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Monday, June 1, 2026

संस्कार भारती की कार्यशाला में निखर रहा बच्चों का हुनर

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क्रासर
सिलाई से आत्मनिर्भर बन रहीं छात्राएं
फर्रुखाबाद।कला एवं साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय संस्था संस्कार भारती अब बच्चों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा नहीं, बल्कि 10 अलग-अलग विधाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। संस्था की सिलाई प्रशिक्षण कार्यशाला में बच्चियां रोजगारपरक कौशल सीखकर अपने भविष्य को संवार रही हैं।
कार्यशाला में छात्राओं को ब्लाउज, कमीज़, फैशनेबल फ्रॉक और फ्रॉक सूट की कटिंग से लेकर पूरी सिलाई प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चियों को छोटे स्तर पर भी अपना काम शुरू करने योग्य बनाना है।
सिलाई कार्यशाला का संचालन प्रशिक्षिका पारुल सैनी और पद्मावती त्रिवेदी मिलकर कर रही हैं। दोनों के मार्गदर्शन में लगभग 67 बच्चियां सिलाई कला सीख रही हैं। प्रशिक्षिकाओं का कहना है कि यह कार्यशाला बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
कार्यशाला में प्रशिक्षण ले रही महिमा, शशि, जोया, उजमा, स्वाति, वर्षा सहित अन्य छात्राओं ने बताया कि वे संस्कार भारती की इस कार्यशाला का सालभर इंतजार करती हैं। छात्राओं का कहना है कि यहां मिलने वाला प्रशिक्षण उन्हें न केवल सिलाई में निपुण बना रहा है, बल्कि भविष्य में अपने पैरों पर खड़ा होने का आत्मविश्वास भी दे रहा है।
संस्कार भारती केवल सिलाई तक सीमित नहीं है। संस्था बच्चों को कत्थक, मेहंदी, सौंदर्य कला, चित्रकला, डिजाइनर सिलाई, हस्तकला, ढोलक, लोक नृत्य कला और मूर्ति कला जैसी 10 विधाओं में भी प्रशिक्षण दे रही है। इससे बच्चे अपनी रुचि के अनुसार कला सीखकर हुनर को रोजगार बना सकते हैं।
कार्यशाला की व्यवस्था में सुरेंद्र पांडेय, अनुराग अग्रवाल, गौरव मिश्रा बंटी, अरविंद दीक्षित, समरेंद्र शुक्ला, रवींद्र भदौरिया, कुलभूषण श्रीवास्तव, कुलदीप श्रीवास्तव सहित कई पदाधिकारी सक्रिय सहयोग दे रहे हैं। संस्था का मानना है कि इन कार्यशालाओं से बच्चे शिक्षा के साथ-साथ कौशल भी अर्जित कर भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

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