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Wednesday, May 6, 2026

ज़मीन पर दिख रहा ‘जीरो टॉलरेंस’ का असर

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– डीएम डॉ. अंकुर लाठर और एसपी आरती सिंह की जोड़ी बनी सख्त प्रशासन की पहचान
फर्रुखाबाद। जनपद में लंबे समय बाद प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही का ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है, जहां सरकारी तंत्र पर पकड़ भी दिखाई दे रही है और कार्रवाई का असर भी ज़मीन पर उतरता नजर आ रहा है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की सक्रिय कार्यशैली ने जिले में “जीरो टॉलरेंस” नीति को नई धार दे दी है।
चाहे भूमाफियाओं पर कार्रवाई हो, भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन, अवैध कब्जों पर बुलडोजर, पुलिस विभाग में लगातार फेरबदल, अपराधियों पर गैंगस्टर और गुंडा एक्ट की कार्रवाई या फिर सरकारी दफ्तरों में जवाबदेही तय करने की मुहिम प्रशासन की हर कार्रवाई अब सीधे संदेश दे रही है कि लापरवाही और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं होगी।
हाल ही में तहसील स्तर पर कई कर्मचारियों के निलंबन, पुलिस विभाग में निरीक्षक और उपनिरीक्षकों की तैनाती में बदलाव तथा संवेदनशील मामलों में तेज कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि डीएम और एसपी की जोड़ी जिले में प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह कसने में जुटी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक डीएम डॉ. अंकुर लाठर लगातार विभागीय समीक्षा बैठकों में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे रहे हैं कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही सामने आई तो सीधे कार्रवाई होगी। वहीं एसपी आरती सिंह ने कानून व्यवस्था को लेकर थानों की जवाबदेही बढ़ाई है और फील्ड पुलिसिंग पर विशेष फोकस किया है।
जनपद में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस की सक्रियता भी बढ़ी है। हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी, रात्रि गश्त, महिला सुरक्षा अभियान और थाना स्तर पर त्वरित सुनवाई से आम लोगों में भरोसा बढ़ा है। वहीं प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अब “सिफारिश संस्कृति” कमजोर पड़ रही है और कामकाज प्रदर्शन के आधार पर तय हो रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी डीएम-एसपी की इस जोड़ी को लेकर चर्चा है। लोगों का कहना है कि फर्रुखाबाद में पहली बार प्रशासनिक मशीनरी इतनी सक्रिय और समन्वित दिखाई दे रही है, जहां अफसर केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं बल्कि फील्ड में उतरकर व्यवस्था सुधारने में जुटे हैं।
जनता के बीच यह संदेश तेजी से जा रहा है कि जिले में अब “जीरो टॉलरेंस” केवल सरकारी नारा नहीं, बल्कि कार्रवाई की वास्तविक नीति बन चुका है।

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