– सेना की तीन यूनिट, बंद पार्सल ऑफिस और रणनीतिक महत्व का हवाला
– केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील
– कानपुर व फर्रुखाबाद सांसद से मांग
फर्रुखाबाद/फतेहगढ़। ऐतिहासिक और सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण फतेहगढ़ को अब “कैंट” का दर्जा दिलाने की मांग जोर पकड़ रही है। स्थानीय बुद्धिजीवियों, पूर्व सैनिकों और पत्रकारों ने संयुक्त रूप से केंद्र सरकार से अपील की है कि फतेहगढ़ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘फतेहगढ़ कैंट’ किया जाए, ताकि क्षेत्र की पहचान और सुविधाएं दोनों सुदृढ़ हों।
मांग रखने वालों का कहना है कि फतेहगढ़ सिर्फ एक सामान्य कस्बा नहीं, बल्कि यहां राजपूत रेजिमेंट, सिख लाइट रेजिमेंट और 114 टीए (टेरिटोरियल आर्मी) जैसी महत्वपूर्ण सैन्य इकाइयां स्थापित हैं। इनमें राजपूत रेजिमेंट देश की सबसे बड़ी और गौरवशाली रेजिमेंट्स में गिनी जाती है, जिससे फतेहगढ़ का राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्व और बढ़ जाता है।
इस मुद्दे को पहले भी उठाया जा चुका है। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कटियार, जिनका गृह जनपद फतेहगढ़ है, से भी उनके कार्यकाल के दौरान इस मांग को प्रमुखता से रखा था। अब उनके रिटायर होने के बाद स्थानीय स्तर पर फिर से यह आवाज तेज हो गई है।
मांग के पीछे एक बड़ा कारण रेलवे सुविधाओं की गिरती स्थिति भी है। फतेहगढ़ रेलवे स्टेशन पर पार्सल ऑफिस बंद हो चुका है, जिससे व्यापार और छोटे कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पहले रोजाना सैकड़ों क्विंटल सामान पार्सल के जरिए आता-जाता था, लेकिन अब यह सुविधा खत्म होने से परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ गए हैं।
वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर कटियार ने स्थानीय गणमान्य लोगों के साथ मिलकर इस मुद्दे को उठाया है और सांसद मुकेश राजपूत एवं सांसद कानपुर रमेश अवस्थी से भी इस पर पहल करने की मांग की है। उनका कहना है कि “जब देश के कई सैन्य क्षेत्रों के रेलवे स्टेशनों को ‘कैंट’ का दर्जा मिला है, तो फतेहगढ़ को इससे वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।”


