नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक विवाद गुरुवार को और तेज हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन किया जाएगा और इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा। दीपके ने एसआईआर के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
दीपके ने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए लोगों के मतदान के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपनी सरकार चुनने का अधिकार है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में यह तय करने की कोशिश हो रही है कि कौन मतदान करेगा और कौन नहीं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद विभिन्न राज्यों में हुए राजनीतिक बदलावों का हवाला देते हुए विपक्षी नेताओं को कमजोर करने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया। हालांकि, ये सभी दावे और आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं।
इस विवाद के बीच द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट भी चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में बताया गया कि ये आपत्तियां मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, प्रपत्र-6 और मतदाता आंकड़ों से जुड़े मुद्दों पर थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी गई थीं।
चुनाव आयोग ने इन दावों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और आयोग के फैसलों में सभी सदस्यों की सहमति रही है। आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और एसआईआर की प्रक्रिया का भी बचाव किया। एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब यह मुद्दा चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।


