कानपुर के विकास दुबे की जमीनें फर्रूखाबाद में भी ! माफिया अनुपम दुबे गैंग से सांठगांठ कर चलता था खेल, साथी संजीव पारिया व अवधेश मिश्रा ने भी की थी कई जमीनें कब्जा, जो आर भी प्रशासन की नजर से दूर
=कमालगंज में नाम में हेराफेरी कर विकास के नाम खरीदी कई बीघा जमीनें आज भी पड़ी
=तिर्वा कोठी, डीएम आवास के करीब व अख्तर मसीह की लाल कोठी पर की गई अवैध प्लाटिँग पर नही गई प्रशासन की नजर
=माफिया तंत्र के खास गुर्गे अवधेश मिश्रा ने भोलेपुर और नवाबगंज में कब्जा कर डालीं दलितों समेत सरकारी व तालाब की जमीनें
यूथ इंडिया।
फर्रूखाबाद: चर्चित विकास दुबे का मामला केवल कानपुर में ही नही रहा अपने दौर में उसका जिले के माफिया तंत्र के सरगना अनुपम दुबे उसके भाईयों समेत कचहरी फतेहगढ में आतंक का पर्याय रहे संजीव पारिया व नॉन प्रक्टीशनर अपराधी वकील अवधेश मिश्रा से भी खासा जोडगांठ का रहा। ऊंची सेटिंग के बलबूते माफिया गैंगों के सफाये के बाद भी अभी तमाम जमीनें ऐसी पड़ी जिन पर सरकार का बुलडोजर पहुंच ही नही पाया।
थाना कमालगंज क्षेत्र के फ्लोरमिल के पास करीब १० से १२ बीघा जमीन आज भी विकास दुबे की बताई जा रही है। जोकि विकास कुमार के नाम से खरीदी गई थी। इसके अलावा चिरपुरा में भी जमीन पडी है। माफिया तंत्र खतौनियों में बंजर और सरकारी जमीनों को देख अपने गुर्गो के नाम चढवाते थे।
अपने आतंक के बलबूते जिले के माफिया अनुपम दुबे ने डीएम आवास के पास लाल कोठी के निकट गरैया खाडे मंदिर और तालाब के पास तिकडम की व्यवस्था के चलते वेशकीमती जमीनें करोडों रूपये में बिकवा दीं। वहीं फतेहगढ की अख्तर मसीह की कोठी अनुपम के गैंग ने जबरिया कब्जा कर अवैध प्लाटिंग कर बेंच डाली। खौफजदा स्वामी शाहरूख खां अपना परिवार छोडकर ही जिले से चले गये। इसी प्रकार तिर्वा कोठी के पास अनुपम के गैंग ने कागजी कलाबाजी कर तमाम जमीनें बेंच डाली जोकि आज भी प्रशासन की नजर से दूर है। बेंची गई इन जमीनों पर बसाई गई अवैध कालौनियों पर बीती कार्यवाहियों के दौरान जिला प्रशासन की नजर नही पड सकी।
विकास व अनुपम दुबे के नाम के सहारे इस गैंग के लिखिया मुंसी नॉन प्रक्टीशनर वकील अवधेश मिश्रा ने भोलेपुर में अपने मकान के पीछे स्थित सरकारी तालाब को भी पाट कर कब्जा कर लिया। अपनी हनक के चलते नवाबगंज थाना क्षेत्र में गांव चांदपुर में अवैध रूप से एक ही भवन भूमि पर पहले कृष्णा पब्लिक स्कूल और एसकेएम इंटर कालेज की स्थापना कर ली। बाद में कई दलितों की जमीनें भी कब्जा कर यहां उसी भवन भूमि में कृष्णा महिला डिग्री कालेज भी बना दिया। चौंकाने बाली बात है कि कृष्णा पब्लिक स्कूल आज भी यहां कागजों में चलता है। जबकि यहां भवन के नाम पर दुकानों में बोर्ड लगाया गया है।
विकास दुबे की जमीनों और जिले के माफिया तंत्र के सांठगांठ के मामले को शासन में भी गंभीरता से लिया जा रहा है और अब तक इस ओर जीरो टॉलरेंस के तहत कडी कार्यवाही और निगरानी क्यों नही हुई इस पर भी जबाव तलब की तैयारी की जा रही है। हालाकि उससे पूर्व भी जिलाधिकारी डा० अंकुर लाठर ने इन मामलों में बारीकी से जांच करने के लिए अधिनस्थों को आदेशित कर दिया है।


