फर्रुखाबाद। जिले की ग्राम पंचायतों में हैंडपंप रिबोर और मरम्मत के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव और पूर्व प्रधान व मौजूदा प्रशासक की मिलीभगत से कई गांवों में कागजों पर काम दिखाकर भुगतान करा दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ गांवों में जितने हैंडपंप लगे भी नहीं हैं, उससे अधिक संख्या में मरम्मत का भुगतान निकालने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
कई स्थानों पर चलते हुए हैंडपंपों को खराब दर्शाकर मरम्मत के नाम पर सरकारी धन निकाल लिया गया, जबकि मौके पर वास्तविक काम हुआ ही नहीं। रिबोर और मरम्मत के नाम पर लगातार भुगतान होने से सरकारी धन की बंदरबांट का अंदेशा जताया जा रहा है।
आरोप यह भी है कि बिना काम कराए निकाले गए भुगतान में कथित तौर पर प्रशासक और सचिव के बीच 60:40 के हिस्से का खेल चलता है। यदि ग्राम पंचायतवार अभिलेखों और मौके पर हैंडपंपों की भौतिक स्थिति का सत्यापन कराया जाए तो अनियमितताओं की बड़ी तस्वीर सामने आ सकती है।
मामले की जानकारी जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश चौरसिया को भी दी गई है। उन्हें कई ऐसी ग्राम पंचायतों के बारे में बताया गया है, जहां हैंडपंप मरम्मत और रिबोर के नाम पर गड़बड़ी के आरोप हैं। डीपीआरओ ने मामले की जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी अभिलेखों के आधार पर जांच करेंगे या गांव-गांव पहुंचकर हैंडपंपों की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा। निष्पक्ष जांच हुई तो सरकारी धन के कथित खेल में शामिल लोगों की भूमिका उजागर हो सकती है।


