– लखीमपुर, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती समेत 11 जिलों में रेड अलर्ट
– लखनऊ, कानपुर, उन्नाव और फर्रुखाबाद के आसपास भी बाढ़ की आशंका
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश, आंधी और वज्रपात की चेतावनी के बीच प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर हवा की गति 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जिलाधिकारियों और राहत-बचाव एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। राहत आयुक्त कार्यालय ने रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर तैयारियों की समीक्षा की है।
भारी बारिश की आशंका को देखते हुए लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इन जिलों में बारिश के साथ जलभराव और नदी-नालों के जलस्तर बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है।
इसके अलावा बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, संत कबीर नगर, महाराजगंज, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बस्ती, हरदोई, लखनऊ, बाराबंकी, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल और बदायूं समेत कई जिलों में भी भारी बारिश को लेकर प्रशासन को सतर्क किया गया है।
प्रशासन ने आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, मऊ, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, अंबेडकर नगर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोंडा, श्रावस्ती, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, अमेठी, फतेहपुर, कानपुर नगर, बांदा, कौशांबी और चित्रकूट के कुछ वाटरशेड क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की आशंका को देखते हुए राहत एवं बचाव एजेंसियों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
इस सूची में फर्रुखाबाद भी पहले से बाढ़ प्रभावित जिलों में शामिल रहा है। ऐसे में गंगा और रामगंगा के आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। सितंबर के दौरान प्रदेश में बाढ़ की स्थिति के चलते फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया था।
प्रदेश में इस मानसून के दौरान बाढ़ का संकट भी गंभीर रहा है। राहत आयुक्त कार्यालय से जारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर में 37 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए, जबकि एक समय 25 जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ था। इस दौरान 19,454 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 1,315 बाढ़ शरणालय बनाए गए, जिनमें 6,698 लोग रह रहे थे।
बाढ़ के कारण 1,272 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई थी। इनमें से 1,002 प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रभावित जिलों में फर्रुखाबाद, कानपुर नगर, प्रयागराज, उन्नाव, हरदोई, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, गाजीपुर, बलिया और वाराणसी समेत कई जिले शामिल रहे।
बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव के लिए प्रदेश में 1,499 नाव और मोटरबोट तैनात किए गए थे। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,067 मेडिकल टीमें भी लगाई गई थीं। 1,311 राहत केंद्र बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई थी, जिनमें 201 केंद्र सक्रिय थे।
बलिया में गंगा और सरयू के बढ़े जलस्तर से करीब 20,500 लोग प्रभावित हुए थे। वहां 83 नावें लगाई गईं और राहत सामग्री के साथ भोजन व दवा किट वितरित किए गए। पीलीभीत में शारदा, देवहा और खाकरा नदियों के जलस्तर में वृद्धि से भी प्रशासन को व्यापक स्तर पर निगरानी करनी पड़ी थी।
भारी बारिश और मौसम की चेतावनी को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद करने के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार कन्नौज, इटावा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, सिद्धार्थनगर, हमीरपुर, बांदा, मऊ, चित्रकूट, मिर्जापुर और बहराइच समेत कई जिलों में कक्षा आठ तक के विद्यालय बंद रखे गए। वहीं कानपुर और प्रयागराज समेत कुछ जिलों में कक्षा 12 तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया।
बारिश के साथ आंधी और बिजली गिरने की आशंका ने खतरा और बढ़ा दिया है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए लोगों को खुले मैदान, पेड़, बिजली के खंभों और कमजोर भवनों से दूर रहने की सलाह दी गई है। किसानों को भी खेतों में काम करते समय मौसम पर नजर रखने को कहा गया है।
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में बारिश का यह दौर 27 सितंबर तक विशेष रूप से प्रभावी रह सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 27 सितंबर को भी भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है, जबकि पश्चिमी यूपी में भी बारिश और आंधी का असर रहने का अनुमान है।


