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Wednesday, May 20, 2026
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प्रतापगढ़ में हाईवोल्टेज ड्रामा, पारिवारिक विवाद में टावर पर चढ़ी महिला, पुलिस ने समझा-बुझाकर उतारा

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प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ (Pratapgarh) जिले के विवेक नगर क्षेत्र में सोमवार सुबह पारिवारिक विवाद (family dispute) के चलते एक महिला अपने तीन वर्षीय बच्चे को लेकर अधिवक्ता विनोद पांडेय के परिसर में स्थित बंद पड़े रिलायंस जियो टावर पर चढ़ गई। घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। इस मामले की खबर लगते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी देर तक समझाने की कोशिश ने जुट गई।

बताया जा रहा है कि महिला पहले परिसर की बाउंड्री फांदकर अंदर पहुंची और अपने तीन वर्षीय बच्चे को बाउंड्री के बाहर बैठाकर स्वयं टावर पर चढ़ गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी देर तक समझाने-बुझाने के बाद महिला को सुरक्षित नीचे उतारा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि देशभर में बंद पड़े मोबाइल टावरों पर चढ़कर आत्महत्या अथवा विरोध प्रदर्शन करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

आरोप है कि टावर कंपनियां किराया विवाद के चलते बंद पड़े टावरों को हटाने की कार्रवाई नहीं कर रही हैं, जिससे ऐसे टावर असामाजिक एवं संवेदनशील घटनाओं का केंद्र बनते जा रहे हैं। पुलिस ने महिला और बच्चे को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

 

 

बरेली: खंभे में चढ़े लाइनमैन की करंट के चपेट में आने से मौत, परिजनों में मचा कोहराम

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बरेली: बरेली (Bareilly) जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक लाइनमैन (Lineman) की करंट लगने से मौत हो गई। बिना शटडाउन लिए लाइनमैन को खंभे पर चढ़ाया गया था। घटना से इलाके में कोहराम मच गया है। परिजनों और साथी कर्मचारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। यह पूरा मामला जिले के बारादरी थाना क्षेत्र का है। जहां, संजय नगर इलाके में फाल्ट ठीक करने के दौरान लाइनमैन बिजली की चपेट में आ गया। हादसे में बिजली विभाग की एक संविदा कर्मचारी मोहम्मद निजाम की मौत हो गई। बुधवार दोपहर विभाग ने उसे फाल्ट ठीक करने के लिए भेजा था।

परिजनों और सहकर्मियों का आरोप है कि सब-स्टेशन से बिना शटडाउन लिए ही उन्हें लाइन ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़ा दिया था। काम करने के दौरान अचानक लाइन में करंट दौड़ गई। जिससे खंभे में चढ़े मोहम्मद निजाम करीब 25 फीट की ऊंचाई से सीधे नीचे गिर पड़े और तड़प-तड़प कर मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद परिजनों ने साथी कर्मचारियों के साथ मिलकर जमकर हंगामा किया। उनका कहना है कि बिजली विभाग की इस गंभीर लापरवाही की वजह से एक बेकसूर की जान गई है। अपनी गलती छुपाने के लिए विभाग झूठ बोल रहा है कि शटडाउन लिया गया था। हादसे के बाद दो लोग उन्हें गंगाशील हॉस्पिटल में छोड़कर भाग गए और हमें सिर्फ एक्सीडेंट की सूचना दी।

 

मिट्टी खनन को लेकर बवाल, भाजपा नेता दीपक दुबे को बुरी तरह पीटा, पुलिस नें कराया चिकित्सीय परीक्षण

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फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के कुटरा गांव में मिट्टी खनन को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते धुआँधार मारपीट में बदल गया, भाजपा नेता और सदर विधायक के पूर्व में करीबी रहे दीपक दुबे को दवंगों नें जमकर पीट दिया वह अबैध पर खनन अधिकारी संग लम्बे समय से लगातार निगरानी कर रहे थे, घायल दुबे ने कोतवाली पहुंचकर तहरीर दी है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

