लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश की नदियों पर साफ दिखाई दे रहा है। गंगा, घाघरा, सरयू, शारदा और राप्ती समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिससे नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को प्रदेश के 29 जिलों में बारिश दर्ज की गई, जिसमें मिर्जापुर में सबसे अधिक 13 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग ने रविवार के लिए प्रदेश के 57 जिलों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अलर्ट जारी किया है।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से कई प्रमुख घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं बलिया जिले में सरयू नदी के तेज कटान से नौ मकान नदी में समा गए। कटान का दायरा बढ़ने पर प्रशासन ने 100 से अधिक परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और राहत-बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व और आपदा राहत की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
लखीमपुर खीरी में बाढ़ के पानी के साथ एक मगरमच्छ गांव में पहुंच गया, जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी। इसी जिले में एक खेत में लगे जाल में फंसे करीब 12 फीट लंबे अजगर का भी सफल रेस्क्यू किया गया, जिसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। वन विभाग ने लोगों से जंगली जीव दिखाई देने पर खुद पकड़ने की कोशिश न करने और तुरंत सूचना देने की अपील की है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने के कारण फिलहाल उत्तर प्रदेश में बारिश की तीव्रता कम हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 3 अगस्त से मानसून दोबारा सक्रिय होगा और 6 अगस्त के आसपास प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी तथा कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इसे देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ संभावित जिलों में निगरानी बढ़ा दी है, राहत दलों को अलर्ट पर रखा गया है तथा नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।


