शमशाबाद/फर्रुखाबाद। त्योहारों का मौसम शुरू होते ही खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शमशाबाद के परचून बाजार में चीनी, सरसों तेल, रिफाइंड और वनस्पति घी के दाम बढ़ने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने से गरीब परिवारों, मजदूरों और किसानों के लिए घरेलू बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को चीनी का खुदरा भाव 62 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक बताया गया। वहीं, रिफाइंड तेल के एक लीटर पैकेट की कीमत पहले 130 से 140 रुपये के आसपास होने के मुकाबले अब करीब 160 रुपये बताई जा रही है। सरसों तेल के दाम भी लगभग 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने का दावा किया गया है। इन कीमतों की स्वतंत्र बाजार जांच उपलब्ध नहीं है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से घरों का खर्च बढ़ रहा है। चाय से लेकर मिठाई और त्योहारों पर बनने वाले पकवानों तक में चीनी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कीमत बढ़ने का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ता है।
कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि पहले चीनी के दाम 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए थे और बाद में घटकर करीब 50 रुपये तक आ गए थे। अब कीमतों में फिर तेजी आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन पुराने और मौजूदा भावों की पुष्टि के लिए बाजार के नियमित मूल्य आंकड़ों की जरूरत है।
खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी की शिकायत भी सामने आई है। स्थानीय बाजार के लोगों के अनुसार, रिफाइंड तेल का एक लीटर पैकेट करीब 160 रुपये में बिक रहा है, जबकि सरसों तेल का भाव लगभग 200 रुपये प्रति किलोग्राम बताया जा रहा है। वनस्पति घी और दालों के दाम बढ़ने की भी चर्चा है।
खाद्य तेल रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है। इसकी कीमत बढ़ने पर परिवारों को अपने खर्च में कटौती करनी पड़ सकती है। त्योहारों के दौरान पकवान और मिठाइयां बनाने की जरूरत बढ़ने से यह दबाव और महसूस हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नवरात्र के बाद विजयदशमी, करवाचौथ, धनतेरस और दीपावली जैसे त्योहार आने हैं। इस दौरान घरों में पूजा-पाठ, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी गरीब और निम्न आय वाले परिवारों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पहले त्योहारों के दौरान सरकारी राशन दुकानों से चीनी और रिफाइंड जैसी वस्तुएं मिलने से राहत मिलती थी। अब ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं होने की शिकायत भी की गई है। हालांकि, संबंधित योजना और वर्तमान पात्रता की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
कीमतों के साथ-साथ खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर भी स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि बाजार में बिकने वाले तेल की गुणवत्ता पर पर्याप्त निगरानी नहीं है। वहीं, कुछ कारखानों में 15 किलोग्राम की टिन में पाम ऑयल मिलाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी विशेष उत्पाद या कारखाने में मिलावट होने की पुष्टि केवल संबंधित नमूनों की जांच और सक्षम विभाग की रिपोर्ट से ही की जा सकती है।
स्थानीय लोगों ने खाद्य सुरक्षा विभाग से बाजार में बिकने वाले खाद्य तेलों और अन्य वस्तुओं के नमूने लेकर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में मिलावट या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
बढ़ती कीमतों के बीच कुछ स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि कहीं त्योहारों से पहले जरूरी खाद्य वस्तुओं की जमाखोरी तो नहीं की जा रही। उन्होंने जिला प्रशासन से बाजार की निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर भंडारण स्थलों की जांच कराने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यापारी द्वारा अवैध रूप से सामान जमा करके बाजार में कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है, तो ऐसे मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, फिलहाल जमाखोरी की पुष्टि करने वाला कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि मजदूरी और आमदनी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने के बीच रोजमर्रा की वस्तुओं का महंगा होना परिवारों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से कीमतों की निगरानी, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच और उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।
त्योहारों से पहले महंगाई की मार: चीनी 65 रुपये किलो, रिफाइंड 160 रुपये लीटर तक पहुंचने का दावा


