है। अनगिनत कंठ, असंख्य अनुभव, सदियों की स्मृतियाँ और अनाम लोगों का जीवन मिलकर उसे आकार देते हैं। इसलिए जब कोई लोक कलाकार विदा होता है, तो उसके साथ केवल एक स्वर नहीं टूटता, बल्कि स्मृतियों का एक पुल भी दरकने लगता है।
आज प्रश्न यह नहीं है कि हम केवल तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करें। प्रश्न यह भी है कि क्या हम उस लोक-जगत के क्षरण को पहचान पा रहे हैं, जिसकी सबसे सशक्त आवाज़ वे थीं? क्या हम उस सांस्कृतिक भूगोल के विलुप्त होने का दर्द महसूस कर रहे हैं, जहाँ से पंडवानी जैसी परंपराएँ जन्म लेती हैं?
पिछले कुछ दशकों में भारतीय गाँवों का स्वरूप तेजी से बदला है। खेत छोटे होते गए, खेती महँगी और कठिन होती गई। रोज़गार की तलाश में लाखों लोग गाँव छोड़कर शहरों की ओर चले गए। जिन चौपालों पर संध्या उतरते ही आल्हा, पंडवानी, बिरहा, कजरी और लोककथाओं की स्वर-लहरियाँ देर रात तक गूँजती थीं, वहाँ अब जल्दी सन्नाटा उतर आता है। घर अब भी खड़े हैं, लेकिन उनके भीतर बसने वाला सामूहिक जीवन धीरे-धीरे विरल होता जा रहा है।
लोक का सबसे बड़ा विद्यालय कोई भवन नहीं होता। उसका विद्यालय होता है,साथ बैठना, साथ गाना, साथ सुनना और साथ याद रखना। लोक परंपरा पुस्तकों से कम और मनुष्यों के बीच अधिक जीवित रहती है। वह रिश्तों की ऊष्मा, साझा श्रम और सामूहिक स्मृतियों में साँस लेती है। जब यह साझापन टूटता है, तब केवल समाज नहीं बदलता, लोक भी धीरे-धीरे अपनी जड़ों से कटने लगता है।
गाँव से शहर जाने वाला व्यक्ति अपनी भाषा, अपने गीत और अपनी स्मृतियाँ मन की गठरी में बाँधकर तो ले जाता है, लेकिन उन्हें जीने वाला परिवेश पीछे छूट जाता है। उसकी अगली पीढ़ी उन गीतों को विरासत की वस्तु की तरह जानती है, जीवन की स्वाभाविक लय की तरह नहीं। लोक तब जीवन से निकलकर संग्रहालय, मंच और उत्सवों की वस्तु बनने लगता है।
यही हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना है। लोककलाएँ आज पहले से अधिक मंचों पर दिखाई देती हैं। सांस्कृतिक महोत्सवों में उनका प्रदर्शन होता है, उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलते हैं, लेकिन जिस मिट्टी में उनकी जड़ें थीं, वह लगातार बंजर होती जा रही है। यह वैसा ही है जैसे किसी वृक्ष की शाखाओं पर रंग-बिरंगी झालरें सजा दी जाएँ, पर उसकी जड़ों तक पानी पहुँचना बंद हो जाए।
तीजन बाई ने पंडवानी को विश्व के सबसे प्रतिष्ठित मंचों तक पहुँचाया। उन्होंने सिद्ध किया कि लोक किसी भी आधुनिक कला से कम समृद्ध नहीं है। लेकिन उनके जीवन की सबसे बड़ी सीख शायद यह है कि लोककला केवल किसी कलाकार की प्रतिभा से नहीं बचती, वह उस समाज से बचती है, जो उसे रोज़मर्रा के जीवन में जीता है।
यही कारण है कि आज सबसे बड़ा प्रश्न तीजन बाई की अनुपस्थिति का नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक वातावरण का है, जो अगली तीजन बाई को जन्म दे सके। क्या आने वाले वर्षों में वैसे गाँव बचेंगे? क्या वैसी चौपालें बचेंगी? क्या बच्चों को अपने बुज़ुर्गों से महाभारत, रामायण और लोककथाएँ सुनने का अवसर मिलेगा? क्या लोकभाषाएँ घरों की भाषा बनी रहेंगी, या केवल शोध-पत्रों और विश्वविद्यालयों के विषय बनकर रह जाएँगी? यदि इन प्रश्नों का उत्तर नहीं में है, तो समझ लेना चाहिए कि संकट केवल लोककलाओं का नहीं, हमारी सांस्कृतिक स्मृति का है।
तीजन बाई चली गई हैं, लेकिन उनकी आवाज़ अब भी भारतीय लोकचेतना में गूँजती रहेगी। जब भी कोई युवा कलाकार तंबूरा उठाकर पंडवानी गाएगा, जब भी किसी गाँव की चौपाल पर महाभारत की कथा लोकस्वर में सुनाई जाएगी, जब भी कोई बच्चा पहली बार किसी लोकगाथा को विस्मय से सुनेगा, वहाँ कहीं न कहीं तीजन बाई मौजूद होंगी।
कुछ कलाकार इतिहास की किताबों में दर्ज नहीं होते, वे लोगों की स्मृतियों में बस जाते हैं। तीजन बाई ऐसी ही कलाकार थीं। उनका जाना हमें केवल शोकाकुल नहीं करता, बल्कि यह याद दिलाता है कि यदि हमें अपनी लोकपरंपराओं को बचाना है, तो केवल कलाकारों का सम्मान करना पर्याप्त नहीं होगा। हमें उस लोकजीवन, उस साझी संस्कृति और उस सामुदायिक संसार को भी बचाना होगा, जहाँ से ऐसे कलाकार जन्म लेते हैं।
तीजन बाई के जाने के बाद हमारे सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही रह गया है,क्या हम केवल उनकी स्मृति को सुरक्षित रखेंगे, या उस लोक-संसार को भी बचा पाएँगे, जिसने उन्हें अमर बनाया? (विनायक फीचर्स)

