एटा। जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम से जुड़े ग्राम रोजगार सेवक और मजदूर अपनी लंबित समस्याओं को लेकर अब खुलकर आंदोलन के रास्ते पर उतर आए हैं। लंबे समय से मानदेय का भुगतान न होने, ईपीएफ–यूएएन खातों में अंशदान जमा न किए जाने और वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री द्वारा किए गए वादों के अब तक अमल में न आने से कर्मियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
ग्राम रोजगार सेवक वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के सभी ग्राम रोजगार सेवकों ने 16 अप्रैल से 26 अप्रैल तक सांकेतिक हड़ताल पर है । सकीट ब्लॉक में आयोजित बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि यदि शासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल केवल शुरुआत है और जरूरत पड़ने पर व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 26 और 27 अप्रैल को सभी ब्लॉकों में मुख्यमंत्री को संबोधित पोस्टकार्ड भेजकर अपनी समस्याएं उठाई जाएंगी। इसके बाद 28, 29 और 30 अप्रैल को जिले के सभी विधायकों और सांसदों को ज्ञापन सौंपा जाएगा, ताकि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से शासन तक उनकी आवाज पहुंच सके। वहीं, 1 मई मजदूर दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित कर जिलाधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा।
इधर जलेसर ब्लॉक क्षेत्र में भी मनरेगा मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। शनिवार को बड़ी संख्या में मजदूर ब्लॉक कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन खंड विकास अधिकारी पीएस आनंद को सौंपा। मजदूर संगठन के अध्यक्ष नीरज यादव ने बताया कि उनकी मांगें वर्ष 2021 से लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रदर्शन में शामिल मजदूरों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और उग्र रूप देंगे। इस दौरान ओमप्रकाश, गुलशेर खान, प्रवीन कुमार, देवकुमार, शेर सिंह, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार और अमीर सिंह सहित बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद रहे। लगातार अनदेखी से नाराज कर्मियों और मजदूरों का यह आंदोलन आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


