– करीब 45 वर्षों की साधना और अनुभव का परिणाम
– नई दिल्ली समेत कई राज्यों से उपचार के लिए पहुंचते हैं लोग
– उप्र गौरव सम्मान के लिये सरकार ने जिले से माँगा प्रस्ताव
फर्रुखाबाद। आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा परंपरा में नाड़ी परीक्षण का विशेष महत्व माना जाता है। इसी पारंपरिक ज्ञान को करीब 45 वर्षों से साधना, अध्ययन और अनुभव के साथ आगे बढ़ा रहे डॉ. ए.के. कुलश्रेष्ठ ने नाड़ी चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। देश के विभिन्न हिस्सों से लोग उनके पास नाड़ी परीक्षण और आयुर्वेदिक परामर्श के लिए पहुंचते हैं।
नई दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों तक से आने वाले मरीजों के बीच डॉ. कुलश्रेष्ठ की पहचान एक अनुभवी नाड़ी विशेषज्ञ के रूप में बनी है। उनके उपचार से जुड़े लोगों का कहना है कि वह नाड़ी परीक्षण के आधार पर शरीर की विभिन्न स्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी असंतुलन को समझने का प्रयास करते हैं और उसके अनुरूप आयुर्वेदिक उपचार की सलाह देते हैं।
45 साल का अनुभव बना सबसे बड़ी पहचान
डॉ. कुलश्रेष्ठ की चिकित्सा यात्रा करीब साढ़े चार दशक पुरानी है। लंबे समय से नाड़ी परीक्षण और आयुर्वेद के क्षेत्र में काम करने के कारण उनके पास आने वाले मरीज उनके अनुभव को उनकी सबसे बड़ी विशेषता मानते हैं। कई वरिष्ठ और प्रबुद्ध लोगों ने लंबे समय तक उनसे उपचार और परामर्श लिया है।
उनके पुराने मरीजों का कहना है कि नाड़ी परीक्षण के दौरान डॉ. कुलश्रेष्ठ शरीर की विभिन्न कमियों और संभावित स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में संकेत बताते हैं। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार आयुर्वेदिक उपचार की दिशा तय की जाती है।
डॉ. कुलश्रेष्ठ की पहचान केवल आम मरीजों तक सीमित नहीं है। उनके बारे में बताया जाता है कि एटा की जिलाधिकारी एम. अरुणमोली और फर्रुखाबाद के पूर्व जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह भी उनसे उपचार ले चुके हैं। विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोग भी उनके नाड़ी ज्ञान पर भरोसा जताते रहे हैं।
यही वजह है कि उनके पास आने वाले मरीजों का दायरा लगातार व्यापक रहा है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे शहरों और राज्यों से भी लोग उनके अनुभव का लाभ लेने पहुंचते हैं।
डॉ. कुलश्रेष्ठ की कार्यशैली में नाड़ी परीक्षण को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मरीज की नाड़ी देखकर वह स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में अपना आकलन बताते हैं। उनके यहां आने वाले कई मरीजों का दावा है कि नाड़ी परीक्षण के दौरान बताई गई स्वास्थ्य संबंधी बातों के बाद जब उन्होंने आधुनिक चिकित्सकीय जांच कराई तो उन्हें संबंधित समस्या के बारे में जानकारी मिली।
हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर या जटिल बीमारी में आधुनिक जांचों, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक उपचार को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। नाड़ी परीक्षण आयुर्वेद की पारंपरिक पद्धति है और इसके आधार पर किसी बीमारी की अंतिम पुष्टि के लिए आवश्यकता पड़ने पर मानक चिकित्सकीय जांच जरूरी रहती है।
करीब 45 वर्षों के अनुभव, लगातार अध्ययन और मरीजों के बीच बनी विश्वसनीयता के कारण डॉ. ए.के. कुलश्रेष्ठ को उनके समर्थक देश के प्रमुख नाड़ी विशेषज्ञों में एक अलग स्थान रखने वाला चिकित्सक मानते हैं। नई दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों से लोगों का उनके पास पहुंचना उनकी लोकप्रियता और वर्षों से बने भरोसे को दर्शाता है।
आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक दौर में भी जीवित रखने वाले चिकित्सकों में डॉ. कुलश्रेष्ठ का नाम उनके मरीजों और शुभचिंतकों के बीच विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। नाड़ी की सूक्ष्म जानकारी, दशकों का अनुभव और आयुर्वेदिक उपचार,इन्हीं तीन आधारों पर उन्होंने चिकित्सा जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है।