जानकारी के अनुसार कुटरा निवासी वीरेंद्र पाल अपनी जमीन से मिट्टी खुदवाकर दूसरे स्थान पर डलवा रहे थे। इसी दौरान खनन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम का नेतृत्व खनन अधिकारी संजय सिंह कर रहे थे। बताया जा दीपक दुबे भी खनन अधिकारी की गाड़ी में मौजूद थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मौके पर पहुंचते ही खनन अधिकारी की बजाय दीपक दुबे ने वीरेंद्र पाल से मिट्टी खनन की अनुमति को लेकर पूछताछ शुरू कर दी। इस पर वीरेंद्र पाल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब अधिकारी स्वयं कोई सवाल नहीं कर रहे हैं तो बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार उन्हें किसने दिया।

इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और आरोप है कि दीपक दुबे द्वारा अभद्रता किए जाने के बाद वीरेंद्र पाल, जोगेंद्र यादव तथा अन्य लोगों ने मिलकर उनकी पिटाई कर दी। ग्रामीणों के अनुसार मारपीट के दौरान चप्पलों से भी हमला किया गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
घायल अवस्था में दीपक दुबे किसी तरह कोतवाली फतेहगढ़ पहुंचे और कोतवाल रणविजय सिंह को लिखित तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

कोतवाल रणविजय सिंह ने बताया कि मामला सामान्य मारपीट का है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खनन स्थल पर एसडीएम की टीम गई थी तथा उसी दौरान दीपक दुबे खनन अधिकारी की गाड़ी में सवार होकर मौके पर पहुंचे थे।

जानलेवा हमले में फैसला सुरक्षित, 25 मई को होगी सुनवाई, एडीजे शैलेन्द्र सचान की अदालत नें किया न्याय

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– एडीजे शैलेन्द्र सचान की अदालत नें किया न्याय
– कथित पत्रकार राहुल गुप्ता समेत 14 लोग भेजे गए जेल

फर्रुखाबाद।कमालगंज थाना क्षेत्र से जुड़े चर्चित मारपीट मामले में अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश शैलेन्द्र सचान की अदालत में बुधवार को अभियुक्तों की पेशी हुई, जिसके बाद मामले में अगली सुनवाई 25 मई 2026 निर्धारित की गई है।मामला वर्ष 13 नवंबर 2020 का है एक विवाद में धनतेरस वाले दिन क़स्बा निवासी अनिल गुप्ता पुत्र स्व. राम प्रकाश गुप्ता नें अपने ऊपर जानलेवा हमले में थाने पर 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया था जिस मामले में पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया था।

बुधवार एडीजे शैलेंद्र सचान की अदालत द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सत्र वाद संख्या 1027/2022 एवं मुकदमा अपराध संख्या 311/2020 में अभियुक्त अखिल गुप्ता नेता, अमित गुप्ता भगत, निखिल गुप्ता, राहुल गुप्ता पत्रकार, संदीप गुप्ता, निहाल, रोहित गुप्ता, हर्ष गुप्ता और जतीन गुप्ता जानू के खिलाफ विभिन्न धाराओं में सुनवाई चल रही है।
मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 307/149, 324/149 और 323/149 के तहत आरोप तय किए गए हैं। अदालत ने सभी अभियुक्तों को आरोपित अपराधों में दोषसिद्ध करार दिए जाने का उल्लेख आदेश में किया है, जबकि अंतिम निर्णय अभी सुरक्षित रखा गया है।

बताया गया कि सभी अभियुक्त फिलहाल जमानत पर हैं। अदालत ने उनके जमानत नामे एवं बंधपत्र निरस्त करते हुए प्रतिभुओं को दायित्व से उन्मोचित कर दिया है। इसके साथ ही अभियुक्तों को अंतिम न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए फैसला सुनाए जाने के लिए 25 मई की तारीख नियत की गई है।

कुष्ठावस्था पेंशन योजना बनी सहारा, हजारों दिव्यांगजनों को मिल रहा सम्मान और संबल

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योगी सरकार ने पेंशन राशि 2500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह की

