नई दिल्ली। भारतीय मुद्रा बाजार में बुधवार को भी रुपए की गिरावट का सिलसिला जारी रहा और डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार नौवें कारोबारी दिन नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में कारोबार शुरू होते ही रुपया 19 पैसे टूटकर 96.89 प्रति डॉलर पर खुला और कुछ ही देर में 96.9575 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। सुबह करीब 10 बजे के आसपास रुपया मामूली सुधार के साथ 96.8575 पर कारोबार करता दिखाई दिया।
बीते ढाई महीनों में भारतीय रुपया करीब 6 प्रतिशत तक कमजोर हो चुका है, जिससे यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है। मंगलवार को भी रुपया 50 पैसे टूटकर 96.70 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार गिरते रुपए ने बाजार और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपए पर दबाव बढ़ा दिया है। फरवरी के अंत से शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के चलते तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई की चिंताओं के बीच अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ है। डॉलर इंडेक्स छह सप्ताह के उच्चतम स्तर 99.4 के करीब पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से ईरान को दी गई चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता और बढ़ गई है।
विदेशी निवेशकों ने हाल के महीनों में भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से 22 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है। इससे भारत के भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बाजार जानकारों का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो रुपया जल्द ही 97 प्रति डॉलर का स्तर भी पार कर सकता है।
रुपए की कमजोरी का असर अब आम लोगों पर भी दिखने लगा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है, जबकि विदेश यात्रा, आयातित सामान और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं। पिछले एक सप्ताह में पेट्रोल और डीजल के दाम दो बार बढ़ चुके हैं और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद दोनों ईंधनों की कीमतों में करीब 4-4 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती, तब तक भारतीय रुपए पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के सामने रुपए को संभालने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।


