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Tuesday, May 26, 2026

दिल्ली विश्वविद्यालय में बकरीद की छुट्टी पर परीक्षा को लेकर विवाद, दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला

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नई दिल्ली: बकरीद के दिन परीक्षा आयोजित करने के दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के फैसले को चुनौती देते हुए एक कानून के छात्र ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने इसे धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताया याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने इसी तारीख को ईद-उल-जुहा (Eid al-Adha) की आधिकारिक छुट्टी को आगे बढ़ाया था, इसके बावजूद परीक्षा आयोजित करना छात्रों के अधिकारों के खिलाफ है।

छात्र ने दलील दी है कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता), 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और 29 (अल्पसंख्यक अधिकार) का उल्लंघन करता है। याचिका में मांग की गई है कि परीक्षा कार्यक्रम को संशोधित किया जाए या पुनर्निर्धारित तिथि तय की जाए।दिल्ली विश्वविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) के लॉ संकाय के एकीकृत विधि पाठ्यक्रम (छठे सेमेस्टर) के एक छात्र ने परीक्षा कार्यक्रम को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की है।

याचिकाकर्ता ने विश्वविद्यालय के 25 मई 2026 के कार्यालय ज्ञापन को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा ईद-उल-जुहा की आधिकारिक छुट्टी को 27.05.2026 से बढ़ाकर 28.05.2026 किए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय ने उसी दिन परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। छात्र ने अपने आवेदन में इस फैसले को “मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक” बताया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह निर्णय छात्रों के धार्मिक अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण का उल्लंघन करता है।

ईद-उल-जुहा (बकरीद) को लेकर केंद्र सरकार ने गुरुवार, 28 मई 2026 को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने भी इसी दिन को आधिकारिक छुट्टी के रूप में मान्यता दी है। जानकारी के अनुसार, पहले यह अवकाश 27 मई 2026 को निर्धारित किया गया था, जिसे संशोधित कर अब 28 मई कर दिया गया है। संशोधित आदेश के बाद देशभर में इस दिन सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालय, राज्य प्रशासनिक कार्यालय और बैंक बंद रहेंगे।

अनुच्छेद 14,21,25, और 29 में क्या है

अनुच्छेद 14: समानता का अधिकार

हर व्यक्ति कानून की नजर में समान है ,राज्य (सरकार) किसी के साथ मनमाना या भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं कर सकता .जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान आदि के आधार पर अनुचित भेदभाव वर्जित है

अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार

यह सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकारों में से एक है किसी भी व्यक्ति को जीने का अधिकार है ,इसमें केवल “जीवित रहना” नहीं, बल्कि गरिमा के साथ जीवन जीना भी शामिल है ,बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी की स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती

अनुच्छेद 25: धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता ,धर्म का पालन (practice) करने की आज़ादी ,धर्म का प्रचार (propagation) करने की अनुमति ,लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन होता है

अनुच्छेद 29: सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार

हर नागरिक या समूह को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा बचाने का अधिकार, अल्पसंख्यकों को अपनी पहचान बनाए रखने का संरक्षण ,शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश में भेदभाव से सुरक्षा भी इससे जुड़ी है

 

 

 

 

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