कन्नौज।ठठिया थाना क्षेत्र के श्रीनगर बेहसोरा गांव में कथित इलाज ने एक युवती की जिंदगी छीन ली। उल्टी-दस्त जैसी सामान्य बीमारी लेकर पहुंची युवती को झोलाछाप के गलत इलाज ने मौत के मुंह में धकेल दिया। हालत बिगड़ने पर जब परिजन उसे मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी—युवती ने दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों के अनुसार युवती को पिछले 24 घंटे से उल्टी और दस्त की शिकायत थी। परिजन उसे नजदीकी झोलाछाप के पास ले गए, जहां बिना किसी जांच और योग्य चिकित्सकीय प्रक्रिया के दवाएं दे दी गईं। आरोप है कि गलत दवाओं और लापरवाही भरे उपचार के चलते युवती की हालत तेजी से बिगड़ती चली गई।
जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई तो परिजन आनन-फानन में उसे मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद गांव में कोहराम मच गया और परिवार में मातम पसरा है।
सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है। आखिरकार जिले में झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क कैसे फल-फूल रहा है? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हजारों अपंजीकृत चिकित्सक खुलेआम इलाज कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में दर्जनों झोलाछाप बिना किसी डिग्री के इलाज कर रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग को इसकी पूरी जानकारी है, बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली किस कदर जानलेवा बन चुकी है।
अब सवाल यह है कि क्या इस मौत के जिम्मेदार झोलाछाप के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होगा? क्या स्वास्थ्य विभाग अपने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा? या फिर यह मामला भी बाकी घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
मौत का इलाज! झोलाछाप की लापरवाही ने ली युवती की जान, सिस्टम पर खड़े हुए बड़े सवाल


