की चोरी, आरोपी रविंद्र गिरि गिरफ्तार
लखनऊ। राजधानी में जीएसटी चोरी का बड़ा खेल उजागर हुआ है, जहां 1.30 करोड़ रुपये के टैक्स घोटाले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई रहीमाबाद पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने की, जिसने महीनों से चल रही जांच के बाद इस संगठित वित्तीय अपराध का पर्दाफाश किया।
पकड़ा गया आरोपी रविंद्र गिरि, मूल रूप से लखीमपुर का निवासी है, जो लंबे समय से फर्जी फर्मों का नेटवर्क खड़ा कर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने कई शेल कंपनियां बनाईं और इनके जरिए फर्जी बिलिंग कर इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत फायदा उठाया।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घोटाले में कागजों पर कारोबार दिखाकर भारी मात्रा में टैक्स रिफंड क्लेम किया गया, जबकि वास्तविक लेनदेन या तो हुआ ही नहीं या बेहद सीमित था। साइबर सेल ने डिजिटल ट्रेल खंगालते हुए बैंक खातों, जीएसटी रिटर्न और फर्जी दस्तावेजों के जरिए पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय होने की आशंका है। कई अन्य संदिग्ध फर्मों और सहयोगियों की पहचान की जा रही है, जिन पर जल्द कार्रवाई हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, देशभर में फर्जी आईटीसी के जरिए जीएसटी चोरी के मामलों में तेजी आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग घोटाले पकड़े गए हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश भी प्रमुख राज्यों में शामिल है।
यह गिरफ्तारी सिर्फ एक केस का खुलासा नहीं, बल्कि उस समानांतर “पेपर इकोनॉमी” की झलक है, जहां कागजों पर कारोबार खड़ा कर सरकारी खजाने को लूटा जा रहा है।
1.30 करोड़ का GST घोटाला: फर्जी फर्मों का जाल बिछाकर टैक्स


