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Wednesday, May 20, 2026

ईरान-इस्राइल जंग में 4000 ठिकानों पर हमले, 16,000 बम गिराने का दावा; मध्य-पूर्व में युद्ध की आहट तेज

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तेल अवीव/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब खुली जंग का रूप लेता नजर आ रहा है। इस्राइल ने दावा किया है कि उसने पिछले एक महीने में ईरान के 4000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की है। इस अभियान में अमेरिका के सहयोग की भी पुष्टि की गई है।

इस्राइली रक्षा बल (आईडीएफ) के अनुसार यह अभियान केवल सीमित हमलों तक नहीं रहा, बल्कि इसे रणनीतिक रूप से ईरान की सैन्य और आतंकी संरचना को कमजोर करने के उद्देश्य से अंजाम दिया गया। सेना का कहना है कि उसने ईरान के भीतर मौजूद कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और नेटवर्क को तबाह कर दिया है।

आईडीएफ के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफरिन ने बताया कि इस अभियान के तहत 10,000 से अधिक कथित आतंकी घटकों को नष्ट किया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस्राइली वायुसेना ने ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसकर एक सैन्य विमान को मार गिराया।

इस दौरान इस्राइल ने केवल ईरान तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि हिजबुल्ला के खिलाफ भी मोर्चा तेज कर दिया है। लेबनान में घुसकर इस संगठन के ठिकानों पर हमले किए जाने की बात सामने आई है।

आईडीएफ का कहना है कि बीते एक महीने में करीब 800 हवाई मिशन चलाए गए, जिनमें 16,000 से ज्यादा बम गिराए गए। इन हमलों में ईरान के 2,000 से अधिक सैनिकों और कमांडरों के मारे जाने का दावा भी किया गया है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इस्राइल ने यह भी दावा किया है कि उसकी वायुसेना महज 24 घंटे के भीतर तेहरान के केंद्र तक पहुंच गई। सेना के मुताबिक बेहद कम समय में ईरानी सत्ता के कई शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाया गया, जिससे शासन तंत्र को बड़ा झटका लगा है।

अमेरिका की भूमिका भी इस संघर्ष में खुलकर सामने आई है। सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि उसने ईरान के भूमिगत सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को सीमित करना बताया गया है।

अमेरिका और इस्राइल दोनों का कहना है कि वे मिलकर ईरान को भविष्य में क्षेत्रीय खतरा बनने से रोकना चाहते हैं। इस संयुक्त रणनीति को पश्चिम एशिया की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया जा रहा है।

इस बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेहद सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान की मौजूदा सत्ता को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है और जल्द ही वहां का शासन ढह सकता है।

नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि इस्राइल क्षेत्र के अन्य देशों के साथ मिलकर एक नया रणनीतिक गठबंधन बना रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के प्रभाव को खत्म करना होगा।

दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान ने इस्राइल और अमेरिका के ठिकानों पर कई बड़े हमले किए हैं, जिनमें मिसाइल हमले भी शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि तेल अवीव में एक मिसाइल गिरने से सड़क पर बड़ा गड्ढा बन गया, जिसका वीडियो भी सामने आया है। इसके अलावा फारस की खाड़ी में एक इस्राइली मालवाहक जहाज को निशाना बनाने का दावा किया गया है।

ईरान ने यह भी कहा है कि उसने यूएई और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और कुछ ड्रोन सिस्टम को नष्ट कर दिया। हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

इस बढ़ते संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ती जा रही है कि यदि जल्द ही हालात नहीं संभले तो यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसके असर पूरी दुनिया पर पड़ सकते हैं।

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