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Friday, July 3, 2026

निचली गंगा नहर सूखी, सिंचाई को तरसे किसान; डीएम से तत्काल पानी छोड़ने की मांग

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धान, गन्ना और सब्जियों की फसल पर संकट, महंगी सिंचाई से गरीब किसानों की बढ़ी चिंता
शमशाबाद/फर्रुखाबाद। भीषण गर्मी और बारिश में हो रही देरी के बीच शमशाबाद क्षेत्र के किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। क्षेत्र से होकर गुजरने वाली निचली गंगा नहर में लंबे समय से पानी न आने के कारण धान, गन्ना एवं सब्जियों की फसलें प्रभावित होने लगी हैं। किसानों ने जिलाधिकारी फर्रुखाबाद से तत्काल नहर में पर्याप्त पानी छोड़े जाने तथा नहर की सफाई कराने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि शमशाबाद क्षेत्र के दर्जनों गांवों की हजारों बीघा कृषि भूमि की सिंचाई निचली गंगा नहर पर निर्भर है। हर वर्ष इसी नहर के माध्यम से धान की पौध, गन्ने और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की सिंचाई होती है, लेकिन इस बार लंबे समय से नहर सूखी पड़ी है। इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है और किसान आर्थिक नुकसान की आशंका से चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नहर में पानी न होने से केवल खेती ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के सामने भी पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। नहर का तल पूरी तरह सूखा दिखाई दे रहा है और पानी की तलाश में पशु-पक्षी नहर के किनारे भटकते नजर आ रहे हैं। यदि जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
धान की खेती करने वाले किसान रमेश चंद्र श्रीवास्तव, नितिन कुमार, जितेंद्र कुमार, नवदीप कुमार, संजीव कुमार, बृजेश कुमार, सुशील, सुरेश और रामवीर सहित अन्य किसानों ने बताया कि धान की फसल तैयार करने के लिए इस समय भरपूर पानी की आवश्यकता होती है। नहर सूखी होने के कारण उन्हें निजी संसाधनों से सिंचाई कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि संपन्न किसान अपने निजी सिंचाई साधनों से डेढ़ सौ से दो सौ रुपये प्रति घंटे तक वसूल रहे हैं, जो छोटे और गरीब किसानों की आर्थिक क्षमता से बाहर है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कायमगंज से आगे निचली गंगा नहर में जगह-जगह झाड़ियां और गंदगी जमा होने से पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है। उनका कहना है कि समय रहते नहर की सफाई नहीं कराई गई, जिसके कारण यदि पानी छोड़ा भी जाता है तो वह आगे तक नहीं पहुंच पाता और अंतिम छोर के किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पाता।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र नहर में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया और सफाई नहीं कराई गई तो धान, गन्ना और अन्य फसलों को भारी नुकसान होगा, जिसकी भरपाई कर पाना किसानों के लिए कठिन होगा। उन्होंने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर सिंचाई व्यवस्था सुचारु कराने की मांग की है।
वहीं, सूत्रों के अनुसार निचली गंगा नहर में आंशिक रूप से पानी छोड़ा गया है, लेकिन कुछ स्थानों पर आवश्यकता से अधिक पानी रोक लेने तथा अवरोध उत्पन्न होने के कारण पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसका सबसे अधिक खामियाजा उन गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी खेती पूरी तरह नहर के पानी पर निर्भर है।

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