नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड के परिसमापन का आदेश देते हुए बैंक के संचालन को औपचारिक रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी गिरिकुमार एम. नायर को आधिकारिक लिक्विडेटर नियुक्त किया है, जो अब बैंक की परिसंपत्तियों, देनदारियों और शेष प्रशासनिक प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अप्रैल 2026 में पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद आया है। RBI ने बैंक पर लगातार नियामकीय मानकों के उल्लंघन, अनुपालन संबंधी गंभीर कमियों और जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल संचालन का आरोप लगाया था। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने हाईकोर्ट में बैंक के परिसमापन की याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक के निदेशक मंडल की शक्तियां आधिकारिक लिक्विडेटर के पास चली गई हैं। अब लिक्विडेटर बैंक की संपत्तियों का प्रबंधन, दावों का निस्तारण और कानून के अनुसार परिसमापन की पूरी प्रक्रिया पूरी करेंगे।
आरबीआई ने अपने आदेश में कहा था कि बैंक में लंबे समय से नियामकीय शर्तों का उल्लंघन, ग्राहक सत्यापन और अन्य अनुपालन संबंधी गंभीर खामियां बनी हुई थीं। जनवरी 2024 से बैंक पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर अप्रैल 2026 में बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
यह आदेश मुख्य रूप से बैंक के कानूनी परिसमापन से जुड़ा है। आरबीआई पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि बैंक के पास जमाकर्ताओं के भुगतान के लिए पर्याप्त तरलता उपलब्ध है और परिसमापन की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाएगी।


