फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत टीबी मरीजों को बेहतर उपचार के साथ संवेदनशील एवं प्रभावी सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला क्षय रोग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए दो दिवसीय काउंसलिंग एवं सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अजय यादव तथा उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुनय कुटार सहित टीबी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई एवं संबंधित विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। पूरे भारत में एनटीईपी के विभिन्न स्टाफ कैडर के लिए चलाए जा रहे इस प्रशिक्षण में DPC, DPTC, PPM Coordinator, STS, STLS सहित एनटीईपी के अन्य संबंधित कैडर के कर्मचारियों को शामिल किया गया है।
प्रशिक्षण के दौरान स्टेट कैपेसिटी बिल्डिंग कोऑर्डिनेटर सुनीता यादव एवं यशपाल सिंह राजपूत ने एनटीईपी स्टाफ को काउंसलिंग और सॉफ्ट स्किल से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों की काउंसलिंग क्षमता को विकसित एवं मजबूत करना है, ताकि वे टीबी मरीजों के साथ प्रभावी, सम्मानजनक एवं संवेदनशील संवाद स्थापित कर सकें।
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि रोगी की आधी बीमारी अच्छे व्यवहार से ही ठीक हो जाती है। टीबी मरीजों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जिससे मरीज अपनी समस्याओं और आवश्यकताओं को बिना किसी संकोच के साझा कर सके। मरीज की बात ध्यान से सुनना, उसकी परिस्थितियों को समझना और उसे उपचार के लिए लगातार प्रोत्साहित करना टीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रशिक्षण में कर्मचारियों को मरीज की समस्याओं एवं आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने, प्रभावी संवाद स्थापित करने तथा उपचार के प्रति नियमितता (Treatment Adherence) बढ़ाने के तरीके बताए गए। अधिकारियों ने कहा कि कई बार मरीज उपचार के दौरान दवा लेना छोड़ देते हैं या नियमित फॉलोअप नहीं कराते। ऐसे मामलों में स्वास्थ्यकर्मी का संवेदनशील व्यवहार और प्रभावी काउंसलिंग मरीज को उपचार से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इसके साथ ही एनटीईपी स्टाफ की क्षमता इस दिशा में भी मजबूत की जा रही है कि वे टीबी मरीजों को सामाजिक कल्याण योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार से जुड़ी अन्य आवश्यक सहायता से प्रभावी रूप से जोड़ सकें। इससे मरीज को केवल चिकित्सा सुविधा ही नहीं, बल्कि उसकी जरूरत के अनुसार अन्य सहयोग भी उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि टीबी उन्मूलन केवल दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज का भरोसा जीतना, उसे उपचार से जोड़े रखना और जरूरत के अनुसार सामाजिक सहायता तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के माध्यम से एनटीईपी स्टाफ को रोगी-केंद्रित देखभाल के लिए और अधिक सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
टीबी मरीजों से संवेदनशील संवाद और बेहतर काउंसलिंग पर जोर, एनटीईपी स्टाफ को दिया सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण—सीएमओ


