पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक बदली करवट, पेड़ और होर्डिंग गिरने से नुकसान; खेतों में खड़ी फसलें भी प्रभावित, शनिवार को बूंदाबांदी के आसार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ली। प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी के साथ बारिश हुई और ओले गिरे। खराब मौसम के दौरान हुए हादसों में चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में संभल और कासगंज का एक-एक व्यक्ति तथा फिरोजाबाद के दो लोग शामिल हैं। तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ और होर्डिंग गिर गए, जबकि कुछ स्थानों पर मकानों को भी नुकसान पहुंचा। मौसम के इस बदलाव का असर जनजीवन के साथ-साथ खेती-किसानी पर भी देखने को मिला।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में मौसम का प्रभाव अधिक रहा। अचानक तेज हवाएं चलने और बारिश शुरू होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर पेड़ गिरने से नुकसान हुआ, वहीं होर्डिंग गिरने की घटनाएं भी सामने आईं। खराब मौसम के दौरान हुए हादसों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए रास्तों पर गिरे पेड़ों तथा अन्य अवरोधों को हटाना भी चुनौती बना।
आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। ओले गिरने से फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, फसल क्षति का वास्तविक आकलन संबंधित क्षेत्रों में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। किसानों को मौसम में अचानक बदलाव के कारण अपनी उपज और खेतों की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। बरेली में भी ओले गिरने की सूचना है। दूसरी ओर, अवध और पूर्वांचल के जिलों में बादलों की आवाजाही बनी रही। मौसम के अलग-अलग रूपों के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में लोगों को गर्मी से राहत मिली, लेकिन तेज हवाओं और ओलावृष्टि से हुए नुकसान ने परेशानी भी बढ़ाई।
मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी होने की संभावना है। मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। तेज हवा चलने के दौरान पेड़ों, कमजोर ढांचों और होर्डिंग के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए। वाहन चालकों को भी खराब मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए।
लगातार बदल रहे मौसम के बीच किसानों की नजर अब आगामी मौसम पूर्वानुमान और फसलों को हुए नुकसान के आकलन पर है। आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान की स्थिति सामने आने के बाद ही कृषि पर इसके कुल प्रभाव का पता चल सकेगा।


