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Sunday, June 21, 2026

भूख के विरुद्ध मानवता का महायज्ञ : बृज की रसोई ने फिर परोसी संवेदनाओं की थाली संग शरवत

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तपती धूप में 2000 से अधिक जरूरतमंदों तक पहुँचा पौष्टिक भोजन व शीतल शरबत, सेवा अभियान बना करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण: सी. एच. तिवारी

बृज की रसोई का सतत प्रयास बना सामाजिक समरसता का प्रतीक, सहयोगियों और स्वयंसेवकों ने निभाई सक्रिय सहभागिता: बलवंत सिंह

लखनऊ, 21 जून। प्रेरणास्रोत बाबा नीम करौली जी की असीम कृपा एवं इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी (रजि.) के सेवा प्रकल्प बृज की रसोई के तत्वावधान में प्रत्येक रविवार की भाँति इस सप्ताह भी विशाल निःशुल्क भोजन एवं शीतल शरबत वितरण सेवा का आयोजन आशियाना क्षेत्र में अत्यंत श्रद्धा, समर्पण एवं मानवीय संवेदनाओं के साथ सम्पन्न हुआ।
भीषण गर्मी और झुलसा देने वाली धूप के बीच आयोजित इस सेवा अभियान में लगभग 2000 से अधिक अकिंचन, असहाय, निराश्रित, जरूरतमंद बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं तथा दिहाड़ी मजदूरों को ससम्मान, प्रेमपूर्वक एवं आत्मीयता के साथ पौष्टिक भोजन एवं शीतल शरबत वितरित किया गया। भोजन प्राप्त करने वालों के चेहरों पर उभरी संतुष्टि और मुस्कान ने पूरे वातावरण को भावुक और प्रेरणादायी बना दिया।
संस्था के संस्थापक विपिन शर्मा ने बताया कि बृज की रसोई केवल भोजन वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, मानवीय करुणा और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित सेवा का एक सतत अभियान है। उन्होंने कहा कि जब समाज का सक्षम वर्ग अपने हिस्से की खुशियों में से कुछ पल और कुछ संसाधन वंचित वर्ग के लिए समर्पित करता है, तभी वास्तविक अर्थों में लोककल्याण और राष्ट्र निर्माण की भावना साकार होती है।
दीपक भुटियानी ने कहा कि जब किसी भूखे व्यक्ति के हाथों में भोजन की थाली पहुँचती है, तब केवल उसकी भूख शांत नहीं होती, बल्कि इंसानियत, दया, सह-अस्तित्व और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी तृप्त होती है। उन्होंने कहा कि सेवा ही सच्चा धर्म है और किसी जरूरतमंद के चेहरे पर लौट आई मुस्कान से बड़ा कोई पुरस्कार नहीं हो सकता।
अनुराग दुबे ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान बच्चों, वृद्धजनों एवं श्रमिक परिवारों के चेहरों पर दिखाई दी प्रसन्नता ने उपस्थित स्वयंसेवकों को भावविभोर कर दिया। अनेक लोगों ने इस अभियान को मानवता, करुणा और अपनत्व का महायज्ञ बताते हुए इसकी सराहना की।
जालिम सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज का एक बड़ा वर्ग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्षरत है, तब ऐसे सेवा कार्य सामाजिक संवेदनशीलता को सुदृढ़ करने का कार्य कर रहे हैं।
वहीं वरिष्ठ समाजसेवी सी. एच. तिवारी ने कहा कि बृज की रसोई का उद्देश्य केवल भूख मिटाना नहीं, बल्कि यह विश्वास जगाना है कि समाज आज भी संवेदनाओं, सहयोग और मानवीय मूल्यों से जीवंत है।
कार्यक्रम के सफल संचालन में सी.एच. तिवारी, जालिम सिंह, संजय श्रीवास्तव, बलवंत सिंह, दीपक भुटियानी, अनुराग दुबे, ऋषभ मित्रा, मुकेश कनौजिया, रोहित कुमार, सत्यम, उमाशंकर यादव सहित अनेक स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के समापन पर गीता प्रजापति ने सभी सहयोगियों, दानदाताओं एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सामूहिक सहभागिता से ही ऐसे सेवा अभियान निरंतर आगे बढ़ते हैं। संस्था ने भविष्य में भी इसी प्रकार निरंतर सेवा कार्य जारी रखने का संकल्प दोहराया। एक निवाला किसी की मुस्कान बन जाए, इससे बड़ा पुण्य और इससे बड़ी पूजा कोई नहीं।

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