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद-राष्ट्रीय बजरंग दल के आठवें स्थापना दिवस पर 51 पौधों का हुआ वृक्षारोपण

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पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश, कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र व समाज सेवा का लिया संकल्प

फर्रुखाबाद। अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद एवं राष्ट्रीय बजरंग दल के आठवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को जिले में भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से 51 पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा अधिक से अधिक लोगों से वृक्ष लगाने की अपील की।

कार्यक्रम का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष दिनेश सिंह राजपूत की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि स्थापना दिवस के अवसर पर पूरे देश में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में फर्रुखाबाद इकाई द्वारा वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक व्यक्ति को इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

जिला अध्यक्ष विष्णु मिश्रा ने कहा कि बदलते पर्यावरण और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वृक्ष न केवल जीवन के आधार हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की भी गारंटी हैं। यदि सभी लोग पौधरोपण को जनआंदोलन बना दें तो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में बड़ी सफलता मिल सकती है।

राष्ट्रीय बजरंग दल के विभाग अध्यक्ष अंगद पांडे ‘कोमल’ ने कहा कि संगठन के संस्थापक डॉ. प्रवीण तोगड़िया की प्रेरणा और नीतियों के अनुरूप संगठन समाज, राष्ट्र एवं प्रकृति के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन का प्रत्येक कार्यकर्ता राष्ट्रहित और समाज सेवा के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करता है तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करता है।

नगर उपाध्यक्ष व्यापारी परिषद अजीत चौरसिया ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय बजरंग दल एवं अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद समाज कल्याण और राष्ट्र निर्माण के कार्यों के लिए सदैव प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने और सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूरे आयोजन में “जय श्रीराम”, “वीर बजरंगी” और “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे। वृक्षारोपण के बाद सभी ने पौधों की देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय बजरंग दल के जिला उपाध्यक्ष सत्यम वर्मा, कार्याध्यक्ष कार्तिक शुक्ल, आलोक मिश्रा, नीरज यादव, नितेश शाक्य, आकाश, अनुज, विवेक, बबलू राजपूत, सूरज सैनी, पालू श्रीवास्तव, नीरज दुबे, ओम, निवास पाठक सहित संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।