– नेशनल टास्क फोर्स की अंतरिम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
नई दिल्ली। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित नेशनल टास्क फोर्स की अंतरिम रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर नीट से जुड़े विवाद, कोचिंग संस्थानों का बढ़ता दबाव और पाठ्यक्रम में लगातार होने वाले बदलाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण हैं।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. रविंद्र भट्ट की अध्यक्षता वाली नेशनल टास्क फोर्स ने 8 जून को अपनी अंतरिम रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया है कि मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और सफलता का दबाव मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को बढ़ा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धी संस्कृति, लंबा अध्ययन समय और लगातार बेहतर प्रदर्शन का दबाव विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इसके अलावा, पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली में बार-बार किए जाने वाले बदलाव भी छात्रों में असमंजस और तनाव पैदा कर रहे हैं।
नेशनल टास्क फोर्स ने हालिया नीट विवाद को भी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालने वाले महत्वपूर्ण कारणों में शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता और विवादों ने लाखों अभ्यर्थियों में चिंता और असुरक्षा की भावना बढ़ाई।
टास्क फोर्स ने सुझाव दिया है कि छात्रों के लिए बेहतर मनोवैज्ञानिक सहायता प्रणाली विकसित की जाए, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और कोचिंग संस्कृति से जुड़े दबाव को कम करने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाए जाएं।
नेशनल टास्क फोर्स की अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाने की संभावना है, जिसमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधारों को लेकर विस्तृत सिफारिशें शामिल होंगी।


