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Friday, August 7, 2026

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 2015 मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ सभी आपराधिक केस रद्द

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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने वर्ष 2015 के चर्चित मैगी विवाद (Maggi Controversy) से जुड़े दुकानदारों और सप्लायरों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और सरकारी वैज्ञानिक जांच में मैगी सुरक्षित साबित हो चुकी है, तब केवल शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर दुकानदारों पर मुकदमा चलाना न्यायसंगत नहीं है।

जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि मैगी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का आधार बाद की वैज्ञानिक जांच में गलत साबित हो चुका है। ऐसे में रिटेलर्स और सप्लायर्स के खिलाफ लंबी आपराधिक कार्रवाई जारी रखना न्याय के हित में नहीं है। कोर्ट ने सभी लंबित आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने का आदेश दिया।

मई 2015 में देशभर से मैगी के सैंपल लिए गए थे। शुरुआती फूड एनालिस्ट रिपोर्ट में दावा किया गया कि मैगी के मसाला टेस्टमेकर में लेड (Lead) की मात्रा निर्धारित सीमा 2.5 PPM से अधिक है। साथ ही, पैकेट पर ‘No Added MSG’ लिखे होने के बावजूद मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) मिलने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद कई राज्यों में मैगी की बिक्री पर रोक लगी और दुकानदारों, सप्लायरों तथा निर्माता कंपनी के खिलाफ केस दर्ज हुए।

बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा अगस्त 2015 में मैगी पर लगा प्रतिबंध हटाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI), मैसूर ने दोबारा जांच की। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मैगी में लेड और MSG की मात्रा निर्धारित मानकों के भीतर थी। बाद में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने भी माना कि मैगी को असुरक्षित साबित करने वाला कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि जब वैज्ञानिक जांच और उच्च न्यायालयों के निष्कर्ष शुरुआती आरोपों का समर्थन नहीं करते, तब केवल उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों और सप्लायरों पर मुकदमा जारी रखना अनुचित होगा। इसलिए सभी आपराधिक मामले रद्द कर दिए गए।

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले से करीब नौ वर्षों से कानूनी कार्रवाई झेल रहे छोटे दुकानदारों और सप्लायरों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही, यह फैसला स्पष्ट करता है कि मैगी को लेकर लगाए गए लेड और MSG संबंधी आरोप बाद की वैज्ञानिक जांच में प्रमाणित नहीं हो सके, जिससे उपभोक्ताओं के बीच भी स्थिति स्पष्ट हुई।

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