वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका (US) में कार्यरत लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स (Indian professionals) के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। H-1B वीजा रिन्यूअल में भारी देरी के कारण हजारों भारतीयों की नौकरी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। वीजा समय पर न बढ़ने से कई कंपनियों ने कर्मचारियों को वर्क से रोकने, छुट्टी पर भेजने या जॉब कॉन्ट्रैक्ट समाप्त करने की चेतावनी देना शुरू कर दिया है।
अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी U.S. सिटीजनशिप एंड इमाइग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के पास H-1B वीजा रिन्यूअल से जुड़े हजारों आवेदन पेंडिंग बताए जा रहे हैं। सामान्य तौर पर जहां रिन्यूअल प्रक्रिया 2 से 4 महीने में पूरी हो जाती थी, वहीं अब यह अवधि 6 से 9 महीने तक पहुंच गई है। वीजा संकट का सबसे ज्यादा असर IT, सॉफ्टवेयर, AI, डेटा साइंस, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग सेक्टर में काम कर रहे भारतीयों पर पड़ रहा है। कई अमेरिकी कंपनियों ने साफ कर दिया है कि वैध वीजा के बिना कर्मचारी काम नहीं कर सकते, चाहे उनकी स्किल कितनी ही अहम क्यों न हो।
भारतीय प्रोफेशनल्स की पीड़ा
कई भारतीय कर्मचारियों का कहना है कि वीजा रिन्यूअल में देरी के चलते नौकरी जाने का डर
बच्चों की पढ़ाई पर असर
घर और लोन की किस्तों का दबाव
भारत लौटने की मजबूरी
जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में इमिग्रेशन नीतियों की सख्ती, सुरक्षा जांच में बढ़ोतरी और कर्मचारियों की कमी के चलते फाइलों का निपटारा धीमा हो गया है। इसके अलावा चुनावी माहौल में वर्क वीजा पर सख्त नजर भी देरी की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। अमेरिकी टेक कंपनियों ने भी इस देरी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भारतीय प्रोफेशनल्स के बिना कई प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं। वहीं भारतीय समुदाय की ओर से भारत सरकार से भी कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग तेज हो रही है।
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द प्रक्रिया तेज नहीं की गई, तो हजारों भारतीयों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है अमेरिकी कंपनियों को स्किल्ड टैलेंट की भारी कमी झेलनी पड़ेगी, भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग पर असर पड़ेगा। H-1B वीजा रिन्यूअल में देरी अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि रोजगार, परिवार और भविष्य से जुड़ा गंभीर संकट बन चुकी है। भारतीय प्रोफेशनल्स की निगाहें अब अमेरिका सरकार और USCIS के अगले कदम पर टिकी हैं।


