– पुराने खनन के पट्टों और तत्कालीन डीएम की कार्यशैली पर भी नजर
फर्रुखाबाद। एंटी करप्शन टीम द्वारा 24 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए खनन अधिकारी संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद जिले में वर्षों से चल रहे कथित अवैध खनन के खेल पर सरकार के कान खड़े हो गए हैं। यह मामला केवल रिश्वत तक सीमित नहीं, बल्कि जिले में खनन माफियाओं, अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के गठजोड़ की परतें भी खोलेगा ।
लोगों का आरोप है कि गंगापार के बलीपट्टी क्षेत्र में निर्धारित बालू पट्टे की सीमा से कहीं अधिक क्षेत्र में खनन कराया गया। आरोप यह भी हैं कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर खनन हुआ, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंची।
गंगापार क्षेत्र में भी वर्षों तक खुलेआम मिट्टी और बालू के अवैध खनन की शिकायतें उठती रहीं। ग्रामीणों का दावा है कि रात-दिन चलने वाले डंपरों और पोकलैंड मशीनों ने खेतों, रास्तों और नदी किनारे के इलाकों का स्वरूप बदल दिया। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बनने से हादसे हुए और लोगों की जान जाने की घटनाएं भी सामने आईं।
खनन के इस नेटवर्क को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसके चलते शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होना अभी बाकी है और संबंधित एजेंसियों द्वारा सत्यापन के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
खनन विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध खनन केवल राजस्व चोरी का मामला नहीं है, बल्कि यह नदियों के अस्तित्व, भूजल स्तर और पर्यावरणीय संतुलन पर भी सीधा हमला है। गंगा और उसकी सहायक धाराओं के किनारे अनियंत्रित खनन से कटान, जलधारा परिवर्तन और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अब जब रिश्वतखोरी के मामले में खनन अधिकारी की गिरफ्तारी हो चुकी है, तो यह मांग तेज हो रही है कि पिछले वर्षों में हुए सभी खनन पट्टों, उनके संचालन, राजस्व अभिलेखों और खनन सीमा के पालन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि क्या केवल एक अधिकारी की गिरफ्तारी से पूरा सच सामने आ जाएगा या फिर अवैध खनन के बड़े नेटवर्क पर भी कार्रवाई होगी। जिले के लोग अब यह जानना चाहती है कि गंगा की गोद और धरती का सीना चीरकर करोड़ों का खेल खेलने वालों तक कानून का हाथ कब पहुंचेगा।


