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Monday, July 6, 2026

शहनाई से पहले गूंजीं चीखें: शादी के मंडप में मातम, बारात से पहले इकलौते भाई की मौत

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अंतिम यात्रा से पहले कराए गए फेरे

फर्रुखाबाद। कहते हैं कि नियति जब क्रूर होती है तो पलभर में हंसते-खेलते घर को मातम में बदल देती है। थाना जहानगंज क्षेत्र के गांव नगला चाहर में भी कुछ ऐसा ही हृदय विदारक दृश्य देखने को मिला। सोमवार शाम जिस आंगन में शहनाइयां बजनी थीं, रिश्तेदार बारात के स्वागत की तैयारियों में जुटे थे और बेटी की डोली उठने की खुशियां मनाई जानी थीं, उसी आंगन में रविवार रात करीब 12 बजे ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ कि पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। डीजे के तार लगाते समय करंट लगने से 26 वर्षीय सत्येंद्र राजपूत की मौत हो गई। चार बहनों के इकलौते भाई की मौत ने पूरे परिवार की खुशियां एक झटके में छीन लीं।

शादी की तैयारियों के बीच मौत बनकर दौड़ा करंट

रविवार देर रात घर में शादी की अंतिम तैयारियां चल रही थीं। रिश्तेदारों का आना-जाना लगा था। महिलाएं मेहंदी और अन्य रस्मों में व्यस्त थीं। इसी दौरान बिजली आने पर शादी समारोह के लिए डीजे के तार जोड़े जा रहे थे। तभी अचानक सत्येंद्र करंट की चपेट में आ गए।

उन्हें बचाने के लिए पास में मौजूद एक युवती ने पकड़कर खींचने की कोशिश की, लेकिन उसे भी तेज करंट का झटका लगा। बेटे को तड़पता देख मां उर्मिला देवी भी दौड़ पड़ीं और उन्हें भी करंट लगा। किसी तरह सत्येंद्र को बिजली से अलग कर परिजन बदहवास हालत में डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

जिस घर में गूंजने थे मंगलगीत, वहां मच गई चीख-पुकार

सोमवार शाम बड़ी बहन सोनम की बारात आने वाली थी। घर का हर कोना शादी की तैयारियों से सजा हुआ था। मंडप तैयार था, रिश्तेदारों की भीड़ थी और खुशियों का माहौल था। लेकिन आधी रात हुए हादसे के बाद पूरा नजारा बदल गया। जहां कुछ घंटे पहले तक शादी के गीत गूंज रहे थे, वहां मां की चीखें, बहनों की सिसकियां और पिता की खामोशी हर किसी का कलेजा चीर रही थी।

सुबह दूल्हा पहुंचा, होने वाले साले के अंतिम दर्शन किए

हादसे की सूचना मिलते ही दूल्हा तेज सिंह, निवासी मेरापुर गुजरती, जनपद मैनपुरी, सोमवार सुबह ही अपने परिजनों के साथ नगला चाहर पहुंच गया। शादी के लिए सजे घर में मातम का माहौल देखकर वह भी स्तब्ध रह गया। उसने अपने होने वाले साले सत्येंद्र के अंतिम दर्शन किए और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। वहां मौजूद बाराती और रिश्तेदार भी इस हृदय विदारक घटना से भावुक हो उठे।

भाई की अर्थी से पहले बहन के फेरे, हर आंख हो गई नम

सबसे मार्मिक और दर्द से भरा दृश्य तब सामने आया, जब परिवार और समाज के बुजुर्गों की सहमति से भाई की अंतिम यात्रा निकालने से पहले बहन सोनम के विवाह के फेरे कराए गए। एक ओर विवाह की पवित्र अग्नि के फेरे चल रहे थे, तो दूसरी ओर उसी आंगन में इकलौते भाई की अर्थी सजाई जा रही थी। बहन की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। जिसने जीवन भर बहनों की रक्षा का वचन निभाया, वह बहन की डोली उठने से पहले ही दुनिया छोड़ गया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें छलक उठीं।

चार बहनों का इकलौता भाई, बूढ़े माता-पिता का सहारा था सत्येंद्र

सत्येंद्र अपने पिता आनंद राजपूत और मां उर्मिला देवी का इकलौता बेटा था। पिता खेती-किसानी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं और लंबे समय से बीमार भी रहते हैं। चार बहनों के बीच सत्येंद्र ही परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद और माता-पिता का सहारा था। उसकी असमय मौत ने परिवार की कमर तोड़ दी। मां बार-बार बेटे को पुकारकर बेसुध हो रही थीं, जबकि पिता की आंखों से बहते आंसू उनके असहनीय दर्द की कहानी बयां कर रहे थे।

पोस्टमार्टम से किया इनकार, गांव में पसरा मातम

घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन परिजनों ने इसे हादसा बताते हुए पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर अंतिम संस्कार की तैयारी की गई।

नगला चाहर गांव ने सोमवार को ऐसा मंजर देखा, जिसे शायद ही कोई कभी भूल पाए। एक तरफ बहन की डोली उठने की तैयारी थी, तो दूसरी तरफ उसी घर से इकलौते भाई की अर्थी निकली। शहनाई की धुन सुनने को तैयार घर में मातम की चीखें गूंजती रहीं। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसकी आंखें नम हुए बिना नहीं रह सकीं।

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