नई दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सोमवार को सरकार और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अपने आवास पर संगठन के प्रतिनिधियों सौरव दास और आशुतोष रांका से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की।
करीब दस मिनट चली पहली बैठक के दौरान नड्डा ने आंदोलनकारियों से अपनी मांगें लिखित रूप में देने को कहा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने विस्तृत ज्ञापन तैयार कर शाम लगभग चार बजे केंद्रीय मंत्री को सौंप दिया। नड्डा ने सोशल मीडिया के माध्यम से पुष्टि करते हुए बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आने के बाद सरकार ने तत्काल संवाद शुरू किया और लिखित ज्ञापन प्राप्त कर लिया है।
CJP ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग शामिल है।
संगठन का आरोप है कि नीट-2026 पेपर लीक, सीबीएसई परिणामों में तकनीकी गड़बड़ी, सीयूईटी परीक्षा में देरी और अन्य परीक्षा संबंधी अव्यवस्थाओं ने देश के युवाओं का शिक्षा व्यवस्था से भरोसा कमजोर किया है। CJP का कहना है कि इन मामलों में शिक्षा मंत्रालय प्रभावी सुधार लागू करने में विफल रहा है।
बैठक के बाद संगठन के नेताओं ने कहा कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन जब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सूत्रों के अनुसार सरकार भी आंदोलन को लेकर अंदरूनी स्तर पर मंथन कर रही है और जल्द ही औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
गौरतलब है कि आंदोलन की शुरुआत 6 जून से हुई थी। 20 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है, जबकि 28 जून से सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर हैं। सोमवार को हुई वार्ता को आंदोलन और सरकार के बीच संवाद की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


