– बसपा प्रमुख का बड़ा फैसला, परिवारवाद से दूरी की स्पष्ट नीति
– जरूरत पड़ने पर योग्य दलित कार्यकर्ता को सौंपी जा सकती है पार्टी की कमान
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने पार्टी में परिवार की भूमिका को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उनके हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, भविष्य में उनके परिवार के किसी सदस्य को बसपा में कोई छोटा-बड़ा पद या राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इस फैसले के तहत उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश आनंद और ईशान आनंद को भी पार्टी में किसी जिम्मेदारी या पद से दूर रखने की बात कही गई है।
मायावती की इस घोषणा को पार्टी की भावी नेतृत्व व्यवस्था और परिवारवाद को लेकर उनकी स्पष्ट नीति के रूप में देखा जा रहा है। आकाश आनंद को कभी बसपा के भविष्य के चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया गया था, लेकिन अब उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर रखने का निर्णय पार्टी की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
बताया गया है कि भविष्य में यदि परिवार से किसी सदस्य को पार्टी में भूमिका देने की आवश्यकता महसूस हुई तो आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद के नाम पर विचार किया जा सकता है। हालांकि उन्हें भी स्वत: कोई जिम्मेदारी दिए जाने की बात नहीं है। उनकी योग्यता, क्षमता और ईमानदारी को देखते हुए ही कोई अवसर देने की बात कही गई है। दीपिका फिलहाल कानून की पढ़ाई कर रही हैं।
मायावती ने यह भी स्पष्ट किया है कि परिवार के अन्य सदस्यों या अगली पीढ़ी को पार्टी की भविष्य की जिम्मेदारी सौंपने की कोई योजना नहीं है। यानी पार्टी के नेतृत्व को पारिवारिक उत्तराधिकार के बजाय संगठनात्मक क्षमता और कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता से जोड़ने का संकेत दिया गया है।
मायावती के इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि परिवार से कोई योग्य व्यक्ति आगे नहीं आता है तो पार्टी की जिम्मेदारी किसी समर्पित दलित कार्यकर्ता को सौंपने की दिशा में विचार किया जाएगा। इसके लिए पार्टी के भीतर आम सहमति और कार्यकर्ता की योग्यता को आधार बनाए जाने की बात कही गई है।
बसपा लंबे समय से सामाजिक न्याय और बहुजन प्रतिनिधित्व की राजनीति करती रही है।
हालांकि आकाश आनंद को लेकर पार्टी की भूमिका में पहले भी कई बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में ताजा निर्णय का असर बसपा के संगठन, नेतृत्व और आगामी राजनीतिक रणनीति पर कितना पड़ेगा, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल मायावती का संदेश साफ है कि बसपा में भविष्य का नेतृत्व केवल पारिवारिक संबंधों के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता, संगठनात्मक क्षमता और कार्यकर्ताओं की स्वीकार्यता के आधार पर तय किया जाएगा।


