– हाईकोर्ट ने कहा—आरोप की प्रकृति, साक्ष्य और भूमिका को देखते हुए जमानत का आधार बनता
– वरिष्ठ नेता शरद श्रीवास्तव के बेटे हैं बादल
प्रयागराज, फर्रुखाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने शरद श्रीवास्तव के बेटे बादल श्रीवास्तव (Badal Srivastava) को बड़ी राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) अर्जी को मंजूरी दे दी है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने कहा कि आरोपों की प्रकृति व उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए गिरफ्तारी की स्थिति में बादल को जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
बादल की ओर से उनके अधिवक्ता विनोद कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्राथमिकी में आवेदक पर प्रथम सूचना रिपोर्टकर्ता और उसकी पत्नी पर फायर करने का आरोप है, लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई भी चोट नहीं आई,पूरी घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड है,आवेदक का आपराधिक इतिहास भी याचिका में स्पष्ट किया गया है, और वह जांच व ट्रायल में पूरा सहयोग करेगा तथा किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं करेगा।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश एजीए ने जमानत देने का विरोध किया। हाईकोर्ट ने कहा—मामले की परिस्थितियाँ जमानत के पक्ष में न्यायालय ने सभी बिंदुओं पर विचार करते हुए कहा कि—घटना में किसी के घायल होने का उल्लेख नहीं, उपलब्ध साक्ष्य अदालत के समक्ष हैं, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश (सिद्धाराम सतींगप्पा मामला) के अनुसार आरोप की प्रकृति, गंभीरता और आरोपी का आचरण भी महत्वपूर्ण आधार होते हैं।
इस आधार पर अदालत ने कहा कि यह अग्रिम जमानत देने योग्य मामला है। गिरफ्तारी की स्थिति में बादल श्रीवास्तव को ₹50,000 के निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर रिहा किया जाएगा। अदालत ने साथ में निम्न शर्तें भी लगाईं कि आवेदक साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और ट्रायल में नियमित उपस्थित होगा। किसी भी व्यक्ति को प्रलोभन, धमकी या दबाव नहीं डालेगा।ट्रायल के दौरान पूरी तरह सहयोग करेगा।
कोर्ट की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो अभियोजन पक्ष जमानत निरस्तीकरण की अर्जी दाखिल कर सकता है। अदालत का आदेश 12 दिसंबर 2025 को पारित हुआ। इस फैसले से बादल श्रीवास्तव को बड़ी राहत मिली है, जबकि आगे की कार्यवाही ट्रायल कोर्ट में चलेगी।


