– 594 किमी 6 लेन परियोजना से यूपी को ‘नई लाइफलाइन’ का दावा
हरदोई। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार दोपहर बहुप्रतीक्षित 594 किलोमीटर लंबे 6 लेन गंगा एक्सप्रेसवे का रिमोट दबाकर लोकार्पण किया। राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना के उद्घाटन ने उत्तर प्रदेश की विकास राजनीति को नई धार देते हुए बड़े सियासी संदेश भी छोड़े। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि “हजारों वर्षों से मां गंगा देश की जीवन रेखा रही है, उसी तरह यह एक्सप्रेसवे आधुनिक उत्तर प्रदेश की विकास लाइफलाइन बनेगा।” उन्होंने इसे “मां गंगा का आशीर्वाद” बताते हुए दावा किया कि इससे प्रदेश में आवागमन की गति और आर्थिक गतिविधियों में ऐतिहासिक तेजी आएगी।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पश्चिम बंगाल में जारी मतदान का उल्लेख करते हुए कहा कि “67 दशकों में जो नहीं हुआ, वह इस बार देखने को मिल रहा है—जनता भयमुक्त होकर मतदान कर रही है, यह मजबूत लोकतंत्र का संकेत है।” इस टिप्पणी को राष्ट्रीय राजनीति के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा एक्सप्रेसवे को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की “रीढ़” करार देते हुए कहा कि “देवी सुरसरि गंगा के समानांतर यह परियोजना उत्तर प्रदेश को नई आर्थिक ऊंचाई देगी।” उन्होंने हरदोई को धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए इसे “भक्त प्रह्लाद की पावन भूमि” बताया।
लोकार्पण समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल , उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्या , केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी तथा प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मंच पर नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया।
करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ते हुए औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी, निवेश बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
हालांकि, भव्य उद्घाटन के बीच कई जमीनी सवाल भी उठ रहे हैं क्या यह परियोजना किसानों की आय बढ़ाने में कारगर साबित होगी, क्या प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा मिला, और क्या यह विकास आम जनता तक समान रूप से पहुंचेगा?हरदोई में हुआ यह आयोजन जहां विकास की नई तस्वीर पेश करता है, वहीं प्रदेश की सियासत में भी नए संकेत दे गया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि यह “लाइफलाइन” जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।


