फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर 2 से 3 फीट पानी, प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद किया; 14 हजार परिवार प्रभावित
फर्रुखाबाद। गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर से जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाकों में पानी फैल गया है और तीनों तहसील क्षेत्रों के 63 गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। करीब 14 हजार परिवार बाढ़ की चपेट में हैं।
गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के चलते कई इलाकों में ग्रामीणों के सामने आवागमन और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। शनिवार को जिले में गंगा का जलस्तर 137.05 मीटर दर्ज किया गया था, जो खतरे के निशान 137.10 मीटर से महज पांच सेंटीमीटर नीचे था।
बाढ़ का पानी फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग तक पहुंच गया है। मार्ग पर करीब 2 से 3 फीट पानी बहने के कारण प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद कर दिया है। लोगों को सुरक्षित मार्गों से जाने की सलाह दी जा रही है।
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ कटान का खतरा भी बढ़ गया है। शमसाबाद क्षेत्र के समैचीपुर चितार गांव में गंगा के तेज कटान से तीन मकानों के नदी में समा जाने की सूचना सामने आई है।
बाढ़ के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू किया है। करीब 600 लोगों को बाढ़ शरणालयों में पहुंचाए जाने की जानकारी है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव की व्यवस्था की जा रही है।
गंगा के साथ रामगंगा के बढ़ते जलस्तर ने भी ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ाई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी कर रहा है और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार 22 अगस्त को नरौरा बैराज से डाउनस्ट्रीम में 1,34,584 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। इतनी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने का असर गंगा के निचले क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
बाढ़ और कटान की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की चुनौती लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों की सुरक्षा, आवागमन बहाल रखने और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने पर अब पूरा जोर है।


