फर्रुखाबादl थाना जहानगंज क्षेत्र के कोरीखेड़ा गांव में कक्षा चार के मासूम छात्र आशुतोष की अपहरण के बाद नृशंस हत्या को करीब 2 महीना का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस आज तक इस जघन्य हत्याकांड से पर्दा नहीं उठा सकी है। 10 दिसंबर की शाम करीब 5:30 बजे कोरीखेड़ा गांव निवासी चंद्रप्रकाश गुप्ता के दस वर्षीय बेटे आशुतोष का अपहरण किया गया था। शुरुआत में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई, लेकिन 14 दिसंबर को गांव से लगभग 600 मीटर दूर आलू के खेत में छात्र का शव मिलने के बाद मामला पूरे जिले में सनसनी बन गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि आशुतोष की हत्या बेहद क्रूर तरीके से वजनदार वस्तु से वार कर की गई थी। इसके बाद परिजनों की तहरीर पर जमीनी विवाद को हत्या की वजह बताते हुए 11 लोगों को नामजद करते हुए अपहरण और हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। नामजद आरोपियों में कोरीखेड़ा, न्यामतपुर ठाकुरान और फतेहगढ़ क्षेत्र के लोग शामिल हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने इस हत्याकांड के खुलासे के लिए कई स्तरों पर टीमें गठित कीं। एसओजी टीम, सर्विलांस टीम के साथ साथ अन्य विशेष पुलिस टीमों को भी जांच में लगाया गया। इसके अलावा गोपनीय सूचना तंत्र को भी सक्रिय किया गया और कई संदिग्धों से पूछताछ की गई, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। एक-एक एंगल खंगालने के दावे किए जा रहे हैं, पर नतीजा सिफर बना हुआ है।
जांच के दौरान दो बार कन्नौज से खोजी कुत्ते भी बुलाए गए, जो एक नलकूप की कोठरी के पास जाकर रुके थे। उस स्थान को लेकर पुलिस की नजरें अब भी टिकी हुई हैं और गोपनीय तरीके से जानकारी जुटाई जा रही है, लेकिन इसके बाद भी हत्या की कड़ी नहीं जुड़ सकी। जमीनी विवाद को लेकर परिजनों के आरोपों के बावजूद पुलिस को ऐसे पुख्ता साक्ष्य नहीं मिल पाए हैं, जिनके आधार पर नामजद आरोपियों पर सीधी कार्रवाई हो सके।
इधर, पुलिस की सुस्त प्रगति से नाराज डीआईजी ने थानाध्यक्ष राजेश राय और क्षेत्राधिकारी अजय वर्मा को कानपुर कार्यालय बुलाकर कड़ी फटकार भी लगाई और जल्द खुलासे के निर्देश दिए, लेकिन इसके बाद भी हालात में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। एक मासूम बच्चे की बेरहमी से हत्या और एक महीने तक नाकाम जांच ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आज स्थिति यह है कि परिजन न्याय की आस लगाए दर-दर भटक रहे हैं, गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है और आरोपी खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं। सवाल साफ है जब पुलिस अधीक्षक की कई टीमें, एसओजी और सर्विलांस जैसी विशेषज्ञ इकाइयां भी इस हत्याकांड को नहीं सुलझा पा रही हैं, तो आखिर आशुतोष के कातिल कब पकड़े जाएंगे।

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