लखनऊ, 14 सितंबर। उत्तर प्रदेश में बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद लोगों की देखभाल को संगठित सेवाओं से जोड़कर रोजगार सृजन और महिला सशक्तीकरण का नया माध्यम बनाने की दिशा में पहल शुरू हुई है। सोमवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग की नोडल भूमिका में ‘सतत केयर इकोनॉमी का निर्माण—देखभाल कार्य को पहचान, महिलाओं को सशक्तीकरण और समावेशी आजीविका के अवसर’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से केयर इकोनॉमी उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन के साथ बुजुर्गों और वंचित वर्गों की सुरक्षा के लिए बड़ा परिवर्तनकारी कदम साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि कुशल देखभालकर्ताओं (केयरगिवर्स) में निवेश और डिजिटल तकनीक के उपयोग से प्रदेश में मजबूत, लचीला और समावेशी देखभाल तंत्र विकसित किया जा सकता है।
असीम अरुण ने कहा कि यह कार्यशाला प्रदेश के लिए व्यापक केयर इकोनॉमी रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके माध्यम से देखभाल से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित क्षेत्र में लाने, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा जरूरतमंद लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर काम किया जाएगा।
कार्यशाला में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, कौशल विकास और दिव्यांगजन सशक्तीकरण समेत कुल 12 प्रमुख सरकारी विभागों ने भाग लिया। विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने केयर इकोनॉमी को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
चर्चा के दौरान चार प्रमुख स्तंभों पर विशेष जोर दिया गया। इनमें अनौपचारिक और घरेलू देखभाल कार्य को पहचान और आर्थिक मूल्य देना, महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करना, केयर वर्कफोर्स के लिए मानक प्रशिक्षण और प्रमाणन की व्यवस्था करना तथा दीर्घकालिक सेवाओं के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल रहा।
वित्तीय स्थिरता के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल, बीमा योजनाओं और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उद्देश्य यह है कि देखभाल सेवाओं को केवल सामाजिक जिम्मेदारी तक सीमित न रखते हुए उन्हें टिकाऊ रोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम में यूपी सिडको के चेयरमैन वाई.पी. सिंह, महिला एवं बाल विकास सचिव मनीषा त्रिघाटिया, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष विश्वनाथ, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव, समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह समेत वित्त, कौशल विकास, स्वास्थ्य और दिव्यांग कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