नौ वर्षों में लाभार्थियों की संख्या 4765 से बढ़कर 13667 पहुंची

पीएफएमएस एवं ई-पेमेंट प्रणाली से सीधे खातों में पहुंच रही पेंशन राशि

लखनऊ, 20 मई: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत एवं सुरक्षा पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इसी क्रम में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित कुष्ठावस्था पेंशन योजना कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक एवं सामाजिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। वर्तमान में प्रदेश के 13 हजार से अधिक लाभार्थियों को इस योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 3000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह योजना ऐसे व्यक्तियों के लिए है जो कुष्ठरोग के शिकार होने के बाद दिव्यांग भी हो जाते हैं।

आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को मिल रही सहायता

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य कुष्ठ रोग से प्रभावित आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत ऐसे सभी पात्र दिव्यांगजन लाभान्वित किए जाते हैं, जो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से अधिक नहीं है तथा जो किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभ प्राप्त नहीं कर रहे हैं।

योगी सरकार ने सहायता राशि 2500 से बढ़ाकर 3000 रुपये की

योजना के प्रारंभ में लाभार्थियों को 2500 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जाती थी, जिसे साल 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील सोच और गरीब कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के दृष्टिगत बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया था। इससे लाभार्थियों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार आया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में जहां 4765 लाभार्थियों को योजना का लाभ प्राप्त हो रहा था, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 13667 हो गई है।

सहायता सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जा रही

योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर किया जाता है। इस योजना के तहत ऐसे व्यक्तियों को पात्र माना जाता है जिनमें कुष्ठरोग का शिकार होने के कारण दिव्यांगता आ जाती है। विशेष बात यह है कि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिए दिव्यांगता प्रतिशत की कोई अनिवार्यता निर्धारित नहीं है। पात्र लाभार्थियों को पेंशन की धनराशि पीएफएमएस प्रणाली एवं कोषागार की ई-पेमेंट व्यवस्था के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी हुई है।

योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं आवेदक

प्रदेश सरकार द्वारा आवेदन प्रक्रिया को भी पूर्णतः ऑनलाइन किया गया है। पात्र आवेदक sspy-up.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को भी सुविधा प्राप्त हुई है तथा सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने की समस्या में कमी आई है।

पारदर्शी तरीके से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा- उप निदेशक

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि कुष्ठावस्था पेंशन योजना के माध्यम से कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप पात्र व्यक्तियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।

नवाबगंज में बढ़ती गर्मी और चिलचिलाती धूप के मद्देनजर प्रशासन सतर्क

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नवाबगंज: नवाबगंज में बढ़ती गर्मी और चिलचिलाती धूप के मद्देनजर प्रशासन सतर्क हो गया है। विकासखंड के गौ आश्रय स्थलों में गोवंश को भीषण गर्मी और लू से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अमरेश चौहान ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। बीडीओ अमरेश चौहान ने सभी गौ आश्रय स्थलों के प्रभारियों, सचिवों और संबंधित कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गोवंश की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गर्मी से बचाव के लिए गौ आश्रय स्थलों में कई उपाय किए जा रहे हैं। गोवंश को धूप से बचाने के लिए पर्याप्त छायादार स्थानों और शेड की व्यवस्था दुरुस्त की गई है। आवश्यकतानुसार अतिरिक्त तिरपाल या टाट के पर्दे लगाए जा रहे हैं। पशुओं के लिए 24 घंटे साफ और ठंडे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिसके लिए चरही (नाद) की नियमित सफाई और पानी भरने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ बड़े आश्रय स्थलों पर गोवंश को राहत देने के लिए पंखे और पानी की बौछार (फॉगर सिस्टम) की व्यवस्था पर भी काम चल रहा है। पशुओं के खान-पान का विशेष ध्यान रखते हुए उन्हें पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। पशु चिकित्सकों की टीम को नियमित रूप से गोवंश का स्वास्थ्य परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लू के लक्षणों की समय पर पहचान हो सके। बीडीओ अमरेश चौहान ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा, “गौवंश की सेवा और उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी भी गौ आश्रय स्थल पर पानी, चारे या छाया की कमी के कारण गोवंश को परेशानी हुई, तो संबंधित सचिव और केयरटेकर के खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”