ओबीसी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत अर्हता छूट का लाभ देने और संशोधित परिणाम जारी करने की मांग, मुख्यमंत्री से वार्ता पर अड़े प्रदर्शनकारी
लखनऊ। 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 में कथित आरक्षण विसंगति को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन राजधानी लखनऊ में जारी है। शनिवार को ईको गार्डन में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार से भर्ती प्रक्रिया में हुई आरक्षण संबंधी विसंगतियों को दूर करने, अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत अर्हता छूट का लाभ देने तथा संशोधित परिणाम जारी करने की मांग उठाई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में ओबीसी अभ्यर्थियों को अर्हता अंकों में पांच प्रतिशत की छूट का लाभ नहीं मिला। उनका दावा है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस मामले में अपनी पूर्व संस्तुति को बरकरार रखते हुए ओबीसी अभ्यर्थियों को 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत पर उत्तीर्ण मानने और उसी आधार पर परिणाम संशोधित करने की सिफारिश की है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि आयोग की संस्तुति का अनुपालन करते हुए संशोधित परिणाम जारी किया जाए और संशोधित सूची में पात्र पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को नियमानुसार नियुक्ति का अवसर दिया जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि ओबीसी के साथ दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित वर्ग से जुड़े अभ्यर्थियों के अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
इससे पहले शनिवार सुबह प्रदर्शनकारी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास के बाहर भी पहुंचे और मुख्यमंत्री से वार्ता कराने तथा आरक्षण संबंधी मामले का समाधान कराने की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर बसों के माध्यम से ईको गार्डन धरना स्थल भेज दिया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मामले को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को स्पष्ट निर्णय लेकर संशोधित परिणाम और नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।
10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की थी। बैठक में अभ्यर्थियों ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति लागू करने, 150 में 60 अंक वाले पात्र ओबीसी अभ्यर्थियों का संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग रखी। मंत्रियों ने मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का आश्वासन दिया था।
अब प्रदर्शनकारियों की निगाह मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली वार्ता और सरकार के निर्णय पर टिकी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों पुराने इस विवाद का स्थायी समाधान तभी संभव है जब आरक्षण संबंधी विसंगति दूर कर पात्र अभ्यर्थियों को उनका अधिकार दिया जाए।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि जब तक संशोधित परिणाम और नियुक्ति को लेकर ठोस निर्णय नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।


