माइनस बैलेंस पर बिजली कटने की एक सप्ताह से पंद्रह दिन हो,
सभी प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड मोड़ में बदला जाये
फर्रुखाबाद। बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े प्रीपेड मीटर सिस्टम को लेकर असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। लोकतंत्र सेनानी संगठन की बैठक में इस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाने की जोरदार मांग उठाई गई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्रीपेड मीटर लागू करने से पहले इसे सीमित उपभोक्ताओं पर परीक्षण के रूप में लागू किया जाना चाहिए था और उनकी संतुष्टि के बाद ही इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाना उचित होता।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि प्रीपेड मीटर रिचार्ज की प्रक्रिया को मोबाइल रिचार्ज की तरह सरल और स्पष्ट बनाया जाए। उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए कि 100 रुपये, 200 रुपये, 500 रुपये या 1000 रुपये के रिचार्ज पर उन्हें कितनी यूनिट बिजली प्राप्त होगी। इससे उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति समाप्त होगी और वे अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर योजना बना सकेंगे।
संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि ऐसी पारदर्शी व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है, तो वर्तमान प्रीपेड मीटरों को तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड मोड में परिवर्तित किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके। इसके साथ ही बकाया राशि की एक सीमा निर्धारित करने की मांग भी उठाई गई। प्रस्ताव रखा गया कि 3000 से 5000 रुपये तक की बकाया राशि होने तक बिजली कनेक्शन न काटा जाए।
इसके अलावा, बिजली कनेक्शन काटने की वर्तमान समय-सीमा को तीन दिन से बढ़ाकर कम से कम एक सप्ताह या 15 दिन किए जाने की मांग भी की गई, जिससे उपभोक्ताओं को भुगतान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
बैठक में इस संबंध में मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री को मांग पत्र भेजने का निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल को भुगतना पड़ सकता है। बैठक की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष चंद्रपाल वर्मा ने की। इस अवसर पर राम मुरारी शुक्ला सहित संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।


