लखनऊ
बदायूं और बरेली में गंगा दशहरा के पावन पर्व पर सोमवार को खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब स्नान के दौरान 31 श्रद्धालु गहरे पानी में डूब गए। हादसों में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि एक मासूम बच्ची देर रात तक लापता रही। कई परिवारों के सामने अपनों को बचाने की चीख-पुकार गूंजती रही और गंगा घाटों पर मातमी सन्नाटा छा गया।
बदायूं के कछला गंगा घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। हाथरस के गांव कानऊ निवासी ओमवीर अपने बेटे नीलेश और रिश्तेदारों के साथ स्नान करने पहुंचे थे। स्नान के दौरान अचानक कई लोग गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। मौके पर मौजूद नाविकों और गोताखोरों ने जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने का प्रयास किया। कई श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन नीलेश और रोहित को नहीं बचाया जा सका। वहीं 10 वर्षीय शिखा का देर रात तक कोई पता नहीं चल सका, जिससे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
कछला घाट पर ही गांव सिरसा दबरई निवासी राजकुमार की भी डूबने से मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद सूरज को गोताखोरों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। अटैना घाट पर मैनपुरी निवासी पिंटू गंगा में डूब गए। भाई अजय की चीख-पुकार के बीच गोताखोरों ने काफी तलाश की, लेकिन कुछ देर बाद उनका शव बरामद हुआ।
दोपहर में फर्रुखाबाद निवासी अनुपम अपने मामा जितेंद्र के साथ स्नान कर रहे थे। इसी दौरान वह तैरते हुए गहरे पानी में चले गए और भंवर में फंस गए। काफी प्रयासों के बाद उनका शव बाहर निकाला जा सका। वहीं बरेली के गुलाबनगर क्षेत्र में बहगुल नदी में स्नान के दौरान 14 वर्षीय आदित्य ठाकुर डूबने लगे। उन्हें बचाने के लिए बदायूं निवासी अभिषेक नदी में कूद पड़े, लेकिन दोनों गहरे पानी में समा गए। करीब डेढ़ घंटे बाद दोनों के शव बरामद किए गए।
घटनाओं के बाद घाटों पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रशासन और पुलिस लगातार लोगों से गहरे पानी में न जाने की अपील करते रहे, लेकिन श्रद्धालु चेतावनी के बावजूद आगे बढ़ते रहे। डीएम और एसएसपी भी घाटों पर मौजूद रहे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। हादसों के बाद कई परिवारों की खुशियां पलभर में उजड़ गईं और गंगा दशहरा का पर्व दर्दनाक यादों में बदल गया।


