– सैरपुर में दर्ज हुआ ताजा मुकदमा!
लखनऊ। राजधानी के सैरपुर इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने 2011 के हत्या कांड की परतों को फिर से उधेड़ दिया है। अब इस पुराने केस में लाइसेंसी असलहे को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायतकर्ता लक्ष्मीशंकर उर्फ पप्पू ने आरोप लगाया है कि जिस लाइसेंसी बंदूक का इस्तेमाल हत्या के मामले से जुड़ा था, उसे सुरक्षित रखने के बजाय अवैध तरीके से 2018 में बेच दिया गया। यह भी आरोप है कि असलहे का लाइसेंस नियमों के खिलाफ आरोपी के पुत्र के नाम ट्रांसफर कर दिया गया—जो सीधे-सीधे कानून और प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाने जैसा है।
गौरतलब है कि 2011 के इस हत्या मामले में दोषियों को अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। लेकिन अब सामने आए नए तथ्यों ने पूरे मामले को एक बार फिर संदिग्ध बना दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब आरोपी जेल में थे, तब असलहे का अवैध सौदा और लाइसेंस ट्रांसफर कैसे हो गया?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह मामला केवल लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित आपराधिक साजिश की ओर इशारा करता है, जिसमें दस्तावेजों की जालसाजी, नियमों की अनदेखी और संभवतः अंदरूनी मिलीभगत शामिल हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में अब धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में नया मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का दावा है कि सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है और जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सिर्फ एक पुराने केस की फाइल खोलने भर का नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे सिस्टम के भीतर रहकर भी कानून को मोड़ा जा सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच एजेंसियां इस बार सच को पूरी तरह सामने ला पाएंगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
15 साल पुरानी साजिश का नया चेहरा: हत्या केस के बाद अब लाइसेंसी बंदूक पर फर्जीवाड़े का विस्फोट


