शरद कटियार
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास द्वारा पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करना महज प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राम मंदिर की बढ़ती जिम्मेदारियों के अनुरूप व्यवस्था को नया स्वरूप देने का संकेत है। मंदिर अब केवल आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा, चढ़ावे, निर्माण और वित्तीय प्रबंधन जैसी विशाल व्यवस्थाओं का केंद्र बन चुका है।
पूर्व एयर मार्शल मिश्रा का करीब चार दशक का सैन्य अनुभव इस नई जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सेना की अनुशासनप्रिय कार्यशैली और बड़े स्तर पर व्यवस्थाओं को संचालित करने का अनुभव मंदिर प्रशासन में भी उपयोगी होगा। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के साथ व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने की होगी।
वहीं गोविंद देव गिरि को महासचिव की जिम्मेदारी मिलना भी महत्वपूर्ण है। धार्मिक और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले गिरि की भूमिका अब पहले से अधिक व्यापक होगी। खासकर ऐसे समय में जब मंदिर के चढ़ावे और वित्तीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं, न्यास की जिम्मेदारी केवल धन का प्रबंधन करना नहीं, बल्कि हर रुपये के उपयोग को लेकर विश्वास कायम करना भी है।
तीन नए न्यासियों की नियुक्ति और पहली महिला न्यासी का शामिल होना भी व्यवस्था को व्यापक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कदम माना जा सकता है। लेकिन इन बदलावों की वास्तविक सफलता नियुक्तियों से नहीं, बल्कि उनके परिणामों से तय होगी।
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इसलिए यहां प्रशासनिक चूक का असर सामान्य संस्थानों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक होता है। चढ़ावे से जुड़े विवादों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मंदिर की व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
न्यास के पास हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति और मंदिर को मिले सोने-चांदी जैसे दान की जानकारी सामने आती रही है। इतनी बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी के बीच नियमित ऑडिट, मजबूत निगरानी व्यवस्था और सार्वजनिक स्तर पर स्पष्ट जानकारी विश्वास को और मजबूत कर सकती है।
राम मंदिर का निर्माण केवल पत्थरों से नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और सहयोग से हुआ है। इसलिए इसकी व्यवस्था भी ऐसी होनी चाहिए जिसमें श्रद्धालु न केवल भगवान के दर्शन कर सकें, बल्कि यह भरोसा भी रख सकें कि उनकी आस्था से मिले धन और संसाधनों का इस्तेमाल पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ हो रहा है।
नया प्रशासनिक ढांचा तभी सफल माना जाएगा, जब राम मंदिर की भव्यता के साथ उसकी व्यवस्था भी अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल बने।


