रुद्रप्रयाग: केदारनाथ धाम में इस यात्रा अवधि के दौरान 156 दिनों में 15.45 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के साथ धाम और पैदल मार्ग पर कचरे का दबाव भी बढ़ गया। अब तक करीब 250 टन कचरा एकत्र होने की बात सामने आई है। इसमें प्लास्टिक की पन्नियां, बोतलें और खाने-पीने की सामग्री शामिल है। यात्रा के दौरान लगातार बढ़ती भीड़ के बीच कचरे के निस्तारण की चुनौती भी सामने आई है।
गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक करीब 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर कई जगह प्लास्टिक और खाने-पीने का सामान बिखरा नजर आ रहा है। यात्रियों की आवाजाही वाले हिस्सों के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी कचरा जमा होने से सफाई व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। मार्ग पर सफाई कर्मचारियों की ओर से कचरा हटाने का काम लगातार किया जा रहा है। यात्रा मार्ग को साफ रखने के लिए अलग-अलग स्थानों से कचरा एकत्र कर हटाया जा रहा है।
केदारनाथ जैसे हिमालयी और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में बड़ी मात्रा में कचरा जमा होना चिंता का विषय है। प्लास्टिक और अन्य गैर-जैविक कचरे के खुले में पड़े रहने से प्राकृतिक वातावरण पर असर पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या के साथ कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। सफाई अभियान के जरिए मार्ग और आसपास के क्षेत्रों से जमा कचरा हटाया जा रहा है।


