रिकॉर्ड, प्रोजेक्ट और सख्त प्रशासनिक छवि के दम पर मिली बड़ी जिम्मेदारी
रह चुके हैं यूपी के सूचना निदेशक
18 महीने में बना दिया था आगरा लखनऊ एक्सप्रेस हाईवे
अब परिवहन विभाग में चलेगा क्लींन -अप मिशन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल के बीच एक अहम और रणनीतिक निर्णय लेते हुए तेजतर्रार आईएएस अधिकारी आशुतोष निरंजन को परिवहन विभाग का आयुक्त नियुक्त किया है। प्रदेश में सड़क सुरक्षा, अवैध वसूली, ओवरलोडिंग और परिवहन तंत्र की पारदर्शिता जैसे गंभीर मुद्दों के बीच यह नियुक्ति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिससे विभाग में व्यापक सुधार की उम्मीदें जगी हैं।
2010 बैच के आईएएस अधिकारी आशुतोष निरंजन अपनी सख्त प्रशासनिक शैली, तेज निर्णय क्षमता और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने यूपीडा में तैनाती के दौरान महज 18 महीनों में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा कराने में अहम भूमिका निभाई, जिसे प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इस परियोजना ने न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत किया बल्कि निवेश और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी खोले।
उनका प्रशासनिक अनुभव भी बेहद व्यापक रहा है। वे उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक के रूप में सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में सफल रहे। इसके अलावा गोंडा, बस्ती और देवरिया जैसे संवेदनशील जिलों में जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाते हुए प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व दिया। गोंडा में कलेक्टर के साथ कॉफी जैसी पहल के जरिए उन्होंने प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर नवाचार की मिसाल पेश की।
केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के निजी सचिव के रूप में कार्य करते हुए प्रशासनिक अनुभव को और धार दी। उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई है और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में 11वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था।
सरकार की प्राथमिकता अब परिवहन विभाग में डिजिटल मॉनिटरिंग को मजबूत करना, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और सड़क सुरक्षा के स्तर में सुधार लाना है। प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है और विभाग पर अवैध वसूली के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसे में आशुतोष निरंजन की नियुक्ति को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अपने पिछले कार्यकाल की तरह आशुतोष निरंजन परिवहन विभाग में कितनी तेजी से सुधार लागू कर पाते हैं और क्या वे विभाग को पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बना पाने में सफल होंगे।